Media24Media.com: CG NEWS ; अवैध प्लॉटिंग पर विधानसभा में संग्राम: जवाब से नाराज़ विपक्ष ने छोड़ा सदन

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CG NEWS ; अवैध प्लॉटिंग पर विधानसभा में संग्राम: जवाब से नाराज़ विपक्ष ने छोड़ा सदन

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 रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के प्रश्नकाल में धमतरी और कांकेर जिले में अवैध प्लॉटिंग का मुद्दा जोरदार तरीके से उठा। सरकार के जवाब से असंतुष्ट विपक्ष ने सदन से बहिर्गमन (वॉकआउट) कर दिया।


प्रश्नकाल के दौरान विधायक अंबिका मरकाम ने अवैध प्लॉटिंग को लेकर लगातार मिल रही शिकायतों और उन पर हुई कार्रवाई की जानकारी मांगी। उन्होंने सवाल उठाया कि कई मामलों में शिकायतों के बावजूद जांच क्यों नहीं हुई और क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी।

इस पर राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने जवाब देते हुए बताया कि धमतरी में 3 और उत्तर बस्तर कांकेर में 5 शिकायतें प्राप्त हुई हैं। धमतरी में नगर निगम द्वारा जांच कर अवैध प्लॉटिंग बंद कराई गई, जबकि कांकेर में संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। उन्होंने कहा कि कई अधिकारियों को नोटिस जारी किए गए हैं और कुछ के भुगतान रोके गए हैं।

जिला स्तर पर बनेगी कमेटी

मंत्री ने बताया कि अवैध प्लॉटिंग पर रोक लगाने के लिए जिला स्तर पर समितियों का गठन किया जाएगा, जिसकी अध्यक्षता कलेक्टर करेंगे। साथ ही 14 खसरा नंबरों में खरीदी-बिक्री पर रोक लगाने की भी जानकारी दी गई।

जवाब में विरोधाभास पर उठा सवाल

सदन में मंत्री के जवाबों में विरोधाभास भी सामने आया। पहले पटवारी को निलंबित करने की बात कही गई, लेकिन बाद में मंत्री ने स्पष्ट किया कि गलती से ‘निलंबन’ शब्द का उपयोग हो गया, जबकि वास्तव में नोटिस देकर वेतन रोका गया है। उन्होंने बताया कि 3 पटवारियों को प्रारंभिक रूप से दोषी पाते हुए उनका स्थानांतरण किया गया है और 67 लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं।

इस पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सरकार को घेरते हुए पूछा कि प्रदेश में अब तक कितनी अवैध कॉलोनियां बनीं और कितनों पर कार्रवाई हुई। उन्होंने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की।

वहीं विधायक अजय चंद्राकर ने कहा कि कर्मचारियों को “बलि का बकरा” बनाया जा रहा है, जबकि वास्तविक दोषियों पर कार्रवाई स्पष्ट नहीं है। विधायक ओमकार साहू ने अवैध प्लॉटिंग का भौतिक सत्यापन कराने की मांग उठाई।

विपक्ष का वॉकआउट

मंत्री के जवाबों से असंतुष्ट विपक्ष ने मामले की स्वतंत्र जांच, विधानसभा समिति या उच्चस्तरीय एजेंसी से जांच की मांग करते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया।

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