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कृषकों की समृद्धि हमारा संकल्प: नवाचार और तकनीक से सशक्त होंगे छत्तीसगढ़ के अन्नदाता – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज जशपुर जिले में बगिया स्थित मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय से कृषि क्रांति अभियान के अंतर्गत एग्री-हॉर्टी एक्सपो एवं क्रेता-विक्रेता सम्मेलन का वर्चुअल शुभारंभ किया। जिला पंचायत परिसर में दो दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में देश की कई प्रमुख कृषि कंपनियां जैसे-जियो मार्ट रिटेल, देहात, हॉनेस्ट फॉर्म, आत्माकुर, धरागरी, अवनी आयुर्वेदा इत्यादि उपस्थित रहेंगी। इन कंपनियों के माध्यम से जिले के किसान एफपीओ के जरिए अपनी उपज का उचित मूल्य प्राप्त करने हेतु फसल विक्रय अनुबंध कर सकेंगे। बिचौलिया प्रथा समाप्त होने से किसानों को उनकी मेहनत का सही मूल्य प्राप्त होगा।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि  कृषकों की समृद्धि के लिए छत्तीसगढ़ सरकार दृढ़ संकल्पित है । नवीनतम तकनीक को अपनाकर छत्तीसगढ़ के अन्नदाता आर्थिक रूप से अधिक सशक्त होंगे। उन्होंने कहा कि जशपुर के कृषि विकास के इतिहास में आज का दिन मील का पत्थर सिद्ध होने वाला है। जिला प्रशासन के अभिनव प्रयास से कृषि क्रांतिअभियान की शुरुआत हो रही है। हमारा देश कृषि प्रधान है और छत्तीसगढ़ में लगभग 80 प्रतिशत लोग कृषि तथा इससे संबंधित कार्यों से जुड़े हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार द्वारा किसानों की आय बढ़ाने हेतु फसल बीमा योजना, पीएम किसान सम्मान निधि सहित कई महत्वपूर्ण योजनाओं का संचालन किया जा रहा है। चाहे वह समर्थन मूल्य पर 3100 रुपये प्रति क्विंटल के मान से 21 क्विंटल प्रति एकड़ धान खरीदी हो, समर्थन मूल्य पर वनोपज का संग्रहण हो या प्रोसेसिंग और निर्यात से जुड़ी योजनाएं हों, हमारी सरकार किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए बहुस्तरीय प्रयास कर रही है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जशपुर में कटहल, आम, लीची, नाशपाती की बहुतायत में पैदावार होती है। यहां सेब की भी खेती शुरू हो गई है। इस सम्मेलन के माध्यम से किसानों और खरीदार कंपनियों के बीच सीधा संवाद स्थापित होगा। यह एक ऐसा मंच है जहां एफपीओ (किसान उत्पादक संगठन) के माध्यम से किसानों की उपज को सीधा बाजार उपलब्ध होगा, जिससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त होगी और किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सकेगा।

मुख्यमंत्री साय ने सॉइल हेल्थ कार्ड के महत्व के बारे में बताते हुए कहा कि इससे यह जानकारी मिलती है कि किस जमीन पर कौन-सी फसल का उत्पादन अधिक होगा और कितनी मात्रा में खाद की आवश्यकता होगी। इसके लिए केंद्र से आए कृषि वैज्ञानिक पूरे राज्य में जाकर सॉइल हेल्थ के प्रति लोगों को जागरूक कर रहे हैं। राज्य में कृषि के साथ पशुपालन, मछली पालन और डेयरी विकास को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। डेयरी विकास योजना के पायलट प्रोजेक्ट के तहत चयनित छह जिलों में जशपुर भी शामिल है।

रायगढ़ से वर्चुअली जुड़े सांसद राधेश्याम राठिया ने कहा कि जशपुर जिले का प्राकृतिक वातावरण अत्यंत आकर्षक है। जल संरक्षण और संवर्धन के महत्व पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि जल का संरक्षण अनिवार्य है, जिससे किसानों को लाभ होगा और उनकी आमदनी में वृद्धि होगी। जिला पंचायत से वर्चुअली जुड़ी विधायक श्रीमती रायमुनी भगत ने कहा कि जशपुर जिला नवाचार को तेजी से अपना रहा है। इस सम्मेलन के माध्यम से किसानों और कंपनियों के बीच सीधा अनुबंध होगा, जिससे उन्हें निश्चित रूप से लाभ मिलेगा।

जिला पंचायत अध्यक्ष सालिक साय ने अपने संबोधन में कहा कि यदि जिले में व्यवस्थित ढंग से खेती और प्रबंधन किया जाए तो किसानों को निश्चय ही लाभ प्राप्त होगा। जशपुर आम, मिर्च और नाशपाती के उत्पादन में अग्रणी है। उन्होंने धान के साथ दलहन और तिलहन की खेती को प्रोत्साहित करने पर बल दिया।

