Media24Media.com: विश्व आदिवासी दिवस

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भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने दीं विश्व आदिवासी दिवस पर शुभकामनाएँ और बधाई

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 रायपुर। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव ने प्रदेशवासियों को विश्व आदिवासी दिवस पर अपनी शुभकामनाएँ और बधाई देते हुए कहा है कि इस दिवस पर एक बार फिर हमें आदिवासी समुदायों के अधिकारों, उनकी संस्कृति के संरक्षण के लिए संकल्पित करता है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि आदिवासी हमारे समाज के अंगभूत घटक हैं और उनकी धरोहरों व उनके अधिकारों का संरक्षण व संवर्धन कर उन्हें विकास की मुख्य धारा से जोड़ना हमारा कर्त्तव्य है।


भाजपा प्रदेश अध्यक्ष देव ने अपने बधाई संदेश में कहा कि यह दिन हमारे लिए एक विशेष अवसर है, जब हम आदिवासी समुदायों के योगदान और समृद्ध विरासत को याद करते हैं। देश के स्वातंत्र्य संग्राम में छत्तीसगढ़ के आदिवासियों के बलिदान की गौरवशाली परंपरा रही है।

देव ने कहा कि यह अत्यंत प्रसन्नता का विषय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ की सरकार मिलकर जनजाति समाज के सर्वतोमुखी विकास और सशक्तीकरण के लिए सतत कर्मरत हैं। जनजाति समाज के हितों को ध्यान में रखकर केंद्र और प्रदेश सरकार ने अनेक कल्याणकारी योजनाओं पर काम किया है। हाल ही केंद्र सरकार के लोकसभा में प्रस्तुत बजट में प्रधानमंत्री जनजातिय उन्नत ग्राम अभियान की ऐतिहासिक व क्रांतिकारी घोषणा की गई है जिससे देश के 63 हजार ग्रामों के 5 करोड़ आदिवासी परिवार लाभान्वित होंगे।

विश्व आदिवासी दिवस : आदिवासी अंचलों में पहुंच रही हैं तेजी से विकास योजनाएं

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छगनलाल लोन्हारे/जी.एस. केशरवानी (उप संचालक)


रायपुर: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने छत्तीसगढ़ में 32 प्रतिशत जनजातीय समुदाय की आबादी को देखते हुए राज्य की बागडोर विष्णु देव साय के हाथों में सौंपी है। राज्य गठन के 23 वर्षों बाद वे ऐसे पहले आदिवासी नेता है जिन्हें राज्य के मुखिया के तौर पर कमान सौंपी गई है। राज्य में नई सरकार की गठन के साथ ही उन्होंने किसानों, महिलाओं और वंचित समूहों को आगे बढ़ाने के लिए योजनाओं की शुरूआत की। वे सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास के ध्येय वाक्य को लेकर सभी वर्गों की उन्नति और बेहतरी के लिए काम कर रहे हैं।


छत्तीसगढ़ की समृद्ध आदिवासी संस्कृति की देश-विदेश में अलग पहचान रही है। राज्य के आदिवासी अंचल एक ओर वनों से आच्छादित है। वहीं इन क्षेत्रों में बहुमूल्य खनिज सम्पदा भी है। मनोरम पहाड़ियां, झरनें, इठलाती नदियां बरबस लोगों को आकर्षित करती हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में गठित नई सरकार बनने के बाद राज्य के आदिवासी अंचलों में जन जीवन में तेजी से बदलाव लाने और उन्हें मुख्यधारा में शामिल करने के लिए अनेक नवाचारी योजनाओं का संचालन किया जा रहा है।

आदिवासी समुदाय को सभी प्रकार की मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए संचालित की जा रही महत्वाकांक्षी योजना प्रधानमंत्री जनमन योजना में आदिवासी बहुल क्षेत्रों में सड़क, बिजली, आवास, पेयजल जैसी महत्वपूर्ण मूलभूत सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं। साथ ही केन्द्र और राज्य सरकार की योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन किया जा रहा है।

