Media24Media.com: रथयात्रा

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परंपरागत श्रद्धा-भक्ति और उल्लास के वातावरण में निकाली गई भव्य रथयात्रा

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रायपुर। जशपुर ज़िले के ऐतिहासिक एवं प्राचीन जगन्नाथ मंदिर दोकड़ा में इस वर्ष भी रथयात्रा महोत्सव का आयोजन परंपरागत श्रद्धा, भक्ति और भव्यता के साथ किया गया। मंदिर से रथ यात्रा के रवाना होने से पहले मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या देवी साय ने जगन्नाथ मंदिर में पूरे विधि-विधान से भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र एवं बहन सुभद्रा की पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि और कल्याण की मंगलकामना की। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने झाडू से रथयात्रा के मार्ग को बुहारकर छेरा-पहरा की रस्म निभाई।

मुख्यमंत्री साय ने हजारों श्रद्धालुओं के साथ भक्तिभावपूर्वक रथ यात्रा में भाग लिया। श्रद्धालुओं ने भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र एवं बहन सुभद्रा के रथ को रस्सी खींचकर आगे बढ़ाया। पूरा वातावरण जय जगन्नाथ के जयघोष, भजन-कीर्तन और भक्तिमय उल्लास से गूंज उठा। रथ यात्रा मुख्य मार्गों से होते हुए मौसीबाड़ी पहुंची। भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र एवं बहन सुभद्रा नौ दिनों तक अपनी मौसी के घर मौसीबाड़ी में विराजमान रहेंगे। नौवें दिन 5 जुलाई को शुभ वापसी श्री जगन्नाथ मंदिर, दोकड़ा में होगी। यह आयोजन ओडिशा के पुरी धाम की परंपरा के अनुरूप आयोजित किया गया है।

दोकड़ा में सन् 1942 से जारी है रथ यात्रा की परंपरा

रथ यात्रा की शुरुआत दोकड़ा में वर्ष 1942 में हुई थी। इसकी शुरूआत स्वर्गीय सुदर्शन सतपथी एवं उनकी धर्मपत्नी स्वर्गीय श्रीमती सुशीला सतपथी द्वारा श्रद्धा और समर्पण के साथ की गई थी। तब से यह परंपरा निरंतर श्रद्धा और उत्साह के साथ निर्विघ्न रूप से जारी है। समय के साथ यह आयोजन अब एक भव्य धार्मिक मेले का रूप ले चुका है, जिसमें श्रद्धालुओं की विशाल सहभागिता देखने को मिलती है।


रथ यात्रा के पावन अवसर पर ओडिशा से आमंत्रित कीर्तन मंडलियों ने भक्ति संगीत की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं, जिससे वातावरण भक्तिमय हो उठा। साथ ही रथ यात्रा में अनेक धार्मिक एवं सांस्कृतिक झांकियां भी शामिल रहीं, जो भगवान श्री जगन्नाथ की महिमा और हमारी सांस्कृतिक विविधता की भव्यता को अत्यंत आकर्षक रूप में प्रदर्शित कर रही थीं।

नौ दिनों तक चलेगा धार्मिक पर्व

श्री जगन्नाथ मंदिर समिति दोकड़ा के सदस्यों ने बताया कि रथ यात्रा महापर्व नौ दिवसीय भव्य धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस अवसर पर मंदिर परिसर और दोकड़ा गांव पूरे श्रद्धा और उत्साह से सराबोर रहता है। पूरे महोत्सव के दौरान विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान, भजन-कीर्तन, संगीतमय प्रस्तुतियाँ, सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ-साथ बच्चों और युवाओं के लिए विविध प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है, जो पूरे क्षेत्र को आध्यात्मिक ऊर्जा और सांस्कृतिक रंगों से भर देता है।


रथ यात्रा के उपलक्ष्य में दोकड़ा में एक विशाल मेले का भी आयोजन किया गया है, जो इस उत्सव की शोभा को और अधिक बढ़ा देता है। मेला परिसर में मनोरंजन के लिए झूले, स्वादिष्ट व्यंजनों के स्टॉल, पारंपरिक हस्तशिल्प की दुकानें और अन्य आकर्षण मौजूद हैं।  जो सभी के लिए आनंद का केंद्र बनते हैं। यह आयोजन आस्था, संस्कृति और सामाजिक समरसता का अद्भुत संगम है।

Chhattisgarh में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा के दौरान हादसा, युवक की हुई मौत