कलेक्टर रोहित व्यास ने एग्री-हॉर्टी एक्सपो एवं क्रेता-विक्रेता सम्मेलन के महत्व तथा इससे किसानों को होने वाले लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। जिला पंचायत से वर्चुअली जुड़े जिला पंचायत सीईओ अभिषेक कुमार ने एक वीडियो प्रेजेंटेशन के माध्यम से सम्मेलन के तहत होने वाले नवाचार एवं विभिन्न कार्यक्रमों की जानकारी दी। इस अवसर पर आईजी दीपक कुमार झा, पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह,  नगर पालिका अध्यक्ष अरविंद भगत, जनपद पंचायत अध्यक्ष गंगा राम भगत सहित अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।

ग्री-हॉर्टी एक्सपो एवं क्रेता-विक्रेता सम्मेलन में मिलेगी उन्नत तकनीकों की जानकारी

सम्मेलन के माध्यम से किसानों को उन्नत तकनीकों की जानकारी देने के उद्देश्य से नाबार्ड एवं एपेडा जैसी संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित होकर एग्रीकल्चर मार्केटिंग, जैव उत्पादों के प्रमाणीकरण आदि विषयों पर किसानों को जानकारी देंगे। राज्य के वरिष्ठ वैज्ञानिक फसल किस्मों का जीआई टैग, कृषि एवं उद्यानिकी फसलों की वैज्ञानिक पद्धति से खेती तथा रेशम विशेषज्ञ रेशम पालन की जानकारी देंगे। साथ ही कंपनी एवं किसानों के मध्य अनुबंध खेती (कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग) पर चर्चा का आयोजन किया जाएगा, जिसमें कंपनी और कृषकों के मध्य अनुबंध हस्ताक्षर भी किए जाएंगे।

कार्यक्रम में फसल प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया है, जिसमें जिले के एफपीओ से जुड़े किसान एवं प्रगतिशील किसान अपनी फसल जैसे-जैविक धान, कुटकी, रागी, नाशपाती, लीची, रामतिल, टाऊ, मिर्च, सुगंधित धान आदि का किस्मवार गुणवत्ता के आधार पर प्रदर्शन करेंगे। कार्यक्रम के अंतर्गत आम एवं नाशपाती तथा नवाचार प्रतियोगिता का आयोजन भी किया गया है। विजेता किसानों को पुरस्कार राशि भेंट कर आगामी समय में नवाचार एवं उन्नतशील खेती के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

 

हम सभी की साझी भागीदारी से ही पर्यावरण संरक्षण का संकल्प होगा पूरा : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कृषक सभागार में आयोजित फाइट अगेंस्ट ग्लोबल वार्मिंग कैंपेन कार्यक्रम में शामिल हुए। मुख्यमंत्री साय ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षा, विकास का मूलमंत्र है और यह राष्ट्र के समग्र विकास की प्रारंभिक तथा अत्यंत महत्वपूर्ण कड़ी है। उन्होंने कहा कि निजी शिक्षण संस्थानों ने भी शिक्षा के विस्तार में अपनी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को वर्ष 2047 तक विकसित भारत बनाने का जो लक्ष्य निर्धारित किया है, उसे प्राप्त करने में हम सभी की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। राज्य सरकार ने इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए विकसित छत्तीसगढ़ का विज़न डॉक्यूमेंट तैयार किया है और इस दिशा में निरंतर प्रयासों को गति प्रदान की जा रही है।


मुख्यमंत्री साय ने कहा कि 25 वर्ष का छत्तीसगढ़ आज अपनी रजत जयंती मना रहा है और इस यात्रा में राज्य ने चहुंमुखी विकास की दिशा में ऐतिहासिक उपलब्धियाँ हासिल की हैं। उन्होंने कहा कि आज छत्तीसगढ़ में आईआईटी, आईआईएम, एम्स जैसे प्रतिष्ठित केंद्रीय संस्थान कार्यरत हैं, जो राज्य के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग की गंभीर चुनौती से जूझ रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार ने वर्ष 2070 तक नेट ज़ीरो कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य तय किया है, जिसकी दिशा में देश ने तीव्र गति से कदम बढ़ाए हैं। छत्तीसगढ़ ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने की दिशा में अग्रसर है। राज्य की आकर्षक नई औद्योगिक नीति के तहत केवल ऊर्जा क्षेत्र में ही तीन लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्राप्त हुए हैं। मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि राज्य में वृक्षारोपण का विशेष अभियान चलाया जा रहा है और विगत वर्ष चार करोड़ पौधे रोपे गए थे। राज्य सरकार "एक पेड़ माँ के नाम" और "पीपल फॉर पीपुल" जैसे नवाचार कार्यक्रमों को निरंतर जारी रखेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें नौनिहालों में पर्यावरण चेतना का विकास करना चाहिए, जिससे वे स्वच्छ, सुंदर और सुरक्षित भविष्य की नींव रख सकें। उन्होंने इस अभियान में भाग ले रहे सभी शिक्षकों और आयोजकों की सराहना की और कहा कि सामाजिक भागीदारी से ही हम शुद्ध हवा, निर्मल जल और स्वस्थ वातावरण सुनिश्चित कर सकते हैं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने संघ द्वारा आने वाले वर्षों में 11 लाख पीपल के वृक्षारोपण के संकल्प की सराहना की।

