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विशेष लेख : हरेली तिहार से खेती-किसानी के साथ-साथ छत्तीसगढ़िया ओलंपिक की होगी शुरूआत

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में हरेली त्यौहार का विशेष महत्व है। हरेली छत्तीसगढ़ का पहला त्यौहार है। इस त्यौहार से ही राज्य में खेती-किसानी की शुरूआत होती है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह त्यौहार परंपरागत् रूप से उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन किसान खेती-किसानी में उपयोग आने वाले कृषि यंत्रों की पूजा करते हैं और घरों में माटी पूजन होता है। गांव में बच्चे और युवा गेड़ी का आनंद लेते हैं। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की पहल पर लोक महत्व के इस पर्व पर सार्वजनिक अवकाश भी घोषित किया गया है। इससे छत्तीसगढ़ की संस्कृति और लोक पर्वों की महत्ता भी बढ़ गई है। 

लोक संस्कृति इस पर्व में अधिक से अधिक लोगों को जोड़ने के लिए छत्तीसगढ़िया ओलंपिक की भी शुरूआत की जा रही है। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा राज्य के परंपरागत तीज-त्यौहार, बोली-भाखा, खान-पान, ग्रामीण खेलकूद को बढ़ावा देने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री की पहल पर राज्य शासन के वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने लोगों तक गेड़ी की उपलब्धता के लिए जिला मुख्यालयों में स्थित सी-मार्ट में किफायती दर में गेड़ी बिक्री के लिए व्यवस्था की है। परंपरा के अनुसार वर्षों से छत्तीसगढ़ के गांव में अक्सर हरेली तिहार के पहले बढ़ई के घर में गेड़ी का ऑर्डर रहता था और बच्चों की जिद पर अभिभावक जैसे-तैसे गेड़ी भी बनाया करते थे। वन विभाग के सहयोग से सी-मार्ट में गेड़ी किफायती दर पर उपलब्ध कराया गया है, ताकि बच्चे, युवा गेड़ी चढ़ने का अधिक से अधिक आनंद ले सके।

मुख्यमंत्री की पहल पर पिछले वर्ष शुरू की गई छत्तीसगढ़िया ओलंपिक को काफी लोकप्रियता मिली। इसको देखते हुए इस बार हरेली तिहार के दिन शुरू होने वाली छत्तीसगढ़िया ओलंपिक 2023-24 को और भी रोमांचक बनाने के लिए एकल श्रेणी में दो नए खेल रस्सीकूद एवं कुश्ती को भी शामिल किया गया है। हरेली पर्व के दिन से ही प्रदेश में छत्तीसगढ़िया ओलंपिक खेल की शुरूआत भी होने जा रही है, जो सितंबर के अंतिम सप्ताह तक जारी रहेगा। हरेली पर्व के दिन पशुधन के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए औषधियुक्त आटे की लोंदी खिलाई जाती है। गांव में यादव समाज के लोग वनांचल जाकर कंदमूल लाकर हरेली के दिन किसानों को पशुओं के लिए वनौषधि उपलब्ध कराते हैं। गांव के सहाड़ादेव अथवा ठाकुरदेव के पास यादव समाज के लोग जंगल से लाई गई जड़ी-बूटी उबाल कर किसानों को देते हैं। इसके बदले किसानों द्वारा चावल, दाल आदि उपहार में देने की परंपरा रही हैं।

सावन माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को हरेली पर्व मनाया जाता है। हरेली का आशय हरियाली ही है। वर्षा ऋतु में धरती हरा चादर ओड़ लेती है। वातावरण चारों ओर हरा-भरा नजर आने लगता है। हरेली पर्व आते तक खरीफ फसल आदि की खेती-किसानी का कार्य लगभग हो जाता है। माताएं गुड़ का चीला बनाती हैं। कृषि औजारों को धोकर, धूप-दीप से पूजा के बाद नारियल, गुड़ का चीला भोग लगाया जाता है। गांव के ठाकुर देव की पूजा की जाती है और उनको नारियल अर्पण किया जाता है। हरेली तिहार के साथ गेड़ी चढ़ने की परंपरा अभिन्न रूप से जुड़ी हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग सभी परिवारों द्वारा गेड़ी का निर्माण किया जाता है। परिवार के बच्चे और युवा गेड़ी का जमकर आनंद लेते है। गेड़ी बांस से बनाई जाती है। दो बांस में बराबर दूरी पर कील लगाई जाती है।

