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सफलता की कहानी-मिलेट से बढ़ी आय, किसानों के जीवन में आई खुशहाली

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श्री अन्न की खेती बन रही लाभ का नया माध्यम

रायपुर- छत्तीसगढ़ और पूरे भारत में मिलेट्स (मोटा अनाज) की खेती किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है। कम लागत, कम पानी और बंजर भूमि में भी बेहतरीन पैदावार देने के कारण मिलेट्स किसानों की आय बढ़ा रहे हैं और उनके जीवन में खुशहाली ला रहे हैं । कभी पारंपरिक भोजन का हिस्सा रहे रागी (मड़िया), कोदो और कुटकी जैसे मोटे अनाज आज पूरी दुनिया में ‘सुपर फूड’ के रूप में पहचान बना चुके हैं। पौष्टिक गुणों से भरपूर ये अनाज अब घरों के साथ-साथ होटलों और रेस्टोरेंटों में भी पसंद किए जा रहे हैं। बढ़ती मांग और बेहतर बाजार मूल्य ने किसानों के लिए मिलेट (श्री अन्न) की खेती को लाभकारी बना दिया है।

शासन की पहल से बढ़ा श्री अन्न का महत्व

केंद्र और राज्य सरकार द्वारा मिलेट फसलों को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न योजनाओं के माध्यम से सहायता प्रदान की जा रही है। समर्थन मूल्य में वृद्धि और बाजार उपलब्धता के कारण अब अधिक किसान श्री अन्न की खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं।

कृषि उन्नति योजना से मिली नई दिशा

जिले के ग्राम पोटाली और नहाड़ी के दो युवा किसानों ने कृषक उन्नति योजना का लाभ लेकर मिलेट उत्पादन में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। उनकी मेहनत और योजना से मिली सहायता ने उनकी आय में बड़ा बदलाव लाया है।

दिलीप मरकाम ने कोदो-कुटकी से कमाए डेढ़ लाख रुपये

ग्राम पोटाली के धुरवा पारा निवासी किसान दिलीप मरकाम ने इस वर्ष अपने खेत में कोदो-कुटकी की खेती कर लगभग 1 लाख 50 हजार रुपये का लाभ अर्जित किया। वे अपने 17 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र में कोदो-कुटकी के साथ धान और सब्जियों का उत्पादन भी करते हैं। दिलीप ने बताया कि उन्होंने इस वर्ष 88 क्विंटल धान बेचकर लगभग 2 लाख 72 हजार रुपये की आय प्राप्त की। खेती को आधुनिक बनाने के लिए उनके पास पावर टिलर जैसे कृषि यंत्र भी उपलब्ध हैं। वे अपनी आय का एक हिस्सा खेती के विकास और नई तकनीकों को अपनाने में निवेश करना चाहते हैं।

हलदर हेमला की मेहनत भी लाई रंग

ग्राम नहाड़ी के किसान हलदर हेमला ने भी कोदो-कुटकी की खेती से उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की। उन्होंने इस फसल से लगभग 1 लाख 20 हजार रुपये का लाभ कमाया। उनका कहना है कि मिलेट की खेती कम लागत में बेहतर आय देने वाली फसल साबित हो रही है।

किसानों के लिए लाभकारी साबित हो रही योजना

दिलीप मरकाम और हलदर हेमला का मानना है कि कृषक उन्नति योजना मोटे अनाज उत्पादक किसानों के लिए बेहद लाभकारी है। योजना के माध्यम से किसानों को प्रोत्साहन मिलने से श्री अन्न की खेती का रकबा बढ़ रहा है और ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है।

स्वास्थ्य और समृद्धि का संगम है श्री अन्न

कोदो, कुटकी और रागी जैसे मोटे अनाज कैल्शियम, आयरन और फाइबर से भरपूर होते हैं। ये ग्लूटेन मुक्त होने के कारण आसानी से पच जाते हैं तथा स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी हैं। यही कारण है कि इनकी मांग लगातार बढ़ रही है और किसानों को बेहतर मूल्य प्राप्त हो रहा है।

