Media24Media.com: स्कूल शिक्षा विभाग

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छत्तीसगढ़ : राष्ट्रीय परख सर्वेक्षण 4 दिसंबर को, स्कूलों की दक्षता बढ़ाना करें सुनिश्चत

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रायपुर। छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी ने प्रदेश के स्कूलों में राष्ट्रीय परख सर्वेक्षण के मद्देजर स्कूलों की दक्षता बढ़ाने के लिए गंभीरता के साथ तैयारी करने के निर्देश दिए है। गौरतलब है कि आगामी माह के 4 दिसम्बर को कक्षा 3री, 6वीं और 9वीं के विद्यार्थियों की दक्षता को राष्ट्रीय सर्वेक्षण होना है। इसके तहत केन्द्रीय स्कूल शिक्षा मंत्रालय द्वारा छत्तीसगढ़ के विभिन्न स्कूलों में विद्यार्थियों की दक्षता का परीक्षण किया जाएगा।

शिक्षा सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी ने विभागीय अधिकारियों को राष्ट्रीय परख सर्वेक्षण को ध्यान में रखते हुए हर स्तर पर व्यापक प्रशासनिक, प्रबंधकीय व अकादमिक तैयारी प्रारंभ करने के निर्देश दिये हैं। उन्होंने कहा है कि राष्ट्रीय परख सर्वेक्षण-2024 के आकलन कार्य के सभी जिलों में शत-प्रतिशत क्रियान्वयन को सुनिश्चित कराने के लिए जिला शिक्षा अधिकारी, जिला मिशन समन्वयक तथा प्राचार्य डाइट को संयुक्त रूप से नोडल अधिकारी बनाया गया है। उल्लेखनीय है कि राज्य के 99 जिला स्तरीय अधिकारी जिले में परख क्रियान्वयन की जिम्मेदारी संभालेंगे। वहीं 146 विकासखंडों में बीईओ, बीआरसीसी तथा संकुल प्राचार्य को संयुक्त जिम्मेदारी सौंपते हुए नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।

शिक्षा सचिव परदेशी ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत देश भर में एक साथ होने जा रहे इस सर्वेक्षण का प्राथमिक उद्देश्य स्कूली शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठचर्या रूपरेखा 2023 के साथ उच्च गुणवत्ता युक्त वैश्विक मूल्यांकन विकसित करना है। उल्लेखनीय है कि केंद्र शासन द्वारा प्रस्तावित राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 छत्तीसगढ़ में भी लागू किया जा चुका है। इस राष्ट्रीय सर्वेक्षण में नवीन शिक्षा नीति के लक्ष्यों के अनुरूप कक्षा 3री, 6वीं और 9वीं में आधार भूत प्रारंभिक एवं मध्य चरणों के अंत में छात्रों की दक्षता का आकलन किया जा रहा है। यह सर्वेक्षण छत्तीसगढ़ के मात्र छात्र-छात्रों का नहीं बल्कि, शिक्षक, स्कूल तथा संपूर्ण शिक्षा व्यवस्था का मूल्याँकन सिद्ध होगा, जिसके आधार पर भविष्य में राष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ सहित अन्य सभी राज्यों की शैक्षणिक गुणवत्ता का श्रेणी निर्धारण भी होगा ।

उन्होंने बताया कि परख राष्ट्रीय सर्वेक्षण में कक्षा 3री के लिए भाषा, गणित एवं हमारे आसपास की दुनिया से 90 मिनट में 45 प्रश्न पूछे जाएँगे। कक्षा 6वीं के लिए उक्त विषयों से संबंधित 51 प्रश्न 90 मिनट में पूछे जाएँगे। कक्षा 9वीं में भाषा, गणित, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान के 60 प्रश्न 120 मिनट पर हल करने होंगे। परीक्षार्थियों को एक ही प्रश्न पत्र दिया जायेगा। परख मूल्याँकन माइनस मार्किंग नहीं होगी। केंद्र सरकार के नियमानुसार जिस माध्यम की शाला चयनित की गई, उस माध्यम की प्रथम भाषा पर सर्वे अर्थात् प्रश्नपत्र होगा । यदि अंग्रेजी माध्यम की कई शाला सेम्पल शाला के रूप में चयनित की जाती हैं, तो वहाँ अंग्रेजी भाषा में आकलन परीक्षा निर्धारित होगी ।

 राज्य में परख राष्ट्रीय सर्वेक्षण 2024 के लिए सेंपल शालाओं के रूप में जिले की शासकीय सहित राज्य शासन से अनुदान प्राप्त शालाओं, गैर अनुदान प्राप्त अशासकीय शालाओं, केंद्रीय, नवोदय विद्यालयों को सीधे भारत शासन, स्कूल शिक्षा वि नई दिल्ली द्वारा चयनित व निर्धारण किया गया है। छत्तीसगढ़ राज्य के लिए 33 जिलों में कुल 3420 को चुना गया है। इस मूल्याँकन सर्वेक्षण या परीक्षा की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि मूल्याँकन कार्य की पारदर्शिता और निष्पक्षता के लिए स्कूल शिक्षा विभाग के शासकीय या अशासकीय किसी भी शिक्षक को परीक्षक या पर्यवेक्षक के रूप में कार्य में नियुक्त नहीं किया जायेगा, बल्कि परीक्षा का मूलभूत कार्य राज्य के शासकीय डाइट कालेज में छात्राध्यापक या प्रशिक्षु शिक्षक अर्थात् अध्यनरत डीएलएड, बीएड एवं एमएड के प्रशिक्षणार्थियों द्वारा संपन्न कराया जायेगा ।

विशेष परिस्थिति में शासकीय कॉलेज के विद्यार्थी, अशासकीय प्रशिक्षण संस्थाओं के डीएलएड, बीएड, एमएड प्रशिक्षणार्थियों को लिया जा सकेगा। परीक्षा कार्य संपन्न कराने वाले ऐसे लगभग 3800 छात्राध्यापकों को जिले के 33 डाइट के माध्यम से प्रशिक्षित किया जा रहा है ताकि वे सुचारू पूर्वक परीक्षा कार्य बिना बाधा के पूरा करा सकें। इस सर्वेक्षण के पारदर्शी क्रियान्वयन हेतु भारत सरकार द्वारा सीबीएसई के प्रशासनिक व अकादमिक अमले को ऑब्जर्वर के रूप में नियुक्त किया गया है जो प्रत्येक निर्धारित परीक्षा केंद्र में मानटरिंग करेंगे। 

राज्य के विद्यार्थी अपनी शैक्षिक दक्षता का राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकें इसके लिए परख राष्ट्रीय सर्वेक्षण की पूर्व तैयारी के रूप में एससीईआरटी तथा समग्र शिक्षा राज्य परियोजना कार्या द्वारा राज्य के सभी स्कूलों के कक्षा 3री, 6वीं तथा 9वीं के विद्यार्थियों को प्रश्न बैंक एवं रीडिंग कार्ड उपलब्ध कराया गया है। उनके लिए विशेष तौर पर सभी निजी व सरकारी स्कूलों में मॉक टेस्ट का विशेष आयोजन किया जा रहा है। इस कार्य में राज्य के लगभग 146 निजी शिक्षा महाविद्यालयों के 19 हजार छात्र अध्यापकों का भी स्वैच्छिक सहयोग लिया जा रहा है।

छत्तीसगढ़ में शैक्षणिक संस्थानों के लिए 2024-25 शिक्षा सत्र के अवकाश की घोषणा

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रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन के स्कूल शिक्षा विभाग मंत्रालय महानदी भवन द्वारा शिक्षा सत्र 2024-25 के लिए राज्य के शैक्षणिक संस्थानों में अवकाश का आदेश जारी कर दी गई है। जारी आदेश के अनुसार शैक्षणिक सत्र के शिक्षा संस्था के लिए कुल 64 दिनों का अवकाश घोषित किए गए हैं।

जारी आदेश में दशहरा के अवसर पर 7 अक्टूबर से 12 अक्टूबर 2024 तक कुल 6 दिन का अवकाश घोषित किया गया है। इसी प्रकार दीपावली त्यौहार पर 28 अक्टूबर से 2 नवंबर 2024 तक कुल 6 दिन का अवकाश घोषित किया गया है। वहीं शीतकालीन अवकाश 23 दिसंबर से 28 दिसंबर 2024 तक कुल 6 दिन और ग्रीष्मकालीन अवकाश 1 मई से 15 जून 2025 तक कुल 46 दिन का अवकाश घोषित किया गया है। इस प्रकार कुल मिलाकर 64 दिन का अवकाश घोषित किया गया है।

मुख्यमंत्री साय की अपील : स्कूल में बच्चे और शिक्षक ’एक पेड़ अपनी मां के नाम’ लगाएंगे

