Media24Media.com: नृत्य महोत्सव

Responsive Ad Slot


 

Showing posts with label नृत्य महोत्सव. Show all posts
Showing posts with label नृत्य महोत्सव. Show all posts

जनजातीय गौरव दिवस एवं अंतर्राज्यीय आदिवासी लोक नृत्य महोत्सव-2024

No comments Document Thumbnail

रायपुर। राजधानी रायपुर के साइंस कॉलेज मैदान में दो दिवसीय जनजातीय गौरव दिवस एवं अंतर्राज्यीय आदिवासी लोक नृत्य महोत्सव का शुभारंभ हुआ। महोत्सव में विभिन्न राज्यों से आए लोक नर्तक दलों ने अपनी-अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों का मन मोह लिया। इस अवसर पर सिक्किम, गुजरात, अरुणाचल प्रदेश, मध्यप्रदेश, जम्मू कश्मीर, छत्तीसगढ़, नागालैण्ड, उत्तरांचल, तेलंगाना, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, दमन दीव, गुजरात और राजस्थान के जनजातीय समूह ने पारंपरिक लोकनृत्यों की प्रस्तुति दी।

लोक नृत्य महोत्सव में पहली सांस्कृतिक प्रस्तुति छत्तीसगढ़ के माड़िया जनजाति ने गौर माड़िया नृत्य के माध्यम से दी। गौर माड़िया नृत्य छत्तीसगढ़ राज्य के बस्तर संभाग में गौर माड़िया जनजाति द्वारा किया जाता है। इस जनजाति का यह नृत्य बहुत ही हर्षाेल्लास से परिपूर्ण, सजीव एवं सशक्त होता है। सिक्किम के लिम्बू जनजाति समुदाय के लोक नर्तक दल ने प्रकृति पूजा, फसल और प्राणियों के संरक्षण में किए जाने वाला नृत्य चासोक तांगनाम नृत्य प्रस्तुत किया। गुजरात से आए लोकनर्तक दल ने सिद्दी गोमा नृत्य और राठवा नृत्य की प्रस्तुति दी। अरुणाचल प्रदेश से आए नर्तक समूह ने गेह पदम ए ना-न्यी की प्रस्तुति दी।


इसके उपरांत मध्यप्रदेश के डिंडौरी से आए गोंड जनजाति समूह ने सैला-रीना नृत्य की प्रस्तुति से दर्शकों का मन मोह लिया। सैला-रीना नृत्य एवं गीत बहु जनजातीय नृत्य है। जम्मू कश्मीर के गुज्जर जनजातीय समुदाय के नर्तक दल ने मनमोहक गोजरी नृत्य की प्रस्तुति से खूब तालियां बंटोरी। जनजातीय गौरव दिवस एवं अंतर्राज्यीय आदिवासी लोक नृत्य महोत्सव के पहले दिन उत्तराखंड के जनजातीय समुदाय द्वारा दिया बाती नृत्य, तेलंगाना के द्वारा मथुरी नृत्य, उत्तर प्रदेश के द्वारा कर्मा नृत्य, कर्नाटक के द्वारा सुगाली नृत्य , आंध्र प्रदेश के द्वारा ढीमसा नृत्य, दमन दीव द्वारा तारपा नृत्य तथा राजस्थान के जनजातीय कलाकारों द्वारा चकरी नृत्य की प्रस्तुति दी गई।इसके साथ ही छत्तीसगढ़ के सभी जिलों के जनजातीय कलाकारों द्वारा अलग-अलग तीज त्यौहारों के लोक नृत्यों की प्रस्तुति दी गई।

साइंस कॉलेज मैदान में आयोजित जनजातीय गौरव दिवस एवं अंतर्राज्यीय आदिवासी लोक नृत्य महोत्सव के पहले दिन कलाकारों के साथ ही उपस्थित दर्शकों में भी जबरदस्त उत्साह का माहौल था।दर्शकों ने विभिन्न प्रदेशों से आए जनजातीय कलाकारों के नृत्य पर तालियां बजाकर उनका उत्साहवर्धन किया।

छत्तीसगढ़ में पहली बार ‘राष्ट्रीय रामायण महोत्सव’ का आयोजन

No comments Document Thumbnail

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की विशेष पहल पर राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव की तर्ज पर रायगढ़ में आगामी माह के 1 जून से 3 जून तक तीन दिवसीय भव्य राष्ट्रीय रामायण महोत्सव का आयोजन होने जा रहा है। संस्कृति विभाग द्वारा इस आयोजन जोर-शोर से तैयारियां की जा रही है। आदिवासी नृत्य महोत्सव की तरह ही देश के विभिन्न राज्यों सहित विदेशी कलाकारों को आमंत्रित किया जा रहा है। जल्द ही छत्तीसगढ़ की धरा पर देश-विदेश के कलाकारों द्वारा रामायण की अनूठी प्रस्तुति देखने को मिलेगी। 

             

छत्तीसगढ़ से भगवान राम का गहरा रिश्ता है। मान्यता है कि वनवास के दौरान प्रभु राम दंडकारण्य से होकर गुजरे थे और छत्तीसगढ़ के वनों का हिस्सा ही दंडक अरण्य का भाग था इस बात को दृष्टिगत रखते हुए आयोजन में अरण्य कांड के प्रसंगों पर विशेष प्रस्तुतियाँ होंगी। संस्कृति विभाग के अधिकारियों ने बताया कि रामायण महोत्सव में देश के विभिन्न राज्यों से आने वाले मानस मंडली के कलाकार दोपहर 2 बजे से शाम 6 बजे तक और विदेशों से आने वाले मानस मंडली के द्वारा रात्रि 8 बजे से रात्रि 10 बजे तक प्रस्तुति दी जाएगी। इस भव्य आयोजन में अरण्यकांड पर केंद्रित प्रसंगों पर विभिन्न राज्यों से आए मानस दलों के साथ ही विदेशी दलों के द्वारा रामायण की प्रस्तुति की जाएगी।