सफलता की सीख

पारंपरिक फसलों को आधुनिक बाजार से जोड़कर किसान अपनी आय बढ़ा सकते हैं। दिलीप मरकाम और हलदर हेमला की सफलता यह साबित करती है कि शासन की योजनाओं और मेहनत के साथ श्री अन्न की खेती ग्रामीण समृद्धि का मजबूत आधार बन सकती है।

पारसनाथ बने किसान-मजदूर महासंघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष,किसानो में हर्ष की लहर

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आरंग- राष्ट्रीय किसान नेता और समाजसेवी पारसनाथ साहू को किसान मजदूर महासंघ मध्यप्रदेश की संस्था द्वारा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मनोनीत किया गया है। उन्होंने बताया यह  संस्था किसान मजदूर महासंघ मध्यप्रदेश द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर संचालित  है।जिसके राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवकुमार  कक्का ने उनकी सक्रियता और कार्य प्रणाली को देखते हुए नियुक्ति पत्र भेजकर राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मनोनीत किये है। ज्ञात हो कि पारसनाथ साहू काफी लंबे समय से मजदूरों और किसानों की समस्याओं, अनाज का उचित लाभकारी समर्थन मूल्य पर खरीदी की कानूनी गारंटी दिलाने, प्रदेश मे धान खरीदी में होने वाली अव्यवस्थाओं और समस्याओं सहित सिंचाई,बिजली,पानी, खाद बीज इत्यादि की उपलब्धता सुनिश्चित कराने लगातार प्रयासरत हैं।

वहीं पारसनाथ को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाये जाने पर क्षेत्र व प्रदेश के किसानों में हर्ष की लहर है। उन्होंने कहा है अब किसानों और मजदूरों की मांग व समस्यायों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रमुखता से रखते हुए उसके समाधान का प्रयास किया जाएगा। वहीं उनके राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनने पर अंचल के किसान नेता गोविन्द चन्द्राकर, श्रवण चन्द्राकर, झनकराम आवडे, घनाराम साहू, तेजराम विद्रोही, लक्ष्मी पटेल, दीपक चौहान,लल्लू सिंह,जुगनू चन्द्राकर, दूजेराम धीवर, योगेश, ईश्वरी साहू सहित सामाजिक संगठन पीपला वेलफेयर फाउंडेशन ने हर्ष व्यक्त करते हुए बधाई दिए हैं।

उद्यानिकी खेती से बदली किसान की आर्थिक तस्वीर

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धान की तुलना में स्ट्रॉबेरी की खेती में डबल मुनाफा

तकनीकी मार्गदर्शन, शासन की सब्सिडी से घटा खर्च, बढ़ी आमदनी

रायपुर- जिले में शासन की उद्यानिकी प्रोत्साहन योजनाओं से किसान अब परंपरागत खेती की सीमाओं को तोड़कर नई संभावनाओं की ओर आगे बढ़ रहे हैं। अब किसान केवल धान पर निर्भर न रहकर अधिक लाभ देने वाली  फसलों को अपना रहे हैं। किसान लाल बहादुर सिंह बताया कि ढाई एकड़ में स्ट्रॉबेरी की खेती करने में लगभग 2 लाख रुपये की लागत आई है। इससे उन्हें करीब 9 लाख रुपये की आमदनी होने का अनुमान है।

सरगुजा जिले के भगवानपुरखुर्द निवासी किसान लाल बहादुर सिंह ने भी इसी सोच के साथ खेती में नवाचार अपनाया और आज वे एक सशक्त, आत्मनिर्भर एवं उन्नत किसान के रूप में अपनी पहचान बना चुके हैं।

धान से उद्यानिकी की ओर किया सफल बदलाव

कृषक लाल बहादुर सिंह ने बताया कि वर्षों से धान की खेती करने के बाद भी अपेक्षाकृत सीमित लाभ ही मिल पाता था। लागत बढ़ने और मौसम पर निर्भरता के कारण मुनाफा कम हो जाता था। इसी बीच उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों ने उन्हें स्ट्रॉबेरी जैसी उच्च मूल्य वाली फसल की जानकारी दी और इसके फायदे समझाए। इससे उन्हें अपनी खेती में बदलाव करने की प्रेरणा मिली।

