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आईआईएम रांची में उपराष्ट्रपति का संबोधन, युवाओं से नैतिक नेतृत्व और राष्ट्र निर्माण का आह्वान

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रांची (झारखंड)- भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज आईआईएम रांची के 15वें वार्षिक दीक्षांत समारोह में भाग लिया और छात्रों को संबोधित किया।

अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि प्रबंधन शिक्षा केवल कॉर्पोरेट तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि समाज की वास्तविक समस्याओं के समाधान और समावेशी विकास में योगदान देना चाहिए। उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे सफलता को केवल उपलब्धियों से नहीं, बल्कि मूल्यों और नैतिकता के आधार पर परिभाषित करें।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि ईमानदारी, विश्वास और नैतिक नेतृत्व मजबूत संस्थानों की नींव हैं। उन्होंने युवाओं को “Think Global, Act Local” का मंत्र अपनाते हुए विकसित भारत 2047 के लक्ष्य में योगदान देने का आह्वान किया।

उन्होंने छात्रों, उनके अभिभावकों और शिक्षकों को बधाई देते हुए कहा कि सच्ची सफलता वही है, जो समाज को लौटाने में दिखाई दे।

इस अवसर पर झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

इससे पहले, उपराष्ट्रपति ने खूंटी जिले के उलिहातु गांव में भगवान बिरसा मुंडा की जन्मस्थली का दौरा कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके परिजनों से मुलाकात की। उन्होंने रांची में बिरसा चौक पर भी पुष्पांजलि अर्पित की।

उपराष्ट्रपति का यह दौरा युवाओं को नैतिक नेतृत्व और राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरित करने वाला माना जा रहा है।


भारत की अध्यक्षता में पहली ब्रिक्स युवा समन्वय बैठक 2026 का आयोजन

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 भारत सरकार के युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के अंतर्गत युवा कार्य विभाग ने 25 मार्च 2026 को वर्चुअल माध्यम से पहला ब्रिक्स (BRICS) युवा समन्वय बैठक आयोजित की। यह बैठक शाम 4:30 बजे से 6:00 बजे (IST) तक चली और इसमें सभी ब्रिक्स सदस्य देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

भारत द्वारा वर्ष 2026 के लिए ब्रिक्स की अध्यक्षता संभालने के साथ ही इस बैठक के माध्यम से “लचीलापन, नवाचार, सहयोग और सतत विकास का निर्माण” (Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability) थीम के तहत युवा सहयोग की दिशा निर्धारित की गई।

बैठक के दौरान भारत ने ब्रिक्स यूथ ट्रैक 2026 का एक विस्तृत खाका प्रस्तुत किया, जिसमें प्रमुख पहलें शामिल थीं—कार्य समूह बैठकों का आयोजन, विषयगत सहभागिता, ‘Serve BRICS’ स्वयंसेवी गतिविधियां, युवा विकास मंच, युवा परिषद बैठक, युवा शिखर सम्मेलन और युवा मंत्रिस्तरीय बैठक।

चर्चा के दौरान सदस्य देशों के बीच सहयोग के लिए प्राथमिक क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया, जिनमें शिक्षा एवं कौशल विकास, युवा उद्यमिता, विज्ञान और नवाचार, सामाजिक भागीदारी, समावेशन, स्वास्थ्य एवं खेल, पर्यावरण एवं सतत विकास, अंतर-धार्मिक संवाद तथा युवा आदान-प्रदान शामिल हैं।

यह बैठक सदस्य देशों के बीच व्यापक विषयों पर सहमति बनाने और ब्रिक्स यूथ ट्रैक 2026 के अंतर्गत सहयोग को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुई, जिससे भारत की अध्यक्षता के दौरान आगामी कार्यक्रमों की मजबूत नींव रखी गई।

राष्ट्रीय पटल पर चमका छत्तीसगढ़, 'मॉडल यूथ ग्राम सभा' में ईएमआरएस कोसमबुड़ा ने हासिल किया प्रथम स्थान

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पंचायती राज मंत्रालय 28 जनवरी को छत्तीसगढ़ के युवा लीडर्स को सहभागितापूर्ण शासन में उत्कृष्टता के लिए करेगा पुरस्कृत

रायपुर- छत्तीसगढ़ के लिए बड़े गौरव के क्षण में, एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय (EMRS), कोसमबुड़ा ने अपनी तरह की पहली ‘मॉडल यूथ ग्राम सभा’ (MYGS) प्रतियोगिता में राष्ट्रीय विजेता बनकर उभरने का गौरव प्राप्त किया है। पंचायती राज मंत्रालय आगामी 28 जनवरी 2026 को नई दिल्ली में आयोजित एक भव्य राष्ट्रीय पुरस्कार समारोह में छत्तीसगढ़ की इस विजेता टीम को औपचारिक रूप से सम्मानित करेगा।