कार्यक्रम में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल, अशासकीय विद्यालय संचालक संघ के प्रदेश अध्यक्ष सुबोध राठी, सचिव मनोज पाण्डेय तथा अन्य प्रतिनिधिगण उपस्थित थे। उल्लेखनीय है कि यह कार्यक्रम छत्तीसगढ़ राज्य अशासकीय विद्यालय संचालक संघ एवं छत्तीसगढ़ राज्य गौ संरक्षण एवं संवर्धन समिति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया था।

अपनी विरासत को सहेजते हुए छत्तीसगढ़ को अग्रणी राज्य बनाने का संकल्प लें : राज्यपाल रमेन डेका

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रायपुर।  छत्तीसगढ़ एक युवा राज्य है और युवा अवस्था में ही इस राज्य ने विभिन्न क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा और क्षमता का प्रदर्शन किया है। राज्योत्सव के मौके पर अपनी विरासत को सहेजने और छत्तीसगढ़ को अग्रणी राज्य बनाने का संकल्प लें। नागरिकगणों से यह अपील राज्योत्सव कार्यक्रम के दूसरे दिन मुख्य अतिथि राज्यपाल रमेन डेका ने की। कार्यक्रम की अध्यक्षता मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने की

इस मौके पर अपने संबोधन में डेका ने कहा कि आज का दिन हम सभी के लिए गौरव का दिन है। हमारे छत्तीसगढ़ राज्य की स्थापना को 24 वर्ष पूरे हो चुके हैं और यह हम सबके लिए ऐतिहासिक क्षण है। इन वर्षाे में हमने एक मजबूत आधार बनाया है और अपने लक्ष्य की ओर लगातार बढ़ने का संकल्प लिया है। उन्होंने इस अवसर पर राज्य निर्माण का स्वप्न देखने वाले और इसके लिए संघर्ष करने वाले पुरखों को भी नमन किया। उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की प्रशंसा करते हुए कहा कि  राज्य शासन द्वारा जनकल्याण के लिए विभिन्न योजनाएं चलाई जा रही हैं जिसके लिए मुख्यमंत्री बधाई के पात्र हैं। छत्तीसगढ़ में कृषि एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने के लिए सार्थक प्रयास किये जा रहे हैं। जनजातियों, महिलाओं एवं युवाओं के उत्थान एवं कल्याण के लिए भी निरंतर पहल की जा रही है।

राज्यपाल ने कहा कि पिछले 23 वर्षों में छत्तीसगढ़ के विकास के लिए एक ठोस धरातल निर्मित हुआ है। इस दौर में राज्य की सांस्कृतिक रूप से भी एक अलग पहचान बनी है। वर्तमान में भी सांस्कृतिक समृद्धि के लिए चहुंमुखी प्रयास किये जा रहे हैं। छत्तीसगढ़ में प्राकृतिक संसाधन पर्याप्त हैं, चाहे वन हो, खनिज हो या मानव संसाधन हो, सभी का उचित दोहन किया जाना अभी बाकी है। संसाधनों के दोहन के साथ ही हमें इस पर भी गहन चिंतन करना होगा कि विकास का पैमाना क्या हो। विकास की सतत् प्रक्रिया में प्रकृति के साथ संतुलन बना रहे, यह भी ध्यान रखना होगा। हम सबको आज संकल्प लेना होगा कि छत्तीसगढ़ को विकास के पथ पर ले जाने के लिए मिलजुल कर प्रयास करेंगे।

राज्य की उन्नति के लिए शांति जरूरी है, विगत कुछ वर्षों से नक्सल हिंसा से छत्तीसगढ़ का कुछ हिस्सा प्रभावित रहा है। इस हिंसा को खत्म करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा लगातार साझा प्रयास किये जा रहे हैं। आशा है कि जल्द ही इस हिंसा से राज्य को मुक्ति मिलेगी और छत्तीसगढ़ तेजी से विकास की दौड़ में आगे बढ़ेगा।

राज्यपाल ने सभी नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि इस राज्य को अग्रणी राज्य बनाने के लिए अधिक से अधिक योगदान दें साथ ही आज एक संकल्प लें कि अपने प्रदेश की, शहर की सार्वजनिक संपत्तियों, सांस्कृतिक धरोहरों की रक्षा करेंगे, उसे संभालेंगे और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करेंगे।

