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नवनिर्मित केशव भवन शिक्षा, संस्कृति और संस्कारों का बनेगा संगम - मुख्यमंत्री विष्णु देव

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज प्रदेश की ऊर्जाधानी कोरबा स्थित प्रदेश के सबसे बड़े सरस्वती शिशु मंदिर परिसर में नन्हें-मुन्हें बच्चों के लिए नवनिर्मित केशव भवन का लोकार्पण किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि यह भवन शिक्षा, संस्कृति और संस्कारों का संगम बनेगा।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि केशव भवन बच्चों के सर्वांगीण विकास का एक सशक्त माध्यम सिद्ध होगा। सरस्वती शिशु मंदिर संस्था शिक्षा जगत में उल्लेखनीय योगदान दे रहा है। यहां विद्यार्थियों को केवल शैक्षणिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि उत्तम संस्कार भी प्रदान किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि सरस्वती शिशु मंदिर केवल विद्यालय नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की एक सशक्त आधारशिला है, जहाँ से सच्चे राष्ट्रभक्तों का निर्माण होता है। उल्लेखनीय है कि राष्ट्रप्रेम और नैतिक शिक्षा को समर्पित इस भवन को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित करते हुए विद्यार्थियों के समग्र विकास हेतु तैयार किया गया है।

कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री, अरुण साव, उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन, विद्यायक प्रेम चंद पटेल, छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल के अध्यक्ष अनुराग सिंहदेव, महापौर कोरबा श्रीमती संजू देवी राजपूत सहित अनेक जनप्रतिनिधि, सरस्वती शिशु मंदिर के प्रबंधन समिति से जुड़े सदस्यगण तथा शिक्षक उपस्थित थे।

राजधानी में दो दिनों तक बिखरेगी आदिवासी लोक नृत्यों की छटा

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रायपुर। राजधानी रायपुर के साइंस कॉलेज मैदान में दो दिवसीय जनजातीय गौरव दिवस के भव्य आयोजन में देश के विभिन्न राज्यों के साथ पूर्वोत्तर राज्यों के कलाकार भी अपनी संस्कृति की झलक बिखेरेंगे। 14-15 नवम्बर को आयोजित कार्यक्रम में प्रस्तुति देने पूर्वोत्तर भारत के पांच राज्यों मेघालय, मिजोरम, असम, अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम के कलाकार रायपुर पहुंच चुके हैं। रायपुर रेलवे स्टेशन पर कलाकारों का पुष्पाहार और तिलक लगाकर स्वागत किया गया। पूर्वोत्तर राज्यों से आए ये कलाकार वांगला-रुंगला, रेट-किनॉन्ग, गेह पदम ए ना-न्यी ई, सोलकिया जैसे लोक नृत्यों की प्रस्तुति से अपनी संस्कृति के विविध रंग बिखेरेंगे। 

फसल कटाई के बाद गारो आदिवासी करते हैं वांगला-रुंगला नृत्य, देवता मिस्सी सालजोंग का करते हैं धन्यवाद

जनजातीय गौरव दिवस पर प्रस्तुति देने मेघालय से 20 सदस्यों की टीम रायपुर आई है। यह दल गारो जनजाति द्वारा फसल कटाई के बाद किया जाने वाला वांगला-रुंगला लोक नृत्य प्रस्तुत करेगी। इसके कलाकार मेघालय की राजधानी शिलांग से करीब 200 किलोमीटर दूर नॉर्थ कर्व हिल्स (North Curve Hills) से आए हैं। दल का नेतृत्व कर रहे श्री मानसेन मोमिन ने बताया कि वांगला गारो जनजाति का लोकप्रिय त्योहार है। यह जनजाति कृषि अर्थव्यवस्था पर निर्भर है। फसल कटाई के बाद उर्वरता (Fertility) के देवता मिसी सालजोंग को धन्यवाद देने के लिए वे यह नृत्य करते हैं। वे फसल उपलब्ध कराने के लिए भगवान को धन्यवाद देते हैं, उनकी पूजा कर नाच-गाकर प्रार्थना करते हैं और नई फसल का भोग लगाते हैं। देवता मिसी सालजोंग को धन्यवाद देने से पहले किसी भी कृषि उत्पाद का उपयोग नहीं किया जाता है।


 वांगला-रुंगला आदिवासी लोक नृत्य में महिला और पुरुष दोनों हिस्सेदारी करते हैं। पुरुष नर्तक अपना परंपरागत ढोल लेकर नृत्य करते हैं जिसे दामा कहा जाता है। वांगला-रुंगला लोक नृत्य में नर्तकों का नेतृत्व करने वाले को ग्रिकगिपा या तोरेगिपा कहा जाता है। इसमें महिलाएं संगीत की धुन पर अपने हाथ हिलाती हैं, जबकि पुरुष अपने परंपरागत ढोल को बजाकर नृत्य करते हैं।

दुश्मनों पर जीत के जश्न का नृत्य है सोलकिया, मंत्रोच्चार जैसे स्वर संगीत के साथ होता है नृत्य

मिजोरम की राजधानी आईजोल से रायपुर पहुंची लोक नृत्य दल यहां सोलकिया नृत्य की प्रस्तुति देगी। इसके 20 सदस्यों के दल में 11 पुरूष और नौ महिलाएं शामिल हैं। यह नृत्य मुख्यतः मिजोरम की मारा जनजाति द्वारा किया जाता है। सोलकियाका अर्थ दुश्मन के कटे हुए सिर से है। सोलकिया नृत्य मूल रूप से दुश्मनों पर जीत का जश्न मनाने के लिए किया जाता था। खासकर उस मौके पर जब विजेता द्वारा दुश्मन का सिर ट्रॉफी के रूप में घर लाया जाता था। लेकिन अब यह सभी महत्वपूर्ण अवसरों पर मिजो समुदायों के पुरुषों और महिलाओं द्वारा किया जाता है।

मिजोरम के कलाकारों के दल का नेतृत्व कर रहे जोथमजामा ने बताया कि सोलकिया नृत्य की शुरुआत पिवी और लाखेर समुदायों द्वारा की गई थी। इस लोक नृत्य के साथ आने वाला स्वर संगीत गायन की तुलना में मंत्रोच्चार के अधिक निकट है। ताल संगीत एक जोड़ी घडि़यों द्वारा प्रदान किया जाता है, जो एक दूसरे से बड़े होते हैं, जिन्हें डार्कहुआंग कहा जाता है। संगीत को बेहतर बनाने के लिए कई जोड़ी झांझ भी बजाए जाते हैं।

जोथमजामा ने इस नृत्य को करने वाली मारा जनजाति के बारे में बताया कि यह एक कुकी जनजाति है जो मिजोरम की लुशाई पहाड़ियों और म्यांमार की चिन पहाड़ियों में रहती है। इन्हें लाखेर, शेंदु, मारिंग, ज़ु, त्लोसाई और खोंगज़ई नामों से भी जाना जाता है।

 


