Media24Media.com

Responsive Ad Slot


 

बिहार के बैंकीपुर उपचुनाव में प्रशांत किशोर की ऐतिहासिक जीत

No comments Document Thumbnail

राजनीतिक रणनीतिकार से जननेता बने प्रशांत किशोर ने बिहार की बैंकीपुर विधानसभा सीट के उपचुनाव में शानदार जीत दर्ज की है। उनकी इस जीत को राज्य की राजनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। इस परिणाम ने न केवल उनकी राजनीतिक स्वीकार्यता को मजबूत किया है, बल्कि बिहार के राजनीतिक समीकरणों को भी नई दिशा दी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस जीत के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और विपक्षी दल आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों को लेकर अपनी रणनीतियों की समीक्षा और पुनर्गठन में जुट गए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, बैंकीपुर उपचुनाव का यह परिणाम बिहार की भविष्य की राजनीति और चुनावी परिदृश्य पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है।

फिनेक्स इंडस्ट्रीज़ प्राइवेट लिमिटेड – ZED के साथ गुणवत्ता और सतत विकास की ओर अग्रसर

No comments Document Thumbnail

महाराष्ट्र के नासिक जिले के दिंडोरी स्थित फिनेक्स इंडस्ट्रीज़ प्राइवेट लिमिटेड, जो धातु एवं लकड़ी के फर्नीचर का निर्माण करती है, ने 14 जुलाई 2025 को ZED सिल्वर प्रमाणन प्राप्त किया। इसके बाद कंपनी ने कॉस्ट ऑफ पुअर क्वालिटी (COPQ) में 11% की कमी, रीवर्क में 10% की कमी तथा दोषों (Defects) में 1% की कमी हासिल की। साथ ही कार्यस्थल सुरक्षा और संसाधनों के बेहतर उपयोग में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ।

ऊर्जा दक्षता, स्थान के बेहतर उपयोग तथा उपभोग्य सामग्रियों की खपत कम होने से कंपनी को लागत में भी बचत हुई। कंपनी के अनुसार, ZED प्रमाणन ने उत्पादकता, उत्पाद गुणवत्ता और परिचालन दक्षता में वृद्धि की है, जिससे यह सिद्ध हुआ है कि "जीरो डिफेक्ट, जीरो इफेक्ट" की अवधारणा एमएसएमई को सतत एवं प्रतिस्पर्धी विकास की दिशा में आगे बढ़ाने में प्रभावी है।

कॉन्सेप्ट क्लोदिंग प्राइवेट लिमिटेड – ZED के माध्यम से गुणवत्ता और दक्षता को नई मजबूती

पंजाब के जालंधर स्थित कॉन्सेप्ट क्लोदिंग प्राइवेट लिमिटेड ने 14 जून 2025 को ZED सिल्वर प्रमाणन प्राप्त किया, जिससे गुणवत्ता, सतत विकास और परिचालन उत्कृष्टता के प्रति उसकी प्रतिबद्धता और मजबूत हुई।

ZED प्रथाओं को अपनाने के बाद कंपनी ने कार्यस्थल दुर्घटनाओं में 80% की कमी, मीन टाइम टू रिपेयर (MTTR) में 50% की कमी, रीवर्क में 7.4% की कमी तथा रिजेक्शन में 4% की कमी दर्ज की। इसके अतिरिक्त गुणवत्ता, पर्यावरण और कार्यस्थल सुधार पहलों के माध्यम से उल्लेखनीय लागत बचत भी हुई।

कंपनी के अनुसार, ZED प्रमाणन ने परिचालन अनुशासन को मजबूत किया, प्रक्रियाओं की दक्षता बढ़ाई तथा समग्र प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार किया। यह दर्शाता है कि "जीरो डिफेक्ट, जीरो इफेक्ट" की अवधारणा एमएसएमई के लिए अत्यंत लाभकारी है।

जीरो डिफेक्ट, जीरो इफेक्ट (ZED) प्रमाणन के माध्यम से एमएसएमई को सशक्त बनाना

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME) एमएसएमई सस्टेनेबल–ZED प्रमाणन योजना के माध्यम से गुणवत्ता आधारित और पर्यावरण के प्रति उत्तरदायी विनिर्माण को बढ़ावा दे रहा है। यह पहल एमएसएमई को उत्पादन प्रक्रियाओं में सुधार, बेहतर गुणवत्ता मानकों को अपनाने तथा पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने में सहायता प्रदान करती है, जिससे घरेलू और वैश्विक बाजारों में उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता मजबूत होती है।

इस पहल का एक प्रमुख उद्देश्य महिला उद्यमियों की भागीदारी बढ़ाना है। महिला-स्वामित्व वाले एमएसएमई के लिए ZED प्रमाणन की लागत को समाप्त करने हेतु सरकार ने ZED प्रमाणन शुल्क पर 100% सब्सिडी प्रदान की है। यह प्रावधान 11 नवंबर 2023 से प्रभावी है, जिसके कारण पात्र महिला-स्वामित्व वाले एमएसएमई के लिए प्रमाणन की लागत शून्य हो गई है।

यह सहायता महिला उद्यमियों को गुणवत्ता, उत्पादकता, सुरक्षा तथा पर्यावरणीय सततता के मानकों के आधार पर अपनी विनिर्माण प्रणालियों का मूल्यांकन और सुदृढ़ीकरण करने में सक्षम बनाती है। संरचित मूल्यांकन और प्रमाणन तक आसान पहुंच के माध्यम से महिला-नेतृत्व वाले उद्यम अपनी प्रक्रियाओं को मजबूत कर सकते हैं, बाजार में विश्वसनीयता बढ़ा सकते हैं तथा व्यापक व्यावसायिक अवसरों के लिए स्वयं को तैयार कर सकते हैं।

पृष्ठभूमि

जीरो डिफेक्ट, जीरो इफेक्ट (ZED) पहल एमएसएमई को उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों का निर्माण करने के साथ-साथ पर्यावरण पर न्यूनतम प्रभाव डालने के लिए प्रेरित करती है। यह उद्यमों को गुणवत्ता, उत्पादकता और सतत विकास को बढ़ाने के लिए अपनी तकनीक, प्रणालियों और विनिर्माण प्रक्रियाओं में निरंतर सुधार करने हेतु प्रोत्साहित करती है।

ZED केवल एक प्रमाणन कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह एमएसएमई को मूल्यांकन, सुधार, प्रोत्साहन और प्रौद्योगिकी उन्नयन के लिए एक संरचित मार्ग प्रदान करता है। प्रमाणन प्रणाली में ब्रॉन्ज, सिल्वर और गोल्ड स्तर शामिल हैं, जिससे उद्यम क्रमिक रूप से गुणवत्ता और सततता के उच्च मानकों तक पहुंच सकते हैं।

