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पत्रकारिता विश्वविद्यालय में मीडिया कोर्स में प्रवेश की तिथि घोषित

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रायपुर। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, रायपुर में आज विभागाध्यक्षों की मासिक समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें आगामी शैक्षणिक सत्र की तैयारियों की समीक्षा की गई। बैठक की अध्यक्षता रायपुर संभागायुक्त एवं कुलपति महादेव कावरे ने की।

कुलपति कावरे ने कहा कि मीडिया शिक्षा में व्यापक संभावनाएं हैं और विश्वविद्यालय न्यूनतम शुल्क में ग्रामीण एवं शहरी छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान कर रहा है। उन्होंने विद्यार्थियों को मार्गदर्शन देने हेतु हेल्प डेस्क की स्थापना और मीडिया पाठ्यक्रमों के प्रचार-प्रसार के लिए सोशल मीडिया के अधिकाधिक उपयोग पर बल दिया। बैठक में प्रवेश समिति, शुल्क निर्धारण समिति एवं कक्षा व छात्रावास व्यवस्था के बेहतर संचालन के लिए दिशा-निर्देश दिए गए। साथ ही कुलपति ने विश्वविद्यालय में चल रहे सेमेस्टर परीक्षाओं का निरीक्षण भी किया।

शैक्षणिक सत्र 2025-26 में विश्वविद्यालय द्वारा स्नातक, स्नातकोत्तर एवं पीजी डिप्लोमा स्तर के मीडिया पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इच्छुक अभ्यर्थी विश्वविद्यालय की वेबसाइट https://www.ktujm.ac.in/ पर आवेदन कर सकते हैं।

प्रत्येक पाठ्यक्रम में 40 सीटें निर्धारित हैं। प्रवेश प्रक्रिया में शासन के नियमानुसार आरक्षण एवं पात्र विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति की सुविधा उपलब्ध होगी। प्रवेश के लिए मेरिट लिस्ट 30 जून 2025 को जारी की जाएगी एवं अंतिम तिथि 5 जुलाई 2025 निर्धारित की गई है। रिक्त सीटों हेतु दूसरी सूची 12 जुलाई 2025 को जारी की जाएगी।

बैठक में अध्ययन संकाय के विभागाध्यक्ष पंकज नयन पाण्डेय, शैलेन्द्र खण्डेलवाल, डॉ. नृपेन्द्र कुमार शर्मा एवं डॉ. राजेन्द्र मोहंती ने अपने-अपने विभागों में प्रवेश से संबंधित गतिविधियों की जानकारी प्रस्तुत की। इस अवसर पर कुलसचिव सुनील कुमार शर्मा, उप कुलसचिव सौरभ शर्मा, सहायक कुलसचिव डॉ. देवसिंह पाटिल, वित्त अधिकारी विनय राज ढीढ़ी सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।

माता कर्मा महाविद्यालय की छात्राओं ने समझी पत्रकारिता की बारीकियां

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महासमुन्द जिले की एकमात्र गर्ल्स कॉलेज में एड-ऑन वर्कशॉप का आयोजन  

*महासमुंद* । जिले की एकमात्र गर्ल्स कॉलेज (शासकीय माता कर्मा कन्या महाविद्यालय- महासमुन्द ) में 'पत्रकारिता और अनुवाद' विषय पर एड-ऑन कोर्स (अतिरिक्त पाठ्यक्रम) कार्यशाला का आयोजन हुआ। अतिथि प्रवक्ता वरिष्ठ पत्रकार आनंदराम पत्रकारश्री थे। महाविद्यालय के प्रथम तल पर छात्राओं के लिए विशेष क्लास का आयोजन हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ सरस्वती वर्मा के संयोजन में हुआ। 

पत्रकारिता कार्यशाला में उपस्थित छात्राएं व अतिथि वक्ता



विद्या की देवी माता सरस्वती पूजन और दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। स्वागत उदबोधन में हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ सरस्वती वर्मा ने कार्यक्रम की अवधारणा और आवश्यकता रेखांकित करते हुए कहा कि पढ़ना-लिखना और सीखना जीवन के हर पड़ाव में उपयोगी है। 

विषय विशेषज्ञ व अतिथि प्रवक्ता आनंदराम ने छात्राओं को पत्रकारिता में रोजगार के अवसर, पत्रकार कैसे बनें, पत्रकारिता की डिग्री, पत्रकार बनने के लिए आवश्यक गुण, पत्रकारिता के लिए मूलभूत तत्वों की जानकारी, अनुवादक के रूप में पत्रकारिता में उपलब्ध अवसर आदि की विस्तृत जानकारी दी। साथ ही लेखन में रूचि रखने वाली छात्राओं को पत्रकारिता में करियर बनाने के लिए प्रेरित किया। छात्राओं ने उत्साह के साथ कार्यक्रम में भाग लेकर महाविद्यालय प्रबंधन द्वारा किए जा रहे नवाचार की सराहना की। छात्राओं का लेखन कौशल परीक्षण के लिए समाचार बनाने तात्कालिक टेस्ट भी लिया गया।इस अवसर पर बीएससी तृतीय वर्ष की छात्रा दामिनी साहू नयापारा ने नारी की व्यथा को कविता के माध्यम से अभिव्यक्त की। उपस्थितजनों ने करतल ध्वनि से छात्रा का अभिनंदन किया।  इस अवसर पर विज्ञान संकाय की विभागाध्यक्ष डॉ  स्वेतलाना नागल ने भी छात्राओं को व्यक्तित्व विकास के लिए प्रेरित किया।कार्यक्रम का संचालन और आभार ज्ञापन  सहायक प्राध्यापक ओंकार साहू ने किया।  

अतिथि प्रवक्ता आनंदराम पत्रकारश्री को स्मृति चिन्ह भेंट करते हुए महाविद्यालय परिवार



