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छत्तीसगढ़ में शिक्षा का नया सूर्योदय: अब कोई स्कूल शिक्षक विहीन नहीं

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रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य ने शिक्षा के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए एक नया आयाम स्थापित किया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के कुशल नेतृत्व और दूरदर्शी नीति के चलते आज प्रदेश का प्राथमिक से लेकर हायर सेकण्डरी तक कोई भी स्कूल शिक्षक विहीन नहीं रह गया है। राज्य की एकल शिक्षकीय शालाओं की संख्या में 80 प्रतिशत की कमी आई है।

यह परिवर्तन युक्तियुक्तकरण के माध्यम से संभव हो सका है, जिसका उद्देश्य राज्य के शैक्षणिक संसाधनों का न्यायसंगत उपयोग, शिक्षकों की तर्कसंगत पदस्थापना और शिक्षा के अधिकार अधिनियम व नई शिक्षा नीति की भावना के अनुरूप शालाओं में आवश्यकता के अनुरुप शिक्षकों की पदस्थापना रहा है।

गौरतलब है कि युक्ति -युक्त करण से पर्व प्रदेश में 453 विद्यालय शिक्षक विहीन  और 5936 विद्यालयों में मात्र एक ही शिक्षक पदस्थ था। विशेषकर सुकमा, नारायणपुर और बीजापुर जैसे दूरस्थ और संवेदनशील जिलों में यह समस्या अधिक थी।

इस विसंगति को दूर करने के लिए राज्य सरकार ने जिला, संभाग और राज्य स्तर पर तीन चरणों में शिक्षकों की  काउंसलिंग की प्रक्रिया चलाई। इसके परिणामस्वरूप, आज प्रदेश का कोई भी स्कूल शिक्षक विहीन नहीं है और सभी हाई स्कूलों में न्यूनतम आवश्यक शिक्षक नियुक्त किए जा चुके हैं।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने युक्ति- युक्तकरण के जरिये स्कूलों में शैक्षिक व्यवस्था को बेहतर बनाने के प्रयास की सराहना करते हुए  कहा कि हमने यह ठान लिया था कि छत्तीसगढ़ में अब कोई बच्चा शिक्षक के बिना नहीं पढ़ेगा। युक्तियुक्तकरण के माध्यम से हम न केवल शिक्षा के अधिकार अधिनियम का पालन कर रहे हैं, बल्कि एक मजबूत और समान शिक्षा प्रणाली की नींव भी रख रहे हैं। यह सिर्फ स्थानांतरण नहीं, यह शिक्षा में न्याय की पुनर्स्थापना है।

मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया है कि एकल शिक्षकीय शालाओं की स्थिति में सुधार सरकार की प्राथमिकताओं में है और आगामी महीनों में पदोन्नति और नई नियुक्तियों के माध्यम से इन विद्यालयों में अतिरिक्त शिक्षक भेजे जाएंगे।

राज्य सरकार अब उन 1207 प्राथमिक विद्यालयों पर ध्यान केंद्रित कर रही है, जहां अभी भी एक शिक्षक है। इसके समाधान हेतु प्राथमिक शाला प्रधान पाठकों की पदोन्नति, शिक्षकों की पदस्थापना तथा भर्ती प्रक्रिया को प्राथमिकता देने की रणनीति बनाई गई है।

राज्य में एकल शिक्षक वाले प्राथमिक विद्यालयों में बस्तर जिले में  283, बीजापुर 250,सुकमा 186,मोहला -मानपुर - चौकी 124,कोरबा 89, बलरामपुर 94,नारायणपुर 64,धमतरी 37,सूरजपुर 47,दंतेवाड़ा 11,अन्य जिले में मात्र 22 शालाएं है। इन शालाओं में जल्द ही आवश्यकता के अनुसार शिक्षकों की तैनाती की जाएगी।

छत्तीसगढ़ सरकार का यह प्रयास शिक्षा को समावेशी बनाने और हर बच्चे को शिक्षा प्राप्त करने का समान अवसर उपलब्ध कराना है। इस पूरी प्रक्रिया ने यह साबित किया है कि युक्तियुक्तकरण केवल प्रशासनिक कवायद नहीं, बल्कि यह एक सामाजिक न्याय आधारित शिक्षा सुधार है, जिसके केंद्र में हर बच्चा, हर गांव, हर स्कूल है।

शिक्षा का उद्देश्य संस्कार और सेवा होना चाहिए - राज्यपाल रमेन डेका

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रायपुर। विप्र पब्लिक स्कूल, रायपुर के नव-निर्मित भवन का लोकार्पण जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती जी महाराज के करकमलों से संपन्न हुआ। इस अवसर पर राज्यपाल रमेन डेका मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। अपने संबोधन में राज्यपाल ने कहा कि केवल डिग्री प्राप्त करना ही शिक्षा नहीं है, बल्कि यह हमारे व्यक्तित्व को संवारने और समाज के प्रति जिम्मेदार बनाने की प्रक्रिया है।

अपने उद्बोधन में राज्यपाल डेका ने विप्र शिक्षा समिति और विप्र कॉलेज के 30 वर्षों की शिक्षायात्रा को गौरवपूर्ण बताते हुए सभी पदाधिकारियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि यह संस्थान न केवल शिक्षा का केंद्र है, बल्कि यह ज्ञान, सेवा और संस्कृति का संगम है।

राज्यपाल डेका ने कहा कि आज जब पूरा विश्व डिजिटल क्रांति और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दिशा में आगे बढ़ रहा है, तब ऐसी शिक्षा की जरूरत है जो आधुनिकता के साथ-साथ हमें हमारी जड़ों और भारतीय जीवन मूल्यों से भी जोड़े रखे।

राज्यपाल ने डेका कहा कि भवन कैसा है यह न देख हुए वहां कैसी शिक्षा मिल रही है यह देखा जाए। हमे ऐसी शिक्षा देना  है जो स्थानीय भाषाओं और सांस्कृतिक समझ के साथ-साथ विज्ञान, गणित और तकनीकी शिक्षा को समन्वित करें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि नव-निर्मित भवन आने वाले वर्षों में शिक्षा की गुणवत्ता का प्रतीक बनेगा।

डेका ने कहा कि देश में गुरूकुल परंपरा को स्थापित करने में ब्राह्यण समाज का बहुत बड़ा योगदान है। ब्राह्यण समाज ने सदैव शिक्षा और नैतिकता तथा सामाजिक मार्गदर्शन को अपना कर्त्तव्य माना है।

इस अवसर पर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती जी महाराज ने अपना आर्शीवचन दिया। कार्यक्रम  में सांसद बृजमोहन अग्रवाल, विधायकगण राजेश मूणत, पुरंदर मिश्रा, अनुज शर्मा, रायपुर की महापौर श्रीमती मीनल चौबे, पूर्व मंत्री रवींद्र चौबे ने भी अपना संबोधन दिया। इस अवसर पर संतगण सहित बड़ी संख्या में शिक्षक, अभिभावक, विद्यार्थी और विप्र समाज के गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

श्रमिकों के बच्चे पढ़ेंगे अब बड़े स्कूलों में, अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना की प्रक्रिया 1 नवंबर से, श्रमवीरों के लिए तीन नई योजना पर मुहर

