Media24Media.com: #वंदे मातरम्

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राजनीतिक तापमान बढ़ा: आज राज्यसभा में वंदे मातरम् पर विशेष चर्चा

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 नई दिल्ली। संसद का आज का सत्र ऐतिहासिक होने जा रहा है, क्योंकि राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में विशेष चर्चा आयोजित की गई है। सोमवार को लोकसभा में हुई व्यापक बहस के बाद आज यह मुद्दा राज्यसभा में आगे बढ़ाया जाएगा। दोपहर 1 बजे से शुरू होने वाली इस चर्चा के लिए सदन में विशेष व्यवस्था की गई है, जिसमें वंदे मातरम् की विरासत, स्वतंत्रता संग्राम में उसके योगदान और उसके राष्ट्रीय महत्व पर विस्तार से विचार-विमर्श होगा।


राज्यसभा में चर्चा की शुरुआत करेंगे अमित शाह

राज्यसभा में चर्चा की शुरुआत केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह करेंगे। माना जा रहा है कि शाह अपने संबोधन में वंदे मातरम् के रचनात्मक सफर, स्वतंत्रता आंदोलन में उसकी भूमिका और देश के भावनात्मक ताने-बाने में इसकी प्रतीकात्मक प्रभाव पर प्रकाश डालेंगे।

चर्चा के समापन पर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे. पी. नड्डा अपनी टिप्पणी देंगे और गीत की 150 वर्ष की यात्रा तथा इसकी वर्तमान संदर्भों में प्रासंगिकता को रेखांकित करेंगे। इसके अलावा भाजपा नेता राधामोहन दास अग्रवाल, के. लक्ष्मण, घनश्याम तिवारी और सतपाल शर्मा भी अपने विचार रखेंगे।

लोकसभा में रहा वंदे मातरम् के सम्मान का दिन

सोमवार को लोकसभा में दिन राष्ट्रीय गीत के सम्मान में समर्पित रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस चर्चा को “राष्ट्रीय गौरव का क्षण” बताया। उन्होंने कहा कि “वंदे मातरम् वह मंत्र है जिसने स्वतंत्रता आंदोलन को नई ऊर्जा और दिशा दी। जिस गीत ने देशभक्ति की भावना को ऊंचाइयों तक पहुंचाया, उसे याद करना हर भारतीय के लिए गर्व की बात है।”

चुनाव सुधार पर आज गरमा सकती है बहस

संसद में आज चुनाव सुधार पर भी गर्मागर्म बहस की उम्मीद है। विपक्ष SIR प्रक्रिया और चुनाव आयोग की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठा सकता है। इस बहस की शुरुआत नेता विपक्ष राहुल गांधी करेंगे, जिससे सदन में राजनीतिक तापमान बढ़ना तय माना जा रहा है।

पहली बार तिरंगे पर कब लिखा गया था ‘वंदे मातरम्’? 150वीं वर्षगांठ पर जानिए राष्ट्रगीत से जुड़ी दिलचस्प बातें

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 150 Years of Vande Mataram : देश आज राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ मना रहा है। भारत के संविधान निर्माताओं ने इसे राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के समान दर्जा प्रदान किया था। बहुत कम लोगों को यह जानकारी है कि भारत के राष्ट्रध्वज तिरंगे के विकास में भी ‘वंदे मातरम्’ का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।


स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान जब पहली बार भारत का ध्वज फहराया गया था, तो उसके बीचों-बीच संस्कृत के ये दो शब्द — “वंदे मातरम्” - अंकित थे।

संविधान सभा ने दिया राष्ट्रगीत का दर्जा

24 जनवरी 1950 को संविधान को अपनाने के अवसर पर देश के पहले राष्ट्रपति और संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने ‘वंदे मातरम्’ को राष्ट्रगीत का दर्जा देने की घोषणा की थी। उन्होंने कहा था, “वंदे मातरम् का गान, जिसका भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में ऐतिहासिक महत्व रहा है, जन-गण-मन के समान सम्मानित होगा और दोनों को समान दर्जा प्राप्त रहेगा।”

संन्यासी विद्रोह से मिली प्रेरणा

150 वर्ष पहले ‘वंदे मातरम्’ की रचना महान साहित्यकार बंकिम चंद्र चटर्जी ने की थी। यह गीत उनके प्रसिद्ध उपन्यास ‘आनंदमठ’ का हिस्सा है, जिसकी पृष्ठभूमि संन्यासी विद्रोह पर आधारित है। 1870 के दशक में बंगाल में भयंकर अकाल और ब्रिटिश शासन की दमनकारी नीतियों के कारण जनजीवन संकट में था। इसी काल में लोगों को जागृत करने के उद्देश्य से यह विद्रोह भड़का। बंकिम चंद्र ने 7 नवंबर 1875 (अक्षय नवमी) के दिन इस अमर गीत की रचना की, जो देशभक्ति और आत्मबल का प्रतीक बन गया।

ब्रिटिश शासन के खिलाफ प्रतिरोध का प्रतीक

उस दौर में ब्रिटिश सरकार ने भारतीयों को ‘गॉड सेव द क्वीन’ गीत गाने का आदेश दिया था। इसके विरोध में ‘वंदे मातरम्’ भारतीय अस्मिता और स्वतंत्रता का प्रतीक बनकर उभरा। जल्द ही यह गीत आज़ादी के आंदोलन का नारा बन गया।

1906 में पहली बार तिरंगे पर उकेरा गया ‘वंदे मातरम्’

1906 में कलकत्ता (अब कोलकाता) के पारसी बगान स्क्वायर में जब पहली बार भारत का तिरंगा फहराया गया, तो उसके बीचों-बीच ‘वंदे मातरम्’ लिखा गया था। इस झंडे का ऊपरी भाग हरा था, जिस पर आठ कमल के फूल बने थे। बीच में पीली पट्टी और नीचे लाल रंग की पट्टी थी।

1907 में भीकाजी कामा ने पेरिस में फहराया तिरंगा

एक वर्ष बाद 1907 में मैडम भीकाजी कामा ने पेरिस में संशोधित तिरंगा फहराया। इसमें ऊपर केसरिया, बीच में पीला और नीचे हरा रंग था। इस झंडे पर भी ‘वंदे मातरम्’ अंकित था। हालाँकि, जुलाई 1947 में जिस तिरंगे को भारत के राष्ट्रध्वज के रूप में अपनाया गया, उसका डिज़ाइन इन दोनों से भिन्न था।

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