छोटे क्षेत्र से शुरुआत, बड़े रकबे तक विस्तार

उन्होंने बताया कि स्ट्रॉबेरी की खेती की शुरुआत उन्होंने मात्र 50 डिसमिल क्षेत्र से की थी। लाभ मिलने पर अगले वर्ष एक एकड़ में खेती की और फिर तीसरे व चौथे वर्ष इसे बढ़ाकर ढाई एकड़ तक कर दिया। वर्तमान में वे ढाई एकड़ क्षेत्र में स्ट्रॉबेरी की सफल खेती कर रहे हैं, जिससे उन्हें अच्छी आमदनी प्राप्त हो रही है।

स्ट्रॉबेरी की खेती में लागत कम अधिक मुनाफा

कृषक सिंह ने बताया कि ढाई एकड़ में स्ट्रॉबेरी की खेती करने में लगभग 2 लाख रुपये की लागत आई है। इससे उन्हें करीब 9 लाख रुपये की आमदनी होने का अनुमान है। लागत निकालने के बाद लगभग 7 लाख रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हो रहा है। उन्होंने बताया कि यही ढाई एकड़ यदि धान की खेती में लगाया जाता, तो लगभग 90 क्विंटल उत्पादन होता, जिससे शासकीय उपार्जन केन्द्र में बेचने पर करीब 3 लाख रुपये की आमदनी होती। धान की खेती में लगभग 1 लाख रुपये की लागत आने के बाद शुद्ध लाभ मात्र 2 लाख रुपये के आसपास ही रहता।

उद्यानिकी में सब्सिडी से घटा खर्च, बढ़ा लाभ

किसान लाल बहादुर सिंह ने बताया कि उद्यानिकी विभाग की इस योजना के अंतर्गत पौध, खाद और बीज की राशि डीबीटी के माध्यम से वापस कर दी जाती है। उन्हें लगभग 80 से 85 हजार रुपये तक की सब्सिडी प्राप्त होगी। विभाग द्वारा समय-समय पर तकनीकी मार्गदर्शन भी दिया जाता है, जिससे खेती और अधिक सफल हो रही है।

अधिकारियों का मार्गदर्शन बना सफलता की कुंजी

लाल बहादुर सिंह ने बताया कि वे पौधे स्वयं मंगवाते हैं और उद्यानिकी विभाग द्वारा निर्धारित मापदंडों के अनुसार खेती करते हैं। विभागीय अधिकारियों द्वारा खेत का निरीक्षण कर आवश्यक सलाह दी जाती है, जिससे उत्पादन की गुणवत्ता और मात्रा दोनों में सुधार होता है और बाजार में अच्छी कीमत मिल जाती है।

अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बने लाल बहादुर सिंह

लाल बहादुर सिंह ने कहा कि शासन की उद्यानिकी योजना से अन्य किसान भी लाभ ले सकते हैं। धान जैसी पारंपरिक फसलों के साथ-साथ उद्यानिकी फसलों को अपनाकर किसान अपनी आमदनी कई गुना बढ़ा सकते हैं। आज वे स्वयं उद्यानिकी खेती से सशक्त और आत्मनिर्भर बने हैं तथा अन्य किसानों को भी इस दिशा में प्रेरित कर रहे हैं।

उद्यानिकी प्रोत्साहन के लिए शासन का जताया आभार

किसान लाल बहादुर सिंह ने उद्यानिकी खेती को प्रोत्साहित करने के लिए छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि शासन की योजनाओं से प्रदेश का किसान आज सशक्त, आत्मनिर्भर और उन्नत कृषक बन रहा है।

किसान स्कूल बहेराडीह में 23 दिसंबर को राष्ट्रीय किसान दिवस, किसान महोत्सव में बांस गीत की विशेष प्रस्तुति

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जांजगीर-चाम्पा- बहेराडीह में स्थित देश के पहले किसान स्कूल में 23 दिसंबर को राष्ट्रीय किसान दिवस धूमधाम से मनाया जाएगा. इस मौके पर आयोजित राज्य स्तरीय किसान महोत्सव में बलौदा के किसान महेत्तर लाल यादव और उनके सहयोगी कटनई के किसान पतिराम यादव बांस गीत की शानदार प्रस्तुति देंगे. इसके साथ ही जिले के किसान और स्कूली बच्चों के द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति देंगे.

