Media24Media.com: शारदीय नवरात्रि

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Shardiya Navratri 2024 Day 8: शारदीय नवरात्रि का आठवां दिन आज, मां महागौरी की पूजा का लाभ, जानें पूजन विधि और दिव्य उपाय

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 Shardiya Navratri 2024 Day 8: शारदीय नवरात्रि के सात दिन बीत जाने के बाद आठवां दिन काफी अहम होता है. यह दिन दुर्गा माता के आठवें स्वरूप मां महागौरी को समर्पित है, जो देवों के देव महादेव की अर्धांगिनी के रूप में उनके साथ विराजमान रहती हैं. इनका वर्ण पूर्ण रूप से गौरा होने के कारण इन्हें महागौरी कहा जाता है. इसके अलावा उन्हें श्वेतांबरधरा नाम से भी जाना जाता है और वे अन्नपूर्णा का स्वरूप भी हैं. ऐसा माना जाता है कि, जो भी व्यक्ति मां महागौरी की आराधना करता है उसे सभी तरह के पापों से मुक्ति मिलती है, साथ ही किसी भी प्रकार के कष्ट उनके निकट नहीं आते. साथ ही मां की आराधना से आलौकिक सिद्धियों की प्राप्ति भी होती है, ऐसी मान्यता है. आइए जानते हैं मां का स्वरूप, मंत्र और भोग के बारे में.


अष्टमी तिथि

हिंदू पंचांग के अनुसार अष्टमी तिथि की शुरुआत 10 अक्टूबर दिन गुरुवार को 12:31 पी एम से होगी जिसका समापन 11 अक्टूबर को दिन शुक्रवार 12:06 पी एम पर होगा.

ऐसा है मां महागौरी का स्वरूप

देवीभागवत पुराण के अनुसार, आदिशक्ति के इस स्वरूप में मां महागौरी के वस्त्र और आभूषण आदि श्वेत हैं. उनका रंग भी गोरा है और चार भुजाएं हैं. माता के एक हाथ में त्रिशूल है तो दूसरे हाथ में डमरु वहीं तीसरे हाथ में अभय और चौथे हाथ में वरमुद्रा रहती है. मां ने अपनी कठिन तपस्या से गौर वर्ण प्राप्त किया था और तभी से उन्हें महागौरी के रूप में जाना जाता है.

मां महागौरी का भोग

नवरात्रि के आठवें दिन आप माता को भोग जरूर लगाएं. महागौरी को नारियल से बनी मिठाईयों का भोग बेहद पसंद है. इसके अलावा आप माता को हलवा या काले चने का भोग भी लगा सकते हैं.

महागौरी की आरती

जय महागौरी जगत की माया ।
जय उमा भवानी जय महामाया ॥
हरिद्वार कनखल के पासा ।
महागौरी तेरा वहा निवास ॥
चंदेर्काली और ममता अम्बे
जय शक्ति जय जय मां जगदम्बे ॥
भीमा देवी विमला माता
कोशकी देवी जग विखियाता ॥
हिमाचल के घर गोरी रूप तेरा
महाकाली दुर्गा है स्वरूप तेरा ॥
सती 'सत' हवं कुंड मै था जलाया
उसी धुएं ने रूप काली बनाया ॥
बना धर्म सिंह जो सवारी मै आया
तो शंकर ने त्रिशूल अपना दिखाया ॥
तभी मां ने महागौरी नाम पाया
शरण आने वाले का संकट मिटाया ॥
शनिवार को तेरी पूजा जो करता
माँ बिगड़ा हुआ काम उसका सुधरता ॥
'चमन' बोलो तो सोच तुम क्या रहे हो
महागौरी माँ तेरी हरदम ही जय हो ॥

स्तुति मंत्र

श्वेते वृषे समरूढा श्वेताम्बराधरा शुचिः।
महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा।।

नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की होती है पूजा, जानें मां की पूजा का महत्व, पूजा विधि और भोग