एक और बांस के टुकड़ों को बीच से फाड़कर उन्हें दो भागों में बांटा जाता है। उसे नारियल रस्सी से बांध़कर दो पउआ बनाया जाता है। यह पउआ असल में पैर दान होता है  जिसे लंबाई में पहले कांटे गए दो बांसों में लगाई गई कील के ऊपर बांध दिया जाता है। गेड़ी पर चलते समय रच-रच की ध्वनि निकलती हैं, जो वातावरण को औैर आनंददायक बना देती है। इसलिए किसान भाई इस दिन पशुधन आदि को नहला-धुला कर पूजा करते हैं। गेहूं आटे को गंूथ कर गोल-गोल बनाकर अरंडी या खम्हार पेड़ के पत्ते में लपेटकर गोधन को औषधि खिलाते हैं। ताकि गोधन को विभिन्न रोगों से बचाया जा सके। गांव में पौनी-पसारी जैसे राऊत व बैगा हर घर के दरवाजे पर नीम की डाली खोंचते हैं। गांव में लोहार अनिष्ट की आशंका को दूर करने के लिए चौखट में कील लगाते हैं। यह परम्परा आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में विद्यमान है।

हरेली के दिन बच्चे बांस से बनी गेड़ी का आनंद लेते हैं। पहले के दशक में गांव में बारिश के समय कीचड़ आदि हो जाता था उस समय गेड़ी से गली का भ्रमण करने का अपना अलग ही आनंद होता है। गांव-गांव में गली कांक्रीटीकरण से अब कीचड़ की समस्या काफी हद तक दूर हो गई है। हरेली के दिन गृहणियां अपने चूल्हे-चौके में कई प्रकार के छत्तीसगढ़ी व्यंजन बनाती है। किसान अपने खेती-किसानी के उपयोग में आने वाले औजार नांगर, कोपर, दतारी, टंगिया, बसुला, कुदारी, सब्बल, गैती आदि की पूजा कर छत्तीसगढ़ी व्यंजन गुलगुल भजिया व गुड़हा चीला का भोग लगाते हैं। इसके अलावा गेड़ी की पूजा भी की जाती है। शाम को युवा वर्ग, बच्चे गांव के गली में नारियल फेंक और गांव के मैदान में कबड्डी आदि कई तरह के खेल खेलते हैं। बहु-बेटियां नए वस्त्र धारण कर सावन झूला, बिल्लस, खो-खो, फुगड़ी आदि खेल का आनंद लेती हैं।

नगरीय निकायों में उप निर्वाचन के लिए 9 जनवरी को होने वाले मतदान के लिए संबंधित क्षेत्रों में सार्वजनिक अवकाश घोषित

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रायपुर। राज्य शासन ने प्रदेश के 14 नगरीय निकायों के कुल 15 वार्डों में उप निर्वाचन के लिए 9 जनवरी को होने वाले मतदान हेतु संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों के शासकीय संस्थानों और कार्यालयों के लिए सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है। मतदान वाले क्षेत्रों में इस दिन मतदान करने के लिए सामान्य अवकाश भी रहेगा।

सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा 9 जनवरी को मतदान वाले क्षेत्रों में सार्वजनिक अवकाश और सामान्य अवकाश के लिए अधिसूचना जारी कर दी गई है। नगरीय निकायों में वार्ड पार्षद के उप निर्वाचन के लिए 9 जनवरी को सवेरे आठ बजे से शाम पांच बजे तक वोट डाले जाएंगे।

