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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने धरसींवा विधानसभा को दी निःशुल्क एम्बुलेंस की सौगात

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डीएमएफ से 19.65 लाख रुपये की लागत से उपलब्ध कराई गई आधुनिक एम्बुलेंस, आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगी नई मजबूती

हर जीवन अनमोल, समय पर उपचार सुनिश्चित करने के लिए सरकार निरंतर प्रयासरत : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास से धरसींवा विधानसभा क्षेत्र की जनता को निःशुल्क एम्बुलेंस की सौगात दी। मुख्यमंत्री ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर एम्बुलेंस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया तथा विधायक अनुज शर्मा और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की उपस्थिति में एम्बुलेंस के चालक को चाबी सौंपी। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य प्रदेश के प्रत्येक नागरिक तक समय पर, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना है। इसी सोच के अनुरूप प्रदेश में स्वास्थ्य अधोसंरचना को लगातार सुदृढ़ किया जा रहा है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में लोगों को त्वरित चिकित्सा सहायता उपलब्ध हो सके।


मुख्यमंत्री साय ने धरसींवा विधानसभा क्षेत्र के नागरिकों को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि किसी भी मरीज के लिए उपचार के शुरुआती क्षण अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। समय पर अस्पताल पहुंचने से अनेक गंभीर परिस्थितियों में जीवन बचाया जा सकता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह नई एम्बुलेंस गर्भवती महिलाओं, गंभीर रूप से बीमार मरीजों, बुजुर्गों तथा सड़क दुर्घटनाओं या अन्य आकस्मिक घटनाओं में घायल लोगों को शीघ्र स्वास्थ्य संस्थानों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा कि यह सुविधा न केवल चिकित्सा सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाएगी, बल्कि क्षेत्रवासियों में स्वास्थ्य सुरक्षा का विश्वास भी मजबूत करेगी।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश सरकार ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए निरंतर कार्य कर रही है। अस्पतालों के उन्नयन, आधुनिक चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता, विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति, दवाइयों की सुगम उपलब्धता और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने की दिशा में अनेक महत्वपूर्ण पहल की जा रही हैं। उनका कहना था कि स्वस्थ नागरिक ही समृद्ध समाज और विकसित राज्य की आधारशिला होते हैं, इसलिए जनस्वास्थ्य से जुड़े प्रत्येक प्रयास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।

इस अवसर पर धरसींवा विधानसभा के विधायक अनुज शर्मा ने कहा कि क्षेत्रवासियों की लंबे समय से एक आधुनिक एम्बुलेंस की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए जिला खनिज न्यास निधि (डीएमएफ) के माध्यम से लगभग 19 लाख 65 हजार रुपये की लागत से यह अत्याधुनिक एम्बुलेंस उपलब्ध कराई गई है। उन्होंने कहा कि इस सुविधा के शुरू होने से धरसींवा क्षेत्र के लोगों को आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं पहले की तुलना में अधिक तेज़ और प्रभावी ढंग से मिल सकेंगी।

उन्होंने बताया कि यह एम्बुलेंस सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, धरसींवा को सौंपी गई है, जहां से इसका संचालन किया जाएगा। यह सेवा चौबीसों घंटे क्षेत्रवासियों को उपलब्ध रहेगी। उन्होंने कहा कि गंभीर मरीजों को रेफरल अस्पतालों तक सुरक्षित एवं समयबद्ध पहुंचाने में भी यह एम्बुलेंस अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी।


उल्लेखनीय है कि धरसींवा विधानसभा क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है। डीएमएफ के माध्यम से उपलब्ध कराई गई यह निःशुल्क एम्बुलेंस क्षेत्र के हजारों नागरिकों को आपातकालीन चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के साथ-साथ स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और गुणवत्ता को भी नई मजबूती प्रदान करेगी।

मलेरिया पर निर्णायक प्रहार जारी, एक भी मृत्यु न हो यही हमारा लक्ष्य : स्वास्थ्य मंत्री

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प्रदेश में एनॉलॉग पनीर पर प्रभावी प्रतिबंध सुनिश्चित करने के निर्देश, मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान से 34 लाख से अधिक लोगों की हुई स्वास्थ्य जांच

रायपुर- स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा है कि प्रदेश सरकार दूरस्थ और संवेदनशील क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से बस्तर अंचल में संचालित मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं, जिसके माध्यम से लाखों लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंची हैं तथा गंभीर बीमारियों की समय पर पहचान और उपचार संभव हुआ है।

रायपुर में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में स्वास्थ्य मंत्री जायसवाल ने बताया कि मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के अंतर्गत 34.29 लाख से अधिक नागरिकों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया, जो लक्षित आबादी का लगभग 99 प्रतिशत है। अभियान के दौरान मलेरिया, टीबी, सिकल सेल, कुष्ठ रोग, मुख कैंसर सहित अन्य गंभीर बीमारियों की पहचान कर समय पर उपचार प्रारंभ किया गया। वहीं 60 हजार से अधिक गंभीर मरीजों को उच्च स्वास्थ्य संस्थानों में रेफर किया गया तथा 10,938 उच्च जोखिम गर्भवती महिलाओं की विशेष निगरानी और उपचार सुनिश्चित किया गया।

उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में मलेरिया के कुछ मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग पूरी सतर्कता के साथ कार्य कर रहा है। प्रदेश के स्वास्थ्य कार्यकर्ता, मितानिन, एएनएम और मैदानी अमला गांव-गांव पहुंचकर जांच, उपचार, सर्वेक्षण और जनजागरूकता गतिविधियों का संचालन कर रहे हैं। मलेरिया नियंत्रण एवं उन्मूलन के लिए विभाग द्वारा निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्री ने  कहा कि मलेरिया से एक भी मृत्यु न हो, यही हमारा लक्ष्य है। इसके लिए समय पर जांच, त्वरित उपचार, सतत निगरानी और सामुदायिक जागरूकता पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि रणनीतिक कार्ययोजना, सतत निगरानी और जनसहभागिता के परिणामस्वरूप बस्तर संभाग की मलेरिया पॉजिटिविटी दर 4.60 प्रतिशत से घटकर 0.48 प्रतिशत रह गई है। वहीं राज्य का वार्षिक परजीवी सूचकांक (एपीआई) 5.21 से घटकर 0.90 तक पहुंच गया है। यह उपलब्धि मलेरिया नियंत्रण की दिशा में स्वास्थ्य विभाग के सतत प्रयासों को दर्शाती है।

मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी देते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि विगत ढाई वर्षों में प्रदेश में 11.89 लाख से अधिक संस्थागत प्रसव सम्पन्न हुए हैं। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के माध्यम से गर्भवती महिलाओं की नियमित विशेषज्ञ जांच, उच्च जोखिम गर्भावस्थाओं की पहचान तथा आवश्यक उपचार सुनिश्चित किया जा रहा है।

आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए प्रदेश में 375 नई 108 संजीवनी एक्सप्रेस एम्बुलेंस संचालित की गई हैं। जनवरी 2024 से जून 2026 के बीच 6.50 लाख से अधिक नागरिकों को समयबद्ध आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई गईं, जिससे दुर्घटना, प्रसूति एवं अन्य आपात परिस्थितियों में त्वरित चिकित्सा सहायता सुनिश्चित हो सकी।

स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि गुणवत्तापूर्ण जांच सुविधाओं को आमजन तक पहुंचाने के लिए HLL Lifecare Limited के सहयोग से राज्य के 1,051 स्वास्थ्य संस्थानों में आधुनिक पैथोलॉजी जांच सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। हब एंड स्पोक मॉडल, आईटी आधारित रिपोर्टिंग प्रणाली एवं गुणवत्ता निगरानी व्यवस्था के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों के नागरिकों को भी विश्वसनीय और समयबद्ध जांच सुविधियां उपलब्ध हो रही हैं।

उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के साथ-साथ प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसी क्रम में प्रदेश के सभी 10  मेडिकल कॉलेजों में पैरामेडिकल पाठ्यक्रम प्रारंभ किए जाएंगे। इससे स्वास्थ्य संस्थानों के लिए आवश्यक तकनीकी एवं पैरामेडिकल मानव संसाधन उपलब्ध होंगे तथा प्रदेश के युवाओं को स्वास्थ्य क्षेत्र में रोजगारोन्मुखी शिक्षा एवं प्रशिक्षण के नए अवसर प्राप्त होंगे।

प्रेस कांफ्रेंस के दौरान स्वास्थ्य मंत्री ने खाद्य सुरक्षा को लेकर भी सख्त रुख अपनाते हुए  प्रदेश में एनॉलॉग पनीर के उपयोग एवं विक्रय पर प्रभावी प्रतिबंध सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आम नागरिकों को सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है तथा खाद्य सुरक्षा मानकों के उल्लंघन पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में दुर्गम बैगा अंचल तक पहुँची विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा

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छिरहिट्टी में विशेष स्वास्थ्य शिविर से 164 ग्रामीणों को मिला निःशुल्क उपचार, विशेषज्ञ चिकित्सकों ने गांव पहुंचकर दी स्वास्थ्य सेवाएं

स्वास्थ्य विभाग की संवेदनशील पहल से बैगा आदिवासी परिवारों को घर के नजदीक मिला गुणवत्तापूर्ण उपचार