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राजिम : रथयात्रा के अवसर पर मंगलवार शाम को नवापारा शहर में विभिन्न मंदिरों से भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा निकाली गई। इसी कड़ी में नगर के साईं मंदिर की रथ यात्रा नगर भ्रमण के लिए निकली। साईं मंदिर का रथ यात्रा पूरी कर वापस लौट रहा था। इसी दौरान नवापारा रिलायंस पेट्रोल पंप के पास रथ अनियंत्रित हो गया और उसका गुंबज टूट गया।


टूटा हुआ गुंबज रथ के पीछे चल रहे युवक मोहित पर जा गिरा जिसमे वह गंभीर रूप से घायल हो गया । युवक को तत्काल प्रभाव से नगर के सामुदायिक अस्पताल में लाया गया। जहां पर डॉक्टरों ने युवक को मृत घोषित कर दिया।

मिली जानकारी अनुसार छांटा निवासी यह युवक रथ यात्रा देखने अपने रिश्तेदार के यह नवापारा आया हुआ था। मौके पर पहुंची नवापारा थाने की पुलिस टीम मामले की जांच में जुट गई। युवक की शिनाख्त कर शव को मर्चुरी में रखवा दिया गया है।


सराईपाली : रथयात्रा के दौरान हत्या, तीन लोगों को पुलिस ने किया गिरफ्तार

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सराईपाली. थाना सरायपाली में दिनांक 01 जुलाई 2022 को  धरमसिंह चौहान पिता संतोष चौहान निवासी वार्ड नंबर 15 महलपारा सरायपाली द्वारा रिपोर्ट दर्ज कराया गया. शाम करीब 6 बजे उनका लड़का दुष्यंत चौहान, भतीजा लक्ष्मण चौहान और नाती अंकित चौहान तीनों पैदल रथयात्रा देखने के लिये राजमहल मैदान सरायपाली गये थे। रथयात्रा से जाते समय रात करीबन 08:30 बजे राजमहल से पीछे गणेश जायसवाल निवासी संजयनगर सरायपाली ने पुरानी रंजिश को लेकर इसके पुत्र दुष्यंत चौहान को धारदार चाकू से मारकर हत्या कर दिया है. जिससे उसकी अस्पताल में मृत्यु हो गई है.

रिपोर्ट पर थाना सरायपाली में मर्ग इंटिमेशन कायम कर मर्ग पर से धारा 302 IPC का अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया. थाना सरायपाली पुलिस द्वारा आरोपी की गिरफ्तारी हेतु टीम गठित कर तत्काल रवाना किया गया. आरोपी की पता तलाश के दौरान मुखबिर से आरोपी गणेश जायसवाल को योगेश जायसवाल द्वारा मोटर सायकल में बिठाकर बरमकेला तरफ जाने की सूचना मिलने पर पुलिस टीम बरमकेला तरफ रवाना हुई. रास्ते में योगेश जायसवाल मोटर सायकल क्र. CG06GS 0150 से आते दिखा जिसे रोककर आरोपी के संबंध में पुछताछ किया गया.

जिस पर वह आरोपी को उसके मामा गांव ग्राम खैरगड़ी थाना सरिया जिला रायगढ उसके मामा के घर छोड़ना बताया. जिस पर योगेश जायसवाल को साथ लेकर ग्राम खैरगड़ी रवाना होकर आरोपी के मामा के यहां दबिश दिये. जिस पर आरोपी के वहां से अन्यत्र कहीं चले जाना पता चलने पर आरोपी का आसपास पता तलाश किया गया। पता तलाश के दौरान आरोपी को विग्नेश महापात्र के साथ मोटर सायकल क्र. CG13M 7722 से भागते देखा गया। जिन्हें घेराबंदी कर पकड़ा गया. आरोपी गणेश जायसवाल को पुछताछ करने पर हत्या करना स्वीकार किया.

योगेश जायसवाल एवं विग्नेश महापात्र द्वारा आरोपी को भगाने में सहयोग करना पाया गया. आरोपी गणेश जायसवाल से घटना में प्रयुक्त चाकू को जप्त किया गया तथा योगेश जायसवाल एवं विग्नेश महापात्र द्वारा घटना में प्रयुक्त उक्त दोनों मोटर सायकल को जप्त कर  लिया गया. अपराध घटित करना पाये जाने से आरोपीगण 1. गणेश जायसवाल पिता तीरथराम जायसवाल उम्र 21 वर्ष साकिन वार्ड नंबर 04 संजयनगर थाना सरायपाली, 

2. योगेश जायसवाल पिता तीरथराम जायसवाल उम्र 22 साल साकिन संजयनगर सरायपाली एवं 3. विग्नेश कुमार महापात्र पिता कन्हैया महापात्र उम्र 25 वर्ष साकिन खैरगढ़ी थाना सरिया जिला रायगढ को गिरफ्तार कर किया गया।  कार्यवाही में थाना प्रभारी निरीक्षक आशीष वासनिक, उप निरीक्षक विनोद नेताम, उप निरीक्षक अनिल पालेश्वर, म0प्र0आर0 हेमाद्री देवता, योगेंद्र दुबे, कमल जांगड़े, योगेंद्र बंजारे, मानवेंद्र ढीढी, दिनेश बुड़ेक, अनंत गेंड्रे, शिवशंकर राज प्रकाश साहू , अमित जायसवाल , अनिल मांझी व समस्त थाना स्टाफ का विशेष योगदान रहा.