राष्ट्रीय रामायण महोत्सव में सामूहिक हनुमान चालीसा एवं भव्य केलो आरती का आयोजन भी किया जाएगा, जिसमें हजारों की संख्या में दीपदान किया जाएगा। संस्कृति विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में पहली बार संस्कृति विभाग द्वारा राष्ट्रीय रामायण महोत्सव का भव्य आयोजन रायगढ़ के राम लीला मैदान में किया जाएगा। इस महोत्सव में शामिल होने वाली मानस मंडलियों के पुरस्कृत किया जाएगा। जिसमें प्रथम पुरस्कार 5 लाख रूपए, द्वितीय पुरस्कार 3 लाख रूपए और तृतीय पुरस्कार की राशि 2 लाख रूपए तय की गई है।

राज्य सरकार द्वारा राष्ट्रीय स्तर के इस आयोजन से प्रदेश की संस्कृति को संजोने की दिशा में एक अनोखी पहल होगी।उल्लेखनीय है कि रामायण की कथा अनेक भाषाओं में लिखी गई है और अनेक देशों में इनका मंचन होता है। इनकी सुंदर प्रस्तुति का मंच रायगढ़ में रामलीला मैदान बनेगा। हमारे देश में रामलीला की अनवरत परंपरा रही है। जब रामकथा को महोत्सव के माध्यम से प्रस्तुत किया जाएगा, तो बड़ी संख्या में लोग राम कथा के माध्यम से उनके आदर्शों की शिक्षा ग्रहण कर सकेंगे।

छत्तीसगढ़ में तुलसीदास जी का रामचरित मानस जन-जन में व्याप्त है। अब रामायण महोत्सव के माध्यम से वाल्मीकि से लेकर भवभूति तक भगवान राम के आदर्शों की झलक देखने का अवसर दर्शकों को मिल सकेगा। रामायण का विस्तार कम्बन के तमिल रामायण से लेकर कृतिवास के बंगला रामायण तक है। इसके साथ ही दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों में भी इसके कई रूप प्रचलित है। रामायण महोत्सव के माध्यम से श्रीराम के चरित्र के इन सुंदर रूपों की झलक दर्शकों को मिल सकेगी।

 

विशेष-लेख : संगीत, नृत्य की कोई भाषा नहीं होती

No comments Document Thumbnail

रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्योत्सव के अवसर पर आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव कल की ढलती हुई शाम के साथ ही समाप्त हो चुका है। इस वर्ष जिन 10 देशों के लोक नर्तक दल इस राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव में अपने नृत्य की छटा बिखेरने आए थे उनमें मोजांबिक, टोगो, इजिप्ट, मंगोलिया, इंडोनेशिया, रूस, न्यूजीलैंड, सर्बिया और मालदीव जैसे देश प्रमुख हैं।



दुनिया के इन 10 देशों से आए हुए लोक नर्तकों ने छत्तीसगढ़ की जनता को अपने लोक नृत्यों से अभिभूत कर दिया। लेकिन यह एकतरफा ही नहीं हुआ वे भी छत्तीसगढ़ वासियों से कम अभिभूत होकर नहीं गए हैं और इसमें भाषा किसी तरह की दीवार या बाधा साबित नहीं हुई। क्योंकि नृत्य, संगीत की कोई भाषा नहीं होती इसे केवल महसूस किया जाता है।


भारत वर्ष एक विशाल और विविधताओं से भरा देश है। यहां हर प्रदेश की अपनी एक अलग लोक संस्कृति है। इन्हीं लोक संस्कृति से एक महान भारतीय संस्कृति बनती है। इस बार राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव और राज्योत्सव में देश के 28 राज्यों के लोक नर्तकों ने अपनी लोक नृत्यों के प्रदर्शन से साइंस कॉलेज मैदान में जो खुशबू बिखेरी है और जो जादू जगाया है उस खुशबू और जादू को हम छत्तीसगढ़वासी बहुत दिनों तक अपने दिलों में महसूस करते रहेंगे।



राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव के समापन की बेला में हमारे छत्तीसगढ़ राज्य के मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने जो कहा है वह भी अपने आप में कोई कम महत्वपूर्ण नहीं है। आदिम संस्कृति सभी को जोड़ने का कार्य करती है। इसे सहेजकर और इसकी खूबसूरती को बड़े फलक पर दिखाने के उद्देश्य से हमने राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव का आयोजन किया है। मुझे इस बात कि खुशी है कि इस आयोजन में बहुत बड़ी संख्या में लोगों ने भागीदारी की है। आगे मुख्यमंत्री ने यह भी कहा है कि इस आयोजन के माध्यम से लोगों ने जाना है कि हमारी आदिवासी संस्कृति कितनी समृद्ध हैं।



इनके नृत्यों के माध्यम से प्रकृति और लोकजीवन को सहेजने के सुंदर मूल्य जो सीखने को मिलते हैं वो सीख हमारे लिए अमूल्य है। इस अवसर पर झारखंड के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने जो कहा है वह भी बेहद महत्वपूर्ण है। आदिवासी नृत्य महोत्सव के जरिए यह संदेश देने का भी सफल प्रयास किया गया है कि जब तक सभी वर्गों का विकास नहीं होता तब तक देश का सर्वांगीण विकास नहीं हो सकता।

आज ये सभी नर्तक दल अपने-अपने देशों की ओर उड़ चले हैं। भारत के विभिन्न प्रांतों से आए हुए आदिवासी नर्तक दल भी अपने-अपने प्रदेशों की ओर लौट रहे हैं। ये सारे आदिवासी नर्तक दल अपने नृत्य की सोंधी खुशबू हम सब छत्तीसगढ़वासियों  के दिलों में छोड़ गए हैं जो आने वाले कई दिनों तक हमारे भीतर महकते रहेंगे।

 

राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव में आए विदेशी मेहमानों का लौटना शुरू

No comments Document Thumbnail

रायपुर। राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव के समापन के बाद विदेशी मेहमानों का अपने देश लौटने का सिलसिला प्रारम्भ हो गया है। मंगोलियन देश के नर्तक दल के 10 प्रतिभागी 'रायपुर बाय रायपुर बाय' और अपने टूटी फूटी जुबान में छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया' कहते हुए एयरपोर्ट से विदा हुए। 



