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बिजली महोत्सव शुरू, पीएम मोदी 30 को वीसी से जुड़ेंगे

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रायपुर। आजादी के अमृत महोत्सव के तहत उज्ज्वल भारत उज्ज्वल भविष्य ऊर्जा 2047 - बिजली महोत्सवकी कल प्रदेश के तीन जिलों - धमतरी, गरियाबंद और बलरामपुर से शुरूआत हुई। आगामी तीस जुलाई तक हर जिले की दो जगहों पर बिजली महोत्सव का आयोजन किया जाएगा, जिसमें बिजली से आम लोगों के जीवन में आए बदलाव को रेखांकित करने पर जोर दिया जाएगा। आज सुकमा और सुरजपुर जिले में आयोजित बिजली महोत्सव में लोगों को बिजली के क्षेत्र में किये गये कार्यों और उपलब्धियों की जानकारी दी गई। 



महोत्सव के दौरान छत्तीसगढ़ शासन की योजनाओं के अलावा केंद्र सरकार की सौभाग्य योजना, दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना, कुसुम योजना और उपभोक्ताओं के अधिकार सहित अन्य योजनाओं के बारे में लोगों को जानकारी दी जा रही है। रायपुर जिले में यह महोत्सव सत्ताईस जुलाई को इंजीनियरिंग कॉलेज, सेजबहार और अट्ठाईस जुलाई को मंगलभवन धरसींवा में मनाया जाएगा। महोत्सव में नुक्कड़ नाटक, फिल्मों की स्क्रीनिंग, प्रदर्शनी जैसे विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। 

इसके अलावा सरकार की विभिन्न योजनाओं के लाभार्थी भी इसमें शामिल होंगे। महोत्सव में छत्तीसगढ़ स्टेट पावर कंपनी सहित केंद्रीय विद्युत उपक्रम आरईसी लिमिटेड, एनटीपीसी और अन्य उपक्रम संयुक्त रूप से शामिल हो रहे हैं। इसमें जिला प्रशासन भी सक्रिय भागीदारी निभा रहा है। तीस जुलाई को बिजली महोत्सव के समापन कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देश के सौ जिलों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सीधे जुड़ेंगे। इसमें छत्तीसगढ़ के पांच जिलों - रायपुर, बिलासपुर, अंबिकापुर, जगदलपुर और धमतरी को शामिल किया गया है।

महंगाई का सितम: छत्तीसगढ़ में अप्रैल महीने से बढ़ सकता है बिजली का बिल

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छत्तीसगढ़ में अप्रैल महीने से बिजली का बिल बढ़ सकता है। ऐसे में बिजली उपभोक्ताओं को अगले वित्तीय वर्ष यानी अप्रैल 2022 से महंगाई का झटका लग सकता है। राज्य की विद्युत कंपनियों ने मूल्य बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है। छत्तीसगढ़ विद्युत वितरण कंपनी ही 745 करोड़ रुपए का घाटा रिकवर करना चाहती है। राज्य विद्युत नियामक आयोग ने अगर उनके प्रस्ताव को मंजूरी दी तो बिजली के दाम बढ़ सकते हैं। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग को दी गई याचिकाओं में कंपनियों ने नए पूंजी निवेश, व्यय और आय का पूरा लेखा-जोखा दिया है। 

जानकारी के मुताबिक चालू सत्र में कंपनी ने 3 हजार 642 करोड़ रुपए लाभ का अनुमान लगाया है, लेकिन बीते वित्तीय सालों में हुए 4 हजार 388 करोड़ रुपए के नुकसान की भरपाई कंपनी करना चाहती है। ये घाटा पाटने के लिए कंपनी को 745 करोड़ के अतिरिक्त राजस्व की जरूरत होगी। कंपनियों ने नए पूंजी निवेश का प्रस्ताव भी दिया है। याचिका में कहा गया है कि विद्युत उत्पादन, संधारण और वितरण कंपनियों में सिस्टम को अपग्रेड करने से संबंधी कई परियोजनाओं पर काम होना है। उसके लिए अतिरिक्त पूंजी की जरूरत होगी। 

उपभोक्ताओं की जेब पर असर 

ऐसे में हो सकता है कि कंपनी के लाभांश का अधिकांश हिस्सा इन योजनाओं में खप जाए। ऐसे में बिजली के सामान्य खर्च का भार उपभोक्ताओं पर ही आएगा। कंपनी के अधिकारियों का कहना है, उनको उम्मीद है कि विद्युत नियामक आयोग उनकी मांगों को स्वीकार कर टैरिफ में बदलाव को तैयार होगा। अगर ऐसा होता है तो प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं की जेब पर ही इसका असर होगा।

