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भोपाल में बनेगा सर्वसुविधायुक्त स्टेट मीडिया सेंटर - सीएम चौहान

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भोपाल। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि लोकतंत्र के आधार स्तंभ के रूप में मीडिया प्रतिनिधियों का परिश्रम प्रशंसनीय है। पत्रकार साथी दिन-रात कार्य करते हैं। अनेक कठिनाइयों के बीच वे तथ्यों और समाचारों को जनता तक पहुंचाने का कार्य करते हैं। यही नहीं सरकार और अन्य सभी के लिए सेतु के रूप में भी उनकी भूमिका महत्वपूर्ण होती है। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि मीडिया के लिए मेरे मन में बहुत आदर का स्थान है। आज इस पत्रकार समागम में अनेक साथियों से भेंट हो रही है।

मुख्यमंत्री चौहान आज मुख्यमंत्री निवास में पत्रकार समागम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री चौहान ने पत्रकार वर्ग के लिए अनेक महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। इनमें उपचार सहायता, बीमा योजना, आवास सुविधा, शिक्षा के लिए सुविधा आदि शामिल है। इसके साथ ही जनसंपर्क विभाग छोटे शहरों और कस्बों के पत्रकारों को डिजिटल तकनीक प्रशिक्षण दिलवाने का कार्य भी करेगा। आज हुए पत्रकार समागम में पहली बार राजधानी में प्रदेश के अनेक जिलों के पत्रकार एकत्र हुए।

अत्याधुनिक होगा स्टेट मीडिया सेंटर

मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि भोपाल के मालवीय नगर में पत्रकार भवन की भूमि वर्तमान में अनुपयोगी है। सभी की इच्छा है कि यहां नया भवन बने। इसे नया स्वरूप दिया जाएगा। नया भवन निर्मित किया जाएगा। नवनिर्मित भवन के साथ ही इसे स्टेट मीडिया सेंटर का दर्जा रहेगा। इसमें सभागार, पुस्तकालय, कैंटीन, सामान्य कक्ष सहित अन्य सुविधाएं होंगी। सेंटर में आधुनिक सुविधाएं भी उपलब्ध कराएंगे।

मीडिया के प्रतिनिधियों से मुख्यमंत्री चौहान ने की आत्मीय चर्चा

आज मुख्यमंत्री निवास में पत्रकार समागम में इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, प्रिंट मीडिया, न्यू मीडिया के विभिन्न माध्यमों और सोशल मीडिया के अलग-अलग माध्यमों के प्रतिनिधि उपस्थित हुए। आकाशवाणी, दूरदर्शन से जुड़े प्रतिनिधियों और एफएम चैनल के प्रतिनिधि भी पत्रकार समागम में शामिल हुए। वीडियोग्राफर और फोटोग्राफर भी पत्रकार समागम में पहुंचे। राजधानी भोपाल सहित प्रमुख नगरों इंदौर, उज्जैन, सागर, रीवा, शहडोल, चंबल, ग्वालियर और नर्मदापुरम सहित सभी संभागों के सभी जिलों के प्रतिनिधि आए। मुख्यमंत्री चौहान ने संबोधन के पश्चात मीडिया बंधुओं से आत्मीय भेंट और चर्चा की। मुख्यमंत्री चौहान ने मीडिया के बंधुओं को दोपहर भोज के लिए आमंत्रित किया और भोजन के पश्चात ही प्रस्थान करने का आग्रह किया। व्रतधारी अतिथियों के लिए फलाहार की भी व्यवस्था की गई थी। पत्रकारों ने मुख्यमंत्री निवास परिसर में नवनिर्मित समत्व भवन और भोज ताल की सुंदरता का भी अवलोकन किया।

मुख्यमंत्री चौहान की महत्वपूर्ण घोषणाएं

राजधानी के पत्रकार भवन की भूमि पर नए भवन का निर्माण किया जाएगा।

 वर्तमान में भोपाल में दो स्थानों पर पत्रकारों के लिए भूमि आवंटित कर कॉलोनी विकसित की गई है। अन्य नगरों में आज की आवश्यकता के अनुसार पत्रकारों की सोसायटी को भूमि प्रदान करने की कार्यवाही की जाएगी। इसके लिए विधिवत कदम उठाए जाएंगे। इससे पत्रकार बंधुओं को अपना मकान बनाने के लिए व्यवस्था आसान होगी।

बीमा कंपनी द्वारा प्रीमियम राशि में 27 प्रतिशत वृद्धि की गई थी। बढ़ी हुई राशि पत्रकारों को नहीं भरना होगी। राज्य सरकार बढ़ी हुई राशि वहन करेगी। गत वर्ष की तरह ही पत्रकारों को प्रीमियम देना होगा।

65 वर्ष से अधिक उम्र के वरिष्ठ पत्रकारों को बीमा के लिए प्रीमियम राज्य सरकार द्वारा भरा जाएगा। पत्रकारों के जीवनसाथी (पति/पत्नी) के बीमा का प्रीमियम भीराज्य सरकार भरेगी।

बीमा योजना की अंतिम तिथि 16 सितंबर से बढ़ाकर 25 सितंबर की जाएगी।

अस्वस्थ होने पर पत्रकार बंधु को आर्थिक सहायता के लिए वर्तमान प्रावधान 20 हजार के स्थान पर 40 हजार रूपए किया जाएगा। गंभीर बीमारी की स्थिति में यह 50 हजार के स्थान पर एक लाख रुपये होगा।

