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प्रख्यात कथावाचक यामिनी देवी श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर और राष्ट्रीय धर्माचार्य पूज्य भारती की उपाधि से विभूषित

 महासमुन्द । छत्तीसगढ़ के महासमुन्द जिले के बागबाहरा निवासी राष्ट्रीय धर्माचार्य व राष्ट्रीय कथावाचक पूज्यभारती यामिनी देवी को उनके समर्पण, भक्ति व सेवा कार्यों , श्रद्धा तथा सनातन धर्म के प्रति सच्ची निष्ठा के साथ कार्य के लिए महामंडलेश्वर और राष्ट्रीय धर्माचार्य पूज्य भारती की उपाधि से विभूषित किया गया है। गत 20 फरवरी 2024 को मेरठ (उत्तरप्रदेश) में एक संत समागम में अंतरराष्ट्रीय सूर्यवंशी अखाड़ा परिषद द्वारा यह सम्मान दिया गया।


पीठाधीश्वर अनंत विभूषित श्री श्री 1008 श्री आचार्य महामंडलेश्वर दविंदर स्वामी सूर्यवंशी एवं महामंडलेश्वर महंत डॉ. जोगेंद्र नाथ जी और महामंडलेश्वर संजीव जी महाराज सहित अनेकों महंत, कथा वाचक,धर्माचार्य व साधु संतों की उपस्थिति में पूज्यभारती यामिनी देवी को 'श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर' की उपाधि से विभूषित किया गया। इस अवसर पर विधि विधान से पूजा अर्चना कर मंत्रोच्चार के बीच सम्मान पत्र देकर यह उपाधि दी गई।


उल्लेखनीय है कि यामिनी देवी गृहस्थ जीवन में रहते हुए ज्ञानवस्था की चर्मोत्कर्ष ऊंचाई पर हैं। राष्ट्रीय स्तर पर कथावाचक के रूप में उनकी खास ख्याति है। साल-दो साल पहले कथावाचन को लेकर सोशल मीडिया में कतिपय आपत्ति और आपत्तिजनक टिप्पणी एक वर्ग विशेष के लोगों द्वारा किए जाने से यामिनी देवी को हतोत्साहित किया जा रहा था। लेकिन, उन्होंने अपनी ज्ञान यात्रा और कथा वाचन का सिलसिला अनवरत जारी रखते हुए इस ऊंचाई को प्राप्त की है।




यामिनी देवी साहू समाज से आती हैं। छत्तीसगढ़ के ओबीसी वर्ग में इस जाति की बहुलता है। वह समाज की प्रदेश और राष्ट्रीय पदाधिकारी भी रह चुकी हैं। यामिनी देवी को मिली उपाधि से उनके प्रशंसक और अनुयायियों में उल्लास का वातावरण है।

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