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युक्तिकरण नीति से सुधर रही शिक्षा व्यवस्था : मुख्यमंत्री के नेतृत्व में स्कूलों में लौटी रौनक, हर विद्यालय में शिक्षक की उपलब्धता सुनिश्चित

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा को मजबूत बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में लागू युक्तिकरण नीति अब सार्थक परिणाम दे रही है। जिलेभर के स्कूलों में शिक्षक व्यवस्था सुदृढ़ होने से न केवल शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार हुआ है, बल्कि छात्रों की उपस्थिति में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है।

शिक्षकविहीन और एकल शिक्षक के भरोसे संचालित स्कूलों में अब नियमित शिक्षण व्यवस्था प्रारंभ हो चुकी है। इससे दूरस्थ अंचलों के बच्चों को अब विषयानुसार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त हो रही है।

311 एकल शिक्षक स्कूलों और 14 शिक्षकविहीन शालाओं को मिला संबल

बलरामपुर जिले में 311 एकल शिक्षक वाले और 14 शिक्षकविहीन विद्यालयों में युक्तिकरण के अंतर्गत अतिशेष शिक्षकों की पदस्थापना की गई है। शिक्षा विभाग द्वारा तैयार की गई डेटा आधारित कार्ययोजना और संतुलित पुनर्विन्यास के माध्यम से यह सुनिश्चित किया गया कि किसी भी विद्यालय में शिक्षक का पद लंबी अवधि तक रिक्त न रहे।

दूरस्थ अंचलों में लौटा शिक्षा का उजियारा

बलरामपुर विकासखंड का प्राथमिक शाला महाराजगंज, जो लंबे समय से शिक्षकविहीन था, वहां युक्तिकरण नीति के तहत शिक्षक की पदस्थापना के बाद पुनः नियमित कक्षाएं संचालित हो रही हैं। इसी तरह प्राथमिक शालाएं लुर्गी, भीतर सौनी और मक्याठी जैसे एकल शिक्षक विद्यालयों में भी अब विषयवार शिक्षकों की तैनाती संभव हो पाई है।

शिक्षकों का संतुलित भार, छात्रों को विषयवार पढ़ाई

युक्तिकरण नीति ने शिक्षकों का कार्यभार संतुलित किया है और विद्यार्थियों को समुचित विषयों की पढ़ाई मिल रही है। इससे विद्यार्थियों को न केवल प्रतियोगी परीक्षाओं में लाभ मिलेगा, बल्कि जीवन कौशल और सर्वांगीण विकास की दिशा में भी वे आगे बढ़ पाएंगे।

विद्यालयों में दिखने लगा बदलाव

युक्तिकरण नीति का असर केवल शिक्षकों की उपलब्धता तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव विद्यालयों के शैक्षणिक वातावरण, बालसभा, पठन-संवर्धन, कला-संस्कृति गतिविधियों, अभिभावकों की संतुष्टि और समुदाय के विश्वास के रूप में भी देखने को मिल रहा है।

यह नीति न केवल शिक्षा की गुणवत्ता को नई ऊँचाई दे रही है, बल्कि स्कूल और समाज के बीच साझेदारी को भी मज़बूत कर रही है। आने वाले समय में यह पहल छात्रों की उपस्थिति, वार्षिक परीक्षा परिणाम और समग्र शिक्षा व्यवस्था को सशक्त बनाने में मील का पत्थर साबित होगी।

वनांचल के गांवों में लौटी शिक्षा की रौशनी, युक्तियुक्तकरण से दूरदराज़ के स्कूलों में पहुंचे शिक्षक, ग्रामीणों ने जताया आभार

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रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा स्कूली शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए शुरू की गई युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया का असर अब वनांचल के गांवों में साफ़ दिखाई देने लगा है। मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के दूरस्थ और पहुंचविहीन गांवों में वर्षों से शिक्षक की कमी से जूझते स्कूलों को अब राहत मिली है। लंबे समय से शिक्षक की मांग कर रहे ग्रामीणों के चेहरों पर खुशी झलक रही है।

                           

हाईस्कूल बड़गांवखुर्द को मिले दो व्याख्याता

गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र में स्थित हाईस्कूल बड़गांवखुर्द में पहले कोई भी स्थायी शिक्षक नहीं था। केवल एक अतिथि शिक्षक के सहारे स्कूल चल रहा था। लेकिन युक्तियुक्तकरण के तहत अब हिन्दी और गणित के दो व्याख्याताओं की पदस्थापना की गई है। इससे ग्रामीणों में खुशी की लहर दौड़ गई है। अब बच्चों को विषय विशेषज्ञों से पढ़ने का मौका मिलेगा, जिससे पढ़ाई का स्तर बेहतर होगा।

ढाब गांव में शिक्षा को मिला नया सहारा

विकासखंड भरतपुर के ग्राम ढाब की प्राथमिक शाला में वर्षों से सिर्फ एक शिक्षक कार्यरत थे। इससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही थी। अब यहां एक सहायक शिक्षक की नियुक्ति हुई है। गांव के सरपंच और अभिभावकों ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि इससे शिक्षा का माहौल सुधरेगा और बच्चों की पढ़ाई सही ढंग से हो सकेगी।

खोखनिया गांव में पूरी हुई वर्षों की मांग

गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान के भीतर बसे खोखनिया गांव की प्राथमिक और माध्यमिक शालाओं में लंबे समय से शिक्षक नहीं थे। यहां 87 बच्चे दर्ज हैं, लेकिन शिक्षक कम थे। अब युक्तियुक्तकरण के बाद प्राथमिक शाला में एक और माध्यमिक शाला में दो शिक्षक नियुक्त किए गए हैं। इससे गांववालों को बड़ी राहत मिली है।

देवशील में शिक्षकों की पदस्थापना से जागी नई उम्मीद

ऐसे ही एक अन्य पहुंचविहीन गांव देवशील की प्राथमिक शाला में 57 बच्चे पढ़ते हैं, लेकिन स्कूल में केवल एक शिक्षक कार्यरत थे। अब एक और शिक्षक की नियुक्ति से यहां शिक्षा को नई गति मिलेगी। ग्रामीणों ने शिक्षक की नियुक्ति पर प्रसन्नता जताई है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का कहना है कि हमारी सरकार की प्राथमिकता है, कि शिक्षा की पहुंच अंतिम गांव तक हो। युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया के माध्यम से हमने उन स्कूलों में शिक्षक भेजे हैं, जहां सबसे ज़्यादा ज़रूरत थी । बच्चों को अच्छी पढ़ाई का अवसर मिले, यह हमारा संकल्प है। ग्रामीणों की प्रतिक्रिया से यह स्पष्ट है कि हम सही दिशा में बढ़ रहे हैं।