मध्यप्रदेश के वरिष्ठ एवं बुजुर्ग पत्रकारों को मासिक सम्मान निधि की राशि 10 हजार के स्थान पर 20 हजार रूपए होगी।

सम्मान निधि प्राप्त करने वाले पत्रकार के अवसान की स्थिति में परिवार को आठ लाख रूपए की राशि प्रदान की जाएगी।

अधिमान्यता प्राप्त पत्रकारों को आवास ऋण ब्याज अनुदान योजना के अंतर्गत अधिकतम ऋण की राशि 25 लाख से बढ़ाकर 30 लाख रूपए की जाएगी।

अधिमान्यता प्राप्त पत्रकारों के बेटे-बेटियों की शिक्षा के लिए बैंक से ऋण पर उसके ब्याज पर 5 प्रतिशत ब्याज अनुदान 5 वर्ष के लिए राज्य सरकार वहन करेगी।

मध्यप्रदेश के छोटे शहरों और कस्बों के पत्रकार साथियों की जरूरत के अनुसार उन्हें भोपाल में डिजिटल तकनीक का प्रशिक्षण दिलवाया जाएगा। इसके लिए जनसंपर्क विभाग आवश्यक व्यवस्थाएं करेगा। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल का सहयोग भी प्राप्त किया जाएगा।

पत्रकार सुरक्षा कानून के लिए वरिष्ठ पत्रकारों की समिति गठित कर प्राप्त सुझावों पर राज्य शासन द्वारा अमल किया जाएगा।

पत्रकार समागम के अवसर पर मुख्यमंत्री और जनसंपर्क विभाग के सचिव विवेक पोरवाल, आयुक्त जनसंपर्क मनीष सिंह, जनसंपर्क संचालक आशुतोष प्रताप सिंह और मुख्यमंत्री कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

वसुंधरा सम्मान से सम्मानित होंगे वरिष्ठ पत्रकार- लेखक सुधीर सक्सेना

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रायपुर। स्वर्गीय देवीप्रसाद चौबे की स्मृति में स्थापित एवं लोकजागरण के लिए प्रदत्त वसुंधरा सम्मान इस वर्ष वरिष्ठ पत्रकार-लेखक सुधीर सक्सेना को प्रदान किया जाएगा। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सक्सेना को वसुंधरा सम्मान से सम्मानित करेंगे।

पत्रकार दिवाकर मुक्तिबोध की अध्यक्षता में गठित निर्णायक समिति के सदस्यों सर्वश्री गिरीश पंकज, ई.वी.मुरली, समीर दीवान, राजेश गनोदवाले, राघवेंद्र प्रताप सिंह, वसुंधरा सम्मान के संयोजक विनोद मिश्र, आयोजन समिति के अध्यक्ष डा.अरुण कुमार श्रीवास्तव, सचिव मुमताज़ ने संयुक्त रूप से इस निर्णय की जानकारी दी है। वसुंधरा सम्मान का यह निरंतर 23 वां आयोजन है। सम्मान समारोह स्वर्गीय देवी प्रसाद चौबे की 47 वीं पुण्य तिथि के अवसर पर 14 अगस्त 2023 को मुख्यमंत्री निवास रायपुर में आयोजित होगा।

निर्णायक समिति से मिली जानकारी के अनुसार सुधीर सक्सेना राष्ट्रीय ख्याति के पत्रकार हैं जिनका छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश की पत्रकारिता में महत्वपूर्ण योगदान है। 1978 से लेकर आज पर्यन्त तक उन्होंने धर्मयुग, दिनमान, रविवार, कल्पना, संडे आब्जर्वर, जनसत्ता, नवभारत टाइम्स, अमर उजाला, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर, नवभारत, नईदुनिया, पत्रिका, देशबंधु, माया, वागर्थ, पहल, बहुमत, अक्षर पर्व, समकालीन भारतीय साहित्य, बहुवचन आदि अनेक पत्र-पत्रिकाओं में विपुल लेखन किया है। सुधीर सक्सेना के 14 कविता संग्रह, वैदेशिक एवं भारतीय भाषाओं में अनुवाद की 11 पुस्तकें, कथेतर गद्य की अन्य 18 पुस्तकें प्रकाशित हैं।

उन्होंने छत्तीसगढ़ में गांधी, मध्यप्रदेश में आजादी की लड़ाई और आदिवासी, भूमकाल, छत्तीसगढ़ में मुक्तिसंग्राम और आदिवासी, गुण्डाधुर एक योद्धा जैसी पुस्तकों के माध्यम से छत्तीसगढ़ की सामाजिक-राजनीतिक पृष्ठभूमि पर महत्वपूर्ण लेखन किया है। वे माधवराव सप्रे पुरस्कार, पुश्किन सम्मान, वागीश्वरी सम्मान, प्रमोद वर्मा सम्मान, शमशेर सम्मान, जैसे अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित हो चुके हैं। इन दिनों वे पाक्षिक पत्रिका दुनिया इन दिनों का सम्पादन कर रहे हैं।

