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किसान सशक्तिकरण हेतु कौशल विकास: आत्मनिर्भर और सशक्त कृषि की ओर एक कदम

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परिचय

भारत की कृषि रणनीति में आज किसान सशक्तिकरण एक महत्वपूर्ण आधारशिला बनकर उभरा है। देश की लगभग दो-तिहाई आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है और लगभग आधी आबादी अपनी आजीविका के लिए कृषि पर निर्भर है। ऐसे में किसानों की क्षमता और कौशल को मजबूत बनाना समावेशी एवं सतत विकास के लिए अत्यावश्यक है। किसानों के सामने चुनौतियाँ केवल ऋण या संसाधन उपलब्धता तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनमें जलवायु परिवर्तन के अनुसार ढलना, मिट्टी की सेहत प्रबंधन, यंत्रीकरण अपनाना और बेहतर बाजार अवसर प्राप्त करना भी शामिल हैं।

इसे ध्यान में रखते हुए, भारत सरकार ने ग्रामीण विकास एजेंडे के केंद्र में कौशल विकास और प्रशिक्षण को रखा है। पिछले दशक में अनेक कार्यक्रम शुरू किए गए हैं, जिनका उद्देश्य किसानों को व्यावहारिक ज्ञान, व्यावसायिक कौशल और आधुनिक तकनीकों से अवगत कराना है। ये पहलें किसानों को केवल उत्पादक ही नहीं, बल्कि नवोन्मेषक, निर्णयकर्ता और कृषि मूल्य श्रृंखला के सक्रिय भागीदार बनाने की दिशा में अग्रसर हैं।

कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन अभिकरण (एटीएमए), ग्रामीण युवाओं का कौशल प्रशिक्षण (एसटीआरवाई), कृषि यंत्रीकरण उपमिशन (एसएमएएम), और प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई) जैसी संस्थागत व्यवस्थाएँ मज़बूत प्रशिक्षण मंच उपलब्ध करा रही हैं। वहीं, बागवानी, पशुपालन, मिट्टी प्रबंधन और खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों में विशेष हस्तक्षेप भी कौशल विकास को अपने ढांचे में समाहित कर रहे हैं। इन सभी प्रयासों का स्पष्ट संदेश है – किसानों का सशक्तिकरण कौशल संवर्द्धन के माध्यम से ही संभव है, जिससे उत्पादकता बढ़ेगी, आय में वृद्धि होगी और कृषि क्षेत्र अधिक सशक्त और टिकाऊ बनेगा।

किसान प्रशिक्षण हेतु संस्थागत ढांचा

किसानों तक सीधे कौशल संवर्द्धन पहुँचाने के लिए एक मज़बूत संस्थागत ढांचा विकसित किया गया है, जिसमें कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) द्वारा स्थापित, केवीके जिले स्तर पर अग्रिम पंक्ति के विस्तार केंद्र के रूप में कार्य करते हैं। ये स्थानीय कृषि-जलवायु परिस्थितियों के अनुरूप प्रायोगिक प्रशिक्षण, प्रदर्शन और व्यावसायिक पाठ्यक्रम उपलब्ध कराते हैं।

2021 से 2024 के बीच, केवीके ने 58.02 लाख किसानों को प्रशिक्षित किया। वर्ष 2021–22 में 16.91 लाख, 2022–23 में 19.53 लाख, 2023–24 में 21.56 लाख किसानों को प्रशिक्षित किया गया, जबकि 2024–25 में फरवरी 2025 तक 18.56 लाख अतिरिक्त किसानों को प्रशिक्षण दिया गया।

इसी प्रकार, कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन अभिकरण (एटीएमए) राज्यों की विस्तार प्रणाली को पुनर्जीवित करने में सहायक रहा है। यह योजना कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के तहत "कृषि विस्तार उपमिशन" के अंतर्गत लागू है। इसके अंतर्गत किसानों, महिला किसानों और युवाओं को नवीनतम कृषि तकनीकों और उत्तम कृषि पद्धतियों से जोड़ने हेतु प्रशिक्षण, प्रदर्शन, exposure visits और किसान मेलों जैसी गतिविधियाँ आयोजित की जाती हैं।

