Media24Media.com: विद्युत

Responsive Ad Slot


 

Showing posts with label विद्युत. Show all posts
Showing posts with label विद्युत. Show all posts

मुख्यमंत्री ने बगिया में किया तीन विद्युत केन्द्र का लोकार्पण

No comments Document Thumbnail

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जशपुर जिले के ग्राम बगिया में 8.55 करोड़ रूपए के विकासकार्यों का लोकार्पण किया। इसमें कुंजारा, ढोकड़ा और साहीडांड में नव-निर्मित विद्युत उपकेन्द्र शामिल है। इन तीनों 33/11 के. व्ही. विद्युत उपकेन्द्र की लागत 7.84 करोड़ रूपए है। इसके अलावा मुख्यमंत्री ने कुनकुरी में उप क्षेत्रीय भंडार और सन्ना में निर्मित नवीन तहसील कार्यालय भवन का भी लोकार्पण किया।

कुनकुरी अंचल में तीन विद्युत उपकेंद्र बनने से गावों के लोगों को विद्युत की आपूर्ति में आने वाली दिक्कत से निजात मिलेगी। इससे कुनकुरी और आस-पास के 70 गांवों में 11 हजार उपभोक्तओं को गुणवत्तापूर्ण विद्युत की आपूर्ति सुनिश्चित होगी। वहीं सन्ना में नवीन तहसील कार्यालय भवन के निर्माण से राजस्व के मामलों के निराकरण में तेजी आएगी।

छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी के अधिकारियों ने बताया कि ग्राम दोकड़ा के विद्युत उपकेन्द्र से 25 ग्रामों 3500 से अधिक उपभोक्ताओं, कुंजारा के उपकेन्द्र से 23 ग्रामो के लगभग 3850 उपभोक्ताओं और साहीडांड के उपकेन्द्र से 22 ग्रामो के 4270 उपभोक्ताओं को गुणवत्ता युक्त विद्युत आपूर्ति की जा रही है। तीनों ही विद्युत उपकेन्द्रों में 3.15 एम.व्ही.ए. का पॉवर ट्रान्सफॉर्मर लगाया गया है।

इसी प्रकार कुनकुरी में उप क्षेत्रीय भंडार स्थापित होने से ट्रान्सफॉर्मर सहित अन्य विद्युत उपकरणों की आपूर्ति में आसानी होगी। पहले 150 से 200 कि.मी. की दूर सूरजपुर जिले में स्थित क्षेत्रीय भंडार, बिश्रामपुर ट्रान्सफॉर्मरों की आपूर्ति होती थी। जिसमें अधिक समय व लागत लगती थी। कुनकुरी में मिनी डिपो स्टोर खुलने से दूरी एवं समय बचने के साथ ही विद्युत सामग्री मिलने में सुविधा होगी।

कार्यक्रम में जिला पंचायत उपाध्यक्ष उपेन्द्र यादव, भरत सिंह, पूर्व विधायक रोहित साय, डीडीसी सालिक साय, भुनेश्वर सिंह केशर, अमन शर्मा, रामदेव कायता, ठाकुर पुरुषोत्तम सिंह सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे।

नगरीय निकायों को बनाया जाएगा ऊर्जा दक्ष, एनर्जी ऑडिट कराकर कमियों-खामियों को किया जाएगा दूर

No comments Document Thumbnail

रायपुर। उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री अरुण साव ने राज्य के सभी 184 नगरीय निकायों में बिजली बिल और एनर्जी ऑडिट के निर्देश दिए हैं। उन्होंने यथासंभव पारंपरिक ऊर्जा के स्थान पर सौर ऊर्जा का उपयोग करने को कहा है। उन्होंने नगरीय प्रशासन विभाग के अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा है कि अधिकांश निकायों में इस मद में राशि के अभाव के कारण समय पर बिजली के बिल का भुगतान नहीं किया जाता है। इससे नगरीय निकायों और विभाग को हर वर्ष अनावश्यक ही सरचार्ज व एरियर्स की राशि के रूप में बिजली विभाग को अतिरिक्त राशि का भुगतान करना पड़ता है।