श्री जगन्नाथ महाप्रभु की रथयात्रा 01 जुलाई और बाहुड़ा यात्रा 09 जुलाई को धूमधाम से मनाया जायेगा

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महासमुंद। श्री जगन्नाथ महाप्रभु की रथयात्रा 01 जुलाई और बाहुड़ा यात्रा 09 जुलाई को धूमधाम से होगी इस बार गायत्री नगर जगन्नाथ मंदिर रायपुर में भक्त और भगवान के सीधे संवाद का दूसरा नाम है, रथयात्रा। यह ऐतिहासिक व पारंपरिक पर्व है, जो सीधे भक्त को भगवान से जोड़ता है, जो न केवल छत्तीसगढ़ एवं ओडीशा राज्य की भावनाओं को आपस में जोड़ती है अपितु इन दोनों राज्यों के बीच आपसी भाईचारा एवं प्रेम बन्धुत्व की भावनाओं को आज के इस आधुनिक युग में  भी जीवन्त बनाए हुए हैं, जो हमारी धार्मिक आस्था एवं साम्प्रदायिक सद्भाव का प्रतीक है। 



इस वर्ष आषाढ़ मास की शुक्ल पक्ष की द्वितीया अर्थात 01 जुलाई को अत्यंत ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जायेगा। उक्ताशय की जानकारी पत्रकारों को देते हुए श्री जगन्नाथ मंदिर सेवा समिति के संस्थापक अध्यक्ष पुरन्दर मिश्रा ने रथयात्रा के बारे में विस्तार से बताया कि समूचे ब्रह्माण्ड में एकमात्र श्री जगन्नाथ महाप्रभु ही ऐसे भगवन् हैं, जो वर्ष में एकबार बाहर आकर अपने भक्तों को दर्शन देते हैं, और प्रसाद के रूप में अपना आशीर्वाद प्रदान करते हैं।
केवल पुरी स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर में जगन्नाथ जी, बलभद्र जी एवं सुभद्रा जी के लिए तीन अलग अलग रथ बनाए जाते हैं, उसके बाद यह गौरव छत्तीसगढ़ की संस्कारधानी रायपुर को प्राप्त है। छत्तीसगढ़ में आज भी ऐसे लाखों लोग हैं, जो किसी कारणवश पुरी स्थित श्री जगन्नाथ मन्दिर के दर्शन नहीं कर पा रहे हैं, ऐसे भक्तजनों के लिए रथयात्रा एक ऐसा स्वर्णिम अवसर रहता है जब भक्त और भगवान के बीच की दूरियां कम हो जाती हैं।
वैसे तो भगवान जगन्नाथ महाप्रभु जी की लीला अपरम्पार है, तथापि रथयात्रा से जुडे़ कुछ महत्वपूर्ण धार्मिक विधियों के बारे में जानकारी देते हुए उन्होने बताया कि वैसे इस यात्रा का शुभारम्भ ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन स्नान पूर्णिमा से  हो जाता है, जिसमें भगवान जगन्नाथ श्री मन्दिर से बाहर निकलकर भक्तिरस में डूबकर अत्यधिक स्नान कर लेते हैं, और जिसकी वजह से वे बीमार हो जाते हैं। पन्द्रह दिनों तक जगन्नाथ मन्दिर में प्रभु की पूजा अर्चना के स्थान पर दुर्लभ जड़ी बूटियों से बना हुआ काढ़ा तीसरे, पांचवे,
सातवें और दसवें दिन पिलाया जाता है। ऐसी पौराणिक मान्यता है कि  भगवान श्री जगन्नाथ को बीमार अवस्था में दर्शन करने पर भक्तजनों को अतिपुण्य का लाभ प्राप्त होता है। स्वास्थ्य लाभ प्राप्त होने के पश्चात् भगवान श्री जगन्नाथ जी अपने बड़े भाई बलराम एवं बहन सुभद्रा जी के साथ तीन अलग अलग रथ पर सवार होकर अपनी मौसी के घर अर्थात् गुण्डिचा मन्दिर जाते हैं, प्रभु की इस यात्रा को रथ यात्रा कहा जाता है। श्री जगन्नाथ जी के रथ को नन्दी घोष कहते हैं एवं बलराम दाऊ जी के रथ को तालध्वज कहते हैं, दोनों भाइयों के मध्य भक्तों का आकर्षण केन्द्र बिन्दु रहता है, बहन सुभद्रा जी देवदलन रथ पर सवार होकर गुण्डिचा मन्दिर जाती हैं।
