Media24Media.com: लखपति दीदी

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बिहान समूह से मिली नई पहचान : लखपति दीदी बनने की राह पर अग्रसर सरिता बाई

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की मंशा के अनुरूप छत्तीसगढ़ राज्य में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में ‘‘बिहान‘‘ योजना के तहत उल्लेखनीय कार्य हो रहा है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत जशपुर जिले की महिलाओं को स्व-सहायता समूहों से जोड़ा गया है, जिससे वे आर्थिक रूप से सशक्त होकर अपने और अपने परिवार के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं।

इसी क्रम में जशपुर जिले के मनोरा विकासखंड के ग्राम चड़िया की सरिता बाई आज लखपति दीदी बनने की राह पर हैं। उन्होंने ‘‘बिहान‘‘ योजना से जुड़कर पहले सीएलएफ के माध्यम से सीएफ राशि प्राप्त की, और बाद में प्रधानमंत्री मुद्रा लोन योजना के तहत जशपुर की बड़ौदा बैंक से एक लाख रुपये का ऋण लेकर ईंट निर्माण का कार्य शुरू किया।

सरिता बाई बताती हैं कि समूह में शामिल होने के पहले वे आर्थिक रूप से बेहद कमजोर थीं। घर की चारदीवारी तक सीमित जीवन में बदलाव तब आया, जब उन्होंने स्व-सहायता समूह से जुड़ने का निर्णय लिया। समूह से उन्हें न केवल शासन की योजनाओं की जानकारी मिली, बल्कि आर्थिक सहयोग भी प्राप्त हुआ।

ईंट निर्माण कार्य की शुरुआत उन्होंने समूह से 60 हजार रुपये जोड़कर की। वर्तमान में वे कुल 1.6 लाख रुपये के निवेश से 70 हजार ईंटों का निर्माण कर चुकी हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना सहित अन्य निर्माण कार्यों के चलते ईंट की बढ़ती मांग का लाभ उन्हें मिल रहा है। वे बताती हैं कि इस कार्य से उन्हें सालाना दो लाख रुपये तक की आमदनी हो रही है। सरिता ने यह भी बताया कि मुद्रा लोन लेने से पूर्व उन्हें साधन संस्था द्वारा आवश्यक प्रशिक्षण भी प्रदान किया गया था, जिससे कार्य संचालन में उन्हें कोई कठिनाई नहीं हुई। वे पिछले तीन वर्षों से यह व्यवसाय सफलता पूर्वक कर रही हैं और अब अपने व्यवसाय को और विस्तार देने की योजना बना रही हैं। सरिता बाई की यह सफलता न केवल उनकी मेहनत का परिणाम है, बल्कि यह शासन की योजनाओं की सही दिशा में क्रियान्वयन और महिला सशक्तिकरण की मिसाल भी है।

छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन में उत्कृष्ट कार्य करने वाली दीदियों का सम्मान

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चार लाख से अधिक दीदियों को लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य

रायपुर. अम्बिकापुर में ‘‘मोर आवास मोर अधिकार’’ कार्यक्रम के अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन अंतर्गत विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाली स्व-सहायता समूहों की दीदियों को सम्मानित किया गया। केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं कृषि मंत्री  शिवराज सिंह चौहान तथा मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय द्वारा इन महिलाओं को प्रशस्ति-पत्र एवं स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया।

उल्लेखनीय कार्य करने वाली स्व-सहायता समूहों की दीदियों को सम्मानित किया

इस अवसर पर सरगुजा जिले के विकासखण्ड लखनपुर की ग्राम पंचायत लोसंगी निवासी बीसी सखी श्रीमती बालेश्वरी यादव को पाँच ग्राम पंचायतों के जरूरतमंद हितग्राहियों को स्थानीय स्तर पर बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा अब तक 11.24 करोड़ रुपये के वित्तीय लेनदेन करने हेतु सम्मानित किया गया। इसी प्रकार ग्राम पंचायत केवरी की जेंडर रिसोर्स पर्सन श्रीमती अम्बे दास को महिला संगठन के माध्यम से घरेलू हिंसा के 37 प्रकरणों का समाधान करने एवं मानव तस्करी की शिकार 3 युवतियों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित कराने के लिए सम्मानित किया गया।