छत्तीसगढ़ की जनजातीय शिक्षा प्रणाली की बड़ी जीत देश भर के 800 से अधिक स्कूलों के प्रतिभागियों को पीछे छोड़ते हुए, ईएमआरएस कोसमबुड़ा के छात्रों ने ग्रामीण शासन की असाधारण समझ का प्रदर्शन किया। 30 अक्टूबर 2025 को जनजातीय कार्य मंत्रालय और शिक्षा मंत्रालय के सहयोग से शुरू की गई इस पहल का उद्देश्य युवाओं को मॉक ग्राम सभा सत्रों के माध्यम से जमीनी समस्याओं के समाधान के लिए प्रेरित करना था। छत्तीसगढ़ का शीर्ष स्थान यह दर्शाता है कि राज्य ने अपनी जनजातीय आवासीय स्कूल प्रणाली के भीतर लोकतांत्रिक मूल्यों को कितनी मजबूती से आत्मसात किया है।

इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर अपनी प्रसन्नता व्यक्त करते हुए ईएमआरएस कोसमबुड़ा के प्राचार्य, डॉ. कमलाकांत यादव ने कहा:"मॉडल यूथ ग्राम सभा (MYGS) पहल में हमारे विद्यालय को राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम स्थान मिलना हर्ष का विषय है। यह सफलता हमारे विद्यार्थियों के कड़े परिश्रम और ग्रामीण विकास से जुड़ी समस्याओं के प्रति उनकी गहरी समझ को दर्शाती है। पंचायती राज मंत्रालय और केंद्र सरकार की यह दूरदर्शी पहल छात्रों को लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और सहभागी शासन से जोड़ने का एक प्रभावी मंच है। इस आयोजन के माध्यम से विद्यार्थियों को जमीनी स्तर पर निर्णय लेने की प्रक्रिया को करीब से समझने का अवसर मिला है। हम आगामी 28 जनवरी को नई दिल्ली में होने वाले सम्मान समारोह में सहभागिता को लेकर उत्साहित हैं।"

युवा सहभागिता के लिए दूरदर्शी पहल ‘मॉडल यूथ ग्राम सभा’ को 30 अक्टूबर 2025 को लॉन्च किया गया था। इस कार्यक्रम ने तीन महीने से भी कम समय में भारत के 800 से अधिक स्कूलों तक पहुँच बनाकर युवाओं में सहभागी शासन की संस्कृति को बढ़ावा दिया है। देश भर से शॉर्टलिस्ट की गई शीर्ष 6 टीमों में ईएमआरएस कोसमबुड़ा ने ग्राम सभा के संचालन में अनुशासन और स्थानीय समस्याओं के व्यावहारिक समाधान के लिए नए मानक स्थापित किए हैं। 28 जनवरी को होने वाला सम्मान समारोह लोकतंत्र के इन युवा राजदूतों की उपलब्धि का उत्सव मनाएगा, जो भविष्य के जिम्मेदार नागरिक तैयार करने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर है।

रक्षा राज्य मंत्री ने एनसीसी गणतंत्र दिवस शिविर का किया दौरा, कैडेट्स को देशभक्ति और स्वदेशी नवाचार का दिया संदेश

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रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने 18 जनवरी 2026 को दिल्ली कैंट स्थित राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) गणतंत्र दिवस शिविर (RDC) का दौरा किया। उनके आगमन पर एनसीसी कैडेट्स ने उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर प्रदान किया। इसके पश्चात द सिंधिया स्कूल, ग्वालियर के कैडेट्स द्वारा प्रस्तुत बैंड प्रदर्शन ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।

अधिकारियों और कैडेट्स को संबोधित करते हुए रक्षा राज्य मंत्री ने कहा कि गणतंत्र दिवस केवल एक राष्ट्रीय पर्व नहीं, बल्कि हमारे संविधान और स्वतंत्रता सेनानियों को नमन करने का अवसर है। उन्होंने एनसीसी कैडेट्स को भारत के गौरवशाली अतीत और उज्ज्वल भविष्य के बीच की “जीवंत कड़ी” बताते हुए कहा कि गणतंत्र दिवस शिविर देश के युवाओं के अनुशासन, प्रतिबद्धता और नेतृत्व क्षमता का सजीव प्रतिबिंब है।

संजय सेठ ने कैडेट्स को स्वदेशी सोच के साथ आत्मनिर्भर बनने का आह्वान किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘स्टार्टअप इंडिया’ जैसे प्रयासों का उल्लेख करते हुए बताया कि देश में स्टार्टअप्स की संख्या पिछले वर्षों में लगभग 800 से बढ़कर 2 लाख से अधिक हो गई है, जो नवाचार और स्वदेशी उद्यमिता की ताकत को दर्शाता है।

रक्षा राज्य मंत्री ने वीर बिरसा मुंडा साइक्लोथॉन में भाग लेने वाले 15 एनसीसी कैडेट्स की विशेष सराहना की, जिन्होंने रांची से दिल्ली तक 1300 किलोमीटर की यात्रा कर राष्ट्रीय एकता और वीर बिरसा मुंडा के मूल्यों का संदेश दिया। इसके अलावा, वर्ष 2025 में माउंट एवरेस्ट पर सफल चढ़ाई करने वाले 10 एनसीसी कैडेट्स की उपलब्धि को भी उन्होंने प्रेरणादायक बताया।

अपने संबोधन के अंत में संजय सेठ ने कैडेट्स से आह्वान किया कि वे भविष्य की चुनौतियों का सामना करते हुए कर्तव्यनिष्ठा, देशभक्ति और संवैधानिक मूल्यों से जुड़े रहें तथा वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण में योगदान दें। उन्होंने एनसीसी अधिकारियों और प्रशिक्षकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वे देश के भावी नेतृत्व को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। साथ ही, तिरंगे की गरिमा और सम्मान को बनाए रखने का संकल्प लेने का भी उन्होंने आह्वान किया।

