Media24Media.com: राम वन गमन पथ

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राम वन गमन पथ की मिट्टी से होगा महासमुंदवासियों का तिलक- डा रश्मि चन्द्राकर

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 महासमुंद । 22 जनवरी 2024 को अयोध्या में आयोजित किये जा रहे श्री रामलला की प्राण प्रतिष्ठा "रामोत्सव" के अवसर पर महासमुंद जिले में कांग्रेस जिलाध्यक्ष डा रश्मि चन्द्राकर के नेतृत्व मे भक्तिमय सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। कांग्रेस सरकार द्वारा विकसित राम वन गमन पथ के महासमुंद स्थित ग्राम मुड़ियाडीह, पासिद, बोरिद, अमलोर, सिरपुर, खडसा, गढ़सिवनी, पीढ़ी, अछोला, जलकी, फुसेरडीह मे निर्मित पड़ाव की साफ सफाई कांग्रेसजन करेंगे तथा गोबर लिपाई कर उस पर रंगोली बनाए जाएंगे। वही राम वन गमन पथ की मिट्टी को कलश मे एकत्रित कर प्रत्येक ब्लॉक अध्यक्ष उक्त कलश को अपने-अपने ब्लाॅक मे लेकर जाएंगे और कलश की पूजा अर्चना करेंगे । तत्पश्चात कलश की मिट्टी मे सुगंधित चंदन मिलाकर सभी के माथे पर उक्त चंदन युक्त मिट्टी का तिलक लगाकर लोगो को छत्तीसगढ मे श्रीराम के होने का अहसास कराएंगे।


जिला कांग्रेस भवन तथा प्रत्येक ब्लॉक मे कांग्रेस पार्टी द्वारा भजन कीर्तन का कार्यक्रम रखा गया है। जिसके अंतर्गत सुंदरकांड, हनुमान चालीसा, रामचरितमानस आदि का पाठ किया जाएगा तथा ध्वज भी लहराए जाएंगे। डा रश्मि चन्द्राकर ने कहा है कि राम वन गमन पथ की उक्त मिट्टी सभी के लिए उपलब्ध रहेगी। उन्होंने सभी से निवेदन किया है कि ज्यादा से ज्यादा संख्या मे एकत्रित होकर उक्त कार्यक्रम को भव्य बनाएं।

कांग्रेस पदाधिकारियों व ब्लॉक अध्यक्षो की बैठक लेकर कांग्रेस जिलाध्यक्ष डॉ रश्मि चंद्राकर ने कार्यक्रम को भव्य बनाने के निर्देश कांग्रेसजनों को दिए हैं। बैठक को संबोधित करते हुए कांग्रेस जिला अध्यक्ष डॉ रश्मि चंद्राकर ने कहा कि यह कौशल्या माता का प्रदेश है और प्रभु श्रीराम यहा के भांचा है। अतः भांचा राम छत्तीसगढ व छत्तीसगढीयो के कण-कण मे है। प्रभु श्रीराम का राजतिलक होना था मगर उन्हे वनवास पर भेज दिया गया जहा वो निषादराज से मिले, शबरी से मिले, ऋषि मुनियों से मिले। वनवास के दौरान प्रभु श्रीराम ने अनेको कठिनाईया सही। फिर भी अपनी मर्यादा नहीं खोई। उन्होंने वनवास का 10 साल इसी छत्तीसगढ मे गुजारा है। छत्तीसगढ़ में उन्होंने इतने बरस गुजारे, फिर भी हमारा रिश्ता वनवासी राम के साथ-साथ कौशल्या के राम से भी है, वे हमारे भांजे हैं, इसलिए हम भांजों के पैर छूते हैं।

छत्तीसगढ़ का कुछ न कुछ अंश भगवान राम के चरित्र में देखने को मिलता है। हमारा रिश्ता राम से केवल वनवासी राम का नहीं है। बल्कि हमारा रिश्ता शबरी के राम, कौशल्या के राम अर्थात भांचा राम के रूप में भी है।