2021–22 में 32.38 लाख किसान, 2022–23 में 40.11 लाख किसान और 2023–24 में 36.60 लाख किसान एटीएमए के तहत प्रशिक्षित हुए। 2024–25 में जनवरी 2025 तक 18.30 लाख किसानों को प्रशिक्षित किया गया। कुल मिलाकर 2021 से 2025 तक इस योजना के माध्यम से लगभग 1.27 करोड़ किसानों तक पहुँचा गया।

ग्रामीण युवाओं का कौशल विकास और यंत्रीकरण

ग्रामीण युवाओं को कृषि में नए अवसरों के लिए तैयार करने हेतु ग्रामीण युवाओं का कौशल प्रशिक्षण (एसटीआरवाई) कार्यक्रम लागू किया गया है। यह लगभग 7 दिनों का अल्पावधि प्रशिक्षण है, जो 18 वर्ष से ऊपर के ग्रामीण युवाओं एवं महिला किसानों को horticulture, dairy, fisheries और animal husbandry जैसे क्षेत्रों में व्यावसायिक कौशल प्रदान करता है।

2021–22 में 10,456 युवा, 2022–23 में 11,634 युवा, 2023–24 में 20,940 युवा प्रशिक्षित हुए। इस प्रकार 2021 से 2024 तक कुल 43,000 से अधिक युवाओं को प्रशिक्षित किया गया। 2024–25 में दिसंबर 2024 तक 8,761 अतिरिक्त युवाओं को प्रशिक्षित किया गया।

इसी तरह, कृषि यंत्रीकरण उपमिशन (एसएमएएम) छोटे एवं सीमांत किसानों तक मशीनरी की पहुँच बढ़ाने के लिए कार्यरत है। 2021 से 2025 के बीच 57,139 किसानों को इस मिशन के अंतर्गत प्रशिक्षित किया गया।

मिट्टी, संसाधन और मूल्य श्रृंखला पर ज्ञान सुदृढ़ करना

मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना किसानों को उर्वरक उपयोग और फसल नियोजन के लिए वैज्ञानिक मार्गदर्शन प्रदान करती है। 24 जुलाई 2025 तक 25.17 करोड़ से अधिक मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरित किए गए हैं। इसके साथ ही 93,000 किसान प्रशिक्षण, 6.8 लाख प्रदर्शन और हजारों जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं।

किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) भी किसानों को डिजिटल मॉड्यूल, एग्री-बिजनेस प्रबंधन और ई-नाम जैसे प्लेटफॉर्म्स से जोड़ रहे हैं। अब तक 10,000 एफपीओ पंजीकृत हो चुके हैं।

प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई 4.0) (2022–26) में कृषि को प्राथमिकता क्षेत्र के रूप में शामिल किया गया है। 2015 से 30 जून 2025 तक, 1.64 करोड़ से अधिक प्रशिक्षित और 1.29 करोड़ से अधिक प्रमाणित लाभार्थी बनाए गए हैं।

इसी तरह, बागवानी समेकित विकास मिशन (एमआईडीएच) के तहत 2014–15 से 2023–24 तक 9.73 लाख किसानों को प्रशिक्षित किया गया।

राष्ट्रीय गोकुल मिशन (आरजीएम) के अंतर्गत अब तक 38,736 मैत्री (MAITRI) तकनीशियनों को प्रशिक्षित और सुसज्जित किया गया है।

प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना (पीएमकेएसवाई) के तहत 30 जून 2025 तक 1601 परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई, जिनमें से 1133 परियोजनाएँ पूर्ण हो चुकी हैं और 34 लाख से अधिक किसानों को लाभ मिला है।

निष्कर्ष

आज कौशल विकास भारत की कृषि व्यवस्था में गहराई से समाहित हो चुका है। केवीके, एटीएमए, एसटीआरवाई, एसएमएएम, पीएमकेवीवाई, आरजीएम और पीएमकेएसवाई जैसी योजनाओं के माध्यम से किसानों और ग्रामीण युवाओं को व्यावहारिक ज्ञान, आत्मविश्वास और उद्यमिता कौशल मिल रहे हैं।

सरकार का यह ध्यान केवल किसानों को बेहतर तकनीक अपनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें उद्यमी, एग्री-बिजनेस लीडर और ग्रामीण विकास के प्रमुख वाहक बनाने की दिशा में भी है। ये सामूहिक प्रयास एक कुशल, आत्मनिर्भर और सशक्त किसान समुदाय की नींव रख रहे हैं, जो "विकसित भारत" की दृष्टि से पूरी तरह सामंजस्य रखते हैं।

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