शिक्षकों का संतुलित पदस्थापना से मिलेगी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा

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रायपुर। कोरिया जिले में शिक्षकों और स्कूलों के युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया से शिक्षा व्यवस्था को नया आयाम मिलने की उम्मीद है। जिला कलेक्टर श्रीमती चंदन त्रिपाठी ने 5 जून को कलेक्टोरेट सभाकक्ष में आयोजित प्रेस वार्ता में कहा कि यह प्रक्रिया शिक्षा में समानता, गुणवत्ता और संसाधनों के बेहतर उपयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस अवसर पर अपर कलेक्टर अरुण मरकाम एवं जिला शिक्षा अधिकारी जितेन्द्र गुप्ता भी मौजूद थे।

कलेक्टर श्रीमती त्रिपाठी ने बताया कि नगरीय और ग्रामीण अंचलों में शिक्षकों के पदस्थापना में असंतुलन है। शहरी क्षेत्रों में शिक्षक अपेक्षाकृत अधिक हैं, जबकि दूरस्थ गांवों में शिक्षकों की भारी कमी से शिक्षण गुणवत्ता और छात्र प्रदर्शन पर नकारात्मक असर पड़ रहा है। इस असंतुलन को दूर करने के लिए युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया अपनाई जा रही है।

ग्रामीण क्षेत्रों को मिलेंगे विषय विशेषज्ञ शिक्षक

कलेक्टर ने बताया कि अब गणित, भौतिकी, रसायन और जीवविज्ञान जैसे विषयों के विशेषज्ञ शिक्षक भी ग्रामीण क्षेत्रों में उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इससे छात्र-शिक्षक अनुपात संतुलित होगा और विद्यार्थियों को विषयवस्तु की बेहतर समझ मिलेगी। इन शिक्षकों का पुनः समायोजन कर जरूरतमंद विद्यालयों में पदस्थापना की जा रही है। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि यह प्रक्रिया किसी भी प्रकार की कटौती नहीं, बल्कि शिक्षा सुधार की दिशा में उठाया गया व्यावहारिक कदम है। यह समूचा प्रयास शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 एवं राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के दिशा-निर्देशों के अनुरूप है। कलेक्टर ने कहा कि यह परिवर्तन जिले के शैक्षिक और समग्र विकास का मार्ग प्रशस्त करेगा। इस अवसर पर उन्होंने मीडिया से अपील की कि वे इस पहल को सकारात्मक रूप में जनमानस तक पहुंचाएं, ताकि समाज में शिक्षा को लेकर विश्वास और जागरूकता बढ़ सके।

दो प्राथमिक शालाएं शिक्षकविहीन और 57 एकल शिक्षक स्कूल

जिले की स्थिति का विवरण देते हुए कलेक्टर ने बताया कि कोरिया जिले में 2 प्राथमिक शालाएं शिक्षकविहीन और 57 एकल शिक्षक स्कूल हैं। वहीं, 95 प्राथमिक और 75 पूर्व माध्यमिक शिक्षक जिले में अतिशेष हैं। इनका पुनः समायोजन कर शिक्षकविहीन और एकल शिक्षकीय शालाओं में पदस्थापना की जा रही है। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि यह प्रक्रिया किसी भी प्रकार की कटौती नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य शिक्षा में सुधार लाना है।

एक भी स्कूल का समायोजन नहीं

 जिले में 145 में से एक भी स्कूल का समायोजन नहीं किया गया है। राज्य में भी केवल 241 स्कूलों का समायोजन किया गया है, जबकि 10,297 स्कूल यथावत संचालित रहेंगे। युक्तियुक्तकरण के लाभों को रेखांकित करते हुए उन्होंने बताया कि इससे विद्यार्थियों को बेहतर भवन, प्रयोगशाला, लाइब्रेरी जैसी सुविधाएं एक ही परिसर में मिल सकेंगी। साथ ही, बच्चों की ड्रॉपआउट दर में कमी, तीन बार प्रवेश प्रक्रिया से मुक्ति और पढ़ाई की निरंतरता सुनिश्चित होगी।

छत्तीसगढ़ में होगी शिक्षकों की भर्ती, प्रथम चरण में 5,000 पदों पर होगी नियुक्ति

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ एवं प्रभावशील बनाने के लिए शिक्षकों के रिक्त पदों पर चरणबद्ध भर्ती की जाएगी। प्रथम चरण में 5,000 शिक्षकों की भर्ती होगी। इस निर्णय से प्रदेश के शैक्षणिक संस्थानों में अध्ययन अध्यापन व्यवस्था को गति मिलेगी और विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त होगी। शिक्षकों के रिक्त पदों पर भर्ती को लेकर विभागीय स्तर पर तैयारियां प्रारंभ कर दी गई हैं।

छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा राज्य में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। इन्हीं पहल में शामिल है शालाओं एवं शिक्षकों का युक्तियुक्तकरण। युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया राज्य में शुरू कर दी गई है। इसके पूरा होेने के बाद शिक्षकों के रिक्त पदों का आकलन कर नई भर्ती की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

गौरतलब है कि शिक्षा की गुणवत्ता और पहुंच को बेहतर बनाने की पहल के तहत छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा राज्य में शालाओं और शिक्षकों का युक्तियुक्तकरण किया जा रहा है। इसका उद्देश्य यह है कि जहां जरूरत है वहां शिक्षक उपलब्ध हों और बच्चों को अच्छी शिक्षा, बेहतर शैक्षणिक वातावरण और बेहतर सुविधाएं मिल सकें। युक्तियुक्तकरण का मतलब है स्कूलों और शिक्षकों की व्यवस्था को इस तरह से सुधारना कि सभी स्कूलों में छात्र-शिक्षक अनुपात संतुलित हो और कोई भी स्कूल बिना शिक्षक के न रहे।