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रायपुर। प्रदेश के 28 लाख निर्माण श्रमिकों के लिए विष्णुदेव सरकार तीन नई योजनाओं की शुरुआत करने जा रही है। तीन नई योजनाओं का अनुमोदन आज शुक्रवार को श्रम मंत्री सह अध्यक्ष छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल लखन लाल देवांगन की अध्यक्षता में हुई नवा रायपुर के मण्डल कार्यालय में आयोजित संचालक मंडल की तृतीय बैठक में लिया गया।

प्रदेश में निर्माण श्रमिकों के बच्चों के लिए अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना की प्रक्रिया की शुरुआत 1 नवंबर को राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर होगी। इसी तरह निर्माण मजदूर परिवार सशक्तिकरण योजना, पंजीकृत निर्माण श्रमिकों एवं उनके बच्चों को उच्च शिक्षा आईआईटी, जेईई, नीट, सीए की परीक्षा के लिए निःशुल्क कोचिंग योजना की शुरुआत होगी। साथ ही प्रदेश के 26.68 लाख निर्माणी श्रमिकों और उनके बच्चों को कौशल उन्नयन हेतु निर्माण मजदूर परिवार सशक्तिकरण योजना भी प्रारंभ की जाएगी। बैठक में श्रम विभाग की सचिव अलरमेल मंगई डी, वित्त विभाग की विशेष सचिव शीतल वर्मा, बीओसी की सचिव सविता मिश्रा, मुख्य निरीक्षक सह श्रमायुक्त एसएस पैकरा सहित अन्य उपस्थित रहे।

 अन्य जिलों में शुरू होगी श्रम अन्न योजना

संचालक मंडल की बैठक में श्रम मंत्री सह अध्यक्ष लखन लाल देवांगन ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की श्रमिक सम्मेलन में घोषणा अनुरूप शहीद वीर नारायण सिंह श्रम अन्न योजना अंतर्गत सभी जिलों में योजना शुरू करने के निर्देश दिए गए। वर्तमान में 09 जिलों में कुल 33 भोजन केंद्र संचालित हैं।

सभी निर्माण श्रमिकों का होगा स्वास्थ्य परीक्षण

बोर्ड की बैठक में निर्माणी श्रमिकों और उनके परिवार जनों के निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण कराएं जाने पर भी मुहर लगी। स्वास्थ्य विभाग, ईएसआईसी से भी परीक्षण कराएं जाने का निर्णय लिया गया। इससे 26 लाख से अधिक अधिक श्रमिकों को लाभ मिलेगी।

अब बिना पंजीकृत श्रमिकों के मृत्यु पर भी मंडल देगा 1 लाख रूपए

मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक मृत्यु एवं दिव्यांग सहायता योजना के तहत बूथ पंजीकृत निर्माण श्रमिक को कार्यस्थल में दुर्घटना मृत्यु पर 5 लाख रूपए, स्थाई दिव्यांगत में ढाई लाख, सामान्य मृत्यु पर उनके वैध उत्तराधिकारी को एक लाख रूपए की राशि दी जाती है, लेकिन अपंजीकृत निर्माण श्रमिकों को मृत्यु उपरांत राशि देना का प्रावधान नहीं है। बोर्ड की बैठक में निर्णय लिया गया कि ऐसे श्रमिक की कार्यस्थल पर अगर मृत्यु होती है तो उनके परिवार को एक लाख की सहायता राशि दी जाएगी। 21 अक्टूबर को जिला महासमुन्द के श्रमिक परमानंद ध्रुव की ऊंचाई से गिर कर मौत हो गई थी। मृतक श्रमिक अपंजीकृत श्रमिक है। बोर्ड की बैठक में मृतक की पत्नी को एक लाख रूपये सहायता राशि दिए जाने का निर्णय लिया गया।

पहाड़ी कोरवाओं को मिला रोजगार तो समाज के बच्चे पहुँचने लगे शिक्षा के द्वार

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रायपुर। विशेष पिछड़ी जनजाति के पहाड़ी कोरवा गुरवार सिंह, बिरसराम, करम सिंह कोरबा जिले के वनांचल के सारबाहर,छातीबहार के रहने वाले हैं। आज इन्हें मलाल है कि उन्होंने अपनी आगे की पढ़ाई नहीं की। किसी ने पांचवीं तक तो किसी ने आठवी से पहले ही स्कूल और पढ़ाई से नाता तोड़ लिया था। बीच में पढ़ाई छोड़ने वाले इन पहाड़ी कोरवाओं का कहना है कि काश उन्होंने उस वक्त पढ़ लिया होता। बीच में पढ़ाई नहीं छोड़ी होती तो आज उन्हें जंगल में बकरी चराना नहीं पड़ता।

वे भी किसी स्कूल और अस्पताल में नौकरी कर रहे होते और उन्हें गरीबी से नहीं जूझना पड़ता। हालांकि उनका कहना है कि घर परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी और उन्हें कोई बताने वाला भी नहीं था, इसलिए वे स्कूल नहीं जा सके। अब जबकि पहाड़ी कोरवाओं को नौकरी मिलने लगी हैं तो उन्हें भी लगने लगा है कि पढ़ाई का बहुत महत्व है और इस महत्व को समझते हुए इन्होंने अपने बच्चों को छठवीं से आगे की पढ़ाई कराने ग्राम लेमरू के आश्रम में दाखिला कराया। आश्रम में इन पहाड़ी कोरवा बच्चों को निःशुल्क किताबे, गणवेश के साथ सोने के लिए बिस्तर आदि दिया गया।

कोरबा ब्लॉक के अंतर्गत सारबहार के पहाड़ी कोरवा गुरवार सिंह ने अपने बेटे अमित कुमार, बिरस राम ने अपने बेटे रंजीत और और छातीबहार के करम सिंह ने अपने बेटे सोनू को कक्षा छठवीं की पढ़ाई कराने के लिए लेमरू के अनुसूचित जनजाति आश्रम में दाखिला कराया। गुरवार सिंह ने बताया कि उन्हें मालूम हुआ कि कोरबा जिले में पहाड़ी कोरवाओं के लड़के-लड़कियों को स्कूल और अस्पताल में नौकरी दी जा रही है। उनका बेटा पांचवी पास है। इसलिए नौकरी नहीं मिली है। अब आगे की पढ़ाई कराना है इसलिए लेमरू के आश्रम में भर्ती कराया है। उन्होंने बताया कि हम पहाड़ी कोरवाओं के बच्चों का घर में रहकर पढ़ाई कर पाना मुश्किल हो जाता है। जंगल के आसपास रहने से बच्चे जंगल की ओर चले जाते हैं।

आश्रम में एक जगह रहकर पढ़ाई करना आसान हो जाएगा। भोजन भी समय पर मिलेगा। छातीबहार के करम सिंह ने अपने बेटे सोनू का दाखिला कराया। उन्होंने बताया कि उनका जीवन गाँव में जंगल में भटकते हुए कटता है। घर में 7 सदस्य है। उनकी एक बेटी को देवपहरी के आश्रम में और अपने बेटे सोनू को लेमरू के आश्रम में भर्ती कराया है। आश्रम में व्यवस्था देखकर खुशी है कि बेटा-बेटी यहाँ आगे कि पढ़ाई बिना इधर-उधर भटके कर लेगा। यहाँ समय पर सोना-जागना, नहाना, खाना होगा तो निश्चित ही पढ़ाई में मन लगेगा और ज्यादा कक्षा पढ़कर नौकरी पा सकेगा। बिरस राम ने अपने बेटे रंजीत को कक्षा 6 वी में भर्ती कराने के बाद कहा कि पहले हम अपने बच्चों को अपने पास ही घर में रखते थे।