नई पीढ़ी को संस्कार और संस्कृति से जोड़ना महत्वपूर्ण कार्य : सीएम विष्णु देव साय

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज रायपुर के रोहिणीपुरम स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में आयोजित क्षेत्रीय संस्कृति महोत्सव 2024 का शुभारंभ करते हुए कहा कि नई पीढ़ी को संस्कारवान् बनाने और भारतीय संस्कृति से जोड़ने में विद्या भारती द्वारा महत्वपूर्ण कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस तीन दिवसीय संस्कृति महोत्सव में नई पीढ़ी के बच्चे अपने सांस्कृतिक गौरव से परिचित होंगे। साथ ही वे संस्कारवान् भी बनेंगे। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने नई शिक्षा नीति 2020 के सफल क्रियान्वयन के लिए सरस्वती शिशु मंदिर रोहिणीपुरम में आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था के लिए 50 लाख रुपए की राशि स्वीकृति की घोषणा की।

मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में कहा कि उनका सरस्वती शिशु मंदिर से बचपन से जुड़ाव रहा है। भारतीय संस्कृति के संवर्धन हेतु क्षेत्रीय संस्कृति महोत्सव का आयोजन अत्यंत महत्वपूर्ण है। नई शिक्षा नीति बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए सहायक सिद्ध होगी और शिक्षा के क्षेत्र में व्यापक बदलाव लाएगी। उन्होंने विद्यार्थियोें के उज्ज्वल भविष्य की शुभकामना देते हुए निरंतर मेहनत करने के लिए प्रेरित किया।

रायपुर लोक सभा सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ को नई शिक्षा नीति लागू करने वाला पहला राज्य है। उन्होंने इस मौकेे पर खरोरा स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में सांस्कृतिक भवन के निर्माण के लिए 20 लाख रुपए की राशि स्वीकृति की मंजूरी दी। कार्यक्रम को विद्या भारती के पदाधिकारी भाल चंद्र रावले, प्रकाश ठाकुर और शशिकांत फड़के ने भी संबोधित किया।

कार्यक्रम में विधायक सर्वश्री मोतीलाल साहू और पुरन्दर मिश्रा, विद्या भारती के सचिव विवेक सक्सेना सहित वल्लभ लाहोटी, अन्य गणमान्य नागरिक और बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे उपस्थित थे।

श्रीरामलला के प्राण प्रतिष्ठा के दिन पूरे छत्तीसगढ़ के मंदिरों में पूजा-अर्चना और गंगा आरती का होगा आयोजन

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रायपुर। संस्कृति मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा है कि अयोध्या में श्री रामलला की प्राण प्रतिष्ठा समारोह 22 जनवरी के ऐतिहासिक पल को यादगार बनाने के लिए छत्तीसगढ़ के सभी जिलों और ब्लॉक स्तर पर सभी प्रमुख मंदिरों में सुबह आरती और पूजा का आयोजन होगा, वहीं इस दिन शाम को गंगा आरती का आयोजन किया जाए। साथ ही इस मौके पर राज्य के सभी शासकीय भवनों में आकर्षक रौशनी की व्यवस्था की जाए। वे आज नया रायपुर अटल नगर स्थित महानदी भवन में संस्कृति और पर्यटन विभाग के कार्यों की समीक्षा कर रहे थे।

संस्कृति मंत्री अग्रवाल ने बैठक में विभागीय अधिकारियों को श्री रामलला दर्शन योजना में प्रदेशवासियों को अध्योया ले जाने के लिए व्यवस्थित और सुविधापूर्ण कार्ययोजना भी तैयार करने कहा। गौरतलब है कि आज आयोजित केबिनेट बैठक में प्रदेशवासियों को श्री रामलला के दर्शन कराने के लिए श्री रामलला दर्शन योजनाप्रारंभ करने का निर्णय लिया गया है। इस योजना में 18 से 75 आयु वर्ग के लोगों को श्री रामलला के दर्शन के लिए अयोध्या की यात्रा करायी जाएगी।

संस्कृति मंत्री अग्रवाल ने उज्जैन और बनारस में बनाये गए भव्य कॉरीडोर की तर्ज पर राजिम मंदिर परिसर को विकसित करने के लिए भव्य कॉरीडोर निर्माण के बारे में अधिकारियों के साथ विस्तृत विचार-विमर्श किया। उन्होंने कहा कि राजिम मंदिर परिसर के भव्य आकर्षक और गरिमामय ढंग से विकसित करने के लिए कॉरीडोर बनाने के दिए कॉन्सेप्ट प्लान बनाने के काम शुरू किया जाए। राजिम कुंभ की तैयारियों और इसके व्यवस्थित आयोजन को लेकर अधिकारियों से चर्चा की और राजिम कुंभ के भव्य आयोजन के लिए पर्यटन, धर्मस्व और संस्कृति विभाग को मिलकर काम करने के निर्देश दिए।

संस्कृति मंत्री अग्रवाल ने चारधाम यात्रा की तर्ज पर छत्तीसगढ़ के महत्वपूर्ण धार्मिक आस्था के केन्द्रों को शक्तिपीठ परियोजना के तहत विकसित करने कहा। उन्होंने यह भी कहा कि सूरजपुर के कुदरगढ़, चन्द्रपुर के चन्द्रहासिनी मंदिर, रतनपुर के महामाया मंदिर, डोंगरगढ़ के बम्लेश्वरी मंदिर और दंतेवाड़ा के दंतेश्वरी मंदिर में इस योजना के तहत विभिन्न सुविधाओं के विकास के लिए कार्ययोजना तैयार कर चरणबद्ध ढंग से सुविधाएं विकसित करने का काम किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को गरियाबंद जिले के भूतेश्वर महादेव, जतमई घटारानी जलप्रपात, शिवमहापीठ, सिरकट्टी आश्रम और कोपरा के कोपेश्वर महादेव को ट्रॉयबल परिपथ के रूप में विकसित करने के निर्देश दिए।

राजधानी के पुरखौती मुक्तांगन में होगा पतंग उत्सव

संस्कृति मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा है कि राजधानी रायपुर के पुरखौती मुक्तांगन परिसर में मकर संक्रांति के दिन भव्य पतंग उत्सव का आयोजन किया जाए। इसके लिए राज्य के साथ-साथ अन्य राज्यों के भी पतंगबाजों को आमंत्रित किया जाए। पतंग महोत्सव को भव्य और आकर्षक रूप देने के लिए दर्शकों और आम नागरिकों के लिए लोक कलाकारों द्वारा गीत-संगीत का भी आयोजन किया जाए। बैठक में अपर मुख्य सचिव सुब्रत साहू, पर्यटन विभाग के सचिव अन्बलगन पी., सचिव शिक्षा सिद्धार्थ कोमल परदेशी और संस्कृति विभाग के संचालक विवेक आचार्य सहित पर्यटन, धर्मस्व और संस्कृति विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

राज्यपाल हरिचंदन ने ‘नृत्य रहस्य‘ पुस्तक का किया विमोचन

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रायपुर। राज्यपाल विश्वभूषण हरिचंदन ने आज प्रसिद्ध ओडिशी नृत्यांगना श्रीमती पूर्णश्री राऊत द्वारा लिखित पुस्तक ‘‘नृत्य रहस्य द सेक्रेड मिस्टिक्स ऑफ डांस‘‘ का आज राजभवन में विमोचन किया। संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग द्वारा प्रकाशित यह नृत्य विधा पर श्रीमती राउत द्वारा लिखी गई चौथी पुस्तक है। 