ऊर्जा और बिजली बिल के ऑडिट से इनकी बचत के उपाय करने में सहूलियत होगी। साव ने बिजली बचाने और इसके खर्च में कमी लाने के लिए नगरीय निकायों में पारंपरिक ऊर्जा के बदले ग्रीन एनर्जी के उपयोग को बढ़ावा देने को कहा है। इससे निकायों का खर्च घटने के साथ ही पर्यावरण भी सुधरेगा। उप मुख्यमंत्री ने चरणबद्ध तरीके से एनर्जी ऑडिट का कार्य थर्ड पार्टी प्रोफेशनल एजेंसीज से कराने के निर्देश दिए हैं। शहरी क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति और स्ट्रीट लाइटिंग जैसी विभिन्न जन सुविधाओं के संचालन के लिए नगरीय निकायों मे बड़ी संख्या में विद्युत कनेक्शन लिए गए हैं।

विद्युत विभाग द्वारा प्रदेश के सभी 184 नगरीय निकायों में इसके लिए हजारों की संख्या में बिजली के मीटर लगाए गए हैं। इन मीटरों के माध्यम से हर महीने मीटर रीडिंग कर बिजली विभाग द्वारा बिजली का बिल निकायों को प्रेषित किया जाता है। निकायों द्वारा प्रति माह एक बड़ी राशि विद्युत देयकों के रूप में व्यय की जाती है। कई बार सरचार्ज और एरियर्स के रूप में भी बिजली विभाग को अतिरिक्त राशि का भुगतान निकायों और नगरीय प्रशासन विभाग को करना पड़ता है। विभाग द्वारा नगरीय निकायों में बिजली बिल के समायोजन के लिए बिजली विभाग को हर साल लगभग 100 करोड़ रुपए से 200 करोड़ रुपए की राशि हस्तांतरित की जाती है। वर्तमान में करीब 800 करोड़ रुपए का भुगतान लंबित होने के कारण सरचार्ज की राशि में लगातार वृद्धि हो रही है।

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने इस स्थिति को देखते हुए विभागीय समीक्षा बैठक में नगरीय निकायों के बिजली बिलों के ऑडिट तथा एनर्जी ऑडिट कराने के निर्देश अधिकारियों को दिए हैं। इससे प्रत्येक निकाय के बिजली बिल के ऑडिट से वास्तविक विद्युत खपत और अनावश्यक रूप से सरचार्ज हेतु किए जा रहे भुगतान का स्पष्ट आंकलन किया जा सकेगा। ऑडिट के बाद विद्युत की खपत घटाने और सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए जाने के लिए नीति भी तैयार की जाएगी। विद्युत खपत घटाने और सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए जाने से लंबी अवधि में लगभग 800 करोड़ रुपए से एक हजार करोड़ रुपए की बचत होगी। साथ ही ग्रीन एनर्जी के उपयोग से निकायों को कार्बन क्रेडिट भी प्राप्त होगा। साव ने कहा कि इस तरह बचाई गई राशि से निकायों में अधोसंरचना विकास के अन्य कार्य तथा नागरिकों को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए नई योजनाएं शुरू की जा सकेंगी। निकायों में ऊर्जा प्रबंधन में सौर उर्जा को शामिल करने एवं ताप ऊर्जा के उपयोग में कमी से पर्यावरणीय स्थिरता को बढ़ावा भी मिलेगा।

 सौर ऊर्जा के अधिकतम उपयोग से नगरीय निकायों को ऊर्जा दक्ष बनाने के निर्देश, पायलेट परियोजना के लिए तैयार की जा रही है कार्ययोजना

उप मुख्यमंत्री अरूण साव ने सौर ऊर्जा के अधिकतम उपयोग से नगरीय निकायों को ऊर्जा दक्ष बनाने के निर्देश दिए हैं। नगरीय प्रशासन विभाग द्वारा निकायों में विद्युत खपत की वास्तविक जानकारी जुटाने हेतु एनर्जी ऑडिट कराने के लिए पायलेट परियोजना की कार्ययोजना तैयार की जा रही है। एनर्जी ऑडिट के माध्यम से नगरीय निकायों में बिजली की वास्तविक खपत और व्यवस्था में व्याप्त अनियमितताओं, कमियों की पहचान तथा विद्युत देयकों के विश्लेषण के बाद विद्युत दक्ष (Energy Efficient) उपकरणों के प्रयोग को बढ़ावा देने, विद्युत खपत में कमी से देयकों में मितव्यता तथा चरणबद्ध तरीके से सौर ऊर्जा प्रणाली जैसी वैकल्पिक व्यवस्था को अपनाया जाएगा। भारत सरकार द्वारा भी पारंपरिक ऊर्जा के स्थान पर सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए पीएम कुसुम, पीएम सूर्याेदय तथा पीएम सूर्यघर जैसी अभिनव योजनाएं प्रारंभ की गई हैं।