आदिवासी क्षेत्रों के तेजी से विकास सुनिश्चित करने के लिए केन्द्र सरकार की पहल पर जगदलपुर के नगरनार में लगभग 23 हजार 800 करोड़ रूपए की लागत से वृहद स्टील प्लांट लगाया गया हैं, इससे आने वाले वर्षों में बस्तर अंचल की पूरी तस्वीर बदलेगी। लोगों को बड़ी संख्या में रोजगार मिलेगा साथ ही रोजगार के नए अवसरों का निर्माण होगा।

इस साल के केन्द्रीय बजट में जनजाति उन्नत ग्राम अभियान योजना शामिल की गई है। इस योजना से राज्य के लगभग 85 विकासखंडों में शामिल गांवों को विभिन्न मूलभूत सुविधाएं मिलेगी। इसके अलावा जैविक खेती को बढ़ावा देने जैसी प्राथमिकताएं भी जनजाति क्षेत्रों की दशा और दिशा बदलेंगी।

जनजाति क्षेत्रों के तेजी से विकास सुनिश्चित करने के लिए भारत माला प्रोजेक्ट के अंतर्गत रायपुर-विशाखापत्तनम एक्सप्रेसवे बनाया जा रहा है 464 किलोमीटर लंबा और छह लेन चौड़ा एक्सप्रेसवे होगा। यह छत्तीसगढ़, ओडिशा और आंध्र प्रदेश से होकर गुजरेगा। यह एक्सप्रेसवे मार्ग छत्तीसगढ़ में 124 किलोमीटर, ओडिशा में 240 किलोमीटर और आंध्र प्रदेश में 100 किलोमीटर बनेगी। उड़ीसा से आंध्रप्रदेश के विशाखापटनम तक बनाए जा रहे इस नए कॉरिडोर से आर्थिक गतिविधियों में तेजी आएगी। वहीं नए उद्योगों की स्थापना से रोजगार के अवसरों में वृद्धि होगी।

बस्तर के माओवादी आतंक से सुरक्षा प्रदान करने के लिए एक तरफ सुरक्षा कैंपों की सख्या बढ़ायी जा रही है। वहीं सुरक्षा कैंपों के आसपास 5 किलोमीटर के दायरे में आने वाले गांवों में केन्द्र और राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए नियद् नेल्लानार जैसी नवाचारी योजनाओं की शुरूआत की गई है। इस योजना के बेहतर और सार्थक परिणाम मिल रहे हैं। लोगों का विश्वास फिर से शासन-प्रशासन के प्रति लौटने लगा है।

आदिवासियों की आय में वृद्धि और उन्हें बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए सरकार तेजी से काम कर रही है। प्रदेश सरकार ने लगातार ऐसे कदम उठाए हैं, जिनसे वनों के साथ आदिवासियों का रिश्ता फिर से मजबूत हुआ है। वनांचल क्षेत्रों में लघु वनोपज की समर्थन मूल्य पर खरीदी के साथ-साथ तेन्दूपत्ता का खरीदी कार्य भी पहले से अधिक व्यवस्थित रूप से किया जा रहा है। राज्य सरकार द्वारा 36 कॉलेजों के भवन-छात्रावास निर्माण के लिए 131 करोड़ 52 लाख रूपए मंजूर किए गए है। इससे प्रदेश के 36 कॉलेजों के इंफ्रास्ट्रक्चर सुदृढ़ होंगे तथा शैक्षणिक माहौल को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। वहीं युवाओं को उच्च स्तर की शैक्षणिक सुविधाएं प्राप्त होगी और वे बेहतर भविष्य की ओर बढ़ सकेंगे।

राज्य सरकार ने तेन्दूपत्ता पारिश्रमिक दर प्रतिमानक बोरा 4000 से बढ़ाकर 5500 रूपए कर दिया है। इससे लगभग 13 लाख जनजाति परिवार लाभान्वित हो रहे हैं। इन क्षेत्रों में लघु वनोपज संग्रहण भी महिला स्व-सहायता समूहों के माध्यम से हो रहा है। लघु वनोपज के प्रसंस्करण के लिए वनधन केन्द्रों की स्थापना की गई है।

