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देश के युवाओं का हित और उनका भविष्य हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है : किरण देव

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 रायपुर। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष किरण देव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लिए छात्रों का हित सबसे महत्वपूर्ण है और वे इसे सर्वोच्च प्राथिमिकता देते हुए निर्णय ले रहे हैं। देश के युवाओं का हित और उनका भविष्य हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। देव ने भाजपा प्रदेश कार्यालय (कुशाभाऊ ठाकरे परिसर) में गुरुवार को आहूत पत्रकार वार्ता करते हुए कहा कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।


भाजपा प्रदेश अध्यक्ष देव ने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने छात्रों के इस आंदोलन में अपने कार्यकर्ताओं की घुसपैठ करा कर छात्रों के आंदोलन का स्वरूप ही बदल दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने इस विषय को पहले दिन से ही गंभीरता से लेकर यह निर्णय किया है कि छात्रों का हित सर्वाेपरि है व उनके नुकसान की भरपाई भी होगी।

देव ने कहा कि कांग्रेस पार्टी के नेताओं का भाषण हमेशा प्रधानमंत्री मोदी के विरोध में होता है। प्रधानमंत्री मोदी के लिए कांग्रेसी नेताओं ने भाषणों में अभद्र शब्दों का प्रयोग किया है। यह लोकतांत्रिक पद्धति नहीं है। प्रजातंत्र में यह स्वीकार्य नहीं है। संवैधानिक पद पर बैठे प्रधानमंत्री के लिए गालियों का प्रयोग करना यह हमारे देश के संस्कार नहीं हैं। यह हमारी संस्कृति और सभ्यता नहीं है।

देव ने कहा कि केन्द्र सरकार सदन में छात्रों के हितों को लेकर चर्चा के लिए तैयार है लेकिन कांग्रेस पार्टी और उसके नेता सदन में चर्चा करने से भाग रहे हैं। सदन की कार्यवाही को बार-बार बाधित करने का काम कर रहे हैं। कांग्रेस पार्टी सदन में चर्चा नहीं करना चाहती और इन्हीं के घटक दल समाजवादी पार्टी के नेता कहते हैं कि उनकी वह जानें, हमको तो चर्चा करनी है। यह समझ से परे हैं।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष देव ने कहा कि राहुल गांधी हाथ में संविधान की किताब लेकर घूमते हुए लोगों को दिग्भ्रमित कर रहे हैं। 'संविधान खतरे में है' कहकर संविधान को खतरे में डालने का काम कांग्रेस पार्टी ने किया है। प्रधानमंत्री आवास के सामने बिना किसी पूर्व सूचना के अपनी आन्तरिक योजना के आधार पर अपने कांग्रेसी साथियों के साथ वहाँ पर धरने पर बैठ गए, जबकि वह पूरा क्षेत्र संवेदनशील क्षेत्र है। वहाँ पर किसी भी प्रकार का धरना-प्रदर्शन प्रतिबंधित है।

देव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों का मान-सम्मान बढ़ाया है। इन 12 वर्षों में बहुत-सी योजनाएँ एवं कार्यक्रम जनहित में क्रियान्वित किए गए हैं। आज प्रधानमंत्री मोदी का अनुसरण विश्व के दूसरे देश कर रहे हैं। 16 से ज्यादा देशों ने अपने देश का सर्वाेच्च सम्मान प्रधानमंत्री मोदी को प्रदान किया है।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष देव ने कहा कि कांग्रेस अपने कार्यकर्ताओं को भेजकर आंदोलन कर रहे लोगों को भड़काने का काम कर रही है। बिलो दि बेल्ट की राजनीति करना राहुल गांधी और कांग्रेस का राजनीतिक चरित्र हो गया है। कांग्रेस पार्टी एवं उसके नेताओं ने छात्रों के इस आंदोलन को अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए बलि चढ़ा दिया। अगर छात्रों का हित चाहते तो छात्रों के आंदोलन को राजनीतिक रूप नहीं देते। केन्द्र सरकार ने इस विषय में कार्यवाही करके इसकी जांच के निर्देश दिए है, तथा पेपर निरस्त करके तुरंत उसकी परीक्षा भी हुई है और बच्चे पास भी हुए हैं और खुशी मना रहे हैं।

देव ने कहा कि संसद का समय जनता के हित के लिए देश के हित के लिए होता है जिसमें कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाते है। लेकिन कांग्रेस पार्टी और उसके नेता सदन के अंदर चर्चा करने नहीं देते हैं। सदन की गरिमा तार-तार करते हैं। संविधान की हत्या का इससे बड़ा उदाहरण और क्या हो सकता है? इससे बड़ा उदाहरण कांग्रेस पार्टी ने आपातकाल लगा कर दिया था।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष देव ने कहा कि कांग्रेस पार्टी और उसके नेता हमारे देश की एकता, अखंडता, समरसता को खंडित करने का काम कर रहे हैं। सोशल मीडिया, ट्विटर हैंडल पर कांग्रेस और उसके समर्थित दलों के नेता अमर्यादित शब्दों का प्रयोग कर रहे हैं। देश यह पसंद नहीं करता है। कांग्रेस पार्टी को इन्हीं कारणों से आज देश में कांग्रेस पार्टी सिमटती जा रही है।

देव ने कहा कि यह पूरे देश में अराजकता का माहौल पैदा करने की घिनौनी साजिश का हिस्सा है। नेपाल और बांग्लादेश में पहले ही अराजकता का माहौल है। लेकिन भारत देश ऋषि मुनियों का देश है, परंपराओं और समरसता से ओतप्रोत है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश आगे बढ़ रहा है। 2047 तक विकसित भारत की संकल्पना के साथ अपनी योजनाओं के साथ चल रहे हैं जबकि राहुल गांधी दूसरे देशों में जाकर देश की बुराई करने और कमी निकालने का काम करते हैं। आजादी के बाद कांग्रेस की सरकार लंबे समय तक थी। पूरी दुनिया ने उन सरकारों को भी देखा है।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष देव ने कहा कि 12 वर्षों से देश में प्रधानमंत्री श्री मोदी की नेतृत्व वाली एक पारदर्शी सरकार है जिनके ऊपर एक भी भ्रष्टाचार का आरोप नहीं है। कांग्रेस पार्टी और उसके नेता पूरे देश में अराजकता का माहौल पैदा कर सरकार के खिलाफ झूठे नैरेटिव सेट करने का काम कर रहे हैऔ। लेकिन देश की जनता कांग्रेस पार्टी की इन बातों को अच्छी तरह से समझने लगी है। उन्होंने शिक्षा के विषय पर आँकड़ा रखते हुए कहा कि कांग्रेस शासन काल में शिक्षा का बजट 8,225 करोड रुपए होता था जो आज बढ़कर 1.39 लाख करोड़ रुपए हो गया है। इसका लाभ एम्स, आईआईटी, कॉलेज की सीटों में वृध्दि हुई रही है। उन्होंने कहा कि एक नया दल कॉकरोच पार्टी और उनके साथ एक बड़ा दल कांग्रेस पार्टी आने वाले भविष्य का ख्वाब देख रहे हैं।

इस दौरान पत्रकारवार्ता में भाजपा प्रदेश महामंत्री यशवंत जैन, अखिलेश सोनी, डॉ. नवीन मार्कण्डेय, जिला अध्यक्ष रायपुर शहर रमेश सिंह ठाकुर, प्रदेश मंत्री अमित साहू मौजूद थे।

वंदे मातरम् के 150 वर्ष: संसद में आज 10 घंटे की ऐतिहासिक बहस

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 नई दिल्ली। राष्ट्रगीत वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर आज सोमवार को लोकसभा में विशेष चर्चा आयोजित की जा रही है, जिसकी शुरुआत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी करेंगे। इस विषय पर 10 घंटे की विस्तृत बहस निर्धारित की गई है, जिसमें वंदे मातरम् के इतिहास, महत्व और कम ज्ञात पहलुओं पर प्रकाश डाला जाएगा। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह इस बहस में दूसरे वक्ता होंगे।


संसद में यह चर्चा बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित तथा जदुनाथ भट्टाचार्य द्वारा संगीतबद्ध राष्ट्रगीत की 150वीं वर्षगांठ पर वर्षभर चलने वाले राष्ट्रीय समारोह का हिस्सा है। चर्चा में लोकसभा में कांग्रेस के उपनेता गौरव गोगोई, प्रियंका गांधी वाड्रा सहित विभिन्न दलों के सदस्य भाग लेंगे। प्रधानमंत्री मोदी पहले भी इस मुद्दे पर कांग्रेस की आलोचना करते हुए 1937 में गीत के प्रमुख छंद हटाने का आरोप लगा चुके हैं।

विपक्ष से राहुल गांधी मंगलवार को चुनाव सुधारों पर होने वाली चर्चा में वक्ता होंगे, जबकि वंदे मातरम् पर सोमवार की बहस में वे हिस्सा नहीं लेंगे। चुनाव सुधारों पर चर्चा मंगलवार और बुधवार को लोकसभा तथा बुधवार और गुरुवार को राज्यसभा में होगी।