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रायपुर। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को मन की बात में देशवासियों से एक पेड़ मां के नामलगाने के आह्वान पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने स्कूली बच्चों को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने के लिए एक पेड़ अपनी मां के नाम लगाने की अपील की है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा है कि एक पेड़ मां के नाम के आह्वान से बच्चों का पर्यावरण से जुड़ाव बढ़ेगा। इसमें पालकों और शिक्षकों को शामिल करने से निश्चित ही बड़े पैमाने पर पौध रोपण हो सकेगा। चूंकि सभी मां के नाम पर पेड़ लगाएंगे अतएव इसकी रख-रखाव भी बड़ी जिम्मेदारी से हो सकेगी।

मुख्यमंत्री की अपील के अनुपालन में स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी ने समस्त कलेक्टरों को विभागीय निर्देश जारी कर दिए हैं। अपने निर्देश में उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री साय की मंशा के अनुरूप हरियाली का दायरा बढ़ाने के लिए व्यापक स्तर पर काम करना है। चंूकि छात्र-छात्राएं देश का भविष्य है। अतः इन्हे जोड़कर पर्यावरण संरक्षण के लिए भी उपयोगी कार्य किया जा सकता है।

निर्देशों के अंतर्गत ऐसे स्कूल जहाँ अहाता है, उनके किनारे-किनारे छायादार पेड़ जैसे नीम, गुलमोहर, करंज, अशोक, अर्जुन आदि लगाये जाने कहा गया है। विद्यार्थी, शिक्षक तथा पालक अपने द्वारा लगाए गए पौधे का वृक्ष बनते तक पालन पोषण एवं सुरक्षा करेंगे। पौधारोपण हेतु उचित ऊँचाई के पौधे वन विभाग से प्राप्त किया जाना सुनिश्चित करने कहा गया है। पौधारोपण हेतु उचित मापदण्ड के गड्ढे कराने तथा आवश्यक मात्रा में मिट्टी एवं खाद स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कराने कहा गया है। पौधारोपण शाला प्रवेश उत्सव के दौरान किया जाएगा। इस हेतु जिले का शालावार कलेण्डर तैयार किया जाएगा। विद्यालयों में पौधारोपण के दौरान जन प्रतिनिधियों को भी आमंत्रित किया जाएगा। पौधारोपण के समय शिक्षक एवं छात्र-छात्राओं से पौधों को सुरक्षित रखने बाबत् शपथ ग्रहण भी कराएं जाने के निर्देश दिए गए हैं। 

पढ़ाई की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दें : मुख्यमंत्री साय

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 रायपुर :  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने स्कूल शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में कहा कि शिक्षा उन्नति का मूल मंत्र है। बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान की जाए। यह सुनिश्चित करें कि स्कूलों में अनुशासन बना रहे। विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी मैदानी स्तर पर जाकर स्कूलों में अध्ययन-अध्यापन की गुणवत्ता की मॉनिटरिंग करें। कलेक्टर भी हर माह दो से तीन स्कूलों का दौरा कर वहां निरीक्षण करें।


मुख्यमंत्री ने कहा कि सुशासन और पारदर्शी प्रशासन हमारा लक्ष्य है। राज्य सरकार का यह प्रयास होगा कि बच्चों को स्कूल का बेहतर भवन मिले और वहां पढ़ाई-लिखाई की अच्छी व्यवस्था सुनिश्चित हो। मुख्यमंत्री ने स्कूलों के जीर्णोद्धार कार्य की धीमी गति पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि जर्जर स्कूलों के जीर्णाेंद्धार के काम में ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कलेक्टर स्कूल भवनों की सुदृढ़ता की स्वंय मानिटरिंग करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि जर्जर स्कूलों के जीर्णाेंद्धार के लिए प्रारंभ की गई स्कूल जतन योजना के तहत जीर्णाेंद्धार कार्याें की जांच की जाए तथा स्कूल जतन योजना में आबंटित राशि का उपयोग कर कार्यों को पूरा किया जाए। समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने शिक्षकों और शालाओं के युक्ति-युक्तकरण के लिए प्रस्ताव अगले कैबिनेट की बैठक मंे प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। उन्हांेने कहा कि इससे शालाओं में शिक्षकों की कमी दूर करने में मदद मिलेगी। बैठक में मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत और डॉ. बसवराजू एस., स्कूल शिक्षा सचिव सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी भी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने मन की बात कार्यक्रम में ‘‘एक पेड़ मां के नाम‘‘ लगाने का आव्हान किया है। बारिश के मौसम में ऐसे स्कूल जहां चार दीवारी हो, वहां बच्चों से पेड़ लगवाए जाएं। बच्चे ही पेड़ों की देखभाल करें। नीम, गुलमोहर, करंज आदि प्रजातियों के पेड़ लगाए जाएं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि शिक्षकों को रोटेशन के आधार पर प्रशिक्षण देने के लिए प्रशिक्षण नीति तैयार की जाए, ताकि सभी शिक्षकों को प्रशिक्षण प्राप्त हो सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्कूलों से बच्चों के पालकों को भी जोड़ा जाए। छत्तीसगढ़ के शासकीय स्कूलों में इस वर्ष पहली बार 6 अगस्त को प्रदेशव्यापी मेगा-पीटीएम आयोजित किया जा रहा है।

आरटीई के तहत ड्राप आउट रोकने मेंटॉर होंगे नियुक्त

छत्तीसगढ़ में आरटीई के तहत गैर अनुदान प्राप्त अशासकीय विद्यालयों में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों के ड्राप आउट पर अंकुश लगाने के लिए जिलेवार अधिकारियों को मेंटॉर के रूप में नियुक्त किया जाएगा। इस संबंध में स्कूल शिक्षा सचिव ने सभी कलेक्टरों को पत्र लिखा है। मेंटॉर के रूप में नियुक्त अधिकारी आरटीई के तहत चयनित विद्यार्थियों का प्रवेश सुनिश्चित करेंगे। बच्चों को यदि कोई समस्या आती है तो उनके पालकों, शाला प्रबंधन और प्रशासन से मिलकर उसका समाधान करेंगे और पढ़ाई जारी रखने के लिए बच्चों और उनके पालकों को प्रोत्साहित करेंगे।


व्यावसायिक शिक्षा : बच्चों की स्किलिंग उद्योगों की जरूरत के मुताबिक हो

मुख्यमंत्री ने स्कूलों में व्यावसायिक पाठ्यक्रम को बेहतर गुणवत्ता के साथ संचालित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश के उद्योगों की जरूरत के मुताबिक बच्चों की स्किलिंग इस पाठ्यक्रम के माध्यम से हो, ताकि बारहवीं पास करने के बाद उन्हें वर्तमान और नए लगने वाले उद्योगों में आसानी से रोजगार के अवसर मिल सके। बच्चों को इसकी फिल्ड ट्रेनिंग भी दी जाए। गौरतलब है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत कक्षा 6 से व्यावसायिक पाठ्यक्रम शुरू किए जाएंगे।

बैठक में जानकारी दी गई कि छत्तीसगढ़ में छात्र-शिक्षक अनुपात राष्ट्रीय स्तर से बेहतर है। राष्ट्रीय स्तर पर 26 बच्चों पर एक शिक्षक है, जबकि छत्तीसगढ़ में छात्र-शिक्षक अनुपात 21.84 है। बालवाड़ी के संबंध में जानकारी दी गई कि 5 से 6 आयु वर्ग के बच्चों के लिए प्रदेश में 9,438 बालवाड़ियां संचालित है। इस वर्ष 1132 बालवाड़ी प्रारंभ की जानी है। पीएम योजना की समीक्षा के दौरान जानकारी दी गई कि प्रथम चरण में प्रदेश में यह योजना 211 स्कूलों में प्रारंभ की गई है। इस योजना के तहत प्रत्येक विकासखण्ड तथा नगरीय निकायों से एक-एक स्कूल का चयन कर उसे मॉडल स्कूल के रूप में विकसित किया जा रहा है। इस योजना में 198 स्कूलों में इस योजना को प्रारंभ करने के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। स्कूलों में बेहतर अधोसंरचना के साथ किचन-गार्डन, एआई रोबोटिक्स, आईसीटी लैब की सुविधा के साथ ग्रीन स्कूल के रूप में विकसित किया जाएगा। बैठक में बताया गया कि इस बार अधिकांश स्कूलों में समर कैम्प का आयोजन किया गया, जिसमें बच्चों और शिक्षकों ने उत्साह से भाग लिया।

विद्या समीक्षा केन्द्र के संबंध में बैठक में बताया गया कि स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा संचालित हितग्राहीमूलक योजनाओं की मॉनिटरिंग हेतु विद्या समीक्षा केन्द्र बनाया गया है। चरणबद्ध रूप से विद्यार्थियों एवं शिक्षकों की उपस्थिति की ऑनलाईन मॉनिटरिंग, विद्यार्थियों के मूल्यांकन, मध्यान्ह भोजन योजना, शिक्षकों की पदोन्नति-स्थानांतरण, अवकाश आदि की मॉनिटरिंग की जाएगी। डाटा विश्लेषण हेतु सॉफ्टवेयर तैयार करने के लिए आईआईटी भिलाई के साथ एमओयू किया गया है। बैठक में प्रबंध संचालक समग्र शिक्षा संजीव झा, संचालक लोक शिक्षण मती दिव्या उमेश मिश्रा, संचालक एससीईआरटी राजेन्द्र कटारा, पाठ्यपुस्तक निगम के संचालक कुलदीप शर्मा भी उपस्थित थे।