इस पुस्तक के माध्यम से बताया गया है कि नृत्य के माध्यम से स्वस्थ रहा जा सकता है और बड़ी-बड़ी से बिमारियों को दूर किया जा सकता है। नृत्य प्राचीनतम योग कला का एक स्वरूप है। यह शारीरिक तंत्र क्रिया, कुंडलिनी जागरण, आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का एक माध्यम है। भारतीय शास्त्रीय नृत्य एक ऐसी विधा है जिससे शरीर के अंग में हल-चल होती है और ऊर्जा जागृत होती है तथा आध्यात्मिक अनुभूति का भाव पैदा करती है। 

इस पुस्तक में छत्तीसगढ़ के बस्तर से लेकर सरगुजा तक के ऐतिहासिक मंदिरों में अंकित नृत्य मुद्राओं का उल्लेख किया गया है। राज्यपाल हरिचंदन ने पुस्तक प्रकाशन के लिए श्रीमती राऊत को बधाई एवं शुभकामनाएं दी। पुस्तक विमोचन के अवसर पर राज्यपाल के सचिव अमृत खलखो, संस्कृति विभाग के सचिव अन्बलगन पी, संचालक विवेक आचार्य, रेडक्रॉस सोसाइटी छत्तीसगढ़ के सीईओ एम. के. राऊत, रेडक्रॉस छत्तीसगढ़ सोसाइटी के अध्यक्ष अशोक कुमार अग्रवाल उपस्थित थे।

 


रायगढ़ में 38 वें चक्रधर समारोह का शुभारंभ 19 सितम्बर से

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रायपुर। 38 वें चक्रधर समारोह का आगाज 19 सितंबर को गणेश चतुर्थी के साथ रायगढ़ में होने जा रहा हैं। कलाकारों के उम्दा प्रस्तुति का गवाह बनने चक्रधर समारोह का मंच सज-धज कर तैयार हो चुका है। यहां तीन दिनों तक नृत्य और संगीत का मनमोहक संगम देखने को मिलेगा।

गौरतलब है कि 19 से 21 सितंबर तक कला और संस्कृति को समर्पित चक्रधर समारोह का नगर निगम ऑडिटोरियम में गरिमापूर्ण आयोजन होने जा रहा है। जिसके लिए तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। कार्यक्रम स्थल का रंग-रोगन किया गया है। साज-सज्जा के साथ समारोह का मंच अपने अतिथि कलाकारों के स्वागत हेतु आतुर है। मालूम हो कि इस बार का चक्रधर समारोह विशेष होने जा रहा है। स्थानीय कलाकारों की बहुआयामी प्रतिभा से सजे समारोह के साक्षी बनने का मौका दर्शकों को मिलेगा।

कार्यक्रम की तय रूपरेखा के अनुसार 19 सितंबर को शाम 6 बजे से उच्च शिक्षा मंत्री उमेश पटेल के मुख्य आतिथ्य में समारोह का शुभारंभ होगा। उद्घाटन के अवसर पर वेदमणि सिंह ठाकुर एवं ग्रुप रायगढ़ गणेश वंदना की प्रस्तुति देंगे। चक्रधर कला एवं संगीत विद्यालय, रायगढ़ द्वारा राज्यगीत (नृत्य के साथ), पं.परितोष पोहनकर द्वारा शास्त्रीय गायन की प्रस्तुति देंगे। इसी तरह श्रीमती सोमा दास एवं ग्रुप चक्रधर बाल सदन रायगढ़ की बालिकाओं द्वारा कथक नृत्य की विशेष प्रस्तुति, डॉ.विनोद मिश्र (ख्याल एवं ढुमरी)पर शास्त्रीय गायन, सुश्री आर्या नंदे ‘‘श्रीधारा’’ द्वारा ओडिसी नृत्य, सुश्री गीतिका ठेठवार द्वारा बांसुरी वादन, सुश्री मधुमिता नकवी द्वारा शास्त्रीय गायन, सुश्री अंजली शर्मा द्वारा कथक नृत्य, प्रफुल्ल सिंह गहलोत द्वारा कथक नृत्य एवं दीपक आचार्य एवं ग्रुप रायगढ़ छत्तीसगढ़ी लोक-संगीत रंग की प्रस्तुति देंगे।

चक्रधर समारोह में 20 सितम्बर को दोपहर 12 से शाम 05 बजे तक ओपी जिंदल स्कूल, तराईमाल द्वारा देशभक्ति, न्यू होराइजन स्कूल रायगढ़ द्वारा छत्तीसगढ़ी नृत्य, संस्कार पब्लिक स्कूल रायगढ़ द्वारा ईश्वर भक्ति पर सेमी क्लासिकल, विद्या विकास कांसेप्ट स्कूल रायगढ़ द्वारा कृष्ण लीला नृत्य पर प्रस्तुति देंगे। इसी प्रकार सेंट जेंवियर्स स्कूल रायगढ़ द्वारा राजस्थानी और हरियाणवी, ओपी जिंदल स्कूल पतरापाली द्वारा शिव तांडव पर कथक एवं भरतनाट्यम, जीजी बोर्डिग स्कूल धनुवारडेरा द्वारा गुजराती नृत्य, आदर्श ग्राम्य भारती किरोड़ीमल नगर रायगढ़ द्वारा संबलपुरी गीत (केसरी लो) पर रास, सेजेस शासकीय स्कूल तमनार द्वारा छत्तीसगढ़ी नृत्य, साधुराम विद्या मंदिर रायगढ़ द्वारा दुर्गा एवं काली पर आधारित मराठी नृत्य, कार्मेल हिन्दी माध्यम स्कूल रायगढ़ द्वारा देश भक्ति गीत पर नृत्य की प्रस्तुति देंगे।

20 सितम्बर को शाम 6 बजे से सुश्री आनंदिता तिवारी द्वारा कथक नृत्य मनोज जायसवाल द्वारा सितार वादन, सुश्री ज्योतिश्री बोहिदार (रायगढ़ घराना) द्वारा कथक नृत्य, गरीब दास महंत रायगढ़ द्वारा तबला वादन, सुश्री नेहा बनर्जी द्वारा कथक नृत्य, सुश्री आरती सिंह द्वारा लोक संगीत (लोकचंदा), सुश्री घनिष्ठा दुबे (रायगढ़ घराना) द्वारा कथक नृत्य, मो.रौशन अली रायगढ़ द्वारा देशभक्ति एवं भजन गायन, हुतेन्द्र ईश्वर शर्मा रायगढ़ द्वारा लोक रंग नाचा, कु.श्रुतिदास रायगढ़ द्वारा ओडिसी नृत्य, मो.अयान द्वारा पियानो वादन एवं सुश्री ऐश्वर्या पंडित गायन की प्रस्तुति देंगी।