उन्होंने राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव में मंगोलियन डांस ,जोरून जोरून, प्रस्तुत किया था। समूह के मुखिया इनखबोल्ड ने कहा छत्तीसगढ़ आना उनका अच्छा अनुभव रहा। मौका मिला तो दोबारा आएंगे। उन्हें पहली बार रायपुर आने का मौका मिला था वे हमेशा याद रखेंगे।

राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव का रंगारंग समापन

No comments Document Thumbnail

रायपुर। तीसरे राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव में देश-विदेश के कलाकारों ने एक साथ मंच साझा किया। तीन दिवसीय महोत्सव में बड़ी संख्या में आदिवासी कलाकारों ने अपनी कला और संस्कृति को नृत्य के माध्यम से प्रस्तुत किया। फसल कटाई की श्रेणी में प्रथम स्थान पर छत्तीसगढ़ के करमा नृत्य को, दूसरे स्थान पर ओडिशा के ढेंगसा नृत्य को और तीसरे स्थान पर हिमाचल प्रदेश के गद्दी नृत्य को पुरस्कृत किया गया। तो वहीं विवाह संस्कार एवं अन्य श्रेणी में पहला स्थान सिक्किम को, दूसरा स्थान ओडिशा को और तीसरा स्थान झारखंड को मिला। विशेष ज्यूरी सांत्वना सम्मान असम और गुजरात को मिला। 



इसके अलावा विदेश से आये कलाकारों का भी मुख्यमंत्री भूपेश बघेल एवं झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सम्मान किया। पुरुस्कार वितरण के बाद देश के साथ-साथ विदेशों से आये कलाकारों का नृत्य हुआ। आदिवासी कलाकारों ने अपनी संस्कृति और लोक नृत्य की झलक पेश की है। छत्तीसगढ़ में गुलाबी ठंड ने दस्तक दे दी है। गुलाबी ठंड के बीच राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव में आए लोग देर रात तक जमे रहे हैं। गीत, संगीत और नृत्य ने अतिथियों को कार्यक्रम में डटे रहने के लिए मजबूर किया। आदिवासी कलाकारों ने नृत्य के जरिए पूरे कार्यक्रम में समां बांध दिया। 

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कार्यक्रम का लुत्फ उठाया है। इस दौरान देश-विदेश से आए आदिवासी कलाकारों ने एक से बढ़कर एक प्रस्तुति दी है। रसियन दल ने वरेन्का नृत्य के साथ शानदार शुरुआत की, इस नृत्य के जरिए रूसी संस्कृति को प्रस्तुत किया गया। रशियन कलाकारों ने गालिया और कोसेंग सूट नृत्य की प्रस्तुति दी। कोसेंग नृत्य विजय के बाद अपनी परंपरा और शौर्य को दर्शाने के लिए किया जाता है। रशियन कलाकारों ने प्रेम, संगीत, परिधान और परंपरा चारो एक ही डांस में और शारीरिक संतुलन का अद्भूत प्रदर्शन किए। आदिवासी नृत्य महोत्सव में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले सिक्किम के कलाकारों द्वारा तमांग सेलो नृत्य की शानदार प्रस्तुति दी गयी। पारंपरिक अवसर और अनुष्ठानों में किये जाने वाले इस नृत्य से दर्शकों में उत्साह भर दिया।

टोगो से आये कलाकारों ने पारंपरिक वाद्य यंत्रों पर अनोखी प्रस्तुति दी। फसल कटाई के अवसर पर किए जाने वाले श्रेणी में छत्तीसगढ़ के जिस नृत्य दल को करमा नृत्य को प्रथम स्थान प्राप्त हुआ उसकी प्रस्तुति देखकर दर्शको में उत्साह दिखा। फ्यूज़न डांस में देश-विदेश के कलाकारों के साथ संस्कृति मंत्री अमरजीत भगत के साथ साथ जनप्रतिनिधियों ने बस्तरिया और छत्तीसगढ़िया गाना में जमकर नाचे। राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव में करीब 4 हजार किलोमीटर दूर सर्बिया से आये  कलाकारों द्वारा प्रस्तुत नृत्य कौशल को देख दर्शक काफी उत्साहित हूये। सर्बिया के कलाकार ट्रेडिशनल डांस का प्रदर्शन किए। राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव 2022 में अंतिम प्रस्तुति के रूप में मोजांबिक के कलाकार अपनी सांस्कृतिक नृत्य की प्रस्तुति दी।

राज्योत्सव मेला अब रविवार छह नवंबर तक चलेगा

No comments Document Thumbnail

रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के साईंस कॉलेज मैदान में राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव का आज समापन समारोह आयोजित किया जा रहा है। इस समय आयोजित किए जा रहे इस समापन समारोह के मुख्य अतिथि झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल कर रहे हैं। झारखंड के मुख्यमंत्री सोरेन आज शाम रायपुर पहुंचे।



समापन समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आदिम संस्कृति सभी को जोड़ने का काम करती है और इस महोत्सव के माध्यम से देश-दुनिया ने इस बात को देखा है। इस अवसर पर राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य समारोह के पुरस्कारों की घोषणा भी की गई। फसल कटाई श्रेणी में पहला स्थान छत्तीसगढ़ के करमा नृत्य, दूसरा ओडिशा के ढेंगसा नृत्य को और तीसरा हिमाचल के गद्दी नृत्य को मिला। वहीं, विवाह संस्कार और अन्य श्रेणी में पहला स्थान सिक्किम, दूसरा स्थान ओडिशा को और तीसरा स्थान झारखंड को मिला है।