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 शारदीय नवरात्रि का हर दिन मां दुर्गा के भिन्न रूप को समर्पित होता है. आज 9 अक्टूबर, बुधवार के दिन मां दुर्गा के सातवें रूप मां कालरात्रि (Ma Kalratri) का पूजन किया जाता है. मां कालरात्रि को कष्टों से मुक्ति दिलाने वाली देवी माना जाता है. मां कालरात्रि साहस और वीरता का प्रतीक हैं और मां की पूजा करने पर व्यक्ति को सिद्धि प्राप्त होती है. जानिए आज किस तरह मां कालरात्रि की पूजा संपन्न की जा सकती है, मां का प्रिय रंग कौनसा है, मां को किन चीजों का भोग लगाना शुभ माना जाता है और किन मंत्रों के उच्चारण से मां कालरात्रि की पूजा संपन्न की जा सकती है.


मां कालरात्रि की पूजा
मां कालरात्री की पूजा करने के लिए सुबह स्नान पश्चात स्वच्छ वस्त्र धारण किए जाते हैं और मां का ध्यान करके व्रत का संकल्प लिया जाता है. मां की प्रतिमा के समक्ष गंगाजल छिड़का जाता है और मां को लाल रंग के वस्त्र अर्पित किए जाते हैं. इसके बाद पूजा के लिए पुष्प, रंगोली, कुमकुम, मिष्ठान, पंचमेवा, फल और शहद आदि मां कालरात्रि के समक्ष अर्पित किए जाते हैं और मां का पूजन होता है. आरती और मंत्रों (Mantra) का जाप करके मां कालरात्रि की पूजा संपन्न होती है.

मां कालरात्रि का स्वरूप
मान्यतानुसार मां कालरात्रि का शरीर अंधकार की तरह काला होता है. मां जब सांस लेती हैं तो उनके मुख और नाक से ज्वाला निकलती है. मां कालरात्रि के बाल लंबे और बिखरे हुए हैं. मां कालरात्रि के गले में बिजली की तरह चमकती हुई माला है, मां के तीन नेत्र हैं और मां हाथों में तलवार और लोहे के शस्त्र रखती हैं. वहीं, मां कालरात्रि के अन्य दो हाथ वरमुद्रा और अभय मुद्रा में रहते हैं.

मां कालरात्रि का प्रिय भोग
मां कालरात्रि को भोग (Bhog) में गुड़ अतिप्रिय माना जाता है और इसीलिए भोग में गुड़ ही चढ़ाया जाता है. माता को गुड़ से बनी मिठाइयां और पकवान अर्पित किए जा सकते हैं.

मां कालरात्रि का प्रिय रंग
मान्यानुसार मां कालरात्रि की पूजा में उनके प्रिय रंगों के वस्त्र पहनकर पूजा करना बेहद शुभ होता है. मां कालरात्रि का प्रिय रंग लाल माना जाना है. ऐसे में मां कालरात्रि की पूजा में लाल रंग के वस्त्र धारण किए जा सकते हैं.

मां कालरात्रि मंत्र

ॐ कालरात्र्यै नम:।

एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता,
लम्बोष्टी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी।

वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा,
वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयंकरी॥

जय त्वं देवि चामुण्डे जय भूतार्ति हारिणि।
जय सार्वगते देवि कालरात्रि नमोस्तुते॥

ॐ ऐं सर्वाप्रशमनं त्रैलोक्यस्या अखिलेश्वरी।
एवमेव त्वथा कार्यस्मद् वैरिविनाशनम् नमो सें ऐं ॐ।।

नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की होगी पूजा, नोट कर लें पूजा विधि, मंत्र और आरती

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 Navratri 2024 Day 6 : आज शारदीय नवरात्रि का छठा दिन है। इस दिन देवी दुर्गा के छठे स्वरूप मां कात्यायनी की पूजा की जाती है। ऋषि कात्यायन के यहां जन्म लेने के कारण देवी


