Media24Media.com: भारत के जहाज निर्माण क्षेत्र को नई दिशा: SBFAS और SbDS के परिचालन दिशानिर्देश अधिसूचित

Responsive Ad Slot

Latest

latest


 

भारत के जहाज निर्माण क्षेत्र को नई दिशा: SBFAS और SbDS के परिचालन दिशानिर्देश अधिसूचित

Document Thumbnail

नई दिल्ली- केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय (MoPSW) ने देश की घरेलू जहाज निर्माण क्षमता को सुदृढ़ करने और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के उद्देश्य से दो प्रमुख जहाज निर्माण पहलों—शिपबिल्डिंग फाइनेंशियल असिस्टेंस स्कीम (SBFAS) और शिपबिल्डिंग डेवलपमेंट स्कीम (SbDS)—के लिए परिचालन दिशानिर्देश अधिसूचित कर दिए हैं। स्वीकृत दिशानिर्देशों में योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए पारदर्शी और जवाबदेह ढांचा निर्धारित किया गया है।

इस अवसर पर केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा,

“प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत के जहाज निर्माण क्षेत्र को निर्णायक नीतिगत पुनर्संयोजन मिला है। ये दिशानिर्देश एक स्थिर और पारदर्शी ढांचा प्रदान करते हैं, जिससे घरेलू जहाज निर्माण को नई गति मिलेगी, ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत अग्र एवं पश्च कड़ियों को मजबूती मिलेगी, बड़े पैमाने पर निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा और विश्वस्तरीय क्षमता का निर्माण होगा। इससे भारत ‘विकसित भारत’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के मार्ग पर एक प्रमुख समुद्री राष्ट्र के रूप में स्थापित होगा।”

SBFAS योजना, जिसकी कुल राशि ₹24,736 करोड़ है, के तहत सरकार पोत की श्रेणी के अनुसार प्रति पोत 15% से 25% तक की वित्तीय सहायता प्रदान करेगी। इस योजना में छोटे सामान्य, बड़े सामान्य और विशेषीकृत पोतों के लिए श्रेणीबद्ध सहायता का प्रावधान है। सहायता का वितरण निर्धारित मील के पत्थरों से जुड़ी चरणबद्ध प्रणाली के तहत होगा और इसे सुरक्षा उपकरणों का समर्थन प्राप्त होगा। श्रृंखलाबद्ध (सीरीज़) ऑर्डर के लिए प्रोत्साहन भी शामिल किए गए हैं।

योजना के तहत जहाज निर्माण पहलों की समन्वित योजना और प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय जहाज निर्माण मिशन की स्थापना का भी प्रावधान है। साथ ही, शिपब्रेकिंग क्रेडिट नोट की व्यवस्था की गई है, जिसके अंतर्गत भारतीय शिपयार्ड में पोतों को स्क्रैप कराने वाले जहाज मालिकों को स्क्रैप मूल्य के 40% के बराबर क्रेडिट मिलेगा। इससे जहाज पुनर्चक्रण को नए जहाज निर्माण से जोड़ा जाएगा और परिपत्र अर्थव्यवस्था (सर्कुलर इकॉनमी) को बढ़ावा मिलेगा। स्वतंत्र मूल्यांकन और मील-पत्थर आधारित आकलन को अनिवार्य कर सुशासन और सार्वजनिक धन के कुशल उपयोग को सुदृढ़ किया गया है।

आगामी एक दशक में, SBFAS के माध्यम से लगभग ₹96,000 करोड़ मूल्य की जहाज निर्माण परियोजनाओं को समर्थन मिलने, घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा मिलने और समुद्री मूल्य शृंखला में रोजगार सृजन की संभावना है।

शिपबिल्डिंग डेवलपमेंट स्कीम (SbDS), जिसका बजटीय परिव्यय ₹19,989 करोड़ है, दीर्घकालिक क्षमता और दक्षता निर्माण पर केंद्रित है। इस योजना के तहत ग्रीनफील्ड जहाज निर्माण क्लस्टरों का विकास, मौजूदा ब्राउनफील्ड शिपयार्ड का विस्तार एवं आधुनिकीकरण, तथा अनुसंधान, डिज़ाइन, नवाचार और कौशल विकास को समर्थन देने के लिए भारतीय समुद्री विश्वविद्यालय के अंतर्गत इंडिया शिप टेक्नोलॉजी सेंटर की स्थापना का प्रावधान है।

SbDS के तहत ग्रीनफील्ड जहाज निर्माण क्लस्टरों को सामान्य समुद्री और आंतरिक अवसंरचना के लिए 50:50 केंद्र–राज्य विशेष प्रयोजन वाहन (SPV) के माध्यम से 100% पूंजीगत सहायता प्रदान की जाएगी। वहीं, मौजूदा शिपयार्ड को ड्राई डॉक, शिपलिफ्ट, फैब्रिकेशन सुविधाओं और स्वचालन प्रणालियों जैसी महत्वपूर्ण अवसंरचना के ब्राउनफील्ड विस्तार के लिए 25% पूंजीगत सहायता मिलेगी। सहायता का वितरण मील-पत्थर आधारित होगा और स्वतंत्र मूल्यांकन एजेंसियों द्वारा इसकी निगरानी की जाएगी।

इस योजना में क्रेडिट रिस्क कवरेज फ्रेमवर्क भी शामिल है, जिसके अंतर्गत प्री-शिपमेंट, पोस्ट-शिपमेंट और विक्रेता-डिफॉल्ट जोखिमों के लिए सरकारी समर्थनयुक्त बीमा उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे परियोजनाओं की बैंकबिलिटी और वित्तीय मजबूती बढ़ेगी।

आधुनिक अवसंरचना और कुशल कार्यबल के सृजन के साथ, मंत्रालय के अनुसार 2047 तक भारत की वाणिज्यिक जहाज निर्माण क्षमता बढ़कर लगभग 4.5 मिलियन ग्रॉस टनेज प्रति वर्ष होने का अनुमान है।

इस पर और विस्तार से बोलते हुए सोनोवाल ने कहा,

“विकसित भारत का अर्थ है भारत के औद्योगिक आत्मविश्वास को पुनः स्थापित करना। जहाज निर्माण और समुद्री क्षमताओं को सुदृढ़ कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने सुनिश्चित किया है कि भारत की विकास यात्रा आत्मनिर्भरता, कौशल और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता पर आधारित हो—जो आत्मनिर्भर भारत की भावना के अनुरूप है।”

SBFAS और SbDS—दोनों योजनाएं 31 मार्च 2036 तक प्रभावी रहेंगी, जिनका सैद्धांतिक रूप से 2047 तक विस्तार प्रस्तावित है। ये योजनाएं रोजगार सृजन, स्वदेशी प्रौद्योगिकी विकास को प्रोत्साहन देने और भारत की समुद्री सुरक्षा एवं आर्थिक सुदृढ़ता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

इन दिशानिर्देशों को औपचारिक रूप से स्वीकृति प्रदान कर मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट https://shipmin.gov.in पर प्रकाशित कर दिया गया है, ताकि योजनाओं का संरचित और पारदर्शी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके।

Don't Miss
© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.