Media24Media.com: छत्तीसगढ़ की सबसे अलग होली: कुंवारी लड़कियां बरसाती हैं छड़ियां

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छत्तीसगढ़ की सबसे अलग होली: कुंवारी लड़कियां बरसाती हैं छड़ियां

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 होली का रंग पूरे देश में अलग-अलग अंदाज में दिखता है, लेकिन पंतोरा गांव की परंपरा इसे बेहद खास बनाती है। यहां होली की शुरुआत देवताओं से होती है और फिर कुंवारी लड़कियां पुरुषों पर छड़ियां बरसाती हैं।


जिला जांजगीर‑चांपा के इस गांव में करीब 300 साल से यह अनोखी परंपरा निभाई जा रही है। पुरुषों पर छड़ी बरसाने से पहले मां भवानी मंदिर में देवताओं को प्रतीक रूप में छड़ी लगाकर उत्सव की शुरुआत की जाती है।

स्थानीय मान्यता है कि इस छड़ी की मार को आशीर्वाद माना जाता है। जो व्यक्ति इसे सह लेता है, उसे पूरे साल बीमारियां नहीं सतातीं।

रंग पंचमी पर होती है ‘डंगाही होली’

यह आयोजन रंग पंचमी के दिन होता है, जिसे यहां “डंगाही होली” कहा जाता है। गांव जिला मुख्यालय से लगभग 40–45 किलोमीटर दूर स्थित है और इस दिन यहां भारी उत्साह देखने को मिलता है।

पूजा के बाद बैगा द्वारा सिद्ध की गई छड़ियां कुंवारी कन्याओं को दी जाती हैं। मंदिर के बाहर खड़ी कन्याओं की टोली वहां से गुजरने वाले हर व्यक्ति पर छड़ियां बरसाती है।

खास बांस से बनती हैं पवित्र छड़ियां

ग्रामीणों के अनुसार, छड़ियों के लिए विशेष बांस मड़वारानी जंगल से लाया जाता है। वही बांस चुना जाता है जो एक ही कुल्हाड़ी के वार में कट जाए — इसे शुभ संकेत माना जाता है। बाद में इन्हें मां भवानी के सामने अभिमंत्रित कर बैगा से सिद्ध कराया जाता है।

मार भी आशीर्वाद, विरोध नहीं

इस उत्सव में गांव के लोग ही नहीं, बल्कि दूर-दराज से आए रिश्तेदार और राहगीर भी शामिल होते हैं। लोग खुद रुककर छड़ियों की मार स्वीकार करते हैं और इसे माता का प्रसाद मानते हैं।

गांव की मुन्नी बताती हैं कि पूजा के बाद जैसे ही कन्याओं को छड़ियां मिलती हैं, पूरा माहौल उत्सव में बदल जाता है। बच्चे हों या बड़े — सभी इसे श्रद्धा और खुशी के साथ स्वीकार करते हैं।

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