Media24Media.com: राजिम कुंभ कल्प मेला

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मुख्यमंत्री साय के मुख्य आतिथ्य में राजिम कुंभ कल्प का आज होगा समापन....

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 रायपुर : राजिम कुंभ कल्प मेला में आज महाशिवरात्रि स्नान के बाद समापन होगा। समापन समारोह में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। उनके साथ उपमुख्यमंत्री अरुण साव, कैबिनेट मंत्री विजय शर्मा, सांसद, विधायक और अन्य जनप्रतिनिधि भी उपस्थित रहेंगे।


इस अवसर पर देशभर से महामंडलेश्वर, साधु-संत और धर्मगुरु भी इस भव्य आयोजन में शामिल होकर अपनी उपस्थिति से इसे और भी गौरवमयी बनाएंगे। राजिम कुंभ कल्प मेला, जो धार्मिक और सांस्कृतिक आस्था का प्रतीक है, के समापन समारोह में प्रदेश और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होंगे।

राजिम कुंभ मेला में कोसा की प्रदर्शनी आकर्षण का केन्द्र, ग्रामोद्योग विभाग द्वारा लोगों को दी जा रही जानकारी

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 रायपुर : राजिम कुंभ कल्प मेला में गरियाबंद जिले के विभिन्न विभागों द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी में ग्रामोद्योग विभाग के रेशम प्रभाग का स्टाल लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। इस स्टाल में किसानों, महिलाओं और आम नागरिकों को कोसा उत्पादन की प्रक्रिया की जानकारी दी जा रही है। अब तक हजारों लोग इस स्टाल पर पहुंचकर कोसा उत्पादन की जानकारी प्राप्त कर चुके हैं। कोसा उत्पादन किसानों के लिए न केवल आय का एक अतिरिक्त जरिया बन सकता है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी सशक्त बनाने में मददगार होगा।


स्टाल प्रभारी राम गोपाल चौहान ने बताया कि कोसा उत्पादन वन एवं कृषि आधारित रोजगार का एक बेहतरीन जरिया है, जिससे गांवों में ही आजीविका प्राप्त की जा सकती है। छत्तीसगढ़, जो हरितिमा से आच्छादित राज्य है, में खेतों के किनारे अर्जुन के पेड़ लगाकर कोसा उत्पादन किया जा सकता है। अर्जुन पेड़ों की पत्तियों पर कोसा कीड़े तीस दिन में कोसा फल तैयार कर देते हैं, जिसे किसान आसानी से बाजार में बेच सकते हैं।

कोसा उत्पादन कृषि के लिए भी लाभदायक है, क्योंकि इसका पालन खेतों में बायो-फर्टिलाइजर के रूप में भी उपयोगी होता है। प्रति अर्जुन वृक्ष 50 से 60 कोसा फल उत्पन्न होते हैं, जो बाजार में एक से दो रुपये प्रति फल की दर से बिकते हैं। इस प्रक्रिया में 70 प्रतिशत कोसा फल तोड़कर बेचा जाता है, जबकि 30 प्रतिशत को प्राकृतिक वंश वृद्धि के लिए पेड़ों पर ही छोड़ना आवश्यक होता है, जिससे आगे कोसा तितलियां विकसित होकर उत्पादन की श्रृंखला को बनाए रखें।

राजिम कुंभ में पंचकोशी यात्रा की झांकी श्रद्धालुओं को कर रही आकर्षित

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 रायपुर : राजिम कुंभ कल्प मेला में इस बार पहले से अधिक भव्य और आकर्षक रूप में आयोजित किया जा रहा है। श्रद्धालुओं की आस्था, भक्ति और संस्कृति का संगम इस मेले में देखने को मिल रहा है। मेले में दिनभर भजन-कीर्तन की गूंज के साथ देशभर के प्रसिद्ध कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दी जा रही हैं। इस बार पंचकोशी यात्रा की थीम पर बनी झांकी मेलार्थियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है, जो आस्था और संस्कृति की झलक प्रस्तुत कर रही है।