जब कही जाते थे,बच्चे भी साथ चले जाते थे। इससे स्कूल भी छूट जाता था। अब हमें पढ़ाई का महत्व मालूम हुआ है। इसलिए आश्रम में अपने बेटे को भर्ती कराया है। वह अच्छे से पढ़ाई करके नौकरी पायेगा तो वह अपने परिवार को अच्छा रख सकेगा। इधर आश्रम में दाखिले और स्कूल में भर्ती के साथ ही पहाड़ी कोरवाओं के बच्चों को  यहाँ नई ड्रेस, किताबें और अपने सोने के लिए लाइट-पंखे लगे हुए कमरे और अलग से बिस्तर पाकर बहुत खुशी महसूस हो रही है। उनका कहना है कि हम यहाँ अच्छे से रहकर पढ़ाई करेंगे और नौकरी मिलेगी तो वह भी करेंगे। आश्रम के अधीक्षक और हेड मास्टर रामनारायण भगत ने बताया कि आश्रम में अनुशासन के साथ बच्चों को समय पर पढ़ना, भोजन, खेलकूद कराया जाता है। यहाँ उन्हें दो टाइम भोजन, रविवार को विशेष भोजन, तेल, साबुन भी दी जाती है। आश्रम में पहले से ही पहाड़ी कोरवा 3 बच्चे हैं। उन्होंने बताया कि शुरुवात के दिनों में पहाड़ी कोरवा बच्चों को रहने में कुछ अटपटा से लगता है, क्योंकि ये अपने परिवार के साथ जंगल में एक अलग तरह से रहते रहे हैं। यहाँ समय पर रहना, खाना होने से इनकी दिनचर्या बदलेगी और इन्हें भी अन्य बच्चों के साथ घुलमिलकर अच्छा लगेगा। उन्होंने बताया कि पहाड़ी कोरवा बच्चों का आश्रम में आकर दाखिला लेना खुशी की बात है वरना ये अन्य समाज से भी दूर-दूर रहने की कोशिश करते हैं।

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के दिशा निर्देशन में कोरबा जिले में निवासरत् विशेष पिछड़ी जनजाति समुदाय पहाड़ी कोरवा और बिरहोर जनजाति के 108 बेरोजगार युवाओं को नौकरी दी गई है। जिला प्रशासन की पहल पर जिला खनिज न्यास मद से मानदेय के आधार पर 79 विशेष पिछड़ी जनजाति परिवार के युवाओं को भृत्य तथा 29 युवाओं को अतिथि शिक्षक के रूप में तथा अस्पताल में रिक्त चतुर्थ श्रेणी के पदों पर रोजगार प्रदान किया गया है। अपने समाज के युवाओं को नौकरी मिलने के पश्चात शिक्षा में रुचि नहीं लेने वाले कोरवा भी जागरूक हुए हैं और वे अपने बच्चों को शिक्षा से जोड़ने आश्रमों में दाखिला कराने लगे हैं, जो कि एक अच्छा संदेश भी है।

बच्चें देश का भविष्य, उनके लिए शिक्षा अनिवार्य: योगेश्वर

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महासमुंद। बच्चें देश का भविष्य होते हैं, शिक्षा प्राप्त करना उनका अधिकार है। यह शब्द महासमुंद विधायक योगेश्वर राजू सिन्हा ने शनिवार को कार्यालय में आयोजित जनदर्शन के दौरान कही, जब एक बच्ची की पढ़ाई में आर्थिक रुकावट की समस्या लेकर उनके माता-पिता उनके पास पहुंचे। विधायक  सिन्हा ने बच्ची की पढ़ाई में बाधा न आए इसलिए उनके लिए कॉपी, पुस्तक, बैग और अन्य सामग्रियां प्रदान की।




 शनिवार को प्रत्येक दिन की तरह विधायक योगेश्वर राजू सिन्हा कार्यालय में आयोजित जनदर्शन में जनता की समस्या सुन रहे थे। इसी दौरान शहर के वार्ड क्रमांक 08 नयापारा निवासी सलीम खान अपनी पत्नी व बच्ची को लेकर आए। उन्होंने बताया कि वे मजदूरी कर जीवन यापन करते हैं। उन्होंने बताया कि उनकी बच्ची जोया खान 4थी कक्षा में अध्ययनरत है। वे लोग अपनी बच्ची को आगे भी अच्छी और उच्च शिक्षा देना चाहते हैं, पर उनके सामने आर्थिक समस्या आ रही है। इस बात पर विधायक योगेश्वर राजू सिन्हा ने उनसे कहा कि पूरे देश में शिक्षा प्राप्त करना प्रत्येक बच्चे का अधिकार है।

 इससे उन्हें कोई वंचित नहीं कर सकता है। बच्चें देश का भविष्य है, अगर वे अच्छी शिक्षा प्राप्त करते हैं तो देश का भविष्य उज्ज्वल होगा।  उन्होंने बच्ची की पढ़ाई में रुकावट न हो इसलिए उनके लिए पढ़ाई से संबंधित चीजों को उन्हें प्रदान किया। साथ ही बच्ची से खूब मन लगाकर पढ़ने की बात कही। इससे नन्हीं बच्ची का चेहरा खिल गया।

शिक्षा हमारे जीवन की सबसे बड़ी धरोहर है : मंत्री लखन लाल देवांगन

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रायपुर। वाणिज्य, उद्योग एवं श्रम मंत्री लखन लाल देवांगन आज कोरबा जिले के पाली विकासखंड के ग्राम नोनबिर्रा में शाला प्रवेश उत्सव समारोह में शामिल हुए। उन्होंने उपस्थित बच्चों को देश का बेहतर नागरिक बनने और प्रतिदिन स्कूल आकर पढ़ाई करने का आव्हान किया। देवांगन ने कहा कि शासन की मंशा है कि सभी विद्यार्थी शिक्षा अर्जन कर बेहतर नागरिक बनें। शिक्षा हमारे जीवन की सबसे बड़ी धरोहर है, जिसका बंटवारा नहीं किया जा सकता। शिक्षा से ही देश की प्रगति होती है। घर का एक व्यक्ति शिक्षित होने पर परिवार जागरूक और शिक्षित होता है।

मुख्य अतिथि देवांगन ने उपस्थित ग्रामीणों से अपने बच्चों को स्कूल भेजने तथा बच्चों की पढ़ाई लिखाई में स्वयं रूचि लेते हुए बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए अधिक से अधिक प्रयास करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने शासन की कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देते हुए बताया कि देश के पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी बाजपेयी ने सर्व शिक्षा अभियान प्रारंभ कर दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चों को शिक्षा से जोड़ा। हमारे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नई शिक्षा नीति के माध्यम से शिक्षा के विकास को बढ़ावा दिया गया है। उन्होंने कहा कि माता-पिता को अपने बच्चों को पढ़ाई-लिखाई के लिए प्रेरित करना चाहिए एवं शिक्षा में किसी प्रकार की बाधा नहीं आने देना चाहिए। उन्होंने बालक एवं बालिकाओं को शाला में लाने एवं शाला में निरंतर बनाये रखने में सहयोग प्रदान करने की अपील ग्रामीणों से की।