राज्यसभा में चर्चा की शुरुआत मंगलवार को गृह मंत्री अमित शाह करेंगे और स्वास्थ्य मंत्री व सदन के नेता जे.पी. नड्डा दूसरे वक्ता होंगे। कांग्रेस की ओर से दोनों सदनों में वक्ताओं की सूची अंतिम रूप से तय की जा चुकी है। राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे भी चर्चा में भाग लेंगे।

राजभवन में गूंजा ‘वंदे मातरम्’- 150 वर्ष पूरे होने पर हुआ सामूहिक गायन

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 रायपुर: भारत के राष्ट्रीय गीत “वंदे मातरम्‘‘ के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आज राजभवन, रायपुर में भावपूर्ण सामूहिक गायन का आयोजन किया गया। इस अवसर पर राज्यपाल रमेन डेका की गरिमामयी उपस्थिति रही।


कार्यक्रम का सीधा प्रसारण नई दिल्ली से किया गया, जहां प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस ऐतिहासिक आयोजन का शुभारंभ किया। राजभवन में अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक कार्यक्रम का लाइव प्रसारण देखा और एक स्वर में “वंदे मातरम्” का सामूहिक गायन किया।

राजभवन के छत्तीसगढ़ मंडपम में आयोजित इस कार्यक्रम में उपस्थित सभी ने राष्ट्रीय भावना और मातृभूमि के प्रति समर्पण की भावना के साथ राष्ट्रीय गीत का सामूहिक रूप से गायन किया।

इस अवसर पर राज्यपाल के सचिव डॉ. सी. आर. प्रसन्ना सहित अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।

छत्तीसगढ़ बनेगा हेल्थकेयर, वेलनेस और पर्यटन का नया हब : मुख्यमंत्री साय

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 रायपुर :  छत्तीसगढ़ अब केवल कोर सेक्टर तक सीमित नहीं है, बल्कि आने वाले समय में यह वेलनेस, हेल्थकेयर और पर्यटन के क्षेत्र में भी राष्ट्रीय पहचान बनाएगा। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज ओमाया गार्डन, रायपुर में आयोजित छत्तीसगढ़ केयर कनेक्ट कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही।


मुख्यमंत्री  साय ने अपने उद्बोधन की शुरुआत शारदीय नवरात्रि की शुभकामनाओं से की और कहा कि यह आयोजन ऐसे समय में हो रहा है, जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में लागू जीएसटी 2.0 ने अर्थव्यवस्था को सरलता, पारदर्शिता और तेजी की दिशा में आगे बढ़ाया है। इस सुधार ने निवेशकों और उद्यमियों के लिए अभूतपूर्व अवसर खोले हैं।


मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के विज़न के साथ कदमताल करते हुए प्रदेश सरकार ने विकसित छत्तीसगढ़ का लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य को साकार करने के लिए पिछले डेढ़ वर्ष में 350 से अधिक सुधार लागू किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि अब हम इज ऑफ डूइंग बिज़नेस से आगे बढ़कर स्पीड आफ डूइंग बिज़नेस के युग में प्रवेश कर चुके हैं।


मुख्यमंत्री साय ने कहा कि नई औद्योगिक नीति छत्तीसगढ़ की प्रगति की आधारशिला है। इसी नीति ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है और यही कारण है कि मात्र एक वर्ष के भीतर प्रदेश को लगभग साढ़े 7 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। इन प्रस्तावों से लाखों लोगों के लिए रोजगार के अवसर सृजित होंगे और सेवा क्षेत्र को नई पहचान मिलेगी।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ केयर कनेक्ट में अस्पतालों और हेल्थकेयर क्षेत्र में 11 बड़े प्रस्ताव सामने आए हैं। इनमें रायपुर का गिन्नी देवी गोयल मणिपाल हॉस्पिटल (500 बेड), नीरगंगा हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर (450 बेड), बॉम्बे हॉस्पिटल (300 बेड) और माँ पद्मावती इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (750 बेड) जैसे बड़े प्रोजेक्ट शामिल हैं। स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में कुल मिलाकर 2,466 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश प्रस्तावित है, जिससे लगभग 6,000 नए रोजगार सृजित होंगे।

मेडिसिटी से बनेगा मेडिकल हब

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि नवा रायपुर में विकसित हो रहा मेडिसिटी छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर का बड़ा मेडिकल हब बनाएगा। प्रदेश के विभिन्न जिलों के साथ-साथ पड़ोसी राज्यों से भी यहां मरीज आते हैं। मेडिसिटी के निर्माण से स्वास्थ्य सेवाएं और मजबूत होंगी और विश्वस्तरीय सुपर स्पेशलिटी सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में फार्मा सेक्टर में भी निवेश की अपार संभावनाएं हैं। प्रदेश सरकार फार्मा हब तैयार कर रही है, जहां एक ही स्थान पर अनेक फार्मा इंडस्ट्री अपना संचालन करेंगी। इससे प्रदेश में दवा उद्योग को नई दिशा मिलेगी और सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों के लिए आवश्यक दवाओं की आसान आपूर्ति सुनिश्चित होगी।

होटल और पर्यटन क्षेत्र में निवेश

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर और जैव विविधता पर्यटन उद्योग के लिए अपार अवसर प्रस्तुत करती है। कार्यक्रम में होटल और पर्यटन क्षेत्र से भी 652 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इनमें वेस्टिन होटल रायपुर (212.7 करोड़ रुपये), होटल जिंजर, इन्फेरियन होटल एंड रिसॉर्ट, अम्यूजोरामा अम्यूज़मेंट पार्क एंड होटल जैसे बड़े नाम शामिल हैं।

पर्यटन को उद्योग का दर्जा

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पर्यटन को उद्योग का दर्जा दिया गया है और इससे निवेशकों को विशेष लाभ मिलेगा। मुख्यमंत्री ने आह्वान किया कि होटल, रिसॉर्ट, होम स्टे और मनोरंजन उद्योग से जुड़े उद्यमी प्रदेश की समृद्ध संस्कृति और प्रकृति का लाभ उठाकर पर्यटन को नई ऊँचाइयों तक ले जाएं।

निवेश प्रक्रिया की सरलता

मुख्यमंत्री  साय ने निवेशकों को भरोसा दिलाते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में सिंगल विंडो 'वन क्लिक' सिस्टम लागू है, जिसके कारण किसी भी उद्यमी को एनओसी के लिए भटकना नहीं पड़ता। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि दिल्ली में आयोजित इन्वेस्टर्स समिट के बाद पालीमैटेक कंपनी को तीन माह से भी कम समय में भूमि आवंटन और सभी स्वीकृतियाँ प्रदान कर दी गईं और उन्होंने 1,100 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट पर कार्य आरंभ कर दिया।

नई तकनीक और एआई सेक्टर

मुख्यमंत्री  साय ने बताया कि छत्तीसगढ़ एआई क्रांति का भी स्वागत कर रहा है। नवा रायपुर में एआई डाटा सेंटर पार्क का निर्माण किया जा रहा है, जो भविष्य में प्रदेश को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डाटा मैनेजमेंट का हब बनाएगा। यहां डाटा सेंटर से जुड़े उद्योगों के लिए निवेश की अपार संभावनाएं हैं।

पावर हब की ओर कदम

उन्होंने कहा कि विकसित भारत के निर्माण में ऊर्जा सबसे आवश्यक तत्व है। छत्तीसगढ़ देश का पावर हब बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। कोयला, खनिज और ऊर्जा उत्पादन में छत्तीसगढ़ की भूमिका पहले से ही महत्वपूर्ण रही है और आने वाले वर्षों में यह योगदान और भी बढ़ेगा।

कनेक्टिविटी और लोकेशन का लाभ

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की सेंट्रल इंडिया लोकेशन इसे विशेष बनाती है। कच्चे माल की प्रचुर उपलब्धता, रेल, सड़क और हवाई मार्ग की मजबूत कनेक्टिविटी तथा प्रशिक्षित मानव संसाधन इसे निवेश के लिए आदर्श गंतव्य बनाते हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश में एयर कार्गो सेवा भी आरंभ हो चुकी है, जिससे व्यापार और तेज़ी से बढ़ेगा।

सेवा क्षेत्र की नई पहचान

मुख्यमंत्री ने जोर दिया कि अब छत्तीसगढ़ केवल स्टील, सीमेंट, पावर और एल्युमिनियम तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सेवा क्षेत्र से जुड़े उद्योगों की पहचान भी बनेगा। हेल्थकेयर, होटल, पर्यटन और एआई आधारित इंडस्ट्री आने वाले समय में प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नए आयाम देंगे।

