Media24Media.com: भारत में कोरोना वायरस

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Covid - 19 से महिलाओं के मुकाबले पुरुषों की जान को ज्यादा खतरा, शोध में हुआ खुलासा

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कोरोना वायरस से महिलाओं के मुकाबले पुरुषों में जान का खतरा ( men are more at risk of dying from covid 19) ज्यादा है। नए स्टडी के मुताबिक महिलाओं की अपेक्षा पुरुषों में जान का खतरा 30 प्रतिशत से ज्यादा होता है। एक नए अध्ययन में यह जानकारी सामने आई है। क्लीनिकल इंफेक्शस डिजीजेस पत्रिका (Clinical Infectious Diseases magazine) में प्रकाशित एक अध्ययन के मुताबिक कोरोना से संक्रमित पुरुष मरीज अगर डायबिटीज (Diabetes), हाई ब्लड प्रेशर ( high blood pressure) या मोटापे से ग्रस्त हैं तो उनकी जान जाने का खतरा ज्यादा होता है।





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शोध में UMSOM (अमेरिका के यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड स्कूल ऑफ मेडिसिन) के वैज्ञानिकों ने देश भर के 613 अस्पतालों में भर्ती कोरोना के करीब 67 हजार मरीजों का अध्ययन किया। अध्ययन में कहा गया है कि पहले से ही मोटापे, हाई ब्लड प्रेशर या डायबिटी जैसी समस्याओं से जूझ रहे कोरोना से संक्रमित 20 से 39 साल आयु वर्ग के रोगियों को अपने स्वस्थ साथियों की तुलना में जान का जोखिम ज्यादा था। अध्ययन के लेखक एंथनी डी हैरिस ने कहा कि इन सभी जानकारियों से संक्रमित रोगियों के उपचार में मदद मिल सकती है।





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बता दें कि दुनियाभर में कोरोना महामारी का कहर अभी भी जारी है। इससे अब तक 77,717,42 से ज्यादा लोग संक्रमित हो चुके हैं। वहीं 1,709,007 लोगों की मौत हो चुकी है। ऐसे समय में UMSOM के एक नए अध्ययन में दावा किया गया है कि महिलाओं की तुलना में पुरुषों में कोरोना से मौत का खतरा 30 प्रतिशत ज्यादा होता है। अध्ययन के मुताबिक पुरुषों में महिलाओं की स्वास्थ्य की स्थिति की तुलना में कोरोना से मरने का खतरा 30 प्रतिशत ज्यादा है।





भारत में एक्टिव केसों की संख्या 2 लाख 92 हजार के पार





भारत में 21 दिसंबर को एक ही दिन में कोविड-19 के 24,337 नए मामले सामने आए हैं। इससे देश में संक्रमण के कुल मामले बढ़कर 1।0055 करोड़ के पार पहुंच गई हैं। इनमें से 96।06 लाख से ज्यादा लोग ठीक हो चुके हैं। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक देश में कोरोना के एक्टिव केस की संख्या 2,92,518 है।





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स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक देश में कोविड-19 के कुल मामले बढ़कर 1,00,75,116 हो गए हैं। वहीं 333 और लोगों की मौत के बाद मृतकों की संख्या बढ़कर 1,46,111 हो गई है।


कोरोना से ठीक हुए 50 प्रतिशत लोगों को आंखों की रोशनी और मौत का खतरा, जानिए क्या हैं कारण

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कोरोना ने सभी वर्ग के लोगों को प्रभावित किया है। वहीं इस वायरस की वजह से कई लोगों को अपनी जान भी गंवानी पड़ी है। जबकि कई लोग इस वायरस को मात देकर ठीक भी हो चुके हैं, लेकिन इसी बीच कोरोना से संबंधित (infection chances after covid recovery) एक डराने वाली खबर सामने आई है।





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दरअसल कोरोना का इलाज करने वाले डॉक्टरों को मरीजों में एक दुर्लभ और गंभीर संक्रमण (infection chances after covid recovery) के मामले दिखाई दे रहे हैं। दिल्ली के एक अस्पताल के ईएनटी सर्जन के मुताबिक 15 दिन के अंदर कोरोना के 12 से ज्यादा मामलों में Mucormycosis fungus पाया है। डॉक्टर के मुताबिक इस बीमारी से आंखों की रोशनी जाने की 50 प्रतिशत संभावना (50 percent people recovering from corona risk of eye light and death) है। इसके साथ ही नाक और जबड़े की हड्डी हट जाती है। जबकि मृत्यु दर 50 प्रतिशत हो जाती है।





यह हैं वायरस का लक्षण





दिल्ली के डॉक्टरों के मुताबिक उन्हें बीते कुछ दिनों में करीब 10 मरीजों की रिसेक्शन प्रक्रिया करनी पड़ी। इस दौरान 50 प्रतिशत लोगों ने आंखों की रोशनी स्थाई रूप से खो दी। अस्पताल के मुताबिक पांच मरीजों की मौत हो गई। इस बीमारी के कुछ लक्षण हैं- चेहरे का सुन्न होना, नाक में ब्लॉकेज या आंखों में सूजन और दर्द।





कोरोना से ठीक हुए मरीजों पर करता है अटैक





एक्सपर्ट के मुताबिक कोरोना मरीजों में इस संक्रमण के होने की संभावना ज्यादा होती है। उनके मुताबिक यह संक्रमण पौधे, जानवर और हवा में मौजूद है। ये संक्रमण कोरोना से ठीक हुए मरीजों पर हमला कर रहा है, क्योंकि उन्हें स्टेरॉयड दिया गया हैं।





डॉक्टर ने किया दावा





दिल्ली के एक डॉक्टर ने कहा कि 'ये एक वायरस है। ये कमजोर इम्युनिटी सिस्टम वाले लोगों में प्रवेश करता है। यह शरीर के उस हिस्से को नुकसान पहुंचाता है जहां से प्रवेश करता है। कोरोना से ठीक होने वाले लोगों को स्टेरॉयड की एक खुराक दी जाती है ताकि साइटोकिन स्टॉर्म को कम किया जा सके। इससे घातक म्यूकोर्मोसिस को शरीर में प्रवेश करने की अनुमति मिलती है।'





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डॉक्टर ने आगे कहा कि 'यह म्यूकोर्मोसिस को नाक और आंखों से मस्तिष्क तक पहुंचने की अनुमति देता है। अगर इसे डिटेक्ट नहीं किया गया तो कुछ ही दिनों में 50 फीसदी से ज्यादा मामलों में मौत का कारण बन सकता है। इसके अलावा आंखें, जबड़े की हड्डियां को नुकसान पहुंचता है।'


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