Media24Media.com: वैज्ञानिकों ने मैग्नेटिक सेमीकंडक्टर्स में ऊष्मा प्रवाह का रहस्य सुलझाया

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वैज्ञानिकों ने मैग्नेटिक सेमीकंडक्टर्स में ऊष्मा प्रवाह का रहस्य सुलझाया

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वैज्ञानिकों ने यह पता लगाया है कि मैग्नेटिक सेमीकंडक्टर्स में ऊष्मा (हीट) किस प्रकार प्रवाहित होती है। यह खोज स्पिन्ट्रॉनिक्स, मैग्नेटिक मेमोरी और क्वांटम डिवाइस जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस अध्ययन ने ठोस अवस्था भौतिकी (Condensed Matter Physics) में लगभग एक दशक पुराने रहस्य को सुलझाया है और उच्च प्रदर्शन वाले इलेक्ट्रॉनिक तथा मैग्नेटिक सिस्टम में उन्नत थर्मल प्रबंधन की नई संभावनाएँ खोली हैं।

सामान्य सेमीकंडक्टर्स में तापमान बढ़ने के साथ थर्मल कंडक्टिविटी घटती है, क्योंकि ऊष्मा को वहन करने वाले लैटिस कंपन (फॉनॉन) अधिक बिखरने लगते हैं। लेकिन कुछ मैग्नेटिक सेमीकंडक्टर्स इस नियम का पालन नहीं करते और अपने मैग्नेटिक ट्रांज़िशन तापमान से ऊपर थर्मल कंडक्टिविटी में असामान्य वृद्धि दिखाते हैं। क्रोमियम नाइट्राइड (CrN) ऐसा ही एक मैग्नेटिक सेमीकंडक्टर है, जिसका उपयोग कोटिंग और इलेक्ट्रॉनिक अनुप्रयोगों में किया जाता है। अब तक इस असामान्य व्यवहार का सूक्ष्म कारण स्पष्ट नहीं था।

जवाहरलाल नेहरू सेंटर फॉर एडवांस्ड साइंटिफिक रिसर्च (JNCASR), बेंगलुरु के प्रोफेसर बिवास साहा के नेतृत्व में शोधकर्ताओं की टीम ने इस रहस्य को सुलझाने में सफलता प्राप्त की है। यह संस्थान विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के अंतर्गत एक स्वायत्त संस्थान है। अध्ययन में यह प्रमाणित किया गया कि फॉनॉन और मैग्नेटिक स्पिन फ्लक्चुएशन्स के बीच मजबूत युग्मन (coupling) मैग्नेटिक सेमीकंडक्टर्स में ऊष्मा परिवहन को नियंत्रित करता है।

शोधकर्ताओं ने उन्नत तापमान-निर्भर इनएलास्टिक एक्स-रे स्कैटरिंग तकनीक का उपयोग करते हुए उच्च गुणवत्ता वाले CrN थिन फिल्म्स में फॉनॉन के जीवनकाल को मापा। इससे यह समझने में मदद मिली कि जैसे-जैसे पदार्थ क्रमबद्ध मैग्नेटिक अवस्था से अव्यवस्थित अवस्था में परिवर्तित होता है, वैसे-वैसे लैटिस कंपन और मैग्नेटिक उत्तेजनाओं के बीच किस प्रकार अंतःक्रिया होती है।

अध्ययन में पाया गया कि ध्वनिक फॉनॉन (Acoustic Phonons), जो ऊष्मा के मुख्य वाहक होते हैं, नील तापमान (Néel Temperature) के आसपास मैग्नेटिक स्पिन फ्लक्चुएशन्स के साथ मजबूत अंतःक्रिया के कारण अत्यधिक प्रभावित होते हैं। लेकिन तापमान और बढ़ने पर जब मैग्नेटिक क्रम कमजोर होने लगता है, तब फॉनॉन का जीवनकाल असामान्य रूप से बढ़ जाता है। इसके परिणामस्वरूप उच्च तापमान पर भी थर्मल कंडक्टिविटी बढ़ जाती है, जो सामान्य नियमों के विपरीत है।

इसके विपरीत ऑप्टिकल फॉनॉन सामान्य तापमान-निर्भर व्यवहार का पालन करते पाए गए, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि ऊष्मा परिवहन में स्पिन फ्लक्चुएशन्स की महत्वपूर्ण भूमिका है।

इन निष्कर्षों की पुष्टि उन्नत एटोमिस्टिक स्पिन-डायनामिक्स सिमुलेशन और फर्स्ट-प्रिंसिपल कैलकुलेशन से भी हुई, जिससे मैग्नेटिक फ्लक्चुएशन्स और असामान्य ऊष्मा संचरण के बीच स्पष्ट सूक्ष्म तंत्र स्थापित हुआ।

प्रोफेसर बिवास साहा ने कहा कि यह अध्ययन पहली बार प्रत्यक्ष प्रयोगात्मक प्रमाण प्रस्तुत करता है, जो मैग्नेटिक सेमीकंडक्टर्स में स्पिन फ्लक्चुएशन्स और बढ़ी हुई थर्मल कंडक्टिविटी के बीच संबंध को दर्शाता है। इससे स्पिन्ट्रॉनिक्स, मैग्नेटिक और क्वांटम उपकरणों में बेहतर हीट मैनेजमेंट के नए रास्ते खुल सकते हैं।

इस खोज के व्यापक तकनीकी प्रभाव हो सकते हैं, क्योंकि उच्च शक्ति वाले स्पिन्ट्रॉनिक उपकरणों, मैग्नेटिक मेमोरी और भविष्य की क्वांटम तकनीकों के विश्वसनीय संचालन के लिए प्रभावी ऊष्मा प्रबंधन अत्यंत आवश्यक है। मैग्नेटिक गुणों के माध्यम से थर्मल ट्रांसपोर्ट को नियंत्रित करने की क्षमता भविष्य में अधिक तेज और ऊर्जा-कुशल उपकरणों के विकास में मदद कर सकती है।

यह शोध JNCASR, IISER तिरुवनंतपुरम, लिंकॉपिंग यूनिवर्सिटी (स्वीडन) तथा अंतरराष्ट्रीय सिंक्रोट्रॉन सुविधाओं SPring-8 (जापान) और DESY (जर्मनी) के सहयोग से किया गया। यह अध्ययन हाल ही में प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका Science Advances में प्रकाशित हुआ है, जो उन्नत सामग्री अनुसंधान में भारत की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।

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