Media24Media.com: पहली बार तिरंगे पर कब लिखा गया था ‘वंदे मातरम्’? 150वीं वर्षगांठ पर जानिए राष्ट्रगीत से जुड़ी दिलचस्प बातें

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पहली बार तिरंगे पर कब लिखा गया था ‘वंदे मातरम्’? 150वीं वर्षगांठ पर जानिए राष्ट्रगीत से जुड़ी दिलचस्प बातें

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 150 Years of Vande Mataram : देश आज राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ मना रहा है। भारत के संविधान निर्माताओं ने इसे राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के समान दर्जा प्रदान किया था। बहुत कम लोगों को यह जानकारी है कि भारत के राष्ट्रध्वज तिरंगे के विकास में भी ‘वंदे मातरम्’ का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।


स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान जब पहली बार भारत का ध्वज फहराया गया था, तो उसके बीचों-बीच संस्कृत के ये दो शब्द — “वंदे मातरम्” - अंकित थे।

संविधान सभा ने दिया राष्ट्रगीत का दर्जा

24 जनवरी 1950 को संविधान को अपनाने के अवसर पर देश के पहले राष्ट्रपति और संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने ‘वंदे मातरम्’ को राष्ट्रगीत का दर्जा देने की घोषणा की थी। उन्होंने कहा था, “वंदे मातरम् का गान, जिसका भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में ऐतिहासिक महत्व रहा है, जन-गण-मन के समान सम्मानित होगा और दोनों को समान दर्जा प्राप्त रहेगा।”

संन्यासी विद्रोह से मिली प्रेरणा

150 वर्ष पहले ‘वंदे मातरम्’ की रचना महान साहित्यकार बंकिम चंद्र चटर्जी ने की थी। यह गीत उनके प्रसिद्ध उपन्यास ‘आनंदमठ’ का हिस्सा है, जिसकी पृष्ठभूमि संन्यासी विद्रोह पर आधारित है। 1870 के दशक में बंगाल में भयंकर अकाल और ब्रिटिश शासन की दमनकारी नीतियों के कारण जनजीवन संकट में था। इसी काल में लोगों को जागृत करने के उद्देश्य से यह विद्रोह भड़का। बंकिम चंद्र ने 7 नवंबर 1875 (अक्षय नवमी) के दिन इस अमर गीत की रचना की, जो देशभक्ति और आत्मबल का प्रतीक बन गया।

ब्रिटिश शासन के खिलाफ प्रतिरोध का प्रतीक

उस दौर में ब्रिटिश सरकार ने भारतीयों को ‘गॉड सेव द क्वीन’ गीत गाने का आदेश दिया था। इसके विरोध में ‘वंदे मातरम्’ भारतीय अस्मिता और स्वतंत्रता का प्रतीक बनकर उभरा। जल्द ही यह गीत आज़ादी के आंदोलन का नारा बन गया।

1906 में पहली बार तिरंगे पर उकेरा गया ‘वंदे मातरम्’

1906 में कलकत्ता (अब कोलकाता) के पारसी बगान स्क्वायर में जब पहली बार भारत का तिरंगा फहराया गया, तो उसके बीचों-बीच ‘वंदे मातरम्’ लिखा गया था। इस झंडे का ऊपरी भाग हरा था, जिस पर आठ कमल के फूल बने थे। बीच में पीली पट्टी और नीचे लाल रंग की पट्टी थी।

1907 में भीकाजी कामा ने पेरिस में फहराया तिरंगा

एक वर्ष बाद 1907 में मैडम भीकाजी कामा ने पेरिस में संशोधित तिरंगा फहराया। इसमें ऊपर केसरिया, बीच में पीला और नीचे हरा रंग था। इस झंडे पर भी ‘वंदे मातरम्’ अंकित था। हालाँकि, जुलाई 1947 में जिस तिरंगे को भारत के राष्ट्रध्वज के रूप में अपनाया गया, उसका डिज़ाइन इन दोनों से भिन्न था।

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