संगठन आयोग की जनसुनवाई

छत्तीसगढ़ प्रगतिशील किसान संगठन का कहना है कि कंपनी का टेरिफ बढ़ाने का प्रस्ताव बेतुका है। अगर कंपनी को चालू वित्तीय वर्ष में फायदा हुआ है तो टेरिफ क्यों बढ़ाया जाना चाहिए। कंपनी जिस 745 करोड़ की रिकवरी के लिए ऐसा करने की अनुमति मांग रही है, वह तो उसी टेरिफ पर सामान्य तौर पर ही पाटा जा सकता है। संगठन  के राजकुमार गुप्त जैसे कई उपभोक्ता और संगठन आयोग की जनसुनवाई में अपनी बात रखने की तैयारी में हैं।

बीते साल अगस्त में बढ़े थे दाम

विद्युत नियामक आयोग ने एक अगस्त 2021 को बिजली दाम बढ़ाया था। बिजली की औसत दर 6. 41 रु प्रति यूनिट निर्धारित किया गया। उससे पहले के 2 सालों में ये दर 5.93 रुपया प्रति यूनिट थी। नई दर बीते साल की तुलना में 8 पैसे प्रति यूनिट ज्यादा थी। किसानों को खेतों में लगे विद्युत पंपों और खेतों की रखवाली के लिए लिए पंप के समीप 100 वॉट के भार उपयोग की सुविधा दी गई थी। किसानों के व्यापक हित को ध्यान में रखते हुए आयोग ने 100 वॉट तक लाइट और पंखे की स्वीकृति जारी रखी गई। वहीं गैर सब्सिडी वाले कृषि विद्युत पंप वाले उपभोक्ताओं को ऊर्जा प्रभार वर्तमान में प्रभावशील 10 प्रतिशत की छूट को बढ़ाकर 20 प्रतिशत कर दिया गया।

24 और 25 फरवरी को आयोग में जनसुनवाई

बता दें कि छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग 24 और 25 फरवरी को शांति नगर स्थित आयोग के कार्यालय में जनसुनवाई करेगा। आयोग के सचिव के मुताबिक 24 फरवरी को सुबह 11 बजे से 1.30 बजे तक कृषि और संबद्ध सेवाओं के उपभोक्ताओं की सुनवाई होगी। 2.30 बजे से 3.30 बजे गैर घरेलू उपभोक्ता और 3.30 से 5.30 बजे तक घरेलू उपभोक्ता अपनी आपत्ति जता सकेंगे। 25 फरवरी को 11 बजे से 1.30 बजे तक सभी उच्च दाब उपभोक्ता, दोपहर 2.30 से 4.30 बजे तक निम्न दाब उपभोक्ता और 4.30 से 5.30 बजे तक स्थानीय निकाय, नगर निगम और ट्रेड यूनियन जैसे संगठन अपनी आपत्ति रख पाएंगे। इन सब के बीच अगर बिजली का बील बढ़ता है तो इसका सीधा असर आम आदमी के बजट पर पड़ेगा।

छत्तीसगढ़ में बिजली की दरों में बढ़ोतरी के साथ कुछ बदलाव, एक क्लिक में जानिए किसे होगा फायदा और किसे लगेगा झटका

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छत्तीसगढ़ विद्युत नियामक आयोग ने बिजली बिल की दरों में बढ़ोतरी का ऐलान किया है। 3 साल के बाद छत्तीसगढ़ में बिजली की कीमत बढ़ी है। विद्युत नियामक आयोग ने नए टैरिफ का ऐलान किया है। नए टैरिफ के मुताबिक अब बिजली दरों में औसत 6 प्रतिशत की वृद्धि की गई। नई दरें एक अगस्त से लागू मानी जाएगी। बता दें कि बिजली वितरण कंपनी के प्रस्ताव पर जुलाई महीने में नियामक आयोग ने जनसुनवाई की थी, जिसके बाद ये बढ़ोतरी तय माना जा रहा था।