मां को कात्यायनी के नाम से जाना जाता है। कहते हैं मां कात्यायनी की उपासना से व्यक्ति को किसी प्रकार का भय या डर नहीं रहता है। साथ ही उसे किसी प्रकार की स्वास्थ्य संबंधी परेशानी का सामना भी नहीं करना पड़ता है। वहीं जिन लोगों को शादी होने में दिक्कतें आ रही हैं वे आज मां कात्यायनी की पूजा जरूर करें। मां कात्यायनी की आराधना करने से मनचाहा जीवनसाथी की प्राप्ति शीघ्र होती है।

मां कात्यायनी का स्वरूप

मां दुर्गा का ये स्वरूप अत्यंत ही दिव्य है। इनका रंग सोने के समान चमकीला है तो इनकी चार भुजाओं में से ऊपरी बायें हाथ में तलवार और नीचले बायें हाथ में कमल का फूल है। जबकि इनका ऊपर वाला दायां हाथ अभय मुद्रा में है और नीचे का दायां हाथ वरदमुद्रा में है ।

पूजा के दौरान माता के इस मंत्र का करें जाप

ॐ देवी कात्यायन्यै नमः॥

सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्ये त्र्यम्बिके गौरी नारायणी नमोस्तुते।।

या देवी सर्वभूतेषु माँ कात्यायनी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

मां कात्यायनी को क्या भोग लगाएं

मां कात्यायनी को क्या भोग लगाएं माता दुर्गा के छठे स्वरूप मां कात्यायनी को शहद अति प्रिय है। तो नवरात्रि के छठे दिन माता कात्यायनी को शहद या शहद से बनी खीर और शहद वाले हलवे का भोग जरूर लगाएं। शहद वाली खीर चावल, दूध और शहद से बनाई जाती है। शहद वाली खीर का भोग लगाने से माता रानी प्रसन्न होती हैं। इसके अलावा मां कात्यायनी को गुड़ भी अर्पित कर सकते हैं।

मां कात्यायनी की पूजा विधि

इस दिन सुबह सूर्योदय से पहले स्नान करके पीले रंग के वस्त्र धारण करें। आप चाहें तो लाल रंग के वस्त्र भी पहन सकते हैं।
इसके बाद सबसे पहले गंगाजल से पूजा स्थल को दोबारा से शुद्ध कर लें। इसके बाद सर्व प्रथम कलश का पूजन करें।
फिर मां कात्यायनी के मंत्र का जप करते हुए उन्हें वस्त्र अर्पित करें।
इसके बाद घी का दीपक जलाकर पूजा आरंभ करें। सबसे पहले माता को रोली का तिलक करें। अक्षत, धूप और पीले रंग के फूल अर्पित करें।
मां को पान के पत्ते पर शहर लगाकर और बताशे में लौं रखकर जरुर अर्पित करें। अंत में कपूर जलाकर मां कात्यायनी की आरती करें।

Shardiya Navratri 2024 : नवरात्रि के चौथे दिन होती है मां कूष्मांडा देवी की उपासना, कैसे करें माता रानी को खुश

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 Shardiya Navratri 2024 : आज शारदीय नवरात्रि का चौथा दिन है। नवरात्रि की चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा की जाती है। माता कूष्मांडा की उपासना करने से परिवार में खुशहाली आती है। इसके साथ ही व्यक्ति को यश, बल और लंबी उम्र की प्राप्ति होती है। अपनी मंद हंसी से ब्रह्मांड उत्पन्न करने के कारण इन्हें कूष्मांडा के नाम से जाना जाता है।


संस्कृत भाषा में कूष्मांडा कुम्हड़े को कहा जाता है और कुम्हड़े की बलि इन्हें बहुत प्रिय है, जिसके कारण भी इन्हें कुष्माण्डा के नाम से जाना जाता है। तो आइए जानते हैं कि नवरात्र के चौथे दिन देवी कूष्मांडा को क्या भोग लगाएं और पूजा के समय किन मंत्रों का जप करें।