शासन की प्राथमिकता वाली योजनायें: मुख्य सचिव ने ऊर्जा और वित्त विभाग के कार्यों की समीक्षा की

No comments Document Thumbnail

रायपुर। मुख्य सचिव अमिताभ जैन ने आज यहां मंत्रालय महानदी में राज्य शासन की प्राथमिकता वाली योजनाओं के क्रम में ऊर्जा और वित्त विभाग की समीक्षा की। मुख्य सचिव ने विद्युत उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए अत्याधुनिक ऑनलाईन शिकायत एवं निराकरण प्रणाली विकसित करने की योजना के संबंध में अधिकारियों से जानकारी ली। ऊर्जा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की घोषणा के अनुसार मोर बिजली मोबाईल ऐप के माध्यम से बिजली से संबंधी ऑनलाइन शिकायतों का निराकरण करने के संबंध में जानकारी दी।

अधिकारियों ने बताया कि विद्युत शिकायतें एवं निराकरण के लिए टोल फ्री नम्बर-1912 का उपयोग किया जा सकता है। मुख्य सचिव ने ऊर्जा विभाग के अधिकारियों से विद्युत शुल्क मद से बकाया राशि की वसूली सहित शासन के विभागों और उद्योगों से लंबित विद्युत शुल्क की वसूली के संबंध में विभागीय अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। बैठक में ऊर्जा विभाग एवं मुख्यमंत्री के सचिव अंकित आनंद भी मौजूद थे।

मुख्य सचिव ने किसानों की सुविधा के लिए नदी के किनारों में विद्युत लाइन की व्यवस्था, नवीन पॉवर प्लांट, ग्रामीण क्षेत्र में सेपरेट-एग्री फीडर और रीवेम्पड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम के संबंध में विस्तार से जानकारी ली। मुख्य सचिव ने ऊर्जा विभाग के अधिकारियों को विद्युतीकृत बसाहटों और मजरे टोलो में यदि कोई घर विद्युतीकरण से छूट गया है तो इसके लिए व्यापक कार्ययोजना बनाकर कार्य करने के निर्देश दिए है। इसी तरह से वित्त विभाग की समीक्षा के दौरान विभिन्न विभागांे द्वारा शासकीय राजस्व वसूली के लिए वाणिज्यिक कर, खनिज, आबकारी, जल संसाधन, परिवहन, राजस्व, स्टाम्प एवं पंजीयन सहित अन्य विभागों से आवश्यक समन्वय कर कार्य करने के निर्देश दिए है। बैठक में ऊर्जा विभाग, क्रेडा, छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड और वित्त विभाग के अधिकारी शामिल हुए।

विशेष लेख-न्याय के चार साल: छत्तीसगढ़ में और बढ़ेगा बिजली का उत्पादन

No comments Document Thumbnail

रायपुर। छत्तीसगढ़ में ऊर्जा उत्पादन के इतिहास में एक मील का पत्थर और स्थापित हो गया जब मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने 25 अगस्त को 1320 मेगावाट के नए पॉवर प्लांट लगाने का निर्णय लिया। वास्तव में यह छत्तीसगढ़ को बरसों बरस तक जीरो पॉवर कट स्टेट बनाए रखने की दिशा में ऐतिहासिक फैसला है। यह निर्णय इसलिये भी ऐतिहासिक है क्योंकि यह छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर जनरेशन कंपनी का सबसे बड़ा और सबसे आधुनिक संयंत्र होगा। इसकी स्थापना से छत्तीसगढ़ स्टेट जनरेशन कंपनी के स्वयं की विद्युत उत्पादन क्षमता बढ़कर 4300 मेगावाट हो जाएगी।



छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य है, जिसे जीरो पॉवर कट के रूप में जाना जाता है। यहां उपभोक्ताओं को 247 बिजली आपूर्ति हो रही है। किसी भी प्रदेश की तरक्की का सबसे बड़ा सूचक वहां के ऊर्जा की खपत को माना जाता है। छत्तीसगढ़ में ऊर्जा की खपत तेजी से बढ़ रही है। राज्य स्थापना के समय जहां प्रति व्यक्ति ऊर्जा खपत 300 यूनिट थी, वह आज बढ़कर 2044 यूनिट पहुंच चुकी है। भविष्य में ऊर्जा की मांग को देखते हुए राज्य सरकार ने बड़े और ऐतिहासिक फैसले लिये हैं।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्देश के बाद पॉवर जनरेशन कंपनी के कोरबा पश्चिम में 660-660 मेगावाट के दो सुपर क्रिटिकल नवीन विद्युत उत्पादन संयंत्र लगाने की कार्ययोजना बनाने पर कार्य प्रारंभ हो गया है। इस संयंत्र के निर्माण में 12915 करोड़ रुपए का व्यय अनुमानित है। इन दोनों इकाइयों को वित्तीय वर्ष 2029 और 2030 में पूर्ण करने का लक्ष्य है। राज्य स्थापना के बाद पहली बार इतनी क्षमता का विद्युत संयंत्र स्थापित किया जा रहा है। यह मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की दूरदर्शिता को दर्शाता है।

छत्तीसगढ़ की धरती में अकूत खनिज संसाधन हैं। कोयले के भंडार मामले में छत्तीसगढ़ देश में तीसरे नंबर पर है। इन प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग देशभर के पॉवर प्लांट में हो रहा है। परन्तु इसका लाभ इस धरती के निवासियों को नहीं मिल पाता है। अगर यहां के खनिज संसाधनों से संबंधित उद्योग यहीं स्थापित होते हैं तो यहीं के लोगों को इसका सीधा लाभ मिलता है।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की केबिनेट ने बिजली उत्पादन के क्षेत्र में दूसरा बड़ा फैसला पानी से बिजली बनाने के क्षेत्र में लिया है। केबिनेट में छत्तीसगढ़ राज्य जल विद्युत परियोजना (पंप स्टोरेज आधारित) स्थापना नीति 2022 को मंजूरी दी गई है। वर्तमान में जो जल विद्युत संयंत्र हैं, उनमें बांध में बारिश के पानी को एकत्रित किया जाता है और उसे टरबाइन में बहाकर बिजली पैदा की जाती है। इस पुराने तकनीक में पानी का इस्तेमाल केवल एकबार ही किया जाता है।

वर्तमान में नई पंप स्टोरेज आधारित जल विद्युत परियोजना तैयार की गई है, जिसमें एक ही पानी का इस्तेमाल कई बार किया जा सकेगा। इस तकनीक में बांध के ऊपर एक और स्टोरेज टैंक बनाया जाता है। दिन के समय सौर ऊर्जा से मिली सस्ती बिजली से इस टैंक में पानी स्टोरेज किया जाएगा और रात में उसे टरबाइन में गिराकर बिजली पैदा की जाएगी। यह पानी फिर से बांध में एकत्रित कर लिया जाएगा। इस तरह एक ही पानी का बार-बार इस्तेमाल किया जा सकेगा।

छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर जनरेशन कंपनी ने प्रदेश में ऐसे पांच स्थानों पर पंप स्टोरेज जल विद्युत गृह की स्थापना के लिए विस्तृत कार्ययोजना बना रही है। इन पांच स्थानों पर 7700 मेगावाट बिजली पैदा हो सकेगी। डीपीआर बनाने के लिए केंद्र सरकार की एजेंसी वैपकास (वाटर एंड पॉवर कंसल्टेंसी सर्विसेस लिमिटेड) के साथ 29 नवंबर को एमओयू किया गया है। राज्य में पम्प स्टोरेज आधारित जल विद्युत परियोजनाओं की स्थापना हेतु निवेश को प्रोत्साहन देने के लिए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में 6 सितम्बर को आयोजित केबिनेट की बैठक में छत्तीसगढ़ राज्य जल विद्युत परियोजना (पंप स्टोरेज आधारित) स्थापना नीति 2022 का अनुमोदन किया गया।

