Media24Media.com: आज ही के दिन हुई थी निर्भया से दरिंदगी, 8 साल बाद भी दिल्ली में लगातार बढ़ रहे मामले

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आज ही के दिन हुई थी निर्भया से दरिंदगी, 8 साल बाद भी दिल्ली में लगातार बढ़ रहे मामले

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निर्भया के साथ सामूहिक दुष्कर्म और हत्या (Nirbhaya gang-rape and murder) को आठ साल बीत (8 years of nirbhaya scandal) चुके हैं। वहीं निर्भया से दरिंदगी करने वाले चार युवकों को फांसी दी जा चुकी है। हालांकि एक आरोपी को नाबालिग होने के कारण फांसी नहीं दी गई। निर्भया से दरिंदगी को आज आठ साल बीत चुके हैं , लेकिन फिर भी दिल्ली में महिलाओं के खिलाफ अपराधों की संख्या (Number of crimes against women) में कमी नहीं आ रही है।









निर्भया कांड (Nirbhaya scandal) के बाद महिला सुरक्षा को लेकर बने कई कानून भी सैकड़ों 'निर्भया' को समय पर न्याय नहीं दिला पा रहा है। उन्हें न्याय का इंतजार करना पड़ रहा है। कोरोना काल में तो सैकड़ों 'निर्भया' में से एक को भी न्याय नहीं मिल पाया है।





राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों पर एक नजर





राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (National Crime Records Bureau) के मुताबिक देश के राजधानी दिल्ली में इस साल यानी 2020 के अक्टूबर महीने तक दुष्कर्म के 1,429 मामले सामने आए हैं। वहीं बीते साल यानी 2019 में दिल्ली में दुष्कर्म के 1,884 मामले सामने आए थे, जो साल खत्म होने तक बढ़कर 2,168 मामले हो गए। 2012 में कुल 706 रेप केस दर्ज किए गए थे, जिसमें 16 दिसंबर को निर्भया के साथ गैंगरेप भी शामिल था।





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राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के हिसाब से दिल्ली पुलिस ने इस साल अक्टूबर तक महिलाओं पर हमले के कुल 1,791 मामले दर्ज किए है। इसकी तुलना में 2019 में इसी अवधि के दौरान 2520 मामले दर्ज किए गए, जो साल के अंत तक बढ़कर 2,921 हो गए। 2012 में इसी अपराध के लिए कुल 727 मामले दर्ज किए गए थे।









2019 के आंकड़ों पर एक नजर





2019 में इसी अवधि में 2,988 सूचित आंकड़ों के मुकाबले इस साल अक्टूबर तक कुल 2,226 महिलाओं का अपहरण किया गया था। 2019 के अंत तक दिल्ली में महिलाओं के अपहरण के 3,471 मामले सामने आए। 2012 में महिलाओं के अपहरण के कुल 2,048 मामले दर्ज किए गए थे।





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दिल्ली पुलिस ने इस साल अक्टूबर तक आईपीसी की धारा 498-ए/406 के तहत 1,931 मामले दर्ज किए। पिछले साल इसी अवधि के दौरान कुल 3,052 मामले दर्ज किए गए थे, जो साल खत्म होने के समय तक बढ़कर 3,792 हो गए। 2012 में दिल्ली पुलिस ने महिलाओं के पति और ससुराल वालों के खिलाफ 2,046 मामले दर्ज किए थे।





इस साल अक्टूबर तक के आंकड़े






दिल्ली पुलिस (Delhi Police) ने इस साल अक्टूबर तक दहेज हत्या के 94 मामले भी दर्ज किए हैं, जबकि पिछले साल इसी अवधि में इसी प्रकृति के 103 मामले दर्ज हो रहे हैं। साल 2012 में दिल्ली पुलिस ने दहेज हत्या के कुल 134 मामले दर्ज किए थे।





हर दिन औसतन 87 बलात्कार के मामले आते हैं सामने





राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के मुताबिक साल 2019 में महिलाओं के खिलाफ 4,05,861 मामले सामने आए। इनमें हर दिन औसतन 87 मामले बलात्कार के हैं।









NCRB के मुताबिक देशभर में 2018 के मुकाबले 2019 में महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामलों में 7. 3% की वृद्धि दर्ज की गई थी। वहीं प्रति लाख आबादी पर महिलाओं के खिलाफ अपराध की दर के लिहाज से देखें तो इस लिस्ट में असम सबसे ऊपर है। वहां बीते साल प्रति लाख महिलाओं में 117.8 महिलाएं हैवानियत की शिकार हुई थीं।





महिलाओं के खिलाफ अपराध (Crime against women)





भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत दर्ज महिलाओं के खिलाफ अपराध के ज्यादातर मामले घरेलू हिंसा के हैं। NCRB के मुताबिक पिछले साल 30. 9% पति या रिश्तेदार की क्रूरता, 21. 8% इज्जत लूटने के इरादे से महिलाओं पर हमला, 17. 9% महिलाओं का अपहरण और अगवा जबकि 7. 9% बलात्कार के केस दर्ज किए गए।









क्या हैं निर्भया कांड (What are the Nirbhaya scandal)





साल 2012 दिल्ली सामूहिक बलात्कार मामला भारत की राजधानी दिल्ली में 16 दिसंबर 2012 को हुई एक बलात्कार और हत्या की घटना थी, जो भारतीय मीडिया के त्वरित हस्तक्षेप के कारण सबके सामने आई थी। 16-17 दिसंबर 2012 की रात दिल्ली में एक चलती बस में 6 लोगों ने 23 वर्षीय फिजियोथेरेपी इंटर्न के साथ बलात्कार किया और फिर उसे सड़क पर फेंक दिया। 29 दिसंबर 2012 को सिंगापुर के माउंट एलिजाबेथ अस्पताल में उसकी मौत हो गई। पीड़िता को निर्भया के नाम से जाना गया। इस मामले में इसी साल छह में से चार दोषियों को मौत की सजा दे दी गई।





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बता दें कि लंबी कानूनी लड़ाई के बाद आखिर 20 मार्च 2020 को सुबह 5:30 बजे तिहाड़ जेल में के द्वारा निर्भया के दोषियों को फांसी दे दी गई। दोषियों में से एक राम सिंह ने मामले की सुनवाई शुरू होने के कुछ ही दिन बाद तिहाड़ जेल में कथित रूप से आत्महत्या कर ली थी। जबकि एक नाबालिग को तीन साल सुधार गृह में गुजारने के बाद 2015 में रिहा कर दिया गया था।


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