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा अंतिम व्यक्ति तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने की प्रतिबद्धता लगातार धरातल पर दिखाई दे रही है। इसी क्रम में स्वास्थ्य विभाग छत्तीसगढ़ द्वारा विशेष पिछड़ी जनजातीय बैगा समुदाय तक स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से विकासखंड गौरेला के दुर्गम बैगा आदिवासी बाहुल्य ग्राम छिरहिट्टी (साल्हेघोरी) में विशेष स्वास्थ्य शिविर आयोजित किया गया। शिविर में विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने गांव पहुंचकर ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण किया तथा निःशुल्क उपचार, परामर्श एवं दवाइयां उपलब्ध कराईं। इससे दूरस्थ क्षेत्र के लोगों को अपने गांव में ही विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिला।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. रामेश्वर शर्मा के मार्गदर्शन में आयोजित इस शिविर में कुल 164 ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण एवं उपचार किया गया। मौसमी बीमारियों की रोकथाम, समय पर रोगों की पहचान तथा बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लगाए गए इस शिविर में ग्रामीणों की विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं की जांच कर आवश्यक चिकित्सकीय परामर्श दिया गया। जरूरतमंद मरीजों को निःशुल्क दवाइयों का वितरण भी किया गया, जिससे उन्हें तत्काल राहत मिली।

विशेष स्वास्थ्य शिविर में हड्डी रोग विशेषज्ञ, महिला रोग विशेषज्ञ, नेत्र रोग विशेषज्ञ, मेडिसिन विशेषज्ञ सहित विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने सेवाएं प्रदान कीं। इसके साथ ही मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, जिला कार्यक्रम प्रबंधक, खंड चिकित्सा अधिकारी गौरेला तथा स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी-कर्मचारी भी पूरे समय उपस्थित रहकर शिविर के सफल संचालन में सक्रिय भूमिका निभाते रहे।

राज्य सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रदेश का कोई भी नागरिक, चाहे वह कितने ही दूरस्थ या दुर्गम क्षेत्र में क्यों न रहता हो, स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित न रहे। विशेष पिछड़ी जनजातियों तक विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।  स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार केवल अस्पतालों तक सीमित नहीं है, बल्कि जरूरतमंद लोगों तक स्वयं पहुंचकर उपचार उपलब्ध कराना ही सुशासन की वास्तविक पहचान है।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि दूरस्थ एवं विशेष पिछड़ी जनजातीय क्षेत्रों में नियमित रूप से ऐसे विशेष स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि बीमारियों की समय पर पहचान हो सके, उपचार उपलब्ध कराया जा सके तथा गंभीर मरीजों को आवश्यकतानुसार उच्च चिकित्सा संस्थानों तक रेफर किया जा सके। साथ ही ग्रामीणों को स्वच्छता, पोषण, मौसमी बीमारियों से बचाव और स्वस्थ जीवनशैली के संबंध में भी जागरूक किया जा रहा है।

दुर्गम बैगा अंचलों तक विशेषज्ञ चिकित्सकों की पहुंच यह दर्शाती है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ, समावेशी और प्रभावी बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। ऐसे विशेष स्वास्थ्य शिविर न केवल लोगों को समय पर उपचार उपलब्ध करा रहे हैं, बल्कि जनजातीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य के प्रति विश्वास और जागरूकता को भी मजबूत कर रहे हैं।

​कैंसर मुक्त भविष्य की ओर कदम: धमतरी में विशेष HPV टीकाकरण सप्ताह शुरू

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13 से 18 जुलाई तक 14 वर्ष की बेटियों को लगेगा निःशुल्क जीवनरक्षक टीका

रायपुर- धमतरी जिले में बेटियों को सर्वाइकल (गर्भाशय ग्रीवा) कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से सुरक्षित रखने के लिए एक बड़ी पहल की गई है। जिले में आज से 18 जुलाई 2026 तक विशेष एचपीवी (HPV) टीकाकरण सप्ताह का आगाज हो गया है। इस महाअभियान के तहत 14 वर्ष की आयु की सभी पात्र बालिकाओं को स्वास्थ्य विभाग द्वारा निःशुल्क जीवनरक्षक HPV टीका लगाया जा रहा है।

स्वास्थ्य विभाग ने इसके लिए स्कूलों से लेकर स्वास्थ्य केंद्रों तक व्यापक तैयारियां पूरी कर ली हैं।

​कैंसर से बचाव का अचूक और सुरक्षित कवच

​मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) ने अभियान की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) संक्रमण ही सर्वाइकल कैंसर का मुख्य कारण है। उन्होंने कहा कि समय पर लगाया गया HPV टीका इस गंभीर कैंसर से बचाव का सबसे सुरक्षित, प्रभावी और वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित माध्यम है। यह टीका भविष्य में कैंसर के जोखिम को लगभग समाप्त कर देता है, इसलिए सभी पात्र बालिकाओं का टीकाकरण बेहद जरूरी है।

​यहाँ उपलब्ध होगी टीकाकरण की सुविधा

अभियान को शत-प्रतिशत सफल बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग तथा शिक्षा विभाग मिलकर काम कर रहे हैं। जिला अस्पताल एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC),​प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) एवं स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र (HWC),​जिले के चिन्हित विद्यालय (स्कूल्स) और ​निर्धारित विशेष टीकाकरण सत्र स्थल पर निःशुल्क उपलब्ध होगा।

​बेटियों का स्वस्थ भविष्य हमारी सामूहिक जिम्मेदारी

​धमतरी कलेक्टर ने जिले के सभी माता-पिता और अभिभावकों से इस अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की है।

​कलेक्टर ने अपने संदेश में कहा कि बेटियों का स्वस्थ भविष्य हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। HPV टीका पूरी तरह सुरक्षित है।  सभी अभिभावकों से आग्रह करता हूँ कि किसी भी प्रकार की भ्रांति या अफवाह पर ध्यान न दें और स्वास्थ्य विशेषज्ञों पर भरोसा रखकर अपनी 14 वर्ष की बेटियों को यह टीका अवश्य लगवाएं। आपका यह एक छोटा सा निर्णय आपकी बेटी को जीवनभर की सुरक्षा दे सकता है। उन्होंने जिले के सभी जनप्रतिनिधियों, शिक्षकों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, मितानिनों, स्वयंसेवी संगठनों और सामाजिक संस्थाओं से अपील की है कि वे इसे एक जन-आंदोलन का रूप दें। उन्होंने संकल्प दोहराया कि जिले की एक भी पात्र बालिका इस जीवनरक्षक टीके से वंचित नहीं रहनी चाहिए।

'चिरायु' दल ने लौटाई मुस्कान, जन्मजात कटे होंठ और तालु से मिली मुक्ति

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राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम से 15 वर्षीय माड़कम हुंगा का हुआ निःशुल्क उपचार, परिवार को मिली बड़ी राहत

रायपुर- राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत संचालित 'चिरायु' दल दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चों तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाकर उनके जीवन में नई उम्मीद जगा रहा है। बीजापुर जिले के उसूर विकासखंड के ग्राम मीनागट्टा (पामेड) निवासी 15 वर्षीय माड़कम हुंगा की कहानी इस योजना की सफलता का प्रेरक उदाहरण है।

जन्म से थी गंभीर समस्या

माड़कम हुंगा जन्म से ही कटे होंठ और तालु (क्लेफ्ट लिप एवं पैलेट) की समस्या से पीड़ित था। इस कारण उसे भोजन करने, साफ बोलने और सामान्य जीवन जीने में काफी परेशानी होती थी। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उसका इलाज कराना संभव नहीं था।

स्कूल में जांच के दौरान हुई पहचान

आरबीएसके के 'चिरायु' दल ने स्कूल में नियमित स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान माड़कम हुंगा की पहचान की। इसके बाद आवश्यक दस्तावेज तैयार कर उसे बेहतर इलाज के लिए तुरंत रायपुर रेफर किया गया।

निःशुल्क सर्जरी से मिली नई जिंदगी

25 जून 2026 को माड़कम हुंगा को रायपुर के एक विशेषज्ञ अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां चिकित्सकों ने उसकी सफल प्लास्टिक सर्जरी की। उपचार के बाद उसके स्वास्थ्य में तेजी से सुधार हुआ और 30 जून 2026 को उसे स्वस्थ होकर अस्पताल से छुट्टी मिल गई।

इलाज का पूरा खर्च शासन ने उठाया

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत सर्जरी, जांच, दवाइयां, रायपुर तक आने-जाने की व्यवस्था तथा उपचार के दौरान रहने और भोजन सहित पूरा खर्च शासन द्वारा वहन किया गया। इससे परिवार पर किसी भी प्रकार का आर्थिक बोझ नहीं पड़ा।

नई मुस्कान, नया आत्मविश्वास

आज माड़कम हुंगा पहले की तुलना में बेहतर जीवन जी रहा है। अब उसे भोजन करने और बोलने में पहले जैसी कठिनाई नहीं होती। उसके चेहरे पर लौटी मुस्कान और बढ़ा आत्मविश्वास इस बात का प्रमाण है कि शासन की स्वास्थ्य योजनाएं जरूरतमंद बच्चों के जीवन में वास्तविक बदलाव ला रही हैं।

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) का 'चिरायु' दल दूरस्थ अंचलों के बच्चों तक समय पर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाकर उन्हें स्वस्थ, सुरक्षित और बेहतर भविष्य देने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है। यह पहल बच्चों और उनके परिवारों के लिए नई उम्मीद का आधार बन रही है।

मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य को मिलेगी नई दिशा: आज लॉन्च होगा 'सुमन रोडमैप 2030'

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नई दिल्ली- केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा आज केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद (CCHFW) के 16वें सम्मेलन में 'सुमन रोडमैप 2030' (SUMAN Roadmap 2030) का शुभारंभ करेंगे। यह रोडमैप मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने और वर्ष 2030 तक मातृ एवं नवजात मृत्यु दर में कमी लाने के लिए एक व्यापक राष्ट्रीय रणनीति है।

मुख्य बिंदु

  • वर्ष 2030 तक मातृ मृत्यु अनुपात (MMR) को प्रति एक लाख जीवित जन्म पर 70 से कम लाने का लक्ष्य।