इससे पहले, आदिवासी नृत्य महोत्सव के तीसरे और अंतिम दिन आज भिलाई से आई लोकरागिनी की टीम ने छत्तीसगढ़ में प्रचलित सुआ नृत्य, रिलो नृत्य, रेला, राउत नाचा की प्रस्तुति लोकगीतों के माध्यम से दी। वहीं, बस्तर से आए लोक कलाकारों ने माड़िया और गौर नृत्य की प्रस्तुति दी। आदिवासी नृत्य महोत्सव के अंतिम दिन हरियाणा के लोक कलाकारों द्वारा प्रस्तुत घूमर नृत्य ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। वहीं, मध्यप्रदेश के कलाकारों ने भी करमा और सैताम नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी। इस बीच, राज्य शासन ने राज्योत्सव मेला और प्रदर्शनी की अवधि को तीन दिन और बढ़ा दिया है। अब राजधानी के साईंस कॉलेज मैदान में लगा राज्योत्सव मेला रविवार छह नवंबर तक चलेगा।

आदिम संस्कृति सभी को जोड़ने का कार्य करती है उसके सांस्कृतिक मूल्यों को सहेजने किया राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव का आयोजन

No comments Document Thumbnail

रायपुर। आदिम संस्कृति सभी को जोड़ने का कार्य करती है। इसे सहेज कर और इसकी खूबसूरती को बड़े फलक पर दिखाने के उद्देश्य से हमने राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव का आयोजन किया है। मुझे इस बात की खुशी है कि इस आयोजन में बहुत बड़ी संख्या में लोगों ने भागीदारी की। रात बारह बजे तक लोग इस सुंदर आयोजन को देखने बड़ी संख्या में जुटते रहे। यह बात मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव के समापन के अवसर पर कही। उन्होंने इस मौके पर अपने संदेश में कहा कि हमने देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को इस आयोजन के लिए आमंत्रित किया। साथ ही 22 देश के आदिवासी कलाकार इस आयोजन में शिरकत करने के इच्छुक थे लेकिन समय सीमा को देखते हुए हमने केवल 10 देशों को स्वीकृति दी।



इस आयोजन के माध्यम से लोगों ने जाना कि हमारी आदिवासी संस्कृति कितनी समृद्ध है। इनके नृत्यों के माध्यम से प्रकृति और लोकजीवन को सहेजने के सुंदर मूल्य जो सीखने को मिलते हैं वो सीख हमारे लिए अमूल्य है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने शिल्प कला को बढ़ावा देने के उद्देश्य से स्टाल भी लगाए। इनमें बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ जुटी, उससे पता लगता है कि हमारी आदिवासी कला को जानने के लिए लोग कितने उत्सुक हैं और यह कितनी समृद्ध लोककला है। मुख्यमंत्री ने इस मौके पर कहा कि हम 22 साल से स्थापना दिवस मना रहे हैं। अब राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव भी मना रहे हैं। इससे हमारी खुशी दोगुनी हो गई है।



मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर शिरकत करने पहुंचे झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के प्रति भी विशेष रूप से आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस महोत्सव के आयोजन के साथ ही हम प्रदेश में छत्तीसगढ़िया ओलंपिक का आयोजन भी कर रहे हैं। इसमें 20 लाख प्रतिभागियों ने अब तक हिस्सा लिया है। इसमें बच्चे और बुजुर्ग सब शामिल हैं। 70 साल की बुजुर्ग महिलाएं भी फुगड़ी खेल रही हैं। सबको बचपन की यादें ताजा हो गई हैं। इन खेलों से मोबाइल से ध्यान हटा, यह भी बड़ी बात है। इस मौके पर अपने संबोधन में झारखण्ड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि मुख्यमंत्री बघेल छत्तीसगढ़ में ऐसे वर्ग को आगे बढ़ा रहे हैं जिनका सदियों से शोषण हुआ है।



उनकी सरकार आदिवासी, दलित और पिछड़े लोगों को आगे बढ़ाने के साथ ही सबके विकास के लिए कार्य कर रही है। मुझे इस मंच में आकर गौरव महसूस हो रहा है। इस मौके पर गृह एवं पर्यटन मंत्री ताम्रध्वज साहू ने कहा कि राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव के माध्यम से हमारी आदिवासी संस्कृति को सहेजने का बड़ा काम राज्य शासन द्वारा हुआ है। संस्कृति मंत्री अमरजीत भगत ने इस मौके पर कहा कि लोगों ने महोत्सव का भरपूर आनंद लिया और इससे हमारी समृद्ध आदिवासी संस्कृति की झलक एक बड़े मंच में दिख रही है। इस मौके पर झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के साथ विभागीय प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया।



समापन समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम, उद्योग मंत्री कवासी लखमा, नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री डॉ. शिवकुमार डहरिया, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अनिला भेंड़िया, राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री गुरू रूद्रकुमार, संसदीय सचिव कुंवरसिंह निषाद, विधायक धनेन्द्र साहू, छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के अध्यक्ष अटल श्रीवास्तव, मुख्य सचिव अमिताभ जैन, पुलिस महानिदेशक अशोक जुनेजा, पीसीसीएफ संजय शुक्ला, पर्यटन विभाग के सचिव अन्बलगन पी. एवं संचालक संस्कृति विवेक आचार्य मौजूद थे।



फसल कटाई की श्रेणी में पहला स्थान छत्तीसगढ़ के करमा नृत्य को- राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव के पुरस्कार भी इस अवसर पर दिये गये। फसल कटाई की श्रेणी में प्रथम स्थान पर छत्तीसगढ़ के करमा नृत्य को, दूसरे स्थान पर ओडिशा के ढेंगसा नृत्य को और तीसरे स्थान पर हिमाचल प्रदेश के गद्दी नृत्य को पुरस्कृत  किया गया।

विवाह संस्कार में पहला स्थान सिक्किम को- विवाह संस्कार एवं अन्य श्रेणी में पहला स्थान सिक्किम को, दूसरा स्थान ओडिशा को और तीसरा स्थान झारखंड को मिला। विशेष ज्यूरी सांत्वना सम्मान असम को और गुजरात को मिला। इसके अलावा विदेश से आये कलाकारों का भी मुख्यमंत्री भूपेश बघेल एवं झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सम्मान किया।

कृषि विभाग की प्रदर्शनी को पहला स्थान- इस मौके पर विभिन्न विभागों की प्रदर्शनी भी पुरस्कृत की गई। पहला स्थान कृषि विभाग को, दूसरा स्थान ऊर्जा विभाग को और तीसरा स्थान वन विभाग को मिला। सार्वजनिक उपक्रमों की श्रेणी में पहला पुरस्कार बाल्को, दूसरा पुरस्कार एनएमडीसी तथा तीसरा पुरस्कार एनटीपीसी को मिला।

