Media24Media.com: विश्वकर्मा जयंती: सृजन और कौशल के देवता की आराधना

Responsive Ad Slot

Latest

latest


 

विश्वकर्मा जयंती: सृजन और कौशल के देवता की आराधना

Document Thumbnail

विश्वकर्मा जयंती: शिल्प और तकनीक के देवता की आराधना, पूरे देश में मनाया गया औजारों का त्योहार

इतिहास और मान्यता

विश्वकर्मा जयंती को भगवान विश्वकर्मा के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है।
हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार भगवान विश्वकर्मा को ब्रह्मांड के प्रथम वास्तुकार और शिल्पकार माना जाता है। उन्हीं के हाथों से स्वर्गलोक, द्वारका, हस्तिनापुर, लंका, पुष्पक विमान और विभिन्न दिव्य अस्त्र-शस्त्रों का निर्माण हुआ था।

भगवान विश्वकर्मा को शिल्पकला, स्थापत्य कला, इंजीनियरिंग और तकनीक के देवता कहा जाता है। वे सृजनात्मक शक्ति और परिश्रम का प्रतीक हैं।

क्यों मनाई जाती है?

विश्वकर्मा जयंती को श्रमिक, कारीगर, इंजीनियर, तकनीशियन और औद्योगिक क्षेत्रों से जुड़े लोग विशेष रूप से मनाते हैं।
इस दिन लोग अपने औजारों, मशीनों और कार्यस्थलों की पूजा करते हैं ताकि कार्य में सफलता, समृद्धि और सुरक्षा बनी रहे।

  • कारीगर और मजदूर अपने उपकरण साफ़ कर उन्हें सजाते हैं।

  • फैक्ट्रियों और वर्कशॉप्स में मशीनों की पूजा की जाती है।

  • इसे "औजारों का त्यौहार" भी कहा जाता है।

 कब से और कब मनाई जाती है?

  • तिथि: विश्वकर्मा जयंती हर साल कन्या संक्रांति के दिन मनाई जाती है, जो प्रायः 17 सितंबर को पड़ती है।

  • परंपरा: इसकी परंपरा वेदों और पुराणों के समय से चली आ रही है। ऋग्वेद और अथर्ववेद में विश्वकर्मा देव का उल्लेख मिलता है।

  • खासकर औद्योगिक क्रांति के बाद, इसे मजदूरों और कामगारों ने बड़े उत्सव के रूप में मनाना शुरू किया।

आज का महत्व

आज विश्वकर्मा जयंती केवल धार्मिक पर्व ही नहीं, बल्कि कड़ी मेहनत और तकनीकी विकास का उत्सव है।
यह दिन हमें याद दिलाता है कि श्रम और कौशल से ही सभ्यता और प्रगति का निर्माण होता है।


Don't Miss
© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.