  • नवजात मृत्यु दर (NMR) और शिशु मृत्यु दर (IMR) में उल्लेखनीय कमी लाने पर जोर।

  • गर्भधारण से पहले, गर्भावस्था, प्रसव और प्रसवोत्तर देखभाल तक संपूर्ण जीवन-चक्र आधारित स्वास्थ्य सेवाएं।

  • 13 राज्यों के 130 उच्च-प्राथमिकता वाले जिलों में विशेष रणनीति लागू होगी, जिनमें छत्तीसगढ़ भी शामिल है।

  • उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की पहचान, निगरानी और उपचार के लिए चार-स्तरीय प्रणाली विकसित की जाएगी।

गर्भवती महिलाओं को मिलेंगी विशेष सुविधाएं

  • समय पर पंजीकरण और सभी प्रसवपूर्व जांच सुनिश्चित की जाएंगी।

  • आठवें और नौवें महीने में आशा कार्यकर्ता प्रत्येक दो सप्ताह में घर जाकर स्वास्थ्य जांच, पोषण परामर्श और सुरक्षित प्रसव की तैयारी कराएंगी।

  • कठिन एवं दूरस्थ क्षेत्रों में प्रसव के लिए बेहतर एम्बुलेंस और रेफरल परिवहन सुविधा उपलब्ध होगी।

  • बर्थ वेटिंग होम, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य विंग (MCH Wing), हाई डिपेंडेंसी यूनिट (HDU) और आईसीयू जैसी सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा।

नई पहलें

  • सुमन पंचायत के माध्यम से जनभागीदारी बढ़ाई जाएगी।

  • मदर्स पिकनिक कार्यक्रम से मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाई जाएगी।

  • JANANI पोर्टल के जरिए डिजिटल मॉनिटरिंग और एआई आधारित लेबर रूम विकसित किए जाएंगे।

  • जलवायु परिवर्तन, हीटवेव और अन्य चुनौतियों से निपटने के लिए विशेष कार्ययोजना लागू होगी।

सरकार का उद्देश्य

सरकार का लक्ष्य पूरे देश में मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार कर शून्य रोकी जा सकने वाली मातृ एवं नवजात मृत्यु सुनिश्चित करना है। यह रोडमैप परिवार नियोजन, पोषण, किशोर स्वास्थ्य और नवजात देखभाल को एकीकृत करते हुए स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी और सुलभ बनाएगा।

29 जून को होगी केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद की 16वीं बैठक, स्वास्थ्य क्षेत्र की प्रमुख नीतियों पर होगा मंथन

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नई दिल्ली- केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय 29 जून 2026 (सोमवार) को विज्ञान भवन, नई दिल्ली में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद (Central Council of Health and Family Welfare - CCHFW) की 16वीं बैठक आयोजित करेगा। बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे. पी. नड्डा करेंगे।

इस सम्मेलन में केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल और प्रतापराव जाधव भी शामिल होंगे। इसके अलावा राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, केंद्र और राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी, गैर-सरकारी सदस्य तथा स्वास्थ्य क्षेत्र के विशेषज्ञ भी भाग लेंगे।

स्वास्थ्य क्षेत्र की प्रमुख प्राथमिकताओं पर होगी चर्चा

बैठक में केंद्र और राज्यों के बीच स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग को मजबूत बनाने के साथ-साथ कई महत्वपूर्ण नीतिगत विषयों पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। इस वर्ष सम्मेलन के प्रमुख विषय होंगे—

  • राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM): सतत विकास लक्ष्य (SDGs) एवं प्राथमिकताएं

  • खाद्य एवं औषधि सुधार (Food & Drug Reforms)

  • सहायक स्वास्थ्य सेवाएं (Allied Health Services)

इन विषयों पर चल रही योजनाओं की समीक्षा, राज्यों के सफल अनुभवों का आदान-प्रदान, नई चुनौतियों की पहचान और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए साझा रणनीति तैयार की जाएगी।

स्वास्थ्य क्षेत्र में सर्वोच्च सलाहकार निकाय

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 263 के तहत गठित केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय का सर्वोच्च सलाहकार निकाय है। यह परिषद चिकित्सा एवं सार्वजनिक स्वास्थ्य से संबंधित नीतियों और कार्यक्रमों की समीक्षा करती है तथा उनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए केंद्र और राज्यों को आवश्यक सुझाव देती है।

सहकारी संघवाद को मिलेगा और बल

यह सम्मेलन स्वास्थ्य क्षेत्र में सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) को मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण मंच है। इसके माध्यम से केंद्र और राज्य सरकारें राष्ट्रीय महत्व के स्वास्थ्य मुद्दों पर विचार-विमर्श कर सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों के बेहतर नियोजन और प्रभावी क्रियान्वयन के लिए साझा रणनीति तैयार करती हैं।

सरकार का मानना है कि इस बैठक से स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार, नीति निर्माण में बेहतर समन्वय और देशभर में जनस्वास्थ्य कार्यक्रमों के प्रभावी संचालन को नई दिशा मिलेगी।

अंतरराष्ट्रीय सिकल सेल दिवस पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्रीय उन्मूलन मिशन की उपलब्धियों को सराहा

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ओंकारेश्वर (मध्य प्रदेश)- भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज मध्य प्रदेश के ओंकारेश्वर में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सिकल सेल दिवस कार्यक्रम में भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने सिकल सेल रोग के उन्मूलन की दिशा में देश द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए इसे स्वास्थ्य क्षेत्र की एक महत्वपूर्ण चुनौती से निपटने की सार्थक पहल बताया।

राष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन के तहत स्क्रीनिंग का लक्ष्य निर्धारित समय से पहले पूरा किया जाना एक बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने बताया कि नवजात शिशुओं से लेकर 40 वर्ष तक की आयु के लगभग 7 करोड़ लोगों की जांच की गई है, जो विश्व के सबसे बड़े आनुवंशिक रोग स्क्रीनिंग अभियानों में से एक है।

उन्होंने कहा कि मिशन मोड में की गई स्क्रीनिंग के परिणामस्वरूप अब तक लगभग 2.5 लाख सिकल सेल रोगियों की पहचान की गई है, जबकि 20 लाख से अधिक वाहकों (Carriers) का भी पता लगाया गया है। राष्ट्रपति ने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में वाहकों की पहचान भविष्य की स्वास्थ्य चुनौतियों को समझने और उनके समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

राष्ट्रपति ने केंद्र और राज्य सरकारों की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने न केवल मरीजों और वाहकों की पहचान की है, बल्कि उनके उचित उपचार और स्वास्थ्य देखभाल की भी व्यवस्था सुनिश्चित की है।

उन्होंने विशेष रूप से मध्य प्रदेश सरकार के प्रयासों की प्रशंसा करते हुए कहा कि राज्य ने 17 सितंबर से 2 अक्टूबर 2025 तक चलाए गए "स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार अभियान" के तहत 4 लाख से अधिक महिलाओं की स्क्रीनिंग कर एक उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है।

राष्ट्रपति ने यह भी उल्लेख किया कि मध्य प्रदेश सरकार ने पिछले वर्ष अंतरराष्ट्रीय सिकल सेल दिवस पर "सिकल मित्र" पहल शुरू की थी। इस पहल के अंतर्गत सरकारी एवं गैर-सरकारी संस्थाओं, स्वयंसेवी संगठनों तथा एनसीसी कैडेट्स के प्रतिनिधियों को जागरूकता फैलाने और मरीजों की सहायता के लिए प्रशिक्षित किया गया है।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सभी राज्यों की सक्रिय भागीदारी और सामूहिक प्रयासों से भारत वर्ष 2047 से पहले ही सिकल सेल रोग से मुक्ति के राष्ट्रीय लक्ष्य को प्राप्त करने में सफल होगा।


जहां कभी एम्बुलेंस पहुंचना भी सपना था, वहां अब डॉक्टर दे रहे दस्तक : बस्तर के जंगलों तक पहुंची स्वास्थ्य क्रांति

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दिल्ली में बस्तर विकास मॉडल पर मंथन : केंद्रीय गृहमंत्रीअमित शाह से मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अहम मुलाकात

पुराने सुरक्षा शिविर अब बन रहे जन सुविधा केंद्र

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज नई दिल्ली में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात कर बस्तर में तेजी से बदल रहे हालात और विकास कार्यों की विस्तृत जानकारी दी। इस दौरान उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा उपस्थित थे।

बैठक में विशेष रूप से बस्तर में चल रहे ‘मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान’ पर चर्चा हुई।मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को बताया कि जिन इलाकों में कभी एम्बुलेंस पहुंचना भी मुश्किल माना जाता था, वहां अब डॉक्टर, दवाइयां और स्वास्थ्य टीमें नियमित रूप से पहुंच रही हैं। दूरस्थ गांवों में पैदल जाकर लोगों की जांच की जा रही है और गंभीर बीमारियों की समय रहते पहचान कर निःशुल्क इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है। मात्र एक महीने में 21.86 लाख से ज्यादा लोगों की स्वास्थ्य जांच हो चुकी है और उनके डिजिटल स्वास्थ्य प्रोफाइल तैयार कर लिए गए हैं। हजारों मरीजों को समय पर उपचार और उच्च अस्पतालों में रेफर किया गया है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बस्तर में अब पुराने सुरक्षा शिविर केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं रह गए हैं। इन्हें धीरे-धीरे “जन सुविधा केंद्र” के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां गांव के लोगों को स्वास्थ्य, शिक्षा, बैंकिंग और सरकारी योजनाओं से जुड़ी जरूरी सुविधाएं एक ही स्थान पर मिल रही हैं। इन केंद्रों के जरिए दूरस्थ  क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को पहली बार कई बुनियादी सेवाएं आसानी से उपलब्ध हो रही हैं। ग्रामीण अब इलाज, बैंक खाते, दस्तावेज और सरकारी योजनाओं की जानकारी के लिए दूर-दूर तक भटकने को मजबूर नहीं हैं।