 *इन्होंने दी अभिव्यक्ति टेस्ट* 

कार्यक्रम में रीना साहू गुल्लू, तिलोतमा पटेल बीरसिंग पाली, नंदनी निषाद भुरका, साध्वी दीवान बरेकेलकला, धारणी पटेल तरपोंगी, डिम्पल साहू महासमुंद, साक्षी तांडी मुरुमडीह,टिकेश्वरी ध्रुव सिर्रीकला, रंजू पुरेना नयापारा अछरीडीह, पूनम साहू लचकेरा, डिगेश्वरी सागर शेर, मनीषा पटेल लमकेनी, किरण साव बड़ेडाभा, मानसी यादव खल्लारी, एलीशा मसीह महासमुन्द, दीपा साहू सिर्रीकला, धनेश्वरी साहू भोरिंग, भूमिका साहू सिलौरी(धमतरी), खुशबू साहू महासमुन्द, लक्ष्मी चंद्राकर गांजर,  कशिश चंद्राकर महासमुन्द, अंकिता प्रधान बेल्डीह, भूमिका साहू नवाडीह, आरती खुंटे खरोरा, दिव्यानी सोनवानी नांदगांव, करीना ठाकुर गबौद, गुनगुन पाटकर महासमुन्द, लक्ष्मी ठाकुर भोथा, हिमेश्वरी साहू भसेरा ने अपनी अभिव्यक्ति टेस्ट दी।


नवांकुरित अभिव्यक्ति

*' नारी '* 


काँटों पर चलकर, 

वो तुमको बनाती है ।

एक नारी न जाने

कितने किरदार निभाती है।।


हद हो चाहे कितनी भी, 

वो तुमको ना बताती है।

न जाने  कैसे वो, 

खुद को इतना मजबूत बनाती है।।


क्यूँ न पढ़ लेते तुम उस दर्द को, 

जो वो तुमको न बता पाती है।

पूरी दुनिया का खयाल रखती है, 

पर खुद को भूल जाती है।।


ना जाने कैसे वो अकेली, 

हम सब को संभालती है।

इतना सब कुछ करने के बाद भी

 क्यूँ ठुकराई जाती है।।


 लोगों की गलती की सजा,

 हर बार उसे ही सुनाई जाती है। 


गलत होता है कुछ उसके साथ,

तो परिवार वालों से चुप करायी जाती है।


समाज में बदनामी के डर से,

न जाने क्यूं हर बार दबाई जाती है।


तुम भी करो सम्मान उस नारी का,  

जो हर हाल में तुमको अपनाती है। 


माँ-चाची-दोस्त-बहन

न जाने वो तुम्हारे लिए

क्या - क्या बन जाती है।।

दामिनी साहू, बीएससी-3

नयापारा, महासमुन्द.


दामिनी साहू, बीएससी-3




छत्तीसगढ़ में पत्रकारिता और साहित्य का उद्गम स्थल है गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही - मुख्यमंत्री बघेल

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही का क्षेत्र छत्तीसगढ़ में पत्रकारिता और साहित्य का उद्गम स्थल है और यह क्षेत्र साहित्यकारों और पत्रकारों के लिए पवित्र भूमि है। यह वही भूमि है जहां हिन्दी साहित्य की पहली कहानी का उद्गम हुआ है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सौभाग्य की बात है कि उनके कार्यकाल में गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही को नये जिले के रूप में गौरव मिला। वे आज जिला मुख्यालय गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही में आयोजित पंडित माधव राव सप्रे की 152वीं जयंती समारोह को सम्बोधित कर रहे थे।

गौरतलब है श्रीकांत वर्मा पीठ बिलासपुर और जिला प्रशासन के सहयोग से सप्रे जयंती के अवसर पर व्याख्यान और विचार संगोष्ठी का आयोजन किया गया। मुख्यमंत्री ने महोत्सव में आगे कहा कि पेण्ड्रा शहर का बहुत पुराना इतिहास रहा है। यहां से सन 1900 में छत्तीसगढ़ मित्र अखबार का प्रकाशन आरंभ हुआ। पहली कहानी भी यहीं लिखी गई। यहां की मिट्टी में पत्रकारिता और साहित्य रचा-बसा है। यह क्षेत्र अरपा ही नहीं, पत्रकारिता और साहित्य का उद्गम स्थल भी है। उन्होंने कहा कि यहां की आबोहवा इतनी अच्छी है कि गुरुदेव रविंद्रनाथ टैगोर अपनी पत्नी के साथ यहां स्वास्थ्य लाभ लेने आए थे।

महोत्सव में पत्रकारों और साहित्यकारों को मुख्यमंत्री ने किया सम्मानित

उन्होंने कहा कि हमारी सरकार बनने से केवल इसी क्षेत्र के लोगों की ही मांग पूरी नहीं हुईबल्कि राज्य में जीपीएम समेत 6 नये जिले बने। जिलों के साथ-साथ 19 नये अनुविभाग और 83 नई तहसीलें भी बनाई गईं। हमने जो नये जिले बनाए हैं, उनमें से लगभग सभी जिले ऐसे हैं जहां वंचित समुदाय के लोग बहुतायत में निवास करते हैं। ये वे लोग हैं जो वर्षों से अपने अधिकारों से वंचित रहे, और जिन्हें वर्षों से न्याय की प्रतीक्षा थी। नये जिलों के गठन का उद्देश्य इन्हीं समुदायों तक न्याय की पहुंच सुनिश्चित करना है।

मुख्यमंत्री ने महोत्सव में प्रदेश और देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए साहित्यकारों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर जिले के प्रभारी मंत्री और राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने भी आज के दिन को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में लगातार जिले का विकास हो रहा है और ऐसे आयोजनों से छत्तीसगढ़ को बौद्धिक क्षेत्र में नई पहचान मिल रही है। गौरतलब है कि स्वर्गीय पंडित माधवराव सप्रे स्मृति महोत्सव में रांची से साहित्यकार रविभूषण, रायपुर से दिवाकर मुक्तिबोध, नई दिल्ली से सुदीप ठाकुर, केरल से अच्युतानंद मिश्र सहित अंचल के प्रबुद्ध साहित्यकार शामिल हुए। 


 


