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महासमुंद में बिजली बकायादारों पर बड़ी कार्रवाई, 155 से अधिक कनेक्शन काटे; ₹17.49 लाख की वसूली

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महासमुंद- बिजली बकाया राशि की वसूली और राजस्व संग्रहण में तेजी लाने के लिए छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड (CSPDCL) ने जिले में विशेष ‘मास डिस्कनेक्शन’ अभियान चलाया। अभियान के दौरान महासमुंद, पिथौरा और सरायपाली संभागों में एक साथ कार्रवाई करते हुए 155 से अधिक विद्युत कनेक्शन काटे गए, जबकि 109 उपभोक्ताओं से कुल ₹17,49,507 की तत्काल वसूली की गई।


अधिकारियों के निर्देशन में चला अभियान

यह अभियान मुख्य अभियंता ए.के. लखेरा और अधीक्षण अभियंता महासमुंद वृत्त एस.के. साहू के निर्देशन में चलाया गया। तीनों संभागों के कार्यपालन अभियंता, सहायक अभियंता और कनिष्ठ अभियंताओं की टीमों ने घरेलू, गैर-घरेलू, कृषि और औद्योगिक श्रेणी के बड़े बकायादार उपभोक्ताओं के खिलाफ कार्रवाई की।

महासमुंद संभाग में 78 कनेक्शन काटे

महासमुंद संभाग में 144 बकायादार उपभोक्ताओं को चिन्हित किया गया था। इन पर कुल ₹79,65,044 की बकाया राशि थी। कार्रवाई के दौरान 78 उपभोक्ताओं के कनेक्शन काटे गए, जिन पर कुल ₹44,29,269 का बकाया था।

वहीं, 29 उपभोक्ताओं से ₹7,37,557 की तत्काल वसूली की गई। इसके अलावा विद्युत अनियमितता के दो मामलों में विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 138 के तहत पंचनामा तैयार किया गया है।

पिथौरा में 44 कनेक्शन विच्छेदित

पिथौरा शहर वितरण केंद्र के अंतर्गत 44 बकायादार उपभोक्ताओं के बिजली कनेक्शन काटे गए। इन उपभोक्ताओं पर कुल ₹15,39,159 की बकाया राशि थी।

अभियान के बाद 14 उपभोक्ताओं ने ₹1,97,550 जमा किए, जिसके बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की गई।

सरायपाली में भी सख्त कार्रवाई

सरायपाली संभाग के छूईपाली, पाटसेन्द्री, बलौदा, सरायपाली शहर और सरायपाली ग्रामीण वितरण केंद्रों में भी अभियान चलाया गया। इस दौरान 33 से अधिक कनेक्शन विच्छेदित किए गए।

वहीं, 66 उपभोक्ताओं से ₹8,14,400 की राजस्व वसूली की गई। विद्युत अनियमितता या अवैध विद्युत उपयोग के चार मामलों में धारा 138 के तहत पंचनामा तैयार किया गया है।

अवैध तरीके से कनेक्शन जोड़ने पर कार्रवाई

CSPDCL ने स्पष्ट किया है कि अभियान आगे भी जारी रहेगा। विभाग द्वारा काटे गए बिजली कनेक्शन को बकाया राशि जमा किए बिना या विभागीय अनुमति के बिना दोबारा जोड़ना गंभीर अनियमितता माना जाएगा। ऐसे मामलों में विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 138 के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

समाधान योजना का लाभ लेने की अपील

अधीक्षण अभियंता एस.के. साहू ने पात्र कृषि पंप, घरेलू और बीपीएल उपभोक्ताओं से समाधान योजना का अधिक से अधिक लाभ उठाने की अपील की है। रिपोर्ट के अनुसार, योजना के तहत पात्र उपभोक्ताओं को बकाया बिजली बिल के भुगतान पर नियमानुसार सरचार्ज में छूट या माफी का लाभ मिल सकता है। योजना की निर्धारित अवधि सितंबर में समाप्त होने की बात कही गई है।


ग्रामीण युवाओं के लिए बड़ी खबर: अक्टूबर से शुरू होंगे DDU-GKY 2.0 के नए ट्रेनिंग बैच

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नई दिल्ली- ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं को रोजगारपरक कौशल प्रशिक्षण देने की दिशा में दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना (DDU-GKY) 2.0 के तहत नए प्रशिक्षण बैच अक्टूबर 2026 से शुरू किए जाएंगे। ग्रामीण विकास मंत्रालय के अनुसार, अधिकांश राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में योजना के नए बैच शुरू करने की तैयारी की जा रही है।

रोजगार के लिए युवाओं को मिलेगा कौशल प्रशिक्षण

DDU-GKY का उद्देश्य ग्रामीण युवाओं को विभिन्न क्षेत्रों में कौशल प्रशिक्षण देकर रोजगार के लिए तैयार करना है। योजना के तहत प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले युवाओं को उनकी योग्यता और बाजार की जरूरतों के अनुरूप रोजगार के अवसरों से जोड़ने पर जोर दिया जाता है।

नई व्यवस्था के तहत प्रशिक्षण पर जोर

DDU-GKY 2.0 के माध्यम से प्रशिक्षण व्यवस्था को और प्रभावी बनाने तथा युवाओं को उद्योग की जरूरत के अनुसार कौशल प्रदान करने पर ध्यान दिया जा रहा है। नए प्रशिक्षण बैचों के शुरू होने से ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं के लिए कौशल विकास और रोजगार के नए अवसर उपलब्ध होने की उम्मीद है।

अक्टूबर 2026 से शुरू होंगे नए बैच

मंत्रालय के अनुसार, अक्टूबर 2026 से अधिकांश राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में DDU-GKY 2.0 के नए प्रशिक्षण बैच शुरू किए जाएंगे। इससे ग्रामीण युवाओं को प्रशिक्षण के माध्यम से रोजगार की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा।


भारतीय नौसेना को मिलेगी नई मिसाइल ताकत, पहली Next Generation Missile Vessel की Keel Laying

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कोच्चि- भारतीय नौसेना के लिए पहली Next Generation Missile Vessel (NGMV) के निर्माण की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। कोच्चि स्थित Cochin Shipyard Limited (CSL) में 18 सितंबर 2026 को NGMV परियोजना के पहले जहाज की Keel Laying Ceremony आयोजित की गई। इसकी जानकारी रक्षा मंत्रालय ने  दी है। 

अत्याधुनिक हथियारों और सेंसर से होगी लैस

PIB के अनुसार, NGMV को अत्याधुनिक हथियार प्रणालियों और सेंसर से लैस करने की योजना है। इससे भारतीय नौसेना की युद्धक क्षमताओं को मजबूत करने और उसे भविष्य की समुद्री चुनौतियों के लिए तैयार करने में मदद मिलेगी।

मार्च 2023 में हुआ था निर्माण का अनुबंध

Next Generation Missile Vessel के निर्माण का अनुबंध मार्च 2023 में Cochin Shipyard Limited के साथ किया गया था। इस परियोजना को भारतीय नौसेना की भविष्य के लिए तैयार और सक्षम समुद्री ताकत विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना गया है। 

स्वदेशी रक्षा निर्माण पर जोर

इस परियोजना में प्रमुख भूमिका निभाने वाले उपकरणों के स्वदेशी विकास और निर्माण पर जोर दिया गया है। PIB के मुताबिक, यह पहल आत्मनिर्भर भारत, मेक इन इंडिया और मेक फॉर द वर्ल्ड की दिशा में भारत की बढ़ती स्वदेशी रक्षा निर्माण क्षमता को भी दर्शाती है। 


LPG उपभोक्ताओं के लिए जरूरी खबर: आधार बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन पर सरकार का जोर, जानें कैसे होगा सत्यापन

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PMUY और PAHAL लाभार्थियों के सत्यापन के लिए अभियान, सिलेंडर डिलीवरी के समय भी करा सकते हैं बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन

नई दिल्ली- घरेलू LPG उपभोक्ताओं के लिए पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने आधार आधारित बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। सरकार का उद्देश्य LPG सब्सिडी और अन्य संबंधित लाभों को वास्तविक एवं पात्र लाभार्थियों तक पारदर्शी तरीके से पहुंचाना है। PIB के अनुसार, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) और PAHAL योजना के लाभार्थियों का बायोमेट्रिक आधार ऑथेंटिकेशन कराया जा रहा है। 

क्यों कराया जा रहा है बायोमेट्रिक सत्यापन?