विकास की सबसे बड़ी ताकत संस्कृति से मिलती है : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राज्योत्सव समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि जिन लोगों ने संयुक्त मध्यप्रदेश के समय छत्तीसगढ़ में जन्म लिया और बड़े हुए वे लोग तब और अब के फर्क को बहुत अच्छी तरह जानते हैं। उन्हें याद होगा कि किस तरह छत्तीसगढ़ में बार-बार अकाल पड़ता था। किसानों को रोजी-रोटी के लिए पलायन करना पड़ता था। सौभाग्य से जब अटल जी प्रधानमंत्री बने तो छत्तीसगढ़ की पीड़ा को समझा और अलग राज्य का निर्माण किया। 24 साल पूरे हो गये हैं। छत्तीसगढ़ विकास की ओर तेजी से बढ़ रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने कार्यक्रम में लोक कलाकारों को अधिकतम जगह दी है। इसके साथ ही छालीवुड और बालीवुड के कलाकारों को भी जगह दी है। मैं सभी कलाकारों का अभिनंदन करता हूँ। हमारी कला हमारे विचारों को अभिव्यक्त करने का माध्यम है। छत्तीसगढ़ की संस्कृति इस मामले में बहुत समृद्ध है हमारे यहां हर विधा के कलाकार हैं। छत्तीसगढ़ में लोक गायन, लोक कला एवं सभी विधाओं को हमारी सरकार प्रोत्साहित कर रही है। शिल्प ग्राम स्थापित किये गये हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हम अपने तीज त्योहारों, देव स्थलों, मड़ई मेलों को भी सहेज रहे हैं। विकास के लिए सबसे बड़ी ताकत संस्कृति से ही मिलती है। संस्कृति हमें बताती है कि विकास की दिशा क्या होनी चाहिए। प्राथमिकता क्या होनी चाहिए, सोच क्या होनी चाहिए, दृष्टिकोण क्या होना चाहिए और लक्ष्य क्या होना चाहिए। प्रत्येक नागरिक का आचार-विचार और व्यवहार संस्कृति ही तय करती है और इसी के अनुरूप नीति निर्धारण के लिए सरकार को प्रेरित करती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के लक्ष्य के अनुरूप विकसित छत्तीसगढ़ के लिए विजन डाक्यूमेंट तैयार किया है उसमें संस्कृति को सबसे ज्यादा तवज्जो दी है। संस्कृति ही समाज में ताकत पैदा करती है। छत्तीसगढ़ प्राकृतिक सौंदर्य के मामले में बेहद समृद्ध है। पर्यटन की यहां बड़ी संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि किस तरह से भगवान श्रीराम से जुड़े तीर्थों का विकास किया जा रहा है। माता शबरी और माता कौशल्या के धाम को संवारा जा रहा है। राजिम, सिरपुर, मधेश्वर, भोरमदेव, बारसूर आदि अनेक ऐतिहासिक स्थल हैं, जिनका विकास किया जा रहा है।

राज्योत्सव के दूसरे दिन भी रंगारंग कार्यक्रमों का आयोजन

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी शिल्प कला  को सहेजा जा रहा है और प्रोत्साहित किया जा रहा है। खादी के वस्त्रों पर 25 प्रतिशत की छूट देकर इसे प्रोत्साहित किया जा रहा है। इन सबके साथ ही प्रदेश के खानपान की अपनी विशेषता है। संस्कृति का संरक्षण और संवर्धन सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता में शामिल है। यह राज्य हमने बनाया है संवारा है और आगे भी इसे हम ही संवारेंगे।

इस मौके पर छत्तीसगढ़ नैसर्गिक पर्यटन पत्रिका और संस्कृति विभाग की पत्रिका बिहनियाका विमोचन किया। इस मौके पर मुख्य सचिव अमिताभ जैन, पुलिस महानिदेशक अशोक जुनेजा सहित अन्य गणमान्य नागरिक एवं अधिकारीगण मौजूद थे।

राजीव युवा मितान क्लब: युवा शक्ति को रचनात्मक कार्यों से जोड़ने की देश में अब तक की सबसे बड़ी पहल

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रायपुर। देश में युवा शक्ति को रचनात्मक कार्यों से जोड़ने की अब तक की सबसे बड़ी पहल छत्तीसगढ़ राज्य में की गई है। गढ़बो नवा छत्तीसगढ़ के संकल्प को बिना युवा शक्ति के सहयोग के पूरा नहीं किया जा सकता था। प्रदेश के नव निर्माण के लिए युवा शक्ति को जोड़ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने 13 हजार 242 राजीव युवा मितान क्लब बनवाये हैं। इन मितान क्लबों से रचनात्मक कार्यों में सहभागिता के लिए प्रदेश के 3 लाख 32 हजार 242 युवक जुड़े हैं। मुख्यमंत्री की इस पहल के बाद छत्तीसगढ़ देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है जहाँ इतने बड़े पैमाने पर युवा रचनात्मक कार्यों में लगे हुए हैं।