लखपति दीदी के रूप में सम्मानित 

विकासखण्ड अम्बिकापुर के ग्राम मेंड्राकला की संजीवनी स्व-सहायता समूह की सदस्य श्रीमती निर्मला एक्का द्वारा समूह से ऋण लेकर सेण्ट्रिंग प्लेट एवं मिक्सर व्यवसाय प्रारंभ किया गया। वे वर्तमान में प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत निर्मित 10 घरों को सेण्ट्रिंग सामग्री उपलब्ध करा रही हैं। उनकी वार्षिक आय एक लाख रुपये से अधिक होने के कारण वे  लखपति दीदी के रूप में सम्मानित की गईं। इसी पंचायत की चंदा स्व-सहायता समूह की श्रीमती बबिता यादव द्वारा भी समूह से ऋण लेकर सीमेंट एवं गिट्टी व्यवसाय प्रारंभ किया गया। उनके द्वारा पंचायत एवं आसपास के क्षेत्र में भवन निर्माण में सक्रिय भागीदारी दी जा रही है। उन्होंने ऋण की समयबद्ध चुकौती के साथ व्यवसाय में आत्मनिर्भरता स्थापित की है।

जिला मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर अंतर्गत राधा महिला स्व-सहायता समूह की श्रीमती चांदनी सिंह को बैंक लिंकेज एवं सामुदायिक निवेश निधि के माध्यम से मुर्गी पालन एवं सब्जी उत्पादन कार्य प्रारंभ कर वार्षिक 2.5 लाख रुपये की आय अर्जित करने हेतु सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री श्री चौहान द्वारा विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित हितग्राहियों को हितग्राहीमूलक सामग्री का वितरण भी किया गया। शाकम्भरी योजना के अंतर्गत ग्राम कोटिया (विकासखण्ड अम्बिकापुर) के कृषक बृज कुमार एवं मोहरलाल सिंह को दो एच.पी. के पम्प प्रदान किए गए। इस अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, छत्तीसगढ़ शासन के वित्त मंत्री  ओ.पी. चौधरी, कृषि मंत्री  राम विचार नेताम, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री  श्याम बिहारी जायसवाल, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े सहित राज्यसभा सांसद, लोकसभा सांसद, विधायकगण, निगम-मंडल अध्यक्षगण एवं वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारीगण उपस्थित थे।

लखपति दीदी पहल: विश्रामपुरी की बिहान से कोंडागांव के विश्रामपुरी की इश्वरी बनी लखपति दीदी

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रायपुर : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को लेकर शुरू की गई लखपति दीदी पहल ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का एक उल्लेखनीय माध्यम बन रही है। यह पहल राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत महिलाओं को आजीविका गतिविधियों से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने और उनकी वार्षिक आय को एक लाख रुपये से अधिक तक पहुंचाने के उद्देश्य से शुरू की गई थी। इस पहल ने देशभर में हजारों महिलाओं की जिंदगी बदली है उन्ही में से एक हैं कोंडागांव जिले के विश्रामपुरी की इश्वरी मरकाम।


समूह से जुड़कर सफर की शुरुआत

    कोण्डागांव जिले के विश्रामपुरी की इश्वरी मरकाम आज बिहान से जुड़कर अन्य ग्रामीण महिलाओं के लिए एक मिसाल बनी है। इश्वरी 2017 में समूह से जुड़ी हैं और आजीविका के छोटे-छोटे गतिविधियां कर आज अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ की है। इश्वरी अपने पति और दो बच्चों के साथ छोटा परिवार में रहती हैं। उनके पति कृषि कार्य करते हैं, लेकिन परिवार की जरूरतों और बच्चों की पढ़ाई के खर्च पूरे करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। इस कठिन परिस्थिति से उबरने के लिए इश्वरी ने महिला स्व-सहायता समूह का सहारा लिया और अपने जीवन को बदलने की ठानी। इश्वरी उन दिनों को याद करते हुए बताई की उस समय बड़ी मुश्किल से हमारा घर चलता था। परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए हम महीनों से पैसे इक्कठे करते थे तब जाकर हमारी छोटी-छोटी जरूरतों को पूरा कर पाते थे। इश्वरी ने बताया की बिहान से जुड़ने के बाद मेरे अन्दर एक आत्मविश्वास जगा है, आज मैं अपनी बात सबके बीच रख पाती हूँ।