दौरे के दौरान रक्षा राज्य मंत्री ने कैडेट्स द्वारा विभिन्न सामाजिक जागरूकता विषयों पर तैयार किए गए ‘फ्लैग एरिया’ का निरीक्षण किया तथा ‘हॉल ऑफ फेम’ का भी भ्रमण किया, जहां कैडेट्स ने एनसीसी के गौरवशाली इतिहास, प्रशिक्षण गतिविधियों और उपलब्धियों की जानकारी साझा की।

दिल्ली की मुख्यमंत्री का एनसीसी गणतंत्र दिवस शिविर का दौरा

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दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 15 जनवरी, 2026 को दिल्ली कैंट में आयोजित राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) गणतंत्र दिवस शिविर (आरडीसी) का दौरा किया। कैडेट्स के अनुशासन और प्रस्तुति से प्रभावित होकर उन्होंने उनकी सराहना की और कहा कि उनकी समन्वित परेड, बैंड प्रदर्शन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ राष्ट्र की धड़कन को प्रतिबिंबित करती हैं।

मुख्यमंत्री ने साहसी और जिम्मेदार युवाओं के निर्माण में एनसीसी की भूमिका की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह संगठन युवाओं में राष्ट्रवाद, एकता और संविधान के प्रति प्रतिबद्धता जैसे आजीवन मूल्यों का पोषण करता है। एनसीसी के समग्र प्रशिक्षण ढांचे पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ शिविरों और विशेष राष्ट्रीय एकता शिविरों जैसी राष्ट्रीय एकीकरण पहलों के महत्व पर भी जोर दिया।

अपने समापन संबोधन में गुप्ता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस दृष्टिकोण पर विश्वास व्यक्त किया कि ‘आज के कैडेट्स ही कल के नेता हैं’, जो भारत की एकता, अखंडता और गरिमा के प्रति प्रतिबद्ध रहते हुए विभिन्न भूमिकाओं में राष्ट्र की सेवा करेंगे। उन्होंने युवाओं से कर्तव्य की प्रबल भावना के साथ आगे बढ़ने का आह्वान करते हुए कहा कि स्वतंत्रता के साथ जिम्मेदारी भी जुड़ी होती है और विकसित भारत का निर्माण एक साझा मिशन है। उन्होंने राष्ट्र के गौरव और मातृभूमि की सेवा की भावना को बनाए रखने का आह्वान करते हुए अपने वक्तव्य का समापन किया।

दौरे के दौरान मुख्यमंत्री ने एनसीसी कैडेट्स द्वारा प्रस्तुत ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ की समीक्षा की। इसके पश्चात केरल के थोडुपुझा स्थित न्यूमैन कॉलेज के कैडेट्स द्वारा एक प्रभावशाली बैंड प्रदर्शन प्रस्तुत किया गया। बाद में उन्होंने सामाजिक विषयों और राष्ट्रीय प्रगति को दर्शाने वाले ‘फ्लैग एरिया’ का भ्रमण किया। इसके उपरांत उन्होंने ‘हॉल ऑफ फेम’ का दौरा किया, जहाँ उन्हें एनसीसी के इतिहास और उपलब्धियों की जानकारी दी गई। दौरे का समापन कैडेट्स द्वारा प्रस्तुत एक जीवंत सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ हुआ।

विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग (VBYLD 2026) का दूसरा दिन: युवा नेतृत्व, विचार-विमर्श और राष्ट्र निर्माण की सशक्त झलक

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नई दिल्ली- मंत्रालय युवा मामले और खेल द्वारा आयोजित विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग (VBYLD 2026) का दूसरा दिवस आज भारत मंडपम, नई दिल्ली में भव्य उद्घाटन सत्र के साथ शुरू हुआ। इस सत्र में केंद्रीय युवा मामले एवं खेल और श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल, युवा मामले एवं खेल राज्य मंत्री रक्षा निखिल खडसे, युवा मामले विभाग की सचिव डॉ. पल्लवी जैन गोविल और अतिरिक्त सचिव नितेश कुमार मिश्रा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी और गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे। उद्घाटन समारोह की शुरुआत स्वामी विवेकानंद को पुष्पांजलि अर्पित कर की गयी, जिनके युवा सशक्तिकरण, नेतृत्व और राष्ट्रीय सेवा के आदर्श देशभर के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं, इसके बाद दीप प्रज्ज्वलन किया गया।

कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने प्रतिभागियों का हार्दिक स्वागत किया और इस पहल को मिले अभूतपूर्व समर्थन की सराहना की। उन्होंने बताया कि लगभग 50 लाख युवाओं ने क्विज़ के प्रारंभिक चरण में भाग लिया, जिनमें से 3 लाख युवाओं को दस चयनित विषयगत ट्रैकों पर निबंध लिखने का मौका मिला था। इन निबंधों का मूल्यांकन प्रोफेसरों द्वारा किया गया, और 30,000 युवा राज्य स्तर पर विचार प्रस्तुत करने के लिए चुने गए। इन सभी में से 3,000 युवा नेताओं को अंतिम प्रस्तुतियों के लिए चुना गया, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने सीधे अपने विचार रखेंगे। प्रधानमंत्री ने युवाओं में नेतृत्व क्षमता पर गहरा विश्वास व्यक्त किया है और राष्ट्रीय युवा दिवस पर युवाओं से सीधे संवाद के लिए कई घंटे समर्पित करेंगे।