राज्य की 30,700 प्राथमिक शालाओं में औसतन 21.84 बच्चे प्रति शिक्षक हैं और 13,149 पूर्व माध्यमिक शालाओं में 26.2 बच्चे प्रति शिक्षक हैं, जो कि राष्ट्रीय औसत से कहीं बेहतर है। हालांकि 212 प्राथमिक स्कूल अभी भी शिक्षक विहीन हैं और 6,872 प्राथमिक स्कूलों में केवल एक ही शिक्षक कार्यरत है। पूर्व माध्यमिक स्तर पर 48 स्कूलों में शिक्षक नहीं हैं और 255 स्कूलों में केवल एक शिक्षक है। 362 स्कूल ऐसे भी हैं जहां शिक्षक तो हैं, लेकिन एक भी छात्र नहीं है। इसी तरह शहरी क्षेत्र में 527 स्कूलों में छात्र-शिक्षक अनुपात 10 या उससे कम है। 1,106 स्कूलों में यह अनुपात 11 से 20 के बीच है। 837 स्कूलों में यह अनुपात 21 से 30 के बीच है। लेकिन 245 स्कूलों में यह अनुपात 40 या उससे भी ज्यादा है, यानी छात्रों की दर्ज संख्या के अनुपात में शिक्षक कम हैं।

युक्तियुक्तकरण के अंतर्गत जिन स्कूलों में ज्यादा शिक्षक हैं लेकिन छात्र नहीं, वहां से शिक्षकों को निकालकर उन स्कूलों में भेजा जा रहा है, जहां शिक्षक नहीं हैं। इससे शिक्षक विहीन और एकल शिक्षक वाले स्कूलों की समस्या दूर होगी। स्कूल संचालन का खर्च भी कम होगा और संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सकेगा। एक ही परिसर में ज्यादा कक्षाएं और सुविधाएं मिलने से बच्चों को बार-बार एडमिशन लेने की जरूरत नहीं होगी। यानी एक ही परिसर में संचालित प्राथमिक, माध्यमिक, हाई स्कूल एवं हायर सेकेण्डरी स्कूल संचालित होंगे तो प्राथमिक कक्षाएं पास करने के बाद विद्यार्थियों को आगे की कक्षाओं में एडमिशन कराने की प्रक्रिया से छुटकारा मिल जाएगा। इससे बच्चों को पढ़ाई में निरंतरता बनी रहेगी। बच्चों के स्कूल छोड़ने की दर (ड्रॉपआउट रेट) भी घटेगी। अच्छी बिल्डिंग, लैब, लाइब्रेरी जैसी सुविधाएं एक ही जगह देना आसान होगा।

शिक्षा विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार शालाओं के युक्तियुक्तकरण के तहत राज्य के कुल 10,463 स्कूलों में से सिर्फ 166 स्कूलों का समायोजन होगा। इन 166 स्कूलों में से ग्रामीण इलाके के 133 स्कूल ऐसे हैं, जिसमें छात्रों की संख्या 10 से कम है और एक किलोमीटर के अंदर में दूसरा स्कूल संचालित है। इसी तरह शहरी क्षेत्र में 33 स्कूल ऐसे हैं, जिसमें दर्ज संख्या 30 से कम हैं और 500 मीटर के दायरे में दूसरा स्कूल संचालित है। इस कारण 166 स्कूलों को बेहतर शिक्षा के उद्देश्य से समायोजित किया जा रहा है, इससे किसी भी स्थिति में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होगी। शेष 10,297 स्कूल पूरी तरह से चालू रहेंगे।

दरअसल छत्तीसगढ़ सरकार राज्य के शहरी और ग्रामीण इलाकों में शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए स्कूलों और शिक्षकों का युक्तियुक्तकरण यानि तर्कसंगत समायोजन कर रही है। इसका उद्देश्य यह है कि जहां जरूरत ज्यादा है, वहां संसाधनों और शिक्षकों का बेहतर ढंग से उपयोग सुनिश्चित हो। उन स्कूलों को जो कम छात्रों के कारण समुचित शिक्षा नहीं दे पा रहे हैं, उन्हें नजदीकी अच्छे स्कूलों के साथ समायोजित किया जाए, ताकि  बच्चों को बेहतर माहौल, संसाधन और पढ़ाई का समान अवसर उपलब्ध हो सके।

शालाओं और शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण से बच्चों को ज्यादा योग्य और विषय के हिसाब से विशेषज्ञ शिक्षक मिलेंगे। स्कूलों में लाइब्रेरी, लैब, कंप्यूटर आदि की सुविधाएं सुलभ होंगी। शिक्षकों की कमी वाले स्कूलों में अब पर्याप्त शिक्षक मिलेंगे। जिन स्कूलों में पहले गिनती के ही छात्र होते थे, वे अब पास के अच्छे स्कूलों में जाकर बेहतर शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में इस बदलाव से शिक्षा का स्तर सुधरेगा। छत्तीसगढ़ सरकार की मंशा है कि हर बच्चे को अच्छी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले।यह पहल राज्य की शिक्षा व्यवस्था को ज्यादा सशक्त और संतुलित बनाएगी। युक्तियुक्तकरण से न सिर्फ शिक्षकों का समुचित उपयोग होगा, बल्कि बच्चों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा भी मिल सकेगी।

 

दुर्ग जिले में शिक्षकों की पोस्टिंग में असंतुलन से प्रभावित हो रहा ग्रामीण अंचल के स्कूलों का परीक्षा परिणाम

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रायपुर। जिला शिक्षा अधिकारी दुर्ग ने शिक्षा विभाग को प्रेषित अपनी रिपोर्ट में इस बात का स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि जिले के ग्रामीण अंचलों के शासकीय हाई स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी तथा शहरी क्षेत्रों में शिक्षकों की अधिकता के कारण शैक्षिक व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। यही कारण है कि ग्रामीण अंचल के स्कूलों का परीक्षा परिणाम औसत से भी कम है। शैक्षणिक व्यवस्था में सुधार के लिए युक्तियुक्तकरण जरूरी है। ग्रामीण अंचल के विद्यालयों में शिक्षकों की आवश्यकता के अनुरूप पदस्थापना करने से बच्चों को बेहतर शिक्षा मिलेगी और रिजल्ट में सुधार होगा। 