युवाओं की ऊर्जा के माध्यम से प्रदेश के नव निर्माण का विचार मुख्यमंत्री के मन में आया। सोच यह थी कि राजीव युवा मितान क्लब का गठन किया जाए। मितान का छत्तीसगढ़ी में अर्थ होता है मित्र। जब मित्रगण आपस में जुटें और उत्साह से कोई रचनात्मक कार्य करना शुरू करें तो अपने उत्साह से वे बड़ा कामकर जाते हैं। इनमें न्यूनतम 20 और अधिकतम 40 सदस्य होते हैं। राजीव युवा मितान क्लब योजना की शुरूआत 03 फरवरी 2022 को हुई। युवा शक्ति को रचनात्मक कार्यों से जोड़ने का यह क्रंातिकारी कार्यक्रम है। इसके माध्यम से छत्तीसगढ़ की संस्कृति, पर्यावरण, खेल को आगे बढ़ाने तथा जनकल्याणकारी योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने में मदद मिल रही है।

इन क्लबों को साल भर में एक लाख रुपए की राशि दी जाती है और हर तिमाही में 25 हजार रुपए। इसके माध्यम से युवा अपने कार्यक्रम आयोजित कर सकते हैं और इसका खर्च वहन कर सकते हैं। बहुत से रचनात्मक कार्य कर सकते हैं। इससे बहुत उत्साह का माहौल बना है।

अब तक 132 करोड़ रुपए इन युवा क्लबों को दिये गये हैं। इनके माध्यम से बड़े बदलाव हो रहे हैं। एक छोटी सी बानगी राजनांदगांव की लें, यहाँ एक गाँव है चारभांठा, यहाँ राजीव युवा मितान क्लब के सदस्यों ने सूचना की खिड़की बनाई। सूचना की खिड़की के माध्यम से लोगों को जागरूक किया जाता है। इसके सदस्य गोविंद साहू ने बताया कि जैसे गाँव में कोई गंभीर रूप से बीमार पड़ा तो हम बताते हैं कि घबराने की जरूरत नहीं। मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना के माध्यम से 25 लाख रुपए तक का इलाज भी हो जाता है। हम लोग पेयजल स्रोतों में साफसफाई के लिए लोगों को जागरूक करते हैं। 

तालाब की सफाई करते हैं। राजनांदगांव के ही अंजोरा गाँव का उदाहरण लें, गाँव के घर-घर तक क्लब के सदस्य पहुँचे और सभी को कोविड का टीका लगवाया। रायगढ़ जिले के ग्राम छींच का उदाहरण लें। यहाँ पर क्लब के सदस्यों ने व्यापक पौधरोपण का अभियान चलाया। क्लब के सदस्य ये देखते थे कि स्कूलों में बच्चों की शतप्रतिशत उपस्थिति है या नहीं, यदि बच्चे नहीं आ रहे तो क्यों, इस प्रकार अच्छी भागीदारी सुनिश्चित करते हैं। 

शहरों में युवा क्लब सांस्कृतिक गतिविधि में खूब हिस्सा ले रहे हैं। भिलाई में डिबेटिंग क्लब बने हैं जहाँ सांस्कृतिक प्रतियोगिताएं होती हैं। यहाँ पर बीते पौने पाँच सालों में काफी खेल परिसर बने हैं। इनमें आये दिन खेल गतिविधियों का आयोजन होता है और अधिकांश खेल गतिविधि राजीव युवा मितान क्लबों  द्वारा की जाती है।

महासमुन्द शहर में ब्रेन ट्यूमर का पहला सफल आपरेशन का दावा, डॉक्टर युगल ने बयान जारी कर दी जानकारी

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महासमुन्द। सोहम हॉस्पिटल के डायरेक्टर डॉक्टर युगल चंद्राकर ने मीडिया को बयान जारी कर बताया है कि संकल्प, सेवा और साधना को समर्पित उनके मल्टी स्पेशलटी हॉस्पिटल में जहाँ बड़ी से बड़ी चुनौती वाले आपरेशन लगातार किए जा रहे हैं। वहीं, हाल ही में ब्रेन ट्यूमर (मस्तिक में गांठ ) का पहली बार महासमुन्द शहर में सफलतापूर्वक आपरेशन किया गया। कुछ दिन पहले ही एक महिला, सिर में लगातर दर्द के चलते सोहम हॉस्पिटल में ईलाज हेतु भर्ती हुई। जहाँ ब्रेन की सीटी स्कैन करने के बाद पता चला कि महिला की सिर में गांठ है। जिसका आपरेशन जरूरी है। सिर का आपरेशन बहुत ही जटिल प्रक्रिया है। जिसमे आपरेशन के दौरान कभी भी जान हानि का खतरा और हाथ-पैर में शून्यता की आशंका बनी रहती है।



