Media24Media.com: विक्रम टीसीआर: कम पानी और कम समय में अधिक उपज देने वाली नई धान की किस्म

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विक्रम टीसीआर: कम पानी और कम समय में अधिक उपज देने वाली नई धान की किस्म

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रायपुर- धान की फसल के लिए अधिक पानी की आवश्यकता होती है। फसल तैयार होने के बाद आंधी-तूफान या बारिश आने पर लंबी बालियों के कारण नुकसान का खतरा भी रहता है। कृषि विभाग ने धान की खेती में इन समस्याओं से निपटने के लिए ‘विक्रम टीसीआर’ नाम की नई किस्म तैयार की है।

इस नई किस्म की प्रति हेक्टेयर उत्पादन क्षमता 60–70 क्विंटल है। फसल केवल 125–130 दिनों में तैयार हो जाती है, जिससे पानी की खपत कम होती है।

बेमेतरा में कृषि विभाग के उप संचालक मोरध्वज डड़सेना ने बताया कि ‘विक्रम टीसीआर’ की लंबाई कम और उपज अधिक है। कम लंबाई के कारण यह तेज हवा और आंधी-तूफान में भी गिरती नहीं है। यह अन्य बीजों की तुलना में अधिक हवादार परिस्थितियों को सहन कर सकती है। जिले में 67 हेक्टेयर में इस किस्म का बीज किसानों द्वारा तैयार किया जा रहा है। आदिवासी ग्राम झालम में भी पहली बार बीजोत्पादन कार्यक्रम लिया गया है।

उत्पादित बीज किसानों द्वारा उच्च कीमत पर बीज निगम में बेचा जाएगा और अगले वर्ष जिले के अन्य किसानों के लिए उपलब्ध कराया जाएगा।

पिछले वर्ष 16 हेक्टेयर में सुगंधित धान की किस्म ‘सीजी देवभोग’ का बीज तैयार किया गया था। इस वर्ष ‘सीजी देवभोग’ के साथ ‘विक्रम टीसीआर’ का बीज अधिक मात्रा में उत्पादित होगा। इससे बेमेतरा जिला नवीन किस्मों के बीज उत्पादन में आत्मनिर्भर होगा और किसानों को अधिक सुरक्षित, लाभकारी और कम पानी की खपत वाली फसल के विकल्प मिलेंगे।

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि ‘विक्रम टीसीआर’ न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करेगा, बल्कि जल संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान देगा। कृषि विभाग के इस कदम को बेमेतरा में आधुनिक और सतत कृषि की दिशा में बड़ी पहल माना जा रहा है।

उल्लेखनीय है कि बेमेतरा जिले के सभी विकासखंडों को केंद्रीय जलशक्ति मंत्रालय द्वारा जल संकट के दृष्टिकोण से रेड जोन घोषित किया गया है। साजा विकासखंड सेमी-क्रिटिकल जोन में तथा बेमेतरा, बेरला और नवागढ़ विकासखंड क्रिटिकल जोन में शामिल हैं। जिले की स्थिति को देखते हुए किसानों के लिए केवल खेती ही नहीं, बल्कि जल संरक्षण भी अत्यंत आवश्यक हो गया है। नई धान किस्में जल संरक्षण और फसल सुरक्षा में उपयोगी साबित होंगी।


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