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छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने यूनिसेफ, डबल्यूएचओ,एम्स सहित 05 संस्थाओं के साथ ऐतिहासिक एमओयू

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रायपुर। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के मार्गदर्शन  में स्वास्थ्य विभाग ने प्रदेश में स्वास्थ्य सेवा तंत्र को मजबूत, समावेशी और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकसित करने की दिशा में  ऐतिहासिक कदम उठाते हुए 05 प्रमुख राष्ट्रीय संस्थाओं के साथ समझौता ज्ञापन  पर हस्ताक्षर किया है।  नवा रायपुर स्थित महानदी भवन में आयोजित कार्यक्रम में स्वास्थ्य, परिवार कल्याण एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा विभिन्न सहयोगी संस्थाओं के साथ साझा दायित्वों और लक्ष्यों पर सहमति बनी। कार्यक्रम के दौरान सचिव, लोक स्वास्थ्य अमित कटारिया, आयुक्त सह संचालक डॉ प्रियंका शुक्ला, संचालक महामारी नियंत्रण डॉ एस. के. पामभोई, संबंधित स्वास्थ्य कार्यक्रमों के नोडल/उपसंचालक व सभी सहयोगी संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
               

विदित हो कि प्रदेश में स्वास्थ्य संकेतकों में निरंतर सुधार लाने एवं योजनाओं तथा परियोजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्य शासन ने एक संगठित एवं समन्वित तंत्र के रूप में "छत्तीसगढ़ साथी" पहल को प्रारंभ किया है। इसके सुचारू संचालन के लिए शासन द्वारा एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया है, जिसका उद्देश्य स्वास्थ्य क्षेत्र में कार्यरत विविध राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सहयोगी संस्थाओं के बीच समन्वय स्थापित करना है।यह समिति एक ऐसा संस्थागत मंच प्रदान करती है, जिसके माध्यम से साझेदार संगठन अपनी विशेषज्ञता, अनुभव और तकनीकी सुझाव सीधे विभाग के समक्ष प्रस्तुत कर सकते हैं।

इस साझेदारी का उद्देश्य प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं में संरचनात्मक सुधार, तकनीकी उन्नयन, जनसहभागिता और सेवा की पहुंच में व्यापक विस्तार सुनिश्चित करना है। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी), अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान रायपुर, सेंटर फॉर कैटालाइजिंग चेंज, बीवीएचए  सहित 05 संस्थाएं इस समझौते की साझेदार बनीं इसके साथ ही विश्व स्वास्थ्य संगठन व यूनिसेफ के वार्षिक एक्शन प्लान पर विस्तृत चर्चा की गई ।

इस ऐतिहासिक एमओयू में शामिल संस्थाएं अपने-अपने विशिष्ट क्षेत्रों में राज्य सरकार के साथ मिलकर समन्वित रूप से कार्य करेंगी। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) रायपुर राज्य में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने में सहयोग करेगा, वहीं यूनिसेफ पोषण, बाल स्वास्थ्य और मातृ सुरक्षा से जुड़े कार्यक्रमों को तकनीकी सहायता प्रदान करेगा। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डबल्यूएचओ) राज्य की संपूर्ण स्वास्थ्य प्रणाली को सुदृढ़ करने, संचारी एवं गैर-संचारी रोगों की रोकथाम तथा रोग निगरानी व्यवस्था को बेहतर बनाने में योगदान देगा। यूएनडीपी द्वारा टीकाकरण कार्यक्रमों को तकनीकी एवं रणनीतिक सहयोग मिलेगा, जबकि इविडेंस एक्शन राज्य में शिशु स्वास्थ्य और कृमि मुक्ति अभियान को सशक्त करेगा। सेंटर फॉर कैटालाइजिंग चेंज राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम के माध्यम से किशोरों के स्वास्थ्य और जागरूकता में सहयोग प्रदान करेगा, बीवीएचए लक्षित समुदायों के लिए विशेष स्वास्थ्य हस्तक्षेपों के क्रियान्वयन में भागीदारी करेगा और निमहांस  मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार व सुदृढ़ीकरण में तकनीकी मार्गदर्शन देगा।

ये सभी संस्थाएं मिलकर छत्तीसगढ़ में बहुआयामी स्वास्थ्य सुधारों की एक समेकित और टिकाऊ रूपरेखा विकसित करने में राज्य सरकार की भागीदार बनेंगी। कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों ने बताया कि छत्तीसगढ़ सरकार "स्वस्थ छत्तीसगढ़" की अवधारणा को धरातल पर साकार करने के लिए बहुस्तरीय प्रयास कर रही है, जिसमें इन संस्थाओं का सहयोग राज्य के लिए एक नई दिशा तय करेगा। इस समझौते के जरिए न सिर्फ़ दूरस्थ और अंतिम छोर में बसे व्यक्ति तक स्वास्थ्य सुविधाएं सुलभ होंगी, बल्कि मानव संसाधन और तकनीकी क्षमता में भी महत्वपूर्ण सुधार संभव होगा। यह समझौता मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने, डिजिटल स्वास्थ्य प्रणाली को सुदृढ़ करने और स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता एवं प्रभावशीलता लाने की दिशा में भी कारगर सिद्ध होगा। सरकार और साझेदार संस्थाओं ने इस अवसर पर यह विश्वास जताया कि यह सामूहिक पहल छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मानकों में अग्रणी राज्य बनाने में सहायक होगी और एक सशक्त, सुलभ तथा संवेदनशील स्वास्थ्य सेवा तंत्र की नींव रखेगी।


Radio4Child Workshop : यूनिसेफ द्वारा आयोजित कार्यशाला में देश के कोने-कोने से पहुंचे मीडियामैन, टीकाकरण और बाल सुरक्षा पर हो रही दो दिवसीय कार्यशाला

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 आनंदराम पत्रकारश्री.


भोपाल (मध्यप्रदेश)। यूनिसेफ द्वारा टीकाकरण और बाल सुरक्षा पर दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन भोपाल (मध्यप्रदेश) में किया गया है।कार्यशाला में देश के कोने-कोने से बड़ी संख्या में मीडियामैन पहुंचे हैं। 'रेडियो फ़ॉर चाइल्ड' कार्यशाला के एसएसडीएस मीडिया पार्टनर हैं। कार्यशाला के प्रथम दिवस (21 दिसम्बर 2023) को टीकाकरण और बाल सुरक्षा के साथ- साथ घरेलू हिंसा, बाल सुरक्षा में मीडिया का योगदान, बच्चों के अधिकार पर विस्तार से चर्चा की गई।


कार्यशाला के शुरुआत में यूनिसेफ भोपाल कम्युनिकेशन विशेषज्ञ अनिल गुलाटी ने सभी आगंतुकों का स्वागत करते हुए एजेंडा प्रस्तुत किया। प्रथम सत्र के अतिथि वक्ताओं में संचालक (टीकाकरण) डॉ संतोष शुक्ल, यूनिसेफ के टीकाकरण विशेषज्ञ डॉ मैनक चटर्जी, स्वास्थ्य विशेषज्ञ यूनिसेफ मध्यप्रदेश डॉ प्रशांत कुमार, IAP के सचिव डॉ राजेश टिक्का, महिला एवं बाल विकास विभाग के संयुक्त संचालक सुरेश तोमर, यूनिसेफ के बाल सुरक्षा विशेषज्ञ शर्मिला राय, यूनिसेफ मध्यप्रदेश के बाल सुरक्षा अधिकारी अद्वैता मराठे आदि ने कार्यशाला को संबोधित किया। संचालन यूनिसेफ के मीडिया कम्युनिकेशन अधिकारी सोनिया सरकार ने किया।