पत्रकारिता और साहित्य का उद्गम स्थल भी जीपीएम जिला

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रायपुर। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि अब जीपीएम जिला बन गया है। इस शहर का बहुत पुराना इतिहास रहा है। यहां से 1900 में छत्तीसगढ़ मित्र का प्रकाशन आरंभ हुआ। पहली कहानी यहीं लिखी गई। इससे स्पष्ट है कि इस मिट्टी में पत्रकारिता और साहित्य रचे बसे हैं। यह अरपा ही नहीं, पत्रकारिता और साहित्य का उद्गम स्थल भी है। मेरे लिए सौभाग्य की बात है कि मेरे कार्यकाल में इस जिले का निर्माण हुआ।

हमारी सरकार बनने से केवल इसी क्षेत्र के लोगों की ही मांग पूरी नहीं हुई, बल्कि राज्य में इसके समेत 6 नये जिले बने। जिलों के साथ-साथ 19 नये अनुविभाग और 83 नयी तहसीलें भी बनाई गईं। हमने जो नये जिले बनाए हैं, उनमें से लगभग सभी जिले ऐसे हैं जहां पर वंचित समुदाय के लोग बहुतायत में निवास करते हैं। ये वे लोग हैं जो वर्षों से अपने अधिकारों से वंचित रहे, और जिन्हें वर्षों से न्याय की प्रतीक्षा थी। नये जिलों के गठन का उद्देश्य इन्हीं समुदायों तक न्याय की पहुंच सुनिश्चित करना है।

गुरुदेव रविंद्रनाथ टैगोर आये थे यहां, हम यहां के पर्यटन स्थलों का कर रहे व्यापक प्रचार-प्रसार

यहां की आबोहवा इतनी अच्छी है कि गुरुदेव रविंद्रनाथ टैगोर अपनी पत्नी के साथ यहां पर स्वास्थ्य लाभ लेने के लिए आए थे। कितना सुंदर संयोग है कि यहां इस स्मृति महोत्सव में साहित्यकार और पत्रकार साथ ही हैं। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिला संभावनाओं से भरपूर जिला है। खासतौर पर यहां पर पर्यटन के क्षेत्र में असीम संभावनाएं हैं।

झोझा वाटर फॉल, राजमेरगढ़, समुदलाई कुंड, शिव घाट, लखन घाट, गंगई नेचर कैंप, चुन्हादाई, परेवापथ, आदि-शक्ति मंदिर, तारा खार वाटर फॉल, जलेश्वर महादेव जैसे दर्जनों पर्यटन स्थल हैं, जो पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं।

हम लोगों ने इन पर्यटन स्थलों की जानकारी रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और सावर्जनिक जगहों पर प्रदर्शित करते हुए व्यापक प्रचार-प्रसार की शुरुआत की है।

हमारे राम हमारे भांचा राम हैं। भगवान राम मर्यादा पुरुषोत्तम हैं। हमारे देवी-देवताओं के मान सम्मान, उनकी प्रतिष्ठा, मर्यादा को विकृत करने का प्रयास कतिपय तत्वों द्वारा किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री जी की घोषणाएं

-  पेंड्रा नगर में पंडित माधव राव सप्रे प्रवेश द्वार के निर्माण की घोषणा ताकि उनकी स्मृतियां स्थाई रूप से बनी रहे।

-  पत्रकारों के लिए पंडित माधव राव सप्रे पत्रकार कालोनी विकसित किये जाने भूमि चिन्हांकन और आवंटन के लिए कलेक्टर करें कार्रवाई

माधव राव सप्रे ने छत्तीसगढ़ में पत्रकारिता को एक नई दिशा दी : बघेल

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ में पत्रकारिता के जनक और साहित्यकार पंडित माधवराव सप्रे की 19 जून को जयंती पर उन्हें नमन किया है। सप्रे जी को याद करते हुए मुख्यमंत्री बघेल ने कहा है कि सप्रे जी द्वारा रखी गई नींव पर ही आज छत्तीसगढ़ की पत्रकारिता समृद्ध हो रही है। छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय और साहित्यिक चेतना को विकसित करने में भी सप्रे जी का अमूल्य योगदान रहा है। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान उनकी लेखनी ने सैकड़ों सत्याग्रहियों का मार्गदर्शन किया और राष्ट्रप्रेम की प्रेरणा दी। सप्रे जी के रचनात्मक और मूल्यपरक लेखन ने छत्तीसगढ़ में पत्रकारिता को एक नई दिशा दी है।

बघेल ने कहा कि सप्रे जी जीवन भर देश और साहित्य की सेवा में लगे रहे। उनके कई लेख और कृतियां प्रकाशित हुई। उन्होंने अनेक संस्थाओं को जन्म दिया जिनके माध्यम से लोग देश और जन सेवा के लिए आगे आए। सन् 1900 में जब प्रकाशन के लिए पर्याप्त सुविधाएं और आधुनिक तकनीकी नहीं थी, उन्होंने वामनराव लाखे जी और रामराव चिंचोलकर जी के सहयोग से पेण्ड्रा में मासिक हिन्दी समाचार पत्र छत्तीसगढ़ मित्रका सम्पादन और प्रकाशन शुरू किया। सप्रे जी द्वारा रचित कहानी टोकरी भर मिट्टीको भारतीय साहित्य में हिन्दी की पहली मौलिक कहानी का गौरव प्राप्त है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सप्रे जी का व्यक्तित्व और कृतित्व साहित्यकारों और पत्रकारों सहित आम जनता के लिए भी प्रेरणादायक है। 

मूल्य एवं सिद्धांतों पर आधारित पत्रकारिता करना सबसे बड़ी चुनौती: भूपेश बघेल

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मुख्यमंत्री शामिल हुए मायाराम सुरजन जन्मशती एवं देशबन्धु पत्र समूह के स्थापना दिवस समारोह में


रायपुर : मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि वर्तमान समय में मीडिया परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। आज के समय में सिद्धांतों और मूल्य आधारित पत्रकारिता करना बेहद चुनौतीपूर्ण है। अपने 65 बरस की यात्रा में देशबन्धु अपने सिद्धांतों पर अडिग रहा कभी मूल्यों से समझौता नहीं किया। श्री बघेल आज मायाराम सुरजन जन्मशती एवं देशबन्धु के 65 वां स्थापना दिवस समारोह को सम्बोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर देशबन्धु पत्र समूह के संस्थापक स्वर्गीय श्री मायाराम सुरजन और स्वर्गीय श्री ललित सुरजन को नमन किया।

मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में आगे कहा कि मायाराम सुरजन जी पत्रकारिता के पुरोधा थे। उनकी पूरे देश में विशिष्ट पहचान थी। उन्होंने कहा कि स्वर्गीय मायाराम सुरजन को पढ़ा है, मगर स्वर्गीय श्री ललित सुरजन जी से मुलाकात हुई, उनका सानिध्य मिला। ललित जी पर मायाराम जी की छाप थी। कार्यक्रम में साहित्यकार श्री प्र्रभात त्रिपाठी एवं पूर्व मुख्य सचिव एवं शिक्षाविद् श्री शरदचंद्र बेहार को मायाराम सुरजन शताब्दी सम्मान से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता साहित्यकार श्री विजय बहादुर सिंह ने की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जब देशबन्धु की चर्चा होती है, तो हमारे पुराने बचपन के दिन याद आ जाते हैं। उस समय दो या तीन अखबार हुआ करते थे। हम जब गांव में रहते थे, उस समय शाम तक कोई अखबार पहुंच पाता था। शाम को जिसके यहां अखबार पहुंचता था, वहां जाकर अखबार पढ़ा करते थे। तब लोगों में मान्यता थी कि देशबन्धु में यदि कुछ छपा हो तो वह सच होगा। उन्होंने कहा कि जब हमने राजनीति करना शुरू की, तो देशबन्धु में लिखे खबरों, विभिन्न बुद्धिजीवी द्वारा लिखे गए लेखों, सम्पादकीय को पढ़ा करते थे और उनसे सीखते थे। वहीं से सीख कर ज्ञान अर्जन कर मुद्दों को उठाते भी थे।

श्री बघेल ने कहा कि आजादी के समय महात्मा गांधी, जवाहर लाल नेहरू, भगत सिंह, बाल श्री गंगाधर तिलक और श्री गणेश शंकर विद्यार्थी आदि राजनेताओं ने अपनी लेखनी की ताकत से तत्कालिन ब्रिटिश शासन को झकझोर दिया। यहां तक तिलक जी को इसके लिए सजा भी हुई। उसके बाद भी उन्होंने लिखना नहीं छोड़ा। आजादी की अलख जगाने में समाचार पत्रों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। यह कार्य आजादी के बाद भी जारी है। सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक मुद्दों पर आमजनों को जागरूक कर देश की प्रगति में सार्थक योगदान दे रहे है।

कार्यक्रम में देशबन्धु रायपुर के सम्पादक श्री राजीव रंजन श्रीवास्तव ने देशबन्धु की 65 साल की यात्रा पर विस्तार से प्रकाश डाला। इस अवसर पर संसदीय सचिव श्री विकास उपाध्याय, विधायक श्री अमितेश शुक्ला, छत्तीसगढ़ पाठ्यपुस्तक निगम के अध्यक्ष श्री शैलेष नितिन त्रिवेदी, छत्तीसगढ़ राज्य गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष महंत रामसुन्दर दास, श्री पलाश सुरजन तथा गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

सकारात्मक सोच से बदल सकती है पत्रकारिता की दशा और दिशा

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श्रीपुर एक्सप्रेस की स्थापना के प्रथम वर्षगांठ पर विद्वानों की संगोष्ठी 

महासमुंद। 'श्रीपुर एक्सप्रेस' स्थापना दिवस पर काव्यांश साहित्य एवं कला पथक संस्थान महासमुंद में संगोष्ठी का आयोजन हुआ। जिसमें अलग-अलग संगठनों के ख्यातनाम हस्तियों ने "सकारात्मक सोच-रचनात्मक पहल : पत्रकारिता-कल, आज और कल" विषय पर उदगार व्यक्त किए। संगोष्ठी का शुभारंभ आमंत्रित अतिथि वक्ताओं के कर कमलों से मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के चित्र पर पुष्पांजलि और दीप प्रज्वलन से हुआ। अतिथियों का स्वागत श्रीपुर एक्सप्रेस के प्रधान संपादक आनंदराम पत्रकारश्री ने गुलदस्ता भेंटकर किया।
संबोधन @श्री अनिल शर्मा, जिलाध्यक्ष-अधिवक्ता संघ. 

विषयवस्तु की प्रस्तावना और स्वागत उदगार में वरिष्ठ पत्रकार आनंदराम पत्रकारश्री ने कहा कि कोविड-19 की विषमताओं के बीच महासमुंद से किसी  मासिक पत्रिका का संपादन और प्रकाशन बहुत ही चुनौतीपूर्ण कार्य था, जिसे हमने स्वीकार किया। सुधि पाठकों के स्नेह के दम पर यह आज सफलता के पहले पड़ाव पर है। इसकी निरंतरता बनाए रखना कम संघर्षपूर्ण नहीं है, फिर भी संघर्षों के बीच यह जारी है।

संबोधन @ श्री आनंदराम पत्रकारश्री, प्रधान संपादक. 

अतिथि वक्ताओं के बीच संगोष्ठी की शुरुआत करते हुए अधिवक्ता संघ के महासमुंद जिलाध्यक्ष अनिल शर्मा ने विषयवस्तु पर सारगर्भित चर्चा की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि बहुत कम समय में 'श्रीपुर एक्सप्रेस' ने पाठकों के दिल में विशेष जगह बना ली है। यह एक्सप्रेस की तरह चल रहा है। पत्रकारिता में ही नहीं, हम सभी के जीवन में भी सकारात्मक सोच होना आवश्यक है। इससे रचनात्मक कार्य होते हैं। पत्रकारिता की विश्वसनीयता बचाए रखने के लिए कलमकार, कलम का सौदा न होने दें, यही अपेक्षा पत्रकारों से है।