इसी प्रकार 21 सितम्बर को दोपहर 12 से 04 बजे तक सुश्री धरित्री सिंह चौहान पुसौर द्वारा कथक, सुश्री शार्वी सिंह परिहार द्वारा कथक, शेखर गिरी एवं ग्रुप द्वारा पंथी नृत्य, विजय शर्मा द्वारा जसगान एवं लोक गायन तथा नृत्य, सुश्री गीतिका वैष्णव द्वारा महिषासुर मर्दिनी/लोकगायन/नृत्य, मनोज तिवारी द्वारा जस जागरण लोक सांस्कृतिक कार्यक्रम, सुश्री अनंता पाण्डेय द्वारा कथक, ललित यादव द्वारा सुगम संगीत भजन, सुश्री पर्ल मोटवानी द्वारा शास्त्रीय गायन, डॉ.दीपिका सरकार एवं गुप द्वारा भरत नाट्यम, हरे  कृष्ण तिवारी द्वार बांसुरी वादन, सुश्री शार्वी केशरवानी द्वारा कथक एवं विजय सिंह द्वारा छत्तीसगढ़ी लोक गीत की प्रस्तुति दी जाएगी।

21 सितम्बर को शाम 6 बजे से इंदिरा संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ द्वारा विशिष्ट कार्यक्रम की प्रस्तुतियां होगी। सुश्री तब्बू परबीन (रायगढ़ घराना) द्वारा कथक नृत्य, अनिल तांडी एवं ग्रुप भिलाई द्वारा भरत नाट्यम, सुश्री आशना दिल्लीवार द्वारा कथक नृत्य, इबरार अहमद एवं संजय चौहान रायगढ़ द्वारा छत्तीसगढ़ी भजन/लोकगायन, सुश्री सुहानी स्वर्णकार सारंगढ़ द्वारा कथक नृत्य, डॉ.गौरव कुमार पाठक बिलासपुर द्वारा शास्त्रीय गायन एवं युवराज सिंह आजाद एवं ग्रुप रायगढ़ द्वारा नाटक (इप्टा) की प्रस्तुति देंगे।

छत्तीसगढ़ की भावी पीढ़ी के साथ मिलकर करेंगे सेवा और गढ़ेंगे नवा छत्तीसगढ़ : मुख्यमंत्री भूपेश बघेल

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रायपुर। छत्तीसगढ़ हमेशा से शांति का टापू रहा है, हमारे पुरखों ने इसे सहेजा है। हम भावी पीढ़ी के साथ मिलकर छत्तीसगढ़ महतारी की इस धरा की सेवा करें और नवा छत्तीसगढ़ गढ़े। यह संदेश मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज बस्तर प्रवास के दौरान आईएनएच न्यूज के संवाद 2023 कार्यक्रम के दौरान दिया।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में बच्चे सुपोषित हो, उन्हें शिक्षा और रोजगार मिले, पिछले पौने पांच सालों में हमने इसे सर्वाेच्च प्राथमिकता दी। पिछले पौने पांच सालों में हमने किसान, मजदूर, आदिवासी, महिलाओं और युवाओं के जेब में लगभग पौने 2 लाख करोड़ रूपए डाले हैं। मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि आज बस्तर के सुदूर अंचलों में गाड़ियों के शोरूम खुल रहे हैं, इसका मतलब है कि लोगों की जेब में पैसे पहुंचे हैं।

हमने कांक्रीट के जंगलों को बढ़ावा नहीं दिया, हम व्यक्ति को इकाई मानकर राज्य का विकास कर रहे हैं। आज छत्तीसगढ़ में बच्चे सुपोषित हो रहे हैं, महिलाएं एनीमिया मुक्त हो रही हैं। बस्तर आज मलेरिया से लगभग मुक्त हो चुका है।

मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि हमने अपने पुरखों की संस्कृति को सहेजने का काम किया है। बस्तर में 2400 से अधिक देवगुड़ियों का निर्माण किया। घोटुल का निर्माण कराया, बादल के माध्यम से जनजाति संस्कृति को संरक्षण और बढ़ावा दिया जा रहा है। आदिवासी नृत्य महोत्सव के माध्यम से छत्तीसगढ़ की आदिवासी संस्कृति का गौरव और व्यापकता देश-दुनिया के सामने आई है।

उन्होंने कहा कि हम राम वनगमन पथ के माध्यम से भगवान राम और माता सीता के प्रवेश स्थल कोरिया से लेकर सुकमा के रामाराम तक, जहां-जहां उनके कदम पड़े उन्हें जनभावना के अनुरूप आस्था स्थलों के रूप में विकसित करने का काम किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि आज हम छत्तीसगढ़ के परंपरागत तीज-त्यौहारों को उमंग के साथ मना रहे हैं। अपनी संस्कृति से लोगों का जुड़ाव हो, इस उद्देश्य के साथ परंपरागत त्यौहारों पर शासकीय अवकाश की घोषणा की गई है। हमने विश्व आदिवासी दिवस पर भी शासकीय अवकाश घोषित किया है और प्रदेशवासी आज उत्सुकता के साथ गांव-गांव में आदिवासी दिवस मना रहे है।

सार्थक संवादपुस्तक का किया विमोचन

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने हरिभूमि के प्रधान संपादक डॉ. हिमांशु द्विवेदी द्वारा लिखित पुस्तक सार्थक संवादका विमोचन किया। इस दौरान उप मुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव, उद्योग मंत्री कवासी लखमा, बस्तर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष लखेश्वर बघेल, संसदीय सचिव रेखचंद जैन, विधायक बृजमोहन अग्रवाल, पूर्व मंत्री केदार कश्यप मौजूद रहे।

सीएम हाउस में होवत हे हरेली तिहार के जोरदार तैयारी

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के राजधानी रायपुर स्थित निवास में हर बार की तरह इस बार भी हरेली का पर्व पारंपरिक रूप में धूमधाम से मनाया जाएगा। हरेली पर्व को धूमधाम से मनाने के लिए मुख्यमंत्री निवास में तैयारियां जोर-शोर से चल रही है।मुख्यमंत्री बघेल हरेली तिहार पर तुलसी पूजा कृषि यंत्रों की पूजा में शामिल होने के बाद भंवरा, बांटी, गिल्ली डंडा, मटकी फोड़ और गेड़ी नृत्य जैसे आयोजन में शामिल होंगे।
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वे इस मौके पर गौ पूजन कर हरेली के अवसर पर तैयार किए गए लोंदी खिलाएंगे। मुख्यमंत्री निवास में आयोजित कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ी लोक कलाकारों द्वारा राउत नाचा, गेड़ी नृत्य की प्रस्तुति दी जाएगी तथा हरेली गीत भी गाए जाएंगे। इस मौके पर पशुधन विकास और पारंपरिक कृषि यंत्रों की प्रदर्शनी लगाई जाएगी।
                      

मुख्यमंत्री निवास पर ग्रामीण परिवेश के अनुरूप सजाया जा रहा है। यहां रहचुली भी लगाई जा रही है। हरेली तिहार में राउत नाचा का कार्यक्रम दयालू राम यादव और उनकी टीम द्वारा प्रस्तुित किया जाएगा। गेड़ी नृत्य प्रेम यादव तथा लोककला संस्कृति की प्रस्तुति अनुराग शर्मा की टीम द्वारा दी जाएगी। हरेली खेती का त्योहार है और साथ ही छत्तीसगढ़ में खेलों का सबसे बड़ा दिन। 
                   