शिक्षा का अधिकार अधिनियम के कार्यों का संचालन अब समग्र शिक्षा से

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रायपुर। राज्य में संचालित निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम 2009 (शिक्षा का अधिकार) योजना का संचालन अब समग्र शिक्षा कार्यालय द्वारा किया जाएगा। अभी तक यह योजना का संचालक लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा संचालित की जा रही थी। राज्य शासन के स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा शिक्षा के अधिकार योजना के तहत सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (पीएफएमएस) पोर्टल के माध्यम से लाभार्थियों के दावा निपटारा डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) मोड से किए जाने और योजना के समस्य कार्य, प्रबंधन का दायित्व संचालक लोक शिक्षण संचालनालय के स्थान पर प्रबंध संचालक समग्र शिक्षा राज्य परियोजना कार्यालय को सौंपा है।



उल्लेखनीय है कि सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (पीएफएमएस) अंतर्गत निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार 2009 की योजना भारत सरकार वित्त मंत्रालय, व्यय विभाग के पत्र द्वारा केन्द्र प्रवर्तित योजना के फंड विमुक्त करने और उनके उपयोग के निगरानी की संशोधित प्रक्रिया निर्धारित है। विभागीय आदेश द्वारा केन्द्र प्रवर्तित योजना के तहत इस योजना में सिंगल नोडल एजेंसी और योजना के नोडल अधिकारी समग्र शिक्षा राज्य परियोजना कार्यालय छत्तीसगढ़ को घोषित किया गया है। योजना के समस्त दायित्व, निर्वहन एवं जिम्मेदारी के लिए समग्र शिक्षा निर्धारित है। वर्तमान में यह कार्य संचालक लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा निष्पादित किया जा रहा है।

पीडीएस चांवल के अवैध परिवहन पर जिला प्रशासन की कार्यवाही

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कोरबा। सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत वितरित किये जाने वाले चांवल की अवैध परिवहन पर जिला प्रशासन ने कार्यवाही की है। राजस्व और खाद्य विभाग की संयुक्त टीम ने शासकीय चांवल के अवैध परिवहन करते पाए जाने पर 90 बोरी चांवल जप्त किया है। फोर्टीफाइड युक्त चांवल प्लास्टिक बोरी में 50 किलो भरती का पाया गया है। चांवल का कुल वजन 45 क्विंटल है। पीडीएस चांवल के अवैध खरीदी बिक्री करते पाए जाने पर चांवल मालिक पर आवश्यक वस्तु अधिनियम एवं अन्य एक्ट के तहत कार्यवाही की जा रही है। एसडीएम कोरबा श्रीमती सीमा पात्रे ने बताया की रविवार को सुबह 10.00 बजे गौ माता चौक के पास आकस्मिक जांच के दौरान वाहन क्रमांक सी.जी. 12 बी.जी. 4173 की जांच तहसीलदार मुकेश देवांगन और खाद्य निरीक्षक उर्मिला गुप्ता की टीम द्वारा की गई।



वाहन में लोड चांवल के संबंध में वाहन चालक से पूछताछ करने पर उनके द्वारा चांवल परिवहन बाबत् कोई बिल बीजक अथवा अन्य दस्तावेज प्रस्तुत नही की गई, और न ही वाहन चालक के पास होना पाया गया । वाहन में लोड सभी चांवल प्लास्टिक के बोरी में भरा पाया गया उक्त बोरी में किसी भी चांवल विक्रेता का नाम अंकित नहीं होना पाया गया। चांवल का परिवहन संदेहास्पद पाये जाने पर उक्त वाहन को अग्रिम जांच के लिए कलेक्टर परिसर में लाकर खड़ी की गई । उक्त वाहन में कुल 90 बोरी चांवल भरती प्रति बोरी 50 किलो कुल वजन 45.00 क्विं. होना पाया गया। जांच के दौरान चांवल मालिक एवं वाहन मालिक किशन गोयल मौके पर उपस्थित हुए उनके द्वारा चांवल कय विक्रय का बिल प्रस्तुत किया गया। 