इन दोनों फैसलों से यहां के निवासियों के लिये रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। संयंत्र की स्थापना से लेकर उसके संचालन के लिये जहां हजारों लोगों को सीधा रोजगार मिलेगा। इस संयंत्र की स्थापना अत्याधुनिक तकनीक से की जाएगी, जिसमें बहुत कम प्रदूषण होगा। इससे भविष्य में ऊर्जा की बढ़ती मांग पूरी हो सकेगी। इस फैसले से प्रदेश में उद्योग से लेकर कृषि क्षेत्र में प्रगति के नए पंख लगेंगे और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को तीव्र गति मिलेगी। यह फैसला आने वाले बरसों में छत्तीसगढ़ के लिये मील का पत्थर होगा।

विशेष लेख : न्याय के चार साल: सौर ऊर्जा के उपयोग में छत्तीसगढ़ देश में अग्रणी

No comments Document Thumbnail

रायपुर। किसानों की आमदनी बढ़ाने में सौर ऊर्जा के उपयोग में छत्तीसगढ़ देश के अग्रणी राज्यों में शुमार है। कृषि के साथ अन्य क्षेत्रों में सोलर एनर्जी के इस्तेमाल का दायरा राज्य में लागतार बढ़ता जा रहा है। सौर ऊर्जा का उपयोग पेयजल और सुदूर अंचलों के गांवों, अस्पतालों, स्कूलों, छात्रावासों में विद्युत व्यवस्था में भी हो रहा है, इससे मूलभूत सुविधाओं को मजबूती मिल रही है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के प्रयासों के तहत किसानों की आमदनी बढ़ाने के उद्देश्य से सोलर सिंचाई पम्प लगाने के काम को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। इस दिशा में तेजी से काम हुआ और हाल ही में देश में सर्वाधिक सोलर पम्प स्थापित करने और ऊर्जा संरक्षण के लिए छत्तीसगढ़ राज्य अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण को राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।



छत्तीसगढ़ में ग्लोबल वार्मिंग की चुनौतियों से निपटने के लिए सुराजी गांव योजना के साथ सौर ऊर्जा के इस्तेमाल को प्रोत्साहित किया जा रहा है। सौर ऊर्जा के उपयोग के लिए आधुनिक तकनीक के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। नई उद्योग नीति में भी सौर ऊर्जा से विद्युत उत्पादन से जुड़ी इकाईयों की स्थापना को प्राथमिकता की श्रेणी में रखा गया है। राज्य के सुदूर वनांचल क्षेत्रों में रहने वाले किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार के लिए सौर ऊर्जा खासी मददगार साबित हो रही है। राज्य में ऐसे कई हिस्से हैं जहां परम्परागत तरीके से विद्युत की व्यवस्था नहीं हो सकी है, उन क्षेत्रों के किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने में सोलर पम्प गेम चंेंजर साबित हो रहे हैं। सौर सुजला योजना के तहत प्रदेश में स्थापित किए गए सोलर सिंचाई पंप के उपयोग से पिछले पांच वर्षों में 6.55 लाख टन कार्बन उत्सर्जन में कमी का अनुमान है।



छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा सोलर एनर्जी से कृषि के क्षेत्र में बड़े बदलाव लाने के प्रयासों के साथ क्रेड़ा द्वारा सोलर विद्युत केन्द्र, सोलर लाइट, वनांचलों के गांवों में पेयजल उपलब्ध कराने में भी सोलर पम्पों का उपयोग किया जा रहा है, जल जीवन मिशन सहित राज्य शासन की योजना के तहत प्रदेश में 10 हजार 629 सोलर पम्प स्थापित कर 4 लाख 80 हजार से अधिक परिवारों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है। राज्य के 1480 स्वास्थ्य केन्द्रों में प्रकाश की व्यवस्था के लिए 4.70 मेगावाट के ऑफ ग्रिड सोलर पॉवर प्लांटों की स्थापना की गई है। जिससे शासकीय स्वास्थ्य केन्द्रों अस्पतालों में प्रकाश की व्यवस्था के साथ साथ जीवन रक्षक मशीनें और वैक्सिन को सुरक्षित रखने के लिए फ्रीजर के लिए विद्युत की आपूर्ति की जा रही है। इस उपलब्धि के लिए क्रेडा को अंतर्राष्ट्रीय अवार्ड से सम्मानित किया जा चुका है।