जिला शिक्षा अधिकारी ने अपने रिपोर्ट में उल्लेखित किया है कि विकासखंड धमधा अंतर्गत शासकीय हाई स्कूल मुरमुदा में स्वीकृत 6 पदों के विरुद्ध मात्र 3 व्याख्याता कार्यरत हैं, जबकि कक्षा दसवीं की छात्र संख्या 63 है। शिक्षक अभाव के कारण यहाँ का वार्षिक परीक्षा परिणाम मात्र 47.62 प्रतिशत रहा। इसी प्रकार शासकीय हाई स्कूल सिलितरा और शासकीय हाई स्कूल बिरेझर में भी स्थिति अत्यंत दयनीय है। दोनों विद्यालयों में स्वीकृत 6-6 पदों के विरुद्ध एक भी व्याख्याता पदस्थ नहीं है। क्रमशः 81 एवं 63 छात्रों की दर्ज संख्या वाले इन विद्यालयों में परीक्षा परिणाम क्रमशः 36.59 प्रतिशत एवं 35.00 प्रतिशत ही रहा है।

वहीं दूसरी ओर, शहरी क्षेत्र के विद्यालयों में छात्रों की अपेक्षा शिक्षकों की संख्या आवश्यकता से कहीं अधिक है। उदाहरणस्वरूप, शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला केम्प-1 मिलाई में 225 छात्रों के लिए स्वीकृत 7 पदों के विरुद्ध 17 शिक्षक कार्यरत हैं, जो कि दर्ज संख्या के मान से 10 शिक्षक अधिक हैं। इसी प्रकार नेहरू शासकीय प्राथमिक शाला दुर्ग में 113 छात्रों के लिए स्वीकृत 4 पदों की तुलना में 11 शिक्षक पदस्थ हैं, जो कि 7 शिक्षक अतिरिक्त हैं। जिला शिक्षा अधिकारी दुर्ग ने ग्रामीण विद्यालयों में शिक्षकों की शीघ्र पदस्थापना  की आवश्यकता जताई है, ताकि परीक्षा परिणाम में सुधार लाया जा सके और छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध हो सके।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल से तीन स्कूलों में दूर हुई शिक्षकों की कमी

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल से जशपुर जिले के तीन स्कूलों में शिक्षकों की कमी से लंबे समय से परेशान बच्चों और उनके अभिभावकों को बड़ी राहत मिली है। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद जिले के इन तीन स्कूलों में पढ़ाई व्यवस्था सुचारू बनाएं रखने के लिए शिक्षकों की त्वरित नियुक्ति कर दी गई है। अभिभावकों ने इस संवेदनशीलता के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का आभार जताया है।

जशपुर जिले के बगीचा ब्लॉक के रायकेरा गांव के हाईस्कूल में भूगोल, अंग्रेजी, हिंदी, संस्कृत, विज्ञान और गणित विषय के शिक्षकों की कमी थी। स्कूल के छात्रों के अभिभावकों ने समस्या से बगिया स्थित सीएम निवास को अवगत कराते हुए बताया था कि शिक्षकों के ना होने से बच्चों की पढ़ाई पर बुरा असर पड़ रहा है। अभिभावकों का कहना था कि माध्यमिक शिक्षा मंडल ने बोर्ड परीक्षाओं की समय-सारणी घोषित कर दी है। ऐसे में शिक्षकों के ना होने से बच्चों का भविष्य बिगड़ने की आशंका बनी हुई है। यह जानकारी जब मुख्यमंत्री साय को मिली तो उन्होंने अभिभावकों की समस्या को गंभीरता से लेते हुए जशपुर कलेक्टर डॉ. रवि मित्तल को रायकेरा स्कूल में शिक्षक की कमी दूर करने के निर्देश दिए। 

कलेक्टर डॉ. मित्तल ने तत्काल कार्रवाई करते हुए इस स्कूल में 6 शिक्षकों को संलग्न करते हुए, सत्रांत तक अध्यापन कार्य पूरा कराने का आदेश दिया। इसी तरह फरसाबहार के फोकटपारा प्राथमिक शाला में शिक्षक रोशन लाल रावटे को संलग्न किया गया है। दुलदुला ब्लॉक के करडेगा स्कूल की महिला शिक्षक सुश्री अनुपमा किंडों को जिला ग्रंथालय के प्रभार से मुक्त कर वापस मूल संस्था में पदस्थ किया गया है, ताकि करडेगा स्कूल में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित ना हो।

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के छत्तीसगढ़ का मुख्यमंत्री बनने के बाद जिले के कांसाबेल ब्लॉक के बगिया स्थित सीएम निवास में जिले भर से लोग समस्या लेकर पहुंच रहे हैं। यहां इन समस्याओं का त्वरित निराकरण किया जा रहा है। बता दें कि मुख्यमंत्री साय ने शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में प्राथमिकता से काम करने के निर्देश अधिकारियों को दिया हैं। बहरहाल स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर होने से छात्र और उनके अभिभावक काफी प्रसन्न हैं।

स्कूलों के सफाई कर्मियों और रसाईयों को मिली बड़ी राहत

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की घोषणा पर त्वरित अमल कर स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा स्कूलों में कार्यरत् अंशकालीन सफाई कर्मी एवं मध्यान्ह भोजन से जुड़े रसोईयों के मानदेय में 500 रूपए प्रति माह वृद्धि के आदेश जारी कर दिया गया है।

स्कूल शिक्षा विभाग मंत्रालय महानदी भवन से जारी आदेश से छत्तीसगढ़ के स्कूलों में कार्यरत् लगभग 43 हजार अंशकालीन सफाई कर्मियों और मध्यान्ह भोजन बनाने वाले लगभग 87 हजार 500 रसोईयों को बड़ी राहत मिली है। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार इनके मानदेय में 500 रुपए की बढ़ोतरी की गई है। स्कूल शिक्षा विभाग ने वित्त विभाग की ओर से पखवाड़े भर पहले वृद्धि पर सहमति प्रदान करने के बाद यह बढ़ोतरी की है। जारी आदेश के अनुसार रसाईयों का मानेदय 1500 रूपए से बढ़कर अब 2000 रूपए हो जाएगा और सफाई कर्मियों के मानदेय में 500 रूपए की वृद्धि हो जाएगी।