 


राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव विशेष आकर्षण का केन्द्र

No comments Document Thumbnail

रायपुर। राज्य स्थापना दिवस पर आयोजित राज्योत्सव के साथ ही इन दिनों राजधानी में राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव भी विशेष आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है। इसमें देश के विभिन्न राज्यों के आदिवासी कलाकारों के साथ विदेशों के भी आदिवासी कलाकार रंगारंग नृत्य प्रस्तुत कर रहे हैं। इन नृत्यों में विभिन्न देशों और प्रदेशों की संस्कृति की झलक भी दिखाई दे रही है। इसी कड़ी में आज दूसरे दिन सिक्किम के आदिवासी कलाकारों ने तमांगशेलो नृत्य प्रस्तुत किया। यह नृत्य सिक्किम में नये साल के आगमन के अवसर पर विशेष रूप से किया जाता है। आज की एक अन्य प्रस्तुति में तेलंगाना के कलाकारों ने लंबाडी नृत्य पेश किया। इसके अलावा असम,


 

महाराष्ट्र, मेघालय, त्रिपुरा और मणिपुर के कलाकारों ने भी आकर्षक शैली में अपनी कला का प्रदर्शन किया। वहीं, झारखंड के आदिवासी कलाकारों ने आज संथाली नृत्य की शानदार प्रस्तुति दी। यह नृत्य देवी आराधना से जुड़ा हुआ है। इससे पहले, कल न्यूजीलैंड और मिस्र के कलाकारों ने पारंपरिक नृत्य से दर्शकों की वाहवाही लूटी। इन कलाकारों ने छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया का नारा लगाकर दर्शकों का भरपूर ध्यान खींचा। इस महोत्सव के अंतिम दिन कल देश के अन्य राज्यों के साथ ही आमंत्रित विदेशी कलाकारों द्वारा पारंपरिक आदिवासी नृत्य प्रस्तुत किए जाएंगे।


भाई के दीर्घायु के लिए दालखाई नृत्य के माध्यम से होती है वनदेवी की प्रार्थना

No comments Document Thumbnail

रायपुर। राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव में ओडिशा के दालखाई नृत्य के कलाकार अपनी खास वेशभूषा में आये। सुंदर गोदने से सुसज्जित लोक कलाकारों के नृत्य प्रदर्शन को देखकर लोग चकित रह गये। संबलपुरी परिधान में इन कलाकारों ने अपना पारंपरिक लोकनृत्य प्रस्तुत किया। यह अनोखा लोक नृत्य भाई के दीर्घायु कामना के लिए बहनों द्वारा किया जाता है।



बहनें मानती हैं कि वन देवी उनके भाई को आरोग्य और दीर्घायु होने का वर दे सकती हैं। उनकी प्रार्थना के लिए परंपरागत तरीके से श्रृंगार करती हैं और वन देवी से वर मांगती है। वनदेवी की पूजा के साथ ही वे पेड़ और पत्तियों की पूजा भी करती है। एक तरह से यह नृत्य प्रकृति से जनजातीय समाज के सुंदर संबंध का प्रतीक भी है।



नृत्य की सबसे बड़ी खासियत इसका दुनदुनी वाद्य यंत्र है जिसकी सुमधुर धुन से नृत्य खास तौर पर आकर्षित हो जाता है। संबलपुरी साड़ियां और वस्त्रों के चटख रंग नृत्य की सुंदरता में चार चांद लगा देते हैं। दालखाई नृत्य के कलाकारों के गोदना भी खास रोचक रहे। जैसे जनजातीय कला में सुंदर चित्रों को सजाने में प्रतीकों का उपयोग होता है वैसे ही प्रतीक गोदना में दिखे। महोत्सव के दर्शकों के लिए दालखाई नृत्य देखना अद्भुत अनुभव था।



झूम खेती की तैयारी का दृश्य दिखाया मणिपुर के कलाकारों ने खरिमखरा नृत्य से

No comments Document Thumbnail

रायपुर। जनजातीय क्षेत्रों में झूम खेती होती थी। झाड़ियों को आग लगाकर साफ किया जाता था और खेती की जमीन तैयार होती थी। यह पूरी प्रक्रिया श्रमसाध्य थी लेकिन उत्सव का प्रतीक भी थी क्योंकि खेती ही लाइवलीहुड का अवसर प्रदान करती थी। राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव ने मणिपुर के कलाकारों ने खरिमखरा नृत्य के माध्यम से झूम खेती की तैयारी को सजीव किया। इसे डांस आफ लाइवलीहुड भी कहा जाता है। नृत्य में दिखाया गया कि कैसे खेती के लिए उपयोगी जमीन चिन्हांकित होती थी,



फिर इसे तैयार किया जाता था और बीज रोपा जाता था। इस पूरी प्रक्रिया को खरिमखरा नामक सुंदर नृत्य से मणिपुर के लोककलाकारों ने प्रस्तुत किया। यह खुखरई जिले के निवासी हैं। नृत्य की खास विशेषता है कि इसमें घुटने में पहने हुए आभूषणों से तालबद्ध धुन निकलती है। 



स्टेप्स जितने सटीक बैठते हैं आभूषण से निकलने वाली धुन भी उतनी ही सटीक होती है। खरिमखरा नृत्य कृषि संस्कृति का उत्सव है और अपने श्रम के माध्यम से जमीन तैयार करने का अद्भुत उत्साह भी इससे झलकता है जो नृत्य रूप में और भी आकर्षक हो जाता है।


पहली बार आदिवासियों को मिला इतना बड़ा मंच : तेलंगाना के आदिवासी कलाकार

No comments Document Thumbnail

रायपुर। राज्योत्सव के दूसरे दिन राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव में पहुंचे कलाकारों में शामिल हुए तेलंगाना के कलाकारों ने लंबाड़ी नृत्य प्रस्तुत किया। लंबाड़ी तेलंगाना के नालगोंडा जिले में किया जाता है। लंबाड़ी नृत्य नालगोंडा के बंजारा समुदायों द्वारा किया जाता है। इस नृत्य के माध्यम से बंजारा लोग अपनी जीवनशैली का प्रदर्शन करते हैं।