भगवान राम साकार भी है और निराकार भी। राम को मानने वाले उन्हें दोनों स्वरूप में मानने वाले हैं। हमारा प्रयास हमारी संस्कृति, हमारे खानपान, हमारे तीज-त्यौहारों को आगे बढ़ाने का है। मैंने देखा कि रामनामी सम्प्रदाय के भाईयों ने मार्चपास्ट किया। जो कबीर का रास्ता है। रामनामी का रास्ता है। वो निराकार का रास्ता है। सबके अपने-अपने राम हैं।
अपनी संस्कृति को संरक्षित करने का काम हम लोग कर रहे हैं। हमारे गांव-गांव में भी रामकथा के दल बने हैं। राम सबके हैं। निषादराज के हैं शबरी के हैं।

बहुत गरिमापूर्ण ढंग से आप लोग यह कार्यक्रम करना हैं हमारी सुबह राम-राम से होती है। शाम रामायण से होती है। अंत में सियावर रामचंद्र और हनुमान जी की जय के साथ उन्होंने अपने उद्बोधन का अंत किया। बैठक मे प्रमुख रूप से जिलाध्यक्ष डा रश्मि चंद्राकर, प्रभारी महामंत्री संजय शर्मा, ब्लाॅक अध्यक्षगण खिलावन बघेल, ढेलु निषाद, खिलावन साहू, भूपेंद्र ठाकुर, रवि निषाद, संतोष पटेल, करण सिंह दीवान, रविशंकर कश्यप, विजय साहू, जितेंद्र सिदार, पुष्पेंद्र पटेल, बलराम भोई, आर एन आदित्य, जिला पंचायत सदस्य अमर चंद्राकर, कांग्रेस प्रवक्ता निर्मल जैन, सोशल मीडिया प्रभारी मोती जांगडे प्रमुख रूप से उपस्थित थे। उक्त जानकारी कांग्रेस प्रवक्ता निर्मल जैन ने दी।

आयोध्या मे नव निर्मित राम मंदिर मे रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के अवसर पर महासमुंद जिले मे कांग्रेस पार्टी  विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित करेगी 


15 साल सत्ता में रही भाजपा को न राम वन गमन पथ याद रहा न ही माता कौशल्या याद रही : डॉ रश्मि चंद्राकर

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महासमुंद। कांग्रेस जिला अध्यक्ष डॉ रश्मि चंद्राकर ने कहा है कि छत्तीसगढ़ की जनता ने 15 साल भारतीय जनता पार्टी को अवसर दिया था लेकिन राम काज भूल गए। छत्तीसगढ़ के कण-कण में प्रभु श्री राम बसे हैं, पूर्व में छत्तीसगढ़ को कौशल प्रदेश और बस्तर को दंडकारण्य कहा जाता था। रामायण में अरण्यकांड का संदर्भ छत्तीसगढ़ से ही रहा है। 1 से 3 जून को रायगढ़ में होने वाले राष्ट्रीय रामायण महोत्सव में विशेष तौर पर अरण्यकांड के प्रसंग का वाचन और गायन होगा। 


आयोजन में नामचीन हस्तियां, 12 राज्यों की रामायण मंडली और विदेशी मंडली भी छत्तीसगढ़ पहुंचेगी। छत्तीसगढ़ के उत्तर में कोरिया जिले के सीतामढ़ी हर चौका से लेकर दक्षिण में सुकमा जिले के रामाराम तक 75 स्थल राम वन गमन पथ के रूप में चिन्हित कर पर्यटक सुविधाएं विकसित की जा रही है । चंदखुरी, शिवरीनारायण, सहित

आठ स्थलों पर तृतीय चरण का कार्य भी लगभग पूरा हो चुका है। राम वन गमन पथ के 2260 किलोमीटर में सड़क के दोनों ओर फलदार वृक्षारोपण किया जा रहा है। माता कौशल्या का दुनिया का एकमात्र मंदिर राजधानी से मात्र 27 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है 15 साल रमन सिंह मुख्यमंत्री रहे तब उन्हें सुध नहीं आई। भूपेश सरकार ने ना केवल कौशल्या मंदिर की ख्याति को पुनर्स्थापित किया बल्कि प्रत्येक वर्ष माता कौशल्या उत्सव शिवरीनारायण, राजिम, चंदखुरी में रामायण महोत्सव की शुरुआत भी की। प्रदेशभर के रामायण मंडलियों को संरक्षण और सहायता देने का काम भी भूपेश सरकार में तेजी से जारी