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राजधानी रायपुर में आयोजित 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस के मुख्य समारोह में छत्तीसगढ़ में शिक्षा सुविधाओं में योगदान देने वाले अंशकालीन सफाई कर्मी एवं मध्यान्ह भोजन से जुड़े रसोईयों के मानदेय में 500 रूपए प्रति माह वृद्धि की घोषणा की थी।

शाला प्रवेश उत्सव 16 जून से : स्कूलों में मुख्यमंत्री और स्कूल शिक्षा मंत्री के संदेश का होगा वाचन

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रायपुर। राज्य में इस साल शाला प्रवेश उत्सव 16 जून से 15 जुलाई तक मनाया जाएगा। इस दौरान बच्चों के प्रवेश के साथ ही विभिन्न गतिविधियों का आयोजन होगा। एक माह तक चलने वाले शाला प्रवेश उत्सव के शुरूआती 10 दिनों के लिए जनभागीदारी सुनिश्चित करते हुए विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। प्रथम दिवस सभी स्कूलों में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम के संदेश का वाचन होगा।

जनप्रतिनिधियों द्वारा नवप्रवेशी बच्चों का स्वागत, बच्चों को मिलने वाले विभिन्न सुविधाओं का वितरण किया जाएगा। जनप्रतिनिधियों द्वारा स्कूल के विकास हेतु शपथ एवं विचार व्यक्त किए जाएंगे। बच्चों द्वारा विविध सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया जाएगा। शाला में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों का सम्मान और पालकों का स्कूल के बारे में अभिमत और मुख्य अतिथि का उद्बोधन होगा।    

शाला प्रवेश उत्सव आयोजन के लिए स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. आलोक शुक्ला ने सभी जिला कलेक्टर और जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को निर्देशित किया है कि शाला प्रवेश उत्सव को जन-जन का अभियान बनाने के लिए व्यक्तिगत रूचि लेते हुए इसे सभी स्तर पर सफल बनाएं ताकि  शत्-प्रतिशत बच्चों को शाला में प्रवेश एवं ठहराव सुनिश्चित करते हुए उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देकर समग्र शिक्षा की लक्ष्य की प्राप्ति की जा सके। सत्र प्रारंभ होने से पहले शाला प्रबन्धन समिति की विशेष बैठक का आयोजन करने कहा गया है। शाला प्रवेश उत्सव आयोजन के संबंध में व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए गए हैं। 

प्रवेश उत्सव के दौरान प्रथम दिवस राज्य स्तरीय कार्यक्रम का सभी शालाओं में आयोजन किया जाए। शाला प्रवेश उत्सव के द्वितीय दिवस- शाला में बड़े कक्षाओं के विद्यार्थी, शिक्षा में रूचि लेने वाले युवाओं, माताओं एवं सेवानिवृत्त व्यक्तियों की बैठक लेकर अपने क्षेत्र को शून्य ड्राप आउट गाँव घोषित करने आवश्यक कार्यवाहियों, प्रतिदिन प्रभात फेरी निकाले जाने की प्रक्रिया एवं रूट चार्ट, घर-घर संपर्क की प्रक्रिया का विवरण एवं अभ्यास, नुक्कड़ नाटक का अभ्यास, शाला से बाह्य बच्चों को मुख्यधारा में जोड़ने के प्रयास आदि पर चर्चा एवं बच्चों को तैयार किया जाएगा।

तृतीय दिवस - बड़ी कक्षाओं के बच्चों को घर-घर संपर्क कार्यक्रम के अंतर्गत कैसे प्रत्येक घर मैं जाकर पालकों से संपर्क कर उन्हें अपने बच्चों को नियमित शाला भेजने प्रेरित किया जाएगा। घरों में यदि अप्रवेशी, प्रवेश योग्य बच्चे एवं अनियमित उपस्थिति वाले बच्चे हैं तो उन्हें शाला में प्रवेश दिलवाते हुए नियमित शाला आने के लिए आवश्यक वातावरण तैयार करेंगे। बड़ी कक्षा के बच्चे यह कार्य प्रतिदिन तब तक करेंगे जब तक कि शाला जाने योग्य आयु के सभी बच्चों को ये शाला नियमित आने के लिए सहमत न कर लेवें एवं प्रवेश प्रक्रिया पूरी न कर लें।

चतुर्थ दिवस-बच्चों में आकांक्षा स्तर विकसित कर उनके लिए आगे जीवन में विकास के क्षेत्रों की पहचान करने, विभिन्न रोजगार के अवसर से परिचित करवाने एवं आसपास का भ्रमण कर विभिन्न रोजगारों से परिचित करवाएंगे। विगत वर्षों में सभी शालाओं में गढ़बो नवा छत्तीसगढ़नामक पुस्तक बच्चों को एवं स्कूल में उपलब्ध करवाई गयी है। इस पुस्तक को सभी बच्चों को पढ़वाएं एवं इस पुस्तक में लिखी गयी कहानियों एवं चित्रों पर आगामी दो तीन दिनों तक बच्चों को दिखाते हुए चित्रों एवं कहानियों पर चर्चा आयोजित करें।

पंचम दिवस-बच्चों को साधारण गणित के सवाल देकर बनाने का अभ्यास करवाया जाएगा। शाला में उपलब्ध गणित किट गणित की सहायक सामग्री एवं गणित के रोचक खेल आदि का संकलन कर बच्चों से दिन भर अकेले एवं समूह में रहकर विभिन्न सवालों को हल करवाएं। बच्चों से कुछ मौखिक गणित के सवाल भी हल करवाते हुए उन्हें गणित में रूचि विकसित करने का प्रयास किया जाए।

छठवां दिवस-प्रत्येक शाला में खेलगढ़िया के अंतर्गत खेल सामग्री उपलब्ध करवाई गयी है। प्रवेशोत्सव के छठवें दिवस सभी शालाओं में बच्चों को आमंत्रित कर उन्हें विभिन्न खेलकूद में शामिल करते हुए उनका उत्साहवर्धन करें। छोटी कक्षा में बच्चों को सीखने में सहयोग करने हेतु खिलौने बनाने की प्रतियोगिता भी आयोजित कर स्कूल के लिए समुदाय की मदद से खिलौने एकत्र करने एवं स्थानीय संसाधनों से विभिन्न खिलौने बनाए जाने का कार्य भी करवाएं। पुस्तकालय संचालन के सम्बन्ध में रंगोत्सव सामग्री का अध्ययन कर लिया जाए।