वरिष्ठ पत्रकार कुंजबिहारी साहू किसान स्कूल के संचालक दीनदयाल यादव ने बताया कि 23 दिसंबर, मंगलवार को राष्ट्रीय किसान दिवस के अवसर पर बहेराडीह में स्थित देश के पहले किसान स्कूल की पांचवीं स्थापना दिवस धूमधाम से मनाया जाएगा. इस अवसर पर आयोजित राज्य स्तरीय किसान महोत्सव में किसान और स्कूली बच्चे रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति देंगें, वहीं दूसरी तरफ बलौदा के किसान महेत्तर लाल यादव और उनके सहयोगी कटनई के किसान पतिराम यादव के द्वारा बांस गीत की शानदार प्रस्तुति दी जाएगी. किसान दिवस में प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी छत्तीसगढ़ के 9 प्रगतिशील किसान समेत विलुप्त चीजों को सहेजने में किसान स्कूल स्कूल की पुरखा के सुरता अभियान में सक्रिय भूमिका निभाने वाले 9 लोगों और प्रदेश के 9 पत्रकारों का सम्मान किया जाएगा.

आयुष मंत्रालय की संसदीय परामर्श समिति की दूसरी बैठक, औषधीय पौधों की खेती और किसान सशक्तिकरण पर जोर

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आयुष मंत्रालय की संसदीय परामर्श समिति की दूसरी बैठक 15.12.2025 को नई दिल्ली में केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव जाधव की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में लोकसभा एवं राज्यसभा के विभिन्न राजनीतिक दलों के माननीय सांसदों ने भाग लिया, जिनमें सदानंद म्हालू शेट तनवाडे, अष्टिकार पाटिल नागेश बापुराव और निलेश डी. लंके शामिल थे।

केंद्रीय राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने औषधीय पौधों की खेती की महत्वपूर्ण भूमिका पर बल देते हुए कहा कि यह किसानों के सशक्तिकरण, आयुष क्षेत्र को मजबूत करने तथा जैव विविधता के संरक्षण में अहम योगदान देती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार आयुष प्रणालियों को राष्ट्रीय स्वास्थ्य ढांचे में एकीकृत करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है, जिसका उद्देश्य स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देना और एक सतत स्वास्थ्य प्रणाली का निर्माण करना है।

मंत्री ने रेखांकित किया कि मजबूत पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों की नींव उच्च गुणवत्ता वाली औषधियों की उपलब्धता पर आधारित है, जो औषधीय पौधों से प्राप्त गुणवत्तापूर्ण कच्चे माल की सतत आपूर्ति पर निर्भर करती है। उन्होंने कहा कि स्रोत पर गुणवत्ता सुनिश्चित करने से बेहतर और शीघ्र स्वास्थ्य परिणाम प्राप्त होते हैं। उन्होंने राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड (NMPB) की पहलों का उल्लेख करते हुए बताया कि पिछले 25 वर्षों से NMPB देशभर में “औषधीय पौधों का संरक्षण, विकास और सतत प्रबंधन” केंद्रीय क्षेत्र योजना का क्रियान्वयन कर रहा है। किसानों में जागरूकता और क्षमता निर्माण के लिए सूचना, शिक्षा एवं संचार (IEC) गतिविधियों पर विशेष जोर दिया गया है।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2020–21 से 2024–25 के दौरान किसानों के प्रशिक्षण और जागरूकता के लिए 139 परियोजनाओं के माध्यम से लगभग ₹1161.96 लाख की स्वीकृति दी गई, तथा देशभर में 7 क्षेत्रीय-सह-सुविधा केंद्र तकनीकी सहायता प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि “ई-चरक” डिजिटल प्लेटफॉर्म ने किसानों को सीधे खरीदारों से जोड़कर बाजार संपर्क को सशक्त बनाया है। मंत्री ने दोहराया कि औषधीय पौधों की खेती किसानों के सशक्तिकरण, आयुष मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने और जैव विविधता संरक्षण का प्रमुख साधन है। साथ ही उन्होंने मोटे अनाज (श्री अन्न) की वैश्विक बढ़ती मांग का भी उल्लेख किया, जिसे संयुक्त राष्ट्र द्वारा वर्ष 2023 को अंतरराष्ट्रीय मिलेट वर्ष घोषित किए जाने से बढ़ावा मिला, जिससे खेती और किसानों की आय में वृद्धि हुई है।