मुख्यमंत्री इस दिन छत्तीसगढ़िया ओलंपिक का शुभारंभ रायपुर जिले के ग्राम नवागांव (ल) में करेंगे और वहां आयोजित किसान सम्मेलन में शामिल होंगे। गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ के प्रमुख 6 पर्वों पर सार्वजनिक अवकाशों की घोषणा की है, उनमें हरेली त्यौहार भी शामिल है।



विशेष लेख : हरेली तिहार से खेती-किसानी के साथ-साथ छत्तीसगढ़िया ओलंपिक की होगी शुरूआत

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में हरेली त्यौहार का विशेष महत्व है। हरेली छत्तीसगढ़ का पहला त्यौहार है। इस त्यौहार से ही राज्य में खेती-किसानी की शुरूआत होती है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह त्यौहार परंपरागत् रूप से उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन किसान खेती-किसानी में उपयोग आने वाले कृषि यंत्रों की पूजा करते हैं और घरों में माटी पूजन होता है। गांव में बच्चे और युवा गेड़ी का आनंद लेते हैं। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की पहल पर लोक महत्व के इस पर्व पर सार्वजनिक अवकाश भी घोषित किया गया है। इससे छत्तीसगढ़ की संस्कृति और लोक पर्वों की महत्ता भी बढ़ गई है। 

लोक संस्कृति इस पर्व में अधिक से अधिक लोगों को जोड़ने के लिए छत्तीसगढ़िया ओलंपिक की भी शुरूआत की जा रही है। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा राज्य के परंपरागत तीज-त्यौहार, बोली-भाखा, खान-पान, ग्रामीण खेलकूद को बढ़ावा देने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री की पहल पर राज्य शासन के वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने लोगों तक गेड़ी की उपलब्धता के लिए जिला मुख्यालयों में स्थित सी-मार्ट में किफायती दर में गेड़ी बिक्री के लिए व्यवस्था की है। परंपरा के अनुसार वर्षों से छत्तीसगढ़ के गांव में अक्सर हरेली तिहार के पहले बढ़ई के घर में गेड़ी का ऑर्डर रहता था और बच्चों की जिद पर अभिभावक जैसे-तैसे गेड़ी भी बनाया करते थे। वन विभाग के सहयोग से सी-मार्ट में गेड़ी किफायती दर पर उपलब्ध कराया गया है, ताकि बच्चे, युवा गेड़ी चढ़ने का अधिक से अधिक आनंद ले सके।

मुख्यमंत्री की पहल पर पिछले वर्ष शुरू की गई छत्तीसगढ़िया ओलंपिक को काफी लोकप्रियता मिली। इसको देखते हुए इस बार हरेली तिहार के दिन शुरू होने वाली छत्तीसगढ़िया ओलंपिक 2023-24 को और भी रोमांचक बनाने के लिए एकल श्रेणी में दो नए खेल रस्सीकूद एवं कुश्ती को भी शामिल किया गया है। हरेली पर्व के दिन से ही प्रदेश में छत्तीसगढ़िया ओलंपिक खेल की शुरूआत भी होने जा रही है, जो सितंबर के अंतिम सप्ताह तक जारी रहेगा। हरेली पर्व के दिन पशुधन के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए औषधियुक्त आटे की लोंदी खिलाई जाती है। गांव में यादव समाज के लोग वनांचल जाकर कंदमूल लाकर हरेली के दिन किसानों को पशुओं के लिए वनौषधि उपलब्ध कराते हैं। गांव के सहाड़ादेव अथवा ठाकुरदेव के पास यादव समाज के लोग जंगल से लाई गई जड़ी-बूटी उबाल कर किसानों को देते हैं। इसके बदले किसानों द्वारा चावल, दाल आदि उपहार में देने की परंपरा रही हैं।

सावन माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को हरेली पर्व मनाया जाता है। हरेली का आशय हरियाली ही है। वर्षा ऋतु में धरती हरा चादर ओड़ लेती है। वातावरण चारों ओर हरा-भरा नजर आने लगता है। हरेली पर्व आते तक खरीफ फसल आदि की खेती-किसानी का कार्य लगभग हो जाता है। माताएं गुड़ का चीला बनाती हैं। कृषि औजारों को धोकर, धूप-दीप से पूजा के बाद नारियल, गुड़ का चीला भोग लगाया जाता है। गांव के ठाकुर देव की पूजा की जाती है और उनको नारियल अर्पण किया जाता है। हरेली तिहार के साथ गेड़ी चढ़ने की परंपरा अभिन्न रूप से जुड़ी हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग सभी परिवारों द्वारा गेड़ी का निर्माण किया जाता है। परिवार के बच्चे और युवा गेड़ी का जमकर आनंद लेते है। गेड़ी बांस से बनाई जाती है। दो बांस में बराबर दूरी पर कील लगाई जाती है।

एक और बांस के टुकड़ों को बीच से फाड़कर उन्हें दो भागों में बांटा जाता है। उसे नारियल रस्सी से बांध़कर दो पउआ बनाया जाता है। यह पउआ असल में पैर दान होता है  जिसे लंबाई में पहले कांटे गए दो बांसों में लगाई गई कील के ऊपर बांध दिया जाता है। गेड़ी पर चलते समय रच-रच की ध्वनि निकलती हैं, जो वातावरण को औैर आनंददायक बना देती है। इसलिए किसान भाई इस दिन पशुधन आदि को नहला-धुला कर पूजा करते हैं। गेहूं आटे को गंूथ कर गोल-गोल बनाकर अरंडी या खम्हार पेड़ के पत्ते में लपेटकर गोधन को औषधि खिलाते हैं। ताकि गोधन को विभिन्न रोगों से बचाया जा सके। गांव में पौनी-पसारी जैसे राऊत व बैगा हर घर के दरवाजे पर नीम की डाली खोंचते हैं। गांव में लोहार अनिष्ट की आशंका को दूर करने के लिए चौखट में कील लगाते हैं। यह परम्परा आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में विद्यमान है।

हरेली के दिन बच्चे बांस से बनी गेड़ी का आनंद लेते हैं। पहले के दशक में गांव में बारिश के समय कीचड़ आदि हो जाता था उस समय गेड़ी से गली का भ्रमण करने का अपना अलग ही आनंद होता है। गांव-गांव में गली कांक्रीटीकरण से अब कीचड़ की समस्या काफी हद तक दूर हो गई है। हरेली के दिन गृहणियां अपने चूल्हे-चौके में कई प्रकार के छत्तीसगढ़ी व्यंजन बनाती है। किसान अपने खेती-किसानी के उपयोग में आने वाले औजार नांगर, कोपर, दतारी, टंगिया, बसुला, कुदारी, सब्बल, गैती आदि की पूजा कर छत्तीसगढ़ी व्यंजन गुलगुल भजिया व गुड़हा चीला का भोग लगाते हैं। इसके अलावा गेड़ी की पूजा भी की जाती है। शाम को युवा वर्ग, बच्चे गांव के गली में नारियल फेंक और गांव के मैदान में कबड्डी आदि कई तरह के खेल खेलते हैं। बहु-बेटियां नए वस्त्र धारण कर सावन झूला, बिल्लस, खो-खो, फुगड़ी आदि खेल का आनंद लेती हैं।