विगत वर्षों में वसुंधरा सम्मान से स्वर्गीय रमेश नैयर, स्वर्गीय श्याम लाल चतुर्वेदी, स्वर्गीय कुमार साहू, स्वर्गीय बसंत कुमार तिवारी, स्वर्गीय विनोद शंकर शुक्ल, स्वर्गीय शरद कोठरी, स्वर्गीय बबन प्रसाद मिश्र, डा. हिमांशु द्विवेदी, दिवाकर मुक्तिबोध, आशा शुक्ला, गिरिजाशंकर, ज्ञान अवस्थी, श्याम वेताल, अभय किशोर, डा. सुशील त्रिवेदी, गिरीश पंकज, बी. के. एस. रे, प्रकाश दुबे, स्वर्गीय तुषार कांति बोस, ई. वी. मुरली, सतीश जायसवाल और लीलाधर मंडलोई को सम्मानित किया जा चुका है।

चार साल की मासूम को तीन दिन भूखा बाथरूम में रखा था बंद , चाइल्ड लाइन ने बच्ची को किया रेस्क्यू

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रायगढ़। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिलान्तर्गत खरसिया में सरकारी स्कूल की हेडमास्टर पर गोद ली हुई अपनी चार साल की मासूम बेटी पर दरिंदगी का आरोप लगा है। पड़ोसियों की शिकायत पर महिला बाल विकास और चाइल्ड लाइन ने बच्ची को रेस्क्यू किया है। शिक्षिका ने मासूम को तीन दिनों तक खाना नहीं दिया था और उसे बाथरूम में बंद कर दिया था। पड़ोसियों को इसका पता चला तो एक पत्रकार को सूचना दी गई। इसके बाद विभाग को पता चला और बच्ची को छुड़ाया जा सका।


आशा अग्रवाल पति रघुनाथ अग्रवाल बासंमुड़ा के प्राथमिक शाला की प्रभारी प्रधान पाठक हैं। वे खरसिया के सिंचाई (मांड) कॉलोनी में रहती हैं। बताया जा रहा है कि उन्होंने एक मासूम बच्ची को गोद लिया था। वह कुछ महीनों से बच्ची से मारपीट कर रही थीं।

तीन दिन से खाना नहीं दिया और उसे बाथरूम में बंद कर दिया। इस घटना की जानकारी कॉलोनी के लोगों को हुई। पत्रकार के माध्यम से महिला बाल विकास अधिकारी पुनीता दर्शन और एसडीओपी निमिषा पांडेय को सूचित किया गया। इसके बाद टीम शिक्षिका के घर पहुंची।

बाथरूम में बाहर से कुंडी लगी थी और बच्ची अंदर बंद थी। बाथरूम खोलकर बच्ची को बाहर निकाला। बच्ची की हालत देखकर अफसर और साथ गए लोग सहम गए। बच्ची को चाइल्ड लाइन के सुपुर्द किया है। उसे रायगढ़ में रखा है।

खरसिया एसडीओपी निमिषा पाण्डेय ने कहा कि महिला व बाल विकास विभाग और चाइल्ड लाइन से रिपोर्ट मिलेगी, फिर महिला से पूछताछ होगी। उसी आधार पर कार्रवाई करेंगे। हम अपने स्तर पर पता लगा रहे हैं कि बच्ची को उसने कहां से लाई। गोदनामे में लिया है कि नहीं। फिलहाल पता चला है कि शिक्षिका ने अंबिकापुर के एक परिचित के यहां से बच्ची लाई थी। महिला शासकीय सेवक है। रिपोर्ट और पूछताछ के बाद कार्रवाई करेंगे।

चाइल्ड लाइन प्रभारी दीपक डनसेना ने बताया महिला ने बच्ची को तीन दिन से बाथरूम में बंद किया था। ज्वुएनाइल जस्टिस और आईपीसी के तहत कार्रवाई के लिए पुलिस को पत्र लिख रहे हैं। रेस्क्यू करते हुए पुलिस भी थी, इसलिए वे सीधे भी कार्रवाई कर सकते हैं। बच्ची को सीडब्ल्यूसी में पेश किया है। उसकी काउंसलिंग कराई गई है। बिना तय प्रक्रिया के या गोदनामे के कोई भी दंपती या महिला किसी बच्चे को नहीं रख सकते।

बच्ची को रेस्क्यू करने के बाद रायगढ़ की संस्था मातृ निलियम में रखा गया है। संस्था के संचालक सिद्धार्थ महांती ने बताया कि बच्ची चार साल की है। उसके साथ बदसलूकी से वह घबराई हुई है। कुछ बोल नहीं पा रही है। सिर्फ घर जाने की जिद कर रही है। बच्ची को काउंसलिंग की जरूरत है। यहां उसे वरिष्ठ सदस्यों की निगरानी में रखा गया है।


जन संस्कृति मंच का 16वां राष्ट्रीय सम्मेलन : रविभूषण अध्यक्ष और मनोज सिंह महासचिव चुने गए