वाहन में लोड चांवल के परीक्षण हेतु नागरिक आपूर्ति निगम के गुणवत्ता निरीक्षक रविन्द्र कुमार रामटेके के द्वारा सभी बोरो से चांवल के नमूने लिये गये तीन नमूना 1-1 किलो चांवल का तैयार कर सेम्पल पर्ची हस्ताक्षरयुक्त तीनों थैलियों डालकर सील बंद किया गया। मौके पर चांवल मालिक किशन गोयल के द्वारा प्रस्तुत चांवल खरीदी बिल एवं बिकी बिल घटना उपरान्त प्रस्तुत की गई है। उक्त बिल वाहन के साथ चांवल परिवहन के दौरान वाहन नहीं पाया गया। परिवहन किये जा रहे चांवल में किसी भी चांवल विक्रेता की पहचान उल्लेखित नहीं है। चांवल विक्रेता फर्म किशन गोयल के द्वारा जारी बिल में मुबारक ट्रेड मार्क का चांवल बिकी करने का चिन्हांकित है,

जबकि वाहन में परिवहन किया जा रहा चांवल के प्लास्टिक बोरे में उक्त फर्म के नाम का कोई पहचान अंकित नहीं है। जिससे यह प्रमाणित होता है कि किशन गोयल के द्वारा चांवल की अवैध खरीदी एवं बिक्री का कार्य अपने व्यापारिक प्रतिष्ठान से किया जाता है। चांवल मालिक किशन गोयल ने अपने बयान में स्वीकार किया है कि वह चांवल का व्यापारी है उनके द्वारा वाहन क्रमांक सी.जी. 12 बी. जी. 4173 में 90 बोरी चांवल स्वयं के वाहन में अपने गोदाम से लोड कराकर सरगबुंदिया भेजा जा रहा था। तथा वाहन के साथ चांवल परिवहन बाबत् कोई कागजात वाहन चालक को नहीं दी गई।

एसडीएम कोरबा ने बताया की जांच दल के प्रतिवेदन अनुसार उक्त वाहन में परिवहन किये जा रहे चांवल के सील नमूने को तहसील कार्यालय में तहसीलदार मुकेश देवांगन, नायब तहसीलदार लकेश्वर सिदार की उपस्थिति में तकनीकि सहायक रविन्द्र रामटेके के द्वारा परीक्षण किया गया। परीक्षण रिपोर्ट अनुसार अरवा चांवल में 0.5 प्रतिशत फोर्टीफाइड चांवल (एफ. आर. के.) मिक्स होना पाया गया। फोर्टीफाइड युक्त अरवा चांवल सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत वितरित किये जाने वाला चांवल है। मौका जांच पंचनामा एवं वाहन में लोड चांवल के परीक्षण रिर्पोट के आधार पर यह प्रमाणित पाया गया कि वाहन में परिवहन किया जा रहा चांवल सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत वितरित किया गया चांवल है।

किशन गोयल चांवल व्यापारी के द्वारा सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत वितरित किये गये चांवल की खरीदी कर अवैध बिक्री करने का कृत्य किया है। किशन गोयल के द्वारा प्रस्तुत किये गये चांवल खरीदी एवं बिकी बिल में एफ. आर. के. चांवल का उल्लेख नहीं है जबकि परिवहन किया जा रहा चांवल में एफ. आर. के. मिला हुआ चांवल है। जो कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत वितरित किया जाने वाला चांवल है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली एवं अन्य कल्याणकारी योजनाओं के अंतर्गत राशनकार्ड धारियों को प्रदाय चांवल अहस्तांतरणीय है। जिसका विक्रय अन्य व्यक्तियों के द्वारा नहीं किया जा सकता है।