सोहम हॉस्पिटल के डायरेक्टर डॉक्टर युगल चंद्राकर बताते हैं कि ऐसी आपरेशन के लिए पहले शहर के लोगों को जिले से बाहर बड़े शहर में जाकर आपरेशन कराना पड़ता था। साथ ही सिर के आपरेशन में लाखों रुपए का खर्च होता था। अब इसके लिए कहीं जाने की जरूरत नहीं है। सोहम हॉस्पिटल में सिर के ट्यूमर का आपरेशन सफलतापूर्वक हो रहा है। साथ में आयुष्मान कार्ड से ऑपरेशन तथा ईलाज किया जा रहा है। सोहम हॉस्पिटल में dialysis की सुविधा आयुष्मान कार्ड से मिल रहा है। साथ ही यहां CT, ECG, ECHO, x-ray digital USG, मेडिकल , खून जांच, एंबुलेंस 24*7 उपलब्ध है।

लक्ष्य प्राप्ति के लिए दृढ़ संकल्प और सकारात्मक सोच जरुरी : राज्यपाल सुश्री उइके

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रायपुर। राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके अपने एक दिवसीय रायगढ़ प्रवास के दौरान आज ओ.पी. जिंदल विश्वविद्यालय के द्वितीय दीक्षांत समारोह में शामिल हुई। यहां उन्होंने उपाधि प्राप्त विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि दीक्षांत समारोह आपके जीवन के एक महत्वपूर्ण चरण के पूरा होने का प्रतीक है। आप सभी ने अपने मूल विषय में ज्ञान और अंर्तदृष्टि प्राप्त करने तथा मूल्यों को विकसित करने के लिए कड़ी मेहनत की है। इसी प्रकार जीवन में लक्ष्य के प्रति दृढ़ संकल्प और सकारात्मक सोच के फलस्वरूप ही आप सफलता के सोपान तय करेंगे।



दीक्षांत समारोह में राज्यपाल सुश्री उइके ने 31 स्वर्ण, 28 रजत और 27 कांस्य पदक सहित कुल 738 विद्यार्थियों को स्नातक की उपाधि प्रदान की और उन्हें उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं की। उन्होंने दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि आज युवाओं को प्रशिक्षित तथा प्रेरित करने के साथ-साथ उनमें उद्यमशीलता की भावना जगाने की जरूरत है। उन्हें अपना रास्ता तय करने के लिए मार्गदर्शित करने की आवश्यकता है। प्रत्येक विश्वविद्यालय की जिम्मेदारी है कि वह संकल्पना करें और राष्ट्र के विकास के लिए नई और उपयुक्त तकनीकों का निर्माण करें। 



राज्यपाल सुश्री उइके ने कहा कि अनुसंधान के लिए, समस्या समाधान के लिए, विकास के लिए अपने विद्यार्थियों के बीच नए विचारों, नवाचारों और उद्यमिता की सोच को पल्लवित और पोषित करे। नए विचारों और प्रौद्योगिकियों को कार्यशालाओं और उत्पादन तक लाकर दूरस्थ अंचलों में रहने वाले लोगों के जीवन स्तर को ऊपर उठाने के लिए कार्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब आप संकल्प लेंगे कि पूरा राष्ट्र आपका परिवार है तो पूरे देश को शक्ति मिलेगी और वास्तव में आपकी उपलब्धियों और क्षमता का राष्ट्र निर्माण में सदुपयोग हो पाएगा। 

मेरा आग्रह है कि आप जो भी कार्य करें, उसमें राष्ट्रहित सर्वोपरि हो। राज्यपाल सुश्री उइके ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी की पहल से देश में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू की गई है जो समानता, गुणवत्ता और जवाबदेही के मूलभूत सिद्धांतों पर आधारित है। निश्चित ही 21वीं सदी की आवश्यकताओं के अनुकूल शिक्षा नीति अद्वितीय क्षमताओं को सामने लाएगा। उन्होंने युवाओं के प्रेरणास्रोत स्वामी विवेकानंद के विचारों को आत्मसात करने की विद्यार्थियों को सीख भी दी।



साथ ही राष्ट्र के विकास में बाधा डालने वाले बुराईयों को दूर करने में अपनी भूमिका निभाने को कहा।राज्यपाल ने विद्यार्थियों से कहा कि आप अपने आपको इतना योग्य बनायें कि आजीविका आपकी खोज करें न की आप आजीविका की। विश्वविद्यालय के परिसर से दीक्षित होकर निकलना, आपको समाज की उच्च अपेक्षाओं पर खरा उतरने की जिम्मेदारी भी देता है। उन्होंने कहा कि यह जानकर प्रसन्नता हुई कि इस विश्वविद्यालय में देश के 18 से अधिक राज्यों के विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। 

यह परिसर विद्यार्थियों को एक बहुसांस्कृतिक और बहुजातीय वातावरण उपलब्ध करा रहा है। देश के विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले विद्यार्थियों का आपसी संवाद उन्हें एक व्यापक दृष्टि देता है और सामाजिक-सांस्कृतिक रूप से समृद्ध बनाता है। इस मौके पर यूनिवर्सिटी की चांसलर श्रीमती शालू जिंदल ने सभी पास आउट विद्यार्थियों को बधाई और शुभकामनाएं दीे।