बिजली क्षेत्र के विशेषज्ञों के मुताबिक अभी दर नहीं बढ़ी, तो आने वाले दिनों बिजली कंपनी को दिवालिया होने से नहीं रोका जा सकेगा। नियामक आयोग के पूर्व सचिव पीएन सिंह के मुताबिक बिजली की लागत लगभग 5.90 रुपए प्रति यूनिट पड़ रही है। जानकारी के मुताबिक औसत 48 पैसे प्रति युनिट बिजली की कीमत बढ़ी है। वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए आयोग ने औसत दर 6. 41 निर्धारित की है। बीते साल ये दर 5. 93 प्रति यूनिट थी, जो पिछले साल की तुलना में 48 पैसे प्रति यूनिट ज्यादा है।

घाटे में चल रही कंपनी: विशेषज्ञ

विशेषज्ञों का कहना है कि वितरण कंपनी घाटे में चल रहा है।  इसलिए दरों में बढ़ोतरी किया गया है। बता दें कि नियामक आयोग को भेजे गए प्रस्ताव में वितरण कंपनी को लगभग 4000 करोड़ रुपए के घाटा होना बताया है। चेयरमैन हेमंत शर्मा के मुताबिक राजस्व में लगातार कमी की वजह से ये बढ़ोत्तरी की जानी जरूरी थी। पिछले साल भी इसमें बढ़ोत्तरी किया जाना था, लेकिन नहीं किया जा सका। बिजली नियामक आयोग ने कहा है कि घरेलू उपभोक्ताओं से फिक्सड चार्ज लिया जायेगा। बिजली नियामक आयोग ने निर्देश दिया है कि अब 5000 रूपये से ज्यादा बिजली बिल का भुगतान आनलाइन किया जायेगा। गैर सब्सिडी वाले कृषि पंप को उर्जा प्रभार में 10 प्रतिशत की छूट को 20 प्रतिशत किया गया है।

किसानों को राहत

आयोग के चेयरमैन हेमंत वर्मा ने बताया कि किसानों को खेतों में लगे विद्युत पम्पों और खेतों की रखवाली के लिए पम्प कनेक्शन के अंतर्गत वर्तमान में पम्प के समीप 100 वॉट के भार उपयोग की सुविधा प्रभावशील है। किसानों के व्यापक हित को ध्यान में रखते हुए आयोग ने 100 वॉट तक लाइट और पंखे की स्वीकृति जारी रखी है। वहीं गैर सब्सिडी वाले कृषि विद्युत पंप वाले उपभोक्ताओं को ऊर्जा प्रभार वर्तमान में प्रभावशील 10 प्रतिशत की छूट को बढ़ाकर 20 प्रतिशत किया गया है।

चेयरमैन हेमंत वर्मा ने दी जानकारी

चेयरमैन हेमंत वर्मा ने कहा कि पिछले तीन सालों से कोई वृद्धि नहीं हुई थी। 2018-19 में राजस्व प्राप्ति अनुमान से अधिक था। इसलिये वृद्धि नहीं हुई थी। इसके बाद राजस्व प्राप्ति में कमी आई थी। पिछले साल कमी की भरपाई के लिए औसत तीन फीसदी की बढ़ोतरी की जानी थी, लेकिन कोरोना की वजह से नहीं की जा सकी थी। उन्होंने कहा कि देश में अब महामारी सामान्य हो रही है। सभी वर्गों में थोड़ी वृद्धि की गई है, जिसका औसत 6 फीसदी है। हेमंत वर्मा ने कहा कि घरेलू दरों में मामूली वृद्धि के साथ टैरिफ का पुनर्संरचना की गई है. ग्रामीण क्षेत्रों के गौठानों को भी घरेलू दरों की सीमा में रखा गया है। पांच हजार से ज्यादा बिल का भुगतान ऑनलाइन किए जाने पर छूट दिया जाएगा। इससे ज्यादा बिल आने पर भुगतान ऑनलाइन करना अनिवार्य किया गया है।

इन्हें मिली 7 फीसदी छूट 

उद्योगों को प्रोत्साहन देने के लिये पॉवर आफ आवर्स को प्रतिमाह 30 घंटे के स्थान पर 36 घंटा निर्धरित किया गया। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों, बस्तर और दक्षिण क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण, सरगुजा और उत्तर क्षेत्र विकास प्राधिकरण में संचालित हॉस्पिटल, नर्सिंग होम में प्रचलित विद्युत दरों के ऊर्जा प्रभार में छूट को 5 फीसदी से बढ़ाकर 7 फीसदी की गई।

बिजली की दरों में बदलाव



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