कार्यक्रम में उद्योग मंत्री श्री लखन लाल देवांगन ने कहा कि हेल्थ, पर्यटन के साथ सभी प्रकार के निवेश में सरकार सहूलियतें उपलब्ध कराएगी। नई उद्योग नीति से उद्योगपतियों का आकर्षण प्रदेश की ओर बढ़ा है। मुख्यमंत्री ने विभिन्न प्रदेशों के साथ ही विदेश जापान और दक्षिण कोरिया जैसे स्थानों पर भी इन्वेस्टर समिट में हिस्सा लिया है। प्रदेश में 5 से अधिक बार निवेशकों के साथ बैठक हुई है, इससे नए उद्योगों की स्थापना और रोजगार के अवसर सृजित हो रहे हैं। पिछले 10 महीनों में लगभग साढ़े 7 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव मिल चुके है। हमने होटल एवं पर्यटन क्षेत्र को भी प्रोत्साहित करने का कार्य किया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के निर्देशन में अच्छे से अच्छा काम हो सके हम यह प्रयास कर रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि राजधानी रायपुर के ओमाया गार्डन में आयोजित छत्तीसगढ़ केयर कनेक्ट कार्यक्रम में हेल्थकेयर और होटल क्षेत्र की प्रतिष्ठित कंपनियों ने निवेश के बड़े प्रस्ताव पेश किए। कार्यक्रम में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए 11 बड़े अस्पताल समूहों ने कुल 2,466.77 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव दिए, जिनसे लगभग 6000 लोगों को रोजगार मिलेगा और प्रदेश में आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं की नई ऊँचाइयाँ स्थापित होंगी।

कार्यक्रम में मुंबई स्थित बॉम्बे हॉस्पिटल ट्रस्ट ने 300 बेड सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के लिए 680.37 करोड़ का निवेश प्रस्तावित किया है, जिससे 500 रोजगार उपलब्ध होंगे। माँ पद्मावती इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज रायपुर 750 बेड क्षमता वाला मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल 340 करोड़ निवेश और 1,500 रोजगार अवसर प्राप्त होंगे। आरोग्यमृत वेलनेस एलएलपी रायपुर द्वारा इंटरनल वेलनेस ग्रोथ, हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर की स्थापना हेतु 300 करोड़ के निवेश और 1,000 रोजगार अवसरों के साथ प्रस्तावित किया गया है। फोर सीज़न हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर रायपुर 600 बेड क्षमता और 302 करोड़ के निवेश से 1,400 रोजगार सृजित करेगा। गिन्नी देवी गोयल मणिपाल हॉस्पिटल रायपुर में 500 बेड का 307 करोड़ का मल्टी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल प्रस्तावित है, जिसमें 100 लोगों को रोजगार मिलेगा। नीरगंगा हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर रायपुर (वंदना ग्रुप) द्वारा 450 बेड का मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल 205.23 करोड़ के निवेश और 302 रोजगार अवसरों के साथ प्रस्तावित किया गया है। मेमन हेल्थकेयर प्राइवेट लिमिटेड रायपुर 150 बेड क्षमता वाले संजीवनी सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में 101 करोड़ निवेश और 400 रोजगार अवसर लेकर आया है। मॉडर्न मेडिकल इंस्टिट्यूट रायपुर 150 बेड सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के रूप में 91.8 करोड़ के निवेश से 555 रोजगार उत्पन्न करेगा। श्रीराम संजीवनी कैंसर हॉस्पिटल बिलासपुर 100 बेड 70 करोड़ निवेश और 200 लोगों को रोजगार के साथ प्रस्तावित है। आरएस अरमानी हेल्थकेयर एलएलपी 50 बेड अस्पताल के लिए 59.37 करोड़ का निवेश और 76 रोजगार अवसर लेकर आया है। वृंदा चेस्ट एंड मेडिकल साइंस रायपुर 50 बेड की सुविधा 10 करोड़ के निवेश के साथ प्रस्तावित है।

होटल वेस्टिन रायपुर (सारदा ग्रुप नागपुर) ने 212.7 करोड़ का निवेश और 400 रोजगार का प्रस्ताव रखा है। पंचामृत एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड रायपुर (अम्यूज़ोरामा अम्यूज़मेंट पार्क एंड होटल) 80.91 करोड़ निवेश से 300 रोजगार सृजित करेगा। चौहान हाउसिंग प्राइवेट लिमिटेड द्वारा इन्फेरियन होटल एंड रिसॉर्ट रायपुर 80 करोड़ निवेश के साथ प्रस्तावित है। 

होटल जिंजर रायपुर (डीएसएस ग्रुप) 78 करोड़ निवेश और 135 रोजगार अवसर लेकर आया है। एमएम होटल इन एंड रिसॉर्ट्स रायपुर 63 करोड़ निवेश से 110 रोजगार अवसर सृजित करेगा। प्रयास मॉल एंड मल्टीप्लेक्स धमतरी 41.82 करोड़ निवेश और 30 रोजगार अवसर लेकर आया है। इन्फेरियन लेक रिसॉर्ट बालोद और होटल राजनांदगांव के लिए 25-25 करोड़ निवेश और कुल 175 रोजगार अवसर प्रस्तावित हैं। गोदरीवाला और एमएम ग्रुप रायपुर द्वारा प्रस्तावित अम्यूज़मेंट पार्क 24.9 करोड़ निवेश और 70 रोजगार अवसर प्रदान करेगा। बाफना लॉन एंड होटल धमतरी (सरोवर पोर्टिको ग्रुप) द्वारा 20.97 करोड़ निवेश और 22 रोजगार अवसर प्रस्तावित किया गया है।

इस प्रकार कार्यक्रम में घोषित कुल निवेश प्रस्ताव 3,119.07 करोड़ रुपये के हैं। इनमें स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र से 2,466.77 करोड़ और होटल-पर्यटन क्षेत्र से 652.3 करोड़ रुपये शामिल हैं। प्रस्तावित परियोजनाओं से मिलकर 7 हजार से अधिक रोजगार सृजित होंगे और प्रदेश को 2,800 से अधिक नए हॉस्पिटल बेड्स की सुविधा प्राप्त होगी।

मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने निवेशकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह निवेश छत्तीसगढ़ को हेल्थकेयर, वेलनेस और पर्यटन का नया केंद्र बनाएगा और प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के संकल्पित विकसित भारत के निर्माण में छत्तीसगढ़ अग्रणी भूमिका निभाएगा।

कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में निवेश के असीमित अवसर उपलब्ध हैं। हमारी सरकार नई औद्योगिक नीति के तहत निवेशकों को हर संभव सुविधा और सहयोग प्रदान करेगी। मुझे विश्वास है कि राज्य के उद्योगों और निवेशकों के साथ मिलकर हम छत्तीसगढ़ में विकास का नया अध्याय लिखेंगे।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक विकास निगम के अध्यक्ष राजीव अग्रवाल, छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के अध्यक्ष श्री नीलू शर्मा, मुख्यमंत्री के सचिव  राहुल भगत, ऊर्जा विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव, स्वास्थ्य विभाग के सचिव श्री अमित कटारिया, उद्योग विभाग के सचिव  रजत कुमार, संचालक संस्कृति श्री विवेक आचार्य, संचालक उद्योग श्री प्रभात मालिक, सीआईआई के चेयरमेन श्री संजय जैन भी उपस्थित रहे।

प्रधानमंत्री ने इंजीनियर्स डे पर सर एम. विश्वेश्वरैया को श्रद्धांजलि दी

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इंजीनियर्स डे के अवसर पर भारत रत्न सर एम. विश्वेश्वरैया को हार्दिक श्रद्धांजलि अर्पित की, जिनके अग्रणी योगदानों ने भारत की आधुनिक इंजीनियरिंग परिदृश्य की नींव रखी।

आज एक्स पर अपने संदेश में प्रधानमंत्री ने कहा:

“आज इंजीनियर्स डे पर मैं सर एम. विश्वेश्वरैया को नमन करता हूँ, जिनकी प्रतिभा ने भारत की इंजीनियरिंग के परिदृश्य पर अमिट छाप छोड़ी है। मैं सभी इंजीनियरों को हार्दिक शुभकामनाएँ देता हूँ, जो अपनी सृजनात्मकता और संकल्प के माध्यम से नवाचार को आगे बढ़ा रहे हैं और विभिन्न क्षेत्रों में कठिन चुनौतियों का समाधान कर रहे हैं। हमारे इंजीनियर विकसित भारत के निर्माण के सामूहिक प्रयासों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहेंगे।”

https://x.com/narendramodi/status/1967424783320313912

‘वसुधैव कुटुंबकम’ के प्रतीक मोहन भागवत: पीएम मोदी ने लिखा विशेष लेख

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 नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत के 75वें जन्मदिन पर उनकी “बौद्धिक गहराई और सहृदय नेतृत्व” की सराहना करते हुए विशेष लेख लिखा है। मोदी ने कहा कि 2009 से संघ प्रमुख के रूप में भागवत का कार्यकाल संगठन की 100 साल की यात्रा में सबसे अधिक परिवर्तनकारी काल माना जाएगा।


प्रधानमंत्री ने भागवत को ‘वसुधैव कुटुंबकम’ का जीवंत उदाहरण बताते हुए कहा कि उन्होंने अपना पूरा जीवन समाज को संगठित करने, समता, समरसता और बंधुत्व की भावना को सशक्त करने में समर्पित किया है।