प्रदेश में जनजातिय समुदाय के बच्चों के लिए बेेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए 75 एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं। इसके अलावा माओवादी प्रभावित क्षेत्र के बच्चों के लिए 15 प्रयास आवासीय विद्यालय संचालित है। इन विद्यालयों में मेधावी विद्यार्थियों को अखिल भारतीय मेडिकल और इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा की तैयारी कराई जा रही हैं। नई दिल्ली में संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा की तैयारी के लिए संचालित यूथ हॉस्टल में सीटों की संख्या 50 से बढ़ाकर 185 कर दी गई है।

राज्य में बस्तर, सरगुजा, मध्य क्षेत्र आदिवासी विकास, अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण तथा छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण अन्य पिछड़ा वर्ग विकास प्राधिकरणों के कामकाज को व्यवस्थित और प्रभावित बनाने के लिए इनका पुनर्गठन किए जाने का निर्णय लिया गया है। इन प्राधिकरणों की कमान अब मुख्यमंत्री के हाथों में होगी। क्षेत्रीय विधायक इन प्राधिकरणों के सदस्य होंगे तथा मुख्यमंत्री के सचिव अथवा सचिव इन प्राधिकरणों के सदस्य सचिव होंगे।

आदिवासी संस्कृति के संरक्षण के लिए बस्तर अंचल के देवगुड़ियां और घोटुलों तथा अन्य ऐतिहासिक धरोहरों के आसपास एक पेड़ मां के नाम अभियान के तहत वृक्षारोपण किया जा रहा है। इससे लोगों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ रही है, साथ ही ऐसे स्थानों में प्राकृतिक सुन्दरता भी बढ़ेगी।

 

महासमुंद : विशिष्ट उपलब्धि प्राप्त जनजाति समाज की विभूतियों को सम्मानित किए जाने हेतु आवेदन आमंत्रित

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 महासमुंद : विश्व आदिवासी दिवस 09 अगस्त 2024 के अवसर पर जनजाति समाज की विभूतियों को सम्मानित किया जाना है। सहायक आयुक्त आदिवासी विकास ने बताया कि ऐसे विभूति जो शैक्षणिक क्षेत्र, सामाजिक क्षेत्र, समाज सेवा, सांस्कृतिक सेवा, पर्यावरण संरक्षण क्षेत्र, आदिम जाति चित्रकला क्षेत्र, खेलकूद, कृषि एवं चिकित्सा क्षेत्र में विशिष्ट उपलब्धि प्राप्त किए हो। वे अपना आवेदन 29 जुलाई 2024 तक सहायक आयुक्त आदिवासी विकास कार्यालय में कार्यालयीन समय में जमा कर सकते हैं।


गजब ! चरणामृत समझकर कृषि मंत्री ने पी ली देशी शराब

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 World Tribal Day 2023: विश्व आदिवासी दिवस के मौके पर नर्मदा जिले में एक अजीबोगरीब घटना सामने आई। डेडियापाड़ा में आयोजित कार्यक्रम में कृषि मंत्री राघव जी पटेल पहुंचे हुए थे। इसी दौरान कार्यक्रम में आदिवासी रीति रिवास से पूजा अर्चना शुरू हुई। इस दौरान कृषि मंत्री को शराब दी गई। 


मंत्री गलतफहमी में उसे चरणामृत समझकर पी गए। पास खड़े व्यक्ति ने उन्हें टोका तो उन्हें गलती का अहसास हुए। बाद में मंत्री ने सफाई दी कि उन्होंने इसके बारे में पता नहीं था।

बता दें कि आदिवासी दिवस की पूजा में देशी शराब से धरती माता का अभिषेक करने की परंपरा वर्षों से चली आ रही है. पूजा के दौरान एक बोतल में देसी शराब पत्ते में मंत्री समेत गणमान्य लोगों को पूजा के लिए दी गई. हालांकि, कृषि मंत्री राघवजी पटेल आदिवासी रीति-रिवाजों से अनजान होने की वजह से इसे चरणामृत समझकर पी गए.