    समूह से जुड़ने के बाद इश्वरी ने सीआईएफ की राशि का उपयोग कर विभिन्न आजीविका गतिविधियों की शुरुआत की। उन्होंने कृषि कार्य, फैंसी दुकान संचालन और स्कूलों में मध्यान्ह भोजन बनाने का कार्य कर रही हैं। इसके अलावा वे बीसी सखी के रूप में भी सेवाएं प्रदान कर रही हैं।

आर्थिक स्थिति में हुआ सुधार

    इश्वरी आज अपनी मेहनत और लगन से अलग-अलग स्रोतों से एक लाख रुपये से अधिक वार्षिक आय अर्जित कर रही है। इश्वरी को कृषि कार्य से 35 हजार रुपए, फैंसी दुकान से 60 हजार और मध्यान्ह भोजन योजना से 24 हजार रुपए तक की आमदनी हो रही है। साथ ही उन्हें छत्तीसगढ़ शासन के महतारी वंदन योजना से भी हर महीने एक हजार रूपये प्राप्त हो रहा है। आज इन सभी आय स्रोतों से उनकी आर्थिक स्थिति पहले से कहीं बेहतर हो गई है। अब उनके बच्चों की पढ़ाई में आर्थिक तंगी नहीं आती और परिवार का जीवन स्तर पहले से अधिक बेहतर हो गया है।

महिला सशक्तिकरण की दिशा में कदम

    इश्वरी मरकाम की सफलता महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है। उनकी सफलता यह साबित करती है कि जब महिलाओं को सही अवसर और संसाधन मिलते हैं, तो वे अपने जीवन को आत्मनिर्भरता और सफलता की ओर ले जा सकती हैं।
इश्वरी कहती हैं, “बिहान योजना ने मुझे और मेरे जैसी कई महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया है। अब मैं अपने परिवार की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम हूं और मेरे बच्चों की पढ़ाई में किसी भी प्रकार की बाधा नहीं है।” उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय को इस पहल के लिए धन्यवाद दिया,  जो ग्रामीण महिलाओं के जीवन को सशक्त और समृद्ध बना रही है।

लखपति दीदी दिव्या निषाद गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रपति भवन में आयोजित एट होम रिसेप्शन में होगी शामिल

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 रायपुर : राजनांदगांव जिले के ग्राम कुसमी की लखपति दीदी दिव्या निषाद 26 जनवरी 2025 को गणतंत्र दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति भवन नई दिल्ली में आयोजित एट होम रिसेप्शन में शामिल होंगी तथा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु उन्हें सम्मानित करेंगी। लखपति दीदी दिव्या निषाद ने विपरीत और संघर्षपूर्ण स्थिति में भी हार नहीं मानी और राष्ट्रीय आजीविका मिशन बिहान से जुड़कर सफलता की नई ईबारत लिखी है।  दिव्या निषाद ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि यह सम्मान कि बात है कि लखपति दीदी के तौर पर राष्ट्रपति भवन जाने का अवसर मिल रहा है। उन्होंने बताया कि यह जानकर बहुत अच्छा महसूस हो रहा है और घर में सभी खुश हैं। 


 
लखपति दीदी दिव्या निषाद ने बताया कि उनके परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी और वर्ष 2021 में कोविड-19 की वजह से उनके पति की आकस्मिक मृत्यु हो गई। उन्होंने बताया कि गरीबी की स्थिति थी और उन्हें किसी भी तरह का अनुभव और ज्ञान नहीं था। पति की आकस्मिक मृत्यु के दुख ने परिवार को अंदर तक झकझोर दिया। ऐसे समय में अपने परिवार की जिम्मेदारी उठाने के लिए तथा अपने बच्चों के पालन-पोषण के लिए समूह की दीदियों से मुझे हिम्मत मिली और मैंने कुछ कार्य करने का निर्णय लिया।
 