उन्होंने लिखा कि यह सुखद संयोग है कि इस वर्ष विजयादशमी के दिन संघ 100 वर्ष का होगा और उसी दिन महात्मा गांधी व लाल बहादुर शास्त्री की जयंती भी पड़ेगी। मोदी ने कहा कि भागवत ने कभी संगठन की मूल विचारधारा से समझौता नहीं किया, बल्कि समाज की बदलती जरूरतों को भी आत्मसात किया।

मोदी की प्रमुख बातें:

  • भागवत का मृदुभाषी स्वभाव और सुनने की क्षमता उनके नेतृत्व को संवेदनशील और गरिमामयी बनाती है।
  • वह युवाओं से सहज रूप से जुड़ते हैं और उन्हें संघ कार्य की ओर प्रेरित करते हैं।
  • स्वच्छ भारत मिशन और बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ जैसे अभियानों में उनकी गहरी रुचि रही है।
  • समाज कल्याण के लिए उन्होंने ‘पंच परिवर्तन’ (स्व-बोध, सामाजिक समरसता, नागरिक शिष्टाचार, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण) का मार्ग प्रशस्त किया।
  • संघ को उन्होंने ‘अक्षय वट’ बताया, जो राष्ट्रीय संस्कृति और चेतना को ऊर्जा देता है।

प्रधानमंत्री ने भागवत के पारिवारिक जुड़ाव को भी याद किया। उन्होंने बताया कि उनके पिता मधुकरराव भागवत भी संघ से जुड़े थे और उन्होंने मोहन भागवत को राष्ट्रनिर्माण के लिए तैयार किया।

मोदी ने कहा कि आपातकाल के समय भागवत ने प्रचारक के रूप में काम संभाला और महाराष्ट्र के ग्रामीण व पिछड़े इलाकों में लंबे समय तक सक्रिय रहकर गरीबों की समस्याओं को करीब से समझा। संघ में विभिन्न पदों पर रहते हुए उन्होंने संगठन और समाज, दोनों को नई दिशा दी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आगामी जापान यात्रा से और मजबूत होंगे भारत-जापान संबंध: मुख्यमंत्री साय

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 रायपुर : छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अपने जापान प्रवास के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी की आगामी यात्रा और ओसाका में आयोजित वर्ल्ड एक्सपो 2025 में छत्तीसगढ़ की सहभागिता पर कहा कि “हमारे देश के माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी बहुत जल्द जापान आ रहे हैं। भारत और जापान की मित्रता ऐतिहासिक और गहरी है। उनके इस दौरे से यह संबंध और भी मजबूत होंगे और हमारे देश को अनेक लाभ प्राप्त होंगे।


उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की यात्रा भारत और जापान के बीच तकनीकी, औद्योगिक और सांस्कृतिक सहयोग को और प्रगाढ़ बनाएगी। इससे दोनों देशों की जनता को लाभ होगा और साझा समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होगा।

ओसाका में वर्ल्ड एक्सपो 2025 के संदर्भ में मुख्यमंत्री साय ने कहा कि “कल हमने छत्तीसगढ़ को समर्पित सप्ताह का शुभारंभ किया है। यह वर्ल्ड एक्सपो भारत की संस्कृति को विश्व के सामने प्रस्तुत करने का एक बड़ा प्रयास है। छत्तीसगढ़ का सप्ताह न केवल प्रदेश, बल्कि पूरे देश के लिए लाभकारी रहेगा।”

उन्होंने कहा कि इस आयोजन से छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर और औद्योगिक प्रगति को वैश्विक स्तर पर पहचान मिलेगी। इससे निवेश और सहयोग के अवसर भी बढ़ेंगे।

मुख्यमंत्री साय ने विश्वास व्यक्त किया कि जापान यात्रा और ओसाका एक्सपो में छत्तीसगढ़ की सक्रिय भागीदारी प्रदेश और देश दोनों के लिए सकारात्मक परिणाम लेकर आएगी।

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के तहत अपने निवास पर फहराया तिरंगा

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 रायपुर। उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आह्वान पर देशभर में चल रहे ‘हर घर तिरंगा’ अभियान से जुड़ते हुए नवा रायपुर स्थित अपने शासकीय निवास पर तिरंगा फहराया।


इस अवसर पर उन्होंने कहा कि "तिरंगा केवल हमारे देश का ध्वज नहीं है, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों की एकता, अदम्य साहस और अमर बलिदान का प्रतीक है।"

उप मुख्यमंत्री साव ने सभी प्रदेशवासियों से आज़ादी के अमृत महोत्सव के इस गौरवपूर्ण उत्सव में शामिल होने की अपील की। उन्होंने आग्रह किया कि हर व्यक्ति अपने घर पर तिरंगा लगाकर ‘हर घर तिरंगा’ महाअभियान को जन-जन का उत्सव बनाए और तिरंगे के साथ अपना फोटो साझा कर राष्ट्रीय गौरव में सहभागी बने।

बिल्हा के विकास के लिए राशि की नहीं होगी कमी : अरुण साव

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 रायपुर : उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने बिल्हा नगर पंचायत को 20 हजार से कम आबादी वाले शहरों में देश का सबसे स्वच्छ शहर बनाने में अहम योगदान के लिए वहां की स्वच्छता दीदियों और सफाई कर्मियों को सम्मानित किया। उन्होंने बिल्हा के कन्या भवन में आयोजित सम्मान समारोह में 28 स्वच्छता दीदियों, 20 सफाई मित्रों और दस स्वच्छता कमांडोज को सम्मानित किया। उल्लेखनीय है कि भारत सरकार के स्वच्छ सर्वेक्षण 2024-25 में बिल्हा ने 20 हजार से कम जनसंख्या वाले शहरों में देश के सबसे साफ-सुथरे शहर का पुरस्कार हासिल किया है। बिल्हा के विधायक धरमलाल कौशिक और क्रेडा के अध्यक्ष भूपेन्द्र सवन्नी भी सम्मान समारोह में शामिल हुए।


उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री अरुण साव ने कार्यक्रम में स्वच्छता दीदियों से कहा कि आप लोगों के कारण छत्तीसगढ़ को देश में बड़ी प्रतिष्ठा मिली है। स्वच्छता में देश में प्रथम स्थान हासिल करना हम सबके लिए गौरव की बात है। अब हमें इसे बरकरार रखना होगा। बिल्हा के एक-एक व्यक्ति को स्वच्छता के लिए संकल्प लेना होगा। उन्होंने कार्यक्रम में मौजूद सभी लोगों को स्वच्छता की शपथ दिलाई।

उप मुख्यमंत्री साव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में स्वच्छता ने जन आंदोलन का रूप ले लिया है। स्वच्छता हमारे संस्कार और स्वभाव में है। हर व्यक्ति चाहता है कि हमारा घर साफ-सुथरा रहे। शहर भी हमारा घर है, इसे साफ रखना भी हमारी जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि केंद्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्रालय के स्वच्छ सर्वेक्षण 2024-25 में छत्तीसगढ़ को स्वच्छता में उत्कृष्ट कार्यों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। इसमें शामिल हमारे 169 शहरों में से 115 ने अपनी रैंकिंग सुधारी है। राज्य की इस उपलब्धि में स्वच्छता दीदियों और सफाई मित्रों का अमूल्य योगदान है जिसके लिए वे अभिनंदन के पात्र हैं।

साव ने कहा कि बिल्हा के लोगों को सफाई के लिए संकल्पित होना होगा। यह हमारे लिए चुनौती है कि हम स्वच्छता में अपना मुकाम बरकरार रखे। जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और बिल्हावासियों की सहभागिता से बिल्हा को स्वच्छ और सुंदर बनाने का काम आगे भी बनाए रखना संभव है। उन्होंने कहा कि बिल्हा के विकास के लिए राशि की कोई कमी नहीं होगी। कार्यों के प्रस्ताव मिलते ही अगले दिन राशि मंजूर कर दी जाएगी।

विधायक धरमलाल कौशिक ने अपने संबोधन में कहा कि इतिहास के पन्नों में बिल्हा का नाम दर्ज हुआ है। पूरे देश में बिल्हा को प्रथम स्थान मिला है। यह हमारे लिए गौरव का क्षण है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से स्वच्छता को अपनाने की लोगों से अपील की थी। उनके आह्वान पर आज देशभर में स्वच्छता एक आंदोलन बन चुका है। बच्चों में भी इसके प्रति जागरूकता देखी जा सकती है।

क्रेडा के अध्यक्ष भूपेन्द्र सवन्नी ने कहा कि स्वच्छता दीदियों और सफाई मित्रों के सक्रिय योगदान से ही हमें यह उपलब्धि हासिल हुई है। स्वच्छता सेवा और समर्पण का काम है, जिसे हमारी स्वच्छता दीदियां और सफाई मित्र मनोयोग से कर रहे हैं। बिल्हा नगर पंचायत की अध्यक्ष वंदना जेण्ड्रे ने कहा कि स्वच्छता दीदियों में काम करने का अद्भुत जज्बा है। उन्होंने अपने काम से पूरे भारत में बिल्हा का परचम लहराया है। नगर पंचायत के उपाध्यक्ष सतीश शर्मा, सीएमओ प्रवीण गहलोत और जनपद पंचायत के अध्यक्ष राम कुमार कौशिक सहित स्वच्छता दीदियां, सफाई मित्र, कमांडोज और बड़ी संख्या में नगरवासी भी कार्यक्रम में मौजूद थे।