पात्र एमएसएमई को निम्नलिखित वित्तीय सहायता भी उपलब्ध है—

  • परीक्षण/प्रणाली/उत्पाद प्रमाणन की लागत का 75% तक (अधिकतम ₹50,000)।

  • हैंडहोल्डिंग एवं परामर्श सहायता के लिए अधिकतम ₹2 लाख।

  • जीरो इफेक्ट समाधान, प्रदूषण नियंत्रण उपायों तथा स्वच्छ प्रौद्योगिकी अपनाने के लिए अधिकतम ₹3 लाख।

बढ़ती पहुंच और प्रभाव

7 जुलाई 2026 तक लगभग 9.49 लाख एमएसएमई इस योजना के अंतर्गत पंजीकृत हो चुके थे। इनमें से 6.67 लाख से अधिक को ब्रॉन्ज, 6,700 को सिल्वर तथा 4,800 को गोल्ड प्रमाणन प्रदान किया गया।

इसके अतिरिक्त, गुणवत्ता और सतत विनिर्माण प्रथाओं को अपनाने में सहायता के लिए इस योजना के अंतर्गत ₹913 करोड़ से अधिक की वित्तीय सहायता प्रदान की जा चुकी है।

ZED का प्रभाव केवल प्रमाणन तक सीमित नहीं है। 22 राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों ने अपनी औद्योगिक नीतियों में ZED को शामिल किया है और प्रमाणित एमएसएमई को अतिरिक्त प्रोत्साहन प्रदान कर रहे हैं।

साथ ही, 19 वित्तीय संस्थान ZED प्रमाणित एमएसएमई को प्रोसेसिंग शुल्क और ब्याज दरों में रियायत जैसी सुविधाएं प्रदान कर रहे हैं, जिससे उन्हें वित्तीय सहायता प्राप्त करना अधिक आसान हो गया है।

इस योजना की एक महत्वपूर्ण विशेषता महिला-स्वामित्व वाले एमएसएमई के लिए ZED प्रमाणन पर 100% सब्सिडी है, जो प्रमाणन की लागत की बाधा को समाप्त कर महिला उद्यमियों की अधिक भागीदारी को प्रोत्साहित करती है।

गुणवत्तापूर्ण विनिर्माण, संसाधनों के कुशल उपयोग और पर्यावरणीय सततता को बढ़ावा देकर ZED योजना एमएसएमई को अपनी प्रतिस्पर्धात्मकता मजबूत करने, बाजार में विश्वसनीयता बढ़ाने तथा घरेलू एवं वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं (Value Chains) में अधिक प्रभावी ढंग से जुड़ने में सहायता कर रही है।

छत्तीसगढ़ में फिर बदलेगा मौसम, कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश के आसार

No comments Document Thumbnail

 रायपुर : छत्तीसगढ़ में बीते दो दिनों से मौसम साफ रहने के कारण उमस और गर्मी में वृद्धि दर्ज की गई है। हालांकि, भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार प्रदेश में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो रहा है। मौसम विभाग ने आज राज्य के कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश, गरज-चमक और तेज हवाएं चलने की संभावना जताई है। बारिश की नई गतिविधियों से लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद है।


हाल ही में हुई भारी बारिश से प्रभावित इलाकों में जनजीवन धीरे-धीरे सामान्य हो रहा है, लेकिन मौसम विशेषज्ञों ने सतर्क रहने की सलाह दी है। संभावित परिस्थितियों को देखते हुए स्थानीय प्रशासन भी अलर्ट पर है।

जिलावार वर्षा के आंकड़े (1 जून से 3 अगस्त तक):

1. बीजापुर: औसतन 708.7 मिमी. वर्षा

कलेक्टर कार्यालय (भू-अभिलेख शाखा) से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार बीजापुर जिले में अब तक औसतन 708.7 मिमी. वर्षा दर्ज की गई है।

  • सर्वाधिक वर्षा: बीजापुर तहसील (921.1 मिमी.)

  • अन्य तहसीलें:

    • भैरमगढ़: 877.1 मिमी.

    • कुटरू: 819.2 मिमी.

    • गंगालूर: 618.3 मिमी.

    • भोपालपटनम: 600.8 मिमी.

    • उसूर: 415.8 मिमी.

2. बेमेतरा: औसतन 323.7 मिमी. वर्षा

संयुक्त जिला कार्यालय के भू-अभिलेख शाखा के अनुसार बेमेतरा जिले में अब तक औसतन 323.7 मिमी. वर्षा दर्ज हुई है।

  • सर्वाधिक वर्षा: थान खम्हरिया (394.5 मिमी.)

  • न्यूनतम वर्षा: नवागढ़ (243.5 मिमी.)

  • अन्य तहसीलें:

    • बेरला: 355.2 मिमी.

    • साजा: 351.6 मिमी.

    • भिंभौरी: 340.4 मिमी.

    • दाढ़ी: 336.9 मिमी.

    • नांदघाट: 324.1 मिमी.

    • देवकर: 316.5 मिमी.

    • बेमेतरा: 251.0 मिमी.

राम अवतार जग्गी हत्याकांड: शूटर चिमन सिंह को सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत

No comments Document Thumbnail

 नई दिल्ली/रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित राम अवतार जग्गी हत्याकांड में दोषी करार दिए गए शूटर चिमन सिंह को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने उनकी सजा के क्रियान्वयन पर रोक लगाते हुए अंतरिम जमानत प्रदान की है। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया है कि यह राहत केवल अंतरिम है और उनकी दोषसिद्धि को चुनौती देने वाली मुख्य अपील पर अंतिम निर्णय सुनवाई पूरी होने के बाद ही सुनाया जाएगा।


दोषमुक्ति नहीं, केवल अंतरिम राहत

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में साफ किया कि अंतरिम जमानत दिए जाने का अर्थ आरोपी को दोषमुक्त (बरी) घोषित करना नहीं है। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, अपील लंबित रहने के दौरान उच्चतम न्यायालय विशेष परिस्थितियों में अंतरिम जमानत दे सकता है, लेकिन इससे दोषसिद्धि स्वतः समाप्त नहीं होती।

2003 में हुई थी हत्या, सीबीआई ने की थी जांच

घटना: राम अवतार जग्गी की 4 जून 2003 को रायपुर में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

जांच हस्तांतरण: मामले की संवेदनशीलता और राजनीतिक महत्व को देखते हुए जांच स्थानीय पुलिस से लेकर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपी गई थी।