सातवां दिवस-सभी शालाओं में संचालित मुस्कान पुस्तकालय से बच्चों को अपनी इच्छा से पुस्तकें लेकर उन्हें पढ़ने, समझने एवं जोड़ी में पढ़ी गयी पुस्तकों पर आपस में चर्चा करने के अवसर दिया जाए। बच्चों में पढ़ने में रूचि विकसित करने के साथ-साथ पढ़ने के स्पीड का भी आकलन करने की व्यवस्था की जाए। बच्चों को पूरे सत्र में समझ के साथ-साथ अधिक से अधिक स्पीड में पुस्तकों को पढ़ने का अभ्यास करने हेतु प्रेरित किया जाए।

आठवां दिवस-कुछ दिन पहले से ही आसपास के समुदाय के बड़े-बुजुर्गों को किसी एक स्थल में आमंत्रित कर बच्चों के छोटे-छोटे समूह में कहानी सुनाने का अवसर दिया जाए। बड़े कक्षाओं के बच्चों को इन कहानियों को सुनकर कागज में लिखने की जिम्मेदारी दी जाए। स्थानीय युवाओं को ऐसी बेहतर कहानियों को मोबाइल से रिकार्ड कर उनका पोडकास्ट बनाने हेतु प्रेरित करें। इन पोडकास्ट को जिले एवं राज्य स्तर पर भिजवाते हुए व्यापक स्तर पर उपयोग करने के अवसर प्रदान किया जाए।

नवम दिवस-इस दिन समुदाय में बोले जाने वाली प्रचलित स्थानीय भाषा में सामग्री तैयार करने हेतु आवश्यक प्रक्रियाएं अपनाएं। बड़े-बुजुगों द्वारा सुनाई गयी कहानियों एवं प्रचलित कहानियों पर स्थानीय भाषा में कहानी पुस्तकें तैयार कर प्रत्येक स्कूल के पुस्तकालय में रखवाएं। प्रवेशोत्सव के दौरान प्रत्येक स्कूल में कम से कम दस कहानी की पुस्तकें जनसहयोग से तैयार करवाते हुए उपयोग में लाई जाए। इन पुस्तकों को बाद में एक दूसरे के स्कूलों में बदलकर पढ़ने के अवसर दिए जा सकते हैं, शालाओं को प्रदाय की गई स्थानीय सामग्री का उपयोग एवं अध्ययन करें।

दसवां दिवस-इस दिन अवकाश के अवसर पर अधिक से अधिक समुदाय के सदस्यों को पहले से आमंत्रित करते हुए कम से कम आधे दिन का कार्यक्रम आयोजित किया जाए। समुदाय के साथ शाला विकास योजना, शाला एवं परिसर का सुरक्षा ऑडिट बच्चों का सामाजिक अंकेक्षण, अनियमित उपस्थिति एवं रोजगार के लिए लंबी अवधि तक बाहर रहने वाले बच्चों के पालकों से संपर्क कर उन्हें नियमित उपस्थिति के लिए प्रेरित किया जाए। पालकों एवं समुदाय को निपुण भारत शपथ लेकर सभी बच्चों को सीखने-सिखाने के लिए जागरूक करना एवं घर पर बच्चों की पढ़ाई पर नियमित रूप से विशेष ध्यान देने हेतु पालकों को तैयार किया जाना होगा। इस दौरान शाला सुरक्षा योजना एवं शाला संकुल योजना से संबंधित सामग्री का उपयोग एवं अध्ययन कर लिया जाए।

नवीन शिक्षा सत्र 2023 : स्कूलों के भवनों का रेनोवेशन कार्य 15 जून से पूर्व करने के निर्देश

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रायपुर। स्कूलों का नवीन शिक्षा सत्र 16 जून 2023 से प्रारंभ होगा। प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा विभाग आलोक शुक्ला ने विभाग की प्राथमिकता वाली योजनाओं को नवीन शिक्षा सत्र के प्रारंभ होने के पूर्व पूर्ण करने के निर्देश सभी जिला कलेक्टरों को दिए गए है। स्कूलों के भवनों का रेनोवेशन कार्य 15 जून 2023 के पूर्व करने को कहा है। छूट गए सभी स्कूल भवनों, आश्रम, छात्रावासों आदि का सर्वेक्षण कराके तथा मरम्मत एवं अतिरिक्त कक्ष के निर्माण के प्राक्कलन तत्काल कराकर एक सप्ताह में विभागीय पोर्टल पर अपलोड कराने के निर्देश दिए गए है।


सभी स्कूलों में पुस्तकें, गणवेश एवं पात्र बालिकाओं के लिए निःशुल्क सायकल मई-जून के माह पहुंचाकर 16 जून को प्रारंभ होने वाले नवीन शिक्षा सत्र के प्रथम दिन ही इन सबका वितरण पात्र विद्यार्थियों को अनिवार्य रूप से करने कहा गया है। प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा डॉ. आलोक शुक्ला ने कलेक्टरों को जारी पत्र में कहा है कि प्रदेश में 247 स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम स्कूल तथा 32 स्वामी आत्मानंद हिन्दी माध्यम स्कूल संचालित है। स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में हिन्दी माध्यम से पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए भी व्यवस्था की गई है। इस तारतम्य में नवीन शिक्षा सत्र प्रारंभ होने के पूर्व बड़ी संख्या में स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम स्कूल प्रारंभ किए जाने का निर्णय लिया गया है।

जिला कलेक्टरों के द्वारा 398 स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट स्कूलों को प्रारंभ करने का निर्णय लिया गया है। इसकी सूची विभाग के पोर्टल पर अपलोड की गई है। इस सूची में शामिल सभी स्कूल भवनों के रेनोवेशन का कार्य डीएमएफ, सीएसआर और जिला स्तर पर उपलब्ध अन्य प्रकार के राशियों से किया जाए। जिससे यह कार्य आगामी शिक्षा सत्र के प्रारंभ होने के पूर्व पूर्ण हो जाए। वर्ष 2023-24 के लिए विधानसभा के समक्ष प्रस्तुत किए गए बजट प्रस्ताव में 101 स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम स्कूलों की स्वीकृति दी गई है। इनमें कुछ स्कूल कलेक्टरों द्वारा प्रस्तावित स्कूलों में शामिल नहीं है। इन स्कूलों के भवनों का भी रेनोवेशन कर विभाग के पोर्टल पर अपलोड करें।