बिल्हा की 28 स्वच्छता दीदियां घर-घर जाकर करती हैं कचरा संग्रहण

नगर पंचायत बिल्हा की आबादी लगभग 15 हजार है। वहां 28 स्वच्छता दीदियाँ काम कर रही हैं। वे शहर के 15 वार्डों में घर-घर जाकर ई-रिक्शा के माध्यम से कचरा संग्रहण करती हैं और फिर कचरे को एसआरएलएम सेंटर में ले जाकर गीला और सूखा कचरा पृथक करती हैं। गीले कचरे से खाद बनाई जाती है और सूखे कचरे को बेचकर ये महिलाएँ आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हो रही हैं। बिल्हा में दस विशेष स्वच्छता कमांडोज भी नियुक्त किए गए हैं जो ट्रैक्टर और ऑटो टिपर से पूरे शहर में घूमकर कचरा सफाई और जन-जागरूकता का कार्य कर रहे हैं। 

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने PM मोदी से की बोधघाट और इंद्रावती-महानदी परियोजनाओं पर चर्चा, बस्तर के विकास को मिलेगी नई दिशा

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 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से बहुउद्देशीय बोधघाट बांध परियोजना और इंद्रावती-महानदी इंटरलिंकिंग परियोजना के राष्ट्रीय परियोजना के रूप में निर्माण के संबंध में विस्तार से चर्चा की है ।


उन्होंने कहा कि बस्तर संभाग लंबे समय से नक्सल प्रभावित रहा है, इसी वजह से संभाग सिंचाई साधनों के विकास में पिछड़ गया है, संभाग में सिंचाई साधनों की समस्या को दूर करने और चहुमुखी विकास को बढ़ावा देने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार बहुउद्देशीय बोधघाट बांध परियोजना और इंद्रावती-महानदी लिंक परियोजना पर काम कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा है कि बस्तर क्षेत्र के चहुमुखी विकास के लिए बोधघाट बहुउद्देशीय बांध परियोजना निर्णायक परियोजना साबित होगी। यह परियोजना, लंबे समय से इन्द्रावती नदी पर प्रस्तावित है। इंद्रावती, गोदावरी नदी की बड़ी सहायक नदी है। गोदावरी जल विवाद अभिकरण के वर्ष 1980 के अवॉर्ड में भी अन्य योजनाओं के साथ इस परियोजना का उल्लेख है। इस अवॉर्ड में उल्लेखित अन्य परियोजनाओं का क्रियान्वयन दूसरे राज्यों द्वारा किया जा चुका है परंतु दूरस्थ अंचल में होने एवं नक्सल समस्या के कारण इस परियोजना को प्रारंभ नहीं किया जा सका।

बस्तर के विकास की रफ्तार होगी डबल
बहुउद्देशीय बोधघाट बांध परियोजना से संभाग में सिंचाई साधनों का दायरा बढ़ने के साथ ही बस्तर के विकास को डबल रफ्तार मिलेगी। इस परियोजना से 125 मेगावाट का विद्युत् उत्पादन, 4824 टन वार्षिक मत्स्य उत्पादन जैसे अतिरिक्त रोजगार, खरीफ एवं रबी मिलाकर 3,78,475 हेक्टेयर में सिंचाई विस्तार एवं 49 मि.घ.मी पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित हो सकेगा। वही इंद्रावती- महानदी इंटरलिंकिंग परियोजना से कांकेर जिले की भी 50,000 हेक्टेयर भूमि में सिंचाई सहित कुल 3,00,000 हेक्टेयर से अधिक भूमि में सिंचाई सुविधा उपलब्ध हो सकेगी। बस्तर को विकसित और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में दोनों परियोजना एक महत्वपूर्ण कदम होगा।

क्या है बहुउद्देशीय बोधघाट बांध परियोजना ?
बहुउद्देशीय बोधघाट बांध परियोजना, गोदावरी नदी की बड़ी सहायक इन्द्रावती नदी पर प्रस्तावित है। राज्य में इन्द्रावती नदी कुल 264 कि. मी. में प्रवाहित होती है। यह परियोजना दंतेवाड़ा जिले के विकासखंड एवं तहसील गीदम के ग्राम बारसूर से लगभग 8 कि.मी. एवं जगदलपुर शहर से लगभग 100 कि. मी. दूरी पर प्रस्तावित है।

परियोजना की विशेषताएं
दोनों परियोजनाओं की अनुमानित लागत 49000 करोड़ रूपए है। जिसमें इंद्रावती-महानदी लिंक परियोजना की लागत लगभग 20 हजार करोड़ रूपए एवं बहुउद्देशीय बोधघाट बांध परियोजना में लगभग 29 हजार करोड़ रुपए की लागत संभावित है। जिसमें हाइड्रोपावर इलेक्ट्रोमैकेनिकल कार्य, सिविल कार्य (सिंचाई) भी शामिल हैं। इस परियोजना में उपयोगी जल भराव क्षमता 2009 मि.घ.मी, कुल जल भराव क्षमता 2727 मि.घ.मी, पूर्ण जल भराव स्तर पर सतह का क्षेत्रफल 10440 हेक्टेयर सम्भावित है।

इन जिलों का होगा लाभ
बहुउद्देशीय बोधघाट बांध परियोजना से दंतेवाड़ा, बीजापुर, सुकमा जिले के 269 गांवों को बड़ा लाभ होगा। जबकि इंद्रावती-महानदी इंटरलिंकिंग परियोजना से कांकेर जिले के अनेकों गांवों में सिंचाई सुविधा का विस्तार हो सकेगा। बस्तर संभाग को विकसित, आत्मनिर्भर और सक्षम बनाने की दिशा में दोनों परियोजना एक महत्वपूर्ण कदम होगा।

प्रधानमंत्री मोदी का आतंकवाद पर प्रहार, बोले- हमने तय कर लिया है कांटे को निकालकर रहेंगे

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 प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गांधीनगर के महात्मा मंदिर में 5,536 करोड़ रुपये की विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इस दौरान मोदी ने कहा कि मैं दो दिन से गुजरात में हूं। कल वडोदरा, दाहोद, भुज, अहमदाबाद और आज गांधीनगर में हूं। मैं जहां-जहां गया वहां गर्जना करता सिंदूरिया सागर और लहराता तिरंगा जन-जन के हृदय में मातृभूमि के प्रति अपार प्रेम और देशभक्ति का ज्वार देखने को मिल रहा है। ये दृश्य सिर्फ गुजरात में नहीं है, हिंदुस्तान के कोने-कोने में है, हर हिंदुस्तानी के दिल में है।


आतंकवाद के खिलाफ बोलते हुए मोदी ने कहा कि शरीर कितना ही स्वस्थ क्यों न हो, लेकिन अगर एक कांटा चुभता है तो पूरा शरीर परेशान रहता है। इसलिए हमने तय कर लिया है, हम उस कांटे को निकालकर रहेंगे। उन्होंने कहा कि 1947 में जब मां भारती का बंटवारा हुआ, तो ‘कटनी चाहिए थी जंजीरें पर कट गई बुझाएं’। देश तीन टुकड़ों में बंट गया। उसी रात कश्मीर में पहला आतंकी हमला हुआ। मां भारती के एक हिस्से पर पाकिस्तान ने मुजाहिद्दीन के नाम पर आतंकियों का इस्तेमाल करके कब्जा कर लिया। अगर उस दिन ये मुजाहिद्दीन मारे जाते, और सरदार पटेल की इच्छा थी कि जब तक हमें PoK नहीं मिल जाता, तब तक हमारी सेना रुके नहीं। लेकिन किसी ने उनकी बात नहीं सुनी और अब हम पिछले 75 सालों से इसे (आतंकवाद को) झेल रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने साफ तौर पर कहा कि पहलगाम भी इसका एक उदाहरण था। जब पाकिस्तान के साथ हमारी जंग हुई, तो हमने पाकिस्तान को तीन बार हराया। उन्होंने कहा कि ये वीरों की धरती है। अब तक जिसे हम छद्म युद्ध कहते थे, 6 मई के बाद जो दृश्य देखने को मिले, उसके बाद हम अब इसे छद्म युद्ध कहने की गलती नहीं कर सकते। कारण कि जब मात्र 22 मिनट के भीतर नौ आतंकी ठिकानों की पहचान करके उन्हें नष्ट कर दिया गया, तो यह एक निर्णायक कार्रवाई थी। और इस बार सब कुछ कैमरे के सामने किया गया, ताकि घर बैठे कोई सबूत न मांग ले। 

प्रधानमंत्री मोदी ने मन की बात में छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा का किया जिक्र, बोले -बस्तर क्षेत्र के बच्चों में साइंस का पैशन, खेल में भी कर रहे हैं कमाल