मुख्य वक्ता डॉ संतोष शुक्ला ने ट्रिपल-A की अवधारणा पर कहा कि तपती धूप, ठिठुरती ठण्ड और बरसती बरसात में भी ANM, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और आशा बहनें टीकाकरण अभियान में जमीनी स्तर पर जुटी रहती हैं। उन्होंने कहा कि "बच्चे फूल के समान होते हैं, उन्हें पैदा करें इतना ही काफी नहीं है। वह खुश्बू भी बिखेरें यह हम सब की जिम्मेदारी है।"

यूनिसेफ भोपाल के स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ प्रशांत कुमार ने स्वस्थ जीवन के चार आधार बताते हुए कहा कि स्वच्छ पेयजल से 80 प्रतिशत तक बीमारियां दूर रहती है। टीकाकरण का महत्व बताते हुए उन्होंने कहा कि 'लाइलाज-बीमारी, लाजवाब-टीके' यह मूलमंत्र है। जान जाएगी, अगर इसे नहीं जानें।

अन्य अतिथि वक्ताओं ने इस अवसर पर कहा कि भारत ने बच्चों के टीकाकरण में जबरदस्त प्रगति की है। भारत ने नियमित टीकाकरण कवरेज बढ़ाने में महत्वपूर्ण सोपान तय किया है। 12-23 महीने की आयु के बच्चों के बीच पूर्ण टीकाकरण कवरेज में 2016 में राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस-4) में 62 प्रतिशत से काफी सुधार दर्ज किया गया है, जो 2019-21 में आयोजित एनएफएचएस -5 में अखिल भारतीय स्तर पर 76 प्रतिशत हो गया है।

भारत का सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम (यूआईपी) हर साल 30 मिलियन से अधिक गर्भवती महिलाओं और 27 मिलियन बच्चों के टीकाकरण का लक्ष्य रखता है। यूनिसेफ विभिन्न रणनीतियों की योजना, कार्यान्वयन और निगरानी के माध्यम से आवश्यक स्वास्थ्य और टीकाकरण सेवाओं की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए भारत सरकार के साथ सहयोग करता है।

नवीनतम राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस-5) के आंकड़ों के अनुसार भारत के 36 में से 22 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में एफआईसी राष्ट्रीय औसत 76.4% से अधिक है।

यूनिसेफ की प्रमुख एसओडब्ल्यूसी जैसी वैश्विक रिपोर्ट भारत को दुनिया में सबसे अधिक वैक्सीन विश्वास वाले देशों में से एक के रूप में मान्यता देती है, जो टीकों के महत्व को संप्रेषित करने और टीके की झिझक को दूर करने के भारत के प्रयासों की प्रभावशीलता पर प्रकाश डालती है।

WHO-यूनिसेफ के राष्ट्रीय टीकाकरण कवरेज अनुमान (WUENIC) 2023 के अनुसार, भारत ने शून्य खुराक वाले बच्चों की संख्या 2020 में 3.5 मिलियन से घटाकर 2021 में 2.7 मिलियन कर दी। और 2022 में सबसे कम 1.1 मिलियन हो गई।

 शहरी गरीबों, प्रवासियों और दुर्गम आबादी तक पहुंच

सघन मिशन इंद्रधनुष (आईएमआई) के साथ भारत के प्रयासों ने शहरी गरीबों, प्रवासियों और दुर्गम आबादी जैसे कमजोर समुदायों में छूटे हुए बच्चों तक पहुंचने में मदद की है। आईएमआई (5.0) के साथ, भारत ने 2 से 5 साल की उम्र के ऐसे सभी बच्चों का टीकाकरण करने के लिए इस अवसर का उपयोग किया, जो समय पर अपनी एमआर और अन्य खुराक लेने से चूक गए थे।
भारत द्वारा की गई इस प्रगति में वैश्विक लक्ष्यों को गति देने की क्षमता है। इसे हासिल करने में भारत के नेतृत्व, सरकारों, यूनिसेफ और साझेदारों ने अहम भूमिका निभाई है।

टीकाकरण के लिए आने वाले बच्चों को लौटाया न जाए

अतिथि वक्ताओं ने कहा कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के लिए हमें मिलकर काम करने की जरूरत है। हम सुनिश्चित करें कि टीकाकरण के लिए आने वाले प्रत्येक बच्चे को लौटाया न जाए और उसे आवश्यक और उचित टीका और खुराक मिले। इसमें यह सुनिश्चित करना शामिल है कि हर स्तर पर आवश्यक संसाधन हों।

भारत में महिलाओं तक समुदाय-आधारित पहुंच टीके के प्रति विश्वास और टीकाकरण दर में सुधार लाने में प्रभावी साबित हुई है। अध्ययनों से पता चला है कि कहानियों, गीतों और चित्र पहेलियों का उपयोग करके महिला स्वसहायता समूह की बैठकों में स्वास्थ्य शिक्षा को शामिल करने से उम्र के अनुरूप टीकाकरण को 9 प्रतिशत तक बढ़ाया जा सकता है।

यूनिसेफ, एजेंसियों और भागीदारों के साथ, टीकाकरण प्रणालियों को मजबूत करने, टीकाकरण की मांग में तेजी लाने और वंचित बच्चों के लिए कवरेज के लिए भारत सरकार के प्रयासों का समर्थन करता है। इसमें गहन मिशन इंद्रधनुष कार्यक्रम का समर्थन करना शामिल है, जिसमें छूटे हुए या पढ़ाई छोड़ चुके बच्चों को शामिल किया गया है।

2023 में, 765 जिलों में गहन अभियान (आईएमआई 5.0) लागू किए गए। जिससे 9.5 मिलियन से अधिक बच्चे पहुंचे, जो महामारी के कारण उत्पन्न व्यवधानों के कारण समय पर टीकाकरण कराने से चूक गए थे। 2022 में, यह अभियान लगभग 6 मिलियन छूटे हुए बच्चों और 1.5 मिलियन गर्भवती महिलाओं तक पहुंचा और उन्हें नियमित टीकाकरण सेवाओं के दायरे में लाया।

उन्होंने कहा कि धार्मिक नेता, मीडिया और नागरिक समाज संगठन समाज में बाल स्वास्थ्य पर जानकारी प्रसारित करने और विशेष रूप से कम प्रदर्शन वाले क्षेत्रों में समुदायों में मानसिकता को प्रभावित करने में बहुत बड़ी भूमिका निभाते हैं।

आपूर्ति श्रृंखला के मानकीकरण और गुणवत्ता में वृद्धि के लिए प्रभावी वैक्सीन प्रबंधन (ईवीएम) प्रक्रिया के तकनीकी समर्थन से राष्ट्रीय ईवीएम स्कोर 2018 में 68 प्रतिशत से बढ़कर 2022 में 82 प्रतिशत हो गया। हालाँकि महत्वपूर्ण प्रगति हुई है, चिंता के कुछ क्षेत्र अभी भी बने हुए हैं।