समारोह में स्वागत उद्बोधन यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर डॉ आर डी पाटीदार ने दिया। उन्होंने यूनिवर्सिटी के एकेडमिक एक्टिविटी के साथ उपलब्धियों का ब्योरा साझा किया। इस अवसर पर डॉ उमेश मिश्रा, चेयरमैन, छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग, शहीद नंद कुमार पटेल यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ ललित प्रकाश पटेरिया, एडीएम सुश्री संतन देवी जांगड़े सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं, उनके परिजन व यूनिवर्सिटी के स्टाफ उपस्थित थे।

युवा जीवन में अपने लक्ष्य निर्धारित करें और लक्ष्य प्राप्त करने के लिए कठिन परिश्रम का संकल्प लें : सुश्री उइके

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रायपुर। युवा अपना लक्ष्य निर्धारित करें और लक्ष्य प्राप्त करने के लिए कठिन परिश्रम का संकल्प लें। इसी संकल्प से आप सफल होंगे और राष्ट्र के विकास में अपना योगदान दे पाएंगे। उक्त उद्गार राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके ने आज भारतीय उद्योग परिसंघ द्वारा पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम, रायपुर में आयोजित युवा उत्सव कार्यक्रम में व्यक्त किए। भारतीय उद्योग परिसंघ के रायपुर वाय.आई. चेप्टर द्वारा युवा उत्सव का आयोजन किया गया, जिसमें देश एवं प्रदेश के प्रमुख उद्यमी/उद्योगपति, विश्वविद्यालयों तथा महाविद्यालयों के युवा विद्यार्थी शामिल हुए। 



इस दौरान राज्यपाल सुश्री उइके ने भारतीय उद्योग परिसंघ द्वारा विभिन्न मानकों के आधार पर चयनित किए गए औद्योगिक ईकाईयों तथा परिसंघ के विशिष्ट सदस्यों को पुरस्कार प्रदान किए।राज्यपाल सुश्री उइके ने उपस्थित युवा विद्यार्थियों से कहा कि आपको अपने जीवन का लक्ष्य प्राप्त करने के लिए कठिन परिश्रम का संकल्प लेना होगा। तभी आप अपना लक्ष्य प्राप्त कर देश निर्माण में अपनी भूमिका निभा पाएंगे। राज्यपाल सुश्री उइके ने कहा कि बतौर कुलाधिपति मैंने युवाओं के कैरियर मार्गदर्शन तथा काउंसलिंग के लिए विश्वविद्यालयों को निर्देशित भी किया है



ताकि युवा अपनी रूचि के अनुरूप अपना क्षेत्र का चुनाव कर पाएं। राज्यपाल ने आगे कहा कि भारत की विकास यात्रा में भारतीय उद्योग परिसंघ पिछले 125 वर्षों से जुटा हुआ है। एक संस्थान के लिए यह अत्यंत गौरव की बात है। परिसंघ राष्ट्र के विकास में भारतीय उद्योगों की सक्रियता और योगदान को बढ़ाने और उन्हें जोड़ने का कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि नीतिगत मुद्दों पर भी उद्योग परिसंघ सरकार के साथ मिलकर काम करता है और इन मुद्दों पर संवाद के माध्यम से आम सहमति बनाने के लिए मंच प्रदान करता है। राज्यपाल सुश्री उइके ने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा आत्मनिर्भर भारत की जो संकल्पना की है



उसे पूरा करने में भारत के युवा उद्यमियों की बड़ी भूमिका होगी। इसी आशय से शुरू की गई स्टार्टअप इंडिया तथा मुद्रा लोन जैसी योजनाएं उद्यमियों को प्रोत्साहित कर रही है। उन्होंने कहा कि यह अत्यंत हर्ष का विषय है कि प्रदेश में परिसंघ की ईकाई वाय.आई. द्वारा राष्ट्र निर्माण के उद्देश्य से अनेकों महत्वपूर्ण विषयों जैसे जलवायु परिवर्तन, अंगदान, सड़क सुरक्षा, प्रोजेक्ट मासूम (बच्चों को सुरक्षित रखना), युवा उद्यमिता शिखर सम्मेलन आदि आयोजित किये जा रहे हैं। वास्तव में ये सभी विषय, वर्तमान आवश्यकताओं के अनुरूप हैं और इससे समाज में जागरूकता आयेगी।


कार्यक्रम के अंत में उन्होंने युवाओं को अपने अनुभवों से सीख देते हुए कहा कि असफलता से निराश होकर हमें रूकना नहीं चाहिए। हमारा आत्मविश्वास ही हमें जीवन में सदैव आगे बढ़ने की प्रेरणा देगा।
इस अवसर पर भारतीय उद्योग परिसंघ द्वारा राज्यपाल सुश्री उइके को शाल और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में भारतीय उद्योग परिसंघ के उमेश चितलांगिया, सिद्धार्थ अग्रवाल, आदित्य मुंदड़ा, सतीश पाण्डेय तथा शहर के प्रतिष्ठित उद्योगपति और बड़ी संख्या में विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय के विद्यार्थी उपस्थित थे।

