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वैज्ञानिकों ने सौर विस्फोटों (CME) की उत्पत्ति समझने में बड़ी सफलता हासिल की, अंतरिक्ष मौसम पूर्वानुमान में मदद मिलेगी

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वैज्ञानिकों ने सूर्य पर होने वाले विस्फोटक सौर उद्गारों (Solar Eruptions) की उत्पत्ति को समझने में एक महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। ये विस्फोट, जिन्हें कोरोनल मास इजेक्शन (CME) कहा जाता है, पृथ्वी पर भू-चुंबकीय तूफान पैदा कर सकते हैं, जो उपग्रहों को नुकसान पहुँचा सकते हैं, बिजली ग्रिड को बाधित कर सकते हैं और अंतरिक्ष यात्रियों के लिए खतरा बन सकते हैं।

सौर विस्फोटों की भविष्यवाणी करना अंतरिक्ष मौसम विज्ञान की एक बड़ी चुनौती रही है। इसी दिशा में एक नई शोध अध्ययन में आर्यभट्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ ऑब्जर्वेशनल साइंसेज (ARIES), जो विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST), भारत सरकार के तहत एक स्वायत्त संस्थान है, और उनके सहयोगियों ने इन विस्फोटों को नियंत्रित करने वाले दो प्रमुख कारकों की पहचान की है।

शोधकर्ताओं ने मैग्नेटोहाइड्रोडायनामिक (MHD) सिमुलेशन मॉडल का उपयोग किया, जो प्लाज्मा जैसे विद्युत-चालक तरल पदार्थों और चुंबकीय क्षेत्रों के बीच अंतःक्रिया का अध्ययन करते हैं। अध्ययन में पाया गया कि सूर्य का वैश्विक चुंबकीय क्षेत्र एक तरह से “चुंबकीय पिंजरे” की तरह काम करता है, जो विस्फोट को रोकता है, जबकि चुंबकीय ट्विस्ट (हेलिसिटी) का तेज़ निर्माण इस पिंजरे को तोड़ने की कुंजी है।

यह शोध ARIES के पीएचडी छात्र नितिन वशिष्ठ और वैज्ञानिक डॉ. वैभव पंत के नेतृत्व में किया गया। उन्होंने “ब्रेकआउट मॉडल” का उपयोग करके सौर विस्फोटों की शुरुआत का सिमुलेशन किया। सिमुलेशन से पता चला कि मजबूत वैश्विक चुंबकीय क्षेत्र होने पर CME को सूर्य के गुरुत्वाकर्षण से बाहर निकलना कठिन हो जाता है। जब पृष्ठभूमि चुंबकीय क्षेत्र कमजोर था, तो विस्फोट सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में फैल गया।

इसके अलावा, शोधकर्ताओं ने पाया कि जब पृष्ठभूमि चुंबकीय क्षेत्र की ताकत को थोड़ा बढ़ाया गया, तो विस्फोट विफल हो गया और संरचना वापस सूर्य की सतह पर गिर गई। यह खोज सौर चक्र 24 की एक पहेली को समझाने में मदद करती है, जो सौर चक्र 23 की तुलना में कमजोर था, लेकिन फिर भी अधिक CME उत्पन्न हुए थे। कमजोर चुंबकीय क्षेत्र के कारण विस्फोट के लिए आवश्यक सीमा कम हो गई थी।

अध्ययन का दूसरा प्रमुख परिणाम अंतरिक्ष मौसम पूर्वानुमान के लिए एक नया संकेतक प्रदान करता है। वैज्ञानिकों ने यह जांचा कि जब ऊर्जा और चुंबकीय ट्विस्ट (हेलिसिटी) सूर्य के कोरोना में इंजेक्ट की जाती है, तो इसका क्या प्रभाव पड़ता है। उन्होंने पाया कि केवल हेलिसिटी की मात्रा ही नहीं, बल्कि उसके बनने की गति भी महत्वपूर्ण है।

शोध में “एब्सोल्यूट नेट करंट हेलिसिटी (ANCH)” नामक एक पैरामीटर का अध्ययन किया गया, साथ ही चुंबकीय ऊर्जा और टोटल अनसाइन्ड करंट हेलिसिटी (TUCH) जैसे अन्य पैरामीटर भी देखे गए। वैज्ञानिकों ने पाया कि ANCH की वृद्धि दर विस्फोट की भविष्यवाणी करने का सबसे विश्वसनीय संकेतक है।

धीमी गति से बढ़ने वाली ANCH से “विफल विस्फोट” हुआ, जबकि तेज़ी से बढ़ने वाली ANCH से सफल CME उत्पन्न हुए। कुछ मामलों में, सबसे तेज़ हेलिसिटी इंजेक्शन से एक ही क्षेत्र में कई विस्फोट भी हुए।

शोधकर्ताओं ने कहा कि इन निष्कर्षों से यह संकेत मिलता है कि एब्सोल्यूट नेट करंट हेलिसिटी की समय दर विभिन्न विस्फोट परिदृश्यों को समझने और भविष्यवाणी करने के लिए सबसे प्रभावी संकेतक हो सकती है।

डॉ. वैभव पंत ने कहा कि ये सिमुलेशन सूर्य के लिए एक “वर्चुअल लैबोरेटरी” की तरह हैं, जो विशाल सौर विस्फोटों के मूल भौतिकी सिद्धांतों को समझने में मदद करते हैं। उन्होंने कहा कि अगला कदम इन निष्कर्षों को वास्तविक अंतरिक्ष मौसम पूर्वानुमान उपकरणों में बदलना है, ताकि महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा की जा सके।


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