 अभी भी आबादी और क्षेत्रों तक पहुँचना बाकी

देश के ठोस प्रयासों ने कोविड-19 महामारी के कारण टीकाकरण कवरेज में आई गिरावट की भरपाई कर ली है, लेकिन अभी भी आबादी और क्षेत्रों तक पहुँचना बाकी है। भारत ने शून्य खुराक वाले बच्चों (पहुंच से वंचित और छूटे हुए) की संख्या को 2021 में 2.7 मिलियन से घटाकर 2022 में 1.1 मिलियन (WUENIC) कर दिया है। भारत में DTP-1 कवरेज 2019 में 94 प्रतिशत से घटकर 2021 में 88 प्रतिशत हो गया। हालांकि 2022 में कवरेज में 95% की वृद्धि देखी गई है, लेकिन आंशिक रूप से टीका लगाए गए और बिना टीकाकरण वाले बच्चों में टीके के कारण रुग्णता और मृत्यु का खतरा बना हुआ है। देश भर में फैले इन बच्चों की पहचान करना और उनका टीकाकरण करना महत्वपूर्ण है।

हालांकि यह एक महत्वपूर्ण संख्या है, भारत के आकार और दुनिया के सबसे बड़े जन्म समूह को देखते हुए, यह देश की 460 मिलियन (18 वर्ष से कम) की बाल आबादी के अपेक्षाकृत छोटे अनुपात का प्रतिनिधित्व करता है।

सभी भौगोलिक स्थानों-ग्रामीण और शहरी- में गरीबों, हाशिए पर रहने वाले, अशिक्षित समूहों के बीच टीकाकरण अंतराल को कम करना प्राथमिकता होनी चाहिए। हमें यह सुनिश्चित करने के लिए हर राज्य, हर जिले और हर समुदाय में टीकाकरण अंतर को कम करना होगा। बच्चों को टीके से रोकी जा सकने वाली बीमारियों से जीवन भर सुरक्षा मिलती है।

टीके की खुराक छूटने के सामान्य कारणों में जागरूकता और सूचना का अभाव, परिचालन अंतराल के साथ एईएफआई की आशंकाएं, बच्चे घर पर नहीं हो सकते हैं या माता-पिता टीकाकरण से इनकार कर सकते हैं।

टीकाकरण : इस तरह बढ़ सकते हैं आगे

आईएमआई 5.0 उन बच्चों तक पहुंचा जिन्हें कुछ खुराक नहीं मिली थी या छूट गई थी और उन्हें टीकाकरण के लिए प्राथमिकता दी गई। हालाँकि, शून्य खुराक वाले बच्चों तक पहुँचने पर ध्यान डीटीपी युक्त टीके की पहली खुराक प्रदान करने तक नहीं रुकता है। लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि इन बच्चों को यूआईपी अनुसूची के अनुसार सभी टीकों से पूरी तरह से प्रतिरक्षित किया जाए।

यूनिसेफ भारत के नेतृत्व से अन्य देशों के लिए मॉडलिंग की सफलता और प्रतिबद्धता को जारी रखने का आह्वान कर रहा है, विशेष रूप से जी-20 प्रेसीडेंसी के दौरान यह उल्लेखनीय हुआ। टीकाकरण कार्यक्रमों और मजबूत सामुदायिक भागीदारी की लगातार अनुशंसा करके, भारत का उदाहरण सुदूरवर्ती क्षेत्रों में सबसे कमजोर बच्चों के लिए जीवन रक्षक टीकों तक पहुंच प्रदान करने का एक मॉडल है।

भारत के कोविड-19 टीकाकरण कार्यक्रम की सफलता ने देश की कोल्ड चेन और टीकाकरण बुनियादी ढांचे के साथ-साथ स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की क्षमता में सुधार और मजबूती की अनुमति दी है, जिससे नियमित टीकाकरण प्रयासों में दक्षता में वृद्धि हुई है।


स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं, गैर सरकारी संगठनों, सामुदायिक नेताओं और व्यक्तियों को एक साथ मिलकर काम करके, हम अधिक प्रभाव पैदा कर सकते हैं, टीकाकरण कवरेज में सुधार कर सकते हैं और भावी पीढ़ियों के स्वास्थ्य की रक्षा कर सकते हैं।

कार्यशाला में भोपाल के अलावा औरंगाबाद, पुणे, हरदोई, जयपुर, महासमुन्द, रायपुर, नई दिल्ली, रांची, जम्मू, लखनऊ, नागपुर, मुंबई, चंडीगढ़ से मीडियामैन बड़ी संख्या में भाग ले रहे हैं।

इन्टेन्सिफाइड मिशन इंद्रधनुष 5.0 पर मीडिया कार्यशाला का आयोजन

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रायपुर। राज्य शासन के स्वास्थ्य विभाग और यूनिसेफ द्वारा आज टीकाकरण, आईएमआई (Intensified Mission Indradhanush) 5.0 तथा यू-विन पोर्टल के बारे में मीडियाकर्मियों को सेन्सिटाइज करने कार्यशाला का आयोजन किया गया। रायपुर के एक निजी होटल में आयोजित राज्य स्तरीय मीडिया कार्यशाला में प्रदेश के कई जिलों के मीडियाकर्मी शामिल हुए। कार्यशाला में पांच वर्ष तक के हर बच्चे तक सभी टीकों की पहुंच सुनिश्चित करने, लोगों को टीकाकरण का महत्व बताने तथा उन्हें इसके लिए प्रेरित करने एवं टीकाकरण से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने में मीडिया की भूमिका को रेखांकित किया गया। मीडियाकर्मियों ने अधिकारियों से सवाल पूछकर टीकाकरण एवं इन्टेन्सिफाइड मिशन इंद्रधनुष 5.0 से संबंधित अपनी जिज्ञासाओं और शंकाओं का समाधान किया। 

संचालक, महामारी नियंत्रण डॉ. सुभाष मिश्रा ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि टीकाकरण से बच्चों की मृत्यु और विकलांगता रोकी जा सकती है। टीकों के माध्यम से हम बच्चों को जितना अधिक सुरक्षित कर सकते हैं, करना चाहिए। यह उन्हें बीमारियों से बचाती है। बच्चों की अच्छी इम्युनिटी और अच्छी सेहत के लिए नियमित टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल सभी टीके लगवाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मीडिया लोगों तक जानकारी पहुंचाने और उन्हें जागरूक करने का सशक्त माध्यम है। इनकी अच्छी पहुंच है और यह लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा है। सघन टीकाकरण अभियान आईएमआई 5.0 को ज्यादा से ज्यादा बच्चों तक पहुंचाने और उनका जीवन सुरक्षित करने में मीडिया के साथियों का भरपूर सहयोग मिलेगा, ऐसी वे अपेक्षा करते हैं।

