Media24Media.com: हसदेव अरण्य

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CG NEWS : हसदेव बचाओ आंदोलन’ के संयोजक अलोक शुक्ला को ग्रीन नोबल अवार्ड

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 रायपुर : छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन के संयोजक आलोक शुक्ला को, इस साल का 'ग्रीन नोबल' कहा जाने वाला प्रतिष्ठित गोल्डमैन अवार्ड दिया जाएगा. इसकी घोषणा आज अमरीका में की गई. 


गोल्डमैन अवार्ड दुनिया में पर्यावरण संरक्षण का काम करने वालों को दिया जाता है. इस साल एशिया से आलोक शुक्ला का चयन किया गया है. हसदेव अरण्य में पिछले एक दशक से आदिवासियों के साथ कंधा से कंधा मिला कर संघर्ष कर रहे आलोक शुक्ला और उनके साथियों के प्रतिरोध के कारण राज्य सरकार को लेमरु एलिफेंट रिजर्व घोषित करना पड़ा, जिसके कारण जंगल का एक बड़ा इलाका संरक्षित हो पाया. इसी तरह हसदेव के आंदोलन के कारण अभी तक केवल एक कोयला खदान परसा ईस्ट केते बासन ही हसदेव में शुरु हो पाया है.

हसदेव के आंदोलन के कारण दुनिया भर में पर्यावरण प्रेमियों ने हसदेव अरण्य के जंगलों को बचाने की अपील की है, जिसके कारण राज्य और केंद्र की सरकार, नए खदानों को मंजूरी देने से बचती रही हैं. हसदेव में लगातार चल रहे संघर्ष के कारण मध्य भारत का फेफड़ा कहा जाने वाला हसदेव अब तक सुरक्षित है। 


Chhattisgarh : हसदेव बचाने कांग्रेस ने बनाई कमेटी, समिति के अध्यक्ष है टेकाम

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Chhattisgarh :  छत्तीसगढ़ में हसदेव अरण्य में पेड़ों की कटाई का मामला सियासी रंग ले चूका है। कोयला खदान के लिए पेड़ों की कटाई पर कांग्रेस भाजपा सरकार पर तीखे तेवर दिखा रही है। कांग्रेस ने हसदेव में पेड़ों की कटाई मामले में 8 सदस्यीय जांच समिति बनाई है।


समिति की अध्यक्षता पूर्व मंत्री डॉ. प्रेम साय सिंह टेकाम कर रहे है। जानकारी के मुताबिक ये समिति प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करेगी। इसके आलावा वहां के स्थानीय लोगों से हर पहलुओं पर चर्चा कर एक रिपोर्ट तैयार करेगी, जिसे पीसीसी चीफ को सौंपा जाएगा।


कांग्रेस की इस जांच कमेटी में सूबे के पूर्व उपमुख्यमंत्री और सरगुजा के दिग्गज नेता टीएस सिंहदेव, पूर्व मंत्री अमरजीत भगत, पूर्व विधायक डॉ. प्रीतम राम, गुलाब कमरो के साथ ही कांग्रेस नेता शफी अहमद, राकेश गुप्ता और भगवती राजवाड़े शामिल है।

यह कमेटी प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करेगी और पीसीसी द्वारा तय तमाम बिंदुओं पर जांच कर अध्यक्ष दीपक बैज को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस इस मामलें में लंबी लड़ाई की तैयारी कर रही है। इसे सड़क से सदन तक पार्टी के आला नेता ले जाने की तैयारी में है।

छत्तीसगढ़ में राकेश टिकैत ने किसानों के साथ भरी हुंकार, हसदेव का अब एक पेड़ नही कटेगा

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सरगुजा। हसदेव में 22 मार्च, 2022 से हसदेव अरण्य बचाने के लिए अनिश्चितकालीन धरना चल रहा है। क्षेत्र के किसान और आदिवासी जल-जंगल, जमीन, आजीविका, पर्यावरण और आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए पिछले एक दशक से आंदोलनरत हैं। लेकिन प्रशासन और लकड़ी के ठेकेदारों की मिलीभगत से जंगल के जंगल साफ होते जा रहे हैं। अब ग्रमीणों ने खुद मोर्चा संभाल लिया है और जंगल से एक भी पेड़ कटने नहीं देंगे।


पिछले एक साल से चल रहे आंदोलन की गूंज अब हसदेव की परिधि से बाहर निकल कर दूर तक सुनाई दे रही है। हसदेव अरण्य के आदिवासी-किसानों के आंदोलन को समर्थन देने देश भर से लोग पहुंच रहे हैं। इसी कड़ी में भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत धरना स्थल हरिहरपुर जिला सरगुजा पहुंचे। धरनास्थल पर हजारों की संख्या में ग्रामीण- आदिवासी मौजूद थे।

आंदोलनरत ग्रामीणों के साथ चर्चा के उपरांत राकेश टिकैत ने कहा कि जल-जंगल- जमीन आदिवासियों का है, इसे आपसे छीना नहीं जा सकता। जैसे पेड़ को बढ़ने में समय लगता है वैसे ही बचाने में भी लगता है। अब हसदेव का पेड़ नहीं कटेगा, आंदोलन और ज्यादा तेज होगा।

उन्होंने कहा कि सरकारें कॉर्पोरेट की सुनती हैं इसीलिए आंदोलन करना पड़ता है। इस मामले में हम सरकार से भी बात करेंगे कि हसदेव में कोई भी नई खदान नहीं खुलनी चाहिए।

ज्ञात हो कि हसदेव अरण्य के सरगुजा जिले में परसा, परसा ईस्ट, केते बासेन और केते एक्सटेंशन कोल ब्लॉक एवं कोरबा जिले में मदनपुर साउथ एवं पतुरिया गिदमुड़ी कोल ब्लॉक में ग्रामसभाओं को दरकिनार करके भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया राज्य और केंद्र सरकार ने शुरू की थी। इसके साथ ही परसा कोल ब्लॉक में फर्जी ग्रामसभा प्रस्ताव बनाकर खनन कंपनी के द्वारा वन स्वीकृति हासिल की गई थी।

इसके खिलाफ हसदेव के आदिवासियों ने पिछले वर्ष 4 अक्टूबर से 14 अक्तूबर तक 300 किलोमीटर पदयात्रा करके रायपुर में राज्यपाल और मुख्यमंत्री से मुलाकात की थी लेकिन न तो फर्जी ग्रामसभा की जांच हुई और न ही खदान निरस्त करने की कोई कार्रवाई।

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने स्वयं 2015 में हसदेव में चौपाल लगाकर न सिर्फ आंदोलन का समर्थन किया था बल्कि उन्होंने कहा था कि “कांग्रेस ऐसा विकास नहीं चाहती जिसमे आदिवासियों से उनके जल-जंगल-जमीन को छीना जाए।” पिछले वर्ष कैंब्रिज में भी राहुल गांधी ने हसदेव के आंदोलन को जायज बताकर उसके शीघ्र निराकरण की बात कही थी।

छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन के संयोजक आलोक शुक्ला ने कहा कि आज कांग्रेस, मोदी-अडानी के भ्रष्टाचार पर संसद से लेकर सड़क की लड़ाई लड़ रही है जिसका स्वागत है। लेकिन कांग्रेस की राज्य सरकारों द्वारा अडानी समूह को पहुंचाए जा रहे हजारों करोड़ के मुनाफे पर मौन क्यों हैं? क्या देश में दो अडानी हैं एक अच्छा और एक बुरा?


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