PIB के मुताबिक, आधार आधारित ऑथेंटिकेशन से लाभार्थियों की पहचान और सत्यापन अधिक सटीक तरीके से किया जा सकता है। इससे डुप्लीकेट या अपात्र कनेक्शनों की पहचान करने और LPG सब्सिडी का लाभ लक्षित उपभोक्ताओं तक पहुंचाने में मदद मिलती है। 

सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों (OMCs) को PMUY और PAHAL लाभार्थियों का बायोमेट्रिक आधार ऑथेंटिकेशन पूरा करने के निर्देश दिए हैं। 

घर पर डिलीवरी के समय भी करा सकते हैं ऑथेंटिकेशन

उपभोक्ताओं के लिए प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन के कई विकल्प उपलब्ध हैं। PIB के अनुसार, LPG सिलेंडर की डिलीवरी के दौरान उपभोक्ता डिलीवरी कर्मचारी से बायोमेट्रिक आधार ऑथेंटिकेशन कराने के लिए कह सकते हैं।

इसके अलावा उपभोक्ता अपने LPG वितरक के शोरूम पर जाकर भी यह प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। संबंधित तेल कंपनियों के मोबाइल ऐप के माध्यम से भी ऑथेंटिकेशन की सुविधा उपलब्ध है। 

क्या बायोमेट्रिक नहीं कराने पर LPG सेवा बंद हो जाएगी?

PIB की 9 जुलाई 2024 की आधिकारिक स्पष्टता के अनुसार, जिन उपभोक्ताओं का बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन पूरा नहीं हुआ है, उनके लिए उस समय कोई सेवा या लाभ बंद नहीं किया गया था। 

इसलिए “1 अक्टूबर 2026 से सभी सब्सिडी वाले LPG सिलेंडर के लिए बायोमेट्रिक आधार ऑथेंटिकेशन अनिवार्य है” जैसी बात को PIB की उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के आधार पर सीधे तथ्य के रूप में प्रकाशित करने से बचना चाहिए।

उपभोक्ता कैसे करा सकते हैं ऑथेंटिकेशन?

तीन प्रमुख तरीके:

  1. सिलेंडर डिलीवरी के समय डिलीवरी कर्मचारी से बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन कराएं।

  2. LPG वितरक के शोरूम पर जाकर सत्यापन कराएं।

  3. संबंधित तेल विपणन कंपनी के मोबाइल ऐप के जरिए प्रक्रिया पूरी करें। 

सहायता के लिए टोल-फ्री नंबर

LPG उपभोक्ता किसी सहायता या जानकारी के लिए 1800 2333 555 टोल-फ्री नंबर पर संपर्क कर सकते हैं। 

बलौदाबाजार स्कूल विवाद: छात्र को थप्पड़ मारने का वीडियो वायरल, प्रभारी प्राचार्य पर हुई कार्रवाई

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शिक्षक पर लगे आरोपों से शुरू हुआ विवाद, शिकायत के दौरान छात्र को थप्पड़ मारने का वीडियो सामने आने के बाद प्रशासन ने की कार्रवाई

बलौदाबाजार- छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार स्थित पंडित चक्रपाणि शुक्ल हायर सेकेंडरी स्कूल में शिक्षक को लेकर शुरू हुआ विवाद उस समय और बढ़ गया, जब शिकायत के दौरान एक छात्र को थप्पड़ मारने का वीडियो सामने आया। मामले में शिक्षा विभाग ने कार्रवाई करते हुए प्रभारी प्राचार्य वंदनी श्रीवास्तव को प्राचार्य पद की जिम्मेदारी से हटा दिया है। उनकी जगह स्कूल के वरिष्ठ व्याख्याता को प्रभारी प्राचार्य की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

शिक्षक पर छात्रों ने लगाए थे गंभीर आरोप

रिपोर्ट के मुताबिक, विवाद की शुरुआत स्कूल में पदस्थ एक विज्ञान व्याख्याता को लेकर छात्रों की शिकायत से हुई। छात्रों ने आरोप लगाया था कि शिक्षक नशे की हालत में स्कूल आते हैं, छात्राओं के साथ कथित तौर पर दुर्व्यवहार करते हैं और शिकायत करने वाले विद्यार्थियों को परीक्षा में फेल करने की धमकी देते हैं।

हालांकि, प्रशासन ने इन सभी आरोपों को एक साथ अंतिम रूप से प्रमाणित नहीं माना है। बलौदाबाजार कलेक्टर के अनुसार, शिक्षक के नशे में पाए जाने के मामले में निलंबन की अनुशंसा की गई है, जबकि मारपीट और कथित दुर्व्यवहार से जुड़े अन्य आरोपों का विभागीय स्तर पर सत्यापन किया जा रहा है।

शिकायत के दौरान छात्र को मारा थप्पड़

विवाद उस समय बढ़ गया जब छात्र और उनके अभिभावक स्कूल प्रबंधन के सामने अपनी शिकायत रखने पहुंचे। इसी दौरान मीडिया भी स्कूल पहुंची थी।

रिपोर्ट के अनुसार, प्रभारी प्राचार्य के कक्ष में बातचीत के दौरान एक छात्र अपने मोबाइल फोन से पूरी घटना रिकॉर्ड कर रहा था। प्राचार्य ने उसे वीडियो बनाने से रोकने को कहा। छात्र के रिकॉर्डिंग जारी रखने पर प्राचार्य ने उसे थप्पड़ मार दिया। इस घटना का वीडियो सामने आने के बाद मामला और तूल पकड़ गया।

प्रशासन ने शुरू की जांच

मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर के निर्देश पर कार्यवाहक जिला शिक्षा अधिकारी, ब्लॉक शिक्षा अधिकारी और तहसीलदार स्कूल पहुंचे। अधिकारियों ने छात्रों, अभिभावकों, शिक्षकों और स्कूल प्रबंधन से बातचीत कर उनके बयान दर्ज किए।

वहीं, संबंधित शिक्षक का मेडिकल परीक्षण भी कराया गया। प्रशासन अब शिक्षक पर लगे आरोपों के साथ-साथ छात्र को थप्पड़ मारने की घटना और पूरे मामले को स्कूल प्रबंधन द्वारा संभालने के तरीके की भी जांच कर रहा है।

प्रभारी प्राचार्य को हटाया गया

बलौदाबाजार कलेक्टर के अनुसार, स्कूल प्रशासन की ओर से समन्वय और नीतियों के क्रियान्वयन में कमी पाई गई, जिसके बाद प्रभारी प्राचार्य को पद की जिम्मेदारी से हटा दिया गया। स्कूल के वरिष्ठ व्याख्याता को नया प्रभारी प्राचार्य बनाया गया है।

पत्रकारों ने भी जताई नाराजगी

घटना के दौरान स्कूल प्रबंधन के व्यवहार को लेकर पत्रकारों की ओर से भी नाराजगी सामने आई। रिपोर्ट के मुताबिक, पत्रकारों ने स्कूल के बाहर विरोध प्रदर्शन किया और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।


रेलवे ट्रैक के पास मोबाइल गेम खेलना पड़ा भारी, 14 वर्षीय किशोर की मौत; दोस्त गंभीर घायल

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सक्ती जिले में दर्दनाक हादसा, ईयरफोन लगाकर गेम खेलने में मशगूल थे दोनों किशोर; मालगाड़ी आने का नहीं चला पता

सक्ती- छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में रेलवे ट्रैक के पास मोबाइल गेम खेलना दो किशोरों के लिए बेहद दर्दनाक साबित हुआ। 14 वर्षीय एक किशोर की मालगाड़ी की चपेट में आने से मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उसका साथी गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना के बाद इलाके में शोक का माहौल है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

चार दोस्त बैठे थे रेलवे ट्रैक के पास

रिपोर्ट के मुताबिक, हादसे के समय चार दोस्त रेलवे ट्रैक के पास बैठकर मोबाइल फोन पर गेम खेल रहे थे। कुछ देर बाद दो किशोर पास के गणेश पंडाल से प्रसाद लेने चले गए। वहीं टिकेश साहू और उसका 14 वर्षीय दोस्त रेलवे ट्रैक के पास ही रुक गए।