फलस्वरूप वाहन चालक से गवाहों के समक्ष वाहन॑मय लोड चांवल को जप्त कर पुलिस थाना सिटी कोतवाली की अभिरक्षा में दी गई। चांवल व्यापारी किशन गोयल पिता केवलराम जी गोयल उम्र 40 वर्ष निवासी अग्रोहा मार्ग कोरबा एवं उनके चालक चेतन यादव के द्वारा किया गया उपरोक्त कृत्य आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 3 सहपठित छ00सार्वजनिक वितरण प्रणाली (नियंत्रण आदेश - 2016) के खण्ड 5 के उपखण्ड (29) का उल्लंघन है, जो कि आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 3/7 के तहत दण्डनीय अपराध है। एसडीएम कोरबा ने बताया की सरकारी अवैध चांवल  के अवैध परिवहन करते पाए जाने पर चांवल मालिक के विरुद्ध नियमानुसार कार्यवाही की जा रही है।

आरएसएस के सर संघचालक डॉक्टर मोहन भागवत दो दिवसीय छत्तीसगढ़ प्रवास पर

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रायपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर संघचालक डॉक्टर मोहन भागवत दो दिवसीय प्रवास पर छत्तीसगढ़ आ रहे हैं। वे चौदह नवंबर को जशपुर में और पंद्रह नवंबर को अम्बिकापुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा आयोजित पथ संचलन और सार्वजनिक कार्यक्रमों में शामिल होंगे। इस दौरान वे चौदह नवंबर को जशपुर में भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर मार्ल्यापण करेंगे और जनजाति गौरव दिवस पर वनवासी कल्याण आश्रम द्वारा आयोजित आमसभा को संबोधित करेंगे।



इस मौके पर डॉक्टर भागवत पूर्व सांसद स्वर्गीय कुमार दिलीप सिंह जूदेव की प्रतिमा का अनावरण भी करेंगे। इसके बाद वे पंद्रह नवंबर को अंबिकापुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के दो विभाग सरगुजा और कोरिया के संयुक्त पथ संचलन में भाग लेंगे और सार्वजनिक कार्यक्रम को संबोधित करेंगे। यह जानकारी संघ के प्रांत प्रचार प्रमुख कनिराम ने दी है।

फोर्टीफाइड चावल को पर्याप्त पानी में पकाएं और मॉड का उपयोग करें

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सूरजपुर। सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत फोर्टीफाइड चावल के वितरण के प्रचार-प्रसार हेतु ग्राम पंचायतों में सार्वजनिक भवन, ग्राम पंचायत भवन, शासकीय उचित मूल्य दुकान भवन, आंगनबाड़ी केन्द्रों, शासकीय विद्यालय भवनों पर प्रदर्शित हेतु पंपलेट, बैनर चस्पा कराया जा रहा है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, मितानिनों, पंचायत सचिवों एवं शासकीय विद्यालयों के शिक्षकों के माध्यम से फोर्टीफाइड चावल के फायदे के संबंध में राशन कार्ड धारियों, ग्रामीणों एवं छात्रों को अवगत कराये।



फोर्टीफाइड चावल आपका पसंदीदा चावल-आयरन (एनीमिया से बचाव), फॉलिक एसिड (भू्रण विकास और खून के निर्माण में सहायक), विटामिन बी-12 (नर्वस सिस्टम के समस्या व कामकाज में सहायक) - प्रत्येक लाभार्थी हेतु अधिकतम लाभ के लिए फोर्टीफाइड चावल को पर्याप्त पानी में पकाएं और उससे निकले वाले मॉड का उपयोग भी करें।

फोर्टीफाइड चावल का हर एक निवाला, स्वाद, पोषण और सेहत का रखवाला

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सूरजपुर। सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत फोर्टीफाइड चावल के वितरण के प्रचार-प्रसार हेतु ग्राम पंचायतों में सार्वजनिक भवन, ग्राम पंचायत भवन, शासकीय उचित मूल्य दुकान भवन, आंगनबाड़ी केन्द्रों, शासकीय विद्यालय भवनों पर प्रदर्शित हेतु पंपलेट, बैनर चस्पा कराया जा रहा है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, मितानिनों, पंचायत सचिवों एवं शासकीय विद्यालयों के शिक्षकों के माध्यम से फोर्टीफाइड चावल के फायदे के संबंध में राशनकार्डधारियों, ग्रामीणों एवं छात्रों को अवगत कराये। 