मंत्री ने किसानों के सशक्तिकरण में कृषि विद्यापीठों और कृषि विज्ञान केंद्रों (KVKs) की महत्वपूर्ण भूमिका को भी रेखांकित किया। उन्होंने सुझाव दिया कि इन संस्थानों को किसानों के बीच औषधीय पौधों की खेती और उपयोग को बढ़ावा देने तथा जागरूकता फैलाने के लिए जोड़ा जा सकता है, जिससे आजीविका के अवसर बढ़ें और ग्रामीण आय में वृद्धि हो।

अंत में मंत्री ने सदस्यों की सक्रिय भागीदारी और सार्थक सुझावों के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उनके सुझाव देशभर में आयुष प्रणालियों को सुदृढ़ करने और पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर भारत के नेतृत्व को आगे बढ़ाने में सहायक होंगे।


प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना ने बदली किसानों की किस्मत

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रायपुर- प्रधानमंत्री धन.धान्य कृषि योजना ;च्डक्क्ज्ञल्द्ध 2025.26 से शुरू की गई, जिसका लक्ष्य 100 कम प्रदर्शन वाले कृषि जिलों में 1.7 करोड़ किसानों की आय और कृषि उत्पादकता बढ़ाना है, जिसके लिए 11 मंत्रालयों की 36 योजनाओं को समन्वित किया गया है। इसे सिंचाई, भंडारण, आसान ऋण तथा फसल विविधीकरण पर ध्यान केंद्रित किया गया है, ताकि किसानों को आत्मनिर्भर बनाया जा सके

किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी

खेती-किसानी आधारित जिले जशपुर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में संचालित प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना (PMDDKY) किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की कृषि-उन्मुख नीतियों और प्रदेश में योजनाओं की तेज गति से क्रियान्वयन के कारण किसानों को आधुनिक तकनीक, बेहतर बीज, सिंचाई सहायता और कृषि विभाग के निरंतर मार्गदर्शन का व्यापक लाभ मिल रहा है। इससे किसान अब कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त कर रहे हैं। जिले के बगीचा विकासखंड के किसान सुधीर लकड़ा (उरांव) इस योजना के प्रत्यक्ष लाभार्थी के रूप में सामने आए हैं।

उत्पादकता में हुआ सुधार 

सुधीर लकड़ा के पास कुल 3.400 हेक्टेयर भूमि है, जिसमें उन्हें समय-समय पर शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ मिला है। आत्मा योजना के तहत ग्रीष्मकालीन मक्का कार्यक्रम, डीएमएफ मद से ट्रैक्टर और कृषि यंत्रों की उपलब्धता तथा सौर सुजला योजना के अंतर्गत सोलर सिंचाई सुविधा ने उनकी खेती को सुगम और कम लागत वाला बनाया है। कृषि विभाग के सहयोग से उन्हें खेती के आधुनिक तौर-तरीकों को अपनाने का अवसर मिला, जिससे उनकी उत्पादकता में सुधार हुआ।

किसान की आय में हुई बढ़ोत्तरी 

प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के अंतर्गत स्थानीय कृषि विस्तार अधिकारी द्वारा उन्हें धान के स्थान पर प्री-बीज ग्रेड मक्का की खेती करने की सलाह दी गई। विभाग द्वारा निःशुल्क उपलब्ध कराए गए 08 किलोग्राम मक्का बीज से उन्होंने 0.400 हेक्टेयर क्षेत्र में फसल लगाई। उचित देखरेख, पोषक तत्व खाद, दवाइयों और तकनीकी मार्गदर्शन के परिणामस्वरूप उन्हें लगभग 10 क्विंटल उत्पादन प्राप्त हुआ, जिससे उनकी कुल आय करीब 15,000 रुपये तक पहुँची।

कृषि में आधुनिक तकनीक के उपयोग को  मिल रहा बढ़ावा

(PMDDKY)योजना के माध्यम से क्षेत्र में फसल उत्पादन में वृद्धि, सिंचाई सुविधाओं में सुधार, भंडारण क्षमता विकास तथा कृषि में आधुनिक तकनीक के उपयोग को बढ़ावा मिल रहा है। यह योजना अनाज, दलहन, तिलहन में आत्मनिर्भरता को मजबूत करने के साथ ही मशीनीकरण, जैविक खेती और किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