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रायपुर। फासीवाद के खिलाफ देश की सांस्कृतिक शक्तियों को एकजुट करने के संकल्प के साथ जन संस्कृति मंच का दो दिवसीय 16वां राष्ट्रीय सम्मेलन 9 अक्टूबर को सम्पन्न हुआ। सम्मेलन के आखिरी दिन प्रतिनिधियों ने 141 सदस्यीय राष्ट्रीय परिषद और 37 सदस्यीय कार्यकारिणी का चुनाव किया। प्रसिद्ध हिन्दी आलोचक रविभूषण जन संस्कृति मंच के नए अध्यक्ष चुने गए। पत्रकार और संस्कृतिकर्मी मनोज कुमार सिंह दुबारा महासचिव चुने गए। प्रतिनिधियों द्वारा चुने गए परिषद ने जाने माने कवि लाल्टू, मदन कश्यप, वरिष्ठ कथाकार शिवमूर्ति, गुजरात के साहित्यकार भरत मेहता



प्रसिद्ध चित्रकार अशोक भौमिक, चर्चित रंगकर्मी जहूर आलम और रामजी राय को उपाध्यक्ष चुना। जन संस्कृति मंच की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में इन पदाधिकारियों के अलावा संजय जोशी, प्रणय कृष्ण, कौशल किशोर, जितेन्द्र कुमार, आशुतोष कुमार, संतोष झा, समता राय, अनिल अंशुमन, दीपक सिन्हा, सुरेन्द्र प्रसाद सुमन, मृत्युंजय, दुर्गा सिंह, रामनरेश राम, डीपी सोनी, सुधीर सुमन, जेवियर कुजूर, बलभद्र, अनुपम सिंह, हिमांशु पंड्या, उमा राग, रामायन राम, कैलाश वनवासी, प्रेमशंकर सिंह, आनंद बहादुर

सियाराम शर्मा, अवधेश त्रिपाठी और दीपक सिंह सर्वसम्मत से चुने गए। कार्यकारिणी में एक जगह रिक्त रखी गयी है। राष्ट्रीय कार्यकारिणी को यह अधिकार दिया गया कि बाद में वह कार्यकारिणी के लिए एक और सदस्य को चुने। सम्मेलन के दूसरे दिन सांगठनिक सत्र में महासचिव की रिपोर्ट, राज्यों व निकायों की रिपोर्ट पर प्रतिनिधियों ने चर्चा की और उसे पारित किया। सांस्कृतिक सत्र में प्रसिद्ध कवि देवी प्रसाद मिश्र, लाल्टू, पंकज चतुर्वेदी, जहूर आलम, देव शुक्ल, बलभद्र, आनंद बहादुर

घनश्याम त्रिपाठी, कमलेश्वर साहू, राजेश कमल, अनुपम सिंह,मुकुल सरल, प्रियदर्शन मालवीय, शंभू बादल, वासुकी प्रसाद उन्मत, विनोद सिंह ने कविता पाठ किया। इसी सत्र में बेगूसराय की रंगनायक द लेफट थियेटर ने भीष्म साहनी की कहानी अमृतसर आ गया है पर आधारित नाटक का मंचन किया। नाटक का निर्देशन दीपक सिन्हा ने किया। मंच पर एकल पात्र को विजय कृष्ण ने जीवंत किया। रायपुर के द इंडियन रोलर बैंड की शानदार प्रस्तुति के साथ सम्मेलन को समापन हुआ।

पत्रकारों को शाल- श्रीफल और स्मृति चिन्ह भेंटकर किया सम्मानित

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महासमुंद। प्रेस क्लब सांस्कृतिक भवन महासमुंद में क्लब के अध्यक्ष उत्तरा विदानी ने रविवार 18 सितम्बर को पत्रकार हेमंत राठौड़ की स्मृति में महासमुंद के दिवंगत पत्रकार साथियों के परिजनों और बुजुर्ग पत्रकारों को शाल, श्रीफल के साथ सम्मान पत्र भेंट किया। दोपहर 12 बजे आयोजित इस समारोह में पत्रकार स्व. विजय शर्मा का सम्मान उनकी बेटी आकांक्षा दुबे ने, स्व. हसरत खान का सम्मान उनके पुत्र सिकंदर खान, स्व. दिलीप सोनी का सम्मान उनके बड़े भाई होरी लाल सोनी, स्व. मनोहर शर्मा का सम्मान उनके पोते बिहारी शर्मा ने प्राप्त किया।



इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में लंबे समय तक काम कर चुके जसराज जैन, माधव टांकसाले, ईश्वर शर्मा, शकील लोहानी, शिवचंद साहू और मानिक गुप्ता का भी सम्मान किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत रिटायर्ड जज महेंद्र राठौड़ और शासकीय अभिभाषक भूपेंद्र राठौड़ ने दीप प्रज्वलित कर किया। ये दोनों ही पत्रकार हेमंत राठौड़ के बड़े भाई हैं। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए महेंद्र राठौड़ और भूपेंद्र राठौड़ ने कहा कि उनका परिवार सभी पत्रकारों के साथ खड़ा है। 

छोटे भाई के खोने का गम पत्रकार परिवार के बीच रहने से थोड़ा सा हल्का जरूर हो जाता है। हर पत्रकार को देखते ही लगता है कि शायद आसपास ही हेमंत भी है। आकांक्षा दुबे ने कहा कि संवाद साधना के प्रधान संपादक पिता के नाम का सम्मान पाकर आज अहसास हो रहा है कि वास्तव में मैं महान पिता की बेटी हूं। उनका नाता समाज के हर वर्ग से था। ईश्वर शर्मा और माधव टांकसाले ने अपनी दौर की पत्रकारिता से जुड़ी यादें ताजा की और कहा कि समय के साथ बदलना जरूरी है