राज्य टीकाकरण अधिकारी डॉ. वी.आर. भगत ने कार्यशाला में कहा कि आईएमआई 5.0 के माध्यम से टीकाकरण से छूटे पांच वर्ष तक के हर बच्चे का टीकाकरण सुनिश्चित किया जाएगा। प्रदेश भर में तीन चरणों में यह अभियान संचालित किया जाएगा। पहला चरण 7 अगस्त से 12 अगस्त तक, दूसरा चरण 11 सितम्बर से 16 सितम्बर तक तथा तीसरा चरण 9 अक्टूबर से 14 अक्टूबर तक चलाया जाएगा। जो बच्चे नियमित टीकाकरण में छूट गए हैं, उनका इस अभियान के दौरान टीकाकरण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आईएमआई 5.0 में खसरा और रूबेला के उन्मूलन पर खास जोर दिया जा रहा है।

यूनिसेफ के छत्तीसगढ़ प्रमुख जॉब जकारिया ने कार्यशाला में कहा कि नियमित टीकाकरण बच्चों के लिए जीवनरक्षक और विकलांगता से बचानेवाला है। पूरी दुनिया में हर साल पांच वर्ष तक की उम्र के 50 लाख बच्चों की मृत्यु होती है जिनमें से 15 लाख बच्चे ऐसे हैं जो टीकों से दूर हैं। उन्होंने कहा कि टीकाकरण को लेकर लोगों में झिझक, भ्रांति और गलत धारणाएं हैं। कुछ प्रतिकूल घटनाओं के कारण भी कई बार लोग टीकाकरण के लिए नहीं आते हैं। हर बच्चे तक सभी टीकों की पहुंच सुनिश्चित करने इन बाधाओं को दूर करने में मीडिया अहम योगदान दे सकती है। जकारिया ने मीडियाकर्मियों से आग्रह किया कि वे इन्टेन्सिफाइड मिशन इंद्रधनुष 5.0 और टीकाकरण के फायदों के बारे में लोगों को बताएं। उन्हें जागरूक व शिक्षित करें तथा टीकों से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करें।

कार्यशाला में यूएनडीपी के राज्य कार्यक्रम अधिकारी अंशुमन मोइत्रा ने टीकाकरण का रिकॉर्ड रखने और रिपोर्टिंग के लिए तैयार किए गए पोर्टल यू-विन (U-Win) के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि गर्भवती महिलाओं एवं बच्चों के टीकाकरण के लिए भारत सरकार द्वारा यू-विन डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार किया गया है। इसके माध्यम से लाभार्थियों का नेम बेस्ड ट्रैकिंग किया जा सकता है जिससे सभी बच्चों को समय पर टीका लगाने में सहायता मिलेगी और लेफ्ट-आउट एवं ड्रॉप-आउट बच्चों की संख्या को कम किया जा सकेगा। यू-विन के माध्यम से टीकाकरण के तुरंत बाद डिजिटल सर्टिफिकेट जारी हो जाता है। 

विश्व सोशल मीडिया दिवस पर 'सोशल मीडिया 4 सोशल गुड' विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन

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रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन के जनसंपर्क विभाग ,यूनिसेफ और छत्तीसगढ़ एलायंस फॉर बिहेवियर चेंज के संयुक्त तत्वावधान के संयुक्त तत्वाधान में  30 जून को "विश्व सोशल मीडिया दिवस" के अवसर पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।

कार्यशाला में प्रदेश के सोशल मीडिया इनफ्लूएंसर, समाज सकारात्मक बदलाव में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा करने वाले सोशल चेंज मेकर्स ,समाज सेवी ,स्वयं सेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि,वोलेंटियर और विभिन्न शैक्षणिक संस्थाओं के विद्यार्थी शामिल हुए जिन्होंने समुदायों के भीतर व्यवहार परिवर्तन को बढ़ाने के लिए सोशल मीडिया टूल का प्रभावी ढंग से उपयोग किया है।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन ,छत्तीसगढ़ महतारी की तस्वीर पर माल्यार्पण और राज्य गीत के साथ किया गया। "सोशल मीडिया 4 सोशल गुड" थीम पर हुए आयोजन में यूनिसेफ छत्तीसगढ़ के प्रमुख जॉब जकारिया ने अपने उद्बोधन में कहा कि  सकारात्मक बदलाव के उत्प्रेरक के रूप में सोशल मीडिया की क्षमता को पहचान कर उसका उपयोग करना चाहिए।

जनसंपर्क विभाग के संचालक सौमिल रंजन चौबे ने सोशल मीडिया फॉर गुड गवर्नेंस विषय पर प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया उन्होंने कहा राज्य शासन की महत्त्वपूर्ण  योजनाओं के व्यापक प्रचार प्रसार हेतु जनसंपर्क विभाग द्वारा सोशल मीडिया का बेहतर इस्तमाल किया जा रहा है। अपनी  नैतिक जिम्मेदारी के तौर पर विभाग की यह कोशिश रहती है कि गलत सूचनाओं के बारे में जनता को आगाह करते रहें। उन्होंने  कहा कि, आज जिस तरह सोशल मीडिया का प्रभाव बढ़ रहा है, ऐसे में हमें यह भी तय करना है कि हमारी सामाजिक जिम्मेदारी क्या है। उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया के माध्यम से राज्य शासन को आम जनता की समस्या का त्वरित समाधान करने में काफी मदद मिली है। आज कोई भी व्यक्ति सोशल मीडिया के माध्यम से मुख्यमंत्री भूपेश बघेल तक अपनी बात पहुंचा सकता है।

कार्यक्रम में  2016 में फोर्ब्स एशिया 30 अंडर 30 के रूप में सूचीबद्ध प्रसिद्ध डॉक्यूमेंट्री फोटोग्राफर विकी रॉय ने "फोटोग्राफी ए मिरर टू द सोसायटी" विषय पर बात की। उन्होंने बताया कि फोटोग्राफी और सोशल मीडिया के बेहतर उपयोग से समाज के ज़रूरत मंद लोगों तक कैसे मदद पहुंचाई जा सकती है। उन्होंने अपनी कला के बेहतर प्रचार प्रसार हेतु सोशल मिडिया के प्रभाव पर भी चर्चा की।

कार्यशाला में दो पैनल डिस्कशन हुए पहले पैनल डिस्कशन में "सोशल मीडिया के इस्तेमाल से व्यवहार परिवर्तन" विषय पर चर्चा किया गया। इसमें कलाकार प्रमोद साहू, "बंच ऑफ़ फूल्स"के सतीश भुवालका, रेडियो जॉकी की रिचा गोस्वामी, और अन एक्सप्लोर्ड बस्तर के जीत सिंह आर्या ने प्रभावी तरीके से अपनी बात रखी।

दूसरे पैनल डिस्कशन में सामाजिक समस्या और उसके समाधान के लिए सोशल मीडिया के श्रृंखलाबद्ध इस्तेमाल पर चर्चा हुई। इसमें बतौर पैनलिस्ट इंटरनेशनल मॉडल की वीना सेंद्रे, ह्यूमन ऑफ छत्तीसगढ़ के आकाश गुप्ता और फूड ब्लॉगर  मयंक कर्रा ने अपने विषयों पर अपने अनुभव बताए। यूनिसेफ एस बी सी स्पेशलिस्ट अभिषेक सिंह ने प्रतिभागियों को सोशल मीडिया पर व्यवहार परिवर्तन पर मार्गदर्शन दिया। इस अवसर पर पूरे प्रदेश से आए सोशल मीडिया के बेस्ट परफॉर्मर्स को प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया। कार्यक्रम में एस बी सी कंसल्टेंट श्रीमती नियति राज चंदन कुमार, छत्तीसगढ़ संवाद से महाप्रबंधक विनायक शर्मा, सहित बड़ी संख्या में सामाजिक परिवर्तन के वाहक युवा स्वयं सेवकों ने शिरकत की।