मां कूष्मांडा को अष्टभुजा देवी कहा जाता है। उनकी आठ भुजाएं हैं। मां कूष्मांडा के हाथों में धनुष, बाण, कमल पुष्प, चक्र, गदा, कमंडल, जप माला और अमृकपूर्ण कलश कहता है। मां कुष्मांडा सिंह की सवारी करती है। मां कूष्मांडा की पूजा में हरे रंग के प्रयोग सबसे ज्यादा करना चाहिए। मां कूष्मांडा को हरा रंग और नीला रंग अति प्रिय है।

मां कुष्मांडा की पूजा विधि

सबसे पहले सूर्योदय से पहले ही स्नान कर लें और हरे रंग के वस्त्र धारण करें। इसके अलावा आप नीले रंग के वस्त्र भी धारण कर सकते हैं।
सबसे पहले रोज की तरह कलश की पूजा करें। कलश का तिलक करें।
मां कूष्मांडा का पंचामृत से स्नान कराके उन्हेंं हरे रंग के वस्त्र अर्पित करें।
इसके बाद मां कूष्मांडा का ध्यान करते हुए उनके मंत्र का जप करें। ध्यान के बाद उन्हें लाल पुष्प, सफेद कुम्हड़ा, फल, सुखे मेवे आदि अर्पित करें।
इसके बाद मां कूष्मांडा की आरती करें और फिर अंत में मां को भोग लगाएं।
मां कूष्मांडा का ध्यान मंत्र
या देवी सर्वभू‍तेषु मां कूष्माण्डा रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ इस मंत्र का कम से कम 108 बार जप करें।
जबकि देवी की पूजा में आप उन्हें जो भी चीजें अर्पित करें उन्हें, ओम देवी कूष्माण्डायै नमः॥ मंत्र से अर्पित करें।
मां कूष्मांडा का भोग
देवी कूष्मांडा को पेठा जिसे कुम्हरा भी कहतेहैं अधिक प्रिय है। इसके अलावा मां कूष्मांडा को दही और हलवे का भोग भी लगा सकते हैं।

कूष्मांडा माता की आरती

कूष्मांडा जय जग सुखदानी।
मुझ पर दया करो महारानी॥
पिगंला ज्वालामुखी निराली।
शाकंबरी मां भोली भाली॥
लाखों नाम निराले तेरे ।
भक्त कई मतवाले तेरे॥
भीमा पर्वत पर है डेरा।
स्वीकारो प्रणाम ये मेरा॥
सबकी सुनती हो जगदंबे।
सुख पहुंचती हो मां अंबे॥
तेरे दर्शन का मैं प्यासा।
पूर्ण कर दो मेरी आशा॥
मां के मन में ममता भारी।
क्यों ना सुनेगी अरज हमारी॥
तेरे दर पर किया है डेरा।
दूर करो मां संकट मेरा॥
मेरे कारज पूरे कर दो।
मेरे तुम भंडारे भर दो॥
तेरा दास तुझे ही ध्याए।
भक्त तेरे दर शीश झुकाए॥

Shardiya Navratri 2024: शारदीय नवरात्रि में आज दूसरे दिन होगी मां ब्रह्मचारिणी की पूजा, जानें उपासना विधि

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Shardiya Navratri 2024: शारदीय नवरात्रि के दूसरे दिन, देवी दुर्गा के दूसरे स्‍वरूप, मां ब्रह्मचारिणी की पूजा होती है। इस दिन उनकी पूजा करने से आपके जीवन की सारी परेशानियां दूर होती हैं। मां ब्रह्मचारिणी को ज्ञान, तपस्या और वैराग्य की देवी माना जाता है। ब्रह्म का अर्थ है तपस्या और चारिणी का अर्थ है आचरण करने वाली। कठोर तपस्या और ब्रह्मचर्य का पालन करने वाली मां ब्रह्मचारिणी को शत शत नमन है।