भाजपा सरकार नहीं चाहती कि ग़रीब बच्चे बड़े प्राइवेट स्कूलों में निःशुल्क शिक्षा प्राप्त करे : कांग्रेस

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 RAIPUR : कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता विकास तिवारी ने आज लोक आयोग में अपर संचालक डीपीआई,जेडी शिक्षा संभाग दुर्ग और डीओ रायपुर के ख़िलाफ़ लिखित शिकायत दस्तावेज़ो के साथ की.लगातार राजधानी रायपुर सहित पूरे प्रदेश में ग़ैर मान्यता वाले स्कूल को गली-कूचे के किराये के मकानों में खोलकर छात्र-छात्राओ के मौलिक अधिकार,बाल संरक्षण के अधिकारो की खुले तौर पर अवहेलना की जा रही है. प्रवक्ता विकास तिवारी ने बताया कि राजधानी रायपुर के गली कूचों में किराये के घरों में संचालित ग़ैर मान्यता वाले स्कूल के संरक्षक है स्कूल शिक्षा विभाग के आला अधिकारी और ज़िला शिक्षा कार्यालय के कर्मचारी इनकी बड़े स्कूल समूहों के साथ मिली भगत और साँठ-गाँठ के कारण राजधानी रायपुर के हज़ारो ज़रूरतमंद और ग़रीब छात्र-छात्राओ को आरटीई की सुविधा से वंचित रखा जा रहा है.


प्रवक्ता विकास तिवारी ने बताया कि लगातार प्रदेश के सबसे बड़े प्राइवेट स्कूल समूह के द्वारा गली-कूचों में संचालित ग़ैर मान्यता वाले स्कूलों की लिखित सबूत के साथ की गयी शिकायत को संयुक्त संचालक शिक्षा संभाग रायपुर और ज़िला शिक्षा अधिकारी रायपुर द्वारा किसी भी प्रकार की कार्यवाही न करते हुवे उन ग़ैर मान्यता वाले स्कूलों के संरक्षक के रूप में खड़े रहने का कार्य किया जा रहा है इन ग़ैर मान्यता वाले स्कूलों में फ़ीस नियामक के नियमों की अवहेलना करते हुवे पालकों से मोटा पैसा वसूला जाता है जो की अवैध वसूली की श्रेणी में आता है.शिक्षा विभाग के आला अधिकारियो और ज़िला शिक्षा कार्यालय के कर्मचारियों के द्वारा संगठित रूप से प्राइवेट स्कूल समूह के साथ मिलकर इस संगठित अपराध को अमलीजामा पहनाया जाता है.संयुक्त संचालक शिक्षा और ज़िला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के आस पास ही कई ग़ैर मान्यता वाले स्कूल संचालित हो रहे है और शिक्षा विभाग के आला अधिकारी इन स्कूलों के संरक्षक की भूमिका अदा कर रहे है.

प्रवक्ता विकास तिवारी ने बताया कि शिक्षा विभाग में प्राइवेट स्कूलों को दिये जाने वाले मान्यता के नाम पर बहुत बड़ा खेल चल रहा है जिसका ख़ामियाज़ा निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा में पढ़ने वाले बच्चो को उठाना पड़ रहा है शिक्षा विभाग के अधिकारियों के भ्रष्टाचार के कारण इन ग़रीब बच्चो से निःशुल्क शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार छीना जा रहा है प्रदेश के सबसे बड़े प्राइवेट स्कूल समूह के ख़िलाफ़ की गयी शिकायत शिक्षा विभाग के जाँच कमेटी द्वारा सही पाये जाने के बाद भी उक्त स्कूल समूह के ग़ैर मान्यता वाले स्कूलों को मान्यता देने के लिये शिक्षा विभाग के भ्रष्ट अधिकारी लालायित दिखाई दे रहे है.इन स्कूलों द्वारा सालों से पालकों से वसूले गये करोड़ों रुपयों की उगाही पर शिक्षा विभाग के अधिकारी मौन है और इन ग़ैर मान्यता वाले स्कूलों को छग शिक्षा संहिता के नियमों के विरुद्ध जाकर अवैध मान्यता दे रहे है.

प्रवक्ता विकास तिवारी ने कहा प्रदेश की भाजपा सरकार द्वारा दोषी अधिकारियों को संरक्षण देने का ग़ैरवाजिब काम किया जा रहा है भाजपा सरकार नहीं चाहती कि ग़रीब और ज़रूरतमंद बच्चे बड़े प्राइवेट स्कूलों में निःशुल्क शिक्षा प्राप्त करे कि लोक आयोग में शिकायत,साक्ष्य सहित प्रस्तुत किया है आयोग से जल्द न्याय की उम्मीद है ताकि आगामी शिक्षण सत्र से ज़रूरतनंद और ग़रीब छात्र-छात्राओं को आरटीई के तहत प्राइवेट स्कूलों में निःशुल्क शिक्षा मिल सके.लोक आयोग से उक्त शिक्षा विभाग के अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी कार्यवाही की माँग की गयी है.

 

स्कूलों के सफाई कर्मियों और रसाईयों को मिली बड़ी राहत

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की घोषणा पर त्वरित अमल कर स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा स्कूलों में कार्यरत् अंशकालीन सफाई कर्मी एवं मध्यान्ह भोजन से जुड़े रसोईयों के मानदेय में 500 रूपए प्रति माह वृद्धि के आदेश जारी कर दिया गया है।

स्कूल शिक्षा विभाग मंत्रालय महानदी भवन से जारी आदेश से छत्तीसगढ़ के स्कूलों में कार्यरत् लगभग 43 हजार अंशकालीन सफाई कर्मियों और मध्यान्ह भोजन बनाने वाले लगभग 87 हजार 500 रसोईयों को बड़ी राहत मिली है। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार इनके मानदेय में 500 रुपए की बढ़ोतरी की गई है। स्कूल शिक्षा विभाग ने वित्त विभाग की ओर से पखवाड़े भर पहले वृद्धि पर सहमति प्रदान करने के बाद यह बढ़ोतरी की है। जारी आदेश के अनुसार रसाईयों का मानेदय 1500 रूपए से बढ़कर अब 2000 रूपए हो जाएगा और सफाई कर्मियों के मानदेय में 500 रूपए की वृद्धि हो जाएगी।

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राजधानी रायपुर में आयोजित 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस के मुख्य समारोह में छत्तीसगढ़ में शिक्षा सुविधाओं में योगदान देने वाले अंशकालीन सफाई कर्मी एवं मध्यान्ह भोजन से जुड़े रसोईयों के मानदेय में 500 रूपए प्रति माह वृद्धि की घोषणा की थी।

शिक्षकों की पदोन्नति उपरांत किए गए संशोधन आदेश निरस्तीकरण के संबंध में निर्देश

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रायपुर। संभागीय संयुक्त संचालक शिक्षा द्वारा पदोन्नति उपरांत किए गए संशोधन आदेश निरस्तीकरण के संबंध में सभी संयुक्त संचालक और जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी किए गए हैं। महाधिवक्ता कार्यालय के अभिमत अनुसार जिन शिक्षकों के संशोधित आदेश निरस्त किए गए थे, यदि वह स्वयं की इच्छा से अपने मूल पदस्थापना स्थल (जहां पदोन्नति उपरांत सर्व प्रथम पदस्थ किया गया था) कार्यभार ग्रहण करना चाहते हैं तो उन्हें कार्यभार ग्रहण कराया जाए।


स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा मंत्रालय से आज जारी निर्देश में संबंधित अधिकारियों से कहा गया है कि इस संबंध में माननीय उच्च न्यायालय बिलासपुर में दायर प्रकरण में पारित निर्णय 11 सितम्बर 2023 के परिप्रेक्ष्य में महाधिवक्ता कार्यालय से अभिमत चाहा गया था, संबंधित अधिकारी महाधिवक्ता कार्यालय द्वारा दिए गए अभिमत के अनुसार नियमानुसार कार्यवाही सुनिश्चित करें।

महाधिवक्ता कार्यालय से यह भी अभिमत दिया गया है कि किसी शिक्षक के विरूद्ध व्यक्तिगत अवचार का कोई प्रकरण उपस्थित होता है तो उनके विरूद्ध विभागीय अनुशासनात्मक कार्यवाही की जा सकती है। माननीय उच्च न्यायालय द्वारा केवल 04 सितम्बर 2023 के आदेश के संबंध में 11 सितम्बर 2023 की स्थिति में यथास्थिति का आदेश दिया गया है।

आगामी शिक्षा सत्र से छत्तीसगढ़ भाषा एवं आदिवासी क्षेत्रों में स्थानीय बोली को कक्षा 1 से 5 तक के पाठ्यक्रम में शामिल करने की कार्यवाही शुरू