सौर सुजला योजना में 1.17 लाख से अधिक सोलर सिंचाई पंप स्थापित 

 क्रेडा द्वारा राज्य में पिछले चार वर्षो में प्रदेश में 71 हजार 753 सोलर कृषि पम्पों की स्थापना की गई। सोलर सिंचाई पम्पों से लगभग 86,104 हेक्टयेर रकबा सिंचित हुआ है। इन्हें मिलाकर प्रदेश में अब तक 3 एवं 5 हार्स पॉवर के एक लाख 17 हजार से अधिक सोलर सिंचाई पम्पों की स्थापना हो चुकी है। जिससे लगभग एक लाख 17 हजार हेक्टेयर से अधिक की भूमि सिंचित हुई हो रही है। इस योजना से 1 लाख 26 हजार से अधिक किसान लाभान्वित हो रहे हैं।



लघु और सीमांत किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के लिए सौर सिंचाई सामुदायिक परियोजना सतही जल स्त्रोत के निकट बनायी जा रही है। सतही जल के उपयोग से भू-जल का दोहन में भी कमी आएगी। पिछले चार वर्षों में 16 सौर सामुदायिक सिंचाई परियोजनाओं की स्थापना की गई, जिसके माध्यम से लगभग 911 किसानों की 976.17 हेक्टेयर भूमि में सिचाई सुविधा का लाभ मिल रहा है। इन परियोजनाओं में 59 सोलर सिंचाई पम्पों की स्थापना की गई है। इन्हें मिलाकर प्रदेश में अब तक 228 सौर सामुदायिक सिंचाई परियोजना में 334 सोलर सिंचाई पम्प स्थापित किये गए हैं, इसके माध्यम से 2639 किसानों की 2749 हेक्टेयर भूमि में सिंचाई हो रही है।

सौर सुजला में अधिकतम 2 लाख रूपए का अनुदान

सौर सुजला योजना में किसानों को तीन एवं पांच हॉर्स पावर क्षमता के सोलर सिंचाई पंपों की स्थापना के लिए राज्य शासन द्वारा अनुदान अधिकतम 2 लाख रूपए तक का अनुदान दिया जा रहा है। तीन एचपी के पंप की स्थापना के लिए अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजातियों के लिए हितग्राहियों को 7 हजार रूपए, अन्य पिछड़ा वर्ग के हितग्राही को 12 हजार रूपए तथा सामान्य वर्ग के हितग्राही को 18 हजार रूपए अंशदान देना होता है। इसी तरह 5 हॉर्स पावर तक के सिंचाई पंप के स्थापना के अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के हितग्राही को 10 हजार रूपए


अन्य पिछड़ा वर्ग के हितग्राही को 15 हजार रूपए तथा सामान्य वर्ग के हितग्राही को 20 हजार रूपए अंशदान देना होता है। शेष राशि राज्य शासन द्वारा अनुदान के रूप में दी जाती है। अकेले प्रदेश में स्थापित सोलर पंपों से पिछले 5 वर्षों में 6.55 लाख टन कार्बन उत्सर्जन में कमी हुई है। सौर समुदायिक सिंचाई योजना के लिए लघु एवं सीमांत किसानों के ऐसे समूह जिनके पास कम से कम 10 हेक्टेयर कृषि भूमि है। प्रति हेक्टेयर 1 लाख 80 हजार रूपए का अनुदान दिया जा रहा है। इसी तरह 4 किलोवॉट मॉड्यूल सहित 5 टन स्टोरेज क्षमता के सोलर कोल्ड स्टोरेज की स्थापना के लिए 4 लाख रूपए प्रति यूनिट अनुदान दिया जा रहा है।

चार हजार 970 गौठानों में सोलर सिंचाई पंप स्थापित

पिछले चार वर्षों में सिंचाई सुविधा के विस्तार के लिए नदी नालों के निकट स्थित खेतोें को सिंचित करने के लिए 59 वृहद सोलर पम्प स्थापित किये गए हैं। जिनके माध्यम से 976  हेक्टेयर सामुदायिक कृषि रकबा सिंचित हो रहा है। इसके अलावा सुराजी गांव योजना नरवा, गरवा, घुरवा, बाड़ी के तहत 4970 गौठानों में सोलर पम्प स्थापित कर पशुओं के लिए पेयजल और चारागाहों में सिंचाई सुविधा की व्यवस्था की गई है। 