मान्‍यता है कि नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से जीवन में अच्छे गुण आते हैं। साथ ही आपके अंदर त्याग, सदाचार और संयम की भावना बढ़ती है। ऐसी मान्यता है कि मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से भक्तों को जीवन में आने वाली सभी बाधाओं और कठिनाइयों से मुक्ति मिलती है। यह तप, त्याग, संयम और सदाचार जैसे गुणों को भी बढ़ावा देती है, जो आध्यात्मिक उन्नति के लिए आवश्यक माने जाते हैं। आइए जानते हैं कैसे पड़ा मां दुर्गा का नाम ब्रह्मचारिणी। साथ ही जानें मां का प्रिय भोग, मंत्र और आरती।

ऐसे पड़ा मां का नाम ब्रह्मचारिणी
नवरात्रि के दूसरे दिन मां दुर्गा के तपस्विनी रूप की पूजा होती है। शास्त्रों के अनुसार, मां दुर्गा ने पार्वती के रूप में हिमालय की पुत्री के रूप में जन्म लिया था। नारद मुनि के कहने पर, उन्होंने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की। हजारों वर्षों तक उनकी कठोर तपस्या के कारण ही उन्हें तपस्विनी या ब्रह्मचारिणी कहा जाता है। इस कठिन तपस्या के दौरान, उन्होंने कई वर्षों तक बिना कुछ खाए-पिए कठोर तपस्या की और महादेव को प्रसन्न किया। उनके इसी तप के प्रतीक के रूप में नवरात्र के दूसरे दिन इनके इसी रूप की पूजा और स्तवन किया जाता है। नवरात्रि के दूसरे दिन, मां के इस रूप की पूजा उनके दृढ़ संकल्प और समर्पण के प्रतीक के रूप में की जाती है। यह दिन हमें सिखाता है कि सच्ची श्रद्धा और दृढ़ निश्चय से हम किसी भी लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं।

शारदीय नवरात्रि 2024 दूसरा दिन
अश्विन शुक्ल द्वितीया तिथि का प्रारंभ: आज, 4 अक्टूबर, 02:58 एएम से
अश्विन शुक्ल द्वितीया तिथि का समापन: कल, 5 अक्टूबर, 05:30 ए एम पर
उदयातिथि के आधार पर अश्विन शुक्ल द्वितीया तिथि आज है.

शारदीय नवरात्रि दूसरा दिन 2024 मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त: 04:38 ए एम से 05:27 ए एम
अभिजीत मुहूर्त: 11:46 ए एम से 12:33 पी एम
अमृत काल: 11:24 ए एम से 01:13 पी एम
विजय मुहूर्त: 02:07 पी एम से 02:55 पी एम

नवरात्रि आज से: कलश स्थापना का मुहूर्त सुबह 10.50 से, जानें शुभ मुहूर्त, राहुकाल, दिशाशूल

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 Shardiya Navratri 2024: आज पंचमहायोग में नवरात्रि शुरू हो गई है। इस बार तृतीया तिथि दो दिनों तक रहेगी। इस तिथि की गड़बड़ी से अष्टमी और महानवमी की पूजा 11 तारीख को होगी। 12 अक्टूबर, शनिवार को दशहरा मनेगा। तिथि की गड़बड़ी के बावजूद देवी पूजा के लिए पूरे नौ दिन मिलेंगे।


आज पर्वत, शंख, पारिजात, बुधादित्य और भद्र नाम के पांच राजयोग में नवरात्रि शुरू हो रही है। ज्योतिषियों का मानना है कि इन पंचमहायोग में घट स्थापना होने से देवी आराधना का शुभ फल और बढ़ जाएगा। नवरात्रि के पहले दिन घट (कलश) स्थापना की जाती है। इसे माता की चौकी बैठाना भी कहा जाता है। इसके लिए दिनभर में दो ही मुहूर्त रहेंगे।