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रायपुर। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा आगामी शिक्षा सत्र से छत्तीसगढ़ भाषा एवं आदिवासी क्षेत्रों में स्थानीय बोली को कक्षा 1 से 5 तक के पाठ्यक्रम में शामिल करने की कार्यवाही शुरू कर दी है। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) के संचालक राजेश सिंह राणा ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा की गई इस घोषणा पर कार्यवाही के लिए बैठक लेकर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।

राजेश सिंह राणा ने मुख्यमंत्री की घोषणा से अवगत कराते हुए सभी अशासकीय संगठनों से बहुभाषा शिक्षण के क्षेत्र में उनके द्वारा किए गए कार्याें और अनुभव की संक्षिप्त जानकारी ली। उन्होंने मूलभूत साक्षरता और संख्यात्मकता (एफएलएन) के भाषागत लक्ष्यों, सीखने के प्रतिफलों को ध्यान में रखते हुए एससीईआरटी की अकादमिक टीम के साथ सहयोग करने कहा। राणा ने इस कार्य के लिए कक्षा 1 से कक्षा 5 तक सर्वप्रथम छत्तीसगढ़ी भाषा (रायपुर एवं बिलासपुर संभाग), सरगुजिहा, हल्बी, गोड़ी, सादरी, कुडुख स्थानीय भाषाओं में 15 सितम्बर तक प्रथम पांडुलिपि तैयार कर प्रस्तुत करने कहा है। अशासकीय संगठनों के प्रतिनिधियों ने कक्षा 1 से 3 तक इस क्षेत्र में कार्य किए जाने वाली स्थानीय भाषाओं में पाठ्य सामग्री निर्माण कर, दी गई समय सीमा में प्रस्तुत करने का आश्वासन दिया है। इसे स्थानीय भाषाओं के लिए पूर्व तैयार की गई समितियों के मध्य आगामी 15 सितम्बर को चर्चा हेतु प्रस्तुत किया जाएगा।

अगले शिक्षा सत्र से छत्तीसगढ़ी भाषा एवं आदिवासी क्षेत्रों में स्थानीय बोली को कक्षा 1 से कक्षा 5 तक के पाठ्यक्रम में एक विषय के रूप में सम्मिलित करने के संबंध में आयोजित बैठक में परिषद् की उपसंचालक श्रीमती पुष्पा किस्पोट्टा, पाठ्यपुस्तक लेखन के प्रकोष्ठ प्रभारी वी.के. तिवारी, सहायक संचालक, सुशील राठोड़, सहायक प्राध्यापक, डॉ. जयभारती चंद्राकर, स. प्रकोष्ठ प्रभारी बहु भाषा शिक्षण, एस.के.तंबोली, व्याख्याता तथा अशासकीय संगठनों से राधेश्याम थवाईत (अज़ीम प्रेमजी फाउंडेशन), रंधीर एवं प्रदीप (रूम टू रीड फाउंडेशन), संजय गुलाटी एवं मधुलिका झा (लैंग्वेज लर्निंग फाउंडेशन), सुश्री रागिनी मेहरा (संपर्क फाउंडेशन) उपस्थित थे।

स्कूल शिक्षा विभाग में संभागीय संयुक्त संचालक और जिला शिक्षा अधिकारी की नवीन पदस्थापना

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रायपुर। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा मंत्रालय से आज जारी आदेशानुसार जिला शिक्षा अधिकारी रायपुर आर.एल.ठाकुर को संयुक्त संचालक दुर्ग, संभागीय संयुक्त संचालक बस्तर आर.पी. आदित्य को संभागीय संयुक्त संचालक बिलासपुर, जिला शिक्षा अधिकारी संजय गुप्ता को संभागीय संयुक्त संचालक सरगुजा

जिला शिक्षा अधिकारी जांजगीर एच.आर. सोम को संभागीय संयुक्त संचालक बस्तर, सहायक संचालक महासमुन्द हिमांशु भारती को जिला शिक्षा अधिकारी रायपुर और प्राचार्य शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मेंड्राकला जिला सरगुजा सुश्री भारती वर्मा को जिला शिक्षा अधिकारी जांजगीर पदस्थ किया गया है।

स्वामी आत्मानंद हिन्दी माध्यम स्कूलों में 9117 पदों पर होगी भर्ती

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रायपुर। स्वामी आत्मानंद हिन्दी माध्यम के 318 स्कूलों में 9117 पदों पर भर्ती की जाएगी। इसको लेकर प्रक्रिया शुरू हो गई है। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा आत्मानंद स्कूलों में विभिन्न पदों की भर्ती के लिए नियमावली जारी कर दी गई है। सभी पद स्कूल शिक्षा विभाग से प्रतिनियुक्ति पर ही भरे जाएंगे। प्रत्येक स्कूल हेतु कलेक्टर की अध्यक्षता में एक सोसायटी का गठन किया गया है। इन स्कूल के संचालन हेतु गठित सोसायटी को भर्ती एवं स्कूल संचालन के अधिकार हस्तांतरित किए गए हैं।

स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट हिन्दी स्कूलों में प्राचार्य, उप प्राचार्य, व्याख्याता, प्रधान पाठक (प्राइमरी एवं मीडिल स्कूल), शिक्षक, व्यायाम शिक्षक, कम्प्यूटर शिक्षक, सहायक शिक्षक, सहायक शिक्षक विज्ञान (प्रयोगशाला), ग्रंथपाल, लेखापाल एवं सहायक ग्रेड-02, सहायक ग्रेड-03, भृत्य, चौकीदार एवं अंशकालीन सफाई कर्मी के पद पर भर्ती की जाएगी। इसके लिए राज्य शासन द्वारा सोसायटी को पद अंतरित कर दिए गए हैं। उल्लेखनीय है कि राज्य शासन द्वारा पूर्व में लिए गए निर्णय के अनुसार प्रदेश में शिक्षा सत्र 2022-23 से 32 स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट हिन्दी माध्यम विद्यालयों का संचालन कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित समिति को सौंपा गया था।

स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा स्कूल संचालन के संबंध में सोसायटी की नियमावली तय की गई है, जिसके अनुसार विद्यालय के संचालन के लिए पंजीकृत सोसायटी के राज्य शासन द्वारा अनुदान उपलब्ध कराया जाएगा और सोसायटी अन्य स्त्रोतों से भी धन जुटा सकेगी। विद्यालय के संचालन हेतु आवश्यक पद शासन की अनुमति से समिति द्वारा निर्मित किए जा सकेंगे। राज्य शासन द्वारा सोसायटी को अंतरित किए गए सभी पदों को सोसायटी केवल राज्य शासन के स्कूल शिक्षा विभाग से प्रतिनियुक्ति पर ही भर सकेगी। इन पदों पर सोसायटी द्वारा सीधी भर्ती अथवा संविदा नियुक्ति नहीं की जाएगी। इन स्कूलों में वर्तमान में पदस्थ कर्मचारियों को प्रतिनियुक्ति पर लेना सोसायटी के लिए अनिवार्य नहीं होगा। यदि सोसायटी इन कर्मचारियों को स्कूल के लिए उपयुक्त पाती है और यह कर्मचारी सोसायटी में प्रतिनियुक्ति पर कार्य करना चाहते हैं तो सोसायटी उन्हें प्रतिनियुक्ति पर ले सकेगी, अन्यथा सोसायटी राज्य शासन स्कूल शिक्षा विभाग के अन्य कर्मचारी को प्रतिनियुक्ति पर ले सकेगी।

गौरतलब है कि प्रदेश में सत्र 2022-23 से 32 स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट माध्यम विद्यालयों का संचालन कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित समिति को सौंपा गया था। इस योजना की सफलता को देखते हुए राज्य शासन ने निर्णय लिया है कि अब प्रदेश में 318 स्कूलों को स्वामी आत्मानंद हिन्दी माध्यम उत्कृष्ट के रूप में विकसित किया जाएगा। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी सूची के अनुसार इन 318 स्कूलों में से सबसे अधिक दंतेवाड़ा जिले में 54, बस्तर जिले में 43, कोरबा में 37, कांकेर और रायगढ़ जिले में 30-30, बीजापुर जिले में 22, सुकमा जिले में 18, दुर्ग और बिलासपुर जिले में 13-13 स्कूलों को स्वामी आत्मानंद हिन्दी माध्यम उत्कृष्ट विद्यालय के रूप में विकसित किया जाएगा। इसी प्रकार जिला बालोद में 10, बलौदाबाजार में 8, जांजगीर-चांपा और सांरगढ़-बिलाईगढ़ में 6-6, कोण्डागांव में 5, जशपुर और बलरामपुर में 4-4, सरगुजा और सूरजपुर में 3-3, गरियाबंद, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही और नारायणपुर में 2-2, धमतरी, कोरिया और कबीरधाम जिले में 1-1 स्कूलों को स्वामी आत्मानंद हिन्दी माध्यम उत्कृष्ट विद्यालय के रूप में विकसित किया जाएगा।

शाला प्रवेश उत्सव 16 जून से : स्कूलों में मुख्यमंत्री और स्कूल शिक्षा मंत्री के संदेश का होगा वाचन