फसल की गुणवत्ता सुधारने में मदद

सुधीर लकड़ा बताते हैं कि इस योजना ने उनकी खेती का स्वरूप बदल दिया है। विभाग से प्राप्त प्रशिक्षण, उन्नत बीज और समय पर सलाह ने उनकी फसल की गुणवत्ता सुधारने में मदद की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई यह किसान-हितैषी योजना और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में कृषि क्षेत्र को मिल रहा समर्थन उनकी आमदनी बढ़ाने में महत्वपूर्ण साबित हुआ है।

कृषि आधारित रोजगार से जोड़ने पर भी विशेष ज़ोर 

प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना का उद्देश्य कृषि क्षेत्र को आधुनिक और सशक्त बनाते हुए किसानों की आय को वर्ष 2030 तक दोगुना करना है। योजना के तहत गुणवत्तापूर्ण बीज और तकनीक के माध्यम से उत्पादन में 20-30 प्रतिशत की बढ़ोतरी, अनाज-दलहन- तिलहन में आत्मनिर्भरता, ड्रिप/स्प्रिंकलर सिंचाई से मानसून पर निर्भरता में कमी, कटाई के बाद होने वाले नुकसान को 5 प्रतिशत तक घटाने हेतु भंडारण क्षमता का विस्तार, जैविक कृषि और मशीनीकरण को बढ़ावा देने जैसे कदम शामिल हैं। साथ ही महिलाओं और युवाओं को डेयरी, मत्स्य पालन और मुर्गी पालन जैसी गतिविधियों में सहयोग देकर उन्हें कृषि आधारित रोजगार से जोड़ने पर भी विशेष ज़ोर दिया गया है।

अम्बागढ़ चौकी के कलकसा के किसान धनेश राम ने स्वयं के मोबाइल से कटा टोकन, जताई खुशी

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डिजिटल नवाचार से किसानों का धान विक्रय हुआ आसान

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सरकार द्वारा धान का समर्थन मूल्य 3,100 रुपए प्रति क्विंटल तथा प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान खरीदी का निर्णय किसानों के लिए बड़ी राहत बनकर आया है। इसका सकारात्मक प्रभाव जिलेभर के किसानों के चेहरों पर साफ दिखाई दे रहा है।

अंबागढ़ चौकी विकासखण्ड के ग्राम कलकसा के किसान धनेश राम आज कौड़ीकसा उपार्जन केंद्र में 52 क्विंटल धान विक्रय के लिए पहुंचे थे। उन्होंने अपनी खुशी जाहिर करते हुए बताया कि इस वर्ष उन्होंने धान विक्रय टोकन स्वयं मोबाइल ऐप के माध्यम से प्राप्त किया, जिससे प्रक्रिया आसान और सुविधाजनक हो गई। 

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देशानुसार लागू किए गए इस डिजिटल नवाचार ने किसानों के लिए धान विक्रय की पारंपरिक जटिलताओं को काफी कम कर दिया है। अब किसान अपने मोबाइल फोन पर कुछ ही मिनटों में धान विक्रय के लिए टोकन काट सकते हैं और निर्धारित समय पर उपार्जन केंद्र पहुंचकर बिना किसी बाधा के अपना धान बेच सकते हैं।

कृषक धनेश राम ने बताया कि उपार्जन केंद्र में कर्मचारियों का व्यवहार सहयोगपूर्ण था, तौल-कांटे सही थे, बारदाना पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध था तथा साफ-सफाई की व्यवस्था बेहतर थी। इसके कारण किसान निश्चिंत होकर अपनी उपज बेच पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस वर्ष उनकी फसल की पैदावार भी अच्छी हुई है, जिससे परिवार की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने धान का उचित मूल्य उपलब्ध कराने के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय जी के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया।