मंत्री देवांगन ने कहा कि शिक्षा के माध्यम से ही व्यक्ति अपने अधिकारों एवं कर्तव्यों के प्रति जागरूक होता है तथा बेहतर नागरिक बन पाता है। उन्होंने कहा कि शासन का लक्ष्य है कि कोई भी बच्चा स्कूल न छोड़े, उनकी नियमित उपस्थिति बनी रहे एवं उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त हो। हम सबको मिलकर प्रत्येक बच्चे को निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा दिलाने में अपना अमूल्य योगदान प्रदान करना चाहिए जिससे प्रत्येक बच्चा शिक्षा के माध्यम से समग्र रूप से विकसित होकर उज्जवल भविष्य की मंजिल पा सके। उन्होंने कहा कि जिले के सभी शाला जाने योग्य बच्चे शाला में नामांकित हों तथा अपनी शिक्षा पूर्ण कर सकें इस हेतु जागरूकता एवं निष्ठापूर्वक प्रयास किया जाना जरूरी है।

मंत्री देवांगन ने कोरबा जिले में विद्यार्थियों को आगे बढ़ाने शुरू की गई कोचिंग की व्यवस्था, स्कूलों में रिक्त शिक्षकों के पदों पर विशेष पिछड़ी जनजाति के पहाड़ी कोरवाओं सहित विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की भर्ती का जिक्र करते हुए कहा कि इससे जिले में शिक्षा का बेहतर माहौल बनेगा। उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे कल्याणकारी कार्यों को बताते हुए श्रम विभाग द्वारा श्रमिकों के बच्चों के शिक्षा के लिए संचालित योजनाओं की जानकारी दी और ग्रामीणों से इसका लाभ उठाने की अपील की। इस अवसर पर मंत्री देवांगन ने मुख्यमंत्री द्वारा शाला प्रवेशोत्सव के संबंध में दिए गए संदेश का वाचन भी किया। 

कार्यक्रम में उपस्थित विधायक कटघोरा प्रेमचंद पटेल, विधायक पाली-तानाखार तुलेश्वर सिंह मरकाम ने कहा कि शासन द्वारा बच्चों को स्कूल पहुंचने में सुविधा व अपनी पढ़ाई भली-भंाति पूरी कर सकें इसके लिए रूचिकर मध्यान्ह भोजन, निःशुल्क किताबें, गणवेश वितरण, निःशुल्क साइकिल आदि तरीकों से बच्चों की रूचि बढ़ाने व जरूरतमंद पालकों को राहत देने का इंतजाम भी किया जाता है। शाला प्रवेश उत्सव अभियान के जरिये इस बात का ध्यान रखना जरूरी है कि दाखिला लेने वाले बच्चों की पढ़ाई बीच में न छुटे तथा एक भी बच्चा शिक्षा से वंचित न हो। विधायक पटेल ने विद्यार्थियों के लिए परिवार को प्रथम पाठशाला बताते हुए अभिभावकों को अपने बच्चों पर विशेष ध्यान देने की बात कही।

उन्होंने कहा कि विद्यार्थी जीवन अपनी प्रतिभा को निखारने का और आगे बढ़ने का समय होता है। उन्होंने सिर्फ नौकरी ही नहीं हर क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए शिक्षा को महत्व देने की अपील की। प्रवेश उत्सव कार्यक्रम में कलेक्टर अजीत वसंत ने कहा कि शाला प्रवेशोत्सव का अवसर नए सपनों को लेकर आता है। उन्होंने अच्छे नागरिक के निर्माण के लिए शिक्षा को आवश्यक बताया। इसके साथ ही बच्चों के भविष्य निर्माण में शिक्षकों की भी बड़ी जिम्मेदारी होने की बात कही। कलेक्टर ने जिले में शिक्षा के विकास को बढ़ावा देने नीट सहित अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग हेतु जिले के विद्यार्थियों को बाहर भेजने, स्कूलों में रिक्त पदों के विरूद्ध शिक्षकों की नियुक्ति करने की जानकारी देते हुए कहा कि आने वाले समय में स्कूलों में जो भी रिक्त पद हैं उसे भी पूर्ण कर लिया जाएगा।

शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय नोनबिर्रा के प्रांगण में आयोजित कार्यक्रम में अतिथियों द्वारा नव प्रवेशी छात्र-छात्राओं को तिलक लगाकर व मिष्ठान खिलाकर शाला में प्रवेश दिया गया। नव प्रवेशी छात्र-छात्राओं को निःशुल्क गणवेश, स्कूल बैग, पाठ्य पुस्तक व अन्य अध्ययन सामग्री वितरित की गई। इस अवसर पर न्योता भोज का आयोजन भी किया गया। सभी अतिथियों ने विद्यार्थियों के साथ बैठकर भोजन किया और उन्हें शिक्षा हेतु प्रेरित किया। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती शिवकला कंवर, सभापति जनप्रतिनिधिगण, प्रेस प्रतिनिधि, छात्र-छात्राएं, पालकगण तथा बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।

 

 

स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व, पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के बजट पर हुई चर्चा

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रायपुर। शिक्षा, पर्यटन, धर्मस्व एवं संस्कृति बृजमोहन अग्रवाल की उपस्थिति में वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने आज यहां महानदी भवन मंत्रालय में स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा, पर्यटन
                                           

धर्मस्व एवं संस्कृति विभाग के बजट सत्र को लेकर विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ चर्चा की। मंत्रीद्वय द्वारा बैठक में विभागीय अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए गए।

22 जनवरी को ननिहाल छत्तीसगढ़ में भी धूमधाम से मनेगा रामोत्सव - संस्कृति मंत्री बृजमोहन अग्रवाल

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रायपुर। छत्तीसगढ़ के शिक्षा, धर्मस्व एवम संस्कृति मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने अयोध्या में आयोजित श्री रामलला प्राण प्रतिष्ठा-रामोत्सवअवसर  पर 22 जनवरी 2024 को छत्तीसगढ़ में भी भव्य एवं वृहद रूप से सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजन करने के निर्देश विभाग को दिए है। इस संबंध में कार्ययोजना बनाकर राज्य के सभी कलेक्टर को निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

राज्य शासन द्वारा यह निर्णय लिया गया है कि 22 जनवरी 2024 को अयोध्या में आयोजित श्रीरामलला प्राण प्रतिष्ठा-रामोत्सवके मद्देनजर राज्य भर में भव्य रूप से भक्तिमय सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जाना सुनिश्चित किया जाए। उक्त आयोजन तीन स्तरों में संभागीय/जिला एवं विकासखण्ड स्तर पर होगा। इस आयोजन में मानस मंडलियों को जोड़ा जाना है। राज्य के प्रत्येक जिलों में संचालनालय संस्कृति एवं राजभाषा के साथ पंजीकृत क्रियाशील लगभग 4700 मानस मंडलियां हैं।

 राज्य शासन के घोषणा अनुरूप इन सभी मानस मंडलियों को प्रोत्साहन स्वरूप प्रत्येक मंडली को 5000 रूपए प्रदाय करने का निर्णय लिया गया है। उक्त निर्णय अनुरूप जिलेवार मानस मंडलियों की सूची एवं तदानुसार धनराशि का आबंटन संचालनालय, संस्कृति एवं राजभाषा द्वारा सीधे प्रत्येक कलेक्टरों को उपलब्ध कराया जा रहा है। जिसका शीघ्रता के साथ वितरण किए जाने की बात कही गई है ताकि  भव्य आयोजनों में इन मानस मंडलियों को पूरा उत्सुकता के साथ भाग लेने के लिए प्रेरित किया जा सके।