चौबेबांधा के नए मेला मैदान में पंचकोशी यात्रा की झांकी बनाई गई है, जो मेलार्थियों को विशेष रूप से आकर्षित कर रही है। श्रद्धालु इस झांकी के समक्ष श्रद्धाभाव से शीश झुकाकर पुण्य लाभ ले रहे हैं। इस झांकी के माध्यम से पंचकोशी यात्रा के पांचों महादेव मंदिरों, यात्रा मार्ग और उनकी दूरी की जानकारी दी जा रही है।

छत्तीसगढ़ में राजिम मेला से एक माह पूर्व पंचकोशी यात्रा निकाली जाती है, जिसमें हजारों श्रद्धालु क्षेत्र के प्रमुख शिव मंदिरों की पदयात्रा कर भगवान शिव की पूजा-अर्चना करते हैं। यह यात्रा राजिम त्रिवेणी संगम में स्थित श्री कुलेश्वर महादेव मंदिर से आरंभ होती है और वहीं समाप्त होती है।

श्रद्धालु पाँच प्रमुख शिवलिंगों के दर्शन करते हुए यह यात्रा पूर्ण करते हैं। यात्रा के मुख्य पड़ाव इस प्रकार हैं। पटेश्वर महादेव मंदिर (पटेवा), राजिम से 5 किमी दूर, यहाँ भगवान शिव अन्नब्रह्मा के रूप में पूजे जाते हैं। चंपेश्वर महादेव (चंपारण) मंदिर राजिम से 14 किमी उत्तर स्थित है, जहाँ स्वयंभू शिवलिंग विराजमान है। ब्रम्हनेश्वर महादेव (बम्हनी, महासमुंद) चंपेश्वर से 9 किमी दूर, यहाँ भगवान शिव का अघोर रूप उकेरा गया है। फणीकेश्वर महादेव (फिंगेश्वर, गरियाबंद) यहाँ शिवलिंग की ईशान रूप में पूजा की जाती है, और माता अंबिका इनकी अर्धांगिनी हैं। कोपेश्वर महादेव (कोपरा, गरियाबंद) यहाँ भगवान शिव वामदेव रूप में पूजे जाते हैं, और माता भवानी आनंद का प्रतीक मानी जाती हैं। यात्रा के समापन पर श्रद्धालु त्रिवेणी संगम स्थित श्री कुलेश्वर महादेव के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित करते हैं।

श्रद्धालु अपने सिर पर रोजमर्रा के सामान लादकर ’महादेव’ और ’राम सिया राम’ का जाप करते हुए यात्रा करते हैं। यह यात्रा अध्यात्मिक शांति, पुण्य अर्जन और काम, क्रोध, मोह, लोभ और मद जैसे विकारों से मुक्ति दिलाने में सहायक मानी जाती है। हथखोज स्थित शक्ति लहरी माता के दरबार में श्रद्धालु परसा पान, नारियल, अगरबत्ती और धूप समर्पित करते हैं। मकर संक्रांति के दिन श्रद्धालु नदी में सूखा लहर लेते हैं। इससे पहले रेत से शिवलिंग बनाकर उनकी पूजा-अर्चना की जाती है।

राजिम कुंभ केवल धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक समरसता का भी प्रतीक है। यहाँ श्रद्धालुओं को पंचकोशी यात्रा का आध्यात्मिक लाभ एक ही स्थान पर मिल रहा है। इस मेले में मनोरंजन, आध्यात्म और श्रद्धा का अद्भुत समन्वय देखने को मिल रहा है।

मुख्यमंत्री साय आज राजिम कुंभ में होंगे शामिल, पंडित प्रदीप मिश्रा द्वारा शिव महापुराण कथा सहित अनेक कार्यक्रम का होगा आयोजन

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Rajim Kumbh Mela 2024:: राजिम कुंभ कल्प मेला में आज जानकी जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय शामिल होंगे। अंतरराष्ट्रीय कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा का शिव महापुराण कथा सहित अनेक कार्यक्रम आयोजित होंगे।


कार्यक्रम की अध्यक्षता उप मुख्यमंत्री अरूण साव करेंगे। वहीं विशिष्ट अतिथि के रूप में कृषि मंत्री  राम विचार नेताम, वन मंत्री केदार कश्यप, वाणिज्य और उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन, वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी, स्वास्थ्य मंत्री  श्याम बिहारी जायसवाल, राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा तथा महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े सहित अनेक साधु-संत, जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक उपस्थित रहेंगे।