कांग्रेस जिला अध्यक्ष डॉ रश्मि चंद्राकर ने कहा है कि धर्म के ठेकेदार होने का दंभ भरने वाले भाजपाइयों के लिए गाय, गोबर, प्रभु श्री राम और माता कौशल्या भी केवल चुनावी लाभ के लिये है। छत्तीसगढ़ में प्रभु श्री राम और माता कौशल्या ना केवल धार्मिक लिहाज से बल्कि संस्कृति में भी रचे बसे हैं। यहां जन्मोत्सव के छठी कार्यक्रमों में भी रामायण पाठ होता है। सुबह का अभिवादन भी राम-राम से, भेंट मुलाकात सीता राम से होता है। धान का कटोरा कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ में जब किसान फसल की मिंजाई के बाद नपाई करता है तो नापने के पैमाने काठा में गिनती का पहला शब्द भी राम से ही शुरू होता है। यहां का किसान काठे से नपाई के दौरान एक नहीं कहता, पहला काठा प्रभु श्री राम के नाम से गिनती शुरू होती है। ना केवल श्रद्धा और आस्था बल्कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति में प्रभु श्री राम रचे बसे हैं। पूर्व में कौशल प्रदेश के नाम से जाने जाना वाला छत्तीसगढ़ माता कौशल्या का मायका है, इसी कारण छत्तीसगढ़ में प्रभु श्री राम को भांजे के रूप में पूजने की परंपरा रही है।

भूपेश सरकार बनने के बाद छत्तीसगढ़ में स्थानीय प्रथा, और परंपरा, रीति-रिवाज, खानपान और तीज त्यौहारों के सरकारी आयोजन की शुरुआत हुई है। मातागुड़ी, देवगुड़ी, घोटुल के साथ-साथ रामलीला के आयोजन और मंचन को संस्कृति विभाग द्वारा प्रोत्साहित किया जा रहा है। छत्तीसगढ़िया स्वाभिमान और आत्मसम्मान पुनर्स्थापित हुआ है तो सामंतवादी सोच के भाजपा नेताओं को पीड़ा हो रही है। रायगढ़ में आयोजित राष्ट्रीय रामायण महोत्सव के आयोजन का विरोध भाजपाइयों के  चरित्र को उजागर करता है।

राम वन गमन पथ का स्क्रिप्ट लिखने का काम करेगी केंद्र सरकार

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गुरुवार को छत्तीसगढ़ में कांग्रेस ने अपने शासन का 2 साल पूरा किया। इसके साथ ही भूपेश सरकार ने चंदखुरी में भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया था। चंदखुरी में माता कौशल्या का मंदिर बनने जा रहा है। छत्तीसगढ़ सरकार ने राम वन गमन पथ को विकसित करने के लिए बाइक रैली का भी आयोजन किया था। इस बीच देर रात अचानक केंद्रीय पर्यटन मंत्री एवं राज्य संस्कृति मंत्री प्रहलाद पटेल अचानक रायपुर पहुंचे। प्रहलाद पटेल बीजेपी के दिग्गज नेताओं में से एक माने जाते हैं। उन्हें एयरपोर्ट पर देर रात बीजेपी के नेता लेने पहुंचे।





राम वन गमन पथ की ली जानकारी






केंद्रीय मंत्री का इस तरह छत्तीसगढ़ प्रवास पर अचानक आने से ये कयास लगाए जा रहे हैं कि राम वन गमन पथ केंद्र के प्रोजेक्ट के भीतर शामिल किया जा सकता है। शुरू से ही बीजेपी राम के नाम से जनता के बीच पहुंच रही है। ऐसे में छत्तीसगढ़ दोबार काबिज होने के लिए बीजेपी राम का सहारा ले सकती है। इस वक्त कांग्रेस राम वन गमन पथ को करोड़ों रूपये की लागत से विकसित कर रहा है। बता दें कि राम वन गमन पथ का आधा हिस्सा मध्यप्रदेश में भी है। ऐसे में इस तरह प्रहलाद पटेल का छत्तीसगढ़ आना केंद्र के किसी नए योजना की ओर इशारा कर रहा है।