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रायपुर। राज्य में इस साल शाला प्रवेश उत्सव 16 जून से 15 जुलाई तक मनाया जाएगा। इस दौरान बच्चों के प्रवेश के साथ ही विभिन्न गतिविधियों का आयोजन होगा। एक माह तक चलने वाले शाला प्रवेश उत्सव के शुरूआती 10 दिनों के लिए जनभागीदारी सुनिश्चित करते हुए विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। प्रथम दिवस सभी स्कूलों में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम के संदेश का वाचन होगा।

जनप्रतिनिधियों द्वारा नवप्रवेशी बच्चों का स्वागत, बच्चों को मिलने वाले विभिन्न सुविधाओं का वितरण किया जाएगा। जनप्रतिनिधियों द्वारा स्कूल के विकास हेतु शपथ एवं विचार व्यक्त किए जाएंगे। बच्चों द्वारा विविध सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया जाएगा। शाला में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों का सम्मान और पालकों का स्कूल के बारे में अभिमत और मुख्य अतिथि का उद्बोधन होगा।    

शाला प्रवेश उत्सव आयोजन के लिए स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. आलोक शुक्ला ने सभी जिला कलेक्टर और जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को निर्देशित किया है कि शाला प्रवेश उत्सव को जन-जन का अभियान बनाने के लिए व्यक्तिगत रूचि लेते हुए इसे सभी स्तर पर सफल बनाएं ताकि  शत्-प्रतिशत बच्चों को शाला में प्रवेश एवं ठहराव सुनिश्चित करते हुए उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देकर समग्र शिक्षा की लक्ष्य की प्राप्ति की जा सके। सत्र प्रारंभ होने से पहले शाला प्रबन्धन समिति की विशेष बैठक का आयोजन करने कहा गया है। शाला प्रवेश उत्सव आयोजन के संबंध में व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए गए हैं। 

प्रवेश उत्सव के दौरान प्रथम दिवस राज्य स्तरीय कार्यक्रम का सभी शालाओं में आयोजन किया जाए। शाला प्रवेश उत्सव के द्वितीय दिवस- शाला में बड़े कक्षाओं के विद्यार्थी, शिक्षा में रूचि लेने वाले युवाओं, माताओं एवं सेवानिवृत्त व्यक्तियों की बैठक लेकर अपने क्षेत्र को शून्य ड्राप आउट गाँव घोषित करने आवश्यक कार्यवाहियों, प्रतिदिन प्रभात फेरी निकाले जाने की प्रक्रिया एवं रूट चार्ट, घर-घर संपर्क की प्रक्रिया का विवरण एवं अभ्यास, नुक्कड़ नाटक का अभ्यास, शाला से बाह्य बच्चों को मुख्यधारा में जोड़ने के प्रयास आदि पर चर्चा एवं बच्चों को तैयार किया जाएगा।

तृतीय दिवस - बड़ी कक्षाओं के बच्चों को घर-घर संपर्क कार्यक्रम के अंतर्गत कैसे प्रत्येक घर मैं जाकर पालकों से संपर्क कर उन्हें अपने बच्चों को नियमित शाला भेजने प्रेरित किया जाएगा। घरों में यदि अप्रवेशी, प्रवेश योग्य बच्चे एवं अनियमित उपस्थिति वाले बच्चे हैं तो उन्हें शाला में प्रवेश दिलवाते हुए नियमित शाला आने के लिए आवश्यक वातावरण तैयार करेंगे। बड़ी कक्षा के बच्चे यह कार्य प्रतिदिन तब तक करेंगे जब तक कि शाला जाने योग्य आयु के सभी बच्चों को ये शाला नियमित आने के लिए सहमत न कर लेवें एवं प्रवेश प्रक्रिया पूरी न कर लें।

चतुर्थ दिवस-बच्चों में आकांक्षा स्तर विकसित कर उनके लिए आगे जीवन में विकास के क्षेत्रों की पहचान करने, विभिन्न रोजगार के अवसर से परिचित करवाने एवं आसपास का भ्रमण कर विभिन्न रोजगारों से परिचित करवाएंगे। विगत वर्षों में सभी शालाओं में गढ़बो नवा छत्तीसगढ़नामक पुस्तक बच्चों को एवं स्कूल में उपलब्ध करवाई गयी है। इस पुस्तक को सभी बच्चों को पढ़वाएं एवं इस पुस्तक में लिखी गयी कहानियों एवं चित्रों पर आगामी दो तीन दिनों तक बच्चों को दिखाते हुए चित्रों एवं कहानियों पर चर्चा आयोजित करें।

पंचम दिवस-बच्चों को साधारण गणित के सवाल देकर बनाने का अभ्यास करवाया जाएगा। शाला में उपलब्ध गणित किट गणित की सहायक सामग्री एवं गणित के रोचक खेल आदि का संकलन कर बच्चों से दिन भर अकेले एवं समूह में रहकर विभिन्न सवालों को हल करवाएं। बच्चों से कुछ मौखिक गणित के सवाल भी हल करवाते हुए उन्हें गणित में रूचि विकसित करने का प्रयास किया जाए।

छठवां दिवस-प्रत्येक शाला में खेलगढ़िया के अंतर्गत खेल सामग्री उपलब्ध करवाई गयी है। प्रवेशोत्सव के छठवें दिवस सभी शालाओं में बच्चों को आमंत्रित कर उन्हें विभिन्न खेलकूद में शामिल करते हुए उनका उत्साहवर्धन करें। छोटी कक्षा में बच्चों को सीखने में सहयोग करने हेतु खिलौने बनाने की प्रतियोगिता भी आयोजित कर स्कूल के लिए समुदाय की मदद से खिलौने एकत्र करने एवं स्थानीय संसाधनों से विभिन्न खिलौने बनाए जाने का कार्य भी करवाएं। पुस्तकालय संचालन के सम्बन्ध में रंगोत्सव सामग्री का अध्ययन कर लिया जाए।

सातवां दिवस-सभी शालाओं में संचालित मुस्कान पुस्तकालय से बच्चों को अपनी इच्छा से पुस्तकें लेकर उन्हें पढ़ने, समझने एवं जोड़ी में पढ़ी गयी पुस्तकों पर आपस में चर्चा करने के अवसर दिया जाए। बच्चों में पढ़ने में रूचि विकसित करने के साथ-साथ पढ़ने के स्पीड का भी आकलन करने की व्यवस्था की जाए। बच्चों को पूरे सत्र में समझ के साथ-साथ अधिक से अधिक स्पीड में पुस्तकों को पढ़ने का अभ्यास करने हेतु प्रेरित किया जाए।

आठवां दिवस-कुछ दिन पहले से ही आसपास के समुदाय के बड़े-बुजुर्गों को किसी एक स्थल में आमंत्रित कर बच्चों के छोटे-छोटे समूह में कहानी सुनाने का अवसर दिया जाए। बड़े कक्षाओं के बच्चों को इन कहानियों को सुनकर कागज में लिखने की जिम्मेदारी दी जाए। स्थानीय युवाओं को ऐसी बेहतर कहानियों को मोबाइल से रिकार्ड कर उनका पोडकास्ट बनाने हेतु प्रेरित करें। इन पोडकास्ट को जिले एवं राज्य स्तर पर भिजवाते हुए व्यापक स्तर पर उपयोग करने के अवसर प्रदान किया जाए।

नवम दिवस-इस दिन समुदाय में बोले जाने वाली प्रचलित स्थानीय भाषा में सामग्री तैयार करने हेतु आवश्यक प्रक्रियाएं अपनाएं। बड़े-बुजुगों द्वारा सुनाई गयी कहानियों एवं प्रचलित कहानियों पर स्थानीय भाषा में कहानी पुस्तकें तैयार कर प्रत्येक स्कूल के पुस्तकालय में रखवाएं। प्रवेशोत्सव के दौरान प्रत्येक स्कूल में कम से कम दस कहानी की पुस्तकें जनसहयोग से तैयार करवाते हुए उपयोग में लाई जाए। इन पुस्तकों को बाद में एक दूसरे के स्कूलों में बदलकर पढ़ने के अवसर दिए जा सकते हैं, शालाओं को प्रदाय की गई स्थानीय सामग्री का उपयोग एवं अध्ययन करें।

दसवां दिवस-इस दिन अवकाश के अवसर पर अधिक से अधिक समुदाय के सदस्यों को पहले से आमंत्रित करते हुए कम से कम आधे दिन का कार्यक्रम आयोजित किया जाए। समुदाय के साथ शाला विकास योजना, शाला एवं परिसर का सुरक्षा ऑडिट बच्चों का सामाजिक अंकेक्षण, अनियमित उपस्थिति एवं रोजगार के लिए लंबी अवधि तक बाहर रहने वाले बच्चों के पालकों से संपर्क कर उन्हें नियमित उपस्थिति के लिए प्रेरित किया जाए। पालकों एवं समुदाय को निपुण भारत शपथ लेकर सभी बच्चों को सीखने-सिखाने के लिए जागरूक करना एवं घर पर बच्चों की पढ़ाई पर नियमित रूप से विशेष ध्यान देने हेतु पालकों को तैयार किया जाना होगा। इस दौरान शाला सुरक्षा योजना एवं शाला संकुल योजना से संबंधित सामग्री का उपयोग एवं अध्ययन कर लिया जाए।