रिपोर्ट के अनुसार, दोनों किशोर कक्षा 9 के छात्र थे और मोबाइल गेम में इतने व्यस्त थे कि उन्हें आसपास की स्थिति का ध्यान नहीं रहा। दोनों ने ईयरफोन भी लगा रखे थे। इसी दौरान बराद्वार की ओर से मालगाड़ी वहां पहुंची। पुलिस के अनुसार, दोनों समय रहते ट्रैक से हट नहीं सके।

एक की मौके पर मौत, दूसरा गंभीर घायल

मालगाड़ी की चपेट में आने से टिकेश साहू की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं उसका दोस्त गंभीर रूप से घायल हो गया। उसके सिर, कंधे और पैर में गंभीर चोटें आईं।

घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और घायल किशोर को बराद्वार अस्पताल ले जाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने उसे आगे के इलाज के लिए चांपा रेफर किया।

पुलिस ने शुरू की जांच

घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और आवश्यक कार्रवाई शुरू की। मृत किशोर के शव का 16 सितंबर को पोस्टमार्टम कराया गया, जिसके बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। हादसे के पूरे घटनाक्रम और परिस्थितियों की जांच की जा रही है।

रेलवे ट्रैक के पास मोबाइल इस्तेमाल को लेकर चिंता

इस हादसे के बाद रेलवे ट्रैक के आसपास मोबाइल गेम खेलने और ईयरफोन के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक, इलाके में कुछ नाबालिग रेलवे ट्रैक के आसपास बैठकर मोबाइल गेम खेलने के आदी हो गए थे।

यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि रेलवे ट्रैक कोई सुरक्षित स्थान नहीं है। मोबाइल गेम, ईयरफोन या किसी अन्य गतिविधि में व्यस्त रहने के कारण आसपास आती ट्रेन की आवाज और चेतावनी पर ध्यान नहीं देना जानलेवा हो सकता है।

एक नजर में

  • स्थान: सक्ती जिला, छत्तीसगढ़

  • उम्र: दोनों किशोर 14 वर्ष के

  • हादसा: मालगाड़ी की चपेट में आए

  • मौत: एक किशोर की मौके पर मौत

  • घायल: दूसरा किशोर गंभीर रूप से घायल

  • स्थिति: पुलिस की जांच जारी

  • मुख्य चिंता: रेलवे ट्रैक के पास मोबाइल गेम और ईयरफोन का इस्तेमाल

धमतरी में दंतैल हाथी की दस्तक, कई गांवों में हाई अलर्ट

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केरेगांव वन परिक्षेत्र के छुही बीट में हाथी की मौजूदगी, 10 किलोमीटर के दायरे में सतर्कता; ग्रामीणों से जंगल और हाथी के करीब नहीं जाने की अपील

धमतरी- जिले के केरेगांव वन परिक्षेत्र के छुही बीट में इन दिनों एक दंतैल हाथी के विचरण से ग्रामीण क्षेत्रों में दहशत का माहौल है। वन विभाग को हाथी की मौजूदगी की सूचना मिलने के बाद आसपास के कई गांवों में अलर्ट जारी किया गया है। विभाग की टीमें लगातार हाथी की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं और ग्रामीणों को सावधानी बरतने की समझाइश दी जा रही है।

P-143 कक्ष के आसपास हाथी की मौजूदगी

वन विभाग के अनुसार, दंतैल हाथी फिलहाल कक्ष क्रमांक P-143 के आसपास विचरण कर रहा है। हाथी के आगे बढ़कर जोगीडीह के आबादी क्षेत्र और धमतरी-केरेगांव रेंज की ओर जाने की आशंका को देखते हुए वन विभाग ने आसपास के गांवों में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं।

विभाग द्वारा जोगीडीह, छुही, पीपरछेड़ी, बाजारकुर्रीडीह, साल्हेभाट, सिरौदकला और कमारपारा समेत आसपास के गांवों में हाई अलर्ट जारी किया गया है। इसके अलावा बासीखाई, झुरातराई और भालुचुवा गांवों के ग्रामीणों को भी सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

गांवों में मुनादी कराकर दी जा रही सूचना

हाथी की मौजूदगी को देखते हुए वन विभाग की टीम प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी कर रही है। पीपरछेड़ी, कमारपारा और आसपास के गांवों में मुनादी कराकर ग्रामीणों को हाथी से दूरी बनाए रखने की जानकारी दी जा रही है।

वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि यदि हाथी दिखाई दे तो उसके पास जाने, फोटो या वीडियो बनाने के लिए पीछा करने अथवा उसे किसी भी तरह परेशान करने की कोशिश न करें। हाथी को रास्ता देने और सुरक्षित दूरी बनाए रखने की सलाह दी गई है।

विभाग ने यह भी कहा है कि हाथी दिखाई देने पर उसकी सूचना तत्काल नजदीकी वन कर्मचारी या वन विभाग की टीम को दी जाए, ताकि समय रहते आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था की जा सके।

गरियाबंद की ओर से पहुंचा दंतैल

जानकारी के अनुसार, यह दंतैल हाथी गरियाबंद की ओर से उत्तर सिंगपुर होते हुए केरेगांव रेंज में पहुंचा है। हाथी की गतिविधियों को देखते हुए उसके आसपास लगभग 10 किलोमीटर के दायरे में आने वाली बस्तियों को विशेष रूप से सतर्क किया गया है।

वन विभाग हाथी की लोकेशन और उसकी गतिविधियों पर लगातार नजर रख रहा है। हाथी किस दिशा में आगे बढ़ रहा है, इसके आधार पर आसपास के ग्रामीणों को समय-समय पर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जा रहे हैं।

ग्रामीणों के लिए वन विभाग की अपील

  • हाथी दिखाई देने पर उसके पास न जाएं।

  • हाथी का पीछा कर फोटो या वीडियो बनाने की कोशिश न करें।

  • जंगल अथवा हाथी के संभावित रास्ते में जाने से बचें।

  • हाथी को छेड़ने या भगाने का प्रयास न करें।

  • हाथी की मौजूदगी की सूचना तत्काल वन विभाग को दें।

  • रात के समय विशेष सावधानी बरतें और अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलें।


नन्हे दिल को मिली नई धड़कन, 'चिरायु योजना' ने धमतरी के भाव्यांश को दिया नया जीवन

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रायपुर- समय पर ली गई एक सही स्वास्थ्य जांच किसी मासूम का पूरा भविष्य संवार सकती है, इसका जीवंत उदाहरण धमतरी के नन्हें भाव्यांश साहू की यह सफलता की कहानी है। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के अंतर्गत संचालित 'चिरायु योजना' ने जन्मजात हृदयरोग से जूझ रहे इस बच्चे को न केवल समय पर सही इलाज दिलाया, बल्कि उसके परिवार के जीवन में खुशियों की एक नई रोशनी भी बिखेर दी।

कहानी की शुरुआत फरवरी 2026 में हुई, जब शहरी चिरायु टीम धमतरी ने जालमपुर स्थित आंगनबाड़ी केंद्र क्रमांक-01 में बच्चों के स्वास्थ्य का नियमित परीक्षण किया। जांच के दौरान डॉक्टरों की सजग नजरों ने भाव्यांश में जन्मजात हृदयरोग के लक्षणों को तुरंत पहचान लिया। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए टीम ने बिना कोई समय गंवाए बच्चे को आगे के उच्च स्तरीय उपचार के लिए सत्य साईं अस्पताल, नया रायपुर रेफर किया और पूरे मार्गदर्शन तथा सहयोग के साथ परिजनों की हिम्मत बढ़ाई।

अस्पताल में विशेषज्ञों की गहन जांच और परामर्श के बाद सर्जरी का निर्णय लिया गया। 31 अगस्त 2026 को भाव्यांश को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 2 सितंबर को विशेषज्ञ कार्डियाक सर्जनों की टीम द्वारा उसकी सफल हृदय सर्जरी संपन्न हुई। चिकित्सकों की निरंतर देखरेख और सही देखभाल का ही परिणाम था कि मासूम के स्वास्थ्य में तेजी से सुधार आया और 9 सितंबर को उसे पूर्णतः स्वस्थ अवस्था में डिस्चार्ज कर दिया गया।

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम का मुख्य ध्येय जन्म से 18 वर्ष तक के बच्चों में जन्मजात विकृतियों, गंभीर बीमारियों और पोषण संबंधी कमियों की समय रहते पहचान कर उन्हें निःशुल्क और सर्वश्रेष्ठ उपचार उपलब्ध कराना है। चिरायु टीम की तत्परता और विशेषज्ञ चिकित्सकों के इस समन्वय से आज भाव्यांश पूरी तरह स्वस्थ होकर अपने सामान्य जीवन में लौट आया है। उसकी खिलखिलाती मुस्कान इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि सरकार की यह संवेदनशील योजना प्रदेश के जरूरतमंद बच्चों के लिए नवजीवन का वरदान साबित हो रही है।

गैस भुगतान में हर परिवार को ₹1 से ₹10 तक का नुकसान?