संबोधन @ श्रीमती राशि त्रिभुवन महिलांग, नपाध्यक्ष-महासमुंद. 
नगर की प्रथम नागरिक, नपाध्यक्ष राशि त्रिभुवन महिलांग ने कहा कि शिक्षा जगत से जुड़ाव से लेकर महासमुंद नगर पालिका अध्यक्ष तक के जीवन यात्रा में मैंने महसूस किया है कि कलम की ताकत क्या होती है। सकारात्मक सोच के साथ हम सब आगे बढ़ रहे हैं। 'श्रीपुर एक्सप्रेस' एक पत्रिका ही नहीं, एक विचारधारा है। इसका हर अंक इतिहास के पन्नों पर दर्ज हो रहा है। संदेशपरक सृजन प्रेरणादायक है। नगर विकास के लिए भी हम सकारात्मक सोच से प्रेरित हैं।

संबोधन @ श्री दाऊलाल चंद्राकर, जिलाध्यक्ष-स्काउट गाइड संघ. 
स्काउट गाइड संघ के जिलाध्यक्ष दाऊलाल चंद्राकर ने कहा कि 'श्रीपुर एक्सप्रेस' का हर अंक संग्रहणीय है। उन्होंने इसे सहेजकर अपनी लायब्रेरी में रखी है। उन्होंने  एक्सप्रेस को पत्रकारिता में नया आयाम स्थापित करने वाला अध्याय बताया। उन्होंने ऐतिहासिक नगरी सिरपुर पर केंद्रित विशेषांक प्रकाशित करने का भी आग्रह किया। उन्होंने कहा कि बदलते परिवेश के साथ पत्रकारिता के स्तर में भी गिरावट आई है। व्यवसायिकता हावी हो गई है। ऐसे समय में सकारात्मक सोच के साथ 'श्रीपुर एक्सप्रेस' जैसे पत्रिका का प्रकाशन विशेष महत्व रखता है। नकारात्मक विचारों से समाज में गंदगी फैलती है, सेवाभाव और अच्छे काम की सर्वत्र प्रशंसा होनी चाहिए।


संबोधन @ श्री भागवत जगत 'भूमिल',
प्रदेशाध्यक्ष-काव्यांश साहित्य एवं कला पथक संस्थान.
काव्यांश साहित्य एवं कला पथक संस्थान के प्रदेशाध्यक्ष भागवत जगत 'भूमिल' ने कहा कि यह पत्रिका महासमुंद का गौरव है। काव्यांश साहित्य परिवार को हमेशा प्रोत्साहन मिल रहा है। उन्होंने संस्थान की लायब्रेरी में इसे सहेजकर रखा है। उन्होंने पत्रकार और साहित्यकार के परस्पर संबंधों की चर्चा करते हुए कहा कि दोनों ही समाज को दिशा देने के लिए कलम उठाते हैं। लाभ के लिए काम करेंगे, तो मानव समाज का कल्याण संभव नहीं है। हर कलमकार को इसे तपस्वी की तरह निभाना होगा।


संबोधन @ श्री नरेश साहू, संचालक-दिशा नाट्य मंच. 
दिशा नाट्य मंच के संचालक नरेश साहू ने कहा कि कलम सामाजिक न्याय के लिए बड़ा हथियार है। कलम की ताकत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अब समाचारों से नाट्य की उत्तपत्ति हो रही है। उन्होंने समाचारों पत्रों के इतिहास पर भी विस्तार से प्रकाश डाला। 

संबोधन @ श्री दूजेराम धीवर, अध्यक्ष-पीपला फॉउंडेशन आरंग
पीपला फाउंडेशन आरंग के संयोजक दूजेराम धीवर ने कहा कि श्रीपुर एक्सप्रेस के प्रकाशन में हर विधा को समाहित किया जा रहा है। अंक संग्रहणीय और पठनीय है। पर्यावरण संरक्षण और पीड़ित मानवता की सेवा की दिशा में सेवारत पीपला फाउंडेशन को भी श्रीपुर एक्सप्रेस का संरक्षण है, यह हमारे लिए गर्व की बात है।

संबोधन @ श्री महेंद्र साहू, अध्यक्ष-मानवाधिकार संगठन. 
मानवाधिकार संगठन के जिलाध्यक्ष महेन्द्र साहू ने कहा कि पत्रकार के कलम में बहुत ताकत है। मीडिया के डिजिटलीकरण के बावजूद प्रिंट मीडिया का अस्तित्व हमेशा बना रहेगा। श्रीपुर एक्सप्रेस ने बहुत कम समय में पाठकों के बीच अपनी विशिष्ट पहचान बना ली है। 


संबोधन @ श्री अवनीश वाणी, निदेशक-नाट्य कला मंच. 
प्रख्यात नाट्य निदेशक अवनीश वाणी ने कहा कि इस संगोष्ठी में सभी वर्ग के विद्वान उपस्थित हैं। यदि किसी कलमकार में सकारात्मकता नहीं है, वह रचनात्मक नहीं है तो मेरी दृष्टि में वह पत्रकार नहीं है। जब पत्रकार संवेदित होता है, तब  खबर असरकारी होता है। 'एक व्यक्ति हवाई जहाज से आया और प्रेमिका की हत्या करके चला गया।' ऐसी खबरें मनोमस्तिष्क को विचलित कर जाती है। कोरोना भी हमारे बीच हवाई यात्रा करके ही आया, आ रहा है, यह सभी को समझने की जरूरत है।


संबोधन @ डॉ साधना कसार, वरिष्ठ साहित्यकार. 
वरिष्ठ साहित्यकार डॉ साधना कसार ने कहा कि उनके पिता भी पत्रकार थे। इसलिए उन्हें पत्रकारिता की दशा और दिशा का भलीभांति आभास हुआ।  पत्रकारिता तटस्थ, प्रखर हो और साहित्य समृद्ध हो, तभी स्वस्थ समाज की परिकल्पना की जा सकती है। उन्होंने कहा कि मीडिया प्रभावी है। पत्रकार ही समाज को जगाता है।