इसके साथ ही प्रत्येक जिला स्तरीय संस्थानों, विकासखण्ड स्तरीय, धार्मिक ट्रस्टों, मंदिर समितियों के साथ समन्वय करके उनके सहयोग के साथ जन जन के धार्मिक महत्व के इस भव्य कार्यक्रम का आयोजन सुनिश्चित किए जाने के निर्देश दिए गए हैं। नगरीय निकायों, ग्राम पंचायतों को इस आयोजन में भागीदारी सुनिश्चित करते हुए उक्त दिवस में भवनों में प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित किए जाने के निर्देश दिए गए हैं।

कार्यक्रम की रूपरेखा

प्रत्येक विकासखण्ड स्तर से कम से कम ऐसे एक विशिष्ट मंदिर में 22 जनवरी, 2024 को दीप प्रज्जवलन, दीपदान एवं लाईटिंग व्यवस्था की जाए। इस मंदिर प्रांगण में प्रत्येक विकासखण्ड स्तर पर क्षेत्र के 05 मानस मंडलियों के मानस गायन का आयोजन इस दिवस आयोजित किया जायेगा। उसी तरह प्रत्येक संभाग एवं जिला मुख्यालयों में भी कम से कम एक प्रतिष्ठित मंदिर तय कर उपरोक्त वर्णन अनुसार भव्य आयोजन किया जायेगा।

बजट आवंटन

विकासखण्ड स्तर पर आवश्यक कार्यक्रम व्यवस्था हेतु राशि 25000 रूपए, प्रत्येक विकासखण्ड में पंजीकृत 05 मानस गायन दलों के लिए प्रोत्साहन राशि 5000 रूपए के मान से संभाग स्तरीय कार्यक्रम आयोजन हेतु राशि एक लाख रूपए के मान से तथा संभाग मुख्यालय में पंजीकृत प्रत्येक संभाग से 5-5 मानस गायन दलों के लिए प्रोत्साहन राशि 5000 रूपए के मान से प्रदान किए जायेंगे।

धर्मस्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि प्रभु राम मंदिर का प्राण प्रतिष्ठा समारोह संपूर्ण भारतवर्ष के लिए आस्था का विषय है इसलिए सामाजिक संस्था, मंदिर ट्रस्ट, मंदिर समितियों एवं आम जनमानस के सहयोग से यह भव्य और दिव्य आयोजन सफल होगा।

शिक्षकों की पदोन्नति उपरांत किए गए संशोधन आदेश निरस्तीकरण के संबंध में निर्देश

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रायपुर। संभागीय संयुक्त संचालक शिक्षा द्वारा पदोन्नति उपरांत किए गए संशोधन आदेश निरस्तीकरण के संबंध में सभी संयुक्त संचालक और जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी किए गए हैं। महाधिवक्ता कार्यालय के अभिमत अनुसार जिन शिक्षकों के संशोधित आदेश निरस्त किए गए थे, यदि वह स्वयं की इच्छा से अपने मूल पदस्थापना स्थल (जहां पदोन्नति उपरांत सर्व प्रथम पदस्थ किया गया था) कार्यभार ग्रहण करना चाहते हैं तो उन्हें कार्यभार ग्रहण कराया जाए।


स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा मंत्रालय से आज जारी निर्देश में संबंधित अधिकारियों से कहा गया है कि इस संबंध में माननीय उच्च न्यायालय बिलासपुर में दायर प्रकरण में पारित निर्णय 11 सितम्बर 2023 के परिप्रेक्ष्य में महाधिवक्ता कार्यालय से अभिमत चाहा गया था, संबंधित अधिकारी महाधिवक्ता कार्यालय द्वारा दिए गए अभिमत के अनुसार नियमानुसार कार्यवाही सुनिश्चित करें।

महाधिवक्ता कार्यालय से यह भी अभिमत दिया गया है कि किसी शिक्षक के विरूद्ध व्यक्तिगत अवचार का कोई प्रकरण उपस्थित होता है तो उनके विरूद्ध विभागीय अनुशासनात्मक कार्यवाही की जा सकती है। माननीय उच्च न्यायालय द्वारा केवल 04 सितम्बर 2023 के आदेश के संबंध में 11 सितम्बर 2023 की स्थिति में यथास्थिति का आदेश दिया गया है।

शिक्षा एकमात्र माध्यम जिससे व्यक्ति का विकास संभव हैः सीएम

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रायपुर। हम अपनी संस्कृति को सहेजते हुए और परंपराओं का सम्मान करते हुए आगे बढ़ रहे हैं और शिक्षा ही एकमात्र माध्यम है जिससे व्यक्ति का विकास संभव है। ये बातें मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज राजधानी रायपुर के शहीद स्मारक भवन में आयोजित प्रांतीय आर्य महासम्मेलन एवं ज्ञान ज्योति पर्व कार्यक्रम में कही।

                     
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि स्वामी दयानंद सरस्वती ने जिस आंदोलन की शुरूआत की थी हमें आज उसका परिणाम देखने को मिल रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वामी दयानंद सरस्वती ने महिलाओं को शिक्षित करने के लिए आवाज उठायी थी और इसी का परिणाम है कि छत्तीसगढ़ के कालेजों में पुरूषों से ज्यादा संख्या महिला विद्यार्थियों की है।

                  

मुख्यमंत्री ने महर्षि स्वामी दयानंद सरस्वती जी की 200वीं जयंती और आर्य समाज के 150वें स्थापना दिवस  पर स्वामी दयानंद सरस्वती जी और तुलाराम आर्य परगनिहा जी को नमन करते हुए ज्ञान ज्योति पर्व मनाने के लिए सभी को बधाई दी। बघेल ने छत्तीसगढ़ में आर्य समाज के संस्थापक और महान दानवीर तुलाराम आर्य परगनिहा जी के प्राकट्य दिवस पर उनका स्मरण करते कहा कि श्रद्धेय तुलाराम आर्य जी ने छत्तीसगढ़ में स्थानीय स्तर पर समाज सुधार की दिशा में सराहनीय प्रयास किए हैं हम उन्हें उनकी दानशीलता के लिए भी याद करते हैं।
                  

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि किसी भी समाज के विकास की प्रक्रिया बहुत लंबी और बहुत जटिल होती है और एक उन्नत समाज को आकार लेने में सदियां लग जाती हैं। नये विचारों की स्थापना और पुराने विचारों के संशोधन-परिमार्जन से ही समाज प्रगतिशील होता है, उसके वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास होता है। मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि हमारा भारतीय समाज एक प्रगतिशील समाज है क्योंकि हमने हमेशा ही नये विचारों का स्वागत किया है। हम जिसे सनातन परंपरा कहते हैं, वह अनादि-काल से चली आ रही है, वह अनंतकाल तक चलती रहेगी।

प्रांतीय आर्य महासम्मेलन एवं ज्ञान ज्योति पर्व में शामिल होने के लिए दिल्ली से आए स्वामी आर्यवेश ने अपने संबोधन में छत्तीसगढ़ शासन की योजनाओं की तारीफ करते हुए कहा कि गौठान योजना शुरू करके राज्य में न सिर्फ मवेशियों का संरक्षण किया जा रहा  है बल्कि इससे लोगों को रोजगार भी मिल रहा है। स्वामी आर्यवेश ने कहा कि राम वन गमन पथ योजना को आकार देकर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने एक अमिट कार्य किया है।