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ग्रामीण गेंदलाल कोकडिया ने भारत गैस पटेवा में UPI, बारकोड और ऑनलाइन भुगतान सुविधा की मांग उठाई

महासमुंद/पटेवा- पटेवा क्षेत्र के ग्रामीण एवं भारत गैस उपभोक्ता गेंदलाल कोकडिया ने भारत गैस वितरण कंपनी पटेवा में डिजिटल भुगतान की सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की है। उनके द्वारा भेजी गई जानकारी के अनुसार, गैस सिलेंडर का भुगतान करते समय छुट्टे पैसे उपलब्ध नहीं होने के कारण ग्राहकों को कथित तौर पर प्रति सिलेंडर ₹1 से ₹10 तक अतिरिक्त राशि का भुगतान करना पड़ रहा है।

गेंदलाल कोकडिया का कहना है कि वर्तमान समय डिजिटल भुगतान का है। ऐसे में गैस वितरण केंद्र पर UPI, QR कोड/बारकोड और ऑनलाइन पेमेंट की सुविधा उपलब्ध होनी चाहिए, ताकि ग्राहक निर्धारित राशि का सटीक भुगतान कर सकें और छुट्टे पैसों की समस्या से बच सकें।

कंपनी के बाहर हेल्पलाइन नंबर प्रदर्शित करने की मांग

ग्रामीण गेंदलाल कोकडिया के अनुसार, भारत गैस वितरण कंपनी पटेवा के बाहर कंपनी से संबंधित विज्ञापन एवं फोटो तो लगाए गए हैं, लेकिन टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर स्पष्ट रूप से प्रदर्शित नहीं है।

उनका कहना है कि ग्राहकों को गैस की कीमत, बुकिंग, डिलीवरी, भुगतान अथवा किसी अन्य समस्या के संबंध में जानकारी या शिकायत करनी हो तो उन्हें संबंधित हेल्पलाइन नंबर आसानी से उपलब्ध होना चाहिए।

UPI और बारकोड से भुगतान की मांग

गेंदलाल कोकडिया ने मांग की है कि गैस एजेंसी में UPI स्कैनिंग, QR कोड/बारकोड और ऑनलाइन भुगतान की सुविधा शुरू की जाए। उनका कहना है कि इससे ग्राहक मोबाइल के माध्यम से गैस सिलेंडर की निर्धारित राशि का भुगतान कर सकेंगे और छुट्टे पैसों को लेकर होने वाली परेशानी भी कम होगी।

उन्होंने यह भी मांग की कि प्रत्येक ग्राहक को गैस सिलेंडर की वास्तविक कीमत और भुगतान की स्पष्ट रसीद/बिल उपलब्ध कराया जाए।

मजदूर और उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को सुविधा मिलने की उम्मीद

गेंदलाल कोकडिया के अनुसार, पटेवा क्षेत्र में बड़ी संख्या में मजदूर परिवार और उज्ज्वला योजना के लाभार्थी गैस का उपयोग करते हैं। उनका कहना है कि इन परिवारों के लिए भुगतान व्यवस्था सरल और पारदर्शी होना जरूरी है।

उनके मुताबिक, छोटे-छोटे छुट्टे पैसों की समस्या के कारण यदि ग्राहक को अतिरिक्त राशि देनी पड़ती है, तो इसका असर गरीब और मजदूर परिवारों पर पड़ सकता है।

“डिजिटल इंडिया के दौर में ऑनलाइन भुगतान की सुविधा जरूरी”

ग्रामीण गेंदलाल कोकडिया ने कहा कि “आज डिजिटल इंडिया का दौर है। गैस कंपनी को भी ग्राहकों के लिए UPI और ऑनलाइन भुगतान की सुविधा उपलब्ध करानी चाहिए।”

उन्होंने कहा कि वे स्वयं भी भारत गैस के ग्राहक हैं और पटेवा में भारत गैस कंपनी की सुविधा शुरू होने से क्षेत्र के लोगों को लाभ मिला है। उनका कहना है कि कंपनी की सुविधा के साथ यदि डिजिटल भुगतान और पारदर्शी बिलिंग की व्यवस्था भी हो जाए तो ग्राहकों को और सुविधा मिलेगी।

ग्राहकों के हित में इन सुविधाओं की मांग

गेंदलाल कोकडिया ने संबंधित गैस वितरण कंपनी से मांग की है कि—

  • UPI/QR कोड से भुगतान की सुविधा शुरू की जाए।

  •  गैस एजेंसी पर बारकोड/QR कोड स्पष्ट रूप से लगाया जाए।

  •  ऑनलाइन डिजिटल पेमेंट की व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए।

  •  हर ग्राहक को भुगतान की रसीद/बिल दिया जाए।

  •  सिलेंडर की वास्तविक निर्धारित कीमत स्पष्ट रूप से प्रदर्शित की जाए।

  •  एजेंसी के बाहर टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर लगाया जाए।

  •  ग्राहकों के लिए भुगतान और शिकायत संबंधी जानकारी स्पष्ट रूप से उपलब्ध कराई जाए।

कंपनी से जवाब और व्यवस्था में सुधार की उम्मीद

ग्रामीण गेंदलाल कोकडिया द्वारा भेजी गई जानकारी के अनुसार, ग्राहकों की सुविधा और पारदर्शिता के लिए इन व्यवस्थाओं की आवश्यकता महसूस की जा रही है। उन्होंने संबंधित गैस वितरण कंपनी से मामले पर ध्यान देने और डिजिटल भुगतान, बिल एवं हेल्पलाइन संबंधी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है।

अब ग्राहकों को उम्मीद है कि संबंधित गैस एजेंसी इस मांग पर ध्यान देगी और भुगतान व्यवस्था को अधिक पारदर्शी एवं सुविधाजनक बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाएगी।


छत्तीसगढ़ में मानसून मेहरबान : प्रदेश में अब तक 996.5 मि.मी बारिश दर्ज

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 ​रायपुर : छत्तीसगढ़ शासन के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा 19 सितंबर 2026 तक जारी आंकड़ों के अनुसार, चालू मानसून सीजन में 1 जून से अब तक प्रदेश में औसतन 96.4 प्रतिशत (996.5 मि.मी.) बारिश दर्ज की जा चुकी है, जबकि इस अवधि के लिए राज्य की औसत वर्षा 1033.6 मि.मी. निर्धारित है।​ प्रदेशभर के जिलों में वर्षा का रुख मिश्रित रहा है। सरगुजा संभाग की बात करें तो बलरामपुर जिले ने रिकॉर्ड तोड़ बारिश दर्ज की है, जहां औसत वर्षा के मुकाबले 169.7% (1488.5 मि.मी.) पानी बरसा है। इसके साथ ही सूरजपुर में 111.5% (1138.1 मि.मी.) और मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में 122.6% (1139.9 मि.मी.) वर्षा हुई है। हालांकि, पड़ोसी जिले सरगुजा में केवल 77.3% (594.9 मि.मी.), जशपुर में 81.2% (805.1 मि.मी.) और कोरिया में 97.0% (892.8 मि.मी.) बारिश दर्ज की गई है।


​रायपुर संभाग में मानसून काफी मेहरबान नजर आ रहा है। राजधानी रायपुर जिले में औसत का 126.9% (1091.2 मि.मी.) पानी बरस चुका है। वहीं महासमुंद में 120.8% (1128.5 मि.मी.), गरियाबंद में 118.0% (1191.9 मि.मी.), बलौदाबाजार में 109.7% (1007.1 मि.मी.) और धमतरी में 105.1% (1061.0 मि.मी.) बारिश के साथ स्थिति काफी बेहतर बनी हुई है।


