Media24Media.com: सूर्य प्रकाश से संभव हुआ मजबूत C–F रासायनिक बंध का विघटन, DST के वैज्ञानिकों की बड़ी उपलब्धि

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सूर्य प्रकाश से संभव हुआ मजबूत C–F रासायनिक बंध का विघटन, DST के वैज्ञानिकों की बड़ी उपलब्धि

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वैज्ञानिकों ने सूर्य के प्रकाश से संचालित एक ऐसी विधि विकसित की है, जिससे रसायन विज्ञान के सबसे मजबूत बंधों में से एक — कार्बन–फ्लोरीन (C–F) बंध — को तोड़ा जा सकता है। यह बंधन पुनर्चक्रण, औषधि डिजाइन तथा औद्योगिक रसायनों के रूपांतरण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, लेकिन इसे तोड़ना अब तक एक बड़ी चुनौती रहा है।

कैटायनिक Tp-Bpy-Me COF पर फ्लोरोएरीन के C–F बंध का सूर्य प्रकाश द्वारा सक्रियण, जिसके परिणामस्वरूप अमिनेटेड उत्पाद बनते हैं, जिनका विभिन्न क्षेत्रों में संभावित उपयोग है।

फ्लोरीन युक्त कार्बनिक यौगिक अनुसंधान और उद्योग में व्यापक रूप से उपयोग किए जाते हैं, क्योंकि ये आसानी से उपलब्ध होते हैं और इनके संश्लेषण की विधियां अच्छी तरह स्थापित हैं। हालांकि, पॉली- या परफ्लोरीन युक्त यौगिकों को अधिक उपयोगी उत्पादों में बदलने के लिए C–F बंध का सक्रियण आवश्यक होता है। यह कार्य अत्यंत कठिन है, क्योंकि यह रासायनिक बंध असाधारण रूप से मजबूत होता है। परंपरागत रूप से C–F बंध को तोड़ने के लिए कठोर परिस्थितियों, महंगे धातु उत्प्रेरकों और अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है, जो प्रायः असतत और पर्यावरण के अनुकूल नहीं होते तथा सामान्यतः समरूपी (होमोजीनियस) स्थितियों में ही संभव होते हैं। इसके विपरीत, विषम (हेटेरोजीनियस) प्रकाश-उत्प्रेरक सूर्य के प्रकाश का उपयोग करते हुए हल्की परिस्थितियों में, पुन: उपयोग योग्य और अधिक पर्यावरण-अनुकूल विकल्प प्रदान करते हैं।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के अंतर्गत स्वायत्त संस्थान, एस. एन. बोस नेशनल सेंटर फॉर बेसिक साइंसेज़ के शोधकर्ताओं ने इस चुनौती को हल करने के लिए “कोवेलेंट ऑर्गेनिक फ्रेमवर्क्स” (COFs) नामक उन्नत सामग्री वर्ग का अध्ययन किया। उन्होंने एक विशेष रूप से अभिकल्पित COF विकसित किया, जो एक विषम प्रकाश-उत्प्रेरक (हेटेरोजीनियस फोटोकैटलिस्ट) के रूप में कार्य करता है। COFs क्रिस्टलीय, छिद्रपूर्ण पदार्थ होते हैं, जो अपनी उत्कृष्ट स्थिरता, बड़े सतह क्षेत्र और अत्यधिक अनुकूलनीय संरचना के लिए जाने जाते हैं। इनकी मॉड्यूलर संरचना वैज्ञानिकों को इनके गुणों में आसानी से परिवर्तन करने की अनुमति देती है, जिससे ये उत्प्रेरक अनुप्रयोगों के लिए अत्यंत आकर्षक बन जाते हैं।

शोध दल ने बाइपाइरीडीन-आधारित COF (Tp-Bpy) के साथ कार्य किया और इसमें एक सरल पश्च-संश्लेषण संशोधन किया, जिसे मिथाइलेशन कहा जाता है। इस एक-चरणीय परिवर्तन से COF का धनावेशित (कैटायनिक) रूप — Tp-Bpy-Me COF — प्राप्त हुआ, जबकि फ्रेमवर्क की मूल संरचना यथावत बनी रही। यह छोटा सा संशोधन अत्यंत प्रभावशाली सिद्ध हुआ, क्योंकि इससे COF अधिक इलेक्ट्रॉन-अल्प (इलेक्ट्रॉन-डिफिशिएंट) बन गया, उसकी दृश्य प्रकाश को अवशोषित करने की क्षमता बढ़ी और वह कठिन प्रकाश-उत्प्रेरित अभिक्रियाओं को अधिक कुशलता से संचालित करने में सक्षम हो गया।

नीली रोशनी के संपर्क में आने पर Tp-Bpy-Me COF ने मजबूत C–F बंधों को सफलतापूर्वक सक्रिय किया और अमीन न्यूक्लियोफाइल के आक्रमण के माध्यम से C–N बंधों के निर्माण को प्रोत्साहित किया, जो जटिल कार्बनिक अणुओं के निर्माण की एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। उल्लेखनीय रूप से, यह अभिक्रिया प्राकृतिक सूर्य प्रकाश में भी संपन्न हो सकी, जिससे यह प्रक्रिया न केवल प्रभावी बल्कि पर्यावरण-अनुकूल भी बन गई।

यह COF-आधारित प्रकाश-उत्प्रेरक का पहला ऐसा प्रदर्शन है, जो C–F बंधों को C–N बंधों में परिवर्तित करने में सक्षम है। इससे प्राप्त उत्पादों में औषधि और कृषि-रसायन उद्योगों में महत्वपूर्ण अनुप्रयोगों की व्यापक संभावनाएं हैं, साथ ही ये विभिन्न प्राकृतिक उत्पादों के निर्माण के लिए उपयोगी आधार सामग्री (बिल्डिंग ब्लॉक्स) के रूप में भी काम आ सकते हैं।

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