इस मौके पर खाद्य एवं संस्कृति मंत्री अमरजीत भगत,  छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम के अध्यक्ष गिरीश देवांगन, छत्तीसगढ़ राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के सदस्य आर एन वर्मा, आर्य समाज से स्वामी आर्यवेश, छत्तीसगढ़ प्रांतीय आर्य समाज के अध्यक्ष आचार्य अंशुदेव, मंत्री भुवनेश साहू समेत अन्य पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित थे।

बच्चे ही हमारा भविष्य, इनके लिए शिक्षा का बेहतर वातावरण देना और संसाधन तैयार करना हमारी जिम्मेदारी : मुख्यमंत्री भूपेश बघेल

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रायपुर। आज के दौर में स्कूलों में शिक्षा का वातावरण बनाना जरूरी है। बच्चों को शिक्षा के साथ खेलकूद और अनुशासन पर भी ध्यान देना है। छात्र जीवन में ही समय की कीमत समझनी होगी। उक्त बातें मुख्यमंत्री भूपेश बघेल  ने शिक्षा सत्र 2023-24 के शुभारंभ और शाला प्रवेशोत्सव के मौके पर आज प्रोफेसर जेएन पांडेय शासकीय उत्कृष्ट हिन्दी माध्यम विद्यालय  में कहीं। 

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि प्रत्येक स्कूल शिक्षा का मंदिर होता है और इस मंदिर को भी  हमेशा साफ सुथरा रहना चाहिए। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि स्वामी आत्मानंद स्कूलों के खुलने से राज्य में शिक्षा के प्रति फिर से रूझान बढ़ा है और वर्तमान में प्रत्येक वर्ग के लोग अपने बच्चों को इन स्कूलों में पढ़ाने के लिए प्रयासरत हैं।

मुख्यमंत्री ने तिलक लगाकर व मिठाई खिलाकर छात्रों को कराया शाला प्रवेश

मुख्यमंत्री ने शाला प्रवेशोत्सव के मौके पर स्कूली बच्चों को तिलक लगाकर, माला पहनाकर तथा उन्हें मिठाई खिलाकर शाला प्रवेश कराया। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने स्कूली बच्चों को गणवेश, पुस्तकें तथा स्कूल बैग का भी वितरण किया। मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों, शिक्षक-शिक्षिकाओं, प्राचार्यों  और अभिभावकों को नये शिक्षा सत्र के शुभारंभ और शाला प्रवेशोत्सव की बधाई देते हुए कहा कि यही बच्चे हमारा भविष्य हैं और इन बच्चों को शिक्षा का उचित वातावरण देना हमारी जिम्मेदारी है ताकि इनका पढ़ाई में मन लगा रहे।

स्कूल के जीर्णोद्धार के लिए 5 करोड़ रूपए की राशि स्वीकृत

मुख्यमंत्री ने ऐतिहासिक प्रो जेएन पांडेय शासकीय उत्कृष्ट हिन्दी माध्यम स्कूल के जीर्णोद्धार के लिए 5 करोड़ रूपए की राशि स्वीकृत करते हुए कहा कि शिक्षा के मंदिरों को सुदृढ़ और सुंदर बनाने के लिए राशि की कभी कभी भी आड़े नहीं आएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने प्रदेश के स्कूलों के जीर्णोद्धार और मरम्मत के लिए बजट में 12 सौ करोड़ रूपए की राशि स्वीकृत की थी। इस राशि से वर्तमान में 23 हजार स्कूलों में काम चल रहा है।

दूसरे चरण में 4318 बालवाड़ियों का शुभारंभ

शाला प्रवेशोत्सव के अवसर पर मुख्यमंत्री बालवाड़ी योजना के दूसरे चरण में वर्चुअल रूप से 4 हजार 3 सौ 18 बालवाड़ियों का शुभारंभ किया। राज्य में बालवाड़ियों के जरिए पांच से छः वर्ष के  बच्चों को बुनियादी शिक्षा के प्रति जागरुक करने का प्रयास किया जाता है। बालवाड़ी में बच्चों को  खेल-खेल में शिक्षा प्रदान की जाती है ताकि स्कूल जाने में उन्हें कोई घबराहट का सामना न करना पड़े।  बालवाड़ी योजना के पहले चरण में 5 सितंबर 2022 को 5 हजार 1 सौ 73 बालवाड़ी की शुरूआत की गयी थी।

ऐतिहासिक स्कूल है प्रो. जेन पांडेय शासकीय उत्कृष्ट हिंदी माध्यम विद्यालय, राज्य  को यहां से मिले हैं 4 मुख्यमंत्री और एक उप राष्ट्रपति

प्रो. जेएन पांडेय स्कूल एक ऐतिहासिक स्कूल है। इस स्कूल की स्थापना सन 1864 में हुई थी और ये स्कूल कभी कलकत्ता विश्वविद्यालय तथा इलाहाबाद विश्वविद्यालय से भी संबद्ध रहा है। इस स्कूल ने राज्य को चार मुख्यमंत्री दिए हैं। स्व. पं. रविशंकर शुक्ल, स्व. द्वारका प्रसाद मिश्रा, स्व. श्यामा चरण शुक्ल तथा स्व. मोती लाल वोरा इसी स्कूल के विद्यार्थी रहे हैं। इसके साथ ही देश के पूर्व उपराष्ट्रपति स्व. हिदायतुल्ला भी इसी स्कूल के विद्यार्थी रहे हैं।

शाला प्रवेशोत्सव के मौके पर छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड के अध्यक्ष एवं विधायक कुलदीप जुनेजा,  रायपुर नगर निगम के महापौर ऐजाज ढेबर, छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम के अध्यक्ष गिरीश देवांगन, छत्तीसगढ़ गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष महंत रामसुंदर दास,  शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव आलोक शुक्ला, शिक्षा विभाग के सचिव डॉ एस भारती दासन समेत विभाग के अधिकारी तथा स्कूलों के विद्यार्थी, शिक्षक, प्राचार्य एवं अभिभावक मौजूद थे।

विकास कार्यों से निखरी सुकमा की तस्वीर, अब देर रात जाने में नहीं लगता लोगों को डर

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रायपुर। बीते चार सालों में सुकमा जिले में बड़े पैमाने पर विकास कार्य किये गये हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़कें जैसी अधोसंरचना मजबूत की गई और सुरक्षा व्यवस्था भी दृढ़ की गई। पहले देर रात सुकमा के लिए जाने में लोगों के मन में आशंका रहती थी। अब लोग निःसंकोच यात्रा करते हैं। यह बात मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सुकमा जिले में वर्चुअल रूप से 303 करोड़ रुपए के लोकार्पण-भूमिपूजन कार्यक्रम के अवसर पर कही। 

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि दक्षिण भारत से छत्तीसगढ़ में प्रवेश करने पर पहली विधानसभा सुकमा जिले का कोंटा है। हमने यहां सबके सहयोग से सुकमा जिले के विकास के लिए योजनाएं बनाईं और इसे क्रियान्वित किया। इन सालों में यहां बड़ा बदलाव आया है और इसे यहां पहुंचकर महसूस कर सकते हैं। हमने यहां सुरक्षा बेहतर की। जगरगुंडा में 13 साल बाद पुनः स्कूल आरंभ किया। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर 303.67 करोड़ रूपए की लागत के 131 विकास एवं निर्माण कार्यों की सौगात दी