​बिलासपुर संभाग के जिलों में भी संतोषजनक वर्षा दर्ज की गई है। सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में सामान्य से अधिक 138.5% (1127.8 मि.मी.) बारिश हुई है। इसके अलावा मुंगेली में 112.5% (1003.7 मि.मी.), जांजगीर-चांपा में 103.4% (1101.5 मि.मी.), कोरबा में 97.5% (1071.0 मि.मी.), बिलासपुर में 95.8% (967.8 मि.मी.), सक्ती में 95.6% (937.2 मि.मी.), गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही में 90.1% (912.5 मि.मी.) और रायगढ़ में 87.6% (956.3 मि.मी.) वर्षा दर्ज की गई है।

​दुर्ग संभाग के मैदानी इलाकों में बालोद जिला 106.3% (1057.1 मि.मी.) बारिश के साथ सबसे आगे है। वहीं दुर्ग में 98.3% (749.6 मि.मी.), कबीरधाम में 83.0% (644.0 मि.मी.), राजनांदगांव में 94.9% (839.9 मि.मी.), खैरागढ़-छुईखदान-गंडई में 93.0% (699.5 मि.मी.), बेमेतरा में 75.2% (569.7 मि.मी.) तथा मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी में 71.8% (864.1 मि.मी.) वर्षा रिकॉर्ड की गई है।

​दक्षिण छत्तीसगढ़ यानी बस्तर संभाग में बारिश का मिला-जुला असर देखने को मिला है। नारायणपुर जिले में औसत की तुलना में 108.6% (1376.6 मि.मी.) बारिश हो चुकी है। वहीं दंतेवाड़ा में 91.4% (1232.8 मि.मी.), कोण्डागांव में 81.8% (936.9 मि.मी.) और बस्तर जिले में 80.7% (1045.6 मि.मी.) वर्षा दर्ज की गई है। संभाग के बीजापुर (70.3%, 1324.4 मि.मी.), सुकमा (69.3%, 982.2 मि.मी.) और कांकेर जिले में कम बारिश दर्ज हुई है; कांकेर में प्रदेश में सबसे कम मात्र 67.0% (945.7 मि.मी.) ही वर्षा दर्ज की गई है।

​अगर केवल 19 सितंबर के दैनिक आंकड़ों पर नजर डालें तो मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी (17.3 मि.मी.), नारायणपुर (16.5 मि.मी.) और कांकेर (16.3 मि.मी.) में अच्छी बारिश दर्ज की गई, जबकि जांजगीर-चांपा, कोण्डागांव और दंतेवाड़ा में दिनभर वर्षा शून्य रही। कुल मिलाकर प्रदेशभर में औसत दैनिक बारिश 4.0 मि.मी. रिकॉर्ड की गई है।

कैंसर की रोकथाम, समय पर पहचान और सुलभ उपचार के लिए सरकार, चिकित्सा जगत और समाज को मिलकर करने होंगे प्रयास : मुख्यमंत्री साय

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 रायपुर : कैंसर के विरुद्ध लड़ाई केवल बीमारी के उपचार तक सीमित नहीं है। मरीज को आधुनिक और प्रभावी उपचार उपलब्ध कराने के साथ उसका मनोबल बनाए रखना तथा उसे यह विश्वास दिलाना भी उतना ही आवश्यक है कि इस कठिन लड़ाई में वह अकेला नहीं है। चिकित्सकों का संवेदनशील व्यवहार और परिवार एवं समाज का भावनात्मक सहयोग मरीज के भीतर बीमारी से लड़ने का हौसला बढ़ाता है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज नवा रायपुर स्थित मेफेयर में बालको मेडिकल सेंटर द्वारा आयोजित चौथे बीएमसी छत्तीसगढ़ कैंसर कॉन्क्लेव-2026 के शुभारंभ अवसर पर संबोधित करते हुए यह बात कही। 


मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि कैंसर आज पूरी दुनिया के सामने गंभीर स्वास्थ्य चुनौतियों में से एक है। कैंसर का नाम सुनते ही मरीज के साथ पूरा परिवार चिंता और अनिश्चितता से घिर जाता है। बीमारी का प्रभाव केवल मरीज के शरीर तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसकी मानसिक, पारिवारिक और आर्थिक परिस्थितियों पर भी पड़ता है। इसलिए कैंसर के उपचार में समग्र दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि चिकित्सक जब आत्मीयता और संवेदनशीलता के साथ मरीज से जुड़ते हैं तो वे केवल बीमारी का उपचार नहीं करते, बल्कि मरीज और उसके परिवार के लिए विश्वास और हौसले का आधार भी बनते हैं। चिकित्सा विज्ञान में हो रही प्रगति के साथ मानवीय संवेदना का यह पक्ष कैंसर के विरुद्ध लड़ाई को और मजबूत बनाता है।

समय पर पहचान से बढ़ती हैं प्रभावी उपचार की संभावनाएं

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि कैंसर से लड़ाई में सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं में से एक बीमारी की समय पर पहचान है। शुरुआती अवस्था में कैंसर की पहचान होने पर प्रभावी उपचार की संभावनाएं काफी बढ़ जाती हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने भी कैंसर सहित गंभीर बीमारियों की समय पर स्क्रीनिंग और रोकथाम को प्राथमिकता दी है।

मुख्यमंत्री साय ने कॉन्क्लेव में उपस्थित विशेषज्ञों से आग्रह किया कि वे ऐसी आधुनिक तकनीकों, अनुसंधानों और प्रभावी उपायों पर विचार करें, जिनसे कैंसर की जल्द पहचान हो सके और उपचार को अधिक सस्ता, सुलभ तथा आम लोगों की पहुंच में लाया जा सके। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के कॉन्क्लेव चिकित्सा जगत के अनुभव, शोध और नवाचार को साझा करने का महत्वपूर्ण मंच हैं। यहां होने वाला विचार-विमर्श भविष्य की स्वास्थ्य नीतियों और उपचार पद्धतियों को नई दिशा देने में सहायक होगा।

प्रदेश में लगातार मजबूत हो रही स्वास्थ्य अधोसंरचना

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए लगातार कार्य कर रही है। छत्तीसगढ़ राज्य गठन के समय प्रदेश में केवल एक मेडिकल कॉलेज था। आज शासकीय और निजी मेडिकल कॉलेजों को मिलाकर इनकी संख्या 15 हो गई है। इसके साथ ही पांच नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि इन चिकित्सा संस्थानों में कैंसर सहित अन्य गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए आवश्यक विशेषज्ञता, आधुनिक उपकरण और अधोसंरचना विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सरकार का प्रयास है कि प्रदेश के लोगों को गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए दूर न जाना पड़े और उन्हें अपने राज्य में ही गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो।

आर्थिक कठिनाई उपचार में न बने बाधा

मुख्यमंत्री ने कहा कि गंभीर बीमारी के समय उपचार के खर्च की चिंता परिवार की परेशानी को और बढ़ा देती है। सरकार का प्रयास है कि आर्थिक कठिनाई किसी जरूरतमंद व्यक्ति के उपचार में बाधा न बने। आयुष्मान भारत योजना ने गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच आसान की है। पात्र परिवारों को योजना के अंतर्गत 5 लाख रुपए तक उपचार की सुविधा मिल रही है।

उन्होंने बताया कि राज्य सरकार की मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना के माध्यम से जरूरतमंद मरीजों को 25 लाख रुपए तक की उपचार सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। इन योजनाओं का उद्देश्य यही है कि बीमारी के कठिन समय में परिवार को आर्थिक चिंता के बजाय मरीज के स्वास्थ्य और उपचार पर ध्यान देने का संबल मिले।

बस्तर जैसे दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंच रही बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार बस्तर जैसे भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के लिए विशेष प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के अंतर्गत लगभग 34 लाख लोगों की स्वास्थ्य स्क्रीनिंग की गई है। इनमें करीब 40 हजार लोगों में विभिन्न बीमारियों की पहचान कर उन्हें उपचार से जोड़ा गया है।

उन्होंने कहा कि व्यापक स्क्रीनिंग का उद्देश्य बीमारी की शुरुआती अवस्था में ही पहचान करना और मरीज को समय पर उपचार उपलब्ध कराना है। सरगुजा सहित प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में भी कैंसर सहित गंभीर बीमारियों की पहचान और उपचार के लिए स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार किया जा रहा है।

