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आरंग के इतिहास और गौरवगाथा पर बनाया प्रतीक चिन्ह, उत्कृष्ट डिजाइनर हेमंत पुरस्कृत

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आनंदराम पत्रकारश्री. रायपुर (छत्तीसगढ़). पीपला वेलफेयर फाउंडेशन के संयोजन में "मोरध्वज नगरी आरंग" का प्रतीक चिन्ह (LOGO) बनकर तैयार हो गया है। इस विषय पर राज्य स्तरीय लोगो (LOGO) बनाओ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था। इसमें आरंग के डिजाइनर हेमंत कंसारी (पवन फ्लैक्स) की डिजाइन को आयोजन समिति ने चयनित किया है। उन्हें पीपला ग्रुप के अध्यक्ष दूजेराम धीवर और जनपद अध्यक्ष खिलेश देवांगन द्वारा पुरस्कृत किया गया। महेंद्र कुमार पटेल के संयोजन में हेमंत के द्वारा बनाई गई भावपूर्ण व खास डिजाइन की सर्वत्र सराहना की जा रही है। 



उल्लेखनीय है कि पीपला वेलफेयर फाउंडेशन के संयोजन में "मोरध्वज नगरी आरंग" विषय पर राज्य स्तरीय लोगो बनाओ प्रतियोगिता की अंतिम तिथि 28 फरवरी 2023 निर्धारित की गई थी। संतोषजनक प्रविष्टि नहीं आने से इसकी अवधि बढ़ाई गई। सैकड़ों प्रविष्टियों में हेमंत कंसारी की डिजाइन को ईनाम के लिए चुना गया। नगद ईनाम और स्मृति चिन्ह भेंटकर डिजाइनर हेमंत कंसारी का सम्मान किया गया। यह डिजाइन अब पीपला ग्रुप की अमानत, सर्वाधिक सुरक्षित (Copyright) है।
हेमंत कंसारी, डिजाइनर.

थीम का रखा गया है विशेष ध्यान

प्रतीक चिन्ह बनाने में नामकरण और आरंग के इतिहास को संयोजित किया गया है। इसकी बाहरी भित्तियों में आरंग के प्रख्यात सिद्ध पीठ श्रीबागेश्वरनाथ महादेव मंदिर की चौसठ योगिनी का प्रदर्शन, भीतरी भित्तियों में 107 शिवलिंग का प्रतीकात्मक चित्रण, गर्भ वृत्त में  6 आगर 6 कोरी अर्थात 126 तालाबों का चित्रण, मध्यभाग (गर्भगृह) में आरंग के नामकरण की पौराणिक गाथा पर केंद्रित महादानी राजा मोरध्वज और पद्मावती द्वारा बेटे ताम्रध्वज को आरा से चीरते हुए दृश्य का चित्रण, नामकरण सर्कल में वनगमन परिप्रेक्ष्य का चित्रण करते हुए श्रीराम के पदचिन्हों का प्रतीकात्मक चित्रण और मोर पंख (श्रीकृष्ण के मोर मुकुट) को प्रदर्शित किया गया है। गौरतलब है कि आरंग एक ऐसा नगर है, जहां त्रेतायुग में श्रीराम और द्वापर में श्रीकृष्ण-अर्जुन के आने की पौराणिक मान्यता है। लोक गाथाओं में भी इसका वर्णन मिलता है। दानशीलता के लिए तीन शब्द का कोटेशन 'दानं ददाति कल्याणं' (भावार्थ:-दान देने से कल्याण होता है।) का उल्लेख किया गया है। 
विजेता हेमंत को पुरस्कृत करते हुए जनपद अध्यक्ष खिलेश देवांगन, पीपला अध्यक्ष दूजेराम धीवर.

छत्तीसगढ़ की जीवनदायिनी महानदी के तट पर बसे आरंग नगर की महत्ता बताने महानदी की जलधारा का सुंदर चित्रण किया गया है। 'मोरध्वज नगरी आरंग' को आकर्षक ढंग से  लिखकर 'आरंग' को लाल रंग (रक्तांकित) करते हुए बहुत ही बेहतरीन तरीके से 'अं' की मात्रा में रक्त बूंद को प्रदर्शित किया गया है। इससे ऐसा प्रतीत हो रहा है कि राजा-रानी के द्वारा आरा से बेटे को चीरने से टपकने वाले रक्त बूंद से आरंग की उत्पत्ति हुई। इस तरह यह जीवंत हो उठा है।

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लोगो मे आरंग का इतिहास और गौरवगान समाहित है। यह प्रदर्शित किया गया है कि किस तरह महादानी राजा-रानी द्वारा अपने एकमात्र पुत्र को आरा से चीर कर 'दान' दिया गया। और देने का अपना वचन निभाया गया। ऐसी लोक मान्यता है कि इस पौराणिक कथा के कारण ही आरंग नाम पड़ा।  'आरा+अंग=आरंग '  इस तरह खून से लिखी गई है-आरंग के नामकरण की कहानी। ऐसी मान्यता साहित्यकारों, विद्वतजनों की है। एक छोटे से प्रतीक चिन्ह में सबकुछ प्रदर्शित करने का उम्दा प्रयास सराहनीय है। 
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