 लेकिन वहां मौजूद स्थानीय शख्स ने उन्हें बताया कि इसे धरती माता को अर्पित करना होता है तब जाकर मंत्री को अपनी गलती का एहसास हुआ.


मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रदेश में पहली बार प्रदान किए पर्यावास अधिकार मान्यता पत्र

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज विश्व आदिवासी दिवस 09 अगस्त के अवसर पर छत्तीसगढ़ के विशेष रूप से कमजोर जनजाति समूह ‘‘कमार’’ को एक विशेष तोहफा देते हुए उन्हें पर्यावास अधिकार (भ्ंइपजंज त्पहीजे) मान्यता पत्र वितरित किए। प्रदेश में पहली बार विशेष रूप से कमजोर जनजाति समूह को पर्यावास अधिकार प्रदान किया गया। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ देश का दूसरा राज्य बन गया है, जहां विशेष रूप से कमजोर जनजाति समूह को पर्यावास अधिकार दिया गया है।

इसी तरह कमार जनजाति समूह प्रदेश का पहला जनजाति समूह है, जिसे राज्य शासन द्वारा पर्यावास अधिकार मिला है। मुख्यमंत्री बघेल ने आज अपने निवास कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में धमतरी जिले के मगरलोड विकासखण्ड अंतर्गत स्थित मगरलोड पाली/उपक्षेत्र (परंपरागत क्षेत्र) के 22 कमार पारा/टोला के मुखिया को पर्यावास अधिकार मान्यता पत्र प्रदान किए। कार्यक्रम में आदिम जाति विकास मंत्री मोहन मरकाम, आदिम जाति विकास विभाग के सचिव डी.डी. सिंह, आयुक्त श्रीमती शम्मी आबिदी सहित कमार जनजाति के मुखिया उपस्थित थे।

पर्यावास अधिकार -

वन अधिकार अधिनियम 2006 की धारा 2 (ज) में पर्यावास अधिकारों को परिभाषित किया गया है। इसके अनुसार सामान्यतः पर्यावास अधिकार पीव्हीटीजी के पर्यावास क्षेत्र के अंतर्गत उनके पारंपरिक एवं रूढ़िगत सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक और आजीविका से संबंधित पारिस्थितिकी तंत्र पर पारंपरिक रूप से निर्भरता एवं जैव विविधता अथवा पारंपरिक ज्ञान का अधिकार मान्य करने के साथ उनके संरक्षण एवं संवर्द्धन हेतु मान्यता प्रदान करता है। पर्यावास अधिकार प्रदान करने की यह पहल अन्य विशेष रूप से कमजोर जनजाति समूहों तथा कमार जनजाति समुदाय की अन्य पालियों, उपक्षेत्रों के लिए भी एक मार्गदर्शिका सिद्ध होगा एवं शीघ्र ही अन्य विशेष रूप से कमजोर जनजाति समूहों के लिए भी इस दिशा में प्रयास किया जाएगा। 

सामुदायिक और सामुदायिक वन संसाधन अधिकारों के उपयोग के लिए चलाया जाए जनजागरूकता अभियान - मुख्यमंत्री बघेल