नवा रायपुर में आकार ले रही 5 हजार बिस्तरों की मेडिसिटी

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ को आधुनिक चिकित्सा सेवाओं के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में नवा रायपुर में लगभग 100 एकड़ क्षेत्र में 5 हजार बिस्तरों की क्षमता वाली मेडिसिटी विकसित की जा रही है। यह परियोजना प्रदेश में विशेषज्ञ और सुपर स्पेशियलिटी चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

उन्होंने कहा कि मेडिसिटी के विकसित होने से प्रदेशवासियों को अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता बढ़ेगी और छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य क्षेत्र को नई मजबूती मिलेगी।

स्वस्थ नागरिक विकसित छत्तीसगढ़ की सबसे मजबूत नींव

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि स्वस्थ नागरिक ही विकसित छत्तीसगढ़ की सबसे मजबूत नींव हैं। छत्तीसगढ़ ने वर्ष 2047 के लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए अपना विजन डॉक्यूमेंट तैयार किया है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प में छत्तीसगढ़ तभी प्रभावी योगदान दे सकेगा, जब प्रदेश का प्रत्येक नागरिक स्वस्थ और सशक्त होगा।

उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य की प्राप्ति में चिकित्सकों, शोधकर्ताओं और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की महत्वपूर्ण भूमिका है। समाज डॉक्टरों को अत्यंत सम्मान की दृष्टि से देखता है, क्योंकि वे कठिन परिस्थितियों में लोगों का जीवन बचाने और उन्हें स्वस्थ जीवन देने का कार्य करते हैं।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि चौथा बीएमसी छत्तीसगढ़ कैंसर कॉन्क्लेव कैंसर की रोकथाम, समय पर स्क्रीनिंग, शोध और आधुनिक उपचार के क्षेत्र में उपयोगी निष्कर्षों तथा नई संभावनाओं का मार्ग प्रशस्त करेगा। यहां देश-दुनिया के विशेषज्ञों द्वारा साझा किए जा रहे अनुभव और नवाचार छत्तीसगढ़ में कैंसर के विरुद्ध सामूहिक प्रयासों को नई दिशा और मजबूती देंगे।

कैंसर मरीजों का तैयार होगा व्यवस्थित डेटाबेस : स्वास्थ्य मंत्री जायसवाल

स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि चौथा छत्तीसगढ़ कैंसर कॉन्क्लेव प्रदेश के स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण अवसर है। देश-दुनिया के कैंसर विशेषज्ञों का एक मंच पर आकर रोकथाम, स्क्रीनिंग, अनुसंधान और आधुनिक उपचार पद्धतियों पर अपने अनुभव साझा करना प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को और प्रभावी बनाने में सहायक होगा।

उन्होंने कहा कि बालको मेडिकल सेंटर द्वारा स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से प्रदेश में 500 से अधिक स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए गए हैं। इन शिविरों के माध्यम से लोगों में कैंसर के प्रति जागरूकता बढ़ाने और समय पर जांच के लिए प्रेरित करने का कार्य किया गया है।

स्वास्थ्य मंत्री जायसवाल ने कहा कि राज्य सरकार कैंसर की समय पर पहचान के लिए स्क्रीनिंग का दायरा लगातार बढ़ा रही है। प्रदेश में कैंसर को नोटिफाई करने का निर्णय लिया गया है। इससे कैंसर मरीजों का व्यवस्थित डेटाबेस तैयार किया जा सकेगा और उनके उपचार तथा स्वास्थ्य संबंधी जानकारियों का बेहतर ढंग से संधारण संभव होगा।

उन्होंने कहा कि सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम के लिए एचपीवी टीकाकरण को भी मिशन मोड में आगे बढ़ाया जा रहा है। राज्य सरकार का प्रयास है कि स्क्रीनिंग और रोकथाम के उपायों के माध्यम से बीमारी की पहचान शुरुआती चरण में हो तथा मरीज को समय पर आवश्यक उपचार मिल सके।

‘Restoring Balance to Cancer Care’ थीम पर आयोजित इस कॉन्क्लेव में देश-विदेश के प्रतिष्ठित चिकित्सक, कैंसर विशेषज्ञ, शोधकर्ता और स्वास्थ्य क्षेत्र के विशेषज्ञ कैंसर की रोकथाम, स्क्रीनिंग, उपचार, अनुसंधान और चिकित्सा क्षेत्र में हो रहे नवाचारों पर मंथन कर रहे हैं। कॉन्क्लेव में 200 से अधिक राष्ट्रीय और 11 अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं। इस वर्ष स्त्री रोग संबंधी कैंसर और प्रोस्टेट कैंसर पर विशेष रूप से चर्चा की जा रही है।

कैंसर की जांच और उपचार की नवीन तकनीकों से रूबरू हुए मुख्यमंत्री

कॉन्क्लेव के दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कैंसर जागरूकता, प्रारंभिक पहचान, स्क्रीनिंग तथा जांच एवं उपचार की नवीनतम तकनीकों से संबंधित विभिन्न स्टॉलों का अवलोकन किया। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर सर्वाइकल कैंसर उन्मूलन परियोजना का शुभारंभ भी किया।

मुख्यमंत्री ने विशेषज्ञ चिकित्सकों और प्रतिनिधियों से आधुनिक तकनीकों की कार्यप्रणाली, कैंसर की समय रहते पहचान में उनकी उपयोगिता तथा उपचार के क्षेत्र में हो रहे नए अनुसंधानों और नवाचारों की विस्तार से जानकारी ली। उन्होंने विशेषज्ञों से कैंसर की जांच और उपचार में उभरती नई संभावनाओं पर भी चर्चा की।

मुख्यमंत्री श्री साय ने विशेष रूप से यह जानकारी ली कि आधुनिक तकनीक और नवाचारों की सहायता से कैंसर की प्रारंभिक पहचान को किस प्रकार अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है और इन सुविधाओं को प्रदेश के आम नागरिकों, विशेषकर दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तक किस प्रकार अधिक सुलभता से पहुंचाया जा सकता है।

इस अवसर पर बालको मेडिकल सेंटर की डायरेक्टर डॉ. भावना सिरोही, पं. जवाहरलाल नेहरू स्मृति मेडिकल कॉलेज रायपुर के डीन डॉ. विवेक चौधरी, ई-कैंसर की प्रतिनिधि डॉ. सुज़ाना स्टेनवे, वाइस एडमिरल आरती सरीन सहित देश-विदेश से आए विशेषज्ञ चिकित्सक, शोधकर्ता और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधि उपस्थित थे।

CG NEWS : स्कूल का छज्जा भरभराकर गिरा, शिक्षक घायल; बाल-बाल बचे बच्चे

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 सूरजपुर। जिले के प्रतापपुर विकासखंड के हरिहरपुर स्थित नेवारडांड प्राथमिक शाला में शनिवार को जर्जर स्कूल भवन का छज्जा अचानक भरभराकर नीचे गिर गया। हादसे की चपेट में आने से एक शिक्षक के घायल होने की जानकारी सामने आई है। घटना के बाद स्कूल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।


जानकारी के अनुसार, स्कूल भवन के छज्जे का प्लास्टर अचानक टूटकर नीचे आ गिरा। इस दौरान वहां मौजूद एक शिक्षक इसकी चपेट में आ गए, जिससे उन्हें चोटें आईं। राहत की बात रही कि जिस समय छज्जे का प्लास्टर गिरा, उस स्थान के आसपास बच्चे मौजूद नहीं थे। इससे एक बड़ा हादसा टल गया।

हादसे का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल

घटना के बाद स्कूल भवन की जर्जर स्थिति का वीडियो भी सामने आया है। यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में स्कूल भवन के क्षतिग्रस्त हिस्से और नीचे गिरे प्लास्टर को देखा जा सकता है।

वीडियो सामने आने के बाद स्कूल भवनों के रखरखाव और समय पर मरम्मत को लेकर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जर्जर भवनों की समय रहते जांच और मरम्मत नहीं होने से विद्यार्थियों और शिक्षकों की सुरक्षा पर खतरा बना रहता है।