साजिश का खुलासा: सीबीआई ने अपनी जांच में हत्या के पीछे राजनीतिक साजिश का दावा किया था। ट्रायल कोर्ट ने साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर कई आरोपियों को दोषी ठहराया था।

अमित जोगी को भी मिल चुकी है राहत

इस मामले में पूर्व विधायक अमित जोगी को भी छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने हत्या की साजिश का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट पहले ही उनकी दोषसिद्धि और सजा के क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक लगाते हुए राहत दे चुका है। उनकी अपील पर भी अंतिम फैसला लंबित है।

स्थिति: फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में मामले से जुड़ी सभी अपीलों की विस्तृत सुनवाई जारी है। आरोपियों की दोषसिद्धि और सजा की अंतिम स्थिति शीर्ष अदालत के अंतिम फैसले के बाद ही स्पष्ट होगी।

वन मंत्री केदार कश्यप की पहल पर दुर्लभ पैंगोलिन का सुरक्षित रेस्क्यू

No comments Document Thumbnail

वन विभाग की सतर्कता से बची संरक्षित वन्यप्राणी की जान

रायपुर- वन मंत्री केदार कश्यप की मंशानुरूप और उनके संवेदनशील पहल के अनुरूप छत्तीसगढ़ में वन्यजीवों के संरक्षण के लिए लगातार प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। इसी कड़ी में मोहला मानपुर अम्बागढ़ चौकी जिले के मोहला तहसील के ग्राम कुंजंटोला में वन विभाग की टीम ने दुर्लभ वन्यप्राणी पैंगोलिन का सफलतापूर्वक रेस्क्यू कर उसे सुरक्षित जंगल में छोड़ दिया।

रविवार को ग्राम कुंजंटोला निवासी जयंत कुमार के घर में पैंगोलिन के घुसने की सूचना वन विभाग को मिली। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम तुरंत मौके पर पहुंची और पूरी सावधानी के साथ रेस्क्यू अभियान शुरू किया।

वनमंडलाधिकारी के मार्गदर्शन में परिक्षेत्र अधिकारी पंकज पटेल के नेतृत्व में रेस्क्यू टीम ने पैंगोलिन को सुरक्षित पकड़कर आरक्षित वन क्षेत्र में छोड़ दिया। इस अभियान में डिप्टी रेंजर महेंद्र बघेल और शोभित राम यादव की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही।

यह रेस्क्यू अभियान वन विभाग की त्वरित कार्रवाई, प्रशिक्षित टीम और वन्यजीव संरक्षण के प्रति संवेदनशील कार्यप्रणाली का अच्छा उदाहरण है। समय पर मिली सूचना और समन्वित प्रयासों के कारण एक दुर्लभ एवं संरक्षित वन्यप्राणी को सुरक्षित बचाया जा सका।

वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि यदि कहीं भी कोई वन्यजीव दिखाई दे, तो उसे नुकसान न पहुंचाएं और तुरंत वन विभाग को सूचना दें। लोगों की जागरूकता और सहयोग से वन्यजीवों का संरक्षण और भी प्रभावी ढंग से किया जा सकता है।

उल्लेखनीय है कि पैंगोलिन वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत शेड्यूल-1 में शामिल अत्यंत संरक्षित प्रजाति है। इसके संरक्षण के लिए राज्य सरकार विशेष रूप से प्रतिबद्ध है। वन मंत्री श्री केदार कश्यप के निर्देश पर वन विभाग वन्यजीव संरक्षण, त्वरित रेस्क्यू और जनजागरूकता के क्षेत्र में लगातार सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है।

सफलता की कहानी- तेन्दूपत्ता संग्रहण की नई पहल से अबुझमाड़ के 22 गांवों को मिला लाभ

No comments Document Thumbnail

गांव के पास खुला फड़, 365 संग्राहकों को मिला सीधा आर्थिक लाभ

रायपुर- छत्तीसगढ़ शासन की नई तेन्दूपत्ता संग्रहण नीति अबुझमाड़ के दूरस्थ गांवों के लिए राहत और रोजगार का नया माध्यम बन गई है। वर्ष 2026 में पहली बार असीमांकित क्षेत्रों में नए तेन्दूपत्ता फड़ खोले गए, जिससे ग्रामीणों को अपने गांव के पास ही तेन्दूपत्ता बेचने की सुविधा मिली।

पहले ग्रामीणों को तेन्दूपत्ता बेचने के लिए दूर-दूर तक जाना पड़ता था। अब गांव के पास फड़ खुलने से उनका समय, श्रम और खर्च बचा है। साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं। ग्रामीणों ने इस पहल पर खुशी जताते हुए कहा कि इससे उनकी आय बढ़ी है और काम करना पहले की तुलना में आसान हुआ है।

राज्य शासन ने वर्ष 2026 के लिए तेन्दूपत्ता की दर 5,500 रुपये प्रति मानक बोरा निर्धारित की है। इससे ग्रामीणों में तेन्दूपत्ता संग्रहण के प्रति उत्साह बढ़ा। ग्रामीणों की मांग पर वन मंत्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार अबुझमाड़ क्षेत्र में नए फड़ खोलने की प्रक्रिया तेज की गई। वन विभाग ने सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ से अनुमति प्राप्त की और संग्रहण कार्य शुरू कराया।

इस पहल के तहत कलमानार, ओकपाड़, कुतुल, निरामेटा, कोडकानार, कानागांव, कच्चापाल, टेकानार, बांहकेर और रायनार में कुल 10 नए तेन्दूपत्ता फड़ स्थापित किए गए। इन फड़ों के माध्यम से 22 गांवों के 365 संग्राहकों ने 161.254 मानक बोरा तेन्दूपत्ता का संग्रहण किया।

संग्राहकों को तेन्दूपत्ता के बदले 8 लाख 86 हजार 897 रुपये की राशि डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में भेजी गई। समय पर और पारदर्शी भुगतान मिलने से ग्रामीणों का शासन पर भरोसा और मजबूत हुआ है।


इस योजना से कलमानार, पिड़का, ब्रेहबेड़ा, कंदाड़ी, किशकाल, ओकपाड़, कुतुल, आलबेड़ा, निरामेटा, कोडकानार, कानागांव, कच्चापाल, ताड़ोकुर, टेकानार, नयापारा, मकसोली, हिकपुला, बांहकेर, झोरीगांव, रेंगाबेड़ा, कोकोड़ी और रायनार सहित कुल 22 गांवों के ग्रामीण लाभान्वित हुए हैं।

छत्तीसगढ़ शासन की यह पहल केवल तेन्दूपत्ता संग्रहण तक सीमित नहीं है, बल्कि दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासी और ग्रामीण परिवारों को स्थानीय रोजगार, बेहतर आय और आर्थिक सशक्तिकरण से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। अबुझमाड़ के ग्रामीणों के लिए यह पहल आत्मनिर्भरता और विकास की नई उम्मीद बनकर उभरी है।