सुपोषित छत्तीसगढ़ बनाने गांव-गांव हुआ पोषण पखवाड़े का आयोजन

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रायपुर। छत्तीसगढ़ के गांव-गांव में सुपोषित छत्तीसगढ़ के ध्येय से पोषण जागरूकता पखवाड़े का आयोजन किया गया। 20 मार्च से 03 अप्रैल तक चले इस पखवाड़े में बच्चों तथा महिलाओं के पोषण एवं स्वास्थ्य देखभाल संबंधी जागरूकता और आदतों में सुधार लाने के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। पखवाड़े में सुपोषण रथ, पोषण साइकल/बाइक रैली, मैराथन, मिलेट्स जागरूकता कैम्प, सुपोषण चौपाल, अम्मा की रसोई का भी आयोजन किया गया। इन कार्यक्रमों में महिलाओं और बच्चों के साथ ही पंचायत प्रतिनिधि, गांव के युवा, विभिन्न विभागों के अधिकारी और यूनिसेफ के प्रतिनिधि भी शामिल हुए।

महिला एवं बाल विकास विभाग संचालक श्रीमती दिव्या मिश्रा ने बताया कि पोषण पखवाड़े के दौरान प्रत्येक दिन के लिए कलेण्डर अनुसार गतिविधियां आयोजित की गई। इन गतिविधियों के माध्यम से व्यक्तिगत और सामुदायिक स्तर पर पोषण सम्बन्धित व्यवहार परिवर्तन का प्रयास किया गया। पोषण पखवाड़े के दौरान आयुष, पंचायत, कृषि सहित अन्य विभागों, जनप्रतिनिधियों का पूरा सहयोग मिला। पोषण पखवाड़े के दौरान कई किसान, पंचायत प्रतिनिधि, युवा भी इस अभियान से जुड़े। यूनिसेफ ने पोषण संबंधी संदेश और वीडियो के माध्यम से तकनीकी सहयोग प्रदान किया।

श्रीमती मिश्रा ने बताया कि पोषण पखवाड़े के दौरान बच्चों का वजन, लंबाई एवं ऊंचाई मापन कर बच्चों में पोषण स्थिति की जानकारी लेकर पोषण ट्रैकर ऐप में दर्ज किया गया है। इस दौरान विकासखण्ड स्तर पर बेहतर काम करने के लिए दो-दो आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को पुरस्कृत भी किया जाएगा। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को एकमुश्त विशेष मानदेय के रूप में 5000 रूपये और सहायिकाओं को 2500 रूपये प्रदान किए जाएंगे। 

पोषण पखवाड़े के दौरान मुख्य रूप से पोषण कल्याण के लिए मिलेट्स के प्रचार-प्रसार और लोकप्रियता, स्वस्थ्य बालक-बालिका स्पर्धा और सक्षम आंगनबाड़ी केन्द्र संबंधित थीम आधारित गतिविधियों का आयोजन किया गया। इस दौरान लोगों को मिलेट्स के फायदों के बारे में जानकारी देकर उन्हें इसेे दैनिक आहार में शामिल करने के लिए जागरूक किया गया। पोषण पखवाड़े के दौरान महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा अन्य विभागों के समन्वित प्रयास से छत्तीसगढ़ में 2 लाख 68 हजार 180 गतिविधियां आयोजित की गई। पोषण पखवाड़े के समापन अवसर पर आज महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा आयोजित वेबिनार में यह जानकारी दी गई। वेबिनार में सभी जिलों के विभागीय अधिकारी सहित स्वास्थ्य, पंचायत, कृषि सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी और यूनिसेफ के प्रतिनिधि शामिल हुए।

पोषण पखवाड़ा : जंक फूड की जगह ’मिलेट्स’ को दैनिक जीवन में अपनाएं युवा

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रायपुर। पोषण पखवाड़े के अवसर पर महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा आज यूनिसेफ के सहयोग से युवाओं में पोषण जागरूकता के लिए राज्य स्तरीय वेबीनार का आयोजन किया गया। वेबीनार के माध्यम से युवाओं को मिलेट्स के फायदे समझाते हुए उन्हें दैनिक जीवन में मिलेट्स को शामिल करने के लिए प्रेरित किया गया। वेबीनार से फेसबुक लाइव के माध्यम से नेहरू युवा केन्द्र, भारत स्काउट-गाइड, एनएसएस, यूनिसेफ सहित विभागीय अमले सहित बड़ी संख्या में युवाओं ने भाग लिया।

महिला एवं बाल विकास विभाग के नोडल अधिकारी जी.एस.मरावी ने बताया कि 20 मार्च से महिला एवं बाल विकास द्वारा अन्य विभागों के सहयोग से पोषण पखवाड़ा मनाया जा रहा है। इस दौरान लोगों में पोषण जाकरूकता और व्यवहार परिवर्तन के लिए कई कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं। विभागीय अधिकारी श्रीमती श्रुति नेरकर ने कहा कि पहले पूर्वज अन्न या मिलेट्स का प्रयोग करत थे। लेकिन बदलते समय में घरों में खानपान की शैली बहुत बदल गई है।

मिलेट्स को फिर भोजन में शामिल कर पोषण के सभी फायदे लिये जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि महिला बाल विकास, स्वास्थ्य विभाग कुपोषण से लंबे समय से लड़ाई कर रहा है। बच्चों, महिलाओं, किशोरियों को पोषण आहार और रेडी टू ईट प्रदान किया जा रहा है। लेकिन इसमें विभाग के साथ समाज के हर व्यक्ति की सहभागिता जरूरी है। पोषण संबंधित व्यवहार और खानपान परिवर्तन में युवा बड़ी भूमिका निभा सकते है। मिलेट्स से कई प्रकार के स्वादिष्ट व्यंजन बनाए जा सकते हैं। युवा जंक फूड को छोड़कर पौष्टिक भोजन और स्वस्थ जीवन शैली अपनाएं और दूसरों को भी प्रेरित करें।

यूनिसेफ के न्यूट्रीशन विशेषज्ञ महेन्द्र प्रजापति ने बताया कि मिलेट्स पचने में आसान होते हैं इसलिए बच्चे से लेकर बुजुर्गों तक के लिए उपयोगी हैं। इसमें सारे पौष्टिक तत्व मिल जाते हैं। कम पानी और जमीन में अधिक उपज के कारण यह पर्यावरण के भी अनुकूल है। ये ज्यादा महंगे भी नहीं होते। उन्होंने बताया कि किशोरावस्था में वृद्धि और विकास तेजी से होता है। इस समय संतुलित आहार लेना जरूरी है। आजकल प्रोसेस्ड फूड के दुष्प्रभाव के कारण कुपोषण और मोटापा अधिक देखने को मिल रहा है।