डॉ. मांडविया ने बताया कि युवा ही राष्ट्र की प्रगति की मुख्य शक्ति हैं और विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग एक ऐसा मंच है जो ग्रासरूट स्तर से नेतृत्व को विकसित करता है, बिना किसी राजनीतिक समर्थन के, और भविष्य के नेताओं को तैयार करता है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत केवल सरकार अकेले नहीं बना सकती, बल्कि 140 करोड़ नागरिकों के सामूहिक प्रयास से ही यह संभव होगा, जो राष्ट्र के लिए समर्पण, अनुशासन और कर्तव्यपरायणता से आगे बढ़ेंगे। उन्होंने कहा कि भारत अपने अनुकूल जनसांख्यिकीय लाभ के साथ लगातार प्रगति कर रहा है और कोविड के बाद बेरोज़गारी दर में उल्लेखनीय गिरावट आई है।

उद्घाटन सत्र में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल ने अपने युवा दिनों का स्मरण करते हुए निर्णय लेने की भूमिका पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि व्यक्ति के जीवन और राष्ट्र की दिशा का निर्धारण प्रतिदिन लिए गए निर्णयों की गुणवत्ता से होता है। उन्होंने युवाओं से अनुरोध किया कि वे निर्णय-निर्माण क्षमता को प्रारंभिक चरण से ही विकसित करें और सही विकल्प चुनने की ताकत को अपनी सर्वश्रेष्ठ शक्ति मानें। डोवाल ने इतिहास से सीख लेने, अनुशासन को रोज़मर्रा की प्रेरणा में बदलने और दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ने का सुझाव दिया। उन्होंने प्रतिभागियों के साथ इंटरएक्टिव सवाल-जवाब सत्र भी आयोजित किया, जहां उन्होंने तनाव प्रबंधन और महत्वपूर्ण परिस्थितियों में समुचित निर्णय लेने पर अपने अनुभव साझा किए।

युवा मामले विभाग की सचिव डॉ. पल्लवी जैन गोविल ने अपने स्वागत संबोधन में बताया कि यह संवाद लगभग पाँच महीने की राष्ट्रीय प्रक्रिया का परिणाम है, जिसमें देशभर के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से उत्कृष्ट युवा नेताओं का चयन हुआ। उन्होंने बताया कि VBYLD एक ऐसा मंच है जहां युवाओं की आवाज़ सुनी जाती है और उनके विचारों को डिज़ाइन थिंकिंग, मानव-केंद्रित दृष्टिकोण के माध्यम से नीति निर्माण में शामिल किया जाता है। उन्होंने यह भी बताया कि 144 शहरों में आयोजित विकसित भारत रन ने भारतीय डायस्पोरा के समर्थन सहित देश की सॉफ्ट पावर को दर्शाया।

उद्घाटन सत्र का समापन नितेश कुमार मिश्रा द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिन्होंने मंच पर उपस्थित सभी गणमान्यों, वक्ताओं, आयोजकों और युवाओं के सक्रिय सहभागिता के लिए आभार व्यक्त किया और बताया कि युवा नेतृत्व को विकसित करने के लिए मंत्रालय निरंतर प्रयास कर रहा है।

उद्घाटन सत्र के पश्चात प्रतिभागी विषयगत सत्रों के लिए विभक्त हुए, जिनका आयोजन दस पहचाने गए विषयों के आधार पर किया गया। इन सत्रों का मार्गदर्शन अनुभवी मेंटर्स द्वारा किया गया, जिन्होंने प्रत्येक विषय की संरचना और उद्देश्यों का परिचय कराया, तथा विशेषज्ञों द्वारा गहन विचार-विमर्श हेतु प्रतिभागियों के साथ बातचीत की गई।

विषयगत ट्रैकों की मुख्य बातें

ट्रैक 1 – विकसित भारत के लिए युवा, लोकतंत्र और शासन:

इस ट्रैक में युवा नेताओं ने ग्राम स्तर पर प्रशासन में युवा सहभागिता, नीति एवं समस्या-समाधान इकाइयों, और संरचित नागरिक संलग्नता योजनाओं की नवीन मॉडल प्रस्तुत किए।

ट्रैक 2 – महिला नेतृत्व में विकास: विकसित भारत की कुंजी:

महिला नेतृत्व को बढ़ावा देने पर चर्चा में भारत की पहली MBA सरपंच छवी राजावत, विधायक श्रेयासी सिंह, और शागुन परिहार ने अनुभव साझा किए।

ट्रैक 3 – फिट भारत, हिट भारत:

इस सत्र में लींडर पीज और पुलेला गोपीचंद ने स्वास्थ्य, खेल, मानसिक और शारीरिक स्वास्थ के महत्व पर विचार साझा किए।

ट्रैक 4 – भारत को विश्व की स्टार्ट-अप राजधानी बनाना:

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उपराष्ट्रपति ने एलपीयू के दीक्षांत समारोह को संबोधित किया, युवाओं से नैतिक जिम्मेदारी के साथ उत्कृष्टता अपनाने का आह्वान

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भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज पंजाब के फगवाड़ा में लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) के दीक्षांत समारोह में मुख्य संबोधन दिया। उन्होंने युवाओं से देश और मानवता की सेवा में व्यावसायिक उत्कृष्टता को नैतिक जिम्मेदारी के साथ जोड़ने का आह्वान किया।

उपराष्ट्रपति ने विकसित भारत @2047 की दृष्टि पर चर्चा करते हुए कहा कि भारत स्वतंत्रता के शताब्दी समारोह की ओर अग्रसर होते हुए एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में देश ने एक विकसित, आत्मनिर्भर, समावेशी और आत्मविश्वासी भारत बनाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्‍य तय किया है। यह दृष्टि केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सामाजिक सद्भाव, नैतिक नेतृत्व, सांस्कृतिक आत्मविश्वास, तकनीकी आत्मनिर्भरता और समग्र विकास शामिल हैं, जिनका साकार होना मुख्यतः युवाओं की ऊर्जा, क्षमता और चरित्र पर निर्भर करता है।

उपराष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि भारत का वैश्विक शक्ति के रूप में उभरने का लक्ष्य कभी भी अन्य छोटे राष्ट्रों को अपनी शर्तें थोपने का नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी देश भारत को अपनी शर्तें थोप न सके।

उन्होंने वैश्विक परिदृश्य में तेजी से हो रहे बदलाव की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा कि वह चीज़ जो पाँच साल पहले प्रासंगिक थी, वह जल्द ही अप्रासंगिक भी हो सकती है। परिवर्तन ही एकमात्र स्थिर तत्व है, और अनुकूलनशीलता तथा जीवनभर सीखने की प्रतिबद्धता ही सतत सफलता के लिए आवश्यक हैं।

उपराष्ट्रपति ने छात्रों को सलाह दी कि वे अपने सफलता या असफलता की तुलना दूसरों से न करें, क्योंकि हर व्यक्ति की यात्रा और गति अलग होती है। उन्होंने अब्राहम लिंकन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जीवन का उदाहरण देते हुए कहा कि लगातार प्रयास, दृढ़ता और ईमानदारी किसी को भी साधारण शुरुआत से महान जिम्मेदारियों तक ले जा सकती हैं। उन्होंने कहा कि केवल स्वयं के लिए जीना गलत नहीं है, लेकिन केवल स्वयं के लिए जीने से जीवन के बड़े उद्देश्य की अवहेलना होती है।

उपराष्ट्रपति ने छात्रों के लिए तीन मार्गदर्शक सिद्धांत बताये —

• प्रभावी समय प्रबंधन अपनाना,
• दीर्घकालिक सफलता को कमजोर करने वाले शॉर्टकट से बचना,
• और हार न मानना।

उन्होंने स्वामी विवेकानंद के प्रेरणादायक शब्दों — “उठो, जागो और तब तक न रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए” — को याद दिलाया।

उपराष्ट्रपति ने यूनिवर्सिटी के ‘जय जवान स्कॉलरशिप’ की भी सराहना की, जो सशस्त्र बलों के कर्मियों और उनके परिवारों के बलिदानों का सम्मान करती है और उन्हें शैक्षिक समर्थन प्रदान करती है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान विश्वविद्यालय के योगदान का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयास यह स्पष्ट करते हैं कि विश्वविद्यालय केवल शिक्षा के केंद नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चरित्र निर्मित करने वाले संस्थान हैं।

उन्होंने ड्राय़ग्स के बढ़ते दुष्प्रभाव पर चिंता जताई और इसे युवा तथा समाज के लिए गंभीर खतरा बताया। उन्होंने छात्रों से दृढ़तापूर्वक “ड्रग्स को नहीं कहो” और अनुशासन, उद्देश्य तथा स्वस्थ जीवन को चुनने का आग्रह किया।

अपने संबोधन के अंत में उपराष्ट्रपति ने छात्रों को कहा कि वे हमेशा अपने माता-पिता और गुरुओं के प्रति कृतज्ञ रहें, जिनके मार्गदर्शन, बलिदान और मूल्यों ने उनके चरित्र और भाग्य को आकार दिया है।

इस दीक्षांत समारोह में पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ प्रशासक गुलाब चंद कटारिया, पंजाब सरकार के मोहिन्दर भगत (प्रति संरक्षण कल्याण, स्वतंत्रता सेनानियों एवं बागवानी मंत्री) और डॉ. अशोक कुमार मित्तल (राज्यसभा सांसद तथा लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के संस्थापक एवं चांसलर) सहित अनेक गणमान्य अतिथि, अधिकारियों और विद्यार्थियों ने भाग लिया।


राज्यपाल रमेन डेका ने प्रथम राष्ट्रीय रोवर-रेंजर जंबूरी का किया शुभारंभ

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युवाओं से राष्ट्र निर्माण में योगदान का आह्वान