कोरोना के कारण टूटी सालों पुरानी परंपरा, इस साल गुरु घासीदास जयंती पर नहीं निकाली जाएगी शोभायात्रा





मंत्रियों से मिले प्रहलाद पटेल





केंद्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल ने गृह और पर्यटन मंत्री ताम्रध्वज साहू और खाद्य मंत्री अमरजीत भगत से मुलाकात की। इस दौरान 'राम वन गमन पथ' पर उन्होंने लंबी चर्चा की। संस्कृति मंत्री अमरजीत भगत ने केंद्रीय मंत्री को राम वन गमन पथ के बारे में विस्तार से बताया। प्रहलाद पटेल ने कांग्रेस सरकार के दो साल पूरे होने की बधाई भी दी।





संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए केंद्र से मांगी मदद






मंत्री अमरजीत भगत ने पर्यटन के क्षेत्र में प्रदेश में खुलने वाली संभावनाओं की जानकारी दी। छत्तीसगढ़ की लोक-कला, संस्कृति व पर्यटन को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ले जाने के लिए कुछ महत्वपुर्ण बिंदुओं पर केंद्रीय मंत्री पटेल से चर्चा भी की। उन्होंने छत्तीसगढ़ की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए केंद्र के द्वारा पहल किए जाने का अनुरोध भी किया है।





राम वन गमन पथ में सात राज्य शामिल





राम वनगमन पथ को लेकर केंद्र और राज्य में टकराहट के सवाल पर पटेल ने कहा कि मुझे इस मसले पर कोई टकराहट नहीं दिखती। पर्यटन मंत्रालय ने रामअवतार शर्मा की 2010 में रिपोर्ट के आधार पर ही केंद्र ने राम वनगमन पथ पर टूरिस्ट सर्किट विकसित करने का फैसला किया है। इस सर्किट में सात राज्य शामिल हैं। हमने सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को इस संबंध में पत्र भी लिखा है। एक राज्य की सीमा के भीतर विकास बिना राज्य सरकार की सहमति से नहीं हो सकता।





पर्यटन विकास के लिए विवाद से बचना जरूरी





राज्यों के सहयोग से यह काम होगा, भारत सरकार केवल स्क्रिप्ट लिखने का काम करेगी। पटेल ने कहा कि यदि मार्गों को लेकर किसी तरह की तकनीकी दिक्कतें आ रही हैं, तो उसका एकमात्र हल संवाद ही है। केंद्र सरकार ने 300 स्थानों की पहचान की है। अगर स्थानों को लेकर राज्यों को आपत्ति है, तो उसे बदल देंगे। पर्यटन के विकास के लिए विवाद से बचना चाहिए, ताकि जल्द काम शुरू हो सके।


Ram van gaman path yatra : महासमुंद में उमड़ा आस्था का सैलाब

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महासमुंद। श्रीराम वनगमन पर्यटन परिपथ रथयात्रा (Ram van gaman path yatra) में आस्था का सैलाब उमड़ा। बाईक रैली आज पूर्वान्ह महासमुंद जिले के सीमावर्ती ग्राम मुड़ियाडीह (औराई) पहुंची। जहां भव्य स्वागत किया गया। जिले में यह रैली सीतामढ़ी हरचौका जिला कोरिया से प्रारंभ होकर लगभग 700 किलोमीटर की यात्रा पूरी कर बलौदाबाजार होते हुए पहुँची। छत्तीसगढ़ राज्य में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए रथ यात्रा के आगे-आगे 100 बाईकर्स चल रहे थे। इन बाईकर्स में दिव्यांग युवाओं ने भी अपनी पेट्रोल चलित दुपहिया वाहन लेकर शामिल हुए। उनका उत्साह देखने लायक था। सभी बाईकर्स का सिरपुर स्थित लक्ष्मण मंदिर प्रांगण में फोटोशूट किया गया। इस दौरान अध्यक्ष छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम एवं विधायक बसना देवेन्द्र बहादुर सिंह, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती ऊषा पटेल भी विशेष रूप से मौजूद थे।