लेकिन आमूल चूल परिवर्तन कम से कम पत्रकारिता में हरगिज नहीं होना चाहिए। उसके स्वभाव से छेड़छाड़ न हो।  सिकंदर खान ने रूंधे गले से कहा कि पिताजी की मौत के काफी लंबे समय बाद यह सम्मान मिला। जब वे पत्रकार थे तब उनकी पत्रकारिता जीवन का साझेदार मैं भी रहा और आज उनका सम्मान मैं ले जा रहा हूं। गौरतलब है कि पत्रकार हेमंत राठौड़ के देहावसान के बाद पत्रकार उत्तरा विदानी ने उनकी स्मृति में पत्रकारों को सम्मान देने का क्रम शुरू किया। यह दूसरा साल है जब दिवंगत पत्रकार साथियों और बुजुर्ग पत्रकारों को सम्मानित किया गया है।

पिछले साल उन्होंने पत्रकार रामकुमार तिवारी सुमन, राजेश शर्मा, सालिक राम कन्नौजे, बाबूलाल साहू, संजय डफले के अलावा स्व. ललित तारक के परिजन का सम्मान किया था। कार्यक्रम का संचालन अमित हृषिकर और आभार प्रदर्शन क्लब के महासचिव विपिन दुबे ने किया। इस अवसर पर क्लब के उपाध्यक्ष संजय यादव, कार्यकारिणी सदस्य बाबूलाल साहू, कुंजू रात्रे, वरिष्ठ पत्रकार  सालिक राम कन्नौजे, संजय महंती, दिनेश पाटकर, विक्रम साहू, भरत यादव, प्रभात महंती, अनिल चौधरी, देवीचंद राठी, लक्ष्मीनाथ चंद्राकर,पोषण कन्नौजे, अमित हृषिकर, सोहैल खान उपस्थित थे।

जनसम्पर्क विभाग द्वारा दिये जाने वाले राज्य सम्मान 2022 हेतु प्रविष्टियां आमंत्रित

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रायपुर। जनसम्पर्क विभाग छत्तीसगढ़ शासन, द्वारा प्रख्यात पत्रकार स्वर्गीय चन्दूलाल चन्द्राकर और स्वर्गीय मधुकर खेर की स्मृति में दिए जाने वाले राज्य अलंकरण पुरस्कार के लिए प्रविष्टि 23 सितम्बर 2022 तक आमंत्रित की गई है। राज्य की संस्कृति, समृद्धि और विकास के संबंध में रचनात्मक लेखन के लिए पत्रकारों को प्रोत्साहित करने और उत्कृष्ट रिपोर्टिंग के लिए उन्हें सम्मानित करने के लिए चन्दूलाल चन्द्राकर स्मृति पत्रकारिता पुरस्कार और मधुकर खेर स्मृति पत्रकारिता पुरस्कार की स्थापना की गयी है। ये पुरस्कार क्रमशः दो-दो पत्रकारों को दिए जाएंगे। इनमें से दो प्रिंट मीडिया से और दो इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से होंगे।




पुरस्कार के लिए प्रविष्टि 23 सितम्बर 2022 तक संचालक, जनसम्पर्क संचालनालय, भूतल, इन्द्रावती भवन, नवा रायपुर अटल नगर, जिला-रायपुर (छत्तीसगढ़) 492002 के पते पर निर्धारित प्रारूप में सीलबंद लिफाफे में पंजीकृत डाक द्वारा भेजे जा सकते हैं। प्रविष्टि से संबंधित सीलबंद लिफाफे के ऊपर चन्दूलाल चन्द्राकर स्मृति पत्रकारिता पुरस्कार 2022 अथवा मधुकर खेर स्मृति पत्रकारिता पुरस्कार 2022 स्पष्ट रूप से लिखा होना चाहिए। निर्धारित समय सीमा के बाद प्राप्त प्रविष्टियों पर विचार नहीं किया जाएगा। इन पुरस्कारों से संबंधित नियम और आवेदन प्रारूप जनसम्पर्क विभाग की वेबसाइट www.dprcg.gov.in से डाउनलोड किये जा सकते हैं।

चन्दूलाल चन्द्राकर स्मृति पत्रकारिता पुरस्कार:- इस पुरस्कार के अंतर्गत दो चयनित पत्रकारों को रूपए 50 हजार- 50 हजार रूपए (रूपए पचास-पचास हजार) की सम्मान राशि दी जाएगी। इनमें से एक पुरस्कार प्रिंट मीडिया के लिए तथा दूसरा पुरस्कार इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के लिए होगा। पुरस्कार हिंदी या छत्तीसगढ़ी में प्रिंट मीडिया में प्रकाशित राष्ट्रीय या प्रादेशिक स्तर की उत्कृष्ट रिपोर्टिंग अथवा आलेख एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से प्रसारित राष्ट्रीय या राज्य स्तर के हिंदी या छत्तीसगढ़ी कार्यक्रम, जो छत्तीसगढ़ राज्य से संबंधित हों, के लिए होंगे।