लखपति दीदी दिव्या निषाद ने बताया कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान से जुडऩे के बाद मेरे जीवन में परिवर्तन आया और आज बिहान की बदौलत मेरा घर फल-फूल रहा है। अंतर्मुखी स्वभाव होने के कारण बिहान से जुडऩे से आत्मविश्वास बढ़ा। प्रशिक्षण के दौरान बहुत कुछ सीखने को मिला। उन्होंने बताया कि बैंक सखी, बैंक मित्र, पुस्तक लिखने का कार्य, समूह के अध्यक्ष एवं सचिव के कार्य तथा छोटे व्यापार प्रारंभ करने का कार्य सीखने लगी। उन्होंने बताया कि वह जय मां अम्बे स्वसहायता समूह से जुड़ी हुई हैं। समूह में कार्य करने के दौरान आत्मविश्वास बढ़ा और समूह के माध्यम से ऋण लेकर छोटा सा व्यापार प्रारंभ किया। उन्होंने बताया कि उनकी सालाना आय 4 लाख रूपए से अधिक है और वह बहुआयामी कार्य कर रही हैं। बैंक सखी, बैंक मित्र के अलावा उनकी ग्राम भर्रेगांव में साड़ी एवं बच्चों के रेडिमेड कपड़ों की दुकान है। उन्होंने बताया कि समूह से ऋण लेकर ही उन्होंने अपने घर में ही किराने की दुकान भी प्रारंभ की है। अब उन्होंने अपना पक्के का मकान बना लिया है। आजीविका मूलक गतिविधियों से जुड़ते हुए सिलाई एवं अन्य कार्य कर रही हैं। 
 
उल्लेखनीय है कि 26 जनवरी 2025 को गणतंत्र दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति भवन नई दिल्ली में आयोजित एट होम रिसेप्शन के लिए देश भर से 10 लखपति दीदियों का चयन किया गया है। जिसमें से राजनांदगांव जिले से लखपति दीदी श्रीमती दिव्या निषाद का चयन किया गया है। केन्द्र शासन की लखपति दीदी योजना महत्वपूर्ण पहल है। जिसके तहत महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त करने के लिए कार्य किया जा रहा है। इस योजना के तहत महिलाओं को अपना व्यवसाय प्रारंभ करने के लिए 5 लाख रूपए तक का ऋण बिना ब्याज के दिया जाता है।

बिहान से जुड़कर रविकुमारी बनी लखपति दीदी, आर्थिक मजबूती मिलने से परिवार की बनी धुरी

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 बिलासपुर : राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़कर महिलाएं सफलता की इबारत लिख रही हैं। राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन योजना से जुड़कर आज जिले की ग्रामीण महिलाओं ने स्वावलंबन की मिशाल पेश कर रही है। इसी के तहत मां सहोद्रा स्व सहायता समूह की उड़गन की रविकुमारी दीदी ने कुछ अलग करने की सोची एवं समूह के माध्यम से सिलाई, सब्जी बाड़ी, ई रिक्शा, सब्जी बिजनेस और थाल पोस बनाने का कार्य करना प्रारम्भ की। इन गतिविधियों से रविकुमारी आज लखपति दीदी बन गई है। वे आज आत्मनिर्भर है। स्वास्थ्य शिक्षा एवं सामाजिक स्थिति में काफी सुधार हुआ है। समूह के अध्यक्ष के रुप में रवि कुमारी टंडन अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दे पा रही है।


