Media24Media.com: ग्रामीण विकास की रीढ़ की हड्डी हैं पंचायती राज संस्थाएं – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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ग्रामीण विकास की रीढ़ की हड्डी हैं पंचायती राज संस्थाएं – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय राजधानी रायपुर के निमोरा स्थित ठाकुर प्यारेलाल राज्य पंचायत एवं ग्रामीण विकास संस्थान में आयोजित नवनिर्वाचित जिला पंचायत अध्यक्षों एवं उपाध्यक्षों के लिए तीन दिवसीय आधारभूत/उन्मुखीकरण प्रशिक्षण कार्यक्रम के शुभारंभ में शामिल हुए।


कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पंचायती राज संस्थाएं ग्रामीण विकास की रीढ़ की हड्डी हैं। नवनिर्वाचित जिला पंचायत अध्यक्षों एवं उपाध्यक्षों के रूप में आप सभी के पास बहुत बड़ा अवसर और बड़ी जिम्मेदारी है। यदि दृढ़ इच्छाशक्ति हो तो एक व्यक्ति भी पूरे जिले की तस्वीर बदल सकता है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि लोक कल्याण की भावना से जनता की सेवा करने वालों को जनता स्वयं आगे बढ़ाती है। अपने राजनीतिक जीवन के अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा कि मैंने भी अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत पंच के रूप में की थी। मैंने कभी नहीं सोचा था कि राजनीति में आऊंगा। 10 वर्ष की आयु में पिताजी के स्वर्गवास के बाद मेरे कंधों पर पूरे परिवार की जिम्मेदारी आ गई। मेरा पूरा जीवन संघर्ष में बीता। मैं सरपंच भी बनूंगा, यह मैंने कभी कल्पना नहीं की थी, लेकिन जनता का आशीर्वाद मिला, जिससे विधायक, सांसद और मुख्यमंत्री के रूप में सेवा का अवसर प्राप्त हुआ।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि कुछ कर गुजरने के लिए संसाधनों से अधिक महत्वपूर्ण इच्छाशक्ति होती है। जनहित में कार्य करने की सोच से अकेला व्यक्ति भी बहुत बड़ी उपलब्धि हासिल कर सकता है। उन्होंने कहा कि मुझे जिन प्रेरणादायी लोगों के जनसेवा के कार्यों को निकट से देखने का अवसर मिला, उनमें ओडिशा के डॉ. अच्युत सामंत और नानाजी देशमुख का उल्लेख करना चाहूंगा। अभावों में पले-बढ़े डॉ. अच्युत सामंत ने आजीवन जनता की सेवा का संकल्प लिया और भुवनेश्वर में एक बड़ा शिक्षण संस्थान स्थापित किया। इस संस्थान में वे लगभग 25 हजार जनजातीय बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा प्रदान कर रहे हैं। इसी तरह, चित्रकूट में नानाजी देशमुख ने दीनदयाल उपाध्याय शोध संस्थान के माध्यम से 500 गांवों को गोद लेकर उनके सर्वांगीण विकास का कार्य किया। वर्ष 2006-07 में जब मैं वहां गया, तब मुझे पता चला कि अब तक 80 गांवों को उन्होंने आत्मनिर्भर बना दिया है। इन गांवों में हर परिवार को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए कार्य किया गया। ये उदाहरण हमें यह बताते हैं कि एक व्यक्ति भी कितना बड़ा परिवर्तन ला सकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ हर दृष्टि से एक समृद्ध राज्य है। यहां 44 प्रतिशत भूभाग पर वन हैं। यहां की मिट्टी उर्वरा है और किसान मेहनतकश हैं। छत्तीसगढ़ के विकास में नक्सलवाद एक बड़ी बाधा था, जिसे हम समाप्त कर रहे हैं। जो नक्सली आत्मसमर्पण कर रहे हैं, उनके लिए हमने एक उत्कृष्ट पुनर्वास नीति बनाई है। जल्द ही राज्य नक्सलमुक्त होगा और बस्तर में सड़क, बिजली, पानी सहित सभी सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

मुख्यमंत्री साय ने बस्तर संभाग के मुलेर ग्राम का अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि इस क्षेत्र के आदिवासियों को राशन के लिए 25 किलोमीटर का पैदल सफर करना पड़ता था, जिसमें तीन दिन लगते थे। कल्पना की जा सकती है कि यह इलाका विकास में कितना पीछे था। हमने मुलेर को अलग पंचायत बनाने का निर्णय लिया और वहां राशन दुकान खोली। जब मैं वहां गया, तो लोगों की खुशी उनके चेहरों पर साफ दिखाई दे रही थी।

मुख्यमंत्री ने नवनिर्वाचित जिला पंचायत अध्यक्षों एवं उपाध्यक्षों से कहा कि गांवों का विकास किए बिना हम विकसित छत्तीसगढ़ नहीं बना सकते। प्रशिक्षण के इस समय का पूरा लाभ उठाएं। यह सदैव ध्यान रखें कि विकास कार्यों की गुणवत्ता से कोई समझौता न हो। नियमित रूप से अपने क्षेत्रों का दौरा करें। प्रवास और निरीक्षण से प्रशासनिक कसावट आती है और विकास कार्यों को गति मिलती है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि जिला पंचायत के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के रूप में बेहतर कार्य करने के लिए स्वयं को पूरी तरह तैयार करें। पंचायती राज से जुड़े कानूनी प्रावधानों की गहन जानकारी रखें। गांव की उन्नति के लिए केवल निर्माण कार्य ही नहीं, बल्कि अन्य संभावनाओं पर भी सतत विचार करें। दुग्ध उत्पादन जैसे कार्यों से गांव की आर्थिक उन्नति सुनिश्चित होती है। गांव में आर्थिक समृद्धि आने से युवाओं को नई दिशा मिलती है और वे व्यसनों से दूर रहते हैं। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान आप ग्राम पंचायत के कार्य स्वरूप पर भी चिंतन करें। पंचायती राज संस्था से जुड़ी सभी प्रक्रियाओं को भलीभांति समझें, ताकि आप जनता के हित में बेहतर कार्य कर सकें। पंचायती राज संस्थाओं से जुड़े सभी स्तर के एक लाख सत्तर हजार लोगों को यहां प्रशिक्षित किया जाएगा। आज आप सभी से इसकी शुरुआत हो रही है।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने पेसा : पंचायत उपबंध एवं छत्तीसगढ़ पंचायत उपबंध मार्गदर्शिका, पंचमन पत्रिका तथा जनपद पंचायत अध्यक्ष, उपाध्यक्ष एवं सदस्यों हेतु पठन सामग्री का विमोचन किया। मुख्यमंत्री ने ठाकुर प्यारेलाल राज्य पंचायत एवं ग्रामीण विकास संस्थान के प्रांगण में मौलश्री पौधे का रोपण भी किया।

इस अवसर पर पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की प्रमुख सचिव निहारिका बारीक सिंह, सचिव भीम सिंह, संचालक प्रियंका ऋषि महोबिया तथा ठाकुर प्यारेलाल राज्य पंचायत एवं ग्रामीण विकास संस्थान के संचालक पी. सी. मिश्रा उपस्थित थे।

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