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 रायपुर : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज अपने मन की बात की 122वीं कड़ी में देश के सामने अपनी बातों को रखा। मन की बात की ये कड़ी छत्तीसगढ़ के लिए काफी खास रही। प्रधानमंत्री ने छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में किए जा रहे कार्यों की तारीफ करते हुए कहा कि जिस दंतेवाड़ा में कभी माओवाद चरम पर था, वहां आज शिक्षा का परचम लहरा रहा है। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में छत्तीसगढ़ में हुए बस्तर ओलंपिक और माओवाद प्रभावित क्षेत्रों में साइंस लैब के बारे मे जिक्र किया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के माओवाद प्रभावित क्षेत्रों के बच्चों में साइंस का पैशन है और वो खेलों में भी कमाल कर रहे हैं।


प्रधानमंत्री ने बस्तर क्षेत्र का जिक्र करते हुए कहा है कि इस तरह के प्रयासों से पता चलता है कि इन इलाकों में रहने वाले लोग कितने साहसी होते हैं। इन लोगों ने तमाम चुनौतियों के बीच अपने जीवन को बेहतर बनाने की राह चुनी है। प्रधानमंत्री ने कहा कि मुझे यह जानकार भी बहुत खुशी हुई कि 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं में दंतेवाड़ा जिले के नतीजे बहुत शानदार रहे हैं। करीब पंचानबे ( नाइंटी पाइव) प्रतिशत रिजल्ट ये जिला 10वीं के नतीजों में टॉप पर रहा, वहीं 12वीं की परीक्षा में इस जिले ने छत्तीसगढ़ में छठा स्थान हासिल किया।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देशवासियों से बस्तर क्षेत्र का उदाहरण देते हुए कहा कि ऐसे बदलाव हम सभी को गर्व से भर देते हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के द्वारा मन की बात की 122वीं कड़ी में बस्तर क्षेत्र और दंतेवाड़ा का जिक्र करने पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि छत्तीसगढ़ की सरकार प्रधानमंत्री के विकसित भारत के नक्शे कदम पर चल रही है और विकसित छत्तीसगढ़ इस अभियान में अपना महत्वपूर्ण योगदान निभाएगा।

सहकारिता मंत्रालय देश के सहकारिता क्षेत्र से जुड़े लोगों के हितों की रक्षा करने के प्रति कटिबद्ध है

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नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व और केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के मागदर्शन में पिछले वर्ष जुलाई में गठित सहकारिता मंत्रालय देश के सहकारिता क्षेत्र से जुड़े लोगों के हितों की रक्षा करने के प्रति कटिबद्ध है। इसी कड़ी में सहकारिता मंत्रालय की याचिका पर माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने एक ऐतिहासिक फैसला देते हुए सहारा-सेबी रिफंड अकाउंट में से सहारा समूह की 4 सहकारी समितियों के लगभग 10 करोड़ निवेशकों की जमाराशि को लौटाने का आदेश दिया।


सहारा समूह की चार समितियाँ-सहारा क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड, सहारायन यूनिवर्सल मल्‍टीपर्पज़ सोसाइटी लिमिटेड, हमारा इंडिया क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड और स्टार्स मल्टीपर्पज़ कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड, मार्च, 2010 से जनवरी, 2014 के बीच बहुराज्यीय सहकारी समिति अधिनियम, 2002 के अंतर्गत पंजीकृत की गई थीं। इन सहकारी समितियों के जमाकर्ताओं को जमाराशि का भुगतान न होने के संबंध में देशभर से भारी संख्या में शिकायतें प्राप्त हो रही थीं। शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए समितियों को नोटिस जारी किए गए और केन्द्रीय पंजीयक के समक्ष सुनवाई की गई। सुनवाइयों के दौरान, केन्द्रीय पंजीयक ने समितियों को निवेशकों की देय राशि का भुगतान करने के निर्देश दिए व समितियों को नई जमाराशि लेने और मौजूदा जमाराशि का नवीनीकरण करने पर रोक लगा दी। सहकारिता मंत्रालय ने जमाकर्ताओं से प्राप्त लगभग 1.22 लाख दावों को डिजिटाइज्ड किया और इन समितियों को भुगतान के लिए भी भेजा, परंतु समितियों द्वारा अपेक्षित कार्यवाही नहीं की गई। उपरोक्त समितियों के जमाकर्ताओं से प्रतिदिन अपने निवेश के भुगतान के लिए भारी संख्या में आवेदन प्राप्त हो रहे हैं।

सहकारिता मंत्रालय ने इस विषय को प्राथमिकता पर लेते हुए, केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के निर्देशानुसार आर्थिक कार्य विभाग, राजस्व विभाग, सेबी, एसएफआईओ और ईडी आदि के साथ कई बैठकें कीं। मंत्रालय ने इस संबंध में माननीय सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष स्थिति रिपोर्ट और मामले के हल के लिए याचिका दायर की। माननीय उच्चतम न्यायालय में यह अनुरोध किया गया कि सहारा-सेबी रिफंड अकाउंट में से 5,000 करोड़ रूपए को सहारा समूह की चारों सहकारी समितियों के जमाकर्ताओं को भुगतान के लिए प्रयोग किया जा सकता है। केन्द्रीय सहकारिता मंत्रालय के ये प्रयास मोदी सरकार की गरीबों और वंचितों के हितों की रक्षा के प्रति कटिबद्धता को दर्शाते हैं।

सहकारिता मंत्रालय की याचिका पर माननीय उच्चतम न्यायालय ने आज ये आदेश दिया कि सहारा-सेबी रिफंड अकाउंट में बची धनराशि में से 5000 करोड़ रूपए सहारा समूह की सहकारी समितियों के निवेशकों के रिफंड के लिए केंद्रीय पंजीयक को हस्तांतरित किए जाएंगे। केंद्रीय पंजीयक, उच्चतम न्यायालय द्वारा नियुक्त किए गए पूर्व न्यायाधीश आर. सुभाष रेड्डी के पर्यवेक्षण व निगरानी में तथा गौरव अग्रवाल, अधिवक्ता की सहायता से भुगतान की प्रक्रिया को 9 महीनों में पूरा करेंगे। सहारा समितियों के वैध निवेशकों को यह भुगतान एक पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से उनकी उचित पहचान व जमाराशि का प्रमाण देने पर उनके बैंक खातों के माध्यम से किया जाएगा।

सहकारिता मंत्रालय शीघ्र ही माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा दिये गये आदेशानुसार पूर्व न्यायाधीश आर. सुभाष रेड्डी के पर्यवेक्षण में उचित पारदर्शी तंत्र के माध्यम से सहारा समूह की सहकारी समितियों के वैध निवेशकों के भुगतान की प्रक्रिया प्रारंभ करेगा जिससे करोड़ों निवेशकों व उनके परिवारों को राहत मिलेगी।

Ram Mandir Bhumipujan : राम हमारे मन में बसे हुए हैं : पीएम मोदी

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सियावर रामचंद्र की जय! जय सियाराम। जय सियाराम।

आज ये जयघोष सिर्फ सियाराम की नगरी में ही नहीं सुनाई दे रहा बल्कि इसकी गूंज पूरे विश्व भर में है। सभी देशवासियों को और विश्व भर में फैले करोड़ों भारत भक्तों को, राम भक्तों को, आज के इस पवित्र अवसर की कोटि-कोटि बधाई।

मंच पर विराजमान यूपी की गवर्नर श्रीमती आनंदीबेन पटेल जी, यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी, पूज्य नृत्य गोपालदास जी महाराज और हम सभी के श्रद्धेय श्री मोहन भागवत जी, ये मेरा सौभाग्य है कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मुझे आमंत्रित किया, इस ऐतिहासिक पल का साक्षी बनने का अवसर दिया। मैं इसके लिए हृदय पूर्वक श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का आभार व्यक्त करता हूं।

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राम काजु कीन्हे बिनु मोहि कहाँ बिश्राम॥

भारत, आज,भगवान भास्कर के सानिध्य में सरयू के किनारे एक स्वर्णिम अध्याय रच रहा है। कन्याकुमारी से क्षीरभवानी तक, कोटेश्वर से कामाख्या तक, जगन्नाथ से केदारनाथ तक, सोमनाथ से काशी विश्वनाथ तक, सम्मेद शिखर से श्रवणबेलगोला तक, बोधगया से सारनाथ तक, अमृतसर से पटना साहिब तक, अंडमान से अजमेर तक, लक्ष्यद्वीप से लेह तक, आज पूरा भारत,राममय है। पूरा देश रोमांचित है, हर मन दीपमय है। आज पूरा भारत भावुक भी है। सदियों का इंतजार आज समाप्त हो रहा है। करोड़ों लोगों को आज ये विश्वास ही नहीं हो रहा कि वो अपने जीते-जी इस पावन दिन को देख पा रहे हैं।

बरसों से टाट और टेंट के नीचे रह रहे हमारे रामलला के लिए अब एक भव्य मंदिर का निर्माण होगा। टूटना और फिर उठ खड़ा होना, सदियों से चल रहे इस व्यतिक्रम से रामजन्मभूमि आज मुक्त हो गई है। मेरे साथ फिर एक बार बोलिए, जय सियाराम, जय सियाराम!