लंबाड़ी नृत्य को करने वाली महिला कलाकार तेलंगाना का प्रसिद्ध घाघरा-चोली पहनती हैं। पारंपरिक रूप से ये महिलाएं पैरों में गज्जल यानी कि घुंघरू, गले में कंटल (माला) और हाथों में सफेद रंग का चूड़ी पहनती हैं। ये चूड़ी हाथी दांत के बने होते हैं।  इन्हें गाजरू कहा जाता है। बतादें अपनी बारी का इंतजार कर रहे तेलंगाना के इन कलाकारों ने छत्तीसगढ़ में आयोजित आदिवासी नृत्य महोत्सव से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। तेलंगाना के नालागोंडा जिले से पहुंचे इन कलाकारों के टीम लीडर सी एच नागार्जुन ने कहा कि पहली बार आदिवासियों को इतना बड़ा मंच देना सम्मान की बात है

मुझे छत्तीसगढ़ आकर खुशी हो रही है। भारत के दूसरे राज्यों को भी ऐसा कुछ करना चाहिए।उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में आकर उन्हें अच्छा लग रहा है। ऐसा पहला मौका है जब उन्हें दूसरे राज्यों और देश के कलाकारों के कला के बारे में जानने का अवसर मिल रहा है। आदिवासी कलाकारों को मौका देने का यह एक अच्छा माध्यम है। बहुत कम होता है कि आदिवासियों को मौका मिले। वेस्टर्न कल्चर की वजह से आदिवासी कला संस्कृति सिमट रही थी। जिनके संरक्षण का काम छत्तीसगढ़ सरकार कर रही है।” छत्तीसगढ़ सरकार का धन्यवाद देते हुए नागार्जुन ने कहा कि हर ग्रामीण, हर आदिवासी को मौका मिलना चाहिए।

राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके के मुख्य आतिथ्य में 01 नवम्बर को शाम 7 बजे आयोजित होगा राज्य अलंकरण समारोह

No comments Document Thumbnail

रायपुर। राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके 01 नवम्बर को शाम 7 बजे राजधानी रायपुर के साईंस कॉलेज मैदान में आयोजित राज्य अलंकरण समारोह एवं राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव की मुख्य अतिथि होंगी। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल इस कार्यक्रम की अध्यक्षता करेंगे। राज्य अलंकरण समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू, स्वास्थ्य मंत्री  टी.एस.सिंहदेव, कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे, विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष नारायण चंदेल, स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम, वन एवं परिवहन मंत्री मोहम्मद अकबर



उद्योग मंत्री कवासी लखमा, नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री डॉ.शिवकुमार डहरिया, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अनिला भेंड़िया, राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री गुरू रूद्रकुमार, उच्च शिक्षा मंत्री उमेश पटेल, संस्कृति मंत्री अमरजीत भगत, लोकसभा सांसद सुनील सोनी, दीपक बैज, श्रीमती ज्योत्सना महंत और राज्यसभा सांसद श्रीमती फूलोदेवी नेताम, संसदीय सचिव चिंतामणि महाराज, विकास उपाध्याय, कुंवर सिंह निषाद और द्वारिकाधीश यादव, विधायक सत्यनारायण शर्मा, बृजमोहन अग्रवाल, कुलदीप जुनेजा और श्रीमती अनिता योगेन्द्र शर्मा सहित सांसद, विधायक, संसदीय सचिव, निगम मंडल, आयोग, जिला पंचायत के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष एवं महापौर उपस्थित रहेंगे।

टोंगो और मोजांबिक के नर्तक दल राजधानी रायपुर पहुंचे

No comments Document Thumbnail

रायपुर। अफ्रीका के टोंगो और मोजांबिक से नर्तक दल राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव में शामिल होने आज राजधानी रायपुर पहुंचे। विभागीय अधिकारी कर्मचारियों द्वारा माना विमानतल पर उनका आत्मीय स्वागत किया गया। नर्तक दलों में गजब का उत्साह देखने को मिल। उन्होंने छत्तीसगढ़िया सबले बढ़ियानारे का पूरे जोश के साथ उद्घोष किया।



उल्लेखनीय है कि टोंगो से आए नृतक दल में कुल 10 सदस्य शामिल हैं, जिसमें 6 पुरुष और 4 महिला हैं। टीम लीडर अजवोन बोचोउ अटा ने बताया कि उनके देश की सांस्कृतिक झलक छत्तीसगढ़ की धरा पर बिखरेगी तथा उन्हें भी छत्तीसगढ़ी संस्कृति से रूबरू होने का मौका मिलेगा। साथ ही मोजांबिक से आए नर्तक दल के टीम लीडर डेविड वेसलीना बोसले ने बताया कि उनके साथ भी कुल 10 सदस्य हैं जिसमें 8 पुरुष और 2 महिला सदस्य शामिल हैं।



उन्होंने छत्तीसगढ़ सरकार का आभार प्रकट करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने हमें इस कार्यक्रम में सम्मिलित होने का मौका दिया है, यह हमारे जीवन का बेहद ही सुखद पल है। उल्लेखनीय है कि राजधानी रायपुर के साइंस कॉलेज मैदान में 1 नवंबर से 3 नवंबर तक राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव एवं राज्य उत्सव का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें देश के विभिन्न राज्यों के साथ साथ 9 विदेशी टीम भी शिरकत कर रही हैं।


राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव और राज्योत्सव में दिखेगी छत्तीसगढ़ की विकास गाथा