बिल्हा ब्लॉक के ग्राम उड़गन की लखपति दीदी रविकुमारी टंडन ने बताया कि इस योजना से अब वह न केवल आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर है बल्कि योजना से मिली राशि का उपयोग करते हुए वे स्वयं का व्यवसाय अपने घर से ही कर रही है। वे कहती है कि स्व सहायता समूह से जुड़ने के बाद महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ा है और इस माध्यम से वे बहुत कुछ सीख रहीं है। जानकारी मिलने के बाद स्व रोजगार स्थापित करने के संबंध में भी मार्गदर्शन मिला। योजना के तहत ऋण राशि स्वीकृत की गई, जिससे उसे अपना व्यवसाय स्थापित करने में मदद मिली। अब उसका परिवार आर्थिक रूप से सशक्तिकरण की ओर बढ़ रहा है।

रविकुमारी अपने बीते हुए दिनों के दिक्कतों को बताते हुए कहती है कि वे पहले केवल कृषि और मजदूरी का कार्य करती थी। एक वर्ष किसानी करने से केवल उनको सालाना 55 हजार ही कमाई हो पाता था जिससे उनके बच्चों के पढ़ाई और घर में आमदनी की तंगी बनी रहती थी। लेकिन समूह से जुड़ने के बाद 3 लाख तक का बैंक से लोन लेकर स्वयं का व्यवसाय अपने घर में ही स्थापित कर लिया है। रविकुमारी अब कृषि कार्याे के साथ ही घर पर ही सब्जी बाड़ी, सिलाई, सब्जी बिजनेस, थाल पोस बना कर घर पर ही आमदनी कमा रही है। उन्होंने ई रिक्शा भी लिया है इन सभी कार्याे से वे अपने परिवार की आर्थिक स्थिति में अपनी सहभागिता निभा रहीं है। उनका कृषि कार्य में 55 हजार रूपए, सिलाई कार्याे में 36 हजार रूपए, सब्जी बाड़ी से 24 हजार रूपए, थाल पोस बनाने में 15 हजार रूपए, सब्जी बिजनेस में 1 लाख 80 हजार रूपए एवं ई रिक्शा से 1 लाख 20 हजार रूपए कर पूरे साल का परिवार 4 लाख 43 हजार रूपए आमदनी कमा रहा है।

रविकुमारी कहती है कि केन्द्र एवं राज्य सरकार की महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की पहल उन जैसी सभी महिलाओं के लिए वरदान साबित हुआ है। वे अपने परिवार को स्वयं के रोजगार से आर्थिक तंगी से उबार रही है और अपने आस पास के लिए मिशाल साबित हो रही है। रवि कुमारी ने योजना के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का तहे दिल से आभार और धन्यवाद प्रकट किया।

विशेष लेख : लखपति दीदी योजना : स्वावलंबी महिलाओं का सफर - झलक महिला स्वसहायता समूह की प्रेरणादायक यात्रा

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बेमेतरा। ज़िले में महिलाओं को स्वावलंबी और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अद्वितीय प्रयास किए जा रहे हैं। इस दिशा में, लखपति दीदी योजना के तहत महिलाओं को एक मजबूत आधार प्रदान किया जा रहा है, ताकि वे वित्तीय और सामाजिक रूप से सक्षम बन सकें। ज़िला महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से किए जा रहे इन प्रयासों का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। झलक महिला स्वसहायता समूह। यह समूह न केवल आर्थिक सशक्तिकरण का प्रतीक है, बल्कि सामुदायिक विकास और आत्मनिर्भरता की ओर एक प्रेरणादायक कदम भी है।

शुरुआत और प्रशिक्षण

झलक झंकार महिला स्वसहायता समूह की अध्यक्ष, श्रीमती गायत्री सोनी, बताती हैं कि समूह की यात्रा अगस्त 2024 के अंत में शुरू हुई जब ज़िला प्रशासन द्वारा कलेक्टर की उपस्थिति में समूह को मशीन से रूई से फूलबाती बनाने का प्रशिक्षण दिया गया। यह प्रशिक्षण महिलाओं के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। इसके तहत न केवल तकनीकी प्रशिक्षण प्रदान किया गया, बल्कि आर्थिक सहायता भी दी गई, जिससे महिलाएं कच्चामाल और मशीनें खरीद सकीं।