मधुकर खेर स्मृति पत्रकारिता पुरस्कार:- इस पुरस्कार के अंतर्गत दो चयनित पत्रकारों को 50 हजार 50 हजार रूपए (रूपए पचास-पचास हजार) की सम्मान राशि दी जाएगी। इनमें से एक पुरस्कार प्रिंट मीडिया के लिए और दूसरा पुरस्कार इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के लिए होगा। पुरस्कार अंग्रेजी भाषा में प्रिंट मीडिया में प्रकाशित राष्ट्रीय या प्रादेशिक स्तर की उत्कृष्ट रिपोर्टिंग अथवा आलेख एवं अंग्रेजी भाषा में ही इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से प्रसारित राष्ट्रीय या राज्य स्तर के अंग्रेजी कार्यक्रम जो छत्तीसगढ़ राज्य से संबंधित हों, के लिए होंगे।

पुरस्कार के लिए व्यक्ति स्वयं प्रविष्टि दे सकेगा अथवा किसी उपयुक्त व्यक्ति के लिए किसी भी पंजीकृत समाचार पत्र-पत्रिका या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया या संपादकीय प्रमुख अथवा छत्तीसगढ़ या भारत का कोई भी अधिमान्यता प्राप्त पत्रकार प्रस्तावक हो सकेगा। प्रविष्टियां पुरस्कार वर्ष के सितंबर माह के पूर्व वर्ष के 31 अगस्त से एक वर्ष के बीच किए गए रचनात्मक लेखन अथवा रिपोर्टिंग से संबंधित होने चाहिए। पुरस्कार हेतु विचारार्थ प्रविष्टि किसी एक प्रकाशित या प्रसारित सामग्री की सत्यापित कतरन या सीडी या डीवीडी के रूप में छह प्रतियों में आवेदन के साथ संलग्न करना होगा। आवेदक अथवा प्रस्तावक द्वारा प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा कि पुरस्कार के लिए बताए गए तथ्य वास्तविक हैं।

पिता की चिता को मुखाग्नि, अर्थी को कन्धा दे रहीं हैं बेटियां, वाकई बदल रहा है हमारा देश-समाज

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आनंदराम पत्रकारश्री @ महासमुंद. युवा पत्रकार और नवोदित साहित्यकार 'साहस साव' असमय ही काल के गाल में समा गए। नशे की लत और दुःसाहस ने हमसे हमारा 'साहस' छीन लिया। मन बहुत व्यथित है, जीवन यात्रा में अनेक अवसरों पर साथ निभाने वाला 'साहस' इतनी जल्दी हमें अलविदा कहने की दुःसाहस भला कैसे कर सकते हैं? लंबी सांस लेकर मन को इस तरह समझा रहे हैं- 'विधि के विधान के समक्ष नतमस्तक होने के अलावा और कोई विकल्प नहीं है।' 

साहस साव की अर्थी को कंधा देती हुई बेटियां हर्षा और लीली

दुःख की इस बेला में सीना गर्व से तब चौड़ा हो गया, जब 'साहस' की दो बेटियों ने अर्थी को कंधा देकर अदम्य साहस का परिचय दिया। ऐसा भी नहीं है कि 'साहस' के परिवार में कोई नहीं है। भरा पूरा, लंबा-चौड़ा परिवार है। बहुत से रिश्तेदार हैं। 



मुखाग्नि देने का अधिकार क्या केवल बेटे को है?
पिता की चिता को मुखाग्नि देने का अधिकार क्या केवल बेटे को ही है? नहीं न। बेटे और बेटियों में हमारा पुरूष प्रधान समाज भेद करता रहा है। महिलाओं का शमशान घाट तक जाना भी वर्जित मान रखे हैं। इन परिस्थितियों में पिता की चिता को मुखाग्नि देकर, अर्थी को कन्धा देकर 'साहस' की बेटियों ने यह साबित कर दिखाया है कि वे वास्तव में 'साहस' की बहादुर बेटियां हैं। वाकई हमारा देश और समाज अब बदल रहा है। 'साहस' की इन साहसी बेटियों को हम सलाम करते हैं। 
पिता की चिता को मुखाग्नि देती हुई बेटियां 




सामाजिक सरोकार की चहुँओर चर्चा

तीज पर्व (30.8.2022) के दिन 'साहस' के नहीं रहने की सूचना मिली। मीडिया24मीडिया डिजिटल प्लेटफॉर्म पर खबर प्रकाशन के साथ ही 'साहस' के सामाजिक सरोकार और कुशल व्यवहार की चहुँओर चर्चा होने लगी। तीज त्यौहार में दूर गांव  गईं 'साहस' की माँ और बेटी-बहनों को देहावसान की सूचना दी गई। उनके झलप वापस आने पर दोपहर बाद बंगला पारा झलप से अंतिम यात्रा निकाली गई। यात्रा में बड़ी संख्या में प्रबुद्धजन और नामी हस्तियां शरीक हुए। शोक संतप्त परिवार में 'साहस' की अर्थी उठाने और मुखाग्नि देने को लेकर चर्चा होने लगी। 


