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एड्स मुक्त भारत की ओर: NACP-V के साथ राष्ट्रीय प्रयासों का सशक्तीकरण

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  • विश्व एड्स दिवस हर वर्ष 1 दिसंबर को मनाया जाता है।
  • 2025 का थीम है: “विघटन पर विजय, एड्स प्रतिक्रिया का रूपांतरण”
  • भारत में मजबूत नीतिगत ढांचा: HIV/AIDS (रोकथाम और नियंत्रण) अधिनियम, 2017 जैसे ऐतिहासिक कदम एचआईवी के साथ जी रहे लोगों के अधिकारों की रक्षा करते हैं और भेदभाव को प्रतिबंधित करते हैं।
  • राष्ट्रीय एड्स और एसटीडी नियंत्रण कार्यक्रम (NACP) के माध्यम से प्रगति: भारत ने नए संक्रमणों में कमी लाने और ART तक पहुंच बढ़ाने में निरंतर सफलता हासिल की है।

परिचय

विश्व एड्स दिवस हर वर्ष 1 दिसंबर को एक वैश्विक अभियान के रूप में मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य HIV/AIDS महामारी के बारे में जागरूकता बढ़ाना, HIV से संबंधित बीमारियों से मरने वाले लोगों को याद करना और एचआईवी के साथ जी रहे लोगों के साथ एकजुटता प्रदर्शित करना है। इसे पहली बार 1988 में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा मनाया गया था और तब से यह सरकारों, समुदायों और व्यक्तियों के लिए रोग के खिलाफ लड़ाई में एकजुट होने का प्रमुख मंच बन गया है।

इस वर्ष का थीम “विघटन पर विजय, एड्स प्रतिक्रिया का रूपांतरण” है। यह न सिर्फ अब तक की प्रगति को सुरक्षित रखने, बल्कि HIV सेवाओं को अधिक सुदृढ़, न्यायसंगत और समुदाय-नेतृत्व वाले मॉडल में बदलने की आवश्यकता पर जोर देता है। यह थीम उन व्यवधानों से निपटने की तात्कालिकता को रेखांकित करता है, जो महामारी, संघर्षों और असमानताओं के कारण स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच को प्रभावित करते हैं।

भारत में विश्व एड्स दिवस को राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (NACO) और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के नेतृत्व में देशभर में जागरूकता अभियानों, समुदाय-आधारित कार्यक्रमों और सरकारी प्रतिबद्धताओं के साथ व्यापक स्तर पर मनाया जाता है।

भारत की यात्रा

भारत का एड्स नियंत्रण कार्यक्रम वैश्विक स्तर पर एक सफल मॉडल के रूप में माना जाता है।
प्रारंभिक चरण (1985–1991) का उद्देश्य HIV मामलों की पहचान, सुरक्षित रक्त संक्रमण सुनिश्चित करना और लक्षित जागरूकता फैलाना था।

1992 में राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (NACO) और राष्ट्रीय एड्स एवं यौन संचारित रोग नियंत्रण कार्यक्रम (NACP) की स्थापना के साथ भारत की प्रतिक्रिया मजबूत हुई। समय के साथ, कार्यक्रम का ध्यान अधिक विकेंद्रीकृत दृष्टिकोण, NGOs की भागीदारी और PLHIV नेटवर्क्स को सशक्त बनाने की ओर बढ़ा।

राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम (NACP)

NACP ने पाँच चरणों में विकास किया है, जिनमें जागरूकता से लेकर व्यापक रोकथाम, परीक्षण, उपचार और स्थिरता तक का समावेश है:

NACP-I (1992–1999)

  • भारत का पहला व्यापक HIV/AIDS नियंत्रण कार्यक्रम

  • लक्ष्य: HIV के प्रसार को धीमा करना और एड्स से बीमारी/मृत्यु को कम करना

NACP-II (1999–2006)

मुख्य उद्देश्यों:

  • HIV के प्रसार में कमी

  • दीर्घकालिक राष्ट्रीय क्षमता का निर्माण

NACP-III (2007–2012)

लक्ष्य: 2012 तक HIV महामारी को रोकना और उलटना।
रणनीति:

  • उच्च जोखिम समूहों (HRGs) और सामान्य जनसंख्या में रोकथाम को बढ़ाना

  • रोकथाम, देखभाल, समर्थन और उपचार सेवाओं का एकीकरण

मुख्य उपलब्धि: जिला एड्स रोकथाम और नियंत्रण इकाइयों (DAPCUs) की स्थापना, जिसमें कलंक/भेदभाव रिपोर्टिंग शामिल है।

NACP-IV (2012–2017)

उद्देश्य: महामारी को तेज़ी से उलटना और एकीकृत प्रतिक्रिया सुनिश्चित करना।

मुख्य लक्ष्य:

  • नए संक्रमणों में 50% की कमी

  • PLHIV को व्यापक देखभाल, समर्थन व उपचार

विस्तारित अवधि (2017–2021) की प्रमुख पहलें:

  • HIV/AIDS (रोकथाम और नियंत्रण) अधिनियम, 2017: PLHIV के खिलाफ भेदभाव पर प्रतिबंध, गोपनीयता की सुरक्षा और सूचित सहमति अनिवार्य।

  • मिशन संपर्क: ART छोड़ चुके PLHIV का पता लगाकर उन्हें सेवाओं से पुनः जोड़ना।

  • ‘टेस्ट एंड ट्रीट’ नीति: निदान के तुरंत बाद ART शुरू।

  • वायरल लोड की नियमित निगरानी।

NACP-V (2021–2026)

₹15,471.94 करोड़ के बजट के साथ एक केंद्रीय क्षेत्र योजना।
लक्ष्य:
UN SDG 3.3 के अनुरूप 2030 तक HIV/AIDS को सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरे के रूप में समाप्त करना।

HIV/AIDS जागरूकता के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदम

1. राष्ट्रीय स्तर पर जागरूकता अभियान मजबूत करना

NACO बहुआयामी मीडिया अभियानों का नेतृत्व करता है—टीवी, रेडियो, डिजिटल मीडिया, सोशल मीडिया सभी प्लेटफार्मों पर।


2. बाहरी प्रचार का विस्तार

होर्डिंग्स, बस पैनलों, सूचना कियोस्क, लोक-नृत्य/नाटक और IEC वैन के माध्यम से देशभर में जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाते हैं।


3. समुदाय-स्तरीय कार्यक्रम

महिला स्वयं सहायता समूहों, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, आशा कार्यकर्ताओं, पंचायत सदस्यों आदि के लिए प्रशिक्षण और संवेदनशीलता कार्यक्रम।

4. उच्च जोखिम समूहों के लिए लक्षित हस्तक्षेप

अक्टूबर 2025 तक देशभर में 1587 लक्षित हस्तक्षेप परियोजनाएँ सक्रिय हैं।

5. कलंक और भेदभाव के खिलाफ थीम आधारित अभियान

यह अभियान कार्यस्थलों, स्वास्थ्य संस्थानों, शैक्षणिक संस्थानों और समुदायों में लागू किए जाते हैं।


6. राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में लोकपाल की नियुक्ति

HIV/AIDS अधिनियम, 2017 के तहत 34 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में लोकपाल नियुक्त हैं, जो PLHIV से संबंधित भेदभाव की शिकायतों का समाधान करते हैं।

निष्कर्ष

भारत की HIV/AIDS के खिलाफ लड़ाई दृढ़ता, नवाचार और साझेदारी की उल्लेखनीय कहानी प्रस्तुत करती है।
NACP के प्रारंभिक चरणों से लेकर वर्तमान NACP-V तक, भारत ने अधिकार-आधारित नीतियों, समुदाय-आधारित हस्तक्षेपों, मीडिया अभियानों और व्यापक स्वास्थ्य ढांचे के माध्यम से वैश्विक नेतृत्व दिखाया है।

भारत में HIV संक्रमणों में गिरावट वैश्विक औसत से अधिक है, जिसका श्रेय व्यापक परीक्षण, ART तक बढ़ी पहुंच, उच्च जोखिम समूहों तक लक्षित सेवाओं और कलंक-निरोधक पहलों को जाता है।

यह यात्रा तत्काल संकट प्रबंधन से आगे बढ़कर मानवाधिकारों की रक्षा, सामुदायिक सशक्तिकरण और स्थायी स्वास्थ्य प्रणालियों की ओर अग्रसर एक दीर्घकालिक सफलता का संकेत देती है।


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