राजिम कुंभ कल्प में जानकी जयंती के पावन पर्व पर सोमवार 4 मार्च को दूसरा पर्व स्नान किया जाएगा। जानकी जयंती का पर्व पौराणिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। श्रद्धालुगण त्रिवेणी संगम स्थित कुंड में स्नान कर पुण्य लाभ के भागीदार बनेंगे। इस अवसर पर माता जानकी की विशाल शोभा यात्रा पूरे धार्मिक आयोजनों के साथ निकाली जाएगी, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुगण शामिल होंगे।


मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना से बेटियों के विवाह की चिंता हुई दूर : मंत्री राजवाड़े

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 रायपुर : राजिम कुंभ कल्प मेला के दौरान राजीव लोचन मंदिर प्रांगण में आज मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना अंतर्गत सामूहिक विवाह का आयोजन किया गया। योजना अंतर्गत जिले के 177 बेटियों का विवाह सम्पन्न हुआ। सभी जोड़ों का धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ विवाह सम्पन्न कराया गया।


कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल महिला एवं बाल विकास मंत्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े, जिले के प्रभारी मंत्री एवं खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री दयाल दास बघेल, राजिम विधायक रोहित साहू सहित क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों एवं आमजनों ने नवविवाहित जोड़ों को आशीर्वाद प्रदान किया। राज्य शासन द्वारा योजना अंतर्गत 50 हजार रुपए की आर्थिक सहायता नव विवाहित जोड़ों को दी जाती है। सामूहिक विवाह में वधुओं को 21 हजार रूपये का चेक राशि सहित शेष राशि से श्रृंगार सामग्री और घरेलू सामग्री उपहार स्वरूप प्रदान किया गया। सामूहिक विवाह में छुरा, मैनपुर, फिंगेश्वर, गरियाबंद एवं देवभोग विकासखंड के नवयुवक - युवतियां जोड़े शादी के पवित्र बंधन में बंधे।

सामूहिक कन्या विवाह में मौजूद महिला एवं बाल विकास मंत्रीमती राजवाड़े ने नवविवाहित जोड़ों को बधाई देते हुए कहा कि राज्य शासन द्वारा मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सभी वर्गो के लिए जनकल्याणकारी योजनाओं का संचालन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के कार्यकाल में मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना शुरू किया गया था। योजना अंतर्गत जनवरी 2024 तक प्रदेश में कुल 1 लाख 14 हजार 750 जोड़ों को लाभान्वित किया गया है। समाज में वैवाहिक कार्यक्रमों में खर्च को रोकने के लिए यह योजना लाभदायक है । मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत 50 हजार रूपये नव विवाहित जोड़ों को दिया जाता है। इससे विवाह के समय होने वाले खर्च और जरूरी तैयारियों की चिंता दूर हो गई। जिससे कमजोर एवं गरीब परिवारों के बेटियों के विवाह में होने वाले खर्च की भी बचत हो रही है। प्रधानमंत्री जी के गारंटी के तहत सभी विवाहितों के लिए महतारी वंदन योजना का शुभारंभ किया है, जिसमें अभी तक 70 लाख से महिलाओं का पंजीयन किया गया है। पात्र महिलाओं को इस योजना के माध्यम से प्रत्येक माह 1 हजार रुपये प्रदान किया जायेगा।

विश्वास ही विवाह का आधार, समन्वय के साथ वैवाहिक जीवन बिताएं - मंत्री बघेल

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे जिले के प्रभारी एवं खाद्य मंत्री दयालदास बघेल ने नव दंपत्तियों को वैवाहिक जीवन की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि विवाह का आधार विश्वास होता है। पति-पत्नी को एक-दूसरे पर विश्वास और समन्वयता के साथ वैवाहिक जीवन बिताना चाहिए। उन्होंने वर-वधुओं को एक-दूसरे का सम्मान करते हुए परिवारों का भी मान-सम्मान बनाये रखने के लिए प्रेरित किया।

 

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