शारदीय नवरात्रि के पहले दिन शैलपुत्री पूजा के साथ गुरुवार व्रत भी है. गुरुवार के दिन भगवान विष्णु और देवों के गुरु बृहस्पति की पूजा करते हैं. इनकी पूजा में पीले फूल, हल्दी, अक्षत्, चंदन, तुलसी के पत्ते, पंचामृत आदि शामिल करते हैं. भगवान विष्णु को गुड़, चने की दाल, बेसन के लड्डू का भोग लगाएं. पूजा के समय ओम नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करें. विष्णु सहस्रनाम, गुरुवार व्रत कथा का पाठ और बृहस्पति देव के बीज मंत्र का जाप करें. इससे कुंडली का गुरु दोष दूर होगा. इस उपाय से जल्द विवाह के योग भी बन सकते हैं. गुरुवार के दिन पीले चावल, पीले कपड़ और फूल, गुड़, घी, पीतल के बर्तन, धार्मिक पुस्तक आदि का शुभ फलदायी होता है. वैदिक पंचांग से जानते हैं शारदीय नवरात्रि के पहले दिन का शुभ मुहूर्त, सूर्योदय, चंद्रोदय, दिशाशूल, राहुकाल.

आज का पंचांग, 3 अक्टूबर 2024
आज की तिथि- प्रतिपदा – 02:58 ए एम, 4 अक्टूबर तक, उसके बाद द्वितीया
आज का नक्षत्र- हस्त – 03:32 पी एम तक, फिर चित्रा
आज का करण- किंस्तुघ्न – 01:38 पी एम तक, बव – 02:58 ए एम, 4 अक्टूबर तक, फिर बालव
आज का योग- इन्द्र – 04:24 ए एम, 4 अक्टूबर तक, उसके बाद वैधृति
आज का पक्ष- शुक्ल
आज का दिन- गुरुवार
चंद्र राशि- ​कन्या – 05:06 ए एम, 4 अक्टूबर तक, उसके बाद तुला

सूर्योदय-सूर्यास्त और चंद्रोदय-चंद्रास्त का समय
सूर्योदय- 06:15 ए एम
सूर्यास्त- 06:04 पी एम
चन्द्रोदय- 06:32 ए एम
चन्द्रास्त- 06:20 पी एम

शारदीय नवरात्रि 2024 शुभ मुहूर्त
कलश स्थापना मुहूर्त: सुबह में 6:15 बजे से 7:22 बजे तक
दोपहर में घटस्थापना समय: 11:46 बजे से दोपहर 12:33 बजे तक
ब्रह्म मुहूर्त: 04:38 ए एम से 05:27 ए एम
अमृत काल: 08:45 ए एम से 10:33 ए एम
अभिजीत मुहूर्त: 11:46 ए एम से 12:33 पी एम
विजय मुहूर्त: 02:08 पी एम से 02:55 पी एम
निशिता मुहूर्त: 11:46 पी एम से 12:34 ए एम, 4 अक्टूबर तक

नवरात्रों में घट स्थापना
मान्यता है कि कलश में देवी-देवताओं, ग्रहों व नक्षत्रों का वास होता है और कलश को मंगल कार्य का प्रतीक माना गया है. कलश स्थापना करने से घर में सुख-समृद्धि आती है. मान्यता है कि नवरात्रि में कलश स्थापना कर सभी शक्तियों को निमंत्रण दिया जाता है वो जब सभी शक्तियां आती हैं नकारात्मकता ऊर्जा नष्ट हो जाती है.

 

स्वास्थ्य मंत्री जायसवाल के निर्देश पर शारदीय नवरात्रि में प्रमुख चिन्हांकित स्थानों पर लगेंगे चिकित्सा शिविर

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 रायपुर : स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने शारदीय नवरात्रि के दौरान प्रदेश के प्रमुख चिन्हांकित स्थलों पर आमजनों की सुविधा हेतु चिकित्सा शिविर लगाए जाने के संबंध में आवश्यक निर्देश दिए हैं। निर्देश का पालन करते हुए आयुक्त सह संचालक स्वास्थ्य सेवाएं के द्वारा प्रदेश के सभी संभागीय संयुक्त संचालक स्वास्थ्य सेवाएं एवं समस्त मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) तथा सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक को पत्र जारी किया है।



