Media24Media.com: आतंकवादी हों या उनके आका- भारत का जवाब एक ही: सेना प्रमुख द्विवेदी

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आतंकवादी हों या उनके आका- भारत का जवाब एक ही: सेना प्रमुख द्विवेदी

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 नई दिल्ली। सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने आतंकवाद, पाकिस्तान, चीन सीमा और जम्मू-कश्मीर की स्थिति पर महत्वपूर्ण बयान दिए। चाणक्य डिफेंस डायलॉग में बोलते हुए उन्होंने कहा कि भारत आतंकवाद और उसे बढ़ावा देने वाले किसी भी तत्व के प्रति सख्त है।


उन्होंने स्पष्ट कहा-हमारे लिए आतंकवादी और आतंकवाद के आका एक बराबर हैं। जो भी आतंकवाद को बढ़ावा देगा, हम उसे जवाब देंगे।

पाकिस्तान पर कड़ा संदेश: “पानी और खून साथ नहीं चल सकते

ऑपरेशन सिंदूर 2 का जिक्र करते हुए सेना प्रमुख ने पाकिस्तान को सीधे शब्दों में चेतावनी दी। उन्होंने कहा-
“सिंदूर 2 एक नई चेतावनी है। पानी और खून एक साथ नहीं चल सकता। अगर आप ब्लैकमेल करेंगे, तो हम शांत नहीं बैठेंगे। अभी फिल्म शुरू भी नहीं हुई थी और 88 घंटों में समझा दिया गया। यह सिर्फ ट्रेलर था।”

उन्होंने साफ कहा कि भारत किसी भी ब्लैकमेल से नहीं डरता और आवश्यकता पड़ने पर हर स्तर पर जवाब देने के लिए तैयार है।

चीन सीमा पर सुधार की बात

सेना प्रमुख ने पिछले एक वर्ष में चीन सीमा पर कई सकारात्मक बदलाव होने की बात कही।
उन्होंने बताया कि—

दोनों देशों के नेताओं के बीच वार्ता हुई है।

विवेकपूर्ण कदमों से तनाव कम करने पर सहमति बनी है।

रक्षा मंत्री की यात्रा के दौरान भी इस बात पर जोर दिया गया कि “बर्फ पिघलनी चाहिए या नहीं”—इस पर फैसला जरूरी है।

उन्होंने कहा कि सीमा पर संवाद बढ़ने से स्थिति में सुधार होगा।

जम्मू-कश्मीर में बड़ा परिवर्तन

जनरल द्विवेदी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में 5 अगस्त 2019 के बाद से बड़ी तेजी से बदलाव हुए हैं।
उन्होंने बताया—

आतंकवाद में भारी गिरावट आई है।

अब पत्थरबाजी लगभग बंद हो चुकी है।

इस साल 31 आतंकवादी मारे गए, जिनमें 21 पाकिस्तानी थे।

शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा विस्तार: कॉलेज, IIT, IIM खुल रहे हैं।

स्कूलों की संख्या में 21% का इजाफा हुआ है।

उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोग देश के अन्य हिस्सों में जाकर काम करना चाहते हैं और जो परिवार पहले परिस्थितियों के कारण बाहर चले गए थे, वे अब वापस लौटकर अपनी जिम्मेदारी निभाना चाहते हैं।

म्यांमार पर बयान

म्यांमार की स्थिति पर उन्होंने चिंता व्यक्त की और कहा- “पड़ोसी देश में परेशानी होती है तो असर हम पर भी पड़ता है। म्यांमार में अस्थिरता के कारण वहां के लोग शरणार्थी के रूप में आए। हम कोशिश कर रहे हैं कि वे स्वेच्छा से वापस लौटें। भारत जल्द ही म्यांमार के साथ मिलकर इन मुद्दों को सुलझाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।”

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