प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को फूलबाती बनाने की विधि सिखाई गई, जो एक सरल प्रक्रिया होते हुए भी आर्थिक रूप से लाभदायक हो सकती है, विशेष रूप से त्योहारों के मौसम में। महिलाएं अपने दैनिक घरेलू कामों को निपटाने के बाद, मशीन से फूलबाती बनाती हैं, जिससे उनकी आय में वृद्धि हो रही है। इस योजना ने उन महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का एक ठोस रास्ता प्रदान किया है, जो पहले केवल घरेलू कार्यों तक सीमित थीं।

आर्थिक सशक्तिकरण और विपणन

समूह की महिलाओं ने प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता का सही उपयोग करते हुए अपना काम शुरू किया। उन्होंने कच्चा माल ख़रीदा और फूलबाती बनाने का काम तेज़ी से शुरू कर दिया। दिवाली का त्यौहार नज़दीक है और इस अवसर को भुनाने के लिए महिलाएं पूरी लगन से काम कर रही है।

फूलबाती की बढ़ती मांग को देखते हुए, स्थानीय बाजार से उन्हें अच्छे ऑर्डर मिलने लगे। इसके साथ ही, समूह ने स्थानीय स्तर पर भी मार्केटिंग शुरू की, जिससे उनकी आमदनी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। ज़िला प्रशासन के अधिकारियों ने भी उनकी प्रोडक्ट्स को खरीदा, जिससे उन्हें और प्रोत्साहन मिला। इस प्रकार, समूह की महिलाएं न केवल घरेलू कामों को निभा रही थीं, बल्कि समाज में अपनी आर्थिक स्थिति को भी सुधार रही है।

आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम

फूलबाती बनाने के इस कार्य ने झलक महिला स्वसहायता समूह की महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव आयेंगे। पहले जो महिलाएं केवल अपने घरों तक सीमित थीं, आज वे खुद का काम संभाल रही हैं और समाज में अपनी पहचान बना रही हैं। इस कार्य ने उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया और साथ ही उनकी आर्थिक स्थिति को भी सुदृढ़ किया।

समूह की अध्यक्ष श्रीमती गायत्री सोनी ने बताया कि इस योजना के तहत मिले प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता से महिलाएं आत्मविश्वास से भर गई हैं। उन्होंने यह साबित किया कि यदि सही दिशा और अवसर मिलें, तो महिलाएं हर चुनौती का सामना कर सकती हैं और आर्थिक रूप से सशक्त हो सकती हैं।

चुनौतियाँ और समाधान

शुरुआत में, झलक महिला स्वसहायता समूह की महिलाओं को कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ा। जैसे कि कच्चे माल की उपलब्धता और बाज़ार में प्रतिस्पर्धा। लेकिन समूह ने अपनी एकजुटता और कड़ी मेहनत से इन समस्याओं का समाधान निकाला। उन्होंने अपनी गुणवत्ता पर ध्यान दिया और ग्राहक संतुष्टि को प्राथमिकता दी। इसके साथ ही, ज़िला प्रशासन ने भी उनकी मदद की और उन्हें विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत और सहायता उपलब्ध कराई।

समूह की महिलाओं ने खुद को सशक्त बनाने के लिए तकनीकी ज्ञान और वित्तीय सहायता का बेहतरीन उपयोग किया। इससे न केवल उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ, बल्कि उन्होंने अपने परिवार और समाज के सामने एक नया उदाहरण प्रस्तुत किया।

भविष्य की योजनाएँ

झलक महिला स्वसहायता समूह की महिलाएं अब और बड़े लक्ष्यों की ओर अग्रसर हैं। वे फूलबाती के अलावा अन्य उत्पादों के निर्माण की भी योजना बना रही हैं, ताकि उनकी आय में और इज़ाफा हो सके। समूह ने यह भी तय किया है कि वे आने वाले समय में और अधिक महिलाओं को इस योजना से जोड़ेंगी, ताकि उन्हें भी आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिले।

समूह की सदस्याओं का मानना है कि लखपति दीदी योजना उनके जीवन में एक सुनहरा अवसर लेकर आई है, और वे इस अवसर का पूरा लाभ उठाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