मुख्यमंत्री ने किया ग्राम सभाओं में जागरूकता अभियान के द्वितीय चरण का शुभारंभ

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि राज्य सरकार द्वारा आदिवासियों को अधिकार सम्पन्न बनाने का महत्वपूर्ण कार्य किया गया है। समर्थन मूल्य पर धान, लघु वनोपजों, मिलेट्स की खरीदी के साथ व्यक्तिगत, सामुदायिक वन अधिकार पत्र, सामुदायिक वन संसाधन के अधिकार प्रदान किए गए हैं। छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य है, जहां वन अधिकार मान्यता पत्र के माध्यम से आदिवासियों और वनवासियों को दी गई जमीन की ऋण पुस्तिका बनाई गई है। ऋण पुस्तिका बनने से पट्टेधारियों के लिए समर्थन मूल्य पर कृषि और लघु वनोपजों तथा मिलेट्स उपज बेचना संभव हो रहा है। इसके साथ ही साथ उन्हें कृषि कार्यों के शून्य प्रतिशत ब्याज पर ऋण भी उपलब्ध हो रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सामुदायिक तथा वन संसाधन वन अधिकार मान्यता पत्र के माध्यम से लाखों हेक्टेयर जमीन वनवासियों को दी गई है। सामुदायिक तथा वन संसाधन मान्यता पत्र के माध्यम से मिले अधिकारों का उपयोग पट्टाधारी किस तरह कर सकें इसके लिए जनजागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है। इसके लिए आज वनाधिकार अधिनियम 2006 के अंतर्गत सामुदायिक वन संसाधन अधिकार के संबंध में जागरूकता हेतु ग्राम सभाओं में जागरूकता अभियान के द्वितीय चरण का शुभारंभ किया गया है। इस अभियान का प्रथम चरण वन अधिकार मान्यता पत्र की प्रक्रिया की जानकारी पर केन्द्रित था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इन अधिकारों के उपयोग के संबंध में जागरूकता लाने के लिए राज्य सरकार और समाजसेवी संगठनों द्वारा प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने विभिन्न जनजाति समुदायों के समाज प्रमुखों से भी आग्रह किया कि वे इस काम को प्राथमिकता के साथ हाथ में लें, ताकि आदिवासियों को प्राप्त अधिकारों का वे अधिक से अधिक लाभ उठा सकें। यह प्रयास छत्तीसगढ़ को समृद्ध बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

पर्यावास अधिकार मान्यता प्रक्रिया पुस्तिका सहित विभिन्न प्रकाशनों का विमोचन

मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में विशेष रूप से कमजोर जनजाति समूह को पर्यावास अधिकार की मान्यता देने की प्रक्रिया के संबंध में प्रकाशित पुस्तिका का विमोचन किया। इस अवसर पर उन्होंने आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग की योजनाओं की प्रगति से संबंधित पुस्तिका समावेशी विकास के बढ़ते सोपानशीर्षक से प्रकाशित कॉफी टेबल बुक, आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान द्वारा प्रकाशित पुस्तकों छत्तीसगढ़ की जनजातीय वाचिक परम्पराएं’, ‘बस्तर दशहरा’ ‘आदिनाद जनजाति वाद्ययंत्र’ ‘स्मारिकाका भी विमोचन किया।

आदिवासी जननायकों के स्वतंत्रता संग्राम में योगदान के गौरवपूर्ण स्मरण के रूप में डाक टिकट एवं विशेष आवरण जारी

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के आदिवासी जननायकों द्वारा स्वतंत्रता संग्राम में किये गये योगदान के गौरवपूर्ण स्मरण के रूप में डाक टिकट एवं विशेष आवरण का विमोचन किया। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न जनजातियों के वाद्य यंत्रों पर आदिम जाति विकास विभाग द्वारा तैयार किए गए वृत चित्र का प्रदर्शन किया गया।

आदिम जाति तथा अनुसूचित जनजाति विकास मंत्री मोहन मरकाम ने इस अवसर पर कहा कि आज मगरलोड पाली के विशेष रूप से कमजोर जनजाति कमार समूह को राज्य में प्रथम पर्यावास अधिकार मुख्यमंत्री द्वारा प्रदान किया गया है। उन्होंने कहा कि चाहे लघुवनोपज का न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदी की बात हो या धान की समर्थन मूल्य में खरीदी हो, मिलेट् का न्यूनतम समर्थन मूल्य हो, हमारी सरकार द्वारा जनजाति हितों को ध्यान में रखा गया है। विशेष पिछड़ी जनजाति समूह के युवाओं को नौकरी देने के बात हो, चाहे जनजाति क्षेत्रों में सुपोषण अभियान हो, मुख्यमंत्री हाट बाजार क्लीनिक योजना हो, आदिवासी परब सम्मान के माध्यम से अनुसूचित क्षेत्र के पंचायतों को सशक्त करना हो, हमारी सरकार और मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने जनजाति हितों को प्राथमिकता दी है।

