Media24Media.com: नदियों का उत्सव: संरक्षण और संस्कृति का संगम

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नदियों का उत्सव: संरक्षण और संस्कृति का संगम

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6वें नदी उत्सव का उद्घाटन आज IGNCA, जनपथ, नई दिल्ली में जल शक्ति मंत्री C.R. पाटिल ने किया। उद्घाटन सत्र में ISKCON के गौरांग दास, साध्वी विषुधानंद भारती ठाकुर, IGNCA के अध्यक्ष रामबहादुर राय और सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी भी उपस्थित रहे।

उत्सव नदियों को जीवनदायिनी पारिस्थितिकी और सांस्कृतिक धरोहर के रूप में मनाने के लिए आयोजित किया गया। उद्घाटन भाषण में C.R. पाटिल ने नदियों के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि ये केवल जल स्रोत नहीं बल्कि हमारी संस्कृति का अभिन्न हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि नदी संरक्षण के लिए तीन स्तरों – अल्पकालिक, मध्यकालिक और दीर्घकालिक – पर काम किया जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में Water Vision@2047 के माध्यम से महत्वपूर्ण प्रयास किए जा रहे हैं।

गौरांग दास ने कहा कि नदियाँ शक्ति, ऊर्जा और जीवन की सतत प्रगति का प्रतीक हैं। उन्होंने गंगा का उदाहरण देते हुए कहा कि जीवन की कठिनाइयों में आशा और दिशा बनाए रखनी चाहिए। यमुना की वर्तमान स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने नदियों के संरक्षण की साझा जिम्मेदारी पर जोर दिया।

साध्वी विषुधानंद भारती ठाकुर ने कहा कि लोगों को नदियों के साथ सार्थक संवाद स्थापित करना चाहिए और उनकी पारिस्थितिक विविधता का अध्ययन करना चाहिए।

रामबहादुर राय ने कहा कि नदियाँ संस्कृति, आस्था और जिम्मेदारी का प्रतीक हैं। उन्होंने 1980 के दशक में दिल्ली में यमुना की स्थिति का उल्लेख किया और कहा कि चल रही प्रयासों से नदी स्वच्छ हो सकती है। उन्होंने नदी उत्सव को केवल उत्सव नहीं बल्कि नदियों के प्रति जिम्मेदारियों की निरंतर याद बनाने वाला आयोजन बनने की बात कही।

डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने कहा कि नदी संस्कृति समाज पर गहरा प्रभाव डालती है। शहरी जीवनशैली ने नदियों से हमारा संबंध कमजोर कर दिया है। नदी उत्सव का उद्देश्य नदियों के प्रति श्रद्धा, उत्साह, भक्ति और विश्वास की भावना को प्रोत्साहित करना है।

पहले दिन राष्ट्रीय संगोष्ठी “Riverscape Dynamics: Changes and Continuity” का आयोजन किया गया, जिसमें विद्वानों ने नदियों के सांस्कृतिक, पारिस्थितिक और कलात्मक पहलुओं पर चर्चा की। 300 से अधिक शोध पत्र प्राप्त हुए, जिनमें से 45 प्रस्तुत किए जाएंगे। यह कार्यक्रम दिल्ली विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग के सहयोग से आयोजित किया गया।


संगोष्ठी के साथ-साथ “My River Story” डॉक्यूमेंट्री फिल्म महोत्सव की शुरुआत हुई, जिसमें विभिन्न फिल्मों में नदियों के पारिस्थितिक मुद्दों, पारंपरिक प्रथाओं और मानव संबंधों को दिखाया गया।

नदी उत्सव परंपरा और आधुनिक प्रथाओं के बीच संवाद प्रस्तुत करता है, जिससे समुदाय अपनी नदी संबंधी जड़ों से जुड़े रहते हैं। उद्घाटन दिवस का समापन गुरु सुधा रघुरमन और उनकी टीम द्वारा नदियों पर आधारित शास्त्रीय प्रस्तुतियों के साथ हुआ।

तीन दिवसीय उत्सव 27 सितंबर 2025 तक जारी रहेगा, जिसमें सांस्कृतिक कार्यक्रम, प्रदर्शनी और चर्चाएं आयोजित की जाएंगी, जो नदियों, पारिस्थितिकी और संस्कृति के बीच गहरे संबंध को उजागर करेंगी।


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