निष्कर्ष

झलक महिला स्वसहायता समूह की कहानी यह दर्शाती है कि यदि महिलाओं को सही मार्गदर्शन और संसाधन उपलब्ध कराए जाएं, तो वे अपने जीवन में किसी भी बदलाव को संभव बना सकती हैं। लखपति दीदी योजना के तहत मिली सहायता और प्रशिक्षण ने इन महिलाओं के जीवन को बदलकर रख दिया।

यह कहानी न केवल महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की है, बल्कि उनके आत्मविश्वास, कड़ी मेहनत और सामूहिक प्रयासों की भी है। बेमेतरा ज़िले की ये महिलाएं आज स्वावलंबी बनकर अपनी और अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुकी हैं।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी लखपति दीदी मनकुंवारी बाई से करेंगे वार्तालाप

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रायपुर। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के दिन झारखण्ड के हजारीबाग में पीएम जनमन मेगा इवेंट में हितग्राहियों से वार्तालाप करेंगे। छत्तीसगढ़ के लिए यह सौभाग्य का विषय होगा कि विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा समुदाय की मनकुंवारी बाई से प्रधानमंत्री वार्तालाप करेंगे।

जशपुर जिले में निवासरत विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा परिवारों को पीएम जनमन योजना का लाभ दिया जा रहा है। इसी कड़ी में जिले के बगीचा विकासखण्ड के ग्राम कुटमा निवासी मनकुंवारी बाई को झारखण्ड के हजारीबाग में 02 अक्टूबर 2024 को होने वाले पीएम-जनमन के मेगा इवेंट आमंत्रित किया गया है।

उल्लेखनीय है कि विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा परिवार के मनकुंवारी बाई कृषि कार्य के साथ ही अन्य गतिविधियों में जुड़कर अतिरिक्त आय अर्जित कर रही हैं। मनकुंवारी कृषि कार्य के साथ-साथ बत्तख पालन, तेंदूपत्ता, महुआ, चिरौंजी एवं साल बीज संग्रहण कर बिक्री का कार्य कर रही हैं एवं वर्तमान में प्रतिवर्ष 2 लाख 70 हजार की आय अर्जित कर लखपति दीदी बन गई है। मुनकंवारी बाई आज सोमवार को जशपुर से झारखण्ड हजारीबाग के लिए रवाना हो गई है।

लखपति दीदी ममता राय की प्रेरणादायक कहानी पढिए

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एमसीबी। जिले की ममता राय, जो पहले एक साधारण गृहिणी थी। आज लखपति दीदी की श्रेणी में शामिल हो चुकी हैं। उनकी यह सफलता की यात्रा प्रगति महिला स्वसहायता समूह से जुड़ने के बाद शुरू हुई। समूह से जुड़कर ममता राय ने 60,000 रुपये का CIF लोन लिया और अपने स्वंयम का किराना दुकान शुरू किया। सिर्फ किराना दुकान तक ही सीमित न रहते हुए, ममता राय ने समूह के साथ मिलकर अचार, आलू चिप्स और तिलौरी बनाने का काम भी शुरू किया। उनकी मेहनत और लगन का ही परिणाम है कि आज उनकी महीने की आय 6 से 7 हजार रुपये के बीच होती है और उनकी सालाना आय 1 लाख रुपये से भी अधिक है। उन्होंने अपने गाँव की अन्य महिलाओं के उत्थान के लिए भी महत्वपूर्ण कदम उठाए।

ग्राम पंचायत की महिलाओं और सभी समूहों की दीदियों के साथ मिलकर बीमा, आयुष्मान कार्ड बनवाने व शासकीय योजनाओं के प्रति जागरूकता फैलाने का कार्य करती हैं। ममता राय अपने समूह और गाँव की महिलाओं को विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी देकर उन्हें उनके अधिकारों और लाभों के प्रति जागरूक कर रही हैं। उनके इस प्रयास से गांव की महिलाओं को सरकारी योजनाओं का अधिकतम लाभ मिल रहा है और वे आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं। आज ममता राय न सिर्फ आर्थिक रूप से स्वतंत्र है बल्कि उन्होंने अपने परिवार और समाज में एक उदाहरण प्रस्तुत किया है। उनका यह साहस और आत्मविश्वास दूसरों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है। ममता राय का यह सफर उन सभी महिलाओं को प्रेरित करता है जो अपनी मेहनत और दृढ़ संकल्प से अपनी पहचान बनाना चाहती है।