रायपुर- राज्यपाल रमेन डेका के मुख्य आतिथ्य में जिला मुख्यालय बालोद के समीपस्थ ग्राम दुधली में प्रथम राष्ट्रीय रोवर-रेंजर जंबूरी का आज भव्य शुभारंभ हुआ। राज्यपाल ने इस अवसर पर कहा कि जंबूरी केवल एक शिविर ही नहीं बल्कि एकता, विविधता, भाईचारा और साझा उद्देश्यों का उत्सव है। कार्यक्रम में स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव, भारत स्काउट्स एवं गाइड्स के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अनिल जैन, मुख्य राज्य आयुक्त इंदरजीत सिंह खालसा, राष्ट्रीय व राज्य स्तर के पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में देश के विभिन्न राज्यों से आए रोवर-रेंजर उपस्थित थे।

राज्यपाल डेका एवं अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलित कर एवं आसमान में गुब्बारा छोड़कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया गया। समारोह में राज्यपाल एवं अतिथियों द्वारा जंबूरी पत्रिका एवं नए बैज का विमोचन भी किया गया। राज्यपाल रमेन डेका ने इस अवसर पर कहा कि स्काउट-गाइड युवाओं को नेतृत्व कौशल, अनुशासन और सफलता के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे समाज के लिए कम से कम एक सकारात्मक कार्य अवश्य करें और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं। देश में पहली बार आयोजित हो रही यह राष्ट्रीय रोवर-रेंजर जंबूरी पूरे राष्ट्र के लिए गौरव का विषय है। 

स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने अपने संबोधन में कहा कि स्काउट-गाइड युवाओं को जीवन मूल्यों, अनुशासन और सामाजिक दायित्वों से जोड़ने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि रोवर-रेंजर देश के वे युवा हैं, जो समाज, राष्ट्र और विश्व के लिए कुछ अच्छा करने का जज्बा रखते हैं। उन्होंने सभी प्रतिभागियों का स्वागत एवं अभिनंदन करते हुए इस आयोजन को छत्तीसगढ़ और देश के युवाओं के लिए सौभाग्यपूर्ण अवसर बताया।

इस अवसर पर स्वागत उद्बोधन करते हुए भारत स्काउट गाइड के मुख्य राष्ट्रीय आयुक्त डॉ. केके खण्डेलवाल ने ग्राम दुधली में इस प्रथम राष्ट्रीय रोवर रेंजर जंबूरी आयोजन को एतिहासिक एवं अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। मुख्य राज्य आयुक्त इंदरजीत सिंह खालसा ने कहा कि यह आयोजन छत्तीसगढ़ के स्वर्णिम अध्याय में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने सभी सहयोगियों का आभार व्यक्त किया।

विभिन्न राज्यों से उपस्थित रोवर एवं रेंजरों द्वारा आकर्षक मार्चपास्ट कर राज्यपाल डेका एवं अतिथियों को सलामी दी गई। इस प्रथम नेशनल रोवर रेंजर जंबूरी के शुभारंभ अवसर पर विभिन्न राज्यों से उपस्थित रोवर रेंजरों ने नैनाभिराम सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रंगारंग प्रस्तुति से भारतीय संस्कृति की बहुरंगी छटा बिखेरी। उल्लेखनीय है कि इस 5 दिवसीय आयोजन में देश के सभी राज्यों के अलावा रेल्वे, नवोदय विद्यालय सहित कुल 33 राज्यों के प्रतिभागी रोवर रेंजर शामिल हो रहे हैं। भारत स्काउट्स गाइड्स के अधिकारी, रोवर रेंजर के अलावा अन्य जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में आम नागरिकगण उपस्थित थे।

राष्ट्रीय रोवर-रेंजर जंबूरी से बालोद बना भारत की युवा शक्ति का नया केंद्र : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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रायपुर- छत्तीसगढ़ का बालोद जिला आज देशभर के युवाओं के लिए प्रेरणा और गौरव का नया केंद्र बन गया है। 

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि जिला बालोद के ग्राम दुधली में 9 से 13 जनवरी तक आयोजित प्रथम राष्ट्रीय रोवर-रेंजर जंबूरी में देश-विदेश से आए लगभग 15 हजार रोवर-रेंजर अपनी सेवा भावना, नेतृत्व क्षमता और राष्ट्र के प्रति समर्पण का जीवंत प्रदर्शन कर रहे हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि यह ऐतिहासिक जंबूरी छत्तीसगढ़ की युवा शक्ति को राष्ट्रीय मंच पर लाने का सुनहरा अवसर है। राष्ट्रीय स्तर के कैंपिंग, रोवर-रेंजर प्रशिक्षण, सांस्कृतिक संध्याओं और सामुदायिक सेवा गतिविधियों के माध्यम से युवा प्रतिभागी अनुशासन, सेवा और नेतृत्व के मूल्यों के साथ राष्ट्र निर्माण की भावना को सशक्त कर रहे हैं। 

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि बालोद की धरती पर उमड़ा यह उत्साह भारत की भावी पीढ़ी की ऊर्जा, समर्पण और संकल्प को स्पष्ट रूप से प्रतिबिंबित करता है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार युवाओं के खेल, कौशल विकास और नेतृत्व क्षमता को सुदृढ़ करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि अनुशासित, प्रशिक्षित और आत्मविश्वासी युवा शक्ति ही विकसित भारत की मजबूत नींव बनेगी। उन्होंने जंबूरी में भाग ले रहे सभी रोवर-रेंजरों को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि उनका उत्साह और सेवा भाव छत्तीसगढ़ का परचम देश-दुनिया में और ऊँचाई तक ले जाएगा।

https://x.com/i/status/2009564111072612839

वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए. पी. सिंह ने एनसीसी गणतंत्र दिवस शिविर का दौरा किया