हमारे स्वतंत्रता आंदोलन के समय कई-कई पीढ़ियों ने अपना सब कुछ समर्पित कर दिया था। गुलामी के कालखंड में कोई ऐसा समय नहीं था जब आजादी के लिए आंदोलन न चला हो, देश का कोई भूभाग ऐसा नहीं था जहां आजादी के लिए बलिदान न दिया गया हो। 15 अगस्त का दिन उस अथाह तप का, लाखों बलिदानों का प्रतीक है, स्वतंत्रता की उस उत्कंठ इच्छा, उस भावना का प्रतीक है। ठीक उसी तरह, राम मंदिर के लिए कई-कई सदियों तक, कई-कई पीढ़ियों ने अखंड अविरत एक-निष्ठ प्रयास किया है। आज का ये दिन उसी तप, त्याग और संकल्प का प्रतीक है।

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राम मंदिर के लिए चले आंदोलन में अर्पण भी था तर्पण भी था, संघर्ष भी था, संकल्प भी था। जिनके त्याग, बलिदान और संघर्ष से आज ये स्वप्न साकार हो रहा है, जिनकी तपस्या राममंदिर में नींव की तरह जुड़ी हुई है, मैं उन सब लोगों को आज नमन करता हूँ, उनका वंदन करता हूं। संपूर्ण सृष्टि की शक्तियां, राम जन्मभूमि के पवित्र आंदोलन से जुड़ा हर व्यक्तित्व, जो जहां है, इस आयोजन को देख रहा है, वो भाव-विभोर है, सभी को आशीर्वाद दे रहा है।

राम हमारे मन में गढ़े हुए हैं, हमारे भीतर घुल-मिल गए हैं। कोई काम करना हो, तो प्रेरणा के लिए हम भगवान राम की ओर ही देखते हैं। आप भगवान राम की अद्भुत शक्ति देखिए। इमारतें नष्ट कर दी गईं, अस्तित्व मिटाने का प्रयास भी बहुत हुआ, लेकिन राम आज भी हमारे मन में बसे हैं, हमारी संस्कृति का आधार हैं। श्रीराम भारत की मर्यादा हैं, श्रीराम मर्यादा पुरुषोत्तम हैं।

इसी आलोक में अयोध्या में राम जन्मभूमि पर, श्री राम के इस भव्य-दिव्य मंदिर के लिए भूमिपूजन हुआ है। यहां आने से पहले, मैंने हनुमानगढ़ी का दर्शन किया। राम के सब काम हनुमान ही तो करते हैं। राम के आदर्शों की कलियुग में रक्षा करने की जिम्मेदारी भी हनुमान जी की ही है। हनुमान जी के आशीर्वाद से श्री राममंदिर भूमिपूजन का ये आयोजन शुरू हुआ है।

श्रीराम का मंदिर हमारी संस्कृति का आधुनिक प्रतीक बनेगा, हमारी शाश्वत आस्था का प्रतीक बनेगा, हमारी राष्ट्रीय भावना का प्रतीक बनेगा, और ये मंदिर करोड़ों-करोड़ लोगों की सामूहिक संकल्प शक्ति का भी प्रतीक बनेगा। ये मंदिर आने वाली पीढ़ियों को आस्था, श्रद्धा, और संकल्प की प्रेरणा देता रहेगा। इस मंदिर के बनने के बाद अयोध्या की सिर्फ भव्यता ही नहीं बढ़ेगी, इस क्षेत्र का पूरा अर्थतंत्र भी बदल जाएगा। यहां हर क्षेत्र में नए अवसर बनेंगे, हर क्षेत्र में अवसर बढ़ेंगे। सोचिए, पूरी दुनिया से लोग यहां आएंगे, पूरी दुनिया प्रभु राम और माता जानकी का दर्शन करने आएगी। कितना कुछ बदल जाएगा यहां।

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राममंदिर के निर्माण की ये प्रक्रिया, राष्ट्र को जोडऩे का उपक्रम है। ये महोत्सव है- विश्वास को विद्यमान से जोड़ने का। नर को नारायण से, जोड़ने का। लोक को आस्था से जोड़ने का। वर्तमान को अतीत से जोड़ने का। और स्वं को संस्कार से जोडऩे का। आज के ये ऐतिहासिक पल युगों-युगों तक, दिग-दिगन्त तक भारत की कीर्ति पताका फहराते रहेंगे। आज का ये दिन करोड़ों रामभक्तों के संकल्प की सत्यता का प्रमाण है।

आज का ये दिन सत्य, अहिंसा, आस्था और बलिदान को न्यायप्रिय भारत की एक अनुपम भेंट है। कोरोना से बनी स्थितियों के कारण भूमिपूजन का ये कार्यक्रम अनेक मर्यादाओं के बीच हो रहा है। श्रीराम के काम में मर्यादा का जैसा उदाहरण प्रस्तुत किया जाना चाहिए, देश ने वैसा ही उदाहरण प्रस्तुत किया है। इसी मर्यादा का अनुभव हमने तब भी किया था जब माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाया था। हमने तब भी देखा था कि कैसे सभी देशवासियों ने शांति के साथ, सभी की भावनाओं का ध्यान रखते हुए व्यवहार किया था। आज भी हम हर तरफ वही मर्यादा देख रहे हैं।

इस मंदिर के साथ सिर्फ नया इतिहास ही नहीं रचा जा रहा, बल्कि इतिहास खुद को दोहरा भी रहा है। जिस तरह गिलहरी से लेकर वानर और केवट से लेकर वनवासी बंधुओं को भगवान राम की विजय का माध्यम बनने का सौभाग्य मिला, जिस तरह छोटे-छोटे ग्वालों ने भगवान श्रीकृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाने में बड़ी भूमिका निभाई, जिस तरहमावले, छत्रपति वीर शिवाजी कीस्वराज स्थापना के निमित्त बने, जिस तरह गरीब-पिछड़े, विदेशी आक्रांताओं के साथ लड़ाई में महाराजा सुहेलदेव के संबल बने, जिस तरह दलितों-पिछ़ड़ों-आदिवासियों, समाज के हर वर्ग ने आजादी की लड़ाई में गांधी जी को सहयोग दिया, उसी तरह आज देशभर के लोगों के सहयोग से राम मंदिर निर्माण का ये पुण्य-कार्य प्रारंभ हुआ है।

जैसे पत्थरों पर श्रीराम लिखकर रामसेतु बनाया गया, वैसे ही घर-घर से, गांव-गांव से श्रद्धापूर्वक पूजी शिलाएं, यहां ऊर्जा का स्रोत बन गई हैं। देश भर के धामों और मंदिरों से लाई गई मिट्टी और नदियों का जल, वहां के लोगों, वहां की संस्कृति और वहां की भावनाएं, आज यहां की शक्ति बन गई हैं। वाकई, ये न भूतो न भविष्यति है। भारत की आस्था, भारत के लोगों की सामूहिकता की ये अमोघ शक्ति, पूरी दुनिया के लिए अध्ययन का विषय है,शोध का विषय है।

श्रीरामचंद्र को तेज में सूर्य के समान, क्षमा में पृथ्वी के तुल्य, बुद्धि में बृहस्पति के सदृश्य और यश में इंद्र के समान माना गया है। श्रीराम का चरित्र सबसे अधिक जिस केंद्र बिंदु पर घूमता है, वो है सत्य पर अडिग रहना। इसीलिए ही श्रीराम संपूर्ण हैं। इसलिए ही वो हजारों वर्षों से भारत के लिए प्रकाश स्तंभ बने हुए हैं। श्रीराम ने सामाजिक समरसता को अपने शासन की आधारशिला बनाया था। उन्होंने गुरु वशिष्ठ से ज्ञान, केवट से प्रेम, शबरी से मातृत्व, हनुमानजी एवं वनवासी बंधुओं से सहयोग और प्रजा से विश्वास प्राप्त किया।

यहां तक कि एक गिलहरी की महत्ता को भी उन्होंने सहर्ष स्वीकार किया। उनका अद्भुत व्यक्तित्व, उनकी वीरता, उनकी उदारता उनकी सत्यनिष्ठा, उनकी निर्भीकता, उनका धैर्य, उनकी दृढ़ता, उनकी दार्शनिक दृष्टि युगों-युगों तक प्रेरित करते रहेंगे। राम प्रजा से एक समान प्रेम करते हैं लेकिन गरीबों और दीन-दुखियों पर उनकी विशेष कृपा रहती है। इसलिए तो माता सीता, राम जी के लिए कहती हैं-

दीन दयाल बिरिदु संभारी

यानि जो दीन है, जो दुखी हैं, उनकी बिगड़ी बनाने वाले श्रीराम हैं।

जीवन का ऐसा कोई पहलू नहीं है, जहां हमारे राम प्रेरणा न देते हों। भारत की ऐसी कोई भावना नहीं है जिसमें प्रभु राम झलकते न हों। भारत की आस्था में राम हैं, भारत के आदर्शों में राम हैं! भारत की दिव्यता में राम हैं, भारत के दर्शन में राम हैं! हजारों साल पहले वाल्मीकि की रामायण में जो राम प्राचीन भारत का पथ प्रदर्शन कर रहे थे, जो राम मध्ययुग में तुलसी, कबीर और नानक के जरिए भारत को बल दे रहे थे, वही राम आज़ादी की लड़ाई के समय बापू के भजनों में अहिंसा और सत्याग्रह की शक्ति बनकर मौजूद थे! तुलसी के राम सगुण राम हैं, तो नानक और कबीर के राम निर्गुण राम हैं!