प्रदेश में कमार जनजाति मुख्यतः चार जिलों गरियाबंद, महासमुंद, धमतरी एवं कांकेर में निवासरत है। इन सभी जिलों के कमार आवासीय क्षेत्रों को समेकित किए जाने पर उनका पर्यावास क्षेत्र निर्धारित होगा। इस अवसर पर कलेक्टर धमतरी ऋतुराज रघुवंशी, निदेशक, डाक सेवाएं छत्तीसगढ़ परिमंडल दिनेश मिस्त्री, समाज सेवी सुश्री मंजीत कौर बल सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

मगरलोड-पाली के परिवारों को मिला पर्यावास अधिकार

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा प्रदेश में पहली बार धमतरी जिला के विकास खंड मगरलोड अंतर्गत 22 पीव्हीटीजी पाली के परिवारों के व्यक्तियों को पर्यावास अधिकार प्रदान किए गए हैं। इन अधिकारों के माध्यम से पीव्हीटीजी समुदाय के प्रथागत व्यवस्थाओं, संस्कृति के साथ पारम्परिक अधिकारों को शासकीय दस्तावेज में अभिलिखित करने तथा सुरक्षा, संरक्षण एवं संवर्धन में सहयोग मिलेगा। पीढ़ियों से चली आ रही पारम्परिक आजीविका और पारिस्थितिकी ज्ञान की सुरक्षा और संवर्धन हो सकेगा। विभिन्न विभागों की योजनाओं के अभिसरण के माध्यम से शासन द्वारा इन क्षेत्रों का सशक्तिकरण और विकास किया जा सकेगा। पीव्हीटीजी विकास अभिकरण के माध्यम से समुदाय अनुकूल अधोसंरचना विकास में सहायता मिलेगी।

विश्व आदिवासी दिवस: वन विभाग द्वारा 500 करोड़ रूपए का होगा वितरण

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में विश्व आदिवासी दिवस 09 अगस्त को आयोजित वृहद स्तरीय कार्यक्रम में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग अंतर्गत 472 करोड़ 31 लाख रूपए की राशि का वितरण किया जाएगा। इनमें तेंदूपत्ता संग्राहकों को 424 करोड़ रूपए से अधिक का प्रोत्साहन पारिश्रमिक तथा वन प्रबंधन समितियों को 44 करोड़ रूपए की लाभांश राशि का वितरण होगा।

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा राज्य में तेंदूपत्ता संग्राहकों को दी जाने वाली तेंदूपत्ता संग्राहक राशि में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। साथ ही तेंदूपत्ता संग्राहकों के कल्याण के लिए सामाजिक तथा सामूहिक सुरक्षा बीमा आदि अनेक योजनाएं भी संचालित की जा रही है। गौरतलब है कि वर्ष 2018 में देय तेंदूपत्ता का संग्रहण पारिश्रमिक 2 हजार 500 रूपए प्रति मानक बोरा था, जिसे तेंदूपत्ता संग्राहकों के हित में राज्य सरकार द्वारा महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए वर्ष 2019 में बढ़ाकर 4 हजार रूपए प्रति मानक बोरा किया गया।

साथ ही तेंदूपत्ता संग्राहकों को बोनस के रूप में प्रोत्साहन पारिश्रमिक का भी वितरण किया जा रहा है। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर राज्य के जिला मुख्यालयों में आयोजित कार्यक्रम में प्रोत्साहन पारिश्रमिक तथा लाभांश राशि के सुव्यवस्थित वितरण के लिए वन मंत्री श्री मोहम्मद अकबर के निर्देशानुसार प्रमुख सचिव वन मनोज पिंगुआ के मार्गदर्शन में विभाग द्वारा तैयारियां जोरो पर है। प्रधान मुख्य वन संरक्षक व्ही. श्रीनिवास राव द्वारा इसके लिए समस्त मुख्य वन संरक्षकों तथा वनमण्डलाधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं।