सोलर पेयजल योजना के अंतर्गत पिछले चार वर्षों में पहुंच विहीन गांवों में 6093 सोलर ड्यूल पम्प स्थापित कर 3 लाख से अधिक परिवारों को 24 घंटे शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके अलावा जल जीवन मिशन के अंतर्गत 4536 ड्यूल पम्प स्थापित कर ग्रामीण अंचलों के घरों में नल कनेक्शन के माध्यम से शुद्ध पेयजल की आपूर्ति की व्यवस्था की गई है। इस योजना में 12 मीटर एवं 9 मीटर ऊंचाई पर 10 लीटर क्षमता की पानी टंकी स्थापित कर घरों में पेयजल की आपूर्ति की जा रही है। इस योजना के अंतर्गत एक लाख  80 हजार परिवार लाभान्वित हो रहे हैं।

एक लाख 38 हजार से अधिक घरों का सोलर विद्युतीकरण

पिछले चार वर्षों में  गांवों और कस्बों के चौक-चौराहों, हाट बाजारों में 3155 सोलर हाईमास्ट लाईट स्थापित की गई हैं। इन्हें मिलाकर राज्य में 3924 सोलर हाई मास्ट की स्थापना हो चुकी है। इसी तरह दूरस्थ पहुंच विहीन क्षेत्रों में जहां बिजली का तार खींचकर बिजली नहीं पहुंचाई जा सकती, वहां के गांवों और मजरे टोलों के 80 हजार 859 घरों में सोलर लाईट के माध्यम से प्रकाश की व्यस्था की गई है। इन्हें मिलाकर सोलर संयंत्रों के माध्यम से 920 गांवों के एक लाख 38 हजार से अधिक घरों का सोलर विद्युतीकरण किया जा चुका है।

भवनों की छत पर 2232 सौर संयंत्र स्थापित

वर्ष 2022-23 में सोलर पंप के माध्यम से नदी, एनीकटों में उपलब्ध जल से तालाबों को भरने की योजना को इंदिरा गांव गंगा योजना के रुप में लागू किया गया है। इस योजना में चार वर्षों में 21 गांवों के 33 तालाबों को भरने का काम पूरा किया गया। प्रदेश में 326 सौर ऊर्जा आधारित जल शुद्धिकरण संयंत्र की स्थापना की गयी है। राज्य के शासकीय एवं निजी भवनों की छत में ग्रिड कनेक्टेड 196 तथा ऑफ ग्रिड कनेक्टेड 2232 सौर संयंत्रों की स्थापना की जा चुकी है। इनके अलावा 433 मेगावॉट क्षमता के 37 वृहद स्तर पर ग्रिड कनेक्टेड सोलर पावर प्लांट स्थापित किए गये हैं। 

राज्य के ऐसे स्थानों में जहां नियमित बिजली आपूर्ति संभव नहीं हो पाती या जहां वोल्टेज फ्ल्कचुएशन की स्थिति बनी रहती है, वहां सब्जियों, फल-फूलों के सुरक्षित भंडारण के लिए 270 किलोवॉट क्षमता के 65 सोलर कोल्ड स्टोरेज स्थापित किए गए हैं। राज्य शासन के प्रोत्साहन से प्रदेश में सौर ऊर्जा का उपयोग बढ़ रहा है। सौर सुजला योजना किसानों के मध्य काफी लोकप्रिय हो रही है। सोलर ऊर्जा के उपयोग के लिए राज्य शासन द्वारा विभिन्न योजनाओं में अनुदान दिया जा रहा है। आने वाले समय में छत्तीसगढ़ इस क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित करेगा।

 

मुख्यमंत्री ने दिये 1320 मेगावाट के नए बिजली संयंत्र लगाने के निर्देश

No comments Document Thumbnail

रायपुर। छत्तीसगढ़ में 1320 मेगावाट के नए बिजली संयंत्र की स्थापना के निर्देश माननीय मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने दिए हैं। यह छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर जनरेशन कंपनी का सबसे बड़ा और सबसे आधुनिक संयंत्र होगा। इसकी स्थापना से छत्तीसगढ़ स्टेट जनरेशन कंपनी के स्वयं की विद्युत उत्पादन क्षमता बढ़कर 4300 मेगावाट हो जाएगी। राज्य स्थापना के बाद पहली बार इतनी क्षमता का विद्युत संयंत्र स्थापित किया जाएगा।