अभिभावकों ने की भवन की जांच और मरम्मत की मांग

हादसे के बाद विद्यार्थियों के अभिभावकों ने स्कूल भवन की स्थिति को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने भवन का तत्काल निरीक्षण कराने और जर्जर हिस्सों की मरम्मत कराने की मांग की है।

अभिभावकों का कहना है कि स्कूल भवनों की नियमित जांच और आवश्यक मरम्मत कराई जानी चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटना दोबारा न हो और बच्चों व शिक्षकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

आरंग में शिक्षक हत्याकांड का खुलासा, 30 लाख के लेन-देन में साथी शिक्षक ने की हत्या

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 आरंग। छत्तीसगढ़ के आरंग में शासकीय शिक्षक शिवकुमार चंद्राकर की हत्या के मामले में पुलिस ने 24 घंटे के भीतर खुलासा करने का दावा किया है। ग्राम बनचरौदा के पास महानदी तट पर मिले शिक्षक के शव के मामले में पुलिस ने उनके ही स्कूल में पदस्थ साथी शिक्षक चंद्रप्रकाश वर्मा को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, हत्या के पीछे करीब 30 लाख रुपये के लेन-देन और ब्याज को लेकर चल रहा विवाद सामने आया है।


महानदी किनारे मिला था शिक्षक का शव

17 सितंबर को बनचरौदा के पास महानदी किनारे एक व्यक्ति का शव मिलने की सूचना पुलिस को मिली थी। मौके पर पहुंची टीम ने जांच शुरू की। मृतक की पहचान ग्राम रामपुर डंगनिया (चंपारण) निवासी 46 वर्षीय शिवकुमार चंद्राकर के रूप में हुई। वह ग्राम कुम्हारी स्थित शासकीय स्कूल में शिक्षक थे।

पुलिस के अनुसार, मृतक के सिर और चेहरे पर भारी वस्तु और धारदार हथियार से वार किए गए थे। घटनास्थल के पास उनकी मोटरसाइकिल भी मिली थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधिकारियों के साथ फॉरेंसिक टीम और डॉग स्क्वाड ने भी घटनास्थल का निरीक्षण किया।

CCTV और VSK ऐप से मिला अहम सुराग

जांच के दौरान पुलिस को मृतक के साथी शिक्षक चंद्रप्रकाश वर्मा की गतिविधियां संदिग्ध लगीं। स्थानीय लोगों से पूछताछ में भी सामने आया कि घटना वाले दिन शिवकुमार को आखिरी बार चंद्रप्रकाश की सफेद स्कूटी पर जाते देखा गया था।

इसके बाद पुलिस ने कुम्हारी स्कूल के CCTV फुटेज और शिक्षा विभाग के VSK (Vidya Samiksha Kendra) ऐप की लॉग रिपोर्ट की जांच की। पुलिस के मुताबिक, 17 सितंबर की सुबह करीब 9:35 बजे चंद्रप्रकाश स्कूल पहुंचा था। इसके बाद निजी काम का हवाला देकर वह स्कूल से निकल गया और मोबाइल की लोकेशन बंद कर दी।

दोपहर करीब 12:50 बजे वह स्कूल वापस लौटा। पुलिस का दावा है कि इस दौरान उसने अपने मोबाइल से लॉग-इन नहीं किया, बल्कि दूसरे शिक्षक के फोन से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। CCTV फुटेज और ऐप की लॉग रिपोर्ट से पुलिस को उसकी गतिविधियों को लेकर महत्वपूर्ण सुराग मिले।

30 लाख रुपये के लेन-देन को लेकर विवाद

पुलिस के अनुसार, पूछताछ में चंद्रप्रकाश वर्मा ने हत्या की बात स्वीकार की है। जांच में यह भी सामने आया कि दोनों शिक्षक पिछले करीब चार वर्षों से एक-दूसरे को जानते थे और रेत, रियल एस्टेट तथा शेयर-ट्रेडिंग से जुड़े निवेश में साथ काम करते थे।

पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने शिवकुमार को करीब 30 लाख रुपये दिए थे। इसके बदले मृतक ने छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक के तीन ब्लैंक चेक दिए थे। आरोपी के अनुसार, वह इस रकम पर ब्याज लेता था, लेकिन पिछले तीन महीने से ब्याज नहीं मिला था। इसी बात को लेकर दोनों के बीच विवाद चल रहा था।

सुनसान जगह ले जाकर हत्या का आरोप

पुलिस के अनुसार, 17 सितंबर की सुबह दोनों कुम्हारी स्कूल के पास मिले थे। बातचीत के दौरान विवाद बढ़ने पर दोनों बनचरौदा के सुनसान इलाके की ओर चले गए। आरोप है कि वहां चंद्रप्रकाश ने अपनी स्कूटी में रखे धारदार हथियार और हथौड़े से शिवकुमार के सिर और चेहरे पर वार कर दिया, जिससे उसकी मौत हो गई।

हथियार, स्कूटी और ब्लैंक चेक जब्त

पुलिस ने आरोपी के बताए स्थानों से घटना में प्रयुक्त सफेद स्कूटी, धारदार हथियार, हथौड़ा, मृतक के तीन ब्लैंक चेक, पर्स और दोनों के मोबाइल फोन जब्त किए हैं। इसके अलावा आरोपी के कथित खून से सने कपड़े, जूते और मोजे भी बरामद किए गए हैं।

आरंग पुलिस ने आरोपी चंद्रप्रकाश वर्मा के खिलाफ अपराध क्रमांक 443/2026 के तहत धारा 103(1) बीएनएस में मामला दर्ज किया है। उसे गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेजने की कार्रवाई की जा रही है।

पुलिस के मुताबिक, मामले में जब्त साक्ष्यों और अन्य तथ्यों के आधार पर जांच आगे जारी है।

PDS चावल के अवैध भंडारण की सूचना पर खाद्य विभाग की कार्रवाई, 132 बोरी जब्त

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 दुर्ग। सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के चावल के अवैध भंडारण और खरीदी-बिक्री की शिकायतों के बीच खाद्य विभाग ने जिले में अलग-अलग ठिकानों पर कार्रवाई की। कलेक्टर के निर्देश पर की गई जांच के दौरान भिलाई के राजीव नगर और त्रिवेदी किराना स्टोर के गोदाम से कुल 132 बोरी चावल बरामद किया गया। इसकी मात्रा करीब 36 क्विंटल बताई गई है। विभाग ने चावल को जब्त कर मामले की जांच शुरू कर दी है।


जानकारी के अनुसार, जिले में PDS के माध्यम से हितग्राहियों को वितरित किए जाने वाले चावल के अवैध भंडारण और खरीदी-बिक्री की शिकायतें प्रशासन को मिल रही थीं। इसके बाद कलेक्टर के निर्देश पर खाद्य विभाग की टीम ने विभिन्न स्थानों पर जांच शुरू की।

दो ठिकानों से मिला 132 बोरी चावल

जांच के दौरान भिलाई के राजीव नगर स्थित एक ठिकाने से 60 कट्टा चावल बरामद किया गया। इसके बाद त्रिवेदी किराना स्टोर के गोदाम की जांच की गई, जहां 72 कट्टा चावल मिला। दोनों स्थानों से बरामद चावल की कुल मात्रा 132 बोरी यानी करीब 36 क्विंटल है।

रामनगर में चावल से भरा ऑटो लेकर चालक फरार

जांच के दौरान टीम को रामनगर में सरकारी चावल से भरा एक ऑटो भी मिला। हालांकि, टीम की कार्रवाई के दौरान चालक ऑटो लेकर मौके से फरार हो गया। खाद्य विभाग और पुलिस अब वाहन के नंबर के आधार पर चालक की तलाश कर रहे हैं।

जिला खाद्य अधिकारी अनुराग सिंह भदौरिया ने बताया कि विभाग को PDS चावल के अवैध भंडारण की सूचना मिली थी। सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए दो स्थानों से 132 बोरी चावल बरामद किया गया है। उन्होंने बताया कि एक स्थान पर चावल से भरा वाहन लेकर चालक मौके से फरार हो गया।

लैब जांच के बाद होगी स्थिति स्पष्ट

खाद्य विभाग ने बरामद चावल को अपने कब्जे में लेकर उसके नमूने जांच के लिए लैब भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अधिकारियों के अनुसार, लैब रिपोर्ट और संबंधित दस्तावेजों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि बरामद चावल सार्वजनिक वितरण प्रणाली का है या नहीं।

यदि जांच में PDS चावल के अवैध भंडारण या कालाबाजारी की पुष्टि होती है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल विभाग की जांच जारी है और फरार ऑटो चालक की तलाश की जा रही है।

कर्नाटक में सरकारी भर्ती पर बड़ा सवाल: KPSC में पेपर लीक और कथित अनियमितताओं की जांच

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बेंगलुरु-कर्नाटक में सरकारी नौकरियों की भर्ती से जुड़ा विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। राज्य की Karnataka Public Service Commission (KPSC) की भर्ती प्रक्रियाओं में कथित पेपर लीक, उम्मीदवारों के साथ अनुचित व्यवहार, पैसों के लेन-देन और चयन प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोपों की जांच चल रही है।

The Karnataka Public Service Commission office in Bengaluru.