फोर्टीफाइड चावल आपका पसंदीदा चावल-आयरन ( एनीमिया से बचाव ), फॉलिक एसिड (भू्रण विकास और खून के निर्माण में सहायक), विटामिन बी-12 ( नर्वस सिस्टम के समस्या व कामकाज में सहायक) - प्रत्येक लाभार्थी हेतु अधिकतम लाभ के लिए फोर्टीफाइड चावल को पर्याप्त पानी में पकाएं और उससे निकले वाले मॉड का उपयोग भी करें।

मेडिकल कॉलेज की सौगात मिलने पर संसदीय सचिव का ग्रामीणों ने किया अभिनंदन

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महासमुंद। सार्वजनिक दुर्गाउत्सव समिति खरोरा द्वारा गुरुवार की रात आयोजित माता के जगराता कार्यक्रम में संसदीय सचिव व विधायक विनोद सेवनलाल चंद्राकर शामिल हुए। इस दौरान मेडिकल कॉलेज की सौगात मिलने पर ग्रामवासियों ने संसदीय सचिव चंद्राकर का स्मृति चिन्ह भेंटकर अभिनंदन किया। गुरूवार की रात सार्वजनिक दुर्गोत्सवस समिति खरोरा द्वारा माता का जगराता कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। कार्यक्रम में कविता वासनिक एवं ग्रुप की शानदार प्रस्तुति दी।

      दुर्गाेत्सव समिति खरोरा द्वारा आयोजित जगराता कार्यक्रम में हुए शामिल

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि संसदीय सचिव व विधायक विनोद सेवनलाल चंद्राकर थे। अध्यक्षता कृषि उपज मंडी के अध्यक्ष हीरा बंजारे ने की। विशेष अतिथि के रूप में सरपंच सुनीता चंद्राकर, देवव्रत चंद्राकर, दिलीप चंद्राकर मौजूद थे। संसदीय सचिव चंद्राकर ने ग्रामवासियों को नवरात्रि पर्व की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि नवरात्र में पूरे नौ दिनों तक अनेक धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन होता है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की कला संस्कृति हमारी धरोहर है। ऐसे आयोजनों से कलाकारों को भी मंच मिलता है।

उन्होंने कहा कि जब से प्रदेश में भूपेश बघेल मुख्यमंत्री बने हैं तब से प्रदेश में यहां की संस्कृति को आगे बढ़ाने का काम किया जा रहा है। देश में छत्तीसगढ़ की संस्कृति की अलग पहचान बनी है। संसदीय सचिव चंद्राकर ने कहा कि खरोरा में मेडिकल कॉलेज की सौगात मिली है। इससे निश्चित तौर पर गांव को पहचान मिलने के साथ ही विकास होगा। उन्होंने बताया कि मेडिकल कॉलेज के लिए हरसंभव प्रयास किया गया तब कहीं जाकर इसकी सौगात मिल सकी है।

कार्यक्रम के दौरान सरपंच व ग्रामवासियों द्वारा खरोरा में मेडिकल कॉलेज की सौगात मिलने पर मुख्य अतिथि संसदीय सचिव चंद्राकर को स्मृति चिन्ह भेंट कर अभिनंदन किया गया। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से हेमेंद्र चंद्राकर, दुर्गेश चंद्राकर, भास्कर चंद्राकर, लक्की चंद्राकर, महेंद्र सूर्यवंशी, रामाधर चंद्राकर, कोमल चंद्राकर, भीखम चंद्राकर, लोकेश चंद्राकर, चंद्रशेखर चंद्राकर, संदीप चंद्राकर, विष्णु यादव, पोखन धीवर, बद्री पटेल, भीखम धीवर, हेमलता चंद्राकर, लता चंद्राकर, कंुती यादव, मनोज चंद्राकर, संजय साहू, चिंताराम पटेला, पंचराम पटेला, कमला धीवर, प्रेमिन बांदे, राहुल पटेला, तेजराम चंद्राकर, रामधन चंद्राकर, हरिशंकर चंद्राकर, किशनलाल चंद्राकर, मयाराम चंद्राकर आदि मौजूद थे।

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