भगवान बुद्ध भी राम से जुड़े हैं तोसदियों से ये अयोध्या नगरी जैन धर्म की आस्था का केंद्र भी रही है। राम की यही सर्वव्यापकता भारत की विविधता में एकता का जीवन चरित्र है! तमिल में कंब रामायण तो तेलगू में रघुनाथ और रंगनाथ रामायण हैं। उड़िया में रूइपाद-कातेड़पदी रामायण तो कन्नड़ा में कुमुदेन्दु रामायण है। आप कश्मीर जाएंगे तो आपको रामावतार चरित मिलेगा, मलयालम में रामचरितम् मिलेगी। बांग्ला में कृत्तिवास रामायण है तो गुरु गोबिन्द सिंह ने तो खुद गोबिन्द रामायण लिखी है। अलग अलग रामायणों में, अलग अलग जगहों पर राम भिन्न-भिन्न रूपों में मिलेंगे, लेकिन राम सब जगह हैं, राम सबके हैं। इसीलिए, राम भारत की ‘अनेकता में एकता’ के सूत्र हैं।

दुनिया में कितने ही देश राम के नाम का वंदन करते हैं, वहां के नागरिक, खुद को श्रीराम से जुड़ा हुआ मानते हैं। विश्व की सर्वाधिक मुस्लिम जनसंख्या जिस देश में है, वो है इंडोनेशिया। वहां हमारे देश की ही तरह ‘काकाविन’रामायण, स्वर्णद्वीप रामायण, योगेश्वर रामायण जैसी कई अनूठी रामायणें हैं। राम आज भी वहांपूजनीय हैं। कंबोडिया में ‘रमकेर’रामायण है, लाओ में ‘फ्रा लाक फ्रा लाम’ रामायण है, मलेशिया में ‘हिकायत सेरी राम’तो थाईलैंड में ‘रामाकेन’है! आपको ईरान और चीन में भी राम के प्रसंग तथा राम कथाओं का विवरण मिलेगा।

श्रीलंका में रामायण की कथा जानकी हरण के नाम सुनाई जाती है, और नेपाल का तो राम से आत्मीय संबंध, माता जानकी से जुड़ा है। ऐसे ही दुनिया के और न जाने कितने देश हैं, कितने छोर हैं, जहां की आस्था में या अतीत में, राम किसी न किसी रूप में रचे बसे हैं! आज भी भारत के बाहर दर्जनों ऐसे देश हैं जहां, वहां की भाषा में रामकथा, आज भी प्रचलित है। मुझे विश्वास है कि आज इन देशों में भी करोड़ों लोगों को राम मंदिर के निर्माण का काम शुरू होने से बहुत सुखद अनुभूति हो रही होगी। आखिर राम सबके हैं, सब में हैं।

मुझे विश्वास है कि श्रीराम के नाम की तरह ही अयोध्या में बनने वाला ये भव्य राममंदिर भारतीय संस्कृति की समृद्ध विरासत का द्योतक होगा। मुझे विश्वास है कि यहां निर्मित होने वाला राममंदिर अनंतकाल तक पूरी मानवता को प्रेरणा देगा। इसलिए हमें ये भी सुनिश्चित करना है कि भगवान श्रीराम का संदेश, राममंदिर का संदेश, हमारी हजारों सालों की परंपरा का संदेश, कैसे पूरे विश्व तक निरंतर पहुंचे। कैसे हमारे ज्ञान, हमारी जीवन-दृष्टि से विश्व परिचित हो, ये हमारी, हमारी वर्तमान और भावी पीढ़ियों की ज़िम्मेदारी है। इसी को समझते हुए, आज देश में भगवान राम के चरण जहां जहां पड़े, वहाँ राम सर्किट का निर्माण किया जा रहा है!

अयोध्या तो भगवान राम की अपनी नगरी है! अयोध्या की महिमातो खुद प्रभु श्रीराम ने कही है-

जन्मभूमि मम पुरी सुहावनि

यहां राम कह रहे हैं- मेरी जन्मभूमि अयोध्या अलौकिक शोभा की नगरी है। मुझे खुशी कि आजप्रभु राम की जन्मभूमि की भव्यता, दिव्यता बढ़ाने के लिए कई ऐतिहासिक काम हो रहे हैं!

हमारे यहां शास्त्रों में कहा गया है-न्राम सदृशो राजा, प्रथिव्याम् नीतिवान् अभूत॥ यानि कि, पूरी पृथ्वी पर श्रीराम के जैसा नीतिवान शासक कभी हुआ ही नहीं! श्रीराम की शिक्षा है-नहिं दरिद्र कोउ दुखी न दीना॥ कोई भी दुखी न हो, गरीब न हो। श्रीराम का सामाजिक संदेश है- प्रहृष्ट नर नारीकः,समाज उत्सव शोभितः॥ नर-नारी सभी समान रूप से सुखी हों। श्रीराम का निर्देश है- कच्चित् ते दयितः सर्वे, कृषि गोरक्ष जीविनः। किसान, पशुपालक सभी हमेशा खुश रहें। श्रीराम का आदेश है-कश्चिद्वृद्धान्चबालान्च, वैद्यान् मुख्यान् राघव। त्रिभि: एतै: वुभूषसे॥ बुजुर्गों की,बच्चों की, चिकित्सकों की सदैव रक्षा होनी चाहिए। श्रीराम का आह्वान है- जौंसभीतआवासरनाई।रखिहंउताहिप्रानकीनाई॥ जो शरण में आए,उसकी रक्षा करना सभी का कर्तव्य है। श्रीराम का सूत्र है- जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी॥ अपनी मातृभूमि स्वर्ग से भी बढ़कर होती है। और भाइयों और बहनों, ये भी श्रीराम की ही नीति है- भयबिनुहोइन प्रीति॥ इसलिए हमारा देश जितना ताकतवर होगा, उतनी ही प्रीति और शांति भी बनी रहेगी।

राम की यही नीति और रीति सदियों से भारत का मार्गदर्शन करती रही है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने, इन्हीं सूत्रों, इन्हीं मंत्रों के आलोक में, रामराज्य का सपना देखा था। राम का जीवन, उनका चरित्र ही गांधीजी के रामराज्य का रास्ता है।

स्वयं प्रभु श्रीराम ने कहा है-

देशकाल अवसर अनुहारी। बोले बचन बिनीत बिचारी॥

अर्थात, राम समय, स्थान और परिस्थितियों के हिसाब से बोलते हैं, सोचते हैं, करते हैं।

राम हमें समय के साथ बढ़ना सिखाते हैं, चलना सिखाते हैं। राम परिवर्तन के पक्षधर हैं, राम आधुनिकता के पक्षधर हैं। उनकी इन्हीं प्रेरणाओं के साथ, श्रीराम के आदर्शों के साथ भारत आज आगे बढ़ रहा है!

प्रभु श्रीराम ने हमें कर्तव्यपालन की सीख दी है, अपने कर्तव्यों को कैसे निभाएं इसकी सीख दी है! उन्होंने हमें विरोध से निकलकर, बोध और शोध का मार्ग दिखाया है! हमें आपसी प्रेम और भाईचारे के जोड़ से राममंदिर की इन शिलाओं को जोड़ना है। हमें ध्यान रखना है,जब जबमानवता ने राम को माना है विकास हुआ है, जब जब हम भटके हैं विनाश के रास्ते खुले हैं! हमें सभी की भावनाओं का ध्यान रखना है। हमें सबके साथ से, सबके विश्वास से, सबका विकास करना है। अपने परिश्रम, अपनी संकल्पशक्ति से एक आत्मविश्वासी और आत्मनिर्भर भारत का निर्माण करना है।

तमिल रामायण में श्रीराम कहते हैं-

कालम् ताय, ईण्ड इनुम इरुत्ति पोलाम्

भाव ये कि, अब देरी नहीं करनी है, अब हमें आगे बढ़ना है!

आज भारत के लिए भी, हम सबके लिए भी, भगवान राम का यही संदेश है! मुझे विश्वास है, हम सब आगे बढ़ेंगे, देश आगे बढ़ेगा! भगवान राम का ये मंदिर युगों-युगों तक मानवता को प्रेरणा देता रहेगा, मार्गदर्शन करता रहेगा! वैसे कोरोना की वजह से जिस तरह के हालात हैं,प्रभु राम का मर्यादा का मार्ग आज और अधिक आवश्यक है।

वर्तमान की मर्यादा है, दो गज की दूरी- मास्क है जरूरी। मर्यादाओं का पालन करते हुए सभी देशवासियों को प्रभु राम स्वस्थ रखें, सुखी रखें, यही प्रार्थना है। सभी देशवासियों पर माता सीता और श्रीराम का आशीर्वाद बना रहे।

इन्हीं शुभकामनाओं के साथ, सभी देशवासियों को एक बार फिर बधाई!

बोलो सियापति रामचंद्र की...जय !!!
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