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान की शुरुआत 13 अप्रैल 2026 से सुकमा से हुई है। इस अभियान में 36 लाख लोगों को लक्षित किया गया है। इसके अलावा बस्तर मुन्ने ( अग्रणी बस्तर) अभियान के जरिए 31 महत्वपूर्ण योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का काम तेजी से चल रहा है। जगदलपुर में नया सुपर स्पेशलिटी अस्पताल शुरू हो गया है, जहां अब बस्तर के लोगों को महंगे इलाज के लिए रायपुर या बिलासपुर नहीं जाना पड़ेगा। डायल-112 की नेक्स्ट जेन सेवा का विस्तार और पुराने सुरक्षा शिविरों को “जन सुविधा केंद्र” में बदलने की योजना भी बस्तर के स्थायी विकास की दिशा में अहम कदम हैं। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि जो इलाके कभी नक्सल प्रभाव के कारण मुख्यधारा से कटे हुए थे, वहां आज सरकारी योजनाओं का लाभ लोगों तक पहुंच रहा है। हाल ही में सुकमा के एक अत्यंत दुर्गम गांव से गंभीर मरीज को सैकड़ों किलोमीटर दूर अस्पताल पहुंचाकर उपचार दिलाना इस बदलाव का बड़ा उदाहरण बना है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को बस्तर के लिए तैयार विकास रोडमैप की जानकारी दी। इसमें सड़क, शिक्षा, रोजगार, कौशल विकास और निवेश को बढ़ावा देने पर विशेष फोकस रखा गया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन से बस्तर में तेजी से सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहे हैं।

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने बस्तर में हो रहे विकास कार्यों और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की सराहना की। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर यह सुनिश्चित कर रही है कि विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।

उल्लेखनीय है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का 18 और 19 मई को बस्तर प्रवास  संभावित है।

वनांचलों की 'संजीवनी' बनी मोबाइल मेडिकल यूनिट: साढ़े तीन माह में 2000 से अधिक ग्रामीणों का हुआ निःशुल्क उपचार

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विशेष पिछड़ी जनजातियों के द्वार तक पहुँचा अस्पताल

पीएम जनमन योजना से बदली दुर्गम क्षेत्रों की तस्वीर

​रायपुर- छत्तीसगढ़ के दूरस्थ वनांचलों और दुर्गम पहाड़ियों पर बसे विशेष पिछड़ी जनजाति बाहुल्य क्षेत्रों के लिए शासन की मोबाइल मेडिकल यूनिट (MMU) एक वरदान साबित हो रही है। 'अस्पताल खुद ग्रामीण के द्वार' की परिकल्पना को साकार करते हुए, इस सेवा ने पिछले साढ़े तीन महीनों में 2035 लोगों को उनके ही मोहल्ले में स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं।

पैदल चलने की मजबूरी हुई खत्म

पूर्व में इन क्षेत्रों के ग्रामीणों को सामान्य इलाज के लिए भी कई मील पैदल चलना पड़ता था। प्रधानमंत्री जनमन योजना के अंतर्गत 15 जनवरी 2026 से संचालित यह यूनिट विशेष पिछड़ी जनजाति 'कमार' बाहुल्य ग्राम बल्दाकछार और औराई सहित कसडोल क्षेत्र के अन्य गांवों में निरंतर कैंप लगा रही है। अब सुदूर बस्तियों के लोगों को शहर के चक्कर काटने की आवश्यकता नहीं रह गई है।

एक ही छत के नीचे जांच और दवा

​इस चलते-फिरते अस्पताल में सुविधाओं का पूरा तामझाम मौजूद है। प्रत्येक यूनिट में एक मेडिकल ऑफिसर, लैब टेक्निशियन, नर्स और ड्राइवर की दक्ष टीम तैनात रहती है।

​निःशुल्क जांच: बीपी, शुगर, मलेरिया और हीमोग्लोबिन जैसी महत्वपूर्ण जांचें मौके पर ही की जाती हैं।अनुभवी डॉक्टरों द्वारा चिकित्सा सलाह के साथ-साथ मुफ्त दवाइयां भी वितरित की जा रही हैं।

​नियोजित व्यवस्था और मुनादी से सूचना

प्रशासन द्वारा कैंप लगाने की तिथि और स्थान एक माह पूर्व ही निर्धारित कर लिया जाता है। ग्रामीणों को समय पर सूचना मिले, इसके लिए गांव-गांव में मुनादी (ढोल बजाकर घोषणा) करवाई जाती है। इससे ग्रामीणों में भारी उत्साह देखा जा रहा है।स्थानीय ग्रामीणों ने कहा कि अस्पताल में लंबी कतारों और परिवहन के सीमित साधनों के कारण पहले हमारा पूरा दिन बर्बाद हो जाता था। अब घर के पास इलाज मिलने से समय और धन दोनों की बचत हो रही है।

परंपरा से आधुनिकता की ओर बढ़ते कदम

इस पहल का सबसे बड़ा सकारात्मक प्रभाव ग्रामीणों की सोच पर पड़ा है। विशेष पिछड़ी जनजाति के लोग जो पहले केवल बैगा-गुनिया या पारंपरिक जड़ी-बूटियों पर निर्भर थे, अब उनमें आधुनिक चिकित्सा पद्धति के प्रति विश्वास जागा है। लोग अब बीमारियों को छिपाने के बजाय समय पर जांच और इलाज को प्राथमिकता दे रहे हैं।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने किया निर्माणाधीन जगदेव राम उरांव कल्याण आश्रम चिकित्सालय का अवलोकन

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रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज जशपुर में  निर्माणाधीन जगदेव राम उरांव कल्याण आश्रम चिकित्सालय का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने कार्य की गति और निर्धारित मानकों के अनुरूप हो रहे निर्माण पर संतोष जताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि अस्पताल के पूर्ण होने के बाद यह क्षेत्र के लोगों के लिए जीवनरेखा साबित होगा और मरीजों को यहां विशेषज्ञ चिकित्सकों की बेहतर सेवाएं उपलब्ध होंगी। 

इस अत्याधुनिक चिकित्सालय का निर्माण एनटीपीसी लारा के सीएसआर फंड से लगभग 35 करोड़ 53 लाख रुपये की लागत से किया जा रहा है। अस्पताल का भूमिपूजन 7 अप्रैल 2025 को मुख्यमंत्री साय द्वारा किया गया था। वर्तमान में इस अस्पताल का निर्माण कार्य तेजी से प्रगति पर है। प्रस्तावित 6 मंजिला भवन में ग्राउंड फ्लोर सहित चार मंजिलों का ढलाई कार्य पूर्ण हो चुका है। 

अस्पताल के ग्राउंड फ्लोर में इमरजेंसी सेवाएं, प्रथम तल पर ओपीडी, द्वितीय एवं तृतीय तल पर वार्ड, चतुर्थ तल पर आईसीयू, पंचम तल पर ऑपरेशन थियेटर संचालित होगा। यह चिकित्सालय अत्याधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित होगा। 100 बिस्तरों वाले इस अस्पताल में 15 ओपीडी, 4 आईसीयू, 4 ऑपरेशन थियेटर, फिजियोथेरेपी, पैथोलॉजी लैब, सीटी स्कैन, डायलिसिस, एक्स-रे, इमरजेंसी वार्ड, एमआरआई, ईसीजी सहित अन्य आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष रामप्रताप सिंह, जिला पंचायत उपाध्यक्ष शौर्य प्रताप सिंह जूदेव, नगर पालिका उपाध्यक्ष यश प्रताप सिंह जूदेव, भरत सिंह, कृष्ण कुमार राय, विजय आदित्य प्रताप सिंह जूदेव सहित जनप्रतिनिधिगण एवं अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।

फाइलेरिया उन्मूलन के लिए देशव्यापी MDA अभियान का शुभारंभ, 2027 तक बीमारी खत्म करने का लक्ष्य

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नई दिल्ली- केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से देशभर में लिम्फैटिक फाइलेरियासिस (हाथीपांव) के उन्मूलन के लिए वार्षिक मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (MDA) अभियान की शुरुआत की। इस अभियान में फाइलेरिया प्रभावित 12 राज्यों के स्वास्थ्य मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

यह अभियान रोग संचरण को रोकने, बीमारी से होने वाली विकलांगता कम करने और कमजोर आबादी को निवारक स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है।

क्या है फाइलेरिया (हाथीपांव)

लिम्फैटिक फाइलेरियासिस एक मच्छर जनित बीमारी है, जो प्रदूषित और ठहरे पानी में पनपने वाले क्यूलेक्स मच्छर से फैलती है। यह रोग लिम्फ प्रणाली को नुकसान पहुंचाकर विकलांगता, सामाजिक कलंक और आर्थिक कठिनाइयों का कारण बनता है।

भारत सरकार ने इसे 2027 तक सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या के रूप में समाप्त करने का लक्ष्य रखा है, जो वैश्विक SDG लक्ष्य 2030 से पहले है।

फाइलेरिया की वर्तमान स्थिति

  • 20 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के 348 जिलों में फाइलेरिया स्थानिक

  • 41% जिलों (143) ने MDA सफलतापूर्वक बंद किया

  • 50% जिलों (174) में अभी वार्षिक MDA जारी

  • 2024 तक

    • 6.20 लाख लिम्फोडेमा केस

    • 1.21 लाख हाइड्रोसील केस

 MDA अभियान से मिली बड़ी सफलता

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि सरकार 2027 तक फाइलेरिया उन्मूलन के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ स्वास्थ्य लक्ष्य नहीं बल्कि सामाजिक और आर्थिक आवश्यकता भी है।