'साहस' की बेटियों का साहसिक निर्णय
पिता की अर्थी को दुःखी मन से कंधा देना किसी के लिए भी कम बड़ा साहस नहीं है। 'साहस' की बड़ी बेटी हर्षा ने जब कंधा और मुखाग्नि देने का सहसा प्रस्ताव रखा। तो वहां उपस्थित परिजनों और सामाजिक कार्यकर्ताओ के आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा। हर्षा के प्रस्ताव पर छोटी बेटी तोयनिधि भी सहर्ष सहमति जताई। देखते ही देखते सभी के बीच इसकी चर्चा होने लगी। मौके पर उपस्थित साहू समाज के जिलाध्यक्ष धरम साहू ने इस प्रस्ताव पर सहमति जताई। फिर दोनों बेटियों हर्षा (18 वर्ष) और 16 वर्षीय तोयनिधि (लिली) ने अपने पिता 'साहस' के अर्थी को कंधा देने का साहसिक निर्णय लिया। उन्होंने अपने घर से निजी भूमि पर बने अंतिम संस्कार स्थल तक अर्थी को कंधा दी।


बेटियों पर सभी को है गर्व
यह नजारा जिसने भी देखा बेटियों पर गर्व किया। "बेटियां, मां-बाप पर बोझ नहीं होती हैं, अब तो वह पिता की अर्थी का भार भी उठाने लगी हैं।" इसकी ही चर्चा होती रही। अंतिम यात्रा में पूर्व विधायक डॉ विमल चोपड़ा, वरिष्ठ भाजपा नेता मोती साहू, साहू समाज के जिला अध्यक्ष व भाजपा मंत्री धरम दास साहू, देवा नायक, सरपंच किशन कोसरिया, उपसरपंच सीटू सलूजा के अलावा पत्रकारिता, स्वास्थ्य, शिक्षा, साहित्य जगत से जुड़े अनेक गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में शामिल हुए। होनहार युवा पत्रकार को नम आंखों से विदाई दी गई। बेटियों के द्वारा पिता की चिता को मुखाग्नि देते देखकर सबकी आंखें भर आयी। 


सामाजिक परिवर्तन का सूत्रधार साहू समाज
अंतरराष्ट्रीय तेली दिवस की पूर्व संध्या पर जब भाव भरे इन पंक्तियों को लिख रहा था। तब सामाजिक परिवर्तन में तेली (साहू) समाज की भूमिका का ख्याल आने लगा। अदम्य साहस का परिचय देने वाली ये बेटियां तेली (साहू) समाज की हैं। उल्लेखनीय है कि साहू समाज ने मृत्यु भोज की अनिवार्यता समाप्त कर दिया है। देहावसान पर कफ़न कपड़ा ओढ़ाने की परंपरा को बदलकर शोक संतप्त परिवार के घर दान पेटी रखने की परंपरा में तब्दील किया है। इसके लिए सामाजिक जनजागरण अभियान चलाया जा रहा है। करीब 50 साल पहले मुनगासेर (बागबाहरा) में आदर्श सामूहिक विवाह का प्रथम आयोजन करने का नवाचार साहू समाज ने ही किया था। यह ऐतिहासिक परिवर्तन खर्चीली शादी रोकने का विकल्प बना। गरीब बेटियों के हाथ पीले करने का आधार बना। अब तो सरकार ने इसे 'मुख्यमंत्री कन्यादान योजना' सामूहिक आदर्श विवाह के रूप में अंगीकार कर लिया है। 






पत्रकार गृह निर्माण सहकारी समिति मचेवा का पंजीयन मिथ्या जानकारी देकर कराने का आरोप है मनगढ़ंत और बेबुनियाद

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महासमुन्द। पत्रकार गृह निर्माण सहकारी समिति मचेवा (पं. क्र. 823/2.6.2020) के संबंध में कतिपय विघ्नसंतोषी लोगों द्वारा भ्रम फैलाया जा रहा है। जो निष्पक्ष जांच से स्पष्ट हो जाएगा। इसकी उच्च स्तरीय जांच के लिए सहकारिता मंत्री और पंजीयक सहकारी संस्थाएं छत्तीसगढ़ को पत्र लिखा गया है। इस संबंध में संस्था के अध्यक्ष आनंदराम पत्रकारश्री, उपाध्यक्ष दिनेश पाटकर, जिला सहकारी संघ प्रतिनिधि संजय महंती, पूर्व अध्यक्ष व संचालक सदस्य उत्तरा विदानी



संचालक सदस्यगण विपिन दुबे, जसवंत पवार, मीना बाबूलाल साहू, धर्मीन पोषण कन्नौजे, राखी रत्नेश सोनीअनिता संजय यादव, लोकेश साहू ने मीडिया को जारी बयान में कहा है कि मिथ्या जानकारी देकर संस्था का पंजीयन कराने का आरोप बेबुनियाद है। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के तथाकथित पत्रकारों द्वारा तथ्यों की गलत व्याख्या करके उप पंजीयक सहकारी संस्थाएं महासमुन्द को दिग्भ्रमित करने का प्रयास किया जा रहा है। इसके खिलाफ संस्था द्वारा कानूनी कार्यवाही की जा रही है। 

पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर और लाभ नहीं मिलने से बौखलाहट में शिकायत करने वाले विघ्नसंतोषी लोग छत्तीसगढ़ के मूल निवासी नहीं हैं। पलायन कर आए हुए लोग छत्तीसगढ़ी लोगों पर हुकूमत करने का असफल प्रयास कर रहे हैं। इसकी जानकारी भी छत्तीसगढ़ी मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को दी गई है। ये वही लोग हैं, जो मुख्यमंत्री का बहिष्कार करने की धमकी देकर जिला प्रशासन पर अनर्गल दबाव बना रहे हैं। 