उन्होंने बताया कि 2016 से 18 के बीच किये गए न्यूट्रीशन सर्वे के अनुसार बड़ी संख्या में किशोर और किशोरियों में आयरन, विटामिन ए, डी और विटामिन बी-12 की कमी देखी गई। यह भी पाया गया है कि बड़ी संख्या में किशोर नमक, शक्कर और फैट रिच फूड लेते हैं। प्रोसेस्ड फूड या जंक फूड में कैलोरी बहुत ज्यादा होती है और प्रोटीन और फाइबर बहुत कम होते हैं। इसके कारण युवाओं को उचित पोषण नहीं मिल रहा है। मिलेट्स के माध्यम से युवा संतुलित आहार ले सकते हैं, इसमें सभी सूक्ष्म और बड़े पोषक तत्व मिल जाते है।यूनिसेफ के विशेषज्ञ अभिषेक सिंह ने युवाओं के लिए पोषण और मिलेट्स कोलोकप्रिय बनाने में युवाओं की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सकारात्मक व्यवहार परिवर्तन को प्रभावित करने के लिए लक्षित समूह को समझना और उनके मिथकों को दूर करना जरूरी है।

छत्तीसगढ़ के 26 स्कूलों को राज्य स्तरीय स्वच्छता पुरस्कार

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रायपुर। भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की जयंती बाल दिवस के अवसर पर यूनिसेफ और छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा संयुक्त रूप से राज्य स्तरीय स्वच्छ विद्यालय पुरस्कार समारोह का आयोजन किया जायेगा। इस अवसर पर स्वच्छ विद्यालय की दिशा में उत्कृष्टता के लिए छत्तीसगढ़ के 11 जिलों के 26 स्कूलों को सम्मानित किया जायेगा। इसमें ओवरऑल परफॉर्मेंस पर 20 स्कूलों को और उप-श्रेणियों में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए छह स्कूलों को सम्मानित किया जाएगा।



स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम राजधानी रायपुर के साइंस कॉलेज परिसर स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय आडिटोरियम में 14 नवंबर को दोपहर 3 बजे राज्य स्वच्छ विद्यालय पुरस्कार के लिए चयनित सभी 26 स्कूलों को सम्मानित करेंगे। कार्यक्रम में संसदीय सचिव द्वय द्वारकाधीश यादव और विकास उपाध्याय, महापौर रायपुर नगर पालिका निगम एजाज ढेबर, विधायक सत्यनारायण शर्मा, विधायक कुलदीप जुनेजा, प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा विभाग डॉ. आलोक शुक्ला, सचिव डॉ. एस. भारतीदासन और प्रबंध संचालक समग्र शिक्षा नरेंद्र कुमार दुग्गा भी उपस्थित रहेंगे।

उल्लेखनीय है कि बिलासपुर जिले के टैगोर इंटरनेशनल स्कूल सकरी तखतपुर को भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय द्वारा 19 नवंबर को नई दिल्ली में आयोजित किए जाने वाले राष्ट्रीय स्वच्छ विद्यालय पुरस्कार के लिए चुना गया है। इसमें देश भर के 39 स्कूलों को राष्ट्रीय पुरस्कार 2022 के लिए चुना गया है। छत्तीसगढ़ के 55,217 स्कूलों सहित देश भर के लगभग आठ लाख स्कूलों ने स्वच्छ विद्यालय पुरस्कार, 2021-22 में भाग लिया है। छत्तीसगढ़ राज्य ने स्वच्छ विद्यालय पुरस्कार 2021-22 में अधिकतम स्कूल भागीदारी के लिए 97.7 प्रतिशत आवेदन जमा करने के रिकॉर्ड के साथ देश में तीसरा स्थान हासिल किया है।

यह पुरस्कार दो श्रेणियों में दिया जाता है, जिसमें सभी उप-श्रेणियों (कुल स्कोर) में समग्र प्रदर्शन और प्रत्येक उप-श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन अर्थात पानी, शौचालय, धुलाई, संचालन रखरखाव, क्षमता निर्माण और व्यवहार परिवर्तन और कोविड-19 की तैयारी के लिए दिया जाता है। रायपुर में आयोजित कार्यक्रम में ओवरऑल परफॉर्मेंस पर 20 स्कूलों को सम्मानित किया जाएगा। इनमें हायर सेकंडरी स्कूल आदित्य बिड़ला पब्लिक स्कूल रावन जिला बलौदाबाजार, सेंट जेवियर्स पी.एस.राजपुर जिला बलरामपुर

शासकीय उच्च विद्यालय पाली और टैगोर इंटरनेशनल स्कूल सकरी जिला बिलासपुर, शासकीय शिव सिंह वर्मा बालिका हायर सेकंडरी स्कूल धमतरी, शासकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय पोटिया और स्वामी आत्मानंद शासकीय इंग्लिश मीडियम स्कूल, कुम्हारी जिला दुर्ग शामिल हैं। इसके साथ ही जशपुर जिले की शासकीय उच्च प्राथमिक शाला दुलदुला, स्वामी आत्मानंद शासकीय उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम नवीन आदर्श हायर सेकंडरी स्कूल जशपुर,  शासकीय उच्च प्राथमिक बासनताला जशपुर, सेंट मैरी इएमएस, कुनकुरी, डीएवी पब्लिक स्कूल, कंडोरा, कवर्धा जिले की शासकीय उच्च प्राथमिक परसवारा और शासकीय उच्च प्राथमिक भगतपुर, कोरिया जिले की किड्स कैंपस पब्लिक स्कूल, हीरागिरी हल्दीबाड़ी, महासमुंद जिले की शासकीय उच्च प्राथमिक कासेकेरा और जवाहर नवोदय विद्यालय सरायपाली

रायगढ़ जिले की शासकीय हायर सेकंडरी स्कूल  रायकेरा, रायपुर जिले की बीपी पुजारी उत्कृष्ट इंग्लिश मीडियम स्कूल राजातालाब और द ग्रेट इंडिया स्कूल आरंग शामिल हैं। उप-श्रेणियों में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए छह स्कूलों को सम्मानित किया जाएगा। इनमें धमतरी जिले में कुरूद के ग्राम दर्रा का शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल, दुर्ग जिले का केपीएस इंग्लिश मीडियम स्कूल और बीएसपी हायर सेकेंडरी स्कूल, कोरिया जिले का जवाहर नवोदय विद्यालय केनापारा, महासमुंद जिले का केंद्रीय विद्यालय और राजधानी रायपुर माना कैम्प स्थित जवाहर नवोदय विद्यालय शामिल है।

भोरिंग में रोको और टोको जागरूकता कार्यक्रम, ग्रामीण पहले से और अधिक जागरूक हो रहे

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महासमुंद। जिले में जिला प्रशासन और यूनिसेफ के संयुक्त तत्वाधान में संचालित 5 संकल्प "स्वस्थ आज और कल" के तहत ग्राम पंचायत भोरिंग में रोको और टोको जागरूकता अभियान कार्यक्रम आयोजित हुआ। इसमें अभियान से राष्ट्रीय सेवा योजना जुड़े विद्यार्थी शामिल थे। मुख्य अतिथि सीईओ,जिला पंचायत  एस.आलोक दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं, किशोर-किशोरियों और  ग्राम वासियों,