प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा ने कलेक्टरों से कहा है कि विभाग का प्रयास है कि मुख्यमंत्री द्वारा घोषित स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट स्कूल प्रारंभ करने वित्त विभाग से स्वीकृति प्राप्त कर उन्हें 16 जून से प्रारंभ होने वाले नवीन अकादमिक वर्ष से प्रारंभ कर दिया जाए। इसलिए ऐसे स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम स्कूल जिनकी घोषणा मुख्यमंत्री ने की है और अभी तक बजट में शामिल नहीं किया जा सका है तथा जो कलेक्टरों के द्वारा प्रस्तावित 398 स्कूलों में भी शामिल नहीं है। इन स्कूलों की भवनों के रेनोवेशन के लिए आर्किटेक्ट से नक्शा बनाकर तत्काल कार्य प्रारंभ कर 16 जून से प्रारंभ करने की पूर्ण तैयारी रखी जाए। इन सभी स्कूलों की सेटअप की स्वीकृति बजट पारित होने के उपरांत अप्रैल माह के प्रारंभ में वित्त विभाग की सहमति से जारी की जाएगी। यहां अंग्रेजी माध्यम के शिक्षकों की नियुक्ति भी कलेक्टरों द्वारा 16 जून के पूर्व की जानी है। इसके लिए तैयारी अभी से प्रारंभ कर दें।

मुख्यमंत्री  भूपेश बघेल द्वारा मुख्यमंत्री स्कूल जतन योजनामें यह घोषणा की गई है कि स्कूलों, आश्रम शालाओं, छात्रावासों आदि की मरम्मत एवं रेनोवेशन का कार्य तत्काल प्रारंभ किया जाए, यदि कोई भवन जर्जर हो गया है और उसका उपयोग करना खतरनाक हो गया है, तो उन भवनों के डिमोलाइजेशन का कार्य भी तत्काल किया जाए। जिन स्कूलों में दर्ज संख्या अधिक है और वहां पर कमरे कम है तो अतिरिक्त कमरे की स्वीकृति भी दी जाए। यह सभी कार्य मुख्यमंत्री स्कूल जतन योजनाके अंतर्गत किया जाए। इसके लिए पर्याप्त धन राशि उपलब्ध है। योजना के अंतर्गत कराये जाने वाले कार्यों के विस्तृत निर्देश पूर्व में जारी किए जा चुके है।

जिलों द्वारा विभागीय पोर्टल पर अपलोड किए गए 11 हजार 375 भवनों के प्राक्कलन के आधार पर संचालक लोक शिक्षण एवं प्रबंध संचालक समग्र शिक्षा द्वारा प्रशासकीय स्वीकृति भी जारी की जा चुकी है। इन कार्यों के लिए प्रथम किस्त के रूप में 200 करोड़ रूपए की राशि विमुक्त की जा चुकी है। विमुक्त की गई राशि से 70 प्रतिशत व्यय होने के बाद अगली किस्त दी जाएगी। जिन जिलों में मरम्मत योग्य भवन और दर्ज संख्या अधिक होने के बावजूद अतिरिक्त कमरे बनाने का प्रस्ताव भी छूट गया है वहां सभी स्कूली भवनों, आश्रम, छात्रावासों आदि का सर्वेक्षण कराके तथा मरम्मत एवं अतिरिक्त कक्ष निर्माण के प्राक्कलन तत्काल तैयार कर एक सप्ताह में विभागीय पोर्टल पर अपलोड कराये।

यह ध्यान रखा जाए कि मरम्मत कार्य और डिमोलाईजेशन के लिए आवश्यक धन राशि की स्वीकृति प्राप्त कर ली जाए, जिससे यह कार्य पूर्ण होने के बाद कोई भी खतरनाक भवन शेष न रहे। योजना के क्रियान्वयन, मॉनिटरिंग के संबंध में जारी निर्देशानुसार कार्यवाही की जाए। एक सप्ताह में शेष बचे हुए सभी स्कूलों भवनों के मरम्मत एवं अतिरिक्त कक्ष निर्माण के प्राक्कलन विभागीय पोर्टल पर अपलोड कर ली जाए। पुस्तकें, गणवेश, और सायकल वितरण नवीन शिक्षा सत्र के प्रथम दिन से ही प्रारंभ कर दिया जाए। संचालक लोक शिक्षण द्वारा इस संबंध में लगातार मॉनिटरिंग करके यह व्यवस्था की जा रही है कि सभी स्कूलों में पुस्तकें, गणवेश एवं पात्र बालिकाओं के लिए निःशुल्क सायकल मई-जून के माह में पहुंचायी जाए।

लगभग हजार करोड़ रूपए से होंगे स्कूलों के मरम्मत कार्य

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रायपुर। प्रदेश के स्कूलों की मरम्मत के लिए लगभग एक हजार करोड़ रूपए उपलब्ध कराए जाएंगे। साथ ही सभी शासकीय स्कूलों की गोबर पेंट से पोताई कराई जाएगी और उसके बाद लोगो भी लगाया जाएगा। यह सभी कार्य आगामी शिक्षा सत्र से पूर्व पूर्ण करने के निर्देश सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को दिए गए हैं। यह बात स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम ने कही।

वे आज रायपुर के न्यू सर्किट हाउस में विभागीय गतिविधियों की समीक्षा कर रहे थे। बैठक में प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा डॉ. आलोक शुक्ला, सचिव स्कूल शिक्षा डॉ. एस. भारतीदासन, संचालक लोक शिक्षण सुनील कुमार जैन सहित जिलों के जिला शिक्षा अधिकारीगण और जिला मिशन समन्वयकगण उपस्थित थे। मंत्री डॉ. टेकाम ने समीक्षा बैठक में कहा कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रदेश में जर्जर स्कूलों की मरम्मत के लिए लगभग एक हजार करोड़ रूपए की स्वीकृति प्रदान की है।