शिवालयों की नगरी आरंग में गूंजेगी भक्ति की तान, भव्य शिवभक्ति गीत की शूटिंग पूरी

No comments Document Thumbnail

​डिजिटल डेस्क, आरंग: "शिवालयों की नगरी" के नाम से सुप्रसिद्ध नगर आरंग अब भक्ति, संगीत और कला के क्षेत्र में अपनी एक नई पहचान बनाने जा रहा है। अंचल के उभरते व सुप्रसिद्ध कलाकारों द्वारा भगवान शिव को समर्पित एक भव्य और अत्यंत मधुर शिवभक्ति गीत का निर्माण किया जा रहा है।

इस भक्ति गीत के बोल "कांशी जैइसे नगरी मोर आरिंग" हैं, जिसे आरंग अंचल के लोकप्रिय लोकगायक गंगा साहू ने कलमबद्ध किया है। इस गीत की परिकल्पना पीपला फाउंडेशन के संयोजक महेन्द्र कुमार पटेल ने की है।

​गीत की प्रमुख विशेषताएँ और टीम वर्क:

​मधुर स्वर: छत्तीसगढ़ के सुप्रसिद्ध गायक विवेक शर्मा और लोकगायक गंगा साहू ने गीत को अपनी सुरीली आवाज दी है।

​संगीत संयोजन: भिलाई के प्रख्यात संगीतकार देवेंद्र साहू ने इस गीत को मनमोहक संगीत से सजाया है।

​फिल्मांकन व कोरियोग्राफी: प्रख्यात कोरियोग्राफर उत्तम साहू की टीम और कैमरामैन वीरू साहू ने गीत के फिल्मांकन में अहम भूमिका निभाई है।

​नगर के सभी शिवालयों के होंगे एक साथ दर्शन

​इस शिवभक्ति गीत की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें आरंग नगर में स्थापित सभी प्रमुख शिवलिंगों और मंदिरों को प्रमुखता से दिखाया जाएगा। हाल ही में सोमवार को पंचमुखी महादेव मंदिर, बाबा बागेश्वर नाथ मंदिर, बस स्टैंड तथा समलेश्वरी मंदिर परिसर सहित नगर के विभिन्न शिवालयों में गीत के दृश्यों को शूट किया गया।

​शूटिंग के दौरान मंदिरों में श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी, जो पूरे दिन कौतूहल और आकर्षण का केंद्र बनी रही।

​स्थानीय लोगों में उत्साह

​आरंग के नागरिकों ने इस सांस्कृतिक व धार्मिक पहल की जमकर सराहना की है। लोगों का कहना है कि इस गीत के माध्यम से न केवल देश-प्रदेश के लोग आरंग के पावन शिवालयों के दर्शन कर सकेंगे, बल्कि इससे आरंग की ऐतिहासिक और धार्मिक पहचान भी और अधिक मजबूत होगी।

सफलता की कहानी -अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना से श्रमिक परिवारों के बच्चों को मिली नई उड़ान

No comments Document Thumbnail

बीजापुर के मेधावी विद्यार्थियों का प्रतिष्ठित विद्यालयों में चयन, बेहतर शिक्षा से साकार हो रहे सपने

रायपुर- आर्थिक रूप से कमजोर श्रमिक परिवारों के बच्चों के लिए अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना वरदान साबित हो रही है। इस योजना के माध्यम से मेधावी विद्यार्थियों को प्रतिष्ठित निजी विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिल रहा है, जिससे उनके उज्ज्वल भविष्य का मार्ग प्रशस्त हो रहा है।

जिला बीजापुर के विभिन्न विकासखंडों के कई प्रतिभाशाली विद्यार्थियों का इस योजना के तहत चयन हुआ है। विकासखंड उसूर के ग्राम बसागुड़ा की छात्रा सान्वी संगम का चयन दिल्ली पब्लिक स्कूल, राजनांदगांव में हुआ है। वहीं विकासखंड भोपालपटनम के ग्राम गुल्लागुड़ा की छात्रा परिधि कावटी, विकासखंड बीजापुर के ग्राम सागमेटा के छात्र देवांश जनगम तथा ग्राम गुल्लागुड़ा की छात्रा निहारिका नीकुरी का चयन हम एकेडमी, जगदलपुर में हुआ है। विकासखंड भैरमगढ़ के ग्राम छोटे गोगला के छात्र आदित्य कोरसा का चयन भी दिल्ली पब्लिक स्कूल, राजनांदगांव में हुआ है।

चयनित विद्यार्थियों के अभिभावकों ने बताया कि वे श्रमिक परिवार से हैं और सीमित आय के कारण बच्चों को अच्छे निजी विद्यालयों में पढ़ाना उनके लिए संभव नहीं था। श्रम विभाग में पंजीयन कराने के बाद उन्हें अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना की जानकारी मिली। उन्होंने आवेदन किया और बच्चों की प्रतिभा के आधार पर उनका चयन हो गया।

अब इन बच्चों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण, आधुनिक सुविधाएँ, अनुभवी शिक्षकों का मार्गदर्शन और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल रही है। इससे बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ा है और वे अपने सपनों को साकार करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

कलेक्टर विश्वदीप ने चयनित विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों से मुलाकात कर बच्चों को मन लगाकर पढ़ाई करने, अपने माता-पिता, समाज और देश का नाम रोशन करने तथा उज्ज्वल भविष्य बनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने अभिभावकों को शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी भी दी और बच्चों के चयन पर शुभकामनाएँ दीं।

अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना केवल शिक्षा उपलब्ध कराने की योजना नहीं है, बल्कि यह श्रमिक परिवारों के बच्चों को समान अवसर देकर उनके सपनों को नई पहचान देने का सशक्त माध्यम बन रही है। यह योजना सामाजिक समावेशन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आत्मनिर्भर समाज के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

सीजीपीएससी ने सूबेदार, उप निरीक्षक संवर्ग एवं प्लाटून कमांडर परीक्षा-2024 के संशोधित अंतिम मॉडल उत्तर किए जारी

No comments Document Thumbnail

रायपुर- छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (सीजीपीएससी) ने गृह (पुलिस) विभाग अंतर्गत सूबेदार, उप निरीक्षक संवर्ग एवं प्लाटून कमांडर परीक्षा-2024 के संशोधित अंतिम मॉडल उत्तर जारी कर दिए हैं। संशोधित मॉडल उत्तर आयोग की आधिकारिक वेबसाइट www.psc.cg.gov.in पर अपलोड कर दिए गए हैं।

