Media24Media.com: युवाओं में वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा दे रही सरकार, ‘युविका’ कार्यक्रम से मिल रहा बड़ा अवसर: डॉ. जितेंद्र सिंह

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युवाओं में वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा दे रही सरकार, ‘युविका’ कार्यक्रम से मिल रहा बड़ा अवसर: डॉ. जितेंद्र सिंह

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नई दिल्ली- केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान, पीएमओ, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज कहा कि सरकार ‘युवा वैज्ञानिक कार्यक्रम’ (YUVIKA) जैसे समावेशी और भविष्य उन्मुख प्रयासों के माध्यम से स्कूली छात्रों में वैज्ञानिक सोच को व्यवस्थित रूप से विकसित कर रही है।

राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान पूरक प्रश्नों के जवाब में उन्होंने कार्यक्रम की संरचना, पहुंच और प्रभाव पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वर्ष 2019 में शुरू किया गया ‘युविका’ कार्यक्रम कक्षा 9 के छात्रों को शुरुआती स्तर पर ही अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी से परिचित कराने के उद्देश्य से बनाया गया है।

डॉ. सिंह ने कहा कि इस कार्यक्रम में हर राज्य से 10 और प्रत्येक केंद्र शासित प्रदेश से 8 छात्रों का चयन किया जाता है, जिससे क्षेत्रीय संतुलन सुनिश्चित होता है। उन्होंने यह भी बताया कि चयन प्रक्रिया में ग्रामीण छात्रों को विशेष प्राथमिकता दी जाती है, जिसमें पंचायत स्तर के स्कूलों के छात्रों के लिए 15% वरीयता शामिल है।

चयन प्रक्रिया में क्विज़, विज्ञान मेलों, ओलंपियाड और एनएसएस व स्काउट्स जैसी सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में भागीदारी को भी शामिल किया जाता है, जिससे छात्रों का समग्र मूल्यांकन किया जा सके।

अब तक इस कार्यक्रम के पांच संस्करणों में कुल 1,320 छात्र लाभान्वित हो चुके हैं। कोविड-19 महामारी के कारण वर्ष 2020 और 2021 में यह कार्यक्रम आयोजित नहीं किया जा सका था। हाल के वर्षों में हर साल करीब 350 छात्रों का चयन किया जा रहा है, जो इसके बढ़ते प्रभाव को दर्शाता है।

यह एक माह का आवासीय कार्यक्रम होता है, जो ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान आयोजित किया जाता है। इसमें चयनित छात्रों को इसरो के प्रमुख केंद्रों जैसे सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (श्रीहरिकोटा), विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (तिरुवनंतपुरम) और स्पेस एप्लीकेशंस सेंटर (अहमदाबाद) में प्रशिक्षण दिया जाता है। साथ ही महेंद्रगिरी (तमिलनाडु) और जोधपुर (राजस्थान) में दो नए केंद्र भी जोड़े जा रहे हैं।

डॉ. सिंह ने बताया कि इस कार्यक्रम में भागीदारी बढ़ाने के लिए देशभर में क्विज़ प्रतियोगिताएं, विज्ञान मेले और शैक्षणिक गतिविधियां आयोजित की जाती हैं, जिससे ग्रामीण और वंचित वर्ग के छात्रों तक इसकी पहुंच सुनिश्चित हो सके।

उन्होंने ‘विज्ञान ज्योति’ जैसी अन्य योजनाओं का भी उल्लेख किया, जो कक्षा 9 से 12 तक की छात्राओं को STEM क्षेत्रों में करियर बनाने के लिए प्रोत्साहित करती हैं।

मंत्री ने भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र की तेज़ी से हो रही प्रगति का भी जिक्र करते हुए बताया कि यह क्षेत्र अब लगभग 9 बिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बन चुका है और 2033 तक इसके 44 बिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि पिछले दशक में भारत द्वारा 90% से अधिक विदेशी उपग्रह प्रक्षेपण किए गए हैं।

अंत में उन्होंने कहा कि ‘युविका’ जैसे कार्यक्रम न केवल भविष्य के वैज्ञानिकों की नई पीढ़ी तैयार कर रहे हैं, बल्कि भारत को 2047 तक अंतरिक्ष तकनीक और नवाचार में वैश्विक नेतृत्व दिलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

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