छत्तीसगढ़ में विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर तेंदूपत्ता संग्राहकों को 424 करोड़ 11 लाख रुपए का प्रोत्साहन पारिश्रमिक वितरित किया जाएगा। इसके अंतर्गत वर्ष 2021 में लाभ में रही 733 समितियों के 9 लाख 49 हजार 944 संग्राहकों को 163 करोड़ 62 लाख रुपए की प्रोत्साहन पारिश्रमिक का वितरण किया जाएगा। इसी प्रकार संग्रहण वर्ष 2022 के लिए लाभ में रहीं 661 समितियों के 8 लाख 61 हजार 772 संग्राहकों को 260 करोड़ 49 लाख रुपए का प्रोत्साहन पारिश्रमिक का वितरण किया जाएगा। यह जानकारी छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ के प्रबंध संचालक अनिल कुमार राय ने दी। उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ शासन द्वारा तेंदूपत्ता के व्यापार से होने वाले लाभ का प्रोत्साहन पारश्रमिक संग्राहकों को वितरण किया जाता है।

विश्व आदिवासी दिवस पर जिलों में होंगे कार्यक्रम, कलेक्टरों को निर्देश

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रायपुर। प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी 9 अगस्त को सभी जिला मुख्यालयों में विश्व आदिवासी दिवस का कार्यक्रम गरिमापूर्वक आयोजित किया जाएगा। इस संबंध में सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा सभी जिला कलेक्टरों को दिशा-निर्देश जारी किए हैं। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में प्रदेश के अनुसूचित क्षेत्रों की 5 हजार 633 पंचायतों को मुख्यमंत्री आदिवासी परब सम्मान निधि योजनाके तहत द्वितीय किश्त 2 करोड़ 81 लाख 65 हजार रूपए की राशि उनके बैंक खातों में अंतरित की जाएगी।


प्रत्येक पंचायत को 5 हजार रूपए की मान से द्वितीय किश्त दी जाएगी। पंचायतों को मुख्यमंत्री आदिवासी परब सम्मान निधि योजनायोजना के तहत प्रतिवर्ष दी जाने वाली 10 हजार रूपए की आर्थिक सहायता का उद्देश्य आदिवासी तीज-त्यौहारों का गांव में गरिमामय आयोजन सुनिश्चित करना है। जारी निर्देश में कहा गया है कि जिला मुख्यालयों में आयोजित होने वाले कार्यक्रम में सभी स्थानीय जनप्रतिनिधियों, त्रिस्तरीय पंचायत प्रतिनिधि को भी आमंत्रित किया जाय। विशेषकर अनुसूचित क्षेत्र के पंच-सरपंचों को आमंत्रित करें।

कार्यक्रम में वन अधिकार पत्र, सामुदायिक वन अधिकार पत्र और वन संसाधन अधिकार पत्र का वितरण किया जाएगा।व्यक्तिगत वन अधिकार पत्र धारियों को ऋण पुस्तिका प्रदान की जाएगी। वन अधिकार अधिनियम के अंतर्गत लक्ष्य अनुरूप चिन्हांकित ग्रामों को आदर्श ग्राम के रूप में घोषित किए जाने की कार्यवाही की जाएगी।जारी निर्देश में यह भी कहा गया है कि छत्तीसगढ़ राज्य अंत्यावसायी सहकारी वित्त एवं विकास निगम के स्वीकृत हितग्राहियों को ऋण वितरित किया जाए। कृषि एवं बागवानी विभाग द्वारा स्वीकृत कृषि आदान, बीज, उपकरण भी प्रदान किए जाएं।

जिन जिलों में मनरेगा के तहत भूमि समतलीकरण, तालाब गहरीकरण, डबरी निर्माण आदि का कार्य किया जाना है, उनके लिए स्वीकृति आदेश जारी किया जाए। वन विभाग द्वारा हितग्राही मूलक कार्यक्रम है तो उनका भी वितरण किया जाए। जिले में अनुसूचित जनजाति के हितार्थ उत्कृष्ट कार्य करने वाले संस्था अथवा व्यक्ति विशेष को सम्मानित, पुरस्कृत किया जाए। सम्मान स्वरूप प्रमाण पत्र भी स्थानीय स्तर पर प्रदान किया जा सकता है।

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