No comments Document Thumbnail

रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के साइंस कॉलेज मैदान में 01 से 03 नवंबर तक राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव और राज्योत्सव का आयोजन किया जा रहा है। इस दौरान छत्तीसगढ़ सहित देश-विदेश की विभिन्न जनजातियों की समृद्ध संस्कृति, परंपरा और लोककलाओं की झलक लोगों को देखने को मिलेगी। छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव का यह तीसरा आयोजन है। आयोजन के दौरान छत्तीसगढ़ सरकार के विभिन्न विभागों की लोककल्याणकारी योजनाओं पर आधारित विकास प्रदर्शनी के माध्यम से पिछले पौने चार वर्षों में छत्तीसगढ़ की विकास गाथा भी देखने को मिलेगी।



यहां कार्यक्रम स्थल के सेंट्रल एरिया में जनजातीय लोककला और शिल्प पर केन्द्रित शिल्पग्राम बनाया जाएगा। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ी पकवानों समेत अनेक तरह के लजीज व्यंजनों से सजा फूड जोन भी होगा। साइंस कॉलेज स्थित आयोजन स्थल पर थीम हैंगर में विभिन्न उद्योगों और सार्वजनिक उपक्रमों के स्टॉल लगाए जाएंगे। यहां व्यावसायिक स्टॉल और किताब मेला भी लगाया जाएगा और स्वास्थ्य सहायता केन्द्र भी स्थापित किया जाएगा। साइंस कॉलेज मैदान पर राज्योत्सव के दौरान विकास प्रदर्शनी में राज्य शासन के 21 विभागों के स्टॉल लगेंगे। इनमें कृषि विभाग-मछलीपालन, पशुपालन, उद्यानिकी विभाग एवं अन्य संबंधित घटक,

ऊर्जा विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग, जनसम्पर्क विभाग, संस्कृति एवं पर्यटन विभाग, आदिम जाति, अनुसूचित जाति एवं विकास तथा पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक विकास विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, समाज कल्याण विभाग, शिक्षा विभाग, जल संसाधन विभाग, श्रम विभाग, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, आवास एवं पर्यावरण विभाग, लोक निर्माण विभाग, खनिज संसाधन विभाग, खेल एवं युवा कल्याण विभाग, चिप्स, वन विभाग,



परिवहन विभाग के स्टॉलों में विभागीय योजनाओं का विभिन्न मॉडलों, चित्रों, आडियो-वीडियो लघु फिल्म के माध्यम से जीवंत प्रदर्शन किया जाएगा। लोगों को पाम्पलेट और ब्रोशर के द्वारा विभागीय योजनाओं और उपलब्धियों की जानकारी दी जाएगी। साइंस कॉलेज मैदान के सेेंट्रल एरिया में बनाए जाने वाले शिल्पग्राम में 40 स्टॉल लगाए जाएंगे। जहां प्रदेश के प्रसिद्ध शिल्पकारों, कलाकारों, बुनकरों, स्व-सहायता समूहों द्वारा निर्मित कलाकृतियों का अनूठा संग्रह देखने को मिलेगा।

इनमें घरेलू उपयोग के सामान, कलात्मक सजावटी वस्तुएं, बेलमेटल, लौहशिल्प, काष्ठकला, बांसकला, माटी शिल्प से निर्मित कलाकृतियों प्रदर्शन और विक्रय के लिए उपलब्ध रहेंगी। फूड जोन में 24 स्टॉल लगाए जाएंगे, जहां छत्तीसगढ़ी व्यंजनों के साथ लोग अन्य स्वादिष्ट व्यंजनों का भी स्वाद ले सकेंगे। व्यावसायिक स्टॉलों के लिए निर्धारित स्थान पर 40 स्टॉल लगाए जाएंगे। इसी तरह थीम हैंगर में बाल्को, बीएसपी, एसईसीएल, एनटीपीसी, एनएमडीसी सहित विभिन्न उद्योगों के स्टॉल लगाए जाएंगे।

विदेशी मेहमान छतीसगढ़ आने के लिए अपने देशों से हुए रवाना

No comments Document Thumbnail
रायपुर। छत्तीसगढ़ में आयोजित तृतीय राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव में शामिल होने के लिए विदेशी राज्यों के मेहमान छत्तीसगढ़ आने के लिए अपने देशों से रवाना हो चुके हैं। ये विदेशी मेहमान अपने देशों के आदिम संस्कृति को नृत्य के माध्यम से प्रस्तुत करेंगे।



सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों समेत 9 देशों के कलाकार शामिल महोत्सव में होंगे शामिल

1 नवंबर से 3 नवंबर तक राजधानी रायपुर के साइंस कालेज ग्राउंड में आयोजित राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव में सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों समेत मोजांबिक, मंगोलिया, टोंगो, रशिया, इंडोनेशिया, मालदीव, सर्बिया, न्यूजीलैंड और इजिप्ट के जनजातीय कलाकार शामिल होंगे।



राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव में बिखेंरेगे अपने नृत्य की छटा

नेशनल ट्राइबल डांस फेस्टिवल में दो कैटेगिरी में प्रतियोगिताएं होंगी। विजेताओं को कुल 20 लाख रुपए के पुरस्कारों का वितरण किया जाएगा। प्रथम स्थान के लिए 05 लाख रुपए, द्वितीय स्थान के लिए 03 लाख रुपए और तृतीय स्थान के लिए 02 लाख रुपए के पुरस्कार दिए जाएंगे। 01 नवंबर को सुबह नृत्य महोत्सव का शुभारंभ होगा और शाम को राज्योत्सव के अवसर पर राज्य अलंकरण दिया जाएगा।

मेजबानी के लिए छत्तीसगढ़ पूरी तरह है तैयार

03 नवंबर को नेशनल ट्राइबल डांस फेस्टिवल का समापन होगा। इस महोत्सव के माध्यम से न केवल राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जनजातीय कलाकारों के बीच उनकी कलाओं की साझेदारी होगी, बल्कि वे एक-दूसरे के खान-पान, रीति-रिवाज, शिल्प-शैली को भी देख-समझ सकेंगे। महोत्सव के दौरान संगोष्ठियां भी होंगी, जिनमें जनजातीय विकास के बारे में विमर्श होगा। जाने-माने विशेषज्ञ भी इसमें शामिल होंगे।

राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव : रायपुर साइंस कॉलेज मैदान में 1 से 3 नवंबर तक