शिक्षा एकमात्र माध्यम जिससे व्यक्ति का विकास संभव हैः सीएम

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रायपुर। हम अपनी संस्कृति को सहेजते हुए और परंपराओं का सम्मान करते हुए आगे बढ़ रहे हैं और शिक्षा ही एकमात्र माध्यम है जिससे व्यक्ति का विकास संभव है। ये बातें मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज राजधानी रायपुर के शहीद स्मारक भवन में आयोजित प्रांतीय आर्य महासम्मेलन एवं ज्ञान ज्योति पर्व कार्यक्रम में कही।

                     
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि स्वामी दयानंद सरस्वती ने जिस आंदोलन की शुरूआत की थी हमें आज उसका परिणाम देखने को मिल रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वामी दयानंद सरस्वती ने महिलाओं को शिक्षित करने के लिए आवाज उठायी थी और इसी का परिणाम है कि छत्तीसगढ़ के कालेजों में पुरूषों से ज्यादा संख्या महिला विद्यार्थियों की है।

                  

मुख्यमंत्री ने महर्षि स्वामी दयानंद सरस्वती जी की 200वीं जयंती और आर्य समाज के 150वें स्थापना दिवस  पर स्वामी दयानंद सरस्वती जी और तुलाराम आर्य परगनिहा जी को नमन करते हुए ज्ञान ज्योति पर्व मनाने के लिए सभी को बधाई दी। बघेल ने छत्तीसगढ़ में आर्य समाज के संस्थापक और महान दानवीर तुलाराम आर्य परगनिहा जी के प्राकट्य दिवस पर उनका स्मरण करते कहा कि श्रद्धेय तुलाराम आर्य जी ने छत्तीसगढ़ में स्थानीय स्तर पर समाज सुधार की दिशा में सराहनीय प्रयास किए हैं हम उन्हें उनकी दानशीलता के लिए भी याद करते हैं।
                  

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि किसी भी समाज के विकास की प्रक्रिया बहुत लंबी और बहुत जटिल होती है और एक उन्नत समाज को आकार लेने में सदियां लग जाती हैं। नये विचारों की स्थापना और पुराने विचारों के संशोधन-परिमार्जन से ही समाज प्रगतिशील होता है, उसके वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास होता है। मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि हमारा भारतीय समाज एक प्रगतिशील समाज है क्योंकि हमने हमेशा ही नये विचारों का स्वागत किया है। हम जिसे सनातन परंपरा कहते हैं, वह अनादि-काल से चली आ रही है, वह अनंतकाल तक चलती रहेगी।

प्रांतीय आर्य महासम्मेलन एवं ज्ञान ज्योति पर्व में शामिल होने के लिए दिल्ली से आए स्वामी आर्यवेश ने अपने संबोधन में छत्तीसगढ़ शासन की योजनाओं की तारीफ करते हुए कहा कि गौठान योजना शुरू करके राज्य में न सिर्फ मवेशियों का संरक्षण किया जा रहा  है बल्कि इससे लोगों को रोजगार भी मिल रहा है। स्वामी आर्यवेश ने कहा कि राम वन गमन पथ योजना को आकार देकर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने एक अमिट कार्य किया है।

इस मौके पर खाद्य एवं संस्कृति मंत्री अमरजीत भगत,  छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम के अध्यक्ष गिरीश देवांगन, छत्तीसगढ़ राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के सदस्य आर एन वर्मा, आर्य समाज से स्वामी आर्यवेश, छत्तीसगढ़ प्रांतीय आर्य समाज के अध्यक्ष आचार्य अंशुदेव, मंत्री भुवनेश साहू समेत अन्य पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित थे।

छत्तीसगढ़ किसानों, आदिवासियों, मजदूरों और मेहनतकशों का प्रदेश : मुख्यमंत्री बघेल

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि छत्तीसगढ़ किसानों, आदिवासियों, मजदूर और मेहनतकशों का प्रदेश है और सबकी अपनी विशेषताएं है। सभी ने अपनी संस्कृति को बढ़ाया और उसको सहेज कर रखने के लिए बड़ी मेहनत की और इसी से छत्तीसगढ़िया संस्कृति की पहचान बनी है। हमारी सरकार ने इसे आगे बढ़ाने का काम किया है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल आज निजी न्यूज़ चैनल द्वारा आयोजित प्रगति पथ पर छत्तीसगढ़ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
                    

मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि छत्तीसगढ़ी आहार में मुख्य स्थान रखने वाले बोरे-बासी को हमने सम्मान दिलाने का काम किया है। अब यह छत्तीसगढ़िया सम्मान से जुड़ गया है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के पारंपरिक खेलों को छत्तीसगढ़िया ओलंपिक के माध्यम से हमने बड़ा मंच दिलाया। पिठ्ठूल, गिल्ली डंडा, भौंरा, फुगड़ी, खो-खो जैसे परंपरागत खेलों ने अपनी खोई पहचान हासिल की है और लोग उत्साह के साथ ओलंपिक खेलों से जुड़े। उन्होंने कहा कि अइरसा, ठेठरी, खुरमी, फरा, चीला जैसे छत्तीसगढ़िया पकवान अब गढ़ कलेवा के माध्यम से हर जगह मिलने लगा है और सामाजिक आयोजन में इसे बड़े सम्मान के साथ परोसा जा रहा है।
                   

मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि कोरोना की विकट परिस्थिति में भी हम प्रदेश के किसानों और मजदूरों के साथ खड़े रहे। मनरेगा के माध्यम से उन्हें रोजगार दिलाने का काम किया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ भगवान राम का ननिहाल है और वनवास काल में भगवान राम ने छत्तीसगढ़ में लंबे समय तक यात्रा की। यहां शिवरीनारायण में भगवान राम ने शबरी के झूठे बेर खाये। राम वन गमन पथ के माध्यम से हमें भगवान राम की इस यात्रा को चिरस्मरणीय बनाने का अवसर मिला है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे राम कौशल्या के राम है, शबरी के राम है, मेहनतकश लोगों के राम है, वनवासी राम है तथा राम सौम्य और कारुणिक है और हम सबके भांजे है। राष्ट्रीय रामायण महोत्सव का आयोजन भी हम कर पाये यह बड़ी बात है।

नक्सली समस्या पर अपनी बात रखते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश इससे लगातार ग्रसित रहा है। नक्सली उन्मूलन को लेकर हमारा नजरिया अलग है और यह एक राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक समस्या है। विश्वास, विकास और सुरक्षा के साथ हमने बस्तर के लोगों का विश्वास जीतने की कोशिश की है। हमारी सरकार ने न केवल आदिवासियों का जमीन वापस दिलाया बल्कि लोगों को रोजगार मुहैया कराया। इन विकास कार्यों से बस्तर के लोग हमें अपना मानने लगे। हमने बंद पड़े स्कूल खोले। सामाजिक और आर्थिक क्षेत्र में बस्तर में बड़े बदलाव आए हैं जिसके अब सकारात्मक परिणाम देखने को मिल रहे हैं। संबोधन के अंत में मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि बस्तर के लोग प्रकृति की गोद में रहने वाले लोग हैं। हमारे प्रयासों से अब बस्तर उन्नति की राह पर आगे बढ़ रहा है।