मुख्य कार्यपालन अधिकारी एस.आलोक ने मुख्य अतिथि की आसंदी से संबोधित करते हुए कहा कि  ज़िले में  ज़िला प्रशासन और यूनिसेफ के सहयोग से पांच संकल्प जागरूकता कार्यक्रम सभी जगहों पर किया जा रहा है। आपकी जागरूकता का प्रतिफल यह है कि हम सब ख़ासकर ग्रामीण जन  पहले से और अधिक जागरूक हो रहे हैं। हम अपने लक्ष्य प्राप्ति की ओर बढ़ रहे है।  इस मौके पर गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं, किशोर-किशोरियों और स्थानीय ग्रामीणजन उपस्थित थे।

महिला बाल विकास विभाग अधिकारी सुधाकर बोदले ने 5 संकल्प के सभी पांच बिंदुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा देश का स्वास्थ्य नवजात के बेहतर पोषण संरक्षण पर टिका है, जिसे जिम्मेदारी प्रत्येक नागरिक की है। इस कार्यक्रम में पंचायत के महिला बाल विकास विभाग के सुपरवाइजर सहित आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व स्वास्थ्य विभाग की एएनएम व मितानिन उपस्थित रहे। कार्यक्रम को पूर्ण रूप से आयोजित करने वाले स्वयंसेवकों में दिनेश साहूभूपेश साहू, नीलकंठ पटेल, डिगेश्वर साहू, डिगेश्वर यादवपोखन साहू ,सुधा साहूप्रभा धीवर, अरुणा सोनवानी, नूरी खान नम्रता साहू, चंद्रभामा, लक्ष्मी साहू, वीना साहू शामिल रहे। 

कार्यक्रम में मुख्य रूप से महिला एवं बाल विकास विभाग से जिला अधिकारी समीर पांडे,  सुधाकर बोदले, परियोजना अधिकारी सीडीपीओ शकुंतला चंकरावती, यूनिसेफ कंसलटेंट अभिषेक त्रिपाठी, नेहरू युवा केंद्र से जिला अधिकारी अदनान पाल व पंचायत के प्रमुख सरपंच श्रीमती उषा राजेश साहू, सहित  विद्यार्थी व ग्रामीणजन  उपस्थित रहे।


बाल अधिकारों के संरक्षण के लिए नई पहल, राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण और यूनिसेफ का संयुक्त आयोजन

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रायपुर। छत्तीसगढ़ बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा यूनिसेफ और विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा बच्चों के हित संरक्षण के लिए नई पहल करते हुए पहली बार जिलों के किशोर न्याय बोर्ड, बाल कल्याण समितियों के अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण और जिला बाल संरक्षण इकाई को एक मंच पर लाया गया। इससे संस्थाओं द्वारा किये जाने वाले कार्यों में तेजी और स्पष्टता आएगी। बाल संरक्षण आयोग द्वारा आज नया रायपुर रोड स्थित होटल में पहली त्रैमासिक समीक्षा बैठक सह कार्यशाला का आयोजन किया गया।



इस अवसर पर छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के न्यायाधीश और छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यपालक अध्यक्ष गौतम भादुड़ी, छत्तीसगढ़ राज्य बाल संरक्षण आयोग के अध्यक्ष श्रीमती तेजकुंवर नेताम, यूनिसेफ के राज्य प्रमुख जॉब जकारिया, आईजी पुलिस डॉ. संजीव शुक्ला और महिला एवं बाल विकास विभाग के विशेष सचिव पोषण चंद्राकर भी उपस्थित थे।

बैठक में किशोर न्याय अधिनियम (बालकों की देखरेख और संरक्षण) 2015 तथा पॉक्सो एक्ट (लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम) 2012 और उनके प्रावधानों के क्रियान्वयन, उन्हें लागू करने में आने वाली दिक्कतों पर चर्चा की गई। चर्चा के दौरान लंबित मामलों के निराकरण के लिए आवश्यक सुझाव दिए गए। बैठक में न्यायाधीशों और अधिकारियों ने बच्चों के हितों के संरक्षण के लिए बजट के सीधे प्रवाह, किशोर न्याय बोर्ड में वीडियो कांफ्रेसिंग सुविधा, पुलिस द्वारा समय पर चालान प्रस्तुत करना, पीड़ित की पहचान उजागर न करने जैसे कई सुझाव दिए।



 श्रीमती तेजकुंवर नेताम ने कहा कि बच्चों को उनका पूरा अधिकार दिया जाना चाहिए। सुुरक्षा, शिक्षा और सुपोषण हर बच्चें का अधिकार हैं। बच्चों की सुरक्षा और सुपोषण के लिए राज्य सरकार ने व्यवस्था की है, लेकिन इसके लिए समाज को भी आगे आना होगा। बेटियों की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने बच्चों में बढ़ते मोबाइल और मादक पदार्थों के नशे पर नियंत्रण के लिए न्यायाधीश भादुड़ी से अनुरोध किया।

 न्यायाधीश भादुड़ी ने बच्चों के हित के लिए कार्य कर रही सभी संबंधित संस्थाओं और इकाईयों को साथ लाने के लिए बाल संरक्षण आयोग की सराहना की और आयोजन के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा कानून बनाए गए है लेकिन उसका लाभ भी लोगों तक पहुंचना चाहिए। पहले नैतिक कहानियों की प्रेरक पुस्तकें बच्चों के हाथ मेें होती थी। अब उसका स्थान मोबाइल ने ले लिया। मोबाइल के दुष्प्रभाव को रोकना होगा। इससे बचपन खत्म हो रहा है। उन्होंने न्यायाधीशों और संबंधित अधिकारियों से कहा लोगोें की समस्या के निराकरण के लिए आगे बढ़े और नए रास्ते तैयार करें।



जॉब जकारिया ने कहा कि बच्चों का अधिकार सुरक्षित करना हम सब की सामूहिक जिम्मेदारी है। इसके लिए व्यवहार और सोच मेें परिवर्तन का होना जरूरी है। बच्चों का अधिकार संरक्षण करने के लिए बड़ा निवेश होना चाहिए।

बैठक के द्वितीय सत्र में जिलों के किशोर न्याय बोर्ड में लंबित प्रकरणों की जिलेवार समीक्षा की गई। इस दौरान न्यायिक अधिकारियों, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, विशेष किशोर पुलिस इकाई और बाल कल्याण समितियों के अधिकारियों द्वारा अपने जिलों की रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए बच्चों से संबंधित प्रकरणों की जानकारी दी गई।


’मां का दूध है लाभकारी’, ’घर में गूंजे खुशियों की किलकारी’

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बलरामपुर। कलेक्टर विजय दयाराम के. के मार्गदर्शन में एवं जिला कार्यक्रम अधिकारी के निर्देशन में बलरामपुर-रामानजगंज जिले के दो सेक्टर्स बलरामपुर (ब) और पचावल में विश्व स्तनपान सप्ताह के दूसरे दिन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिला समन्वयक सुश्री कविता चंद्रा वर्ल्ड विज़न इंडिया और लेखिका शाहू यूनिसेफ के द्वारा कार्यक्रम आयोजित की गई। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को जानकारी दी गई कि 1 से 7 अगस्त 2022 तक विश्व स्तनपान सप्ताह का आयोजन किया जा रहा है। 