जिसमें 63 करोड़ 56 लाख 27 हजार रूपए की लागत वाले 33 विकास कार्यों का लोकार्पण तथा 240 करोड़ 10 लाख 81 हजार रूपए की लागत वाले 98 विकास एवं निर्माण कार्यों का शिलान्यास शामिल है। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि वे प्रत्यक्ष रूप से लोगों से मिलना चाहते थे लेकिन तेज बारिश की वजह से संभव नहीं हो पाया, इस बात का खेद है लेकिन वर्चुअल रूप से आप लोगों से जुड़ पाया, इस बात का संतोष है। सबसे अच्छी बात यह है कि बारिश हो रही है और हमारे प्रदेश के लिए यह बहुत उपयोगी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भेंट मुलाकात के दौरान मंत्री कवासी लखमा ने सुकमा जिले में विकास कार्यों की जो मांगे रखी थीं, उन पर निर्णय लिये गये और अधोसंरचना की ठोस नींव यहां रखी गई है। 

आज शिक्षा, स्वास्थ्य, अधोसंरचना से संबंधित बड़े कार्यों का लोकार्पण-भूमिपूजन किया गया है। उन्होंने कहा कि बस्तर फाइटर्स की भर्ती हो या तेंदूपत्ता संग्राहकों के लिए उचित दर हो, सभी विषयों पर हम काम कर रहे हैं। इस मौके पर आबकारी एवं उद्योग मंत्री कवासी लखमा ने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में साढ़े चार साल के दौरान प्रदेश में अधोसंरचना विकास के लिए बड़े काम हुए हैं। उन्होंने न केवल कर्जमाफी की और किसानों को धान का उचित मूल्य दिया अपितु प्रति एकड़ 20 क्विंटल धान भी खरीदने का निर्णय लिया। सुकमा जिले में इस वर्ष 50 करोड़ 27 लाख रुपए का तेंदूपत्ता संग्रहित हुआ है जिसका लाभ वनवासियों को मिला है।

बस्तर सांसद दीपक बैज ने अपने संबोधन में कहा कि हमने जब भी बस्तर की विकास योजनाओं के लिए बात की, मुख्यमंत्री ने इसे पूरा किया। बस्तर में लोगों के चहुमुंखी विकास के लिए बहुत अच्छा काम किया जा रहा है। बस्तर में हो रहे विकास कार्यों ने बस्तर को देश दुनिया के नक्शे में एक विशिष्ट पहचान दी है। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष हरीश कवासी ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया। कलेक्टर हरीश एस ने विस्तार से लोकार्पण और शिलान्यास कार्यों की जानकारी दी। सुकमा जिले में 303.67 करोड़ रुपये के मुख्यमंत्री द्वारा किए गए लोकार्पण और शिलान्यास कार्यों की सुकमा कलेक्टर हरीश एस ने अपने प्रतिवेदन में विस्तार से जानकारी दी।

मुख्यमंत्री की घोषणाएं-  मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर जिला मुख्यालय सुकमा में खेल परिसर की घोषणा की। साथ ही उन्होंने उपस्वास्थ्य केन्द्र भेज्जी के प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में उन्नयन, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र किस्टाराम के लिए भवन की स्वीकृति, विकासखण्ड कोन्टा में 28 प्राथमिक शाला भवन का निर्माण, सेंट्रल लाइब्रेरी एवं बालक एवं कन्या के लिए यूथ हास्टल, बोडको में 100 सीटर आश्रम भवन का निर्माण की घोषणा की। 

उन्होंने मानकापाल में 100 सीटर आश्रम भवन का निर्माण, वृहद जल प्रदाय योजना छिन्दगढ़ का संचालन लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के माध्यम से किये जाने और बी.एड./डी.एड कॉलेज सुकमा की स्वीकृति की घोषणा की। उन्होंने बस स्टैण्ड सुकमा के निर्माण कार्य के लिए 6 करोड़ रूपये की स्वीकृति, बस स्टेण्ड दोरनापाल के निर्माण कार्य के लिए 4 करोड़ रूपये की स्वीकृति भी दी। साथ ही उन्होंने प्री मैट्रिक बाल छात्रावास कुंदनपाल की स्वीकृति, बालक आश्रम डब्बाकोन्टा भवन की स्वीकृति, किस्टाराम में नवीन हाईस्कूल की स्वीकृति की घोषणा भी की।

सरगुजा में 5 नए आत्मानंद स्कूल खुले, 39 शिक्षकों को मिली मुख्यमंत्री के हाथों नियुक्ति

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ में शिक्षा के क्षेत्र में अभिनव पहल करते हुए स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम स्कूल योजना शुरू की है। योजना के अंतर्गत सरगुजा जिले में 11 स्वामी आत्मानंद स्कूल संचालित थे। भेंट मुलाकात कार्यक्रम के दौरान स्थानीय लोगों की मांग पर मुख्यमंत्री ने 5 नए स्वामी आत्मानंद स्कूल घोलने की घोषणा की थी।

घोषणा पूरी होने के बाद अब जिले में कुल 16 स्वामी आत्मानंद स्कूल संचालित हैं। इन स्कूलों में शिक्षकों की कमी को पूरा करने के लिए शैक्षणिक सत्र 2023-24 में 39 शिक्षकों की भर्ती की गयी है। आज मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इन 39 नव नियुक्त शिक्षकों को अपने हाथों से नियुक्ति पत्र प्रदान किया। इस दौरान स्वामी आत्मानंद स्कूलों में अध्यापन कार्य कर रहे शिक्षकों ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट में हमें अध्यापन कार्य के लिए नियुक्ति मिली है जिसे हम पूरी तन्मयता से से पूरा करेंगे।

समाज कोई भी हो, शिक्षा सबसे जरूरी है : मुख्यमंत्री भूपेश बघेल

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रायपुर: उद्योग व्यापार में कलार समाज को कोई नकार नहीं सकता है, लेकिन बिना शिक्षा के कोई भी समाज हो आगे नहीं बढ़ सकता है। प्रत्येक समाज के लिए शिक्षा जरूरी है और जिसने भी शिक्षा से नाता तोड़ा है वो समाज पिछड़ गया है। उक्त बातें मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ कलार महासभा के द्वारा रायपुर के साइंस कालेज मैदान में आयोजित कलार महासम्मेलन में कहीं।


दो बड़ी घोषणाएं

इस मौके पर मुख्यमंत्री ने दो बड़ी घोषणाएं करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में महुआ बोर्ड की स्थापना की जाएगी। कलार समाज की पूजनीय माता बहादुर कलारिन के महिला सशक्तीकरण के योगदान को अतुलनीय करार देते हुए मुख्यमंत्री ने उनकी जयंती पर एच्छिक अवकाश का प्रावधान किए जाने की घोषणा की है।