किसान सशक्तिकरण हेतु कौशल विकास: आत्मनिर्भर और सशक्त कृषि की ओर एक कदम

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परिचय

भारत की कृषि रणनीति में आज किसान सशक्तिकरण एक महत्वपूर्ण आधारशिला बनकर उभरा है। देश की लगभग दो-तिहाई आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है और लगभग आधी आबादी अपनी आजीविका के लिए कृषि पर निर्भर है। ऐसे में किसानों की क्षमता और कौशल को मजबूत बनाना समावेशी एवं सतत विकास के लिए अत्यावश्यक है। किसानों के सामने चुनौतियाँ केवल ऋण या संसाधन उपलब्धता तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनमें जलवायु परिवर्तन के अनुसार ढलना, मिट्टी की सेहत प्रबंधन, यंत्रीकरण अपनाना और बेहतर बाजार अवसर प्राप्त करना भी शामिल हैं।

इसे ध्यान में रखते हुए, भारत सरकार ने ग्रामीण विकास एजेंडे के केंद्र में कौशल विकास और प्रशिक्षण को रखा है। पिछले दशक में अनेक कार्यक्रम शुरू किए गए हैं, जिनका उद्देश्य किसानों को व्यावहारिक ज्ञान, व्यावसायिक कौशल और आधुनिक तकनीकों से अवगत कराना है। ये पहलें किसानों को केवल उत्पादक ही नहीं, बल्कि नवोन्मेषक, निर्णयकर्ता और कृषि मूल्य श्रृंखला के सक्रिय भागीदार बनाने की दिशा में अग्रसर हैं।

कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन अभिकरण (एटीएमए), ग्रामीण युवाओं का कौशल प्रशिक्षण (एसटीआरवाई), कृषि यंत्रीकरण उपमिशन (एसएमएएम), और प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई) जैसी संस्थागत व्यवस्थाएँ मज़बूत प्रशिक्षण मंच उपलब्ध करा रही हैं। वहीं, बागवानी, पशुपालन, मिट्टी प्रबंधन और खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों में विशेष हस्तक्षेप भी कौशल विकास को अपने ढांचे में समाहित कर रहे हैं। इन सभी प्रयासों का स्पष्ट संदेश है – किसानों का सशक्तिकरण कौशल संवर्द्धन के माध्यम से ही संभव है, जिससे उत्पादकता बढ़ेगी, आय में वृद्धि होगी और कृषि क्षेत्र अधिक सशक्त और टिकाऊ बनेगा।

किसान प्रशिक्षण हेतु संस्थागत ढांचा

किसानों तक सीधे कौशल संवर्द्धन पहुँचाने के लिए एक मज़बूत संस्थागत ढांचा विकसित किया गया है, जिसमें कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) द्वारा स्थापित, केवीके जिले स्तर पर अग्रिम पंक्ति के विस्तार केंद्र के रूप में कार्य करते हैं। ये स्थानीय कृषि-जलवायु परिस्थितियों के अनुरूप प्रायोगिक प्रशिक्षण, प्रदर्शन और व्यावसायिक पाठ्यक्रम उपलब्ध कराते हैं।

2021 से 2024 के बीच, केवीके ने 58.02 लाख किसानों को प्रशिक्षित किया। वर्ष 2021–22 में 16.91 लाख, 2022–23 में 19.53 लाख, 2023–24 में 21.56 लाख किसानों को प्रशिक्षित किया गया, जबकि 2024–25 में फरवरी 2025 तक 18.56 लाख अतिरिक्त किसानों को प्रशिक्षण दिया गया।

इसी प्रकार, कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन अभिकरण (एटीएमए) राज्यों की विस्तार प्रणाली को पुनर्जीवित करने में सहायक रहा है। यह योजना कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के तहत "कृषि विस्तार उपमिशन" के अंतर्गत लागू है। इसके अंतर्गत किसानों, महिला किसानों और युवाओं को नवीनतम कृषि तकनीकों और उत्तम कृषि पद्धतियों से जोड़ने हेतु प्रशिक्षण, प्रदर्शन, exposure visits और किसान मेलों जैसी गतिविधियाँ आयोजित की जाती हैं।

2021–22 में 32.38 लाख किसान, 2022–23 में 40.11 लाख किसान और 2023–24 में 36.60 लाख किसान एटीएमए के तहत प्रशिक्षित हुए। 2024–25 में जनवरी 2025 तक 18.30 लाख किसानों को प्रशिक्षित किया गया। कुल मिलाकर 2021 से 2025 तक इस योजना के माध्यम से लगभग 1.27 करोड़ किसानों तक पहुँचा गया।