टीबी मुक्त ग्राम बनाने को सरपंच ने लिया संकल्प, उपचार करा रहे टीबी मरीजों का नियमित लेंगे हाल-चाल

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रायपुर/आरंग। राज्य को टीबी मुक्त करने के उद्देश्य से चलाए जा रहे हैं, कार्यक्रम के तहत ग्राम को टीबी मुक्त ग्राम बनाने के लिए गुमा ग्राम के सरपंच दिनेश केसरिया ने संकल्प लिया है की वह अब गाँव के टीबी मरीज को गोद लेंगे और उसको 10 किलो अतिरिक्त राशन भी मुहैया कराएंगे।



ग्राम गुमा के सरपंच दिनेश केसरिया बताते हैं: ’’ टीबी चैंपियन दीपक सोनकर ने जानकारी दी कि शासन द्वारा वर्ष 2023 तक पूरे प्रदेश को टीबी मुक्त बनाने को विशेष कार्यक्रम चलाया जा रहा है। यह जानकर मुझे भी लगा कि अगर सरकार ने इतना बड़ा संकल्प लिया है तो मुझे भी इससे जुड़ना चाहिए और मैंने भी अपने ग्राम को टीबी मुक्त ग्राम बनाने का संकल्प लिया है। और अब मैं भी इस अभियान से जुड़कर लोगों को टीबी के प्रति जागरूक कर रहा हूँ और उपचार करा रहे मरीज़ का नियमित रूप से हाल चाल जानने का प्रयास भी कर रहा हूँ ।‘’

सरपंच केसरिया आगे बताते हैं: ‘’मैं टीबी चैंपियन दीपक सोनकर के साथ ग्राम में घर घर गया और लोगों को पंपलेट बांटकर जानकारी दी कि टीबी लाइलाज नहीं है अगर किसी व्यक्ति को टीबी हो गया है तो ग्राम पंचायत उसको गोद  लेगी उसको 10 किलो अतिरिक्त राशन भी उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही उस व्यक्ति के लिए अस्पताल लाने और ले जाने के लिए वाहन की व्यवस्था भी करवायी जायेगी । मैंने स्वतंत्रता दिवस पर संकल्प लिया है कि गांव में कोई भी टीबी मरीज नहीं रहेगा, और उपचार करा रहे मरीज का नियमित हाल-चाल लिया जाएगा।‘’

सरपंच केसरिया कहते है: गांव के कोटवार द्वारा भी नियमित रूप से अब टीबी मुक्ति की मुनादी करवाई जाएगी। मुनादी के दौरान टीबी के लक्षणों के बारे में बताया जाएगा। ग्राम स्तर पर माह में एक बार टीबी की जागरूकता के लिए चौपाल का आयोजन किया जाएगा। जिसमें कोशिश की जाएगी के ज्यादा से ज्यादा लोग चौपाल में पहुंचकर टीबी के लक्षणों, उसके कारण और उपचार के जानकारी प्राप्त करें, ताकि टीबी के प्रति फैली भ्रांतियां और अंधविश्वास को दूर हो किया जा सके। टीबी पॉजिटिव (धनात्मक) आने पर लोग अपना इलाज करवाएं। भविष्य में ग्राम के अब किसी भी व्यक्ति को टीबी न हो इसका प्रयास किया जाएगा। इसके अतिरिक्त लोगों को टीबी के प्रति जागरूक करने को बरसात उपरांत ग्राम में वॉल पेंटिंग भी करवाई जाएगी। ‘’

वहीं टीबी मुक्त रायपुर फाउंडेशन के अध्यक्ष नोहरी चंद्राकर ने बताया: ‘’नियमित रूप से टीबी का  उपचार करा रहे रोगियों के घर जाकर टीबी चैंपियन आपसी चर्चा करते हैं एवं किसी भी प्रकार की अंधविश्वास और दवाई ना खाने वाले रोगियों को नियमित दवाई खाने और अंधविश्वास का तार्किक उत्तर देकर अंधविश्वास को दूर  किया जाता है।

टीबी चैंपियन पुरुषोत्तम साहू बताते हैं: ‘’टीबी मरीज़ के गृह भ्रमण के दौरान हम लोग परिवार के सदस्यों की काउंसलिंग करते हैं। और परिवार को जानकारी देते है कि टीबी संक्रामक रोग है, लेकिन कुछ नियमों का पालन करने से टीबी के प्रसार को रोका जाता है। टीबी की पहचान होने पर मास्क का उपयोग करें। मरीज के साथ सकारात्मक व्यवहार करें । मरीज के बलगम का निष्पादन के लिए उचित प्रबंध करें। साथ ही मरीज के कमरे को दिन में कम से कम दो बार फिनाइल से पोंछा करें। मरीज को दवाइयों का नियमित सेवन कराया जाए।

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