मामला इसलिए गंभीर माना जा रहा है क्योंकि KPSC राज्य में महत्वपूर्ण सरकारी पदों पर भर्ती की प्रक्रिया से जुड़ी संवैधानिक संस्था है। हालिया मामलों में 400 पशु चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती, KPSC अध्यक्ष के परिवार से जुड़ी नियुक्ति और KAS भर्ती प्रक्रिया से संबंधित शिकायतें जांच के दायरे में हैं।

400 Veterinary Officer पदों के पेपर लीक का मामला

सबसे गंभीर आरोप 400 Veterinary Officer पदों की भर्ती परीक्षा से जुड़े हैं।

जांच एजेंसियों के अनुसार, कथित तौर पर कुछ उम्मीदवारों को परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र उपलब्ध कराया गया। Indian Express की रिपोर्ट के मुताबिक, 29 उम्मीदवारों पर सवाल उठे हैं और जांच में यह आरोप सामने आया है कि कुछ उम्मीदवारों ने बिचौलियों के माध्यम से प्रश्नपत्र हासिल किया था।

CID की जांच में यह भी आरोप सामने आया कि कुछ उम्मीदवारों से ₹40 लाख से ₹80 लाख तक रकम ली गई और कुछ उम्मीदवारों को परीक्षा से पहले होटल या रिसॉर्ट में ठहराया गया, जहां उन्हें कथित रूप से प्रश्नपत्र उपलब्ध कराया गया। इन आरोपों की जांच जारी है।

पैसों के लेन-देन की भी जांच

मामले में सिर्फ पेपर लीक ही नहीं, बल्कि कथित रिश्वत और पैसों के लेन-देन की भी जांच की जा रही है।

CID ने अदालत में बताया कि कुछ उम्मीदवारों से कथित रूप से पैसे एक बिचौलिए के जरिए लिए गए। जांच में एक कथित money trail भी सामने आया है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक, जांचकर्ताओं ने आरोप लगाया कि उम्मीदवारों से प्राप्त रकम का कुछ हिस्सा सोने और हीरे की करीब ₹52 लाख की ज्वेलरी खरीदने में इस्तेमाल हुआ। यह मामला एक वरिष्ठ अधिकारी से जुड़े व्यक्ति तक पैसों के कथित प्रवाह की जांच से जुड़ा है।

KPSC अध्यक्ष की बेटी की नियुक्ति पर भी सवाल

विवाद का दूसरा बड़ा हिस्सा KPSC के तत्कालीन अध्यक्ष शिवशंकरप्पा एस. साहूकर की बेटी की सरकारी नौकरी से जुड़ा है।

FIR के अनुसार, उनकी बेटी को राज्य के Industries and Commerce Department में Industrial Extension Officer के पद पर OBC कोटे के तहत चयनित किया गया था।

जांच एजेंसियों ने आरोप लगाया कि आवेदन के दौरान परिवार की आय से संबंधित प्रमाणपत्र में कथित रूप से गलत जानकारी दी गई। इस मामले में FIR दर्ज की गई और अदालत में मामला विचाराधीन है।

साहूकर को 25 अगस्त 2026 को निलंबित किया गया था। उनके खिलाफ चल रही जांच में पेपर लीक और नियुक्ति से जुड़े आरोप भी शामिल हैं।

पहले भी उठ चुके थे सवाल?

Indian Express की जांच के अनुसार, KPSC में कथित अनियमितताओं को लेकर 2019 से कई बार अधिकारियों द्वारा चिंता जताई गई थी।

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कुछ अधिकारियों ने भर्ती प्रक्रिया और संस्था के कामकाज को लेकर सवाल उठाए थे। इसके बावजूद विवादित मामलों की जांच और सुधारों को लेकर सवाल बने रहे।

हालांकि, इन दावों की अलग-अलग स्तर पर जांच और कानूनी प्रक्रिया चल रही है, इसलिए इन्हें अंतिम निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

KAS भर्ती भी जांच के दायरे में

जांच का दायरा केवल Veterinary Officer भर्ती तक सीमित नहीं है।

CID की जांच 384 Karnataka Administrative Service (KAS) Gazetted Probationers की भर्ती तक भी पहुंची है। इस परीक्षा की प्रारंभिक परीक्षा में दो लाख से अधिक उम्मीदवारों के शामिल होने की जानकारी दी गई है।

जांचकर्ताओं ने कथित तौर पर गिरफ्तार बिचौलियों से जुड़े दस्तावेजों में कुछ उम्मीदवारों की जानकारी मिलने के बाद इस भर्ती प्रक्रिया की भी जांच शुरू की है।

इसके अलावा KAS के एक उम्मीदवार को इंटरव्यू में कथित तौर पर फायदा पहुंचाने के आरोप की अलग जांच भी चल रही है।

हाईकोर्ट में भी मामला

इन मामलों पर कर्नाटक हाईकोर्ट में भी सुनवाई हुई है।

Veterinary Officer भर्ती से जुड़े मामले में अदालत के सामने शिकायत रखी गई कि यदि आरोप जांच में सही साबित होते हैं, तो इससे सरकारी नौकरियों में मेरिट आधारित चयन और भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर गंभीर असर पड़ सकता है।

KPSC अध्यक्ष से जुड़े मामलों में भी अदालत ने अलग-अलग याचिकाओं और जमानत अर्जियों पर सुनवाई की है।

राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी तेज

मामले ने राजनीतिक विवाद का रूप भी ले लिया है।

विपक्षी नेताओं ने भर्ती प्रक्रिया में कथित भ्रष्टाचार और राजनीतिक संरक्षण के आरोप लगाए हैं, जबकि राज्य सरकार की ओर से कहा गया है कि भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनाए रखने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए जांच जारी है।

यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि राजनीतिक दलों द्वारा लगाए गए आरोप और जांच एजेंसियों के निष्कर्ष अलग-अलग चीजें हैं। किसी व्यक्ति की आपराधिक जिम्मेदारी अदालत के अंतिम निर्णय से ही तय होगी।

मामला इतना महत्वपूर्ण क्यों है?

सरकारी नौकरी की परीक्षा लाखों युवाओं के लिए रोजगार का महत्वपूर्ण रास्ता होती है।

अगर किसी भर्ती परीक्षा में पेपर लीक या पैसे के बदले चयन जैसे आरोप सही साबित होते हैं, तो इसका असर केवल कुछ उम्मीदवारों तक सीमित नहीं रहता। इससे:

  • उम्मीदवारों का भरोसा प्रभावित हो सकता है।

  • पूरी भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठ सकते हैं।

  • चयनित उम्मीदवारों की नियुक्तियों की दोबारा जांच की जरूरत पड़ सकती है।

  • परीक्षा प्रणाली में सुरक्षा और पारदर्शिता बढ़ाने की मांग हो सकती है।

अभी तक की स्थिति

KPSC से जुड़े मामलों में CID की जांच जारी है।

  • Veterinary Officer भर्ती में पेपर लीक के आरोपों की जांच

  •  कथित पैसों के लेन-देन और money trail की जांच

  •  KPSC अध्यक्ष की बेटी की नियुक्ति से जुड़ा मामला

  •  KAS भर्ती प्रक्रिया की भी जांच

  •  कई मामले कर्नाटक हाईकोर्ट के सामने

  •  KPSC के अधिकारियों और अन्य संबंधित लोगों से पूछताछ जारी

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ये आरोप और जांच के निष्कर्ष हैं; अंतिम कानूनी दोषसिद्धि अभी अलग विषय है।


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