जिला शिक्षा अधिकारियों को मरम्मत योग्य सरकारी स्कूलों की जानकारी 7 दिनों के भीतर विभागीय पोर्टल में दर्ज करना होगा। उन्होंने कहा कि स्कूलों के मरम्मत कार्य के स्वीकृति और निर्माण एजेंसी जल्द से जल्द तय कर शीघ्र ही कार्य प्रारंभ करें। आगामी शिक्षा सत्र शुरू होने से पहले सभी मरम्मत के कार्य पूर्ण कर लिए जाएं। इसके अलावा इस बार शिक्षा सत्र शुरू होने से पहले सभी स्कूलों की पोताई गोबर पेंट से कराई जाए। स्कूलों की मरम्मत कराने से पहले की स्थिति, मरम्मत कार्य के समय और कार्य पूर्ण होने के बाद का फोटोग्राफ्स विभागीय पोर्टल में अनिवार्य रूप से अपलोड करें।

बैठक में बताया गया कि सुघ्घर पढ़वैया योजनासभी शासकीय प्राथमिक एवं मिडिल स्कूलों के लिए है। इसका उद्देश्य स्वप्रेरणा से अच्छे कार्य एवं बेहतर प्रदर्शन करने वाले शिक्षकों को प्रोत्साहित करना है। अभी तक 35 हजार 889 स्कूलों ने आकलन के लिए चुनौती दी है और इनमें से 4 हजार 490 स्कूल थर्ड पार्टी आकलन के लिए सहमत हैं। डॉ. टेकाम ने कहा कि जिला शिक्षा अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि स्कूल बच्चों की शत्-प्रतिशत उपस्थिति के लिए प्रेरित करें और सभी स्कूलों को चुनौती देने हेतु प्रोत्साहित करें।

उन्होंने कहा कि सभी स्कूलों को निकलरएप का उपयोग करना आना चाहिए। स्कूल के प्रधानपाठक और शिक्षक बच्चों के शिक्षा के स्तर को ऊपर उठाकर स्व आकलन कर थर्ड पार्टी के लिए चुनौती दे। उन्होंने कहा कि स्कूल को धीरे-धीरे वर्तमान शैक्षणिक स्तर से ऊपर उठाने प्रोत्साहित किया जाए। बच्चों की शैक्षणिक योग्यता का आकलन कर उनकी कमी को दूर करें। इसके लिए संकुल स्तर के स्कूलों का भी सहयोग लिया जाए। योजना में शामिल होने के लिए स्कूल पोर्टल में आवेदन दे सकते हैं और आकलन के लिए विशेषज्ञ को मैन्टर बना सकते हैं।

बैठक में स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में शिक्षकों की पदों की पूर्ति के लिए जिला शिक्षा अधिकारियों द्वारा सुझाव भी दिए गए। जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि शाला से बाहर के बच्चों की जानकारी को दबचबतण्हवअण्पदध्ववेब में दर्ज कराने के साथ ही इनकी शिक्षा के लिए किए गए उपायों की जानकारी भी दें। डॉ. टेकाम ने अधिकारियों से कहा कि बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर लें, परीक्षा में नकल न होने दें। स्वामी आत्मानंद स्कूलों में शिक्षा के गुणवत्ता को बनाए रखना शिक्षकों की जिम्मेदारी है। शिक्षकों की भर्ती शीघ्र पूरी कर ली जाए। 

बच्चों कोरोना काल में राज्य के शिक्षकों ने बच्चों की पढ़ाई के लिए कई प्रकार के नवाचार कर बेहतर कार्य किया, जिसकी चर्चा देशभर में हुई। इसी प्रकार के नवाचार बच्चों की पढ़ाई के हित में निरंतर किए जाएं। उन्होंने जिला शिक्षा अधिकारियों को स्कूलों का निरंतर आकस्मिक निरीक्षण और आकलन कर समीक्षा करने की निर्देश दिए हैं। स्कूलों के निरीक्षण और मॉनिटरिंग से पढ़ाई-लिखाई में तेजी आएंगी। स्कूलों में शिक्षकों की समय पर उपस्थिति और बच्चों की उपस्थिति में सुधार होगा। उन्होंने कहा कि जहां भी बालवाड़ी का अच्छा संचालन हो रहा है, उसको जनप्रतिनिधियों को दिखाया जाए। कक्षा 12वीं के बाद बच्चों की कैरियर के लिए कौंसिल की जाए।

स्कूलों से नदारद 9 शिक्षकों को डीईओ ने थमाया शो काॅज नोटिस

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बिलासपुर। स्कूलों से अनधिकृत रूप से नदारद अथवा विलंब से स्कूल पहुंचने वाले तखतपुर ब्लाॅक के 9 शिक्षकों को शो काॅज नोटिस जारी किया गया है। जिला शिक्षा अधिकारी ने प्राप्त निरीक्षण प्रतिवेदन के आधार पर नोटिस जारी कर तीन दिवस में जवाब तलब किया है। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भेंट मुलाकात अभियान के दौरान प्राप्त शिकायतों के आधार पर स्कूलों का अचानक निरीक्षण करने के निर्देश दिए थे। जिसके परिपालन में डीईओ द्वारा टीम गठित कर आकस्मिक निरीक्षण किये जा रहे हैं।

जिला शिक्षा अधिकारी ने बताया कि जिन शिक्षकों को नोटिस जारी किया गया है उनमें तखतपुर ब्लाॅक के खम्हरिया स्कूल के उच्च श्रेणी शिक्षक श्रीमती सुमन गौरावेड़े, योगेन द्विवेदी, श्रीमती दीपशिखा मिका एवं देवेन्द्र केशरवानी, प्रधानपाठिका श्रीमती पुष्पा यादव, सहायक शिक्षक एलबी विजय कौशिक,, सहायक शिक्षक एलबी श्रीमती इन्द्राणी कौशिक, सहायक शिक्षक श्रीमती अरूणा द्विवेदी तथा प्राथमिक स्कूल कुआं के प्रधानपाठक अमित खजुरिया शामिल हैं। डीईओ ने नोटिस में लिखा है कि आपके द्वारा पदीय दायित्व के प्रति लापरवाही, अनुशासनहीनता एवं गैरजिम्मेदार व्यवहार किया जा रहा है। तीन दिनों के भीतर जवाब नहीं मिलने पर

 


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