संबोधन @ श्री अशोक शर्मा, वरिष्ठ साहित्यकार. 
वरिष्ठ साहित्यकार, गजलकार अशोक शर्मा ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि अब पत्रकारिता करना दुःसाहसिक कार्य हो चला है। क्योंकि ज्यादातर लोग पत्रकारिता नहीं, पत्तल कारिता कर रहे हैं। अखबारों की हर पंक्तियों की कीमत है। लिखा हुआ शब्द बोलता है। शब्द मंत्र बन जाता है और मंत्र में शक्ति है। पत्रकारिता के आदर्श को बचाए रखना वर्तमान समय में कठिन काम है। ऐसे समय में महासमुंद की उर्वरा धरती से श्रीपुर एक्सप्रेस जैसे उत्कृष्ट  मासिक पत्रिका का प्रकाशन पत्रकारिता के आदर्श को बचाए रखने में सहायक है। वर्तमान नकारात्मकता के दौर में सकारात्मक पत्रकारिता बड़ी बात है।


संबोधन @ श्री राजेश्वर खरे, वरिष्ठ साहित्यकार.
छत्तीसगढ़ी साहित्यकार राजेश्वर खरे ने पत्रकारों और पत्रकारिता से जुड़ाव के  संस्मरण सुनाए। उन्होंने पत्रकारिता की ताकत को चुटीले अंदाज में व्यक्त किया तो हाल ठहाकों से गूंज उठा। स्व वीरेंद्र दीपक, रमेश नैय्यर जैसे पत्रकारों के आदर्श का स्मरण करते हुए उन्होंने कहा कि रचनात्मक पत्रकारिता करना ब्रम्हा जी की सृष्टि के समान है।


संबोधन @ श्री सुरेंद्र मानिकपुरी, वरिष्ठ साहित्यकार.
वरिष्ठ साहित्यकार सुरेंद्र मानिकपुरी ने कहा कि श्रीपुर अर्थात समृद्धि की नगरी और एक्सप्रेस अर्थात अभिव्यक्ति। नाम के अनुरूप श्रीपुर एक्सप्रेस अभिव्यक्ति से समृद्ध है। यह समाज को दशा, दिशा दे रहे हैं। उन्होंने पंजाब केसरी का उदाहरण देते हुए कहा कि यह एक ऐसा समाचार पत्र है  प्रथम पेज पर साहित्य, धार्मिक कर्म अथवा अध्यात्म ही होता है। यह सकारात्मक पत्रकारिता का सबसे बड़ा उदाहरण है।

 


संबोधन @ श्री उमेश भारती गोस्वामी, संरक्षक-काव्यांश संस्थान.
काव्यांश के संरक्षक उमेश भारती गोस्वामी ने कहा कि पत्रकारिता एक तप, साधना है। कठिन परिश्रम से शिखर तक पहुंचा जा सकता है। कठिन परिस्थितियों में भी महासमुंद से बहुरंगीय पत्रिका के प्रकाशन को उन्होंने संघर्ष से मुकाम हासिल करने वाला कदम बताया। 

संबोधन @ श्री योगेश्वर चंद्राकर, प्रगतिशील किसान, पूर्व सांसद प्रतिनिधि .
श्रीपुर एक्सप्रेस के सह संपादक व प्रगतिशील किसान योगेश्वर चंद्राकर ने कहा कि वे उन्नत किस्म के बहुरंगी चावल का उत्पादन कर रहे हैं। उसी प्रकार श्रीपुर एक्सप्रेस भी बहुरंगीय प्रकाशन के साथ सभी विषयवस्तु को खुद में समाहित किया है। यह उन्नत और अद्वितीय पत्रकारिता का परिचायक है। वक्त गुजर जाएगा, पत्रिका में प्रकाशित लेख सदियों तक अमर रह जाएगा। हमारा हर अंक संग्रहणीय है। समाज के प्रतिभाओ को प्रोत्साहित भी कर रहे हैं।


संबोधन @ श्री गोवर्धन साहू, शिक्षक.
शिक्षक गोवर्धन साहू ने भी श्रीपुर एक्सप्रेस से जुड़ाव और पत्रकारिता के महत्व पर प्रकाश डाला। संचालन करते हुए समाजसेवी महेंद्र पटेल ने कहा कि अपने कर्मों से धरती का कर्ज चुकाने की कोशिश करते हैं। सभी को कुछ न कुछ विशेष कार्य करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उन्होंने साहित्य और पत्रकारिता से जुड़ाव पर संस्मरण सुनाया।

 

संबोधन @ श्री महेंद्र पटेल , समाजसेवी-शिक्षक.
संगोष्ठी को सफल बनाने में काव्यांश परिवार, प्रेस क्लब परिवार, डी बसंत साव, जयराम पटेल, वरिष्ठ पत्रकार सालिक राम कन्नौजे, प्रभात महंती, महेंद्र यादव, सहसंपादक देवराज साहू,साहित्यकार श्रीमती ज्योत्सना कन्नौजे, दिनेश चंद्राकर चारुमित्र, सुरेश चंद्राकर स्वप्निल, फारुख मोहम्मद फिरदौस, छबिराम मरकाम,लता चंद्राकर का विशिष्ट योगदान रहा। 

संगोष्ठी की झलकियां नीचे प्रदर्शित VIDEO में देखे जा सकते हैं:- 


वीडियो/फोटो : श्री प्रभात महंती वरिष्ठ पत्रकार, श्री महेंद्र पटेल (साभार.)







पत्रकारों को शाल- श्रीफल और स्मृति चिन्ह भेंटकर किया सम्मानित

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महासमुंद। प्रेस क्लब सांस्कृतिक भवन महासमुंद में क्लब के अध्यक्ष उत्तरा विदानी ने रविवार 18 सितम्बर को पत्रकार हेमंत राठौड़ की स्मृति में महासमुंद के दिवंगत पत्रकार साथियों के परिजनों और बुजुर्ग पत्रकारों को शाल, श्रीफल के साथ सम्मान पत्र भेंट किया। दोपहर 12 बजे आयोजित इस समारोह में पत्रकार स्व. विजय शर्मा का सम्मान उनकी बेटी आकांक्षा दुबे ने, स्व. हसरत खान का सम्मान उनके पुत्र सिकंदर खान, स्व. दिलीप सोनी का सम्मान उनके बड़े भाई होरी लाल सोनी, स्व. मनोहर शर्मा का सम्मान उनके पोते बिहारी शर्मा ने प्राप्त किया।



इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में लंबे समय तक काम कर चुके जसराज जैन, माधव टांकसाले, ईश्वर शर्मा, शकील लोहानी, शिवचंद साहू और मानिक गुप्ता का भी सम्मान किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत रिटायर्ड जज महेंद्र राठौड़ और शासकीय अभिभाषक भूपेंद्र राठौड़ ने दीप प्रज्वलित कर किया। ये दोनों ही पत्रकार हेमंत राठौड़ के बड़े भाई हैं। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए महेंद्र राठौड़ और भूपेंद्र राठौड़ ने कहा कि उनका परिवार सभी पत्रकारों के साथ खड़ा है। 

छोटे भाई के खोने का गम पत्रकार परिवार के बीच रहने से थोड़ा सा हल्का जरूर हो जाता है। हर पत्रकार को देखते ही लगता है कि शायद आसपास ही हेमंत भी है। आकांक्षा दुबे ने कहा कि संवाद साधना के प्रधान संपादक पिता के नाम का सम्मान पाकर आज अहसास हो रहा है कि वास्तव में मैं महान पिता की बेटी हूं। उनका नाता समाज के हर वर्ग से था। ईश्वर शर्मा और माधव टांकसाले ने अपनी दौर की पत्रकारिता से जुड़ी यादें ताजा की और कहा कि समय के साथ बदलना जरूरी है

लेकिन आमूल चूल परिवर्तन कम से कम पत्रकारिता में हरगिज नहीं होना चाहिए। उसके स्वभाव से छेड़छाड़ न हो।  सिकंदर खान ने रूंधे गले से कहा कि पिताजी की मौत के काफी लंबे समय बाद यह सम्मान मिला। जब वे पत्रकार थे तब उनकी पत्रकारिता जीवन का साझेदार मैं भी रहा और आज उनका सम्मान मैं ले जा रहा हूं। गौरतलब है कि पत्रकार हेमंत राठौड़ के देहावसान के बाद पत्रकार उत्तरा विदानी ने उनकी स्मृति में पत्रकारों को सम्मान देने का क्रम शुरू किया। यह दूसरा साल है जब दिवंगत पत्रकार साथियों और बुजुर्ग पत्रकारों को सम्मानित किया गया है।

पिछले साल उन्होंने पत्रकार रामकुमार तिवारी सुमन, राजेश शर्मा, सालिक राम कन्नौजे, बाबूलाल साहू, संजय डफले के अलावा स्व. ललित तारक के परिजन का सम्मान किया था। कार्यक्रम का संचालन अमित हृषिकर और आभार प्रदर्शन क्लब के महासचिव विपिन दुबे ने किया। इस अवसर पर क्लब के उपाध्यक्ष संजय यादव, कार्यकारिणी सदस्य बाबूलाल साहू, कुंजू रात्रे, वरिष्ठ पत्रकार  सालिक राम कन्नौजे, संजय महंती, दिनेश पाटकर, विक्रम साहू, भरत यादव, प्रभात महंती, अनिल चौधरी, देवीचंद राठी, लक्ष्मीनाथ चंद्राकर,पोषण कन्नौजे, अमित हृषिकर, सोहैल खान उपस्थित थे।

Murder In Mahasamund : जोबा में ऐसे हुआ महाभारत, जानिए जमीन कैसे बना जी का जंजाल

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अशोक कुमार साहू





रायपुरः छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से 75 किमी दूर स्थित है गांव जोबा। महासमुंद जिले के इस गांव की आधा आबादी बाबा गुरूघासीदास के अनुयायी सतनामी समाज के लोगों की है। बाबा ने सत्य-अहिंसा और नशामुक्ति का पाठ पढ़ाया, यह हम सब जानते हैं। लेकिन, यहां बाबा के अनुयायी एक परिवार की बेइमानी ने महाभारत करा दिया। कहा जाता है कि जर-जोरू-जमीन ये तीन ही संसार में सभी फसाद की जड़ हैं। कुरूक्षेत्र का महाभारत- हस्तिानपुर में सुई के नोंक के बराबर जमीन नहीं देने संबंधी दुर्योधन के उद्गार से शुरू हुआ। जो कौरव वंश के समूल नाश का कारण बना। ऐसा ही घटना महासमुंद जिले के जोबा गांव में घटित हुआ। जमीन का बंटवारा नहीं देना एक परिवार के लिए जी का जंजाल बन गया। ।




और महज 6 एकड़ जमीन के बंटवारा के लिए अब तक चार हत्याएं हो चुकी है। हत्या करने वालों की योजना तो बड़े भाई के खानदान को समूल नष्ट करने का था। लेकिन, ईश्वर को कुछ और ही मंजूर था। इसके चलते उनकी योजना सफल नहीं हो पायी।




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हत्यारोपी: चेहरे पर जरा भी सिकन नहीं





हाथों में हथियार लिए खड़े ये दोनों पिता-पुत्र पर त्रिपल मर्डर का आरोप है। तुमगांव थाना में इनके खिलाफ घर में बलात प्रवेश कर हत्या और हत्या का प्रयास का अपराध पंजीबद्ध हुआ है। अपने ही सगे भाई-भतीजों और रिश्तेदारों को मौत के घाट उतारने के बाद भी इनके चेहरे पर जरा भी सिकन नहीं है। हत्या का आरोपी परसराम गायकवाड़ तो अपने भतीजे की हत्या का दोषाभियुक्त रहा है। वह अपने भतीजा धनीराम की हत्या के लिए दस साल की सजा काटकर कुछ महीने पहले ही जेल से रिहा हुआ है। पिता के जेल जाने और खुद दाने-दाने के लिए मोहताज होने से परसराम के बेटे बज्रसेन के मन में भी नफरत घर कर गया था। बाप-बेटे के मन में भरा नफरत का गुबार योजनाबद्ध तरीके से हत्या की साजिश बनकर निकला।