इस मामले में भी जांच अधिकारी से मिलीभगत करके तथ्यों को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत किया गया है।संस्था के किसी भी सदस्य ने कोई मिथ्या जानकारी नहीं दी है। कुछ बिंदुओं पर जांच अधिकारी ने शिकायतकर्ताओं से मिलीभगत कर संस्था का समुचित पक्ष जाने बिना, शिकायतकर्ताओं के तथाकथित फर्जी बयान (जो जांच रिपोर्ट में संलग्न ही नहीं है) के आधार पर गलत व्याख्या की है। जिससे समूची जांच कार्यवाही संदेहास्पद है। यह जांच, समिति के 27 सदस्यों वाले पत्रकार परिवार को स्वीकार्य नहीं है।

यह है कानूनी प्रावधान

संस्था की उपविधि 5 (10) में स्पष्ट उल्लेखित है कि " एक परिवार से पति/पत्नी या उसके अव्यस्क पुत्र/पुत्री में से कोई भी एक सदस्य ही संस्था का सदस्य बन सकेगा। पत्रकारिता क्षेत्र में कार्यरत परिवार ही सदस्यता के लिए पात्र होंगे।" इसी के आधार पर 33 प्रतिशत महिला सदस्यों की अनिवार्यता की पूर्ति के लिए पत्रकारों की पत्नी को सदस्य बनाया गया है। पंजीयन के पूर्व भरे गए सदस्यता आवेदन पत्र में भी इसका स्पष्ट उल्लेख है। 

प्रारूप क में परिवार का व्यवसाय पत्रकारिता लिखा हुआ है, जिसकी गलत व्याख्या कर विघ्नसंतोषी लोग उपपंजीयक और जनसामान्य को दिग्भ्रमित कर संस्था और प्रतिष्ठित पत्रकार परिवारों को बदनाम करने पर आमादा हैं। ऐसा कृत्य करने वालों के खिलाफ दंडात्मक कार्यवाही के लिए पृथक से न्यायालय में मुकदमा दर्ज कराई जाएगी।

दबावपूर्वक बनाया मिथ्या जांच रिपोर्ट

आनंदराम पत्रकारश्री, अध्यक्ष


अध्यक्ष आनंदराम पत्रकारश्री ने पुख्ता सूत्रों के हवाले से बताया है कि शिकायत जांच के लिए नियुक्त सहकारिता विस्तार अधिकारी जिला मुख्यालय से नदारद रहते हैं। राजधानी रायपुर से कभी कभार ही महासमुन्द आते हैं। साथ ही महासमुन्द ब्लॉक के अनेक सहकारी समितियों के प्राधिकृत अधिकारी के प्रभार में हैं। जहां की वित्तीय गड़बड़ियों को उजागर करने की धमकी देकर कतिपय इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के तथाकथित पत्रकारों ने मनगढ़ंत जांच प्रतिवेदन जांच अधिकारी से प्रस्तुत कराया है। जिसकी निष्पक्षता सवालों के घेरे में है।

ये हैं ज्वलंत सवाल

1. कार्यक्षेत्र का चिन्हांकन प्रस्तावित भूखण्ड मचेवा को केंद्रित कर किया गया है। अर्थात समिति का कार्यक्षेत्र ग्राम पंचायत मचेवा तक सीमित है। प्रवर्तक सदस्य वहीं के निवासी हों, इसकी बाध्यता नहीं है। यदि ऐसा होता तो तत्कालीन उप पंजीयक पंजीयन ही नहीं कर सकते थे। जैसे त्रिमूर्ति गृह निर्माण सहकारी समिति महासमुन्द का कार्यक्षेत्र महासमुन्द है। तब दूसरे क्षेत्र/ महासमुन्द से बाहर के लोग यहां सदस्य कैसे बने हैं ?

2. कॉलोनी बसने पर प्रवर्तक सदस्य स्वमेव कार्यक्षेत्र के स्वाभाविक निवासी हो जाते हैं। किसी भी गृह निर्माण सहकारी समिति के प्रवर्तक सदस्य उस क्षेत्र के निवासी भला कैसे हो सकते हैं, यह तो अव्यवहारिक उपविधि है ?

3. यदि मिथ्या शिकायत को थोड़ी देर के लिए सही भी मान लिया जाए तो तत्कालीन संगठक और उप पंजीयक क्या निरक्षर थे, जिन्होंने विधि विरूद्ध कथित तौर पर समिति का पंजीयन कर दिया ?

4. यदि थोड़ी देर के लिए यह भी मान लिया जाए कि कथित तौर पर गलत जानकारी दी गई है, जिस पर पत्रकार गृह निर्माण समिति का पंजीयन हुआ। तब भी यह ज्वलंत सवाल है कि जिस अधिकारी ने निर्वाचन संपन्न कराया है, वही अधिकारी कुछ खुरापाती पत्रकारों के दबाव में जांच अधिकारी की हैसियत से पंजीयन में गड़बड़ी बता रहे हैं। तब उन्होंने कथित तौर पर गलत ढंग से पंजीकृत समिति का पंजीयन पश्चात प्रथम निर्वाचन क्या आंखें बंद करके करा दिया ? तब उन्हें नियम का ज्ञान नहीं था ?

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