No comments Document Thumbnail

रायपुर। आधुनिकता के दौड़ से दूर जंगलों में रहने वाली जनजातियों की अपनी समृद्ध संस्कृति है। विभिन्न जनजातियों के अपने तीज-त्यौहार, लोक नृत्य व गीत भी हैं। इन आदिवासियों की कला और संस्कृति को पहचान दिलाने के लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव का आयोजन छत्तीसगढ़ राज्य के 23वें स्थापना दिवस के अवसर पर 1 से 3 नवंबर तक किया जा रहा है। राज्य में राष्ट्रीय आदिवासी महोत्सव का यह तीसरा आयोजन है। महोत्सव का आयोजन राजधानी रायपुर के साइंस कालेज मैदान में होगा।



छत्तीसगढ़ में 42 तरह की जनजातियां निवासरत्

छत्तीसगढ़ राज्य प्राकृतिक संसाधनों से सम्पन्न है। यहां का 44 प्रतिशत भू-भाग वनों से आच्छादित है एवं यहां जनजातियों की जनसंख्या राज्य की कुल जनसंख्या का 31 प्रतिशत है। छत्तीसगढ़ राज्य में 42 तरह की जनजातियां निवास करती हैं। इस महोत्सव के माध्यम से जनजाति कलाकारों को अपनी कला प्रदर्शन का अवसर मिलता है।

आपसी मेल-जोल, कला-संस्कृतियों के आदान-प्रदान के लिए महत्वपूर्ण

महोत्सव के माध्यम से राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जनजातीय कलाकारों के बीच उनकी कलाओं की साझेदारी होगी। वे एक-दूसरे के खान-पान, रीति-रिवाज, शिल्प-शैली को भी देख-समझ सकेंगे। राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव के आयोजन से आदिवासी संस्कृति एवं सभ्यता को अंतर्राष्ट्रीय पहचान मिल रही है। यह आयोजन देश और पूरी दुनिया के जनजातीय समुदायों के आपसी मेल-जोल, कला-संस्कृतियों के आदान-प्रदान के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण साबित हो रहा है।

देश विदेश के 1500 से अधिक जनजातीय कलाकार हिस्सा लेंगे

राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव के लिए देश के सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों सहित 09 देशों के 1500 आदिवासी कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करेगें। इन कलाकरों में देश के 1400 और विदेशों के 100 प्रतिभागी शामिल होंगे। आयोजन में मोजांबिक, मंगोलिया, टोंगो, रशिया, इंडोनेशिया, मालदीव, सर्बिया, न्यूजीलैंड और इजिप्ट के जनजातीय कलाकार हिस्सा लेंगे।

विदेशी जनजातियों की संस्कृति को भी जानने का मिलेगा मौका

छत्तीसगढ़ में प्रथम बार आयोजित राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव का आयोजन वर्ष 2019 में 27 से 29 दिसम्बर तक किया गया था। इस महोत्सव में कुल 1,262 कलाकारों ने भाग लिया। इनमें 06 देशों के 59 जनजतीय कलाकारों शामिल थे। इसमें भारत के विभिन्न राज्यो सहित श्रीलंका, यूगांडा, मालदीव, थाईलैंड, बंग्लादेश और बेलारूस कलाकारों ने अपने देश के संस्कृति को नृत्य के माध्यम से प्रदर्शित किया।



राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव वर्ष 2021 का आयोजन 28 अक्टूबर से 01 नवंबर तक किया था। जिसमें कुल 1,149 कलाकारों ने भाग लिया। इनमें में 07 देशों के 60 जनजातीय कलाकारों भी शामिल थे। इनमें स्वीजरलैंड, माली, नाइजीरिया, श्रीलंका, फ़िलिस्तीन, यूगांडा और उज्बेकिस्तान  के कलाकारों ने भाग लिया।

इस वर्ष राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव वर्ष 2022 का आयोजन 01 से 03 नवंबर तक होगा। इस महोत्सव में कुल 1500 जनजातीय कलाकार भाग लेंगे। इसमें 09 देशों के 100 जनजातीय कलाकार भाग लेेने पहुँचेंगे। इनमें मोजांबिक, मंगोलिया, टोंगो, रशिया, इंडोनेशिया, मालदीव, सर्बिया, न्यूजीलैंड और इजिप्ट के जनजातीय कलाकार हिस्सा लेंगे।

फसल कटाई और आदिवासी रीति-रिवाज की थीम पर होगा नृत्य महोत्सव

राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव में इस बार दो थीम रखी गई है। पहली थीम है फसल कटाई पर होने वाले आदिवासी नृत्यऔर दूसरी थीम है आदिवासी परम् पराएँ और रीति- रिवाज। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को प्रोत्साहित करने के लिए विजेताओं को पुरस्कृत किया जाएगा।

उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रतिभागियों को कुल 20 लाख रुपए का पुरस्कार

राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को प्रोत्साहित करने के लिए विजेताओं को पुरस्कृत किया जाएगा। राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव के विजेताओं को कुल 20 लाख रुपए के पुरस्कारों का वितरण किया जाएगा। प्रथम स्थान के लिए 05 लाख रुपए, द्वितीय स्थान के लिए 03 लाख रुपए और तृतीय स्थान के लिए 02 लाख रुपए के पुरस्कार दिए जाएंगे।

जनजातीय कला, संस्कृति और विरासत को सहेजने के लिए हो रहे जतन

गौरतलब है कि राज्य सरकार ने विगत् पौने चार वर्षो में छत्तीसगढ़ की लोक तथा जनजाति कला, संस्कृति और विरासत सहेजने और संवारने के लिए बहुत सारे जतन किये है। यहां के पर्यटन स्थलों, कला परपंराओं और संस्कृति के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए विशेष प्रयास किया जा रहा है। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ मंे राज्य गीत को मान्यता दी गई, इसका मानकीकरण किया गया। राज्य के लोक एवं पारंपरिक खेलों को बढ़ावा देने के लिए ग्रामीण स्तर छत्तीसगढ़िया ओलम्पिक नाम से खेलकूद आयोजन किया जा रहा है

Don't Miss
© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.