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छत्तीसगढ़ में मौसम का डबल अटैक! अंबिकापुर सबसे ठंडा, दुर्ग सबसे गर्म- 3 दिन में बढ़ेगा पारा

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 रायपुर। छत्तीसगढ़ में मौसम का मिजाज लगातार करवट बदल रहा है। दिन में तेज धूप और बढ़ती गर्मी लोगों को परेशान कर रही है, जबकि सुबह और रात के समय कड़ाके की ठंड का असर अब भी बरकरार है। इस बीच मौसम विभाग ने प्रदेशवासियों को अलर्ट करते हुए अगले तीन दिनों में तापमान बढ़ने की चेतावनी जारी की है।


मौसम विभाग के अनुसार, राज्य में आगामी 72 घंटों के दौरान तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि राहत की बात यह है कि अगले 7 दिनों तक अधिकतम तापमान में किसी बड़े बदलाव की संभावना फिलहाल नहीं जताई गई है।

पिछले 24 घंटों के मौसम पर नजर डालें तो प्रदेश में दुर्ग सबसे गर्म रहा, जहां अधिकतम तापमान 31.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं अंबिकापुर सबसे ठंडा रहा, जहां न्यूनतम तापमान 7.3 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। इस दौरान पूरे राज्य में बारिश शून्य रही।

मौसम विभाग ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल प्रदेश में कोई भी सक्रिय सिनॉप्टिक सिस्टम मौजूद नहीं है। हालांकि आने वाले कुछ दिनों तक सुबह के समय हल्का कोहरा और धुंध छाए रहने की संभावना बनी हुई है, जिससे दृश्यता प्रभावित हो सकती है।

ठंड का असर बच्चों पर भारी

लगातार बदलते मौसम का सीधा असर बच्चों की सेहत पर भी पड़ रहा है। बीते एक महीने में रायपुर के अंबेडकर अस्पताल सहित निजी अस्पतालों में हाइपोथर्मिया के 400 से अधिक मामले सामने आ चुके हैं, जिसने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है।

बाल एवं शिशु रोग विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों का शरीर वयस्कों की तुलना में तेजी से गर्मी खोता है, जिससे उन्हें ठंड का ज्यादा खतरा रहता है। खासकर नवजात शिशु और सीजेरियन डिलीवरी से जन्मे बच्चों में हाइपोथर्मिया का जोखिम अधिक होता है।

हाइपोथर्मिया बना खतरे की घंटी

हाइपोथर्मिया एक गंभीर आपात स्थिति है, जिसमें शरीर का सामान्य तापमान 98.6 फॉरेनहाइट (37°C) से नीचे चला जाता है। तापमान गिरते ही शरीर के महत्वपूर्ण अंग सामान्य रूप से काम करना बंद कर सकते हैं।

पीडियाट्रिशियन डॉ. आकाश लालवानी के अनुसार, ठंड के मौसम में शरीर हवा या पानी के संपर्क में आकर तेजी से अपनी गर्मी खो देता है। शरीर की लगभग 90 प्रतिशत गर्मी त्वचा और सांस के जरिए बाहर निकल जाती है। ठंडी हवा या नमी के संपर्क में आने पर यह प्रक्रिया और तेज हो जाती है।

उन्होंने बताया कि यदि कोई व्यक्ति ठंडे पानी के संपर्क में रहता है तो शरीर हवा की तुलना में 25 गुना तेजी से गर्मी खोता है, जिससे हाइपोथर्मिया का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। समय पर इलाज न मिलने पर यह स्थिति जानलेवा भी हो सकती है।

स्वास्थ्य विभाग की एडवाइजरी

मौसम के इस उतार-चढ़ाव को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने एडवाइजरी जारी की है। विभाग ने चेतावनी दी है कि अचानक तापमान बदलने से हाइपोथर्मिया, सर्दी-जुकाम और वायरल फीवर का खतरा बढ़ सकता है। लोगों से अपील की गई है कि ठंड के समय अनावश्यक यात्रा से बचें, बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें और बाहर निकलते समय पूरी तरह गर्म कपड़े पहनें।

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