Media24Media.com: CMIE रिपोर्ट: छत्तीसगढ़ में बेरोजगारी दर 0.6 प्रतिशत पर बरकरार, देश में बढ़कर 7.8 प्रतिशत

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CMIE रिपोर्ट: छत्तीसगढ़ में बेरोजगारी दर 0.6 प्रतिशत पर बरकरार, देश में बढ़कर 7.8 प्रतिशत

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देश में सबसे कम बेरोजगारी दर के मामले में छत्तीसगढ़ शीर्ष से दूसरे स्थान पर है। बीते दिनों सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (CMIE) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल 2022 में छत्तीसगढ़ में बेरोजगारी दर 0.6 फीसदी दर्ज किया गया है, जो राज्य के इतिहास में अब तक के अपने न्यूनतम स्तर पर है। जबकि राष्ट्रीय बेरोजगारी दर का आंकड़ा 7.8 फीसदी है। राष्ट्रीय आंकड़ों को देखें तो शहरी क्षेत्रों में 9.2 फीसदी और ग्रामीण क्षेत्रों का आंकड़ा 7.2 फीसदी है। इधर, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में राज्य के लिए बनाई गई नीतियों की वजह से छत्तीसगढ़ ने यह उपलब्धि हासिल की है। यहां राज्य में नवाचार हुए, जिससे रोजगार के नए अवसर पैदा हुए और हर हाथ को काम मिला। 

CMIE द्वारा 1 मई 2022 को बेरोजगारी दर के आंकड़े जारी किए गए। इन आंकड़ों के मुताबिक सबसे कम बेरोजगारी दर वाले राज्यों में जहां 0.2 फीसदी के साथ हिमाचल प्रदेश शीर्ष पर है। वहीं 0.6 फीसदी के साथ छत्तीसगढ़ दूसरे स्थान पर है। असम 1.2 प्रतिशत बेरोजगारी दर के साथ तीसरे स्थान पर है। वहीं ओडिशा में 1.5 प्रतिशत, तो गुजरात और मध्यप्रदेश में यह आंकड़ा 1.6 प्रतिशत है। दूसरी ओर सर्वाधिक बेरोजगारी दर के मामले में हरियाणा शीर्ष पर है, जहां 34.5 फीसदी बेरोजगारी दर दर्ज की गई है। बिहार में 21.1 फीसदी, जम्मू-कश्मीर में 15.6 फीसदी और गोवा में 15.5 फीसदी बेरोजगारी दर बताई गई है। 

इसलिए छत्तीसगढ़ में रोजगार 

अधिकारियों के मुताबिक छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में राज्य सरकार ने समावेशी विकास के लक्ष्य के साथ काम करना शुरू किया। महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज्य की परिकल्पना के साथ गांवों की आर्थिक सुदृढ़ीकरण की दिशा में नवाचार किए गए। इसमें सुराजी गांव योजना के अंतर्गत नरवा-गरूवा-घुरवा-बाड़ी कार्यक्रम ने महती भूमिका निभाई तो दूसरी ओर गोधन न्याय योजना के साथ गौठानों को रुरल इंडस्ट्रियल पार्क के तौर पर विकसित किया गया, जिससे गोबर बेचने से लेकर गोबर के उत्पाद बनाकर ग्रामीणों को रोजगार मिला। 

लघु वनोपजों की समर्थन मूल्य पर खरीदी

रोजगार के नए अवसर सृजित हुए। 7 से बढ़ाकर 65 प्रकार के लघु वनोपजों की समर्थन मूल्य पर खरीदी और इन लघु वनोपजों के प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन किया गया। इससे वनांचल में भी लोगों को रोजगार मिला। राजीव गांधी किसान न्याय योजना से किसानों की आर्थिक समृद्धि की दिशा में प्रयास हुए तो वहीं इस योजना के बाद उत्साहित किसानों की दिलचस्पी कृषि की ओर बढ़ी। राज्य में खेती का रकबा और उत्पादन बढ़ा। 

विभिन्न क्षेत्रों में सब्सिडी के प्रावधान

राजीव गांधी ग्रामीण कृषि भूमिहीन मजदूर योजना के तहत पौनी-पसारी व्यवस्था से जुड़े लोगों को आर्थिक सहायता मिली। राज्य में नई उद्योग नीति लागू की गई, जिसमें अनेक वर्गों और विभिन्न क्षेत्रों में सब्सिडी के प्रावधान किए गए। इससे उद्मिता विकास को गति मिली। 

कोरोना की लहर में भी लोगों को मिला काम 

गौरतलब है कि वैश्विक महामारी कोरोना के संकट काल में पूरी दुनिया आर्थिक मंदी से प्रभावित हुई। देश में भी अर्थव्यवस्था ढह गई, लेकिन कोरोना की पहली और दूसरी लहर के दौरान भी आर्थिक मंदी से छत्तीसगढ़ अछूता रहा। छत्तीसगढ़ में कोरोना के दौरान में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत काम जारी रहा, जिससे लोगों को नियमित तौर पर काम मिलता रहा। महामारी अधिनियम के निर्धारित मापदंडों के साथ औद्योगिक इकाई में भी काम चलता रहा। सभी सावधानियों के साथ आवश्यकतानुसार बाजार भी खुले। 

रोजगार मिशन से नई उम्मीद 

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की पहल पर छत्तीसगढ़ में रोजगार मिशन की शुरुआत की गई है। इसके तहत अगले पांच साल में राज्य में 12 से 15 लाख नए रोजगार सृजन का लक्ष्य रखा गया है। रोजगार मिशन राज्य के युवाओं के लिए नई उम्मीद के तौर पर है। साथ ही यह भी उम्मीद है कि रोजगार मिशन छत्तीसगढ़ के विकास की नई इबारत लिखेगा। 

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