उन्होंने बताया कि प्रसव के एक घंटे के भीतर मां को अपने बच्चे को स्तनपान कराना चाहिए, मां का पहला पीला गाढ़ा दूध बच्चे के लिए बहुत लाभदायक होता है। बच्चे के जन्म के एक घण्टे के अंदर माँ को अपने बच्चों को स्तनपान कराना शुरू कर देना चाहिए तथा 6 महीने तक बच्चे को केवल मां का ही दूध पिलाना चाहिए। दिन भर में कम से कम 8 से 12 बार स्तनपान कराना चाहिए। स्तनपान कराने से माँ को मानसिक रूप से शांति और खुशी मिलती है। स्तनपान एक स्थान पर स्थिर रहकर और आंचल से ढ़क कर पिलाना चाहिए। स्तनपान कराने से मां और बच्चे दोनो को लाभ मिलता है। स्तनपान कराने से मां और बच्चे के बीच संबंध गहरा बनता है।

मां को गंभीर बीमारियों से बचाव मिलती है जैसे स्तन कैंसर और ओवेरियन कैंसर इसी प्रकार स्तनपान करने वाले बच्चों में मृत्युदर कम होती है तथा डायरिया और निमोनिया जैसे गंभीर बीमारियों से बचाव होता है। कान के इन्फेक्शन से सुरक्षा होती है, सबसे महत्वपूर्ण बात बच्चों के मानसिक और बौद्धिक विकास में मदद करता है। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि ग्राम पंचायत की सरपंच श्रीमती दुर्गावती, सचिव राघवेंद्र सिंह, एएनएम, सीएचओ, बीडीसी, सेक्टर पर्यवेक्षक श्रीमती ममता पांडे, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, मितानिन, 10 आंगनबाड़ी केन्द्र के हितग्राहियों शिशुवती, गर्भवती बुजुर्ग महिलाओं और पुरूष भी उपस्थित थे।

बच्चों के सही पोषण और देखरेख के लिए ‘उमंग‘ का आयोजन

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रायपुर। महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अनिला भेंड़िया ने आज रायपुर में पोषण देखरेख कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए हितधारकों की भूमिका और समन्वय विषय पर राज्य स्तरीय कार्यशाला का शुभारंभ किया। कार्यशाला में देखरेख और संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों के पुनर्वास और उन्हें समाज की मुख्य धारा में शामिल करने पर चर्चा की गई। इस अवसर पर श्रीमती भेंड़िया ने पोषण देखरेख (फॉस्टर केयर) कर रहे दो पोषक परिवारों को भी सम्मानित किया।



कार्यशाला का आयोजन महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा यूनिसेफ के सहयोग से किया गया। श्रीमती भेंड़िया ने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के कुशल नेतृत्व में विभाग ने महिलाओं एवं बच्चों के लिये कई कल्याणकारी कदम उठाये हैं। राज्य सरकार की प्राथमिकता सभी बच्चों का सर्वांगीण विकास है, इसमें वे बच्चे भी शामिल है, जिन्हें विभिन्न कारणों से संस्थाओं में रहना पड़ रहा है। संस्थाएं बच्चों का घर नहीं, वास्तव में किसी व्यक्ति का सम्पूर्ण विकास परिवार और समाज के बीच ही हो सकता है। 

इसे ध्यान में रखकर किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम 2015 में गैर संस्थागत देखरेख का समावेश किया गया है। उन्होंने कहा कि पोषण देखरेख (फॉस्टर केयर), संस्था के बाहर बच्चों की देखरेख का एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम है। मिशन वात्सल्य के अन्तर्गत देखरेख और संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों को पारिवारिक वातावरण उपलब्ध कराने के लिए गैर नातेदार परिवार में वैकल्पिक अस्थाई देखरेख और संरक्षण की व्यवस्था की जाती है। इससे पोषक परिवार में जहां उत्साह, उमंग का संचार होता है, 

वहीं बच्चे को समुचित विकास का पूरा अवसर मिलता है। इन बच्चों को समाज की मुख्य धारा से जोड़ने के लिये प्रत्येक नागरिक का संवेदनशील और सहयोगी होना आवश्यक है। उन्होंने अपील कि है कि समाज के सभी वर्ग, स्वयं-सेवी संस्थाएं, सरकार के साथ बच्चों को पारिवारिक वातावरण और विकास के सभी अवसर उपलब्ध कराने के लिए एकजुट हों, जिससे एक योग्य नागरिक तथा सशक्त भारत का निर्माण हो सके। छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक ने बच्चों के लिए प्राकृतिक पोषण आहार की उपयोगिता बताई। 


उन्होंने पैक्ड फूड की जगह प्राकृतिक पोषक आहार अपनाने की समझाईश दी। 
रूप में उमंग जोड़ा जा रहा है। राज्य में 45 बाल गृह और 13 विशिष्ट दत्तक ग्रहण अभिकरण संचालित है। विशिष्ट दत्तक ग्रहण अभिकरण में 119 बच्चे निवासरत है। वर्ष 2021-22 में 112 बच्चों को दत्तक ग्रहण के माध्यम से पुनर्वासित किया गया। अभी 54 बच्चे पोषण देखरेख कार्यक्रम हेतु चिन्हांकित है। अब तक प्रदेश में 4 बच्चे पोषण देखरेख के तहत परिवारों का हिस्सा बने हैं। पिछले वित्तीय वर्ष में स्पॉन्सरशिप के अंतर्गत 165 बच्चों को लाभ दिया गया है।

यूनिसेफ के राज्य प्रमुख जॉब जकारिया ने बताया कि विश्व में 75 लाख बच्चे संस्थानों में रहते हैं, लगभग 2 लाख बच्चे सड़कों में रहते हैं। संयुक्त राष्ट्र महासंघ ने बच्चों को घर या वैकल्पिक परिवार में रखने का प्रावधान किया है। इस आधार पर परिवार आधारित बच्चों का देखरेख प्रोग्राम तैयार किया गया है। छत्तीसगढ़ के 10 जिलों में इस पर विशेष फोकस कर काम किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ राज्य बधाई का पात्र है कि वह देश के अन्य प्रदेशों से आगे हैं। उन्होंने बताया कि मिशन वात्सल्य के तहत देखरेख के लिए प्रति माह 4 हजार रूपए तक की राशि भी प्रदान की जाती है।

कार्यशाला में बच्चों का पालन-पोषण और देखरेख कर रहे पोषक परिवार रायपुर के प्रताप एवं दुर्गा महापात्रे और कांकेर के कृषक परिवार के खोरबहरा राम और चंदा बाई का सम्मान किया गया। इस अवसर पर दिल्ली से आई यूनिसेफ की बाल संरक्षण विशेषज्ञ सुश्री वंदना कन्धारी और अन्य विशेषज्ञों ने पोषण देखरेख पर जानकारी दी। इस अवसर पर जिलों के बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष, सदस्य, जिला बाल संरक्षण अधिकारी और बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष सचिव, बाल गृहों के अधीक्षक, विशेष किशोर पुलिस इकाई के प्रतिनिधि, स्वयं सेवी संस्थाओं के सदस्य और पोषण देखरेख हेतु चयनित पोषक परिवार उपस्थित थे।

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