मुख्य सचिव ने की जल संसाधन, पर्यटन एवं संस्कृति विभाग की समीक्षा

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रायपुर। मुख्य सचिव अमिताभ जैन ने आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में राज्य शासन की प्राथमिकताओं वाली योजनाओं के क्रम में जल संसाधन, पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के कार्यो की समीक्षा की। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को राम-वन-गमन पर्यटन परिपथ के तहत किए जा रहे कार्यों में और प्रगति लाने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने जल संसाधन विभाग के अंतर्गत सिंचाई, घरेलू और अन्य प्रयोजन हेतु राजस्व वसूली की उपलब्धियों एवं लक्ष्यों के संबंध में अधिकारियों से विस्तार से जानकारी ली।

उन्होंने संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित किए जाने वाले महत्वपूर्ण सांस्कृतिक कार्यक्रमों के संबंध में अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। बैठक में मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव सुब्रत साहू भी मौजूद थे। मुख्य सचिव ने जल संसाधन विभाग के अधिकारियों से कहा है कि जल उपयोग के संबंध में उद्योगों से वसूली हेतु बेहतर प्रबंधन किए जाए। इसी तरह से भू-जल निकासी के प्रयोजनों के संबंध में नियमानुसार कार्य करने के निर्देश अधिकारियों को दिए। बैठक में प्रदेश की वृहद एवं मध्यम सिंचाई परियोजनाओं के अंतर्गत  चिन्हित जलाशयों में पर्यटन गतिविधियों के संबंध में उन्होंने अधिकारियों से चर्चा की। जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि पिछले चार वर्षों में सिंचाई परियोजनाओं के अंतर्गत करीब 1036 कार्यों को स्वीकृति दी गई है।

इसके लिए लगभग 4451 करोड़ की राशि स्वीकृत की गई है। इन सिंचाई योजनाओं से 2 लाख 36 हजार 338 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई प्रस्तावित है। बैठक में राम-वन-गमन पर्यटन परिपथ के अंतर्गत विभिन्न स्थलों पर वेलकम गेट, साइन बोर्ड लगाने तथा योजना के तहत कार्यों को पूर्ण करने के लिए और गति लाने एवं विभिन्न विभागों से आवश्यक समन्वय के साथ काम करने के निर्देश पर्यटन विभाग के अधिकारियों को दिए। बैठक में जल संसाधन, पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के सचिव श्री अन्बलगन पी., वित्त विभाग के सचिव श्री अंकित आनंद, संचालक संस्कृति श्री विवेक आचार्य सहित जल संसाधन, पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के अन्य अधिकारी शामिल हुए।

बोरे बासी दिवस के अवसर पर सबकी रहे सहभागिता – कलेक्टर

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राजनांदगांव। कलेक्टर डोमन सिंह ने कहा कि एक मई श्रम दिवस के अवसर पर बोरे बासी दिवस मनाया जाएगा। शासन द्वारा छत्तीसगढ़ की संस्कृति, खान-पान, रहन सहन एवं कला को प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्होंने बोरे बासी दिवस की तैयारी करने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए। कलेक्टर ने कहा कि 3 मई को दिव्यांगजनों के लिए कैलिपर तैयार करने हेतु डोंगरगांव के स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम स्कूल में शिविर का आयोजन किया जाएगा। जहां दिव्यांगजनों के हाथ एवं पैरों की माप ली जाएगी तथा उन्हें कृत्रिम हाथ-पैर बनाकर दिया जाएगा। समाज कल्याण विभाग इस कार्य के लिए नोडल होंगे।


उन्होंने स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा विभाग, पंचायत विभाग तथा समाज कल्याण विभाग आपसी समन्वय से कार्य करने के निर्देश दिए। शिविर में मेडिकल बोर्ड होगा तथा दिव्यांगजनों को दिव्यांगता प्रमाण पत्र जारी किए जाएंगे। नशा मुक्ति के लिए काउंसलिंग की जाएगी तथा बेस्ट कैंसर जागरूकता के लिए कार्यक्रम होंगे। राजनांदगांव जिले के 4 विकासखंड एवं मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी जिले के 3 विकासखंड के नागरिक शिविर में शामिल होंगे। उन्होंने अधिकारियों को पेयजल, टेंट सहित अन्य आवश्यक व्यवस्था करने के निर्देश दिए। छात्रावास, आश्रम एवं आंगनबाड़ी केन्द्रों में दिव्यांग बच्चों का चिन्हांकन करने के लिए कहा।

कलेक्टर ने कहा कि एसीसीईआरटी द्वारा जिले में किए गए नवाचार सभी प्राथमिक स्कूलों में स्मार्ट टीवी उपलब्धता के लिए प्रशंसा की गई है। उन्होंने शिक्षा विभाग तथा इस अभियान से जुड़े सभी लोगों को बधाई एवं शुभकामनाएं दी। उन्होंने बेरोजगारी भत्ता योजना के आवेदनों का सत्यापन शीघ्र करने के निर्देश दिए। कलेक्टर सिंह ने उक्त दिशा-निर्देश कलेक्टोरेट सभाकक्ष में आयोजित साप्ताहिक समय-सीमा की बैठक में दिए। कलेक्टर सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान अंतर्गत ज्यादा से ज्यादा लोगों की सहभागिता होनी चाहिए। अभियान में एनजीओ के साथ बैंकर्स को भी शामिल करें।

इसके लिए व्यवस्था बनाते हुए कार्य करें तथा गंभीर कुपोषित बच्चों को समय पर सुपोषण किट का वितरण करें। उन्होंने कहा कि हमर परिवार हेलमेट परिवार अभियान अंतर्गत सभी नागरिकों को ज्यादा से ज्यादा हेलमेट पहनने के लिए प्रोत्साहित करें। उन्होंने कहा कि आपके एक प्रयास से किसी का जीवन सुरक्षित हो सकता है। उन्होंने सभी सचिव एवं तकनीकी सहायक को भी गु्रप से हमर परिवार हेलमेट परिवार व्हाटएप ग्रुप में जोडऩे के लिए कहा। उन्होंने शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में आयुष्मान कार्ड बनाने के लिए गति लाने के लिए कहा। कलेक्टर ने कहा कि मुख्यमंत्री हाट बाजार क्लीनिक योजना अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में अच्छा कार्य किया जा रहा है।