उल्लेखनीय है कि उक्त भर्ती परीक्षा के तहत कुल 341 पदों पर भर्ती की जानी है। इसके लिए 12 जुलाई को राज्य के 33 जिलों के 183 परीक्षा केंद्रों में लिखित परीक्षा आयोजित की गई थी। परीक्षा के मॉडल उत्तर 13 जुलाई को जारी कर अभ्यर्थियों से ऑनलाइन दावा-आपत्ति आमंत्रित की गई थी, जिसकी अंतिम तिथि 21 जुलाई 2026 निर्धारित थी।

आयोग ने निर्धारित अवधि में प्राप्त सभी दावा-आपत्तियों का विषय विशेषज्ञ समिति से परीक्षण कराया। विशेषज्ञों की अनुशंसा एवं सक्षम परीक्षण के आधार पर संशोधित अंतिम मॉडल उत्तर तैयार किए गए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि इन्हीं अंतिम मॉडल उत्तरों के आधार पर अभ्यर्थियों की ओएमआर उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन किया जाएगा।

राष्ट्रमंडल खेलों की रजत पदक विजेता ज्ञानेश्वरी यादव का मुख्यमंत्री निवास में भव्य स्वागत

No comments Document Thumbnail

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने की 30 लाख रुपये प्रोत्साहन राशि और आउट ऑफ टर्न डीएसपी पद पर पदोन्नति की घोषणा

ज्ञानेश्वरी की उपलब्धि पूरे छत्तीसगढ़ का गौरव, बेटियों और युवाओं के लिए प्रेरणा : मुख्यमंत्री

रायपुर- ग्लासगो में आयोजित राष्ट्रमंडल खेल 2026 में महिलाओं की 53 किलोग्राम भारोत्तोलन स्पर्धा में रजत पदक जीतकर देश और छत्तीसगढ़ का गौरव बढ़ाने वाली राजनांदगांव की बेटी ज्ञानेश्वरी यादव का आज मुख्यमंत्री निवास में आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन किया गया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने ज्ञानेश्वरी को उनकी ऐतिहासिक उपलब्धि पर बधाई देते हुए उन्हें 30 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि तथा आउट ऑफ टर्न डीएसपी पद पर पदोन्नति देने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सम्मान  प्रदेश की प्रतिभा, परिश्रम और संकल्प का सम्मान है।


मुख्यमंत्री साय ने कहा कि ज्ञानेश्वरी यादव ने अपने पहले ही राष्ट्रमंडल खेलों में रजत पदक जीतकर यह सिद्ध कर दिया है कि दृढ़ इच्छाशक्ति, कठोर परिश्रम और अनुशासन के बल पर कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता। उन्होंने कहा कि महिलाओं की 53 किलोग्राम भारोत्तोलन स्पर्धा में कुल 199 किलोग्राम वजन उठाकर ज्ञानेश्वरी ने न केवल देश के लिए पदक जीता, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ को गौरवान्वित किया है। यह उपलब्धि प्रदेश के खेल इतिहास में स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज होगी।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि ज्ञानेश्वरी ने सीमित संसाधनों और अनेक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने अपने सपनों को कभी कमजोर नहीं पड़ने दिया। कठिन परिस्थितियों में भी निरंतर अभ्यास, अनुशासन और समर्पण के बल पर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच पर सफलता हासिल की है। उनकी सफलता प्रदेश के युवाओं, विशेषकर बेटियों के लिए प्रेरणास्रोत है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदार हो तो कोई भी मंजिल दूर नहीं रहती।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश सरकार को अपनी इस बेटी पर गर्व है। इसी भावना के साथ राज्य सरकार ने उन्हें आउट ऑफ टर्न डीएसपी पद पर पदोन्नति देने का निर्णय लिया है, ताकि उनकी उपलब्धि का सम्मान हो और प्रदेश के अन्य खिलाड़ी भी उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रेरित हों।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्लासगो रवाना होने से पहले उन्हें ज्ञानेश्वरी से मिलने का अवसर मिला था। उस समय उन्होंने उनके उज्ज्वल प्रदर्शन के लिए शुभकामनाएं दी थीं। उल्लेखनीय है कि राष्ट्रमंडल खेलों में रजत पदक जीतने के बाद उन्होंने वीडियो कॉल के माध्यम से भी उन्हें बधाई दी थी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज मुख्यमंत्री निवास में उनका स्वागत करते हुए कहा कि यह पूरे प्रदेश के लिए गर्व और उत्सव का क्षण है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए आधुनिक खेल अधोसंरचना, विश्वस्तरीय प्रशिक्षण, बेहतर कोचिंग, आवश्यक संसाधन और हरसंभव प्रोत्साहन उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। सरकार का उद्देश्य ऐसा वातावरण तैयार करना है, जहां प्रदेश का प्रत्येक प्रतिभाशाली खिलाड़ी अपनी क्षमता के अनुरूप आगे बढ़ सके और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सके।

उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार का प्रयास है कि छत्तीसगढ़ के अधिक से अधिक खिलाड़ी ओलंपिक, राष्ट्रमंडल खेल, एशियाई खेल और अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में तिरंगा लहराएं तथा देश और प्रदेश का नाम विश्वभर में रोशन करें। ज्ञानेश्वरी यादव जैसी खिलाड़ियों की उपलब्धियां इस दिशा में नई पीढ़ी का आत्मविश्वास बढ़ाने का कार्य करेंगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ज्ञानेश्वरी भविष्य में भी अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन से भारत और छत्तीसगढ़ का नाम विश्व मंच पर नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएंगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रतिभाओं को पहचानना, उन्हें अवसर देना और उनकी उपलब्धियों का सम्मान करना सरकार की खेल नीति का महत्वपूर्ण आधार है। यही प्रयास आने वाले समय में छत्तीसगढ़ को खेलों के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में स्थापित करेगा।

सफलता की कहानी-सफर में भटकी बिहार की महिला को मिला नया सहारा

No comments Document Thumbnail

सखी वन स्टॉप सेंटर दंतेवाड़ा ने परिवार से कराया सुरक्षित मिलन

रायपुर- महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित सखी वन स्टॉप सेंटर संकट में फंसी महिलाओं के लिए भरोसेमंद सहारा बनकर सामने आ रहा है। दंतेवाड़ा जिले में इसका एक संवेदनशील उदाहरण देखने को मिला, जहां बिहार की एक महिला को सुरक्षित आश्रय देकर उसके परिवार से मिलाया गया।

