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उपराष्ट्रपति ने एलपीयू के दीक्षांत समारोह को संबोधित किया, युवाओं से नैतिक जिम्मेदारी के साथ उत्कृष्टता अपनाने का आह्वान

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भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज पंजाब के फगवाड़ा में लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) के दीक्षांत समारोह में मुख्य संबोधन दिया। उन्होंने युवाओं से देश और मानवता की सेवा में व्यावसायिक उत्कृष्टता को नैतिक जिम्मेदारी के साथ जोड़ने का आह्वान किया।

उपराष्ट्रपति ने विकसित भारत @2047 की दृष्टि पर चर्चा करते हुए कहा कि भारत स्वतंत्रता के शताब्दी समारोह की ओर अग्रसर होते हुए एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में देश ने एक विकसित, आत्मनिर्भर, समावेशी और आत्मविश्वासी भारत बनाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्‍य तय किया है। यह दृष्टि केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सामाजिक सद्भाव, नैतिक नेतृत्व, सांस्कृतिक आत्मविश्वास, तकनीकी आत्मनिर्भरता और समग्र विकास शामिल हैं, जिनका साकार होना मुख्यतः युवाओं की ऊर्जा, क्षमता और चरित्र पर निर्भर करता है।

उपराष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि भारत का वैश्विक शक्ति के रूप में उभरने का लक्ष्य कभी भी अन्य छोटे राष्ट्रों को अपनी शर्तें थोपने का नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी देश भारत को अपनी शर्तें थोप न सके।

उन्होंने वैश्विक परिदृश्य में तेजी से हो रहे बदलाव की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा कि वह चीज़ जो पाँच साल पहले प्रासंगिक थी, वह जल्द ही अप्रासंगिक भी हो सकती है। परिवर्तन ही एकमात्र स्थिर तत्व है, और अनुकूलनशीलता तथा जीवनभर सीखने की प्रतिबद्धता ही सतत सफलता के लिए आवश्यक हैं।

उपराष्ट्रपति ने छात्रों को सलाह दी कि वे अपने सफलता या असफलता की तुलना दूसरों से न करें, क्योंकि हर व्यक्ति की यात्रा और गति अलग होती है। उन्होंने अब्राहम लिंकन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जीवन का उदाहरण देते हुए कहा कि लगातार प्रयास, दृढ़ता और ईमानदारी किसी को भी साधारण शुरुआत से महान जिम्मेदारियों तक ले जा सकती हैं। उन्होंने कहा कि केवल स्वयं के लिए जीना गलत नहीं है, लेकिन केवल स्वयं के लिए जीने से जीवन के बड़े उद्देश्य की अवहेलना होती है।

उपराष्ट्रपति ने छात्रों के लिए तीन मार्गदर्शक सिद्धांत बताये —

• प्रभावी समय प्रबंधन अपनाना,
• दीर्घकालिक सफलता को कमजोर करने वाले शॉर्टकट से बचना,
• और हार न मानना।

उन्होंने स्वामी विवेकानंद के प्रेरणादायक शब्दों — “उठो, जागो और तब तक न रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए” — को याद दिलाया।

उपराष्ट्रपति ने यूनिवर्सिटी के ‘जय जवान स्कॉलरशिप’ की भी सराहना की, जो सशस्त्र बलों के कर्मियों और उनके परिवारों के बलिदानों का सम्मान करती है और उन्हें शैक्षिक समर्थन प्रदान करती है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान विश्वविद्यालय के योगदान का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयास यह स्पष्ट करते हैं कि विश्वविद्यालय केवल शिक्षा के केंद नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चरित्र निर्मित करने वाले संस्थान हैं।

उन्होंने ड्राय़ग्स के बढ़ते दुष्प्रभाव पर चिंता जताई और इसे युवा तथा समाज के लिए गंभीर खतरा बताया। उन्होंने छात्रों से दृढ़तापूर्वक “ड्रग्स को नहीं कहो” और अनुशासन, उद्देश्य तथा स्वस्थ जीवन को चुनने का आग्रह किया।

अपने संबोधन के अंत में उपराष्ट्रपति ने छात्रों को कहा कि वे हमेशा अपने माता-पिता और गुरुओं के प्रति कृतज्ञ रहें, जिनके मार्गदर्शन, बलिदान और मूल्यों ने उनके चरित्र और भाग्य को आकार दिया है।

इस दीक्षांत समारोह में पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ प्रशासक गुलाब चंद कटारिया, पंजाब सरकार के मोहिन्दर भगत (प्रति संरक्षण कल्याण, स्वतंत्रता सेनानियों एवं बागवानी मंत्री) और डॉ. अशोक कुमार मित्तल (राज्यसभा सांसद तथा लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के संस्थापक एवं चांसलर) सहित अनेक गणमान्य अतिथि, अधिकारियों और विद्यार्थियों ने भाग लिया।


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