MDA अभियान के तहत सीधे निगरानी में दवा सेवन (Directly Observed Treatment) से अच्छे परिणाम मिले हैं। उन्होंने मच्छर नियंत्रण और जन जागरूकता बढ़ाने पर भी जोर दिया।

मरीजों के लिए उपचार और सामाजिक सुरक्षा

  • हाइड्रोसील सर्जरी और दवाओं का वितरण

  • आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में स्क्रीनिंग और इलाज

  • हाइड्रोसील सर्जरी को आयुष्मान भारत योजना में शामिल किया गया

नई रणनीति: साल में एक बार MDA

फरवरी 2026 से भारत में साल में एक बार एकीकृत MDA अभियान शुरू किया गया है, जिससे बेहतर निगरानी, उच्च कवरेज और प्रभावी संचालन संभव होगा।

कार्यक्रम की प्रगति

  • MDA कवरेज 2014 में 75% से बढ़कर 2025 में 85%

  • TAS-1 पास करने वाले जिले 15% से बढ़कर 41%

  • 2025 अभियान में 21.71 करोड़ लोगों को लक्ष्य, 96% कवरेज

  • 18.48 करोड़ लोगों ने दवा का सेवन किया

सामुदायिक भागीदारी पर जोर

सरकार ने पंचायती राज, शिक्षा, महिला एवं बाल विकास, कृषि, ग्रामीण विकास सहित कई मंत्रालयों के सहयोग से जन जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया है।

2027 तक फाइलेरिया मुक्त भारत का लक्ष्य

स्वास्थ्य मंत्री ने पूरे समाज और सरकार के संयुक्त प्रयासों से फाइलेरिया मुक्त भारत बनाने का आह्वान किया।

इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्रालय की सचिव स्मृति पुन्या सलिला श्रीवास्तव, NHM की एमडी अराधना पटनायक और संयुक्त सचिव निखिल गजराज भी उपस्थित रहे।


भारत में स्ट्रोक उपचार में ऐतिहासिक पहल: आईसीएमआर ने असम को सौंपे मोबाइल स्ट्रोक यूनिट

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भारत में स्ट्रोक मृत्यु और दीर्घकालिक विकलांगता के प्रमुख कारणों में से एक है। स्ट्रोक के मामलों में हर मिनट बेहद अहम होता है—इलाज में देरी होने पर हर मिनट लगभग 1.9 अरब मस्तिष्क कोशिकाएँ नष्ट हो जाती हैं। ‘गोल्डन ऑवर’ के भीतर समय पर उपचार से मृत्यु और आजीवन विकलांगता को काफी हद तक कम किया जा सकता है। हालांकि, स्ट्रोक उपचार की सबसे बड़ी चुनौती मरीजों का समय पर स्ट्रोक-सुविधायुक्त अस्पताल तक पहुँचना है।

इसी चुनौती का समाधान करते हुए भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) ने असम सरकार को दो मोबाइल स्ट्रोक यूनिट (MSU) सौंपे। यह पहल उस मॉडल में एक बड़ा बदलाव दर्शाती है, जिसमें अब मरीजों को अस्पताल तक पहुँचने के बजाय अस्पताल मरीज तक पहुँच रहा है। माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा के मार्गदर्शन में विकसित यह पहल सरकार की उस प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जिसके तहत उन्नत स्वास्थ्य सेवाएँ दूरदराज़, वंचित और कठिन भौगोलिक क्षेत्रों में रहने वाले लोगों—विशेषकर महिलाओं—तक पहुँचाई जा रही हैं।

एमएसयू को असम सरकार को सौंपते हुए, स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के सचिव एवं ICMR के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल ने कहा,

“मोबाइल स्ट्रोक यूनिट की शुरुआत जर्मनी में हुई थी और बाद में प्रमुख वैश्विक शहरों में इसका मूल्यांकन किया गया। भारत ने पहली बार ग्रामीण, दूरस्थ और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाले पूर्वोत्तर क्षेत्र में इसका सफल मूल्यांकन किया है। हम दुनिया का दूसरा देश हैं जिसने ग्रामीण तीव्र इस्केमिक स्ट्रोक मरीजों के उपचार के लिए एमएसयू को आपातकालीन सेवाओं के साथ सफलतापूर्वक एकीकृत किया है।”

असम सरकार की ओर से अनुभव साझा करते हुए, पी. अशोक बाबू, सचिव एवं आयुक्त, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, असम ने कहा कि यह हस्तांतरण राज्य की आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली को मजबूत करता है और इस जीवनरक्षक सेवा की निरंतरता को राज्य के स्वामित्व में सुनिश्चित करता है। उन्होंने बताया कि ICMR के साथ सहयोग से तेज़ उपचार, बेहतर समन्वय और बेहतर परिणाम संभव हुए हैं, जो भविष्य में विस्तार के लिए मजबूत आधार प्रदान करते हैं।

मोबाइल स्ट्रोक यूनिट एक चलती-फिरती अस्पताल व्यवस्था है, जिसमें सीटी स्कैन, विशेषज्ञों से टेली-परामर्श, पॉइंट-ऑफ-केयर लैब और क्लॉट-बस्टिंग दवाएँ उपलब्ध हैं। इससे मरीज के घर या उसके निकट ही स्ट्रोक का शीघ्र निदान और उपचार संभव हो पाता है। यह नवाचार विशेष रूप से उन दूरस्थ और कठिन क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण है, जहाँ अस्पताल तक पहुँचने में कई घंटे लग सकते हैं।

पूर्वोत्तर भारत में स्ट्रोक का बोझ अपेक्षाकृत अधिक है। कठिन भू-भाग, लंबी दूरी और विशेष चिकित्सा सुविधाओं की सीमित उपलब्धता के कारण समय पर उपचार चुनौतीपूर्ण रहा है। इसे ध्यान में रखते हुए ICMR ने डिब्रूगढ़ के असम मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में न्यूरोलॉजिस्ट-नेतृत्व वाला स्ट्रोक यूनिट और तेज़पुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल तथा बैपटिस्ट क्रिश्चियन अस्पताल, तेज़पुर में चिकित्सक-नेतृत्व वाले स्ट्रोक यूनिट स्थापित किए। मोबाइल स्ट्रोक यूनिट को इसी प्री-हॉस्पिटल स्ट्रोक केयर प्रणाली में जोड़ा गया।

इसके परिणाम अत्यंत प्रभावशाली रहे हैं। इस मॉडल से उपचार में लगने वाला समय लगभग 24 घंटे से घटकर करीब 2 घंटे रह गया, मृत्यु दर में एक-तिहाई की कमी आई और विकलांगता में आठ गुना तक कमी दर्ज की गई। वर्ष 2021 से अगस्त 2024 के बीच एमएसयू को 2,300 से अधिक आपातकालीन कॉल प्राप्त हुईं। प्रशिक्षित नर्सों ने 294 संदिग्ध स्ट्रोक मामलों की जाँच की, जिनमें से 90% मरीजों का उपचार सीधे उनके घर से किया गया। 108-आपातकालीन एंबुलेंस सेवा के साथ एकीकरण से इसकी पहुँच 100 किलोमीटर के दायरे तक बढ़ी।

इस अवसर पर केंद्र और राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी तथा ICMR नेतृत्व उपस्थित रहे, जिनमें डॉ. क्रिस्टीना जेड. चोंगथु (सचिव, स्वास्थ्य, तेलंगाना सरकार), डॉ. संघमित्रा पति (अपर महानिदेशक, ICMR), डॉ. अलका शर्मा (अपर महानिदेशक, ICMR), मनीषा सक्सेना (वरिष्ठ उप महानिदेशक–प्रशासन) और डॉ. आर.एस. ढालीवाल (प्रमुख, एनसीडी) शामिल थे।


भारत ने सार्वजनिक स्वास्थ्य में 50,000 NQAS प्रमाणित सुविधाओं का मील का पत्थर पार किया

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भारत सरकार ने सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर हासिल किया है। 31 दिसंबर 2025 तक, पूरे भारत के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 50,373 सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाएं राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (NQAS) के तहत प्रमाणित हो चुकी हैं। यह मानक स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW) द्वारा स्थापित एक समग्र गुणवत्ता ढांचा है।

यह उपलब्धि भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली के लिए गर्व का क्षण है, क्योंकि देश ने NQAS प्रमाणन में 50,000 की संख्या पार कर ली है, और सरकार की गुणवत्ता, सुरक्षा और रोगी-केंद्रित देखभाल के प्रति अडिग प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है। यह सभी नागरिकों, विशेषकर गरीब, कमजोर और हाशिए पर रहने वाले लोगों के लिए उच्च-गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाओं तक समान पहुँच सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

NQAS की यात्रा 2015 में केवल 10 प्रमाणित स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ शुरू हुई थी, जो प्रारंभ में जिला अस्पतालों पर केंद्रित थी ताकि सुरक्षित, रोगी-केंद्रित और गुणवत्ता-निश्चित सेवाएं सुनिश्चित की जा सकें। समय के साथ, यह ढांचा उप-जिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC), आयुष्मान आरोग्य मंदिर–PHC, AAM–UPHC और AAM–Sub Health Centre तक विस्तारित हुआ, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य के सभी स्तरों में गुणवत्ता आश्वासन सुनिश्चित किया जा सके। वर्चुअल असेसमेंट्स के परिचय ने भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली में गुणवत्ता कवरेज को तेजी से बढ़ाया।

प्रमाणित सुविधाओं की संख्या दिसंबर 2023 में 6,506 से बढ़कर दिसंबर 2024 में 22,786 और दिसंबर 2025 में 50,373 हो गई—यह एक साल में असाधारण विस्तार को दर्शाता है। इसमें 48,663 आयुष्मान आरोग्य मंदिर (SHC, PHC, UPHC) और 1,710 माध्यमिक देखभाल सुविधाएं (CHC, SDH, DH) शामिल हैं, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य के सभी स्तरों में गुणवत्ता की संस्थागत उपस्थिति को दर्शाता है।