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नई दिल्ली-भारतीय वायुसेना प्रमुख (चीफ ऑफ द एयर स्टाफ) एयर चीफ मार्शल ए. पी. सिंह ने 8 जनवरी 2026 को दिल्ली कैंट स्थित राष्ट्रीय कैडेट कोर (NCC) गणतंत्र दिवस शिविर (RDC) का दौरा किया।

इस अवसर पर वायुसेना प्रमुख ने थलसेना, नौसेना और वायुसेना—तीनों विंग्स से आए एनसीसी कैडेट्स द्वारा प्रस्तुत गार्ड ऑफ ऑनर का निरीक्षण किया। इसके पश्चात राजस्थान के पिलानी स्थित बिड़ला बालिका विद्यापीठ की छात्राओं द्वारा प्रस्तुत आकर्षक बैंड प्रदर्शन ने सभी का मन मोह लिया।

एयर चीफ मार्शल ने सभी 17 एनसीसी निदेशालयों के कैडेट्स द्वारा विभिन्न सामाजिक जागरूकता विषयों पर तैयार किए गए फ्लैग एरिया का निरीक्षण किया तथा इसके बाद एनसीसी हॉल ऑफ फेम का भ्रमण भी किया।

युवाओं की भूमिका पर जोर

कैडेट्स को संबोधित करते हुए वायुसेना प्रमुख ने भारत के युवाओं पर अपना विश्वास व्यक्त किया और राष्ट्र निर्माण में एनसीसी की भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि एनसीसी देश की सबसे बड़ी वर्दीधारी युवा संस्था है, जिसमें 20 लाख से अधिक कैडेट्स शामिल हैं, जिनमें 40 प्रतिशत बालिकाएं हैं।

एयर चीफ मार्शल सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान एनसीसी कैडेट्स की सक्रिय भागीदारी तथा विभिन्न सरकारी पहलों के प्रचार-प्रसार में उनके योगदान की भी प्रशंसा की। उन्होंने कैडेट्स से आह्वान किया कि वे वर्दी से परे भी राष्ट्रवाद को अपने जीवन में अपनाएं और जीवन में निरंतर आगे बढ़ने के लिए “कभी हार न मानने” का दृष्टिकोण विकसित करें।

RDC में चयन पर दी बधाई

गणतंत्र दिवस शिविर के महत्व को रेखांकित करते हुए वायुसेना प्रमुख ने RDC 2026 में अपने-अपने निदेशालयों का प्रतिनिधित्व करने के लिए चयनित होने पर कैडेट्स को बधाई दी।

सांस्कृतिक कार्यक्रम ने बांधा समां

इस अवसर पर एनसीसी कैडेट्स ने समूह गीत, बैले और समूह नृत्य के माध्यम से भारत की समृद्ध और विविध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाता हुआ एक शानदार सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया, जिसे एयर चीफ मार्शल तथा अन्य गणमान्य अतिथियों ने खूब सराहा।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने यूनिटी मार्च के लिए राज्य के 68 युवाओं के दल को हरी झंडी दिखाकर किया रवाना

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सरदार पटेल की कर्मभूमि करमसद से स्टैच्यू ऑफ यूनिटी केवड़िया तक पदयात्रा में शामिल होंगे युवा

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने  सरदार वल्लभभाई पटेल जी की 150वीं जयंती के अवसर पर आयोजित पदयात्रा में शामिल होने के लिए गुजरात जाने वाले राज्य के 68 युवाओं के दल को आज रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ राज्य युवा आयोग कार्यालय से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। ये युवा सरदार पटेल की कर्मभूमि करमसद से केवड़िया तक आयोजित राष्ट्रीय पदयात्रा में हिस्सा लेंगे। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सरदार वल्लभभाई पटेल ने देश की 562 रियासतों और ब्रिटिश शासन के अधीन क्षेत्रों को एकजुट कर अखंड भारत की नींव रखी। उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति, अटल संकल्प और अथक परिश्रम ने भारत को एक सूत्र में पिरोया। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि विगत दिनों वे गुजरात के केवड़िया में आयोजित भारत पर्व में सम्मिलित हुए थे, जहाँ उन्होंने विश्व की सबसे ऊँची प्रतिमा—स्टैच्यू ऑफ यूनिटी—के दर्शन किए और भारत की सांस्कृतिक एकता की जीवंत झलक देखी। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ की समृद्ध संस्कृति, विविधता और व्यंजनों का भी प्रदर्शन किया गया था।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि 26 नवम्बर से 06 दिसम्बर तक आयोजित होने वाले यूनिटी मार्च में छत्तीसगढ़ के युवाओं के साथ देशभर के जनप्रतिनिधि भी शामिल होंगे, जो हम सभी के लिए गर्व की बात है।

उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक और भौगोलिक एकता के निर्माण में सरदार पटेल का योगदान अतुलनीय है। उन्होंने रियासतों के विलय का ऐतिहासिक कार्य किया जो भारत की एकता और अखंडता का आधार बना। उन्होंने चयनित युवाओं को राष्ट्रीय पदयात्रा के लिए शुभकामनाएँ एवं बधाई दी।

जगदलपुर विधायक किरण सिंह देव ने युवाओं को संबोधित करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की और पदयात्रा में शामिल होने के लिए उन्हें शुभकामनाएँ दीं।

इस अवसर पर रायपुर जिला पंचायत अध्यक्ष नवीन अग्रवाल, पूर्व विधायक नवीन मार्कण्डेय, जी. वेंकट राव, श्याम नारंग, राहुल टिकरिया, खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सचिव यशवंत कुमार सहित बड़ी संख्या में युवा, अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।


बाल दिवस की तैयारी में उत्साह, चरौदा स्कूल में बच्चों की बाल कैबिनेट की बैठक

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आरंग-शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला चरौदा में शनिवार को ‘सुरक्षित शनिवार’ के तहत विविध गतिविधियों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत वंदे मातरम् के सामूहिक गायन से हुई। इसके बाद विद्यार्थियों ने योगाभ्यास, इमला लेखन और स्वच्छता संबंधी गतिविधियों में भाग लिया।इस अवसर पर बाल कैबिनेट प्रभारी शिक्षक महेन्द्र कुमार पटेल के मार्गदर्शन में बाल कैबिनेट की बैठक आयोजित की गई। बैठक में सभी बाल मंत्रियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए विद्यालय में अनुशासन, साफ-सफाई, नियमित उपस्थिति और बाल दिवस के आयोजन पर विचार-विमर्श किया। चर्चा के दौरान बच्चों ने सर्वसम्मति से बाल दिवस को हर्षोल्लास से मनाने का निर्णय लिया।बैठक में संस्था प्रमुख के. के. परमाल, वरिष्ठ शिक्षक महेन्द्र पटेल, सूर्यकांत चन्द्राकर, दीनदयाल धीवर, डिलेश्वर प्रसाद साहू और शिक्षिका संगीता पाटले उपस्थित थीं। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने सहभागिता की।



क्विज़ से सियाचिन तक: MY Bharat के माध्यम से युवाओं को अनूठा अनुभव

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एक अनोखी पहल के तहत, चुनिंदा युवा भारतीय प्रतिभागी डिजिटल क्विज़ की दुनिया से निकलकर सियाचिन—दुनिया के सबसे ऊँचे युद्धक्षेत्र—की बर्फीली ऊँचाइयों तक यात्रा करेंगे। यह विशेष एक्सपोज़र विज़िट युवा मामले विभाग, युवा मामले एवं खेल मंत्रालय द्वारा आयोजित की जा रही है, जो युवाओं को नेतृत्व, सहनशीलता और राष्ट्र निर्माण का अनुभव प्रदान करने का दुर्लभ अवसर है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लॉन्च किए गए MY Bharat प्लेटफ़ॉर्म ने अब तक पूरे देश में 1.8 करोड़ से अधिक युवाओं को जोड़ते हुए उन्हें सेवा-भाव और कर्तव्य बोध की भारतीय परंपरा से जोड़ा है। स्वतंत्रता दिवस समारोह के अवसर पर, युवा मामले विभाग ने MY Bharat प्लेटफ़ॉर्म पर 1–15 अगस्त, 2025 तक नेशनल फ्लैग क्विज़ का आयोजन किया, जिसमें पूरे देश से 1.1 लाख से अधिक युवाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

इस क्विज़ के विजेताओं को अब 28–30 सितंबर, 2025 के बीच सियाचिन बेस कैंप ले जाया जाएगा, जहां वे भारतीय सशस्त्र बलों के साथ प्रत्यक्ष संवाद करेंगे।

अनुभव की विशेषताएँ:

  • युवाओं को सेना द्वारा सियाचिन में सेवा के संचालन, भौगोलिक और पारिस्थितिक चुनौतियों के बारे में जानकारी दी जाएगी।

  • प्रशिक्षण क्षेत्रों का दौरा, युद्ध स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित करना और कठोर परिस्थितियों में देश की रक्षा करने वाले सैनिकों के साथ बातचीत।

  • लेह की सांस्कृतिक धरोहर और स्थानीय उद्यमिता एवं व्यापार गतिविधियों का परिचय।

  • प्रत्येक प्रतिभागी भारतीय सेना के लिए हस्तलिखित पत्र लेकर जाएगा, जिसमें वे विकसित भारत के लिए अपने दृष्टिकोण और सशस्त्र बलों की भूमिका की सराहना व्यक्त करेंगे।

युवा मामले विभाग ने स्पष्ट किया कि यह पहल केवल शैक्षिक यात्रा तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य युवाओं को भारत के सीमा क्षेत्रों की समझ देना, सशस्त्र बलों का सम्मान बढ़ाना, और उनमें गौरव, जिम्मेदारी और देशभक्ति की भावना विकसित करना है। क्विज़ से सियाचिन तक की यह यात्रा MY Bharat के माध्यम से एक नई पीढ़ी के युवाओं को राष्ट्रीय सेवा के प्रति प्रतिबद्ध और देश को उज्जवल भविष्य की ओर ले जाने के लिए तैयार कर रही है।

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