इसके अनुसार तीन अक्टूबर से शारदीय नवरात्रि का पर्व आरंभ हो रहा है। प्रदेश में नवरात्रि के पर्व में आमजनों द्वारा पंचमी से लेकर दशहरा तक आम दिनों की तुलना में ज्यादा आवागमन होता है। अतः स्वास्थ्य विभाग को ऐसे भीड़-भाड़ वाले स्थानों का चिन्हांकन करते हुए जिला प्रशासन से समन्वय स्थापित कर विकासखण्ड स्तर पर चिकित्सा शिविर का आयोजन करने का निर्देश दिया गया है। इसके साथ ही सभी प्रमुख चिन्हांकित स्थलों में समुचित चिकित्सा एवं अन्य स्टॉफ, पर्याप्त औषधियां, 24 घंटे एम्बुलेंस तथा प्रचार-प्रसार की सामग्री सहित अन्य आवश्यक सामग्री की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

CG NEWS: डोंगरगढ़ दर्शन करने जा रहे श्रद्धालुओं की ऑटो पलटी, एक की मौत

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 CG NEWS: देशभर में इन दिनों शारदीय नवरात्रि की धूम मची हुई है। इस दौरान लोग देवी मां के अलग-अलग स्वरूपों की उपासना करते है। तो कुछ लोग देवी के प्रसिद्ध मंदिरों में जाकर मनोकामना करते हैं। ठीक ऐसे ही कुछ डोंगरगढ़ की प्रसिद्ध देवी मां बम्लेश्वरी के दर्शन को निकले थे। लेकिन रास्ते में वे सड़क हादसे का शिकार हो गए।


मिली जानकारी के अनुसार, ये हादसा दुर्ग-राजनांदगांव हाइवे पर हुआ। सभी श्रद्धालु एक ऑटो में सवार होकर डोंगरगढ़ जा रहे थे तभी ऑटो चालक को झपकी आई और अनियंत्रित होकर ऑटो पलट गया। इस हादसे में एक युवक की मौत की खबर भी सामने आई है। वहीं, कुछ लोग घायल बताए जा रहे हैं।


Shardiya Navratri 2023 : शारदीय नवरात्रि के 6वें दिन करें मां कात्यायनी का गुणगान

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 Shardiya Navratri 2023 : शारदीय नवरात्रि का पावन त्योहार 15 अक्टूबर से शुरू हुआ था। नवरात्रि के 9 दिनों तक मां दुर्गा के 9 स्वरूपों की पूजा की जाती है। आज नवरात्रि का छठा दिन है। इस दिन कात्यायनी देवी की उपासना की जाती है। मां कात्यायनी स्वरूप में माता शेर पर सवार, सिर पर मुकुट सुशोभित है। माता की चार भुजाएं हैं। माना जाता है कि मां के इस स्वरूप की पूजा अर्चना से विवाह में आ रही परेशानी दूर हो जाती है। आइए इस पावन मौके पर मां कात्यायनी का गुणगान करते हुए अपने प्रियजनों को शुभकामनाएं भेजिए।


ॐ देवी कात्यायन्यै नमः
मां कात्यायनी आपके ऊपर कृपा बनाएं रखें।
नवरात्रि के छठे दिन की हार्दिक शुभकामनाएं

ॐ ह्रीं नम:
मां कात्यायनी आपके ऊपर कृपा बनाएं रखें।
नवरात्रि के छठे दिन की हार्दिक शुभकामनाएं

चन्द्रहासोज्जवलकराशार्दुलवरवाहना
कात्यायनी शुभं दद्याद्देवी दानवघातिनी
मां कात्यायनी आपके ऊपर कृपा बनाएं रखें।
नवरात्रि के छठे दिन की हार्दिक शुभकामनाएं

क्लीं श्री त्रिनेत्रायै नम:
मां कात्यायनी आपके ऊपर कृपा बरसाएं।
नवरात्रि के छठे दिन की हार्दिक शुभकामनाएं

चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना
कात्यायनी शुभं दद्याद् देवी दानवघातिनी
मां कात्यायनी आपको खुशहाल रखें।
नवरात्रि के छठे दिन की हार्दिक शुभकामनाएं