भारत की सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (UHC) की दिशा, जो राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 द्वारा निर्देशित है, का उद्देश्य गुणवत्ता, किफायती स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता बिना वित्तीय बोझ के सुनिश्चित करना है। NQAS के इस तेज़ विस्तार में निरंतर क्षमता निर्माण, डिजिटल नवाचार, मूल्यांकनकर्ताओं की संख्या में वृद्धि और सतत गुणवत्ता सुधार प्रणाली जैसी बहुपक्षीय रणनीतियों को अपनाया गया।

50,000 NQAS प्रमाणन पार करना भारत की सामूहिक प्रतिबद्धता का प्रतीक है कि देश एक सुदृढ़, आत्मनिर्भर और उच्च गुणवत्ता वाली सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली का निर्माण कर रहा है। यह उपलब्धि आत्मनिर्भर भारत की भावना और “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास” के मार्गदर्शक सिद्धांतों को दर्शाती है, और यह पुष्टि करती है कि गुणवत्ता स्वास्थ्य देखभाल भारत के विकास का केंद्र है।

भारत सरकार NQAS प्रमाणन को बनाए रखने और और अधिक विस्तारित करने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि गुणवत्ता सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं की एक अंतर्निहित और स्थायी विशेषता बन जाए। इसी दिशा में, देश ने मार्च 2026 तक कम से कम 50% सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं का NQAS प्रमाणन हासिल करने का अंतरिम लक्ष्य निर्धारित किया है, जो बड़े पैमाने पर गुणवत्ता, सुरक्षा और रोगी-केंद्रित देखभाल को संस्थागत रूप देने की सरकार की प्रतिबद्धता को और मजबूत करता है।


मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने फरसाबहार, कुनकुरी और मनोरा में पोषण पुनर्वास केन्द्र का किया शुभारंभ

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सीएचसी फरसाबहार में निर्माणाधीन सत्य साईं मातृत्व-शिशु चिकित्सालय का किया मुआयना

स्वास्थ्य सुविधा के विस्तार के लिए सरकार प्रतिबद्ध: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र फरसाबहार में आयोजित कार्यक्रम के दौरान फरसाबहार के साथ-साथ कुनकुरी एवं मनोरा में स्थापित किए गए पोषण पुनर्वास केंद्रों का शुभारंभ किया। इन तीनों पुनर्वास केंद्रों को 10-10 बिस्तरों की सुविधा के साथ प्रारंभ किया गया है। इनके शुभारंभ के साथ ही जशपुर जिले में पोषण पुनर्वास केंद्रों की संख्या 6 हो गई है। इस दौरान मुख्यमंत्री ने पुनर्वास केंद्रों में भर्ती कुपोषित बच्चों की माताओं से बच्चों के स्वास्थ्य और उनके ईलाज के बारे में जानकारी ली। मुख्यमंत्री इस मौके पर बच्चों के लिए पोषण कीट के साथ खिलौने भी प्रदान किए।

मुख्यमंत्री ने सीएचसी फरसाबहार में निर्माणाधीन सत्य साईं मातृत्व शिशु चिकित्सालय का मुआयना किया। यह हॉस्पिटल मुख्यमंत्री साय के विशेष प्रयासों से बन रहा है, इससे मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध हो सकेंगी। इसमें नवजात शिशुओं एवं बच्चों के उपचार के साथ-साथ गर्भवती माताओं के लिए भी ऑपरेशन सहित सभी आवश्यक चिकित्सकीय सेवाएँ विशेषज्ञ चिकित्सकों के द्वारा आधुनिक तकनीकों के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएँगी।   

इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने कहा कि लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना हमारी सरकार की प्राथमिकता है। इसी दिशा में जिले में मेडिकल कॉलेज, प्राकृतिक चिकित्सा एवं फिजियोथेरेपी केंद्र, शासकीय नर्सिंग कॉलेज तथा शासकीय फिजियोथेरेपी कॉलेज का निर्माण कार्य भी किया जा रहा है। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष सालिक साय, कमिश्नर नरेन्द्र कुमार दुग्गा, आईजी दीपक कुमार झा, कलेक्टर रोहित व्यास, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशिमोहन सिंह, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जी. एस. जात्रा सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी कर्मचारी मौजूद रहे।


आयुष मंत्रालय 2025: पारंपरिक चिकित्सा को वैश्विक मान्यता और मुख्यधारा में लाने में महत्वपूर्ण वर्ष

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साल 2025 भारत के आयुष क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक वर्ष रहा, जिसमें पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को मुख्यधारा में लाने, शोध, वैश्विक सहयोग और डिजिटल एकीकरण के माध्यम से नागरिक-केंद्रित स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती देने का प्रयास किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आयुष मंत्रालय ने “विकसित भारत@2047” के विजन के अनुरूप भारत की पारंपरिक चिकित्सा नेतृत्व क्षमता को मजबूत किया और लाखों नागरिकों तक स्वास्थ्य लाभ पहुँचाया।

मुख्य उपलब्धियाँ और कार्यक्रम:

  • सीएआरआई का नया परिसर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में केंद्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान (CARI) के 2.92 एकड़ में बने नए ₹187 करोड़ के अत्याधुनिक परिसर की आधारशिला रखी। इस परिसर में 100-बेड का अनुसंधान अस्पताल, विशेष क्लीनिक, अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं और प्रशिक्षण सुविधाएं होंगी।

  • अंतरराष्ट्रीय उन्नीस सम्मेलन: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने केंद्रीय परिषद फॉर रिसर्च इन यूनानी मेडिसिन (CCRUM) द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया। उन्होंने अनुसंधान और नवाचार के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि भारत की यूनानी प्रणाली विश्व में सर्वमान्य हो रही है।

  • महाकुंभ में आयुष सेवाएं: प्रयागराज महाकुंभ में आयुष सेवाओं के माध्यम से 9 लाख से अधिक तीर्थयात्रियों को लाभ मिला। OPD, मोबाइल स्वास्थ्य इकाइयों, योग सत्रों और औषधीय पौधों के वितरण के माध्यम से स्वास्थ्य जागरूकता और जीवन शैली सुधार पर जोर दिया गया।

  • भारत-इंडोनेशिया सहयोग: पारंपरिक चिकित्सा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए भारत और इंडोनेशिया के बीच MoU का आदान-प्रदान हुआ। इस सहयोग से वैश्विक मानक, प्रशिक्षण और ज्ञान का आदान-प्रदान मजबूत होगा।

  • WHO द्वारा ICD-11 अपडेट: विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 2025 में ICD-11 में आयुर्वेद, सिद्ध और यूनानी के लिए समर्पित मॉड्यूल को शामिल किया, जिससे वैश्विक स्तर पर पारंपरिक चिकित्सा के डेटा संग्रह और रिपोर्टिंग में मजबूती आई।

  • ‘देश का प्रकृति परीक्षण अभियान’ में रिकॉर्ड: अभियान के पहले चरण में 1.29 करोड़ प्रकृति आकलन हुए और भारत ने 5 गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाए।

  • योग महोत्सव और 11वां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस: योग महोत्सव 2025 का उद्घाटन करते हुए आयुष मंत्री श्री प्रताप राव जाधव ने 11वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की 100-दिन गिनती शुरू की। प्रधानमंत्री ने विश्व के सबसे बड़े योग कार्यक्रम का नेतृत्व करते हुए 3 लाख प्रतिभागियों के साथ भारत की योग विश्वसनीयता को उजागर किया।

  • बीमस्टेक शिखर सम्मेलन: प्रधानमंत्री मोदी ने पारंपरिक चिकित्सा के लिए उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना की घोषणा की, जिससे क्षेत्रीय सहयोग और क्षमता निर्माण को बल मिलेगा।

  • विश्व होम्योपैथी दिवस और राष्ट्रीय सम्मेलन: गैंधीनगर में आयोजित दो दिवसीय कार्यक्रम में 8,000 से अधिक प्रतिनिधियों ने शिक्षा, अनुसंधान और अभ्यास पर चर्चा की।

  • WHO–IRCH हर्बल मेडिसिन कार्यशाला: 17 देशों ने भाग लिया और आयुष मंत्रालय ने गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावकारिता में वैश्विक सहयोग को मजबूत किया।

  • Ayush Nivesh Saarthi पोर्टल: निवेशकों और उद्यमियों के लिए डिजिटल निवेश पोर्टल लॉन्च किया गया, जो पारंपरिक चिकित्सा क्षेत्र को निवेश-योग्य बनाने में सहायक होगा।

  • WHO Global Summit on Traditional Medicine: नई दिल्ली में आयोजित दूसरे सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी और आयुष मंत्री जाधव ने भारत की पारंपरिक चिकित्सा में वैश्विक नेतृत्व क्षमता को प्रदर्शित किया। सम्मेलन में 16 द्विपक्षीय बैठकें और कई वैश्विक पहलें हुईं।

निष्कर्ष:

साल 2025 ने आयुष मंत्रालय को पारंपरिक चिकित्सा को मुख्यधारा में लाने, वैश्विक स्तर पर मान्यता दिलाने और नागरिक-केंद्रित स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए निर्णायक रूप से आगे बढ़ाया। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत ने स्वास्थ्य, अनुसंधान, डिजिटल नवाचार और वैश्विक सहयोग में नई ऊंचाइयों को छुआ, जिससे आयुष प्रणाली विश्व स्वास्थ्य परिदृश्य में एक मजबूत और विश्वसनीय विकल्प बनकर उभरी।


केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे. पी. नड्डा ने मध्य प्रदेश के सांसदों के साथ टीबी मुक्त भारत अभियान की समीक्षा बैठक की

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केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री, जे. पी. नड्डा ने आज मध्य प्रदेश के सांसदों के साथ टीबी मुक्त भारत अभियान को तेज़ी से लागू करने के उद्देश्य से राज्य-वार फोकस्ड संवाद के तहत बैठक की। यह बैठक देशभर के सांसदों के साथ चल रहे संवादों का हिस्सा है, जिसमें पहले इसी महीने उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात और तमिलनाडु के सांसदों से भी चर्चा की गई थी।

मुख्य बिंदु:

  • बैठक का विषय था: “Parliamentarians Championing a TB Mukt Bharat”। इसमें सांसदों की भूमिका पर ज़ोर दिया गया कि वे अपने निर्वाचन क्षेत्रों में सक्रिय कार्रवाई करें और राजनीतिक दलों के बीच सहयोग बढ़ाकर राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन लक्ष्य को प्राप्त करें।

  • बैठक में केंद्रीय संचार और उत्तर-पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्री, ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया, केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वास्थ्य और परिवार कल्याण) स्मृति अनुप्रिया पटेल और केंद्रीय राज्य मंत्री (जनजातीय मामलों)  दुर्गादास उइके सहित अन्य गणमान्य उपस्थित थे।

नड्डा के संबोधन में:

  • भारत ने टीबी उन्मूलन में महत्वपूर्ण प्रगति की है। WHO Global TB Report 2025 के अनुसार, 2015 से 2024 के बीच टीबी की घटनाओं में 21% की कमी आई है, जो वैश्विक औसत से लगभग दोगुनी है। टीबी से संबंधित मृत्यु दर में 25% की कमी आई है।

  • भारत का उपचार सफलता दर 90% है, जो वैश्विक औसत 88% से अधिक है।

  • उन्होंने सांसदों से आग्रह किया कि वे जन आंदोलन (Jan Andolan) को बढ़ावा दें, समुदायों में जागरूकता फैलाएं और मरीजों एवं उनके परिवारों के लिए व्यापक मानसिक और सामाजिक समर्थन सुनिश्चित करें।

अन्य विवरण:

  • केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वास्थ्य), स्मृति अनुप्रिया पटेल ने मध्य प्रदेश के सक्रिय प्रयासों, खासकर जनजातीय और दूरदराज़ इलाकों में, की सराहना की।

  • उन्नत डायग्नोस्टिक टूल्स जैसे AI-enabled Chest X-rays, मोबाइल डायग्नोस्टिक वैन और NAAT मशीनों के उपयोग को बढ़ाने पर जोर दिया गया।

  • Ni-kshay Poshan योजना के तहत ₹1,000 मासिक पोषण सहायता बढ़ाने से उपचार परिणामों में सुधार हुआ है।

  • राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की अतिरिक्त सचिव और मिशन निदेशक, अराधना पटनायक ने बताया कि भारत में अब 9,300 से अधिक NAAT मशीनें उपलब्ध हैं, जो पूरे ब्लॉकों में कवर करती हैं। उन्होंने मध्य प्रदेश के टीबी अभियान के प्रमुख प्रदर्शन संकेतकों का विवरण प्रस्तुत किया।

सांसदों की प्रतिबद्धता:

  • Ni-kshay शिविरों के माध्यम से शीघ्र पहचान सुनिश्चित करना।

  • जिला स्तर पर टीबी सेवाओं की सुचारु व्यवस्था।

  • Ni-kshay मित्रों, MYBharat स्वयंसेवकों और पंचायतों के माध्यम से टीबी मरीजों को व्यापक समर्थन प्रदान करना।

  • DISHA बैठकों में टीबी को प्राथमिकता देना, स्वास्थ्य सुविधाओं का निरीक्षण करना और मरीजों से सीधे जुड़ना।

टीबी मुक्त भारत अभियान:

  • दिसंबर 2024 में शुरू हुआ और बाद में पूरे देश में विस्तारित।

  • मिशन मोड में कार्य करते हुए, समय पर पहचान, उपचार, उच्च जोखिम वाले मरीजों के लिए विशेष देखभाल और व्यापक मानसिक-सामाजिक समर्थन सुनिश्चित किया जा रहा है।

  • जन आंदोलन के तहत 2 लाख MYBharat स्वयंसेवक, 6.7 लाख से अधिक Ni-kshay मित्र और 30,000 से अधिक निर्वाचित प्रतिनिधि अभियान में सहयोग कर रहे हैं।

WHO वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा शिखर सम्मेलन: आयुष मंत्री प्रतापराव जाधव ने WHO महानिदेशक से की मुलाकात, पारंपरिक चिकित्सा के वैश्विक सहयोग को मिला नया आयाम

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केंद्रीय आयुष मंत्रालय (स्वतंत्र प्रभार) तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने आज विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस से मुलाकात की। इस अवसर पर उन्होंने वैश्विक स्तर पर पारंपरिक, पूरक एवं एकीकृत चिकित्सा (Traditional, Complementary and Integrative Medicine – TCIM) को आगे बढ़ाने में WHO के नेतृत्व के लिए भारत की ओर से आभार व्यक्त किया। यह भेंट WHO वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा शिखर सम्मेलन के दूसरे दिन हुई। सम्मेलन का समापन 19 दिसंबर 2025 को भारत मंडपम, नई दिल्ली में होगा, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।

शिखर सम्मेलन के दूसरे दिन विज्ञान, अनुसंधान में निवेश, नवाचार, सुरक्षा, विनियमन और स्वास्थ्य प्रणालियों में एकीकरण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर उच्चस्तरीय विचार-विमर्श हुआ। सम्मेलन का केंद्रीय विषय “संतुलन की पुनर्स्थापना: स्वास्थ्य एवं कल्याण का विज्ञान और व्यवहार” रहा, जो हाल ही में स्वीकृत WHO वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा रणनीति 2025–2034 के अनुरूप है। इस रणनीति का उद्देश्य पारंपरिक चिकित्सा को एक न्यायसंगत, सुदृढ़ और जन-केंद्रित वैश्विक स्वास्थ्य प्रणाली का अभिन्न हिस्सा बनाना है।

इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री प्रतापराव जाधव ने नेपाल, श्रीलंका, माइक्रोनेशिया, मॉरीशस और फिजी के प्रतिनिधिमंडलों के साथ द्विपक्षीय बैठकें कीं, जबकि आयुष मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने अन्य देशों के साथ संवाद किया। कुल मिलाकर, आयुष मंत्रालय ने ब्राज़ील, मलेशिया, नेपाल, श्रीलंका, माइक्रोनेशिया, मॉरीशस, फिजी, केन्या, संयुक्त अरब अमीरात, मैक्सिको, वियतनाम, भूटान, सूरीनाम, थाईलैंड, घाना और क्यूबा सहित 16 देशों के साथ द्विपक्षीय बैठकें आयोजित कीं। इन बैठकों का उद्देश्य पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को सुदृढ़ करना रहा।

शिखर सम्मेलन के इतर, भारत और क्यूबा के बीच अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA) से संबंधित संस्थागत समझौता ज्ञापन (MoU) का विस्तार किया गया। इसके अंतर्गत पाठ्यक्रम विकास, सार्वजनिक स्वास्थ्य में एकीकरण, पंचकर्म प्रशिक्षण तथा आयुर्वेद में नियामक सामंजस्य को बढ़ावा देने हेतु संयुक्त कार्य समूह के गठन पर सहमति बनी।

दूसरे दिन आयोजित पूर्ण सत्रों में ऑस्ट्रेलिया, मोरक्को, ईरान, युगांडा, कनाडा, स्विट्ज़रलैंड, अमेरिका, ब्रिटेन, कोलंबिया, ब्राज़ील, भारत, न्यूज़ीलैंड, जर्मनी, नेपाल, कोरिया गणराज्य और श्रीलंका के विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा किए।

पूर्ण सत्र–2 का विषय “पारंपरिक चिकित्सा की प्रगति के लिए विज्ञान में निवेश” रहा, जिसमें वैज्ञानिक अनुसंधान, सतत निवेश, नवाचार और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के महत्व पर जोर दिया गया।

इसके अतिरिक्त विभिन्न समांतर सत्रों में अनुसंधान रोडमैप को वैश्विक कार्रवाई में बदलने, अनुसंधान पद्धतियों, मानसिक स्वास्थ्य, कैंसर देखभाल, ध्यान एवं योग, निवेश और नवाचार, तथा पारंपरिक चिकित्सा के सुरक्षित एवं प्रभावी एकीकरण जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।

पूर्ण सत्र–3 में “संतुलन, सुरक्षा और लचीलापन के लिए स्वास्थ्य प्रणालियों की पुनर्कल्पना” पर जोर दिया गया। इसमें पारंपरिक चिकित्सा को स्वास्थ्य प्रणालियों में सुरक्षित रूप से एकीकृत करने, रोगी सुरक्षा, गुणवत्ता आश्वासन और नियामक सामंजस्य जैसे पहलुओं पर प्रकाश डाला गया।

शिखर सम्मेलन के दूसरे दिन के विचार-विमर्श ने यह स्पष्ट किया कि विज्ञान-आधारित प्रमाण, मजबूत शासन व्यवस्था, रोगी सुरक्षा और समान अवसर सुनिश्चित करते हुए पारंपरिक चिकित्सा को आधुनिक स्वास्थ्य प्रणालियों में शामिल करना समय की आवश्यकता है। यह सम्मेलन पारंपरिक चिकित्सा को लचीली स्वास्थ्य प्रणालियों, जैव-विविधता संरक्षण और समावेशी विकास का महत्वपूर्ण आधार मानते हुए अंतिम दिन की नीतिगत चर्चाओं और वैश्विक प्रतिबद्धताओं के लिए मजबूत नींव तैयार करता है।