BIG-NEWS : छत्तीसगढ़ में ब्लैक लिस्टेड हुई ‘आईसेक्ट’, शिक्षा विभाग की बड़ी कार्रवाई

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रायपुर। कम्प्यूटर प्रशिक्षण देने वाली संस्था आईसेक्ट यानी ऑल इंडिया सोसायटी फॉर इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्प्यूटर टेक्नोलॉजी को छत्तीसगढ़ में ब्लैक लिस्टेड कर दिया गया है। स्कूल शिक्षा विभाग ने ये कार्रवाई की है। प्रदेश में आईसेक्ट कम्प्यूटर प्रशिक्षण देने का काम सालों से कर रही है, अब तक लाखों छात्रों ने यहां से संचालित होने वाले कोर्स किए है। लोक लेखा समिति ने यहां 1.82 करोड़ की गड़बड़ी पकड़ी थी, जिसके बाद समिति की अनुशंसा के आधार पर ही ये कार्रवाई की गयी है।


आईसेक्ट संस्था ने साल 2001 से साल 2004 के बीच प्रदेश के स्कूलों में इंदिरा सूचना शक्ति योजना के तहत कम्प्यूटर प्रशिक्षण का कार्य कराया गया था। लोक लेखा समिति ने अपने 36वें प्रतिवेदन में इस योजना के दोषपूर्ण क्रियान्वयन के लिए 1.82 करोड़ का अनियमित भुगतान पाया गया। जिस पर विभाग द्वारा संस्था को नोटिस भी जारी किया गया था लेकिन आईसेक्ट संस्था ने समिति के सर्वे को ही अविश्वसनीय बता दिया।इसके बाद समिति ने ही आईसेक्ट को ब्लैक लिस्टेड करने की अनुशंसा की और फिर शिक्षा विभाग के अवर सचिव ने सोमवार को इसका आदेश जारी किया है।


‌पहले डिग्री को लेकर भी उठे हैं सवाल


आईसेक्ट कम्प्यूटर का प्रशिक्षण देने वाली संस्था है। पिछले कई सालों से छात्रों को कम्प्यूटर आधारित डिग्री और डिप्लोमा का कोर्स यहां कराया जाता है। कई सरकारी स्कूलों और विभिन्न संस्थाओं में वोकेशनल ट्रेनिंग भी आईसेक्ट के द्वारा आयोजित की जाती रही है। प्रदेश में लाखों युवाओं ने इस संस्था से ट्रेनिंग ली है लेकिन नौकरी के समय इस संस्था की डिग्रियों को ही अमान्य कर दिया गया था। जिससे इसकी मान्यता और विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे थे। आईसेक्ट द्वारा कम्प्यूटर प्रशिक्षण केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं बल्कि देश के अन्य राज्यों में भी दिया जाता है। ऐसे में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा इस संस्था को ब्लैक लिस्टेड किए जाने के बाद प्रदेश में किसी भी तरह के सरकारी प्रशिक्षण या कोर्स इस संस्था के द्वारा आयोजित नहीं किए जा सकेंगे।

स्कूल खुलते ही विद्यार्थियों को मिलेंगी पाठ्यपुस्तकें : डिपो से स्कूलों एवं संकुलों में पहुंची पुस्तकें

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रायपुर। स्कूल शिक्षा विभाग ने शैक्षणिक सत्र 2023-24 के पहले दिन सभी विद्यार्थियों को निःशुल्क पाठ्यपुस्तक प्रदाय किए जाने का पूरा प्रबंध कर लिया है। इसके लिए पाठ्यपुस्तक निगम के डिपो से पुस्तकें शासकीय, मान्यता प्राप्त तथा निजी स्कूलों के कक्षा 1 से लेकर 10वी तक के विद्यार्थियों के वितरण हेतु हाईस्कूलों एवं संकुलों को प्रदाय कर दी गई है।

शिक्षा विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार राज्य में नवीन शिक्षा सत्र 16 जून से शुरू  होगा। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल एवं शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम के निर्देशानुसार शिक्षा सत्र के शुरूआती दिन ही निःशुल्क पुस्तकें एवं गणवेश का वितरण समारोहपूर्वक किया जाना है। इसको ध्यान में रखते हुए शिक्षा विभाग ने मुद्रित पुस्तकों को जिलों के डिपो में और वहां से हाईस्कूलों और संकुलों में भिजवा दिया है। अब तक राज्य के 4615 हाई स्कूलों में से 4572 में विद्यार्थियों को वितरण के लिए पुस्तकें भिजवा दी गई है। इसी तरह राज्य के 5703 संकुलों में से 3175 संकुलों में प्राथमिक एवं माध्यमिक शाला के विद्यार्थियों के लिए पुस्तकें पहुंचा दी है। स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय में भी डिमांड के अनुसार पुस्तकें भेजी जा रही है। अब तक 432 आत्मानंद स्कूलों में से 369 में विद्यार्थियों के लिए पुस्तकें भेज दी गई है।

निःशुल्क पाठ्यपुस्तक वितरण के लिए रायपुर डिपो से 1559 हाईस्कूलों में से 1523, 1714 संकुलों में से 705 में  और 143 स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट स्कूलों में से 88 स्कूलों में पुस्तकें पहुंच चुकी है। बिलासपुर डिपो से सभी 881 हाईस्कूलों में,  961 संकुल में से 952 और 73 स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट स्कूलों में से 72 स्कूलों के लिए पुस्तकें वितरण के लिए पहुंच चुकी है। जगदलपुर डिपो से सभी 523 हाईस्कूल में, 874 संकुल में से 459 और 74 स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट स्कूलों में से 73 स्कूलों के लिए पुस्तकें वितरण हेतु पहुंच चुकी है।

अंबिकापुर डिपो से सभी 581 हाईस्कूल में, 882 संकुल में से 432 और सभी 61 स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट स्कूलों के लिए पुस्तकें वितरण हेतु पहुंच चुकी है। रायगढ़ डिपो से सभी 428 हाईस्कूलों में पुस्तकें पहुंच चुकी है, जबकि 620 संकुल में से 191 तथा सभी 40 आत्मानंद स्कूलों के लिए पुस्तकें पहुंचाई जा चुकी है। इसी प्रकार राजनांदगांव डिपो से 642  हाई स्कूलों में से 636, 652 संकुल केन्द्रों में से 436 और 41 स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट स्कूलों में से 38 के लिए पुस्तकें वितरण हेतु पहुंच चुकी है। शेष हाईस्कूलों एवं संकुल केन्द्रों में पुस्तकों के पहुंचाने की प्रक्रिया जारी है।


नवीन शिक्षा सत्र 2023 : स्कूलों के भवनों का रेनोवेशन कार्य 15 जून से पूर्व करने के निर्देश

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रायपुर। स्कूलों का नवीन शिक्षा सत्र 16 जून 2023 से प्रारंभ होगा। प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा विभाग आलोक शुक्ला ने विभाग की प्राथमिकता वाली योजनाओं को नवीन शिक्षा सत्र के प्रारंभ होने के पूर्व पूर्ण करने के निर्देश सभी जिला कलेक्टरों को दिए गए है। स्कूलों के भवनों का रेनोवेशन कार्य 15 जून 2023 के पूर्व करने को कहा है। छूट गए सभी स्कूल भवनों, आश्रम, छात्रावासों आदि का सर्वेक्षण कराके तथा मरम्मत एवं अतिरिक्त कक्ष के निर्माण के प्राक्कलन तत्काल कराकर एक सप्ताह में विभागीय पोर्टल पर अपलोड कराने के निर्देश दिए गए है।


सभी स्कूलों में पुस्तकें, गणवेश एवं पात्र बालिकाओं के लिए निःशुल्क सायकल मई-जून के माह पहुंचाकर 16 जून को प्रारंभ होने वाले नवीन शिक्षा सत्र के प्रथम दिन ही इन सबका वितरण पात्र विद्यार्थियों को अनिवार्य रूप से करने कहा गया है। प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा डॉ. आलोक शुक्ला ने कलेक्टरों को जारी पत्र में कहा है कि प्रदेश में 247 स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम स्कूल तथा 32 स्वामी आत्मानंद हिन्दी माध्यम स्कूल संचालित है। स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में हिन्दी माध्यम से पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए भी व्यवस्था की गई है। इस तारतम्य में नवीन शिक्षा सत्र प्रारंभ होने के पूर्व बड़ी संख्या में स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम स्कूल प्रारंभ किए जाने का निर्णय लिया गया है।