ग्रामीण युवाओं का कौशल विकास और यंत्रीकरण

ग्रामीण युवाओं को कृषि में नए अवसरों के लिए तैयार करने हेतु ग्रामीण युवाओं का कौशल प्रशिक्षण (एसटीआरवाई) कार्यक्रम लागू किया गया है। यह लगभग 7 दिनों का अल्पावधि प्रशिक्षण है, जो 18 वर्ष से ऊपर के ग्रामीण युवाओं एवं महिला किसानों को horticulture, dairy, fisheries और animal husbandry जैसे क्षेत्रों में व्यावसायिक कौशल प्रदान करता है।

2021–22 में 10,456 युवा, 2022–23 में 11,634 युवा, 2023–24 में 20,940 युवा प्रशिक्षित हुए। इस प्रकार 2021 से 2024 तक कुल 43,000 से अधिक युवाओं को प्रशिक्षित किया गया। 2024–25 में दिसंबर 2024 तक 8,761 अतिरिक्त युवाओं को प्रशिक्षित किया गया।

इसी तरह, कृषि यंत्रीकरण उपमिशन (एसएमएएम) छोटे एवं सीमांत किसानों तक मशीनरी की पहुँच बढ़ाने के लिए कार्यरत है। 2021 से 2025 के बीच 57,139 किसानों को इस मिशन के अंतर्गत प्रशिक्षित किया गया।

मिट्टी, संसाधन और मूल्य श्रृंखला पर ज्ञान सुदृढ़ करना

मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना किसानों को उर्वरक उपयोग और फसल नियोजन के लिए वैज्ञानिक मार्गदर्शन प्रदान करती है। 24 जुलाई 2025 तक 25.17 करोड़ से अधिक मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरित किए गए हैं। इसके साथ ही 93,000 किसान प्रशिक्षण, 6.8 लाख प्रदर्शन और हजारों जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं।

किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) भी किसानों को डिजिटल मॉड्यूल, एग्री-बिजनेस प्रबंधन और ई-नाम जैसे प्लेटफॉर्म्स से जोड़ रहे हैं। अब तक 10,000 एफपीओ पंजीकृत हो चुके हैं।

प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई 4.0) (2022–26) में कृषि को प्राथमिकता क्षेत्र के रूप में शामिल किया गया है। 2015 से 30 जून 2025 तक, 1.64 करोड़ से अधिक प्रशिक्षित और 1.29 करोड़ से अधिक प्रमाणित लाभार्थी बनाए गए हैं।

इसी तरह, बागवानी समेकित विकास मिशन (एमआईडीएच) के तहत 2014–15 से 2023–24 तक 9.73 लाख किसानों को प्रशिक्षित किया गया।

राष्ट्रीय गोकुल मिशन (आरजीएम) के अंतर्गत अब तक 38,736 मैत्री (MAITRI) तकनीशियनों को प्रशिक्षित और सुसज्जित किया गया है।

प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना (पीएमकेएसवाई) के तहत 30 जून 2025 तक 1601 परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई, जिनमें से 1133 परियोजनाएँ पूर्ण हो चुकी हैं और 34 लाख से अधिक किसानों को लाभ मिला है।

निष्कर्ष

आज कौशल विकास भारत की कृषि व्यवस्था में गहराई से समाहित हो चुका है। केवीके, एटीएमए, एसटीआरवाई, एसएमएएम, पीएमकेवीवाई, आरजीएम और पीएमकेएसवाई जैसी योजनाओं के माध्यम से किसानों और ग्रामीण युवाओं को व्यावहारिक ज्ञान, आत्मविश्वास और उद्यमिता कौशल मिल रहे हैं।

सरकार का यह ध्यान केवल किसानों को बेहतर तकनीक अपनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें उद्यमी, एग्री-बिजनेस लीडर और ग्रामीण विकास के प्रमुख वाहक बनाने की दिशा में भी है। ये सामूहिक प्रयास एक कुशल, आत्मनिर्भर और सशक्त किसान समुदाय की नींव रख रहे हैं, जो "विकसित भारत" की दृष्टि से पूरी तरह सामंजस्य रखते हैं।

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