 उक्त अवसर पर भगवान श्री जगन्नाथ महाप्रभु जी का नेत्र उत्सव हर वर्ष मनाया जाता है। रथयात्रा के दिन श्री जगन्नाथ मन्दिर में 11 पन्डितों द्वारा जगन्नाथ जी का विशेष अभिषेक, पूजा एवं हवन करते हुए रक्त चन्दन, केसर, गोचरण, कस्तूरी एवं कपूर स्नान के पश्चात् भगवान को गजामूंग का भोग लगाया जाता है। श्री जगन्नाथ जी बारह महीने में तेरह यात्रा करते हैं, केवल चार यात्राएं क्रमशः स्नान पूणिमा, नेत्रोत्सव या चन्दन यात्रा, रथयात्रा तथा बाहुड़ा यात्रा में श्री मन्दिर से बाहर निकलकर भक्तों के साथ यात्रा करते हैं।
 इस वर्ष गायत्री नगर स्थित श्री जगन्नाथ मन्दिर में रथयात्रा के सुअवसर पर राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उईके, मुख्यमंत्री छत्तीसगढ भूपेश बघेल जी, विधान सभा अध्यक्ष चरण दास महंत,  रावतपुरा सरकार जी महाराज, प्रभारी मंत्री रविन्द्र चौबे ,पूर्व विधान सभा अध्यक्ष गौरी शंकर अग्रवाल, नेता प्रतिपक्ष धरम लाल कौशिक, महापौर नगर निगम रायपुर ऐजाज ढ़ेबर, सांसद  सुनील सोनी,  संसदीय सचिव विकास उपाध्याय, विधायक, रायपुर ग्रामीण सत्य नारायण शर्मा, विधायक रायपुर उत्तर कुलदीप जुनेजा, विधायक रायपुर दक्षिण, बृजमोहन अग्रवाल, अध्यक्ष खनिज विकास निगम  गिरीश देवांगन, 
अध्यक्ष गौ सेवा आयोग  राम सुंदर दास जी, अध्यक्ष नागरिक आपूर्ति निगम  राम गोपाल अग्रवाल, प्रदेश अध्यक्ष भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस  मोहन मरकाम, अध्यक्ष श्रम कल्याण मंडल सुशील सन्नी अग्रवाल, पूर्व महापौर श्रीमान प्रमोद दुबे, नेता प्रतिपक्ष नगर निगम रायपुर श्रीमती मीनल चौबे, अध्यक्ष जोन क्रमांक 9 श्रीमान प्रमोद मिश्रा, अध्यक्ष जोन क्रमांक 4 प्रमोद साहू, प्रकाश दावड़ा, संगठन मंत्री भा. ज. पा.   पवन साय,पूर्व अध्यक्ष रायपुर विकास प्राधिकरण संजय श्रीवास्तव, लोकेश कावड़िया,पूर्व संगठन मंत्री श्रीमान राम प्रताप सिंह, दिलीप होरा, पूर्व अध्यक्ष छत्तीसगढ राज्य औद्योगिक विकास निगम़ छगन मूंधड़ा, पूर्व जिलाध्यक्ष रायपुर जिला भा. ज. पा राजीव अग्रवाल, मंदिर के सभी संरक्षक सदस्यगण एवं आजीवन सदस्यों को निमंत्रित किया  गया है।
 निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार इस वर्ष आमंत्रित अतिथिगण हवनकुण्ड में पूर्णाहुति के पश्चात् छेरा पहरा (रथ के आगे सोने की झाड़ू से बुहारना) के पश्चात् विशेष पूजा अर्चना महाप्रसाद वितरण, रथ खींच के भगवान के रथ को रवाना करने की रस्म अदा करेंगे। रथयात्रा गायत्री नगर स्थित श्री जगन्नाथ मन्दिर से प्रारम्भ होकर गुन्डिचा मन्दिर में समाप्त होगी। भक्तजनों की बढ़ती हुई संख्या को ध्यान में रखकर श्री जगन्नाथ मन्दिर सेवा समिति ने बड़े पैमाने पर प्रसाद वितरण की व्यवस्था की गई है।

 

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