आंख में मिर्ची पाउडर डालकर मारा





महासमुंद डीएसपी नारद सूर्यवंशी बताते हैं कि हत्यारोपी परसराम 62 और उनका बेटा बज्रसेन 27 दोनों ने हत्या की योजना बनाई। मिर्ची पाउडर लेकर ओसराम के घर के बाहर खड़े थे। सुबह करीब चार बजे जागृति नींद से जागकर शौच आदि के लिए जा रही थी। उसके आंखों में मिर्ची पाउडर डालकर धारदार हथियार से गला रेत दिया। बाद दोनों बाप-बेटा घर में प्रवेश कर गए। पत्नी जागृति की चीख-पुकार सुनकर घर से निकल रहे ओसकुमार पर भी दोनों ने संघातिक वार किया। वह जख्मी होने के बाद जैसे-तैसे वहां से भागकर जान बचाया और अपने बड़े भाई खिलावन को जगाया।




इस बीच हत्या की योजना बनाकर घर में घुसे बाप-बेटे ने सब्बल से एक कमरे के दरवाजे को तोड़ा और कमरे में सो रही टीना का गला रेत दिया। इस बीच टीना का नौ साल का भाई मनीष भागकर घर से बाहर निकला तो उसे दोनों ने दौड़ाकर पकड़ लिया और गला रेतकर हत्या कर दी।




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एक के बाद एक सात लोगों पर किया वार





आरोपित बाप-बेटे ने एक के बाद एक सात लोगों पर वार किया। परसराम की भाभी अनारबाई 60 पति सादराम का गला रेता। उसे मृत समझकर ओसकुमार की 15 साल की गूंगी बेटी गीतांजलि और 11 साल के बेटे ओमन पर भी वार किया। दोनों बाप-बेटे के सिर में खून सवार था। वे वहशी दरिंदे की तरह ओसकुमार को मारने के लिए ढूंढ रहे थे। जिससे कि वे उसे मारकर जमीन हासिल कर सकें। लेकिन, ओसकुमार ने वहां से भागकर ग्रामीणों को घटना की जानकारी दी। जिससे आरोपी बाप-बेटे की योजना पूरी तरह से सफल नहीं हो पायी। त्वरित उपचार मिलने से चार की जान फिलहाल बच गई है। गंभीर रूप से घायल ओसकुमार, गीतांजलि, अनारबाई और ओमन रायपुर के चिकित्सालय में भर्ती हैं।





यह है जमीन विवाद की जड़




इस जमीन विवाद को समझने के लिए तीन पीढ़ी की कहानी जानना जरूरी है। जोबा में लुड़गू सतनामी के दो बेटे हुए बड़ा सादराम और छोटा परसराम गायकवाड़( हत्यारोपी)। लुड़गू के पैतृक संपत्ति करीब 6 एकड़ का दोनों भाई के बीच बंटवारा होना था। जो विधिवत नहीं हुआ। आपसी बंटवारा से तीन-तीन एकड़ जमीन को खेती करके जीवन बसर कर रहे थे। ब़ड़े भाई सादराम के तीन बेटे हुए धनीराम, खिलावन और ओसकुमार। इधर, छोटे भाई परसराम का एक बेटा हुआ बज्रसेन गायकवाड़ (हत्यारोपी)।




लुड़गू की मौत के बाद पूरी जमीन बड़े भाई सादराम के नाम पर लंबरदारी में दर्ज हुआ। सादराम, तीन बेटों के जवान होने और बड़े होने से सबल हो गया। इधर, परसराम का बेटा छोटा था। जमीन के स्वामित्व और कब्जा को लेकर अक्सर भाई और भतीजों के बीच विवाद होता था। इससे आवेश में आकर एक दिन परसराम ने अपने बड़े भतीजे धनीराम की हत्या कर डाली। तब उसका बेटा ब्रजसेन नाबालिग था। भतीजे की हत्या न्यायालय में प्रमाणित होने से परसराम को दस साल की कैद की सजा सुनाई गई। वह सजा पूरी करके अभी कुछ समय पहले ही जेल से रिहा हुआ है।




पिता-पुत्र ने मिलकर बनाई हत्या की योजना





जेल की सजा काटने और जमीन नहीं मिलने से दोनों पिता-पुत्र के मन में नफरत घर कर गया था। कुछ महीने पहले बज्रसेन पलायन करके अन्य प्रांत में रोजी-रोटी की तलाश में गया था। जहां से कटार जैसे धारदार हथियार लेकर आया था। वह बलौदाबाजार जिले में अपने मामा के घर रह रहा था। इस बीच पिता के जेल से छूटने पर दोनों ने मिलकर हत्या करने और अपनी जमीन वापस हथियाने की योजना बनाई। करीब महीनेभर पहले दोनों बाप-बेटा अपने पैतृक गांव जोबा आए। जहां उन्हें रहने को घर नहीं मिला तो कांजी हाउस को आशियाना बना लिए। और खानदानी जमीन पर खेती कर रहे ओसकुमार के परिवार को निशाना बनाकर उनकी दिनचर्या पता करते रहे। जब उन्हें यकीन हो गया कि सुबह चार बजे के समय में हत्या की जा सकती है। तब योजनाबद्ध तरीके से मिर्ची पाउडर लेकर और हथियार लेकर आज सुबह धावा बोल दिया।





आठ साल पहले धनीराम का हुआ निधन





यह पुरानी रंजिश की अजब-गजब कहानी है। परसराम ने करीब आठ साल पहले अपने बड़े भतीजे धनीराम की हत्या कर दी थीं। जागृति उसी की धर्मपत्नी थी। बाद में जागृति ने पति की मौत का बदला लेने की ठानी और अपने देवर ओसकुमार से शादी कर ली। उसने योजनाबद्ध तरीके से वंशवृद्धि की। टीना, गीतांजलि दो बेटी और ओम तथा मनीष दो बेटों को उन्होंने जन्म दिया। अपने पहले पति की मौत का बदला लेने की बात अक्सर वह गुस्से में अपने चाचा ससुर के बेटे बज्रसेन से कहती थी। यह उसे नागवार गुजरा और अपने पिता के साथ मिलकर हत्या की योजना बना डाली





जमीन के बंटवारे को लेकर उपजा संघर्ष महाभारत में तब्दील हो गया। महज छह एकड़ जमीन का बंटवारा जी का जंजाल बन गया। जागृति का परिवार बिखर गया। जागृति और उसके दो बच्चों की मौत हो गई। वहीं उसकी सास, पति और दो बच्चे जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं।


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