मुख्यमंत्री ने अपने निवास में पॉवर कंपनियों की समीक्षा बैठक ली गई जिसके अंतर्गत भविष्य में विद्युत की मांग की आपूर्ति के लिए आवश्यक विद्युत उपलब्धता की समीक्षा की गई। वर्ष 2030-31 तक अपेक्षित विद्युत मांग में वृद्धि की आपूर्ति हेतु नवीन विद्युत संयंत्र की आवश्यकता होगी। माननीय मुख्यमंत्रीजी ने राज्य की विद्युत उत्पादन कंपनी को कोरबा पश्चिम में उपलब्ध भूमि पर 2x660 मेगावॉट सुपर क्रिटीकल नवीन विद्युत उत्पादन संयंत्र की स्थापना समुचित कार्रवाई के निर्देश दिये। 

विद्युत उत्पादन कंपनी के प्रबंध निदेशक एनके बिजौरा ने बताया गया कि यह सुपर क्रिटिकल संयंत्र  अत्याधुनिक तकनीक से स्थापित की जाएगी। इससे एक ओर बिजली की  उपलब्ध सुनिश्चित होगीवहीं रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। उन्होंनो बताया कि कोरबा पश्चिम में संयंत्र स्थापना हेतु स्वयं की भूमि उपलब्ध है । साथ ही अपेक्षित परियोजना स्थल पर कोयले की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए वर्तमान चलित उत्पादन संयंत्रों के लिए कंवेयर बेल्ट की सुविधा भी उपलब्ध है। 



माननीय मुख्यमंत्रीजी के निर्देश उपरांत संयंत्र स्थापना के लिए आवश्यक स्वीकृतियां, कोयला आबंटन, जल आबंटन सहित विस्तृत डी.पी.आर इत्यादि तैयार करने का कार्य विद्युत उत्पादन कंपनी द्वारा त्वरित गति से किया जावेगा जिससे वर्ष 2030-31 तक अपेक्षित विद्यत आपूर्ति संभव हो सके। कन्वेयर बेल्ट से कोयला उपलब्धता, स्वयं की भूमि उपलब्धता तथा सूपर क्रिटिकल प्लांट होने के कारण नवीन प्रस्तावित प्लांट से उत्पादित विद्युत की दर सस्ती होना अपेक्षित है। नवीन उत्पादन संयंत्र की स्थापना से स्थानीय रोजगार का विकास भी संभव होगा ।

पीएम मोदी ने किया योजना का शुभारंभ, सीएम बघेल भी जुड़े

No comments Document Thumbnail

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विद्युत मंत्रालय के प्रमुख कार्यक्रम पुनर्विकसित वितरण क्षेत्र योजना का आज शुभारंभ किया। इसका उद्देश्य वितरण कंपनियों-डिस्कॉम और बिजली विभागों की परिचालन क्षमता तथा वित्तीय स्थिरता में सुधार लाना है। मोदी ने कार्यक्रम के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उज्ज्वल भारत, उज्ज्वल भविष्य - पावर एट द रेट दो हजार सैंतालीसयोजना का उद्धाटन भी किया।


 

छह दिवसीय यह कार्यक्रम आजादी के अमृत महोत्सव के तहत आयोजित किया गया, जिसका आज समापन हो गया। इसमें विद्युत क्षेत्र के पिछले आठ वर्षां की उपलब्धियों को दर्शाया गया। कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने पांच हजार दो सौ करोड़ रुपए से अधिक की एनटीपीसी की विभिन्न हरित ऊर्जा परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण किया।

इधर, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ‘‘उज्जवल भारत, उज्जवल भविष्य - पावर, दो हजार सैंतालीस’’ के समापन कार्यक्रम में वर्चुअल रूप से शामिल हुए।  इस बीच, मुंगेली, राजनांदगांव और बलौदाबाजार-भाटापारा सहित राज्य के कई अन्य जिलों में आज बिजली महोत्सव का आयोजन किया गया। इस दौरान आने वाले साल में बिजली के क्षेत्र में नये कीर्तिमान स्थापित करने की बात कही गई। वहीं, आजादी के अमृत महोत्सव के तहत रायपुर मेडिकल कॉलेज के सभागार में आज ऊर्जा महोत्सव कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं से आमजनों को अवगत कराया गया।

Don't Miss
© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.