लखपति दीदी योजना से कलस्टर फार्मिंग कर दीदियां बन रहीं सफल व्यवसायी

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रायपुर। शासन की लखपति दीदी योजना से महिलाओं को कलस्टर फार्मिंग से जोड़ा जा रहा है। इन्हें सब्जी उत्पादन, मुर्गीपालन तथा मक्का उत्पादन के कार्यकलाप से जोड़ा जा रहा है। तीन गतिविधि इसलिए ताकि तीनों के माध्यम से इनकी आर्थिक आय का आंकड़ा लाख के आंकड़े को छू जाए। कोण्डागांव विकासखण्ड के ग्राम बादालूर वनांचल की महिलाएं गृहणी के साथ सफल व्यवसाय बन रही है।

                                  

ये कहानी बादालूर की रहने वाली ऊषा की। जिस पर पूरे घर की जिम्मेदारी थी, आज वह सफल व्यवसायी बनकर अपने परिवार की जिम्मेदारी बखूबी निभा रही है। ऊषा ने बताया वह दूसरे के घर में काम करती थी, अब खुद सब्जियों का उत्पादन कर रही है। सब्जी से प्रति सप्ताह में 1000 रूपये से अधिक की लौकी विक्रय कर रही है और आने वाले समय में लौकी की खेती से उन्हे 12 से 15 हजार आमदनी प्राप्त होने की सम्भावनाएं हैं। ऊषा अपने खेतों में सीजन के अनुसार सब्जी उत्पादन भी करती है।

                                     

उन्होंने बताया कि लघु वनोपज जैसे महुआ, साल, बीज, ईमली, टौरा का भी संग्रहण कर विक्रय करती हैं। जिससे उन्हें अतिरिक्त 10 से 12 हजार रूपये की आमदनी प्राप्त हो जाती है। ऊषा कोर्राम आज सब्जी की खेती करके गांव के अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गई। ऊषा की जिन्दगी में यह बदलाव बिहान कार्यक्रम से जुड़ने के बाद आया। बिहान के बीपीएम रैनु नेताम ने बताया कि महिलाओं को प्रेरित कर स्व-सहायता समूह बनाकर कार्य करने हेतु बिहान के माध्यम से प्रेरित किया गया। दस महिलाओं ने मिलकर गौरी स्व-सहायता समूह बनाया और ऊषा भी इसकी सदस्य बनीं।

समूह से जुड़ने से पहले वह एक निर्धन परिवार से आती थीं और घर का सारा काम-काज सम्भालती थी। जिसके लिए ऊषा को दुसरे के यहां मजदूरी करनी पड़ती थीं और पुश्तैनी खेत में पारंम्परिक तरीके से केवल धान की खेती से ही घर चलाया करती थी। ऐसे में समूह से जुड़कर अधिकारियों द्वारा जय मां कर्मा कलस्टर संगठन मर्दापाल अंतर्गत लखपती दीदीपहल के तहत 05 गांव को इन्टीग्रेटेड फार्मिंग कलस्टर के रूप में चयन की जानकारी दी गयी। जिसमें 05 गांव से 250 किसानों को तीन गतिविधि मक्का उत्पादन, सब्जी उत्पादन, वनोपज संग्रहण एवं बैकयार्ड मुर्गीपालन कार्य से जोड़ा जाना था। चयनित गाँवो में से ग्राम बादालूर का चयन किया गया। गौरी स्व-सहायता समूह की ऊषा कोर्राम ने सब्जी उत्पादन का कार्य प्रारंभ किया। समूह के साथ मिलकर पांच डिसमिल में लौकी की खेती प्रारंभ की। अब वे एक सफल गृहणी के साथ सफल व्यवसायी भी बन गयी है।

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