इसके लिए निर्माणाधीन स्वास्थ्य कुटीर के संबंध में जानकारी ली। उन्होंने कहा कि शासकीय प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों में 8 से 25 मई 2023 तक समर कैम्प का आयोजन किया जाएगा। इसमें बच्चों के लिए विभिन्न तरह की गतिविधियां आयोजित की जाएगी। इसकी पूरी तैयारी रखें। उन्होंने मुख्यमंत्री स्कूल जतन योजना, मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना, अवैध नियमितिकरणमुख्यमंत्री के भेंट-मुलाकात की घोषणाओं के परिपालन में भूमि आबंटन, निर्माण एजेंसी द्वारा किए जा रहे कार्य, शालाओं के मरम्मत, धन्वंतरी मेडिकल स्टोर्स, स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालयों में रिक्त पदों पर भर्ती सहित शासन की विभिन्न योजनाओं की समीक्षा की। जिला पंचायत सीईओ अमित कुमार ने रूरल इंडस्ट्रियल पार्क के अंतर्गत किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने रीपा के तहत फ्लाई ऐस ब्रिक्स एवं गोबर पेंट के लिए मांग के संबंध में जानकारी ली। इस अवसर पर अपर कलेक्टर सीएल मारकण्डेय, एसडीएम अरूण वर्मा, संयुक्त कलेक्टर अभिषेक गुप्ता एवं खेमलाल वर्मा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे। अन्य अधिकारी वीडियो कान्फ्रेसिंग के माध्यम से जुड़े रहे।

कुदरगढ़ महोत्सव में दिखेगी छत्तीसगढ़ी संस्कृति की झलक, सजेगी लोकगीतों की महफिल

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सूरजपुर। सूरजपुर अंचल की अधिष्ठात्री देवी मां बागेश्वरी के धाम में कुदरगढ़ महोत्सव का भव्य आयोजन किया जा रहा है। कुदरगढ़ महोत्सव की तैयारियां जोरो पर हैं। कलेक्टर सुश्री इफ्फत आरा, जिला पंचायत सीईओ सुश्री लीना कोसम ने कुदरगढ़ महोत्सव 2023 की तैयारियों का जायजा लिया। सफल आयोजन के लिए अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपकर आवश्यक दिशा निर्देश दिए है। कुदरगढ़ महोत्सव का आयोजन 26 मार्च से 28 मार्च तक तीन दिन का होगा। इस तीन दिवसीय महोत्सव में छत्तीसगढ़ की कला-संस्कृति की झलक दिखेगी।

साथ ही साथ इस महोत्सव में छत्तीसगढ़ एवं जिले के स्थानीय उभरते कलाकार भी अपनी कला की शानदार प्रस्तुति देंगे। कुदरगढ़ महोत्सव के पहले दिन 26 मार्च को डॉ. पूर्णाश्री राउत क्लासिकल डांस, मास्टर ओम अग्रहरि नन्हा सितारा एवं कला केंद्र सूरजपुर की प्रस्तुति, नासिर खान सूफी गायक, बीजीएम म्यूजिकल ग्रुप, दिलीप षडंगी भजन सम्राट, आमा पान के पतरी करेला, पान के दोना रायगढ़ द्वारा जगराता कार्यक्रम की प्रस्तुति दी जाएगी।

27 मार्च को दूसरे दिन सुश्री आनंदिता तिवारी कथक नृत्य खैरागढ़ विश्वविद्यालय, जाकिर हुसैन स्टार वॉइस ऑफ इंडिया फेम कोरबा, पुनीत ग्रुप जबलपुर द्वारा शिव तांडव, अलका चंद्राकर रायपुर छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध गायिका द्वारा प्रस्तुति दी जाएगी। तीसरे दिन 28 मार्च को संजय सुरीला सरगुजा, हाय रे सरगुजा नाचे फेम, पारंपरिक नृत्य समूह एचडी इवेंट फिलर प्रस्तुति, आरू साहू सिहावा सुआ बोलत हे फेम छत्तीसगढ़ी लोक गीत मुख्य आकर्षक के केन्द्र होंगे। सभी कार्यक्रम शाम 6 बजे से प्रारंभ होंगे। कुदरगढ़ महोत्सव में इसके अतिरिक्त पारंपरिक नृत्य, मानस मंडली एवं विविध खेलकूद प्रतियोगिता का आयोजन भी किया जाएगा।

भारत पर्व में दिख रही छत्तीसगढ़ की कला, संस्कृति व पर्यटन स्थलों की झलक

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रायपुर। देश की संस्कृति व पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय द्वारा लाल किला प्रागंण में 26 जनवरी से छह दिवसीय कार्यक्रम श्श्भारत पर्वश्श् का आयोजन किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों के साथ ही छत्तीसगढ़ की संस्कृति, कला और खानपान से रूबरू होने का मौका लोगों को मिल रहा है। लाल किले के प्रागंण में 31 जनवरी तक चलने वाले कार्यक्रम के दौरान दर्शकों को गणतंत्र दिवस परेड की सर्वश्रेष्ठ झाकियां भी देखने को मिल रही है।

पर्व में विभिन्न राज्यों के व्यंजन से लेकर भारत की संस्कृति व कला की झलक देखने को मिल रही है। छत्तीसगढ़ द्वारा भी भारत पर्व में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया जा रहा है। प्रदेश की कला और संस्कृति के साथ ही स्टालों के माध्यम से राज्य के पर्यटन स्थलों को भी प्रदर्शित किया जा रहा है। यहां बने गढ़ कलेवा में स्थानीय व्यंजन की खुशबू भी बिखर रही है। भारत पर्व में आने वाले आगंतुकों द्वारा जमकर स्वाद लिया जा रहा है। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ की हस्तशिल्प व हथकरघा की भी झलक देखने को मिल रही है। यहाँ लगे स्टालों से लोग जमकर खरीदारी भी कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान काफी टेबल बुक का किया विमोचन

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर लामनी स्थित पक्षी विहार के लोकार्पण कार्यक्रम में शामिल होने के उपरांत कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान काफी टेबल बुक और कैलेण्डर का विमोचन किया और अपनी शुभकामनाएं दी। इस काफी टेबल बुक में सम्पूर्ण बस्तर क्षेत्र की जैव विविधता की रोचक चित्रात्मक जानकारी दी गई है,

जो लोगों के लिए उपयोगी होगी। वन विभाग द्वारा लगातार ईकोटूरिज्म को बढ़ावा देने लगातार प्रयास किया जा रहा है। बस्तर में प्रकृति भी है और संस्कृति भी है। काफीटेबल बुक में बस्तर की प्रकृति और वहां की संस्कृति को शामिल किया गया है।

इस अवसर लोकसभा सांसद दीपक बैज, राज्यसभा सांसद श्रीमती फुलोदेवी नेताम, संसदीय सचिव रेखचंद जैन, छत्तीसगढ़ राज्य हस्तशिल्प विकास बोर्ड अध्यक्ष एवं विधायक चंदन कश्यप, विधायक चित्रकोट राजमन बेंजाम, इंद्रावती बेसिन विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष राजीव शर्मा, छत्तीसगढ़ राज्य अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण (क्रेडा) के अध्यक्ष मिथिलेश स्वर्णकार, कलेक्टर चंदन
कुमार
, डीएफओ डी.पी साहू, संचालक कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान धम्मशील गणवीर सहित गणमन्य नागरिक उपस्थित थे।

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