AFMS, AIIMS और स्वास्थ्य मंत्रालय ने शुरू किया भारत का पहला AI-आधारित डायबिटिक रेटिनोपैथी सामुदायिक स्क्रीनिंग कार्यक्रम

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सशस्त्र बल चिकित्सा सेवाओं (AFMS) ने डॉ. राजेंद्र प्रसाद नेत्र विज्ञान केंद्र (RPC), एम्स तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW) की ई-हेल्थ AI इकाई के सहयोग से मधुमेह जनित रेटिनोपैथी (Diabetic Retinopathy–DR) के लिए भारत का पहला आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित सामुदायिक स्क्रीनिंग कार्यक्रम 16 दिसंबर, 2025 को नई दिल्ली में शुरू किया। यह पहल मधुमेह से होने वाली नेत्र बीमारियों की शीघ्र पहचान को सुदृढ़ करने और रीयल-टाइम राष्ट्रीय स्वास्थ्य इंटेलिजेंस ढांचे के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

कार्यक्रम का उद्घाटन आर्मी हॉस्पिटल (रिसर्च एंड रेफरल), नई दिल्ली में डायरेक्टर जनरल, सशस्त्र बल चिकित्सा सेवाएं, सर्जन वाइस एडमिरल आरती सरिन तथा आरपीसी, एम्स की प्रमुख प्रो. राधिका टंडन द्वारा किया गया। यह सहयोग AFMS की व्यापक क्लिनिकल पहुंच, एम्स की अकादमिक नेतृत्व क्षमता और MoHFW की डिजिटल नवाचार विशेषज्ञता को एक साथ लाकर एक बड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती का समाधान प्रस्तुत करता है।

यह कार्यक्रम मधुनेत्रAI (MadhuNetrAI) पर आधारित है—जो आरपीसी, एम्स द्वारा विकसित एक वेब-आधारित AI टूल है। यह प्लेटफॉर्म हैंडहेल्ड फंडस कैमरों से ली गई रेटिनल छवियों की स्वचालित स्क्रीनिंग, ग्रेडिंग और ट्रायजिंग को सक्षम बनाता है, जिससे प्रशिक्षित चिकित्सा अधिकारी, नर्सिंग स्टाफ और स्वास्थ्य सहायक समुदाय स्तर पर स्क्रीनिंग कर सकते हैं। साथ ही, यह प्रणाली रोग की व्यापकता और भौगोलिक वितरण पर रीयल-टाइम डेटा उपलब्ध कराती है, जिससे साक्ष्य-आधारित योजना और नीति निर्माण में सहायता मिलती है।

पायलट चरण के अंतर्गत AFMS इस पहल को पुणे, मुंबई, बेंगलुरु, धर्मशाला, गया, जोरहाट और कोच्चि—इन सात स्थानों पर लागू करेगा, जो महानगरीय, ग्रामीण, पहाड़ी, तटीय और दूरस्थ क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं। प्रत्येक स्थल से चयनित कर्मियों को आरपीसी, एम्स में गहन प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिसके बाद बड़े पैमाने पर सामुदायिक स्क्रीनिंग की जाएगी।

जिन मरीजों में डायबिटिक रेटिनोपैथी की पहचान होगी, उन्हें उचित मधुमेह प्रबंधन के लिए संदर्भित किया जाएगा, जबकि दृष्टि-घातक DR मामलों को नामित जिला अस्पतालों में विट्रियो-रेटिना विशेषज्ञों के पास भेजा जाएगा। जिला स्वास्थ्य प्रशासन रेफरल तंत्र का समन्वय करेगा और DR प्रबंधन को मौजूदा गैर-संचारी रोग (NCD) कार्यक्रमों के साथ एकीकृत करेगा, ताकि निरंतर देखभाल सुनिश्चित हो सके।

उद्घाटन अवसर पर कार्यक्रम की कार्यप्रणाली और संचालन दिशानिर्देशों का विवरण देने वाली एक कम्पेंडियम भी जारी की गई। सहयोग स्थापित करने में आर्मी हॉस्पिटल (R&R) के नेत्र विज्ञान विभागाध्यक्ष एवं परामर्शदाता ब्रिगेडियर एस. के. मिश्रा के योगदान को सराहा गया। यह पहल विस्तारणीय और दोहराने योग्य मॉडल के रूप में परिकल्पित है, जो AFMS, एम्स और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के संयुक्त प्रयासों से सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणालियों में AI-सक्षम समाधानों के प्रभावी एकीकरण का उदाहरण प्रस्तुत करती है।

स्वास्थ्य मंत्रालय और WHO ने महिलाओं के स्वास्थ्य पर दिल्ली मेट्रो अभियान का शुभारंभ किया

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केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के सहयोग से आज यहां सुल्तानपुर मेट्रो स्टेशन पर महिलाओं और किशोरियों के स्वास्थ्य एवं कल्याण पर केंद्रित एक माह-लंबा दिल्ली मेट्रो अभियान शुरू किया गया। यह अभियान 10 दिसंबर 2025 से 10 जनवरी 2026 तक चलेगा। इस दौरान मेट्रो ट्रेनों और कुछ चयनित स्टेशनों पर प्रदर्शित संदेशों के माध्यम से लाखों यात्रियों तक महिलाओं की सुरक्षा, स्वास्थ्य और कल्याण, डिजिटल खाई को कम करने, महिलाओं के लिए मानसिक स्वास्थ्य सहायता की पहुंच बढ़ाने, पीसी-पीएनडीटी और टीबी जागरूकता से संबंधित महत्वपूर्ण सूचनाएं पहुँचाई जाएंगी।

इस अवसर पर केन्द्रीय स्वास्थ्य सचिव पुनः सलिला श्रीवास्तव ने कहा,

“कोई परिवार या राष्ट्र तब तक प्रगति नहीं कर सकता जब तक महिलाएँ स्वस्थ न हों। महिलाओं का स्वास्थ्य और सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण मुद्दे हैं। इस दिल्ली मेट्रो अभियान के माध्यम से हम यह संदेश सीधे जनता तक पहुँचाना चाहते हैं। यह एक अत्यंत प्रभावी माध्यम है, जो लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाने में मदद करेगा।”

उन्होंने यह भी बताया कि टीबी जागरूकता, डिजिटल खाई कम करने, पीसी-पीएनडीटी अधिनियम 1994 तथा अन्य प्रमुख मुद्दों पर आधारित संदेश मेट्रो कोचों के अंदर और बाहर प्रदर्शित किए गए हैं।

महिला भ्रूण लिंग निर्धारण और चयन से जुड़ी तकनीकों की बढ़ती उपलब्धता पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा,

“पहले लोग लिंग निर्धारण के लिए अल्ट्रासाउंड पर निर्भर रहते थे, लेकिन अब नई तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। इन गलत प्रथाओं को रोकना आवश्यक है और लोगों को इसके प्रति संवेदनशील बनाना होगा।”

WHO दक्षिण-पूर्व एशिया की अधिकारी-प्रभारी डॉ. कैथरीना बोहेमे ने कहा,

“इस मेट्रो स्टेशन पर कुछ यात्राएँ समाप्त होती हैं और कुछ नई यात्राएँ शुरू होती हैं। आज लैंगिक-आधारित हिंसा के विरुद्ध 16 दिवसीय अभियान का अंतिम दिन है। एक अभियान समाप्त होते ही दूसरा शुरू हो रहा है। हमें महिलाओं और किशोरियों के स्वास्थ्य और कल्याण के लिए दिल्ली मेट्रो अभियान शुरू करने पर गर्व है, जो दो सरल और स्थायी संदेशों पर आधारित है: Healthy Women = Healthy Nations और #BecozSheMatters।”

उन्होंने कहा,

“स्वस्थ महिलाएँ स्वस्थ परिवार, स्वस्थ समुदाय और स्वस्थ राष्ट्र की आधारशिला हैं। महिलाओं और लड़कियों का स्वास्थ्य, विशेषकर उनका मानसिक स्वास्थ्य, न केवल उनके कल्याण के लिए बल्कि पूरे समाज की भलाई के लिए महत्वपूर्ण है।”

भारत में सुदृढ़ महिला स्वास्थ्य और सशक्तिकरण के लिए कई राष्ट्रीय पहलें चलाई जा रही हैं—

  • स्वस्थ नारी सशक्त परिवार अभियान

  • प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (PMSMA)

  • मिशन शक्ति

  • निर्भया फंड

  • आयुष्मान भारत

कार्यक्रम के दौरान WHO और अन्य साझेदार UN एजेंसियों के साथ स्वास्थ्य सचिव ने अभियान की शुरुआत का नेतृत्व किया।

लॉन्च कार्यक्रम में WeBhor, एक ऑल-वुमेन बैंड ने प्रस्तुति दी, जिसने महिलाओं की दृढ़ता, गरिमा और सशक्तिकरण के संदेश को सशक्त रूप से प्रस्तुत किया। इसके बाद सभी अतिथियों ने अभियान की पहली मेट्रो यात्रा में हिस्सा लिया, जो महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा, सम्मान और कल्याण को बढ़ावा देने की सामूहिक जिम्मेदारी का प्रतीक है।

दिल्ली मेट्रो का आभार व्यक्त करते हुए डॉ. बोहेमे ने कहा,

“हम सब इस महत्वपूर्ण यात्रा के सह-यात्री हैं। इस संदेश को आगे बढ़ाने में सहयोग करें, क्योंकि स्वस्थ महिलाएँ ही स्वस्थ राष्ट्र बनाती हैं।”

इस अवसर पर संयुक्त सचिव मीरा श्रीवास्तव, संयुक्त सचिव गीतू जोशी, और स्वास्थ्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।



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