Media24Media.com: ग्रीन टी आधारित नैनोथेरेपी से अल्जाइमर रोग के इलाज की नई उम्मीद, DST वैज्ञानिकों की अहम उपलब्धि

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ग्रीन टी आधारित नैनोथेरेपी से अल्जाइमर रोग के इलाज की नई उम्मीद, DST वैज्ञानिकों की अहम उपलब्धि

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ग्रीन टी में पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट गुणों वाले पॉलीफेनॉल, एक न्यूरोट्रांसमीटर और एक अमीनो एसिड को एकीकृत करने वाले नैनोकणों पर आधारित एक नया मार्ग अल्जाइमर रोग (AD) के उपचार की दिशा में बड़ी संभावनाएं दिखा रहा है। यह तकनीक रोग की प्रगति की दिशा को बदलने, उसे धीमा करने, स्मृति में सुधार लाने और सोचने-समझने की क्षमता को सहारा देने में सक्षम हो सकती है।

नैनोकणों के संश्लेषण और अल्जाइमर रोग से लड़ने में उनकी बहु-कार्यात्मक भूमिका को दर्शाता हुआ चित्र।

अल्जाइमर रोग एक तेजी से बढ़ती वैश्विक स्वास्थ्य चुनौती है। जनसंख्या के वृद्ध होने के साथ-साथ यह रोग रोगी देखभाल, सामाजिक और आर्थिक बोझ के रूप में गंभीर समस्या बनता जा रहा है, जिससे प्रभावी उपचार और रोकथाम रणनीतियों की आवश्यकता और भी अधिक बढ़ गई है।

पारंपरिक अल्जाइमर उपचार आमतौर पर रोग की किसी एक ही विशेषता, जैसे एमाइलॉयड जमाव या ऑक्सीडेटिव तनाव, को लक्ष्य बनाते हैं, जिससे सीमित चिकित्सकीय लाभ मिलता है। जबकि अल्जाइमर एक बहु-कारक रोग है, जिसके लिए ऐसे बहु-कार्यात्मक उपचार मंच की आवश्यकता है जो एक साथ कई रोग-प्रक्रियाओं को संबोधित कर सके।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के अंतर्गत स्वायत्त संस्थान, इंस्टीट्यूट ऑफ नैनो साइंस एंड टेक्नोलॉजी (INST), मोहाली के वैज्ञानिकों ने नैनो प्रौद्योगिकी, आणविक जीवविज्ञान और संगणकीय मॉडलिंग को एकीकृत कर अल्जाइमर रोग के लिए एक बहु-कार्यात्मक उपचार विकसित किया है।

इस उपचार में ग्रीन टी में पाया जाने वाला शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट एपिगैलोकैटेचिन-3-गैलेट (EGCG), मूड और मस्तिष्क कार्यों के लिए महत्वपूर्ण न्यूरोट्रांसमीटर डोपामिन तथा कई कोशिकीय कार्यों में भूमिका निभाने वाला अमीनो एसिड ट्रिप्टोफैन को मिलाकर EGCG-डोपामिन-ट्रिप्टोफैन नैनोकण (EDTNPs) तैयार किए गए हैं। यह नैनोप्लेटफॉर्म एक साथ एमाइलॉयड जमाव, ऑक्सीडेटिव तनाव, सूजन और न्यूरॉन क्षति — अल्जाइमर रोग की चार प्रमुख रोगात्मक विशेषताओं — को लक्ष्य बनाता है।

इसके अलावा, ब्रेन-डिराइव्ड न्यूरोट्रॉफिक फैक्टर (BDNF) — जो न्यूरॉनों के जीवित रहने, वृद्धि और कार्य के लिए अत्यंत आवश्यक प्रोटीन है — को EDTNPs पर जोड़कर B-EDTNPs तैयार किए गए। इससे एक दोहरी-क्रिया वाला नैनोप्लेटफॉर्म विकसित हुआ, जो न केवल न्यूरोटॉक्सिक एमाइलॉयड बीटा (Aβ) प्रोटीन जमाव को हटाता है, बल्कि न्यूरॉनों के पुनर्जनन को भी बढ़ावा देता है। यह दृष्टिकोण अल्जाइमर उपचार में दुर्लभ है, क्योंकि यह एक साथ एंटीऑक्सीडेंट, एंटी-एमाइलॉयड और न्यूरोट्रॉफिक प्रभावों को जोड़ता है।

यह शोध कार्य INST, मोहाली के डॉ. जिबन ज्योति पांडा और उनकी टीम (हिमांशु शेखर पांडा एवं सुमित) द्वारा किया गया, जिसमें डॉ. अशोक कुमार दत्तुसालिया (नाइपर, रायबरेली) और डॉ. निशा सिंह (गुजरात बायोटेक्नोलॉजी विश्वविद्यालय) का सहयोग रहा। इस अध्ययन में जैव-संगत विधियों जैसे प्रेशर-असिस्टेड हाइड्रोथर्मल और इलेक्ट्रोस्टैटिक आधारित को-इनक्यूबेशन तकनीकों का उपयोग कर EDTNPs का संश्लेषण किया गया, तथा बाद में इन्हें BDNF से क्रियाशील बनाकर अधिक प्रभावी B-EDTNPs विकसित किए गए।

नैनोकणों की संभावित कार्यविधि को दर्शाता हुआ चित्र
[TrkB (ट्रोपोमायोसिन रिसेप्टर काइनेज़ B), PI3K (फॉस्फोइनोसाइटाइड 3-काइनेज़), MAPK (माइटोजन-एक्टिवेटेड प्रोटीन काइनेज़), PLCγ (फॉस्फोलाइपेस C-गामा), PP (पायरोफॉस्फेट)]।

प्रयोगशाला परीक्षणों और चूहों पर किए गए अध्ययनों में इन नैनोकणों ने विषैले प्रोटीन प्लाक को तोड़ा, सूजन को कम किया, मस्तिष्क कोशिकाओं के भीतर संतुलन को बहाल किया और स्मृति व सीखने की क्षमता में भी सुधार किया। संगणकीय सिमुलेशन से यह भी पुष्टि हुई कि ये नैनोकण हानिकारक Aβ फाइब्रिल्स से जुड़कर उन्हें आणविक स्तर पर विघटित कर देते हैं।

यह शोध प्रतिष्ठित जर्नल “Small” में प्रकाशित हुआ है। यह बहु-स्तरीय उपचार दृष्टिकोण अल्जाइमर रोगियों के लिए नई उम्मीद प्रदान कर सकता है। यह नैनोथेरेपी न केवल हानिकारक प्रोटीन जमाव को हटाती है, बल्कि मस्तिष्क में तनाव और सूजन को कम करती है तथा BDNF के माध्यम से तंत्रिका कोशिकाओं की वृद्धि को भी बढ़ावा देती है। दीर्घकाल में, यह उपचार रोगियों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार, देखभाल करने वालों के बोझ को कम करने और अल्जाइमर रोग के लिए अधिक प्रभावी व व्यक्तिगत उपचार विकसित करने में सहायक हो सकता है।

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