व्यक्ति है प्रत्येक समाज की इकाई

मुख्यमंत्री श्री बघेल ने कहा कि प्रत्येक समाज की इकाई व्यक्ति होता है और राज्य सरकार ने पिछले चार वर्षों में व्यक्ति को ही केंद्र में रखकर योजनाएं शुरू की हैं ताकि हर समाज के लोग लाभांवित हो सकें। मुख्यमंत्री ने कहा कि वो यदि योजनाओं का लाभ लोगों को न  मिले, लोग बीमार रहें तो मजबूत छत्तीसगढ़ की कल्पना कभी नहीं हो सकती है इसीलिए समाज के अंतिम व्यक्ति की जेब में भी पैसा जाए इसका प्रावधान छत्तीसगढ़ शासन ने किया है ताकि प्रदेश की प्रगति निरंतर होती रहे ।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में अलग अलग समाज के लोग मिलजुल कर रहते हैं, जाति वैमनस्यता की यहां कोई जगह नहीं है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के लोगों का सामाजित ताना-बाना बेहद मजबूत है और इससे छत्तीसगढ़ को मजबूती मिलती है।

शिक्षा पर सबसे ज्यादा खर्च

कलार महासम्मेलन में लोगों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में शिक्षा का स्तर पिछले चार वर्षों में काफी बढ़ा है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूल खुले हैं और नक्सल क्षेत्रों में लंबे समय से बंद पड़े स्कूलों को भी खोला गया है। छात्रों को गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा मिले इसके लिए राज्य सरकार लगातार प्रयास कर रही है और इसीलिए शिक्षा पर 17 हजार करोड़ रूपए खर्च किए जाने का प्रावधान बजट में रखा गया है। युवाओं को रोजगार मिले इसके लिए आधुनिक मांग के आधार पर आईटीआई कालेजों मे नए ट्रेड खोले जा रहे हैं ताकि समय की मांग के अनुसार युवा प्रशिक्षित हो सकें।  

कलार महासम्मेलन के आयोजन अवसर पर संसदीय सचिव श्री विकास उपाध्याय, विधायक श्री मोहन मरकाम, विधायक श्री विनय जायसवाल, विधायक श्रीमती संगीता सिन्हा, रायपुर महापौर श्री ऐजाज ढेबर, रिसाली महापौर श्रीमती शशि सिन्हा, कलार महासभा छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष श्री दीपक सिन्हा, कलार महासम्मेलन संयोजक समिति के अध्यक्ष श्री राजा जायसवाल समेत अन्य पदाधिकारी तथा कलार समाज के सदस्य उपस्थित थे।

ईसाई समाज द्वारा किए गए शिक्षा, स्वास्थ और मानवता की सेवा के कार्य सराहनीय : मुख्यमंत्री भूपेश बघेल

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल आज रायपुर के अम्लीडीह स्थित कैथोलिक चर्च में रायपुर आर्च डायसिस के स्वर्ण जयंती समारोह में शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि ईसाई समाज द्वारा किए गए शिक्षा, स्वास्थ और मानवता सेवा के कार्य सराहनीय हैं, उनका कोई सानी नहीं है। जब शिक्षण संस्थाओं का अभाव था, तब मसीही समुदाय ने स्कूल और हॉस्टल खोले। ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों में शिक्षा का प्रचार-प्रसार किया।

ईसाई समाज ने शिक्षा और स्वस्थ्य के क्षेत्र में सेवा के कार्यों को ऐसे स्थानों तक भी पहुंचाया जहां लोगों का पहुंचना भी कठिन था। बघेल ने कहा कि वैश्विक महामारी कोरोना के समय में भी ईसाई समुदाय तत्परता के साथ मानवता की सेवा की। जब कुष्ठ रोग पीड़ितों को लोग छूने से भी संकोच करते थे तब इस समाज ने कुष्ठ रोगियों के लिए काम किया। कुष्ठ रोग पीड़ितों के इलाज के लिए ईसाई समाज ने अभनपुर, बैतलपुर समेत कई स्थानों पर हॉस्पिटल व डिस्पेंसरी खोले।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ईसाई समुदाय का छत्तीसगढ़ से पुराना नाता रहा है। यह समुदाय प्रभु यीशु और संत माता मरियम की दया, करुणा, सेवा, क्षमा, प्रेम, त्याग की शिक्षाओं को आगे बढ़ा रहा है। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर विशेष रूप से उपस्थित भारत और नेपाल के लिए वेटिकन के राजदूत लियोपोलोदो जिरेल्ली सहित स्वर्ण जयंती समारोह में उपस्थित कार्डिनल, आर्च, बिशप, गण फादर, सिस्टर्स और समाज के लोगों का छत्तीसगढ़ में हार्दिक स्वागत करते हुए उपस्थित सभी लोगों को स्वर्ण जयंती समारोह की बधाई और शुभकामनाएं दी।

इसके पहले वेटिकन के राजदूत लियोपोलोदो जिरेल्ली और मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सहित अतिथियों ने दीप प्रज्जवलित कर समारोह का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री ने स्वर्ण जयंती समारोह के अवसर पर प्रकाशित स्मारिका का विमोचन भी किया। वेटिकन के राजदूत लियोपोलोदो जिरेल्ली ने रायपुर आर्च डायसिस के स्वर्ण जयंती समारोह के अवसर पर पोप फ्रांसिस और अपनी ओर से सभी लोगों को बधाई और शुभकामनाएं दी। उन्होंने इस अवसर पर छत्तीसगढ़ की समृद्ध और गौरवशाली संस्कृति, आदिवासी संस्कृति, लोक संगीत, लोक कला और छत्तीसगढ़ की विशेषताओं का उल्लेख करते हुए छत्तीसगढ़ क्रिश्चन एजुकेशनल सोसायटी द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में और ईसाई समुदाय द्वारा स्वास्थ और सेवा के क्षेत्र में किए गए कार्यों का उल्लेख किया।

उन्होंने बताया कि रायपुर आर्च डायसिस की स्थापना 5 जुलाई 1973 को की गई थी। विधायक सत्यनारायण शर्मा ने कहा कि यह समुदाय करूणा, दया, ममता और उपकार की भावना को लेकर समाज की सेवा कार्य करता रहा है। शिक्षा और जन स्वास्थ इनका हमेंशा से उद्देश्य रहा है। भारतीय कैथोलिक बिशप परिषद के महासचिव अनिल कुटो और हैदराबाद के कार्डिनल एंथोनी पुला ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया। स्वागत भाषण छत्तीसगढ़ के आर्च बिशप श्री विक्टर हैनरी ठाकुर ने दिया।

रायपुर आर्च डायसिस के स्वर्ण जयंती समारोह में रायपुर महापौर एजाज ढेबर, सभापति प्रमोद दुबे, जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक के अध्यक्ष पंकज शर्मा, हैदराबाद के कार्डिनल एंथोनी पुला, दिल्ली के आर्च बिशप अनिल कुटो, भोपाल के आर्च बिशप एएएस दुरईराज जी, कोलकाता के आर्च बिशप थॉमस डिसूजा, आगरा के आर्च बिशप रॉफी मंजिली, पटना के आर्च बिशप सेबेस्टियन कल्लपुरा व नागपुर के आर्च बिशप एलियास गॉनसालवेज, छत्तीसगढ़ के पूर्व आर्च बिशप जोसफ ऑगस्टिन, छत्तीसगढ़ डायसिस सीएनआई के पूर्व बिशप रॉबर्ट अली, रायपुर के विकार जनरल फादर सेबेस्टियन पी., डायसिस की स्टुअर्टशिप कमेटी के सचिव और प्रवक्ता जॉन राजेश पॉल जी और सर्व आस्था मंच समेत राजधानी के कई समाज सेवी संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

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