Media24Media.com: ‘वसुधैव कुटुंबकम’ के प्रतीक मोहन भागवत: पीएम मोदी ने लिखा विशेष लेख

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‘वसुधैव कुटुंबकम’ के प्रतीक मोहन भागवत: पीएम मोदी ने लिखा विशेष लेख

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 नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत के 75वें जन्मदिन पर उनकी “बौद्धिक गहराई और सहृदय नेतृत्व” की सराहना करते हुए विशेष लेख लिखा है। मोदी ने कहा कि 2009 से संघ प्रमुख के रूप में भागवत का कार्यकाल संगठन की 100 साल की यात्रा में सबसे अधिक परिवर्तनकारी काल माना जाएगा।


प्रधानमंत्री ने भागवत को ‘वसुधैव कुटुंबकम’ का जीवंत उदाहरण बताते हुए कहा कि उन्होंने अपना पूरा जीवन समाज को संगठित करने, समता, समरसता और बंधुत्व की भावना को सशक्त करने में समर्पित किया है।

उन्होंने लिखा कि यह सुखद संयोग है कि इस वर्ष विजयादशमी के दिन संघ 100 वर्ष का होगा और उसी दिन महात्मा गांधी व लाल बहादुर शास्त्री की जयंती भी पड़ेगी। मोदी ने कहा कि भागवत ने कभी संगठन की मूल विचारधारा से समझौता नहीं किया, बल्कि समाज की बदलती जरूरतों को भी आत्मसात किया।

मोदी की प्रमुख बातें:

  • भागवत का मृदुभाषी स्वभाव और सुनने की क्षमता उनके नेतृत्व को संवेदनशील और गरिमामयी बनाती है।
  • वह युवाओं से सहज रूप से जुड़ते हैं और उन्हें संघ कार्य की ओर प्रेरित करते हैं।
  • स्वच्छ भारत मिशन और बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ जैसे अभियानों में उनकी गहरी रुचि रही है।
  • समाज कल्याण के लिए उन्होंने ‘पंच परिवर्तन’ (स्व-बोध, सामाजिक समरसता, नागरिक शिष्टाचार, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण) का मार्ग प्रशस्त किया।
  • संघ को उन्होंने ‘अक्षय वट’ बताया, जो राष्ट्रीय संस्कृति और चेतना को ऊर्जा देता है।

प्रधानमंत्री ने भागवत के पारिवारिक जुड़ाव को भी याद किया। उन्होंने बताया कि उनके पिता मधुकरराव भागवत भी संघ से जुड़े थे और उन्होंने मोहन भागवत को राष्ट्रनिर्माण के लिए तैयार किया।

मोदी ने कहा कि आपातकाल के समय भागवत ने प्रचारक के रूप में काम संभाला और महाराष्ट्र के ग्रामीण व पिछड़े इलाकों में लंबे समय तक सक्रिय रहकर गरीबों की समस्याओं को करीब से समझा। संघ में विभिन्न पदों पर रहते हुए उन्होंने संगठन और समाज, दोनों को नई दिशा दी।

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