जगह जगह पुष्पवर्षा से स्वागत






बच्चे, युवा और बुजुर्गों ने पुष्प वर्षा से स्वागत किया। पूर्ण श्रद्धा के साथ गाॅव की मिट्टी रामवन के लिए सौंपी गई। जिले की सीमा पर रथ यात्रा आगमन पर कलेक्टर कार्तिकेया गोयल, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी डाॅ. रवि मित्तल, वन मण्डलाधिकारी पंकज राजपूत, अपर कलेक्टर जोगेन्द्र कुमार नायक सहित जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे।





राम वन के लिए सौंपी मिट्टी






स्वागत के बाद रथ यात्रा जिले से 51 किलोमीटर का रास्ते में पड़ने वाले विभिन्न गाँव से गुजरते हुए रायपुर जिले की सीमा में प्रवेश की। रथ यात्रा के रास्ते में पड़ने वाले गाँवों में पुष्प वर्षा कर रथयात्रा का स्वागत किया गया। और अपने गाँव की मिट्टी रायपुर जिले के चंदखुरी में बन रहे राम वन के लिए पूरी श्रद्धा के साथ सौंपी।









जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती ऊषा पटेल सहित जन प्रतिनिधियों ने भगवान श्री राम की पूजा अर्चना की। बाद में हरी झण्डी दिखाकर बाईक रैली को प्रातः 11ः20 बजे रवाना किया गया। करीब 01ः45 बजे रथ यात्रा को रायपुर जिले के निसदा मोड़ पर सौंपा गया।
रथ यात्रा के आगमन और स्वागत में ग्रामीण मण्डली द्वारा रामायण पाठ किया गया। महिलाओं ने रथ में सवार श्री राम की पूजा-अर्चना की।










रथयात्रा का उद्देश्य पर्यटन को बढ़ावा देना






इस राम रथ यात्रा का उद्देश्य छत्तीसगढ़ में पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ छत्तीसगढ़ प्रदेश में भगवान श्रीराम जिस-जिस क्षेत्रों से गुजरे हैं उन पथों को चिन्हांकित कर राम वनगमन परिपथ पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाना भी है। यह काम टूरिज्म सर्किट विकास योजना के तहत् किया जा रहा है। यह रथ यात्रा प्रदेश में 14 दिसम्बर से शुरू हुई और आज राजधानी रायपुर के नजदीक ग्राम चंदखुरी में समाप्त हो रही है। ग्राम चंदखुरी में रथ यात्रा की समाप्ति के अवसर पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल मंत्रिमंडल के साथ स्वयं उपस्थित हो रहे हैं।






मालूम हो कि यह यात्रा राम वनगमन पर्यटन परिपथ पर्यटन रथयात्रा (Ram van gaman path yatra) और विराट बाईक रैली छत्तीसगढ़ के उत्तर दिशा से कोरिया जिले के सीतामढ़ी, हरचौका और दक्षिण दिशा में जिला सुकमा के रामाराम से बाईक रैली और पर्यटन रथयात्रा सोमवार 14 दिसम्बर को शुरू हुई है। महासमुंद जिले में समाप्ति के अंतिम उत्तर दिशा कोरिया जिले के सीतामढ़ी हरचैका से शुरू हुई बाईक रैली और पर्यटन यात्रा बलौदाबाजार जिला होते हुए लगभग 700 किलोमीटर का सफर कर महासमुंद जिले की सीमा मुड़ियाडीह (औराई) पहुंची थी। जहां आमजन और प्रतिनिधि पुष्प वर्षा के साथ स्वागत किया।









इन रास्तों से गुजरी रथयात्रा






स्वागत के बाद राम वन गमन परिपथ पर्यटन रथयात्रा यहां से जिले के 23 गाॅव ग्राम पंचायत चुहरी, अमलोई, मरौद, खमतराई और सिरपुर पहुंची।
सिरपुर से फुसेराडीह, अचानकपुर मोड़, छपोराडीह, जलकी, बांसकुड़ा मोड़, कुहरी मोड़, कोडार, मालीडीह, कौआझर आदि से होकर तुमगाॅव मोड़, अमावश मोड़, कांपा मोड़, बिरकोनी मंदिर परिसर रोड, घोड़ारी मुढ़ैना रोड आदि से गुजरते हुए जिले की सीमा निसदा मोड़ पर जिला रायपुर को सौंपी गई। रथ यात्रा के आगे स्वयं सेवी, एन.सी.सी, बाईकर्स के अलावा वन और शिक्षा विभाग के कर्मचारी सवार थे। चिन्हांकित स्थानों पर रामपाठ किया गया व गाॅव की मिट्टी भी साथ में रखी गई।