बिहार के मुजफ्फरपुर जिले की रहने वाली सविता देवी अपने मायके से ससुराल जाने के लिए मोतीपुर स्टेशन से ट्रेन में सवार हुई थीं। यात्रा के दौरान वह सो गईं और कई स्टेशनों को पार करते हुए छत्तीसगढ़ के किरंदुल (जिला दंतेवाड़ा) पहुंच गईं। वहां से वह पैदल निकल पड़ीं और भटकते-भटकते भांसी तक पहुंच गईं।

स्थानीय लोगों ने उनकी स्थिति देखकर भांसी थाना को सूचना दी। पुलिस ने उन्हें सुरक्षित रूप से सखी वन स्टॉप सेंटर, दंतेवाड़ा में अस्थायी आश्रय दिलाया।

सखी वन स्टॉप सेंटर की टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित सखी वन स्टॉप सेंटर और थाना काटी से संपर्क किया। महिला का नाम, पता और फोटो भेजकर पहचान की प्रक्रिया शुरू की गई। जांच के बाद यह पुष्टि हुई कि महिला मुजफ्फरपुर जिले की ही निवासी हैं।

इसके बाद महिला के परिवार से संपर्क किया गया और उन्हें पूरी जानकारी दी गई। सूचना मिलते ही उनके पति दंतेवाड़ा पहुंचे और सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद महिला को सुरक्षित उनके सुपुर्द कर दिया गया।

महिला के पति ने बताया कि उनकी पत्नी की मानसिक स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं है और वह पिछले करीब डेढ़ महीने से लापता थीं। परिवार ने उन्हें कई स्थानों पर खोजा, लेकिन उनका कोई पता नहीं चल पाया था। दंतेवाड़ा में पत्नी को सुरक्षित देखकर उन्हें बड़ी राहत मिली।

उन्होंने सखी वन स्टॉप सेंटर, दंतेवाड़ा और महिला एवं बाल विकास विभाग का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि समय पर मिली मदद ने उनके परिवार को फिर से एक कर दिया।

यह घटना दर्शाती है कि सखी वन स्टॉप सेंटर केवल आश्रय देने तक सीमित नहीं है, बल्कि संकट में फंसी महिलाओं को सुरक्षा, परामर्श, समन्वय और परिवार से पुनर्मिलन जैसी महत्वपूर्ण सेवाएं भी उपलब्ध कराता है। यह योजना महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान की दिशा में सरकार की संवेदनशील पहल का प्रभावी उदाहरण है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रक्षा मंत्रालय में सैन्य और असैन्य एकीकरण को और मजबूत करने पर दिया जोर

No comments Document Thumbnail

नई दिल्ली- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारतीय सशस्त्र बल जब अधिक संयुक्तता (Jointness) की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, ऐसे समय में रक्षा मंत्रालय के सैन्य एवं असैन्य (सिविल) घटकों के बीच बेहतर समन्वय और गहरा एकीकरण अत्यंत आवश्यक है। इससे बदलती सुरक्षा और तकनीकी चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सकेगा तथा संस्थागत अनुभव, स्थिरता और नियमों के बेहतर अनुपालन को भी सुनिश्चित किया जा सकेगा।

नई दिल्ली में 85वें सशस्त्र बल मुख्यालय (AFHQ) सिविलियन सर्विसेज दिवस समारोह को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि वर्दीधारी और सिविल सेवाएं दोनों ही "राष्ट्र प्रथम" की भावना से कार्य करती हैं। जब लक्ष्य एक होता है, तो व्यवस्था का प्रत्येक अंग राष्ट्रीय शक्ति में परिवर्तित हो जाता है।

उन्होंने कहा कि सैन्य और प्रशासनिक एकीकरण अलग-अलग रास्तों पर नहीं चल सकते। जैसे-जैसे संयुक्त और एकीकृत संरचनाएं विकसित होंगी, नीति निर्माण, प्रशासन, मानव संसाधन प्रबंधन, वित्तीय प्रक्रियाओं, लॉजिस्टिक्स तथा संस्थागत ज्ञान जैसे क्षेत्रों में निरंतरता और विशेषज्ञता की आवश्यकता और बढ़ेगी।

रक्षा मंत्री ने सैन्य और सिविल अधिकारियों के बीच संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रमों तथा क्रॉस-एक्सपोजर को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सैन्य अधिकारी युद्ध संचालन और कमान का अनुभव लेकर आते हैं, जबकि सिविल अधिकारी प्रशासनिक निरंतरता, नीतिगत अनुभव, सरकारी प्रक्रियाओं की समझ और संस्थागत स्मृति प्रदान करते हैं। इन दोनों की संयुक्त क्षमता निर्णय प्रक्रिया को अधिक संतुलित, प्रभावी और सशक्त बनाती है।

साइबर युद्ध और रक्षा अनुसंधान पर विशेष जोर

राजनाथ सिंह ने साइबर युद्ध (Cyber Warfare) का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि AFHQ सिविलियन सर्विसेज के अधिकारी अपनी विशेषज्ञता का उपयोग कर रक्षा क्षेत्र के लिए विशेष साइबर उपकरण विकसित करें, तो यह सशस्त्र बलों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा।

उन्होंने भारतीय सैन्य इतिहास के अध्ययन के लिए एक विशेष मंच विकसित करने का भी सुझाव दिया, जहां सिविल दृष्टिकोण से अध्ययन कर नए विचार और रणनीतिक सोच विकसित की जा सके। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि AFHQ सिविलियन सर्विसेज अपनी विशेषज्ञता के माध्यम से रक्षा क्षेत्र में और अधिक सार्थक योगदान दे सकती है।

"रक्षा प्रबंधन का रणनीतिक मस्तिष्क बने AFHQ"

रक्षा मंत्री ने AFHQ सिविलियन सर्विसेज से आह्वान किया कि वह भारत की रक्षा प्रबंधन व्यवस्था का "रणनीतिक मस्तिष्क (Strategic Brain)" बने। इसके लिए रक्षा क्षेत्र की व्यापक समझ विकसित करनी होगी, संयुक्त वातावरण में प्रभावी ढंग से कार्य करना होगा तथा उभरती चुनौतियों के अनुरूप अपनी विशेषज्ञता को निरंतर बढ़ाना होगा।

उन्होंने कहा कि आधुनिक युद्ध तकनीकी नवाचारों पर आधारित है, इसलिए अब केवल सेवा नियमों और आदेशों के पालन तक सीमित रहने के बजाय रक्षा क्षेत्र में अनुसंधान, भू-रणनीतिक सोच और नवाचार पर भी विशेष ध्यान देना आवश्यक है।