जिला कलेक्टरों के द्वारा 398 स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट स्कूलों को प्रारंभ करने का निर्णय लिया गया है। इसकी सूची विभाग के पोर्टल पर अपलोड की गई है। इस सूची में शामिल सभी स्कूल भवनों के रेनोवेशन का कार्य डीएमएफ, सीएसआर और जिला स्तर पर उपलब्ध अन्य प्रकार के राशियों से किया जाए। जिससे यह कार्य आगामी शिक्षा सत्र के प्रारंभ होने के पूर्व पूर्ण हो जाए। वर्ष 2023-24 के लिए विधानसभा के समक्ष प्रस्तुत किए गए बजट प्रस्ताव में 101 स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम स्कूलों की स्वीकृति दी गई है। इनमें कुछ स्कूल कलेक्टरों द्वारा प्रस्तावित स्कूलों में शामिल नहीं है। इन स्कूलों के भवनों का भी रेनोवेशन कर विभाग के पोर्टल पर अपलोड करें।

प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा ने कलेक्टरों से कहा है कि विभाग का प्रयास है कि मुख्यमंत्री द्वारा घोषित स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट स्कूल प्रारंभ करने वित्त विभाग से स्वीकृति प्राप्त कर उन्हें 16 जून से प्रारंभ होने वाले नवीन अकादमिक वर्ष से प्रारंभ कर दिया जाए। इसलिए ऐसे स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम स्कूल जिनकी घोषणा मुख्यमंत्री ने की है और अभी तक बजट में शामिल नहीं किया जा सका है तथा जो कलेक्टरों के द्वारा प्रस्तावित 398 स्कूलों में भी शामिल नहीं है। इन स्कूलों की भवनों के रेनोवेशन के लिए आर्किटेक्ट से नक्शा बनाकर तत्काल कार्य प्रारंभ कर 16 जून से प्रारंभ करने की पूर्ण तैयारी रखी जाए। इन सभी स्कूलों की सेटअप की स्वीकृति बजट पारित होने के उपरांत अप्रैल माह के प्रारंभ में वित्त विभाग की सहमति से जारी की जाएगी। यहां अंग्रेजी माध्यम के शिक्षकों की नियुक्ति भी कलेक्टरों द्वारा 16 जून के पूर्व की जानी है। इसके लिए तैयारी अभी से प्रारंभ कर दें।

मुख्यमंत्री  भूपेश बघेल द्वारा मुख्यमंत्री स्कूल जतन योजनामें यह घोषणा की गई है कि स्कूलों, आश्रम शालाओं, छात्रावासों आदि की मरम्मत एवं रेनोवेशन का कार्य तत्काल प्रारंभ किया जाए, यदि कोई भवन जर्जर हो गया है और उसका उपयोग करना खतरनाक हो गया है, तो उन भवनों के डिमोलाइजेशन का कार्य भी तत्काल किया जाए। जिन स्कूलों में दर्ज संख्या अधिक है और वहां पर कमरे कम है तो अतिरिक्त कमरे की स्वीकृति भी दी जाए। यह सभी कार्य मुख्यमंत्री स्कूल जतन योजनाके अंतर्गत किया जाए। इसके लिए पर्याप्त धन राशि उपलब्ध है। योजना के अंतर्गत कराये जाने वाले कार्यों के विस्तृत निर्देश पूर्व में जारी किए जा चुके है।

जिलों द्वारा विभागीय पोर्टल पर अपलोड किए गए 11 हजार 375 भवनों के प्राक्कलन के आधार पर संचालक लोक शिक्षण एवं प्रबंध संचालक समग्र शिक्षा द्वारा प्रशासकीय स्वीकृति भी जारी की जा चुकी है। इन कार्यों के लिए प्रथम किस्त के रूप में 200 करोड़ रूपए की राशि विमुक्त की जा चुकी है। विमुक्त की गई राशि से 70 प्रतिशत व्यय होने के बाद अगली किस्त दी जाएगी। जिन जिलों में मरम्मत योग्य भवन और दर्ज संख्या अधिक होने के बावजूद अतिरिक्त कमरे बनाने का प्रस्ताव भी छूट गया है वहां सभी स्कूली भवनों, आश्रम, छात्रावासों आदि का सर्वेक्षण कराके तथा मरम्मत एवं अतिरिक्त कक्ष निर्माण के प्राक्कलन तत्काल तैयार कर एक सप्ताह में विभागीय पोर्टल पर अपलोड कराये।

यह ध्यान रखा जाए कि मरम्मत कार्य और डिमोलाईजेशन के लिए आवश्यक धन राशि की स्वीकृति प्राप्त कर ली जाए, जिससे यह कार्य पूर्ण होने के बाद कोई भी खतरनाक भवन शेष न रहे। योजना के क्रियान्वयन, मॉनिटरिंग के संबंध में जारी निर्देशानुसार कार्यवाही की जाए। एक सप्ताह में शेष बचे हुए सभी स्कूलों भवनों के मरम्मत एवं अतिरिक्त कक्ष निर्माण के प्राक्कलन विभागीय पोर्टल पर अपलोड कर ली जाए। पुस्तकें, गणवेश, और सायकल वितरण नवीन शिक्षा सत्र के प्रथम दिन से ही प्रारंभ कर दिया जाए। संचालक लोक शिक्षण द्वारा इस संबंध में लगातार मॉनिटरिंग करके यह व्यवस्था की जा रही है कि सभी स्कूलों में पुस्तकें, गणवेश एवं पात्र बालिकाओं के लिए निःशुल्क सायकल मई-जून के माह में पहुंचायी जाए।

स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा 23 मार्च को आयोजित परीक्षाएं यथावत रहेंगी

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रायपुर। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा स्कूलों में 23 मार्च को पूर्व में निर्धारित परीक्षाएं यथावत रूप से आयोजित की जाएंगी। राज्य के समस्त नगर निगम और नगर पालिका क्षेत्रों के स्कूलों (जहां परीक्षाएं आयोजित हैं को छोड़कर) में 23 मार्च 2023 को चेट्रीचण्ड्र (चैतीचांद) महोत्सव का अवकाश रहेगा। 

गौरतलब है कि सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा 23 मार्च को चेट्रीचण्ड्र महोत्सव के लिए राज्य के समस्त नगर निगम और नगर पालिका क्षेत्रों में सामान्य अवकाश घोषित किया गया है।

स्कूल शिक्षा विभाग के पोर्टल में जानकारी अपडेट नहीं करने पर दो अधिकारी निलंबित

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रायपुर। राज्य शासन के स्कूल शिक्षा विभाग के दो अधिकारियों को शासकीय कार्य में कोताही बरतने के फलस्वरूप निलंबित कर दिया है। इन अधिकारियों ने स्कूल शिक्षा विभाग के पोर्टल में अपडेट जानकारी दर्ज नहीं की थी। निलंबित अधिकारियों का मुख्यालय रायपुर और जशपुर के शिक्षा कार्यालयों में नियत किया गया है। आज यहां इस संबंध में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा मंत्रालय से आदेश जारी कर दिया गया है।

जारी आदेश के अनुसार जे.के. प्रसाद तत्कालिन जिला शिक्षा अधिकारी जशपुर (वर्तमान में उप संचालक लोक शिक्षण संचालनालय) और नारायण प्रसाद पैकरा (मूल पद व्याख्याता) प्रभारी प्राचार्य शासकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय दोकड़ा, विकासखण्ड कांसाबेल जिला जशपुर द्वारा विभागीय पोर्टल को अपडेट करने में कोताही बरती गई। जिससे संस्था में व्याख्याता का पद रिक्त होना बतलाया गया, जिसके कारण प्रशासनिक स्थानांतरण किया गया। इस लापरवाही के कारण स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा मंत्रालय से आदेश जारी कर दोनो को निलंबित कर दिया है। निलंबन अवधि में जे.के. प्रसाद का मुख्यालय, संभागीय संयुक्त संचालक रायपुर और नारायण प्रसाद पैकरा का मुख्यालय जिला शिक्षा अधिकारी जशपुर नियत किया गया है।

तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी जशपुर जे.के. प्रसाद और नारायण प्रसाद पैकरा प्राचार्य शासकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय दोकड़ा, विकास खण्ड कांसाबेल जिला जशपुर द्वारा विभागीय पोर्टल को समय-समय पर अपडेट नही करने के कारण वर्ष 2022 में विभाग के अंतर्गत किए गए स्थानांतरण में जिस संस्था व्याख्याता का पद रिक्त नहीं होने के बावजूद व्याख्याता का पद रिक्त होना बतलाया गया। जिसके कारण विभागीय आदेश द्वारा 30 सितंबर 2022 में श्री अमरजीत सोलंकी व्याख्याता हिन्दी शासकीय हाई स्कूल कोटेया विकासखण्ड प्रेमनगर जिला सुरजपूर का प्रशासनिक स्थानांतरण शासकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय दोकड़ा, विकास खण्ड कांसाबेल जिला जशपुर किया गया।

इस स्कूल में नारायण प्रसाद पैकरा प्रभारी प्राचार्य के रूप में कार्यरत है जिनका मूल पद व्याख्याता हिन्दी है, परन्तु विभागीय पोर्टल पर स्वयं की जानकारी प्राचार्य दर्शित करते हुए, व्याख्याता हिन्दी के पद को रिक्त बतलाया गया। तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी और प्रभारी प्राचार्य की सामूहिक जिम्मेदारी है कि वे समय-समय पर विभागीय पोर्टल को अपडेट रखते, परन्तु विभागीय पोर्टल को अपडेट करने में गंभीर कोताही बरती गयी, जिससे यह स्थिति निर्मित हुई। उनका यह कार्य छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम के विपरीत गंभीर कदाचार है।

छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा विभाग को मिला CSI-ISG का ई-गवर्नेस अवॉर्ड

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छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा विभाग को CSI-ISG (कम्प्यूटर सोसायटी ऑफ इंडिया स्पेशल इंट्रेस्ट ग्रुप) के ई-गवर्नेस अवॉर्ड 2021 से सम्मानित किया गया है। छत्तीसगढ़ राज्य को यह अवार्ड स्कूली बच्चों के आंकलन और अभ्यास कार्य को आसान बनाने के लिए लागू टेली-प्रेक्टीज के लिए रिकग्निशन केटेगरी में प्रदाय किया गया है। प्रयागराज स्थित मोती लाल नेहरू नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में आयोजित 19वां CSI-ISG ई-गवर्नेस अवॉर्ड को छत्तीसगढ़ की ओर से शिक्षा विभाग के एम सुधीश और एनआईसी की ओर से वरिष्ठ तकनीकी संचालक सोम शेखर और वरिष्ठ वैज्ञानिक ललिता वर्मा ने प्राप्त किया। 

गौरतलब है कि शिक्षा विभाग में आंकलन और अभ्यास को आसान बनाने के लिए टैली-प्रैक्टिस कार्यक्रम प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा आलोक शुक्ला और सचिव कमलप्रीत सिंह के मार्गदर्शन में संचालित किया जा रहा है। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा बच्चों के आंकलन और अभ्यास कार्य को आसान बनाने समेत आंकलन की प्रक्रियाओं में आमतौर पर होने वाली विसंगतियों को दूर करने राष्ट्रीय सूचना केंद्र (NIC) के सहयोग से टेली-प्रेक्टीज नामक कार्यक्रम लागू किया जा रहा है। इसमें शिक्षकों और विद्यार्थियों को टेलीग्राम में एक समूह बनाकर कार्य करना होता है। 

जल्द देना होता है जवाब

बच्चों के समक्ष प्रश्न आते-जाते हैं, जिनका बिना समय गंवाए बच्चों को जवाब देना होता है। प्रत्येक बच्चे के ई-जवाब का अपने आप अलग-अलग वीडियो बन जाता है। इन वीडियो को बाद में शिक्षक देखकर बच्चों का आंकलन कर सकते हैं। इसी प्रकार बच्चे अपने उत्तर वाले वीडियो देखकर अगली बार अपनी त्रुटियों को सुधार कर सही उत्तर चुनकर अपने प्रदर्शन में सुधार कर सकते हैं।

टैली-प्रैक्टिस कार्यक्रम 

छत्तीसगढ़ में NIC छत्तीसगढ़ के सहयोग से स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा उपयोग में लाया जा रहा है। इसमें उपयोग में लाए जाने वाले प्रश्न भी यहां के शिक्षक ही तैयार करते हैं। विभिन्न संस्थाओं ने राज्य में प्रचलित टेली-प्रेक्टीज को देखा है और उन्हें बच्चों के अभ्यास एवं शिक्षकों के आंकलन संबंधी कार्यों को आसान करने के लिए उपयोगी पाया है। इसे NIC से उनके वरिष्ट तकनीकी संचालन सोम शेखर के नेतृत्व में तैयार किया गया है। राज्य में इसकी पायलटिंग समग्र शिक्षा से एम. सुधीश के निर्देशन में की गई है।

बच्चों को रोचक ढंग से दें उपचारात्मक शिक्षा : डॉ. आलोक शुक्ला

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प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा विभाग डॉ. आलोक शुक्ला ने कहा है कि शिक्षक पढ़ाई में कमजोर बच्चों को रोचक ढंग से उपचारात्मक शिक्षा (Children Remedial Education)दें। उन्होंने शिक्षकों से कहा कि पढ़ाई के दौरान विद्यार्थियों को दैनिक जीवन से जुड़े उदाहरण के द्वारा विषय-वस्तु की जानकारी दी जाए। उन्होंने कहा कि बच्चों को पढ़ना, लिखना और गणित के सवाल हल करना आना चाहिए।













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हमारा पूरा ध्यान सीखने पर ही हो, इसका आंकलन मार्च माह तक पूर्ण कर लिया जाए। डॉ. शुक्ला आज राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद में आकलन और उपचारात्मक शिक्षण पर आयोजित राज्य स्तरीय वेबीनार में शिक्षकों और अधिकारियों को संबोधित कर रहे थे। वेबीनार में एक लाख से ज्यादा शिक्षक शामिल हुए।





आकलन और उपचारात्मक शिक्षण पर राज्य स्तरीय वेबीनार(Children Remedial Education)





प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा डॉ. शुक्ला ने कहा कि शिक्षकों का अंतिम लक्ष्य आंकलन नहीं, बल्कि उन बच्चों को उपचारात्मक शिक्षा प्रदान करना है। उन्होंने कहा कि पढ़ाई में कमजोर बच्चों के लिए 100 दिन के एक लक्ष्य कार्यक्रम संचालित किया जाए। इस कार्यक्रम में प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालय में अध्ययनरत राज्य के सभी बच्चों को हिन्दी भाषा और गणित में न्यूनतम दक्षता हासिल कराने के लिए पूरा प्रयास किया जाए।





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डॉ. आलोक ने राज्य, जिला, विकासखण्ड और संकुल स्तर के अधिकारियों को उपचारात्मक शिक्षा की सघन मानीटरिंग के निर्देश दिए। डॉ. शुक्ला ने कोरोना काल में शिक्षकों द्वारा किए जा रहे विभिन्न प्रकार के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि न केवल राज्य स्तर पर बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर राज्य में किए जा रहे कार्यों की सराहना मिल रही है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय, नीति आयोग और प्रधानमंत्री ने भी इसकी प्रशंसा की है।









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राज्य स्तरीय वेबीनार में उपस्थित मिशन संचालक और संचालक समग्र शिक्षा जितेन्द्र शुक्ला ने बच्चों के स्तर तक सोच कर कार्य करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने वेबीनार में उपस्थित संबंधितों को निर्देशित किया कि बच्चों के स्तर तक जाकर उनको सरल रूप से समझाया जाए। बच्चों को नए शिक्षा सत्र में किस प्रकार से आगे की कक्षाओं में जोड़े कि उस कक्षा के अनुरूप लर्निंग आउटकम प्राप्त हो सके।





तकनीकी पहलुओं की जानकारी(Children Remedial Education)





संचालक एससीईआरटी डी. राहुल वेंकट ने उपचारात्मक शिक्षण पर विस्तृत दिशा-निर्देश राज्य के शिक्षकों को दिए। एससीईआरटी के अतिरिक्त संचालक योगेश शिवहरे, सहायक संचालक समग्र शिक्षा एम. सुधीश, एससीईआरटी के सी.पी.आर. साहू, विद्या डांगी ने गणित और भाषा शिक्षा में उपचारात्मक शिक्षण की प्रक्रिया पर प्रकाश डाला। वहीं सत्यराज अय्यर और अजय वर्मा ने उपचारात्मक शिक्षण के तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी।









डीजीपी ने किया समस्याओं का त्वरित निराकरण





डीजीपी श्री डीएम अवस्थी ने आज खुशियों का शुक्रवार कार्यक्रम में पुलिसकर्मियों और उनके परिजनों से मुलाकात कर उनकी समस्याओं का निराकरण किया। दंतेवाड़ा में पदस्थ सब इंस्पेक्टर ने बताया कि वे 37 सालों से सेवा दे रहे हैं और सेवा निवृत्ति लगभग एक साल बची हुई है। मेरा स्थानांतरण कांकेर कर दिया जाए। महिला आरक्षक ने कहा कि माता-पिता का स्वर्गवास होने के बाद पारिवारिक जिम्मदारियों के चलते पीटीएस माना से रायगढ़ स्थानांतरण कर दिया जाए।





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बलौदाबाजार में पदस्थ आरक्षक ने बताया कि उनकी मां को गंभीर बिमारी है जिसके लिए उनका स्थानांतरण बिलासपुर कर दिया जाए, ताकि वे मां का बेहत्तर इलाज करा सके। राजनांदगांव में पदस्थ महिला आरक्षक ने कहा कि सड़क दुर्घटना के बाद उनके पति के शरीर का निचला हिस्सा काम नहीं करता है। कृपया मुझे राजनांदगांव में ही डीसीआरबी में ही कर दिया जाए।





संवेदनशीलता के आधार पर तत्काल स्थानांतरण आदेश जारी





18वीं बटालियन में पदस्थ प्रधान आरक्षक ने बताया कि उनकी चार साल की बेटी पैरालिसिस से पीड़ित है। उसका इलाज कराने की व्यवस्था 8वीं बटालियन में कर दिया जाए। डीजीपी डीएम अवस्थी ने सभी प्रकरणों में संवेदनशीलता के आधार पर तत्काल स्थानांतरण आदेश जारी कर दिए।


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