हरियाली से भरपूर राम वन गमन पथ के भ्रमण से लोग होंगे आनंदित, डेढ़ लाख से ज्यादा फलों और फूलों के पौधे रोपित

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छत्तीसगढ़ में पूरे राम वन गमन पथ पर (Ram van gaman path in Chhattisgarh) पौधारोपण (Plantation) से ऐसा वातावरण निर्मित किया जा रहा है, जो अपनी हरियाली से लोगों को सहज ही आकर्षित करने लगेंगे। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल (CM Bhupesh Baghel) की मंशा के अनुसार राज्य शासन की इस महत्वपूर्ण परियोजना पर वनमंत्री मोहम्मद अकबर (Forest Minister Mohammad Akbar) के मार्गदर्शन में पथ के दोनों ओर कई प्रकार के फूलों और फलों के डेढ़ लाख से ज्यादा पौधों का रोपण किया गया है। इस मार्ग पर पर्यटकों को विभिन्न तरह के वनौषधियां भी दिखाई देंगे।









बता दें कि छत्तीसगढ़ में राम के वनवास काल से संबंधित 75 स्थानों को चिन्हित कर उन्हें नए पर्यटन सर्किट के रुप में आपस में जोड़ा जा रहा है। पहले चरण में उत्तर छत्तीसगढ़ में स्थित कोरिया जिले से लेकर दक्षिण के सुकमा जिले तक 9 स्थानों का सौंदर्यीकरण और विकास किया जा रहा है। ये सभी स्थान पहले ही प्राकृतिक दृश्यों से भरपूर हैं। पौधारोपण के जरिए अब इन्हें और भी हरा-भरा किया जा रहा है।









वहीं सभी चयनित पर्यटन-तीर्थों पर सुगंधित फूलों वाली सुंदर वाटिकाएं भी तैयार की जाएंगी। राम वन गमन के 528 किलोमीटर मार्ग के दोनों किनारों पर डेढ़ लाख से ज्यादा पौधे का रोपण वन विभाग द्वारा चालू वर्ष के दौरान किया गया है। इस पूरे मार्ग पर पीपल, बरगद, आम, हर्रा, बेहड़ा, जामुन, अर्जुन, खम्हार, आंवला, शिशु, करंज, नीम जैसे पौधों का रोपण शामिल हैं। प्रधान मुख्य वन संरक्षक राकेश चतुर्वेदी के मुताबिक राम वन गमन पथ के माध्यम से दुनियाभर के सामने जैव विविधता का दर्शन भी होगा।









इन अभ्यारण्यों को एक-दूसरे से जोड़ने का काम करेगा यह परिपथ





वन संरक्षक राकेश चतुर्वेदी ने बताया कि यह परिपथ कोरिया स्थित गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान, सूरजपुर स्थित तमोर पिंगला अभ्यारण्य, बलरामपुर के सेमरसोत अभ्यारण्य, जशपुर के बादलखोल अभ्यारण्य, रायगढ़ के गोमर्डा अभ्यारण्य, मुंगेली के अचानकमार अभ्यारण्य, कवर्धा के भोरमदेव अभ्यारण्य, बलौदाबाजार स्थित बारनवापारा अभ्यारण्य, धमतरी स्थित सीतानदी अभ्यारण्य, गरियाबंद के उदंती अभ्यारण्य, बस्तर जिले में स्थित कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान, बीजापुर के इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान, पामेड़ और भैरमगढ़ अभ्यारण्यों को भी एक-दूसरे के करीब लाएगा। इनमें से उदंती और सीतानदी अभ्यारण्यों को 2009 से टाइगर रिजर्व घोषित किया जा चुका है।


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