उन्होंने कहा, "किसी भी सेना की शक्ति केवल उसके हथियारों और गोला-बारूद से नहीं, बल्कि उन हजारों अदृश्य हाथों से भी आती है जो हर समय उसके साथ खड़े रहते हैं। AFHQ सिविलियन सर्विसेज भी ऐसी ही एक महत्वपूर्ण और निर्णायक शक्ति है।"

कई डिजिटल पहल की शुरुआत

समारोह के दौरान रक्षा मंत्री ने संयुक्त सचिव एवं मुख्य प्रशासनिक अधिकारी (JS & CAO) कार्यालय की कई डिजिटल पहलों तथा संशोधित विजन एवं मिशन स्टेटमेंट का शुभारंभ किया। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—

  • इंटरनेट आधारित आवास प्रबंधन प्रणाली (IBAMS) पोर्टल।

  • eHRMS का TULIP 2.0 प्रणाली से एकीकरण।

  • वेतन एवं भत्तों के ऑनलाइन प्रसंस्करण हेतु CAO कार्यालय का TULIP 2.0 से एकीकरण।

  • स्मार्ट परफॉर्मेंस अप्रेजल रिपोर्ट रिकॉर्डिंग ऑनलाइन विंडो (SPARROW) पोर्टल पर ऑनबोर्डिंग।

इस अवसर पर रक्षा मंत्री ने 'संवाद' पत्रिका के 34वें अंक का भी विमोचन किया, जिसमें सेवा मुख्यालयों एवं अंतर-सेवा संगठनों में कार्यरत कर्मचारियों द्वारा लिखे गए यात्रा-वृत्तांत, निबंध, लेख और कविताएं प्रकाशित की गई हैं।

उन्होंने खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले AFHQ कर्मियों तथा शैक्षणिक उपलब्धियां हासिल करने वाले कर्मचारियों के बच्चों को सम्मानित भी किया।

कार्यक्रम में रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एन. एस. राजा सुब्रमणि, नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन, थल सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह सहित रक्षा मंत्रालय के अनेक वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

AFHQ दिवस का महत्व

हर वर्ष 1 अगस्त को AFHQ दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य रक्षा मंत्रालय के तीनों एकीकृत सेवा मुख्यालयों, मुख्यालय इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ तथा 24 अंतर-सेवा संगठनों में कार्यरत उन असैन्य कर्मचारियों के योगदान को सम्मान देना है, जो सशस्त्र बलों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर देश की रक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। AFHQ कैडर की स्थापना 1 अगस्त 1942 को की गई थी।


मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने धरसींवा विधानसभा को दी निःशुल्क एम्बुलेंस की सौगात

No comments Document Thumbnail

डीएमएफ से 19.65 लाख रुपये की लागत से उपलब्ध कराई गई आधुनिक एम्बुलेंस, आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगी नई मजबूती

हर जीवन अनमोल, समय पर उपचार सुनिश्चित करने के लिए सरकार निरंतर प्रयासरत : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास से धरसींवा विधानसभा क्षेत्र की जनता को निःशुल्क एम्बुलेंस की सौगात दी। मुख्यमंत्री ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर एम्बुलेंस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया तथा विधायक अनुज शर्मा और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की उपस्थिति में एम्बुलेंस के चालक को चाबी सौंपी। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य प्रदेश के प्रत्येक नागरिक तक समय पर, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना है। इसी सोच के अनुरूप प्रदेश में स्वास्थ्य अधोसंरचना को लगातार सुदृढ़ किया जा रहा है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में लोगों को त्वरित चिकित्सा सहायता उपलब्ध हो सके।


मुख्यमंत्री साय ने धरसींवा विधानसभा क्षेत्र के नागरिकों को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि किसी भी मरीज के लिए उपचार के शुरुआती क्षण अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। समय पर अस्पताल पहुंचने से अनेक गंभीर परिस्थितियों में जीवन बचाया जा सकता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह नई एम्बुलेंस गर्भवती महिलाओं, गंभीर रूप से बीमार मरीजों, बुजुर्गों तथा सड़क दुर्घटनाओं या अन्य आकस्मिक घटनाओं में घायल लोगों को शीघ्र स्वास्थ्य संस्थानों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा कि यह सुविधा न केवल चिकित्सा सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाएगी, बल्कि क्षेत्रवासियों में स्वास्थ्य सुरक्षा का विश्वास भी मजबूत करेगी।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश सरकार ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए निरंतर कार्य कर रही है। अस्पतालों के उन्नयन, आधुनिक चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता, विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति, दवाइयों की सुगम उपलब्धता और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने की दिशा में अनेक महत्वपूर्ण पहल की जा रही हैं। उनका कहना था कि स्वस्थ नागरिक ही समृद्ध समाज और विकसित राज्य की आधारशिला होते हैं, इसलिए जनस्वास्थ्य से जुड़े प्रत्येक प्रयास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।

इस अवसर पर धरसींवा विधानसभा के विधायक अनुज शर्मा ने कहा कि क्षेत्रवासियों की लंबे समय से एक आधुनिक एम्बुलेंस की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए जिला खनिज न्यास निधि (डीएमएफ) के माध्यम से लगभग 19 लाख 65 हजार रुपये की लागत से यह अत्याधुनिक एम्बुलेंस उपलब्ध कराई गई है। उन्होंने कहा कि इस सुविधा के शुरू होने से धरसींवा क्षेत्र के लोगों को आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं पहले की तुलना में अधिक तेज़ और प्रभावी ढंग से मिल सकेंगी।

उन्होंने बताया कि यह एम्बुलेंस सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, धरसींवा को सौंपी गई है, जहां से इसका संचालन किया जाएगा। यह सेवा चौबीसों घंटे क्षेत्रवासियों को उपलब्ध रहेगी। उन्होंने कहा कि गंभीर मरीजों को रेफरल अस्पतालों तक सुरक्षित एवं समयबद्ध पहुंचाने में भी यह एम्बुलेंस अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी।


उल्लेखनीय है कि धरसींवा विधानसभा क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है। डीएमएफ के माध्यम से उपलब्ध कराई गई यह निःशुल्क एम्बुलेंस क्षेत्र के हजारों नागरिकों को आपातकालीन चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के साथ-साथ स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और गुणवत्ता को भी नई मजबूती प्रदान करेगी।

​छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता में सुधार: सुशासन, डिजिटलीकरण और जन-राहत का नया सवेरा

No comments Document Thumbnail

 विष्णु प्रसाद वर्मा ( सहायक संचालक)

​रायपुर : राजस्व प्रक्रियाओं का डिजिटलीकरण एक ऐसी व्यवस्था है जिसके माध्यम से भूमि रिकॉर्ड, नामांतरण और रजिस्ट्री जैसे कार्य ऑनलाइन और पारदर्शी बनाए गए हैं। इसके मुख्य लाभों में ऑटो म्यूटेशन, मोबाइल ऐप से रिकॉर्ड डाउनलोड और डिजिटल भुगतान शामिल हैं।