या देवी सर्वभू‍तेषु मां कात्यायनी रूपेण संस्थिता
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः
देवी कात्यायनी आप पर कृपा बनाएं रखें।
नवरात्रि के छठे दिन की हार्दिक शुभकामनाएं

कात्यायनी महामाये , महायोगिन्यधीश्वरी
नन्दगोपसुतं देवी, पति मे कुरु ते नमः
मां कात्यायनी आपके ऊपर कृपा बनाएं रखें।
नवरात्रि के छठे दिन की हार्दिक शुभकामनाएं

आपके विवाह में न आए कोई बाधा,
मां कात्यायनी से करते हैं ये कामना,
इस वर्ष हो मिले आपको जीवनसाथी का साथ,
देवी पूरी करे आपकी सभी मनोकामना।
नवरात्रि के छठे दिन की हार्दिक शुभकामनाएं!

दिव्य है आंखों का नूर,
करती है संकटों को दूर,
मां की छवि है निराली,
नवरात्रि में आई है खुशहाली।
नवरात्रि के छठे दिन की हार्दिक शुभकामनाएं!

मां का पर्व आता है, हजारों खुशियां लाता है
इस बार मां आपको वो सब दे जो आपका दिल चाहता है।
नवरात्रि के छठे दिन की हार्दिक शुभकामनाएं!

या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

नवरात्रि का दूसरा दिन है मां ब्रह्मचारिणी को समर्पित, जानें पूजा विधि

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Shardiya Navratri 2023: शारदीय नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। आज यानी 16 अक्तूबर को मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाएगी। ये मां दुर्गा का दूसरा स्वरूप और नौ शक्तियों में से दूसरी शक्ति हैं। मां दुर्गा का यह स्वरूप ज्योर्तिमय है।


ब्रह्मा की इच्छाशक्ति और तपस्विनी का आचरण करने वाली मां ब्रह्मचारिणी त्याग की प्रतिमूर्ति हैं। इनकी उपासना से मनुष्य में तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार और संयम की वृद्धि होती है। साथ ही कुंडली में मंगल ग्रह से जुड़े सारे दोषों से मुक्ति मिल जाती है। मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से सभी कार्य पूरे होते हैं, रुकावटें दूर होती हैं और विजय की प्राप्ति होती है। इसके अलावा जीवन से हर तरह की परेशानियां भी खत्म होती हैं। ऐसे में आइए जानते हैं।

मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि

शारदीय नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने के लिए सबसे पहले ब्रह्ममुहूर्त पर उठकर स्नान कर लें।
पूजा के लिए सबसे पहले आसन बिछाएं इसके बाद आसन पर बैठकर मां की पूजा करें।
माता को फूल, अक्षत, रोली, चंदन आदि चढ़ाएं।
ब्रह्मचारिणी मां को भोगस्वरूप पंचामृत चढ़ाएं और मिठाई का भोग लगाएं।
साथ ही माता को पान, सुपारी, लौंग अर्पित करें।
इसके उपरांत देवी ब्रह्मचारिणी मां के मंत्रों का जाप करें और फिर मां की आरती करें।

कैसा है मां ब्रह्माचारिणी स्वरूप?

देवी ब्रह्मचारिणी साक्षात ब्रह्म का स्वरूप है अर्थात तपस्या का मूर्तिमान रूप है। ब्रह्म का मतलब तपस्या होता है, तो वहीं चारिणी का मतलब आचरण करने वाली। इस तरह ब्रह्माचारिणी का अर्थ है- तप का आचरण करने वाली देवी। मां ब्रह्माचारिणी के दाहिने हाथ में मंत्र जपने की माला और बाएं में कमंडल है।

मां ब्रह्माचारिणी मंत्र

1. या देवी सर्वभूतेषु माँ ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

2. दधाना कर पद्माभ्याम अक्षमाला कमण्डलू।
देवी प्रसीदतु मई ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा।।

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