​ आम जनता के लिए राजस्व विभाग से जुड़े काम हमेशा से पेचीदा और समय लेने वाले माने जाते रहे हैं। जमीन के नामांतरण से लेकर कोर्ट के चक्कर काटने और नामांतरण-सीमांकन में होने वाली देरी से आम नागरिक अक्सर परेशान रहता था। इसी प्रशासनिक जटिलता को समाप्त कर प्रक्रिया को पारदर्शी, सुलभ और जन-अनुकूल बनाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता, 1959 में कई युगांतरकारी और जनोन्मुख संशोधन किए हैं। यह सुधार न केवल आधुनिक दौर की डिजिटल जरूरतों को पूरा करते हैं, बल्कि राज्य में सुशासन की नींव को और अधिक मजबूत करते हैं।

​इन संशोधनों की सबसे बड़ी खासियत राजस्व प्रक्रियाओं का डिजिटलीकरण है। अब धारा 33 के तहत नोटिस और आधिकारिक सूचना प्रेषित करने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को कानूनी मान्यता दे दी गई है। इसके साथ ही, धारा 30 में संशोधन करते हुए राजस्व न्यायालयों की कार्यप्रणाली को तेज और पारदर्शी बनाने के लिए अभिलेखों, प्रकरणों और फाइलों के डिजिटल प्रेषण को अनिवार्य किया गया है। इतना ही नहीं, भूमि सीमांकन और नक्शों से जुड़ी विवादित स्थितियों से निपटने के लिए धारा 107 के तहत अधिसूचित जिओ-रेफ्रेंस्ड (Geo-Referenced) नक्शों को अधिमान्यता दी गई है, जिससे जमीन से जुड़े सटीक आंकड़े और सीमांकन पारदर्शी तरीके से उपलब्ध हो सकेंगे।

जमीनों के अनावश्यक विखंडन और भू-अर्जन के दौरान होने वाले फर्जीवाड़े पर लगाम कसने के लिए भी कड़े कदम उठाए गए हैं। धारा 70 में किए गए संशोधन के अनुसार अब 05 डिसमिल से कम कृषि भूमि के बंटवारे पर रोक लगा दी गई है, ताकि कृषि जोत का आकार व्यावहारिक बना रहे। वहीं धारा 165, 172 और 178 में बदलाव कर यह सुनिश्चित किया गया है कि भू-अर्जन (Land Acquisition) की प्रक्रिया के लिए अधिसूचना या आशय पत्र जारी होते ही संबंधित भूमि के अंतरण, व्यपवर्तन (Divergent) और खाता विभाजन पर तुरंत रोक लग जाए, जिससे किसी भी तरह के अवैध लाभ या धोखाधड़ी की गुंजाइश न रहे।

​ आम जनता को सबसे बड़ी राहत जमीन के नामांतरण (Mutation) और पारिवारिक उत्तराधिकार के नियमों में मिली है। धारा 110 में किए गए क्रांतिकारी संशोधनों के तहत अब 'स्वतः नामांतरण' (Auto e-Mutation) की व्यवस्था की गई है, जिसके अंतर्गत पंजीयन (रजिस्ट्री) विभाग को ही नामांतरण का वैधानिक अधिकार दे दिया गया है। यानी अब रजिस्ट्री के साथ ही नामांतरण की प्रक्रिया भी सुगम हो जाएगी। इसके अलावा, राजस्व अभिलेखों में सूचीबद्ध विधिक वारिसानों के पक्ष में स्वतः ई-नामांतरण का प्रावधान किया गया है। अब भूमि स्वामी को यह अधिकार भी मिल गया है कि वह अपने जीवनकाल में ही अपने कानूनी वारिसों के नाम राजस्व अभिलेखों में सूचीबद्ध करा सके, जिससे भावी पीढ़ी को पारिवारिक विवादों और कोर्ट-कचहरी के चक्करों से हमेशा के लिए मुक्ति मिल सकेगी।

​ संक्षेप में कहें तो, छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता, 1959 में किए गए ये संशोधन केवल नियमों का बदलाव भर नहीं हैं, बल्कि यह आम जनता के समय, धन और मानसिक तनाव को बचाते हुए एक पारदर्शी, तकनीक-संचालित और जन-हितैषी राजस्व व्यवस्था की स्थापना की दिशा में राज्य सरकार का एक मील का पत्थर है।

महासमुंद बाल संप्रेक्षण गृह से खिड़की की ग्रिल तोड़कर 8 अपचारी बालक फरार

No comments Document Thumbnail

 महासमुंद। जिले के बरोंडा बाजार स्थित बाल संप्रेक्षण गृह में सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलते हुए सोमवार तड़के 8 अपचारी बालक खिड़की की ग्रिल तोड़कर फरार हो गए। घटना रात करीब 2 से 3 बजे के बीच की बताई जा रही है। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया।


विभिन्न गंभीर मामलों में थे निरुद्ध

जानकारी के अनुसार, फरार हुए आठों नाबालिग पिछले 4-5 महीनों से विभिन्न आपराधिक प्रकरणों के तहत संप्रेक्षण गृह में रखे गए थे। इनमें से एक पर दुष्कर्म, दो पर चोरी तथा अन्य के खिलाफ एनडीपीएस (NDPS) एक्ट समेत अन्य धाराएं दर्ज हैं। ये नाबालिग महासमुंद, सरायपाली, धमतरी और पड़ोसी राज्य ओडिशा के विभिन्न थाना क्षेत्रों के निवासी हैं।

अधिकारी पहुंचे मौके पर, सर्च ऑपरेशन जारी

घटना की सूचना मिलते ही कोतवाली पुलिस, महिला एवं बाल विकास विभाग और जिला प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने घटनास्थल का मुआयना कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस की विशेष टीमें संभावित ठिकानों और आसपास के इलाकों में नाकाबंदी कर फरार बालकों की तलाश में जुटी हुई हैं।

सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल, दो साल पहले भी हुई थी ऐसी घटना

इस घटना ने संप्रेक्षण गृह की सुरक्षा और निगरानी प्रणाली पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उल्लेखनीय है कि लगभग दो वर्ष पूर्व भी इसी संप्रेक्षण गृह से बच्चों के भागने का मामला सामने आया था। फिलहाल पुलिस और प्रशासन इस बात की जांच कर रहे हैं कि सुरक्षा में चूक किस स्तर पर हुई और बालकों ने